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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 December

 

विषय – सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. तलाक एवं गुजारा भत्ता हेतु एकसमान नियमों के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका

2. विजय दिवस 2020

 

सामान्य अध्ययन-II

1. अर्नब गोस्वामी पर महाराष्ट्र विधायिका के प्रस्ताव और इसका न्यायपालिका से आमना-सामना

2. एलुरु में एम्स के वैज्ञानिकों द्वारा दूध के नमूनों में सीसे की खोज

3. मानव विकास सूचकांक

4. अमेरिका की ‘करंसी मैन्युपुलटेर्स’ निगरानी सूची में भारत

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कृषि कानूनों में सरकार द्वारा वापस लिए जाने वाले प्रस्तावित विवाद निपटान प्रावधान

2. टीकाकरण में हिचकिचाहट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. CMS-01 उपग्रह

2. ‘विश्वसनीय’ दूरसंचार उपकरण कंपनियों की सूची

3. पाकिस्तान में यौन अपराधियों के रासायनिक बंघ्यीकरण की मंजूरी

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

तलाक एवं गुजारा भत्ता हेतु एकसमान नियमों के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय द्वारा सभी धर्मों के लिए तलाक, भरण-पोषण एवं गुजारा भत्ता हेतु एकसमान दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग संबधी याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी गयी है।

आवश्यकता:

उच्चतम न्यायालय में दायर की याचिका में कहा गया है, कि कुछ धर्मों में तलाक, भरण-पोषण एवं गुजारा भत्ता संबंधी क़ानून महिलाओं के साथ भेदभाव करते है और उन्हें हाशिए पर छोड़ देते हैं।

  1. धर्मों के अनुसार भिन्न होने वाले ये विसंगतियाँ समानता के अधिकार (संविधान का अनुच्छेद 14) और धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव (अनुच्छेद 15) और गरिमासे जीने का अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करती हैं।
  2. अतः, तलाक, भरण-पोषण एवं गुजारा भत्ता संबंधी कानून ‘लिंग-तटस्थ और धर्म-तटस्थ’ होने चाहिए।

भारत में ‘पर्सनल लॉ’ की स्थिति:

‘पर्सनल लॉ’ संबंधी विषय, जैसे कि विवाह, संबंध-विच्छेद (तलाक), विरासत आदि, संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं।

  • ‘हिंदू पर्सनल लॉज़’ को वैधानिक क़ानून (हिंदू विवाह अधिनियम, 1955) को लागू करके सामान्यतः धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक बनाया जा चूका है।
  • दूसरी ओर, ‘मुस्लिम पर्सनल लॉज़’ (जैसे कि, 1937 का शरीयत कानून) अभी भी अपनी विषय वस्तु और नजरिए में पारंपरिक और अपरिवर्तित हैं ।
  • इसके अलावा, ईसाई और यहूदी धर्मो में अलग-अलग ‘पर्सनल लॉज़’ द्वारा लागू होते हैं।

अनुच्छेद 142:

अनुच्छेद 142 के तहत, उच्चतम न्यायालय को पक्षकारों के मध्य ‘पूर्ण न्याय’ करने की अद्वितीय शक्ति प्रदान की गयी है, अर्थात, जब कभी स्थापित नियमों एवं कानूनों के तहत कोई समाधान नहीं निकल पाता है, तो ऐसे में अदालत, मामले से संबंधित तथ्यों के मुताबिक़ विवाद पर ‘अंतिम फैसला’ सुना सकती है।

गुजारा-भत्ता

सभी समुदायों पर लागू होने वाली दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 125 के तहत, पत्नियों, बच्चों और माता-पिता को, अपने भरण-पोषण हेतु पर्याप्त और उचित साधनों से कमा पाने में अक्षम होने पर अथवा शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम होने पर, गुजारा-भत्ता दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इस धारा के तहत, गैर-तलाकशुदा पत्नी को भी अपने पति से गुजारा-भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘समान नागरिक संहिता’ क्या है?
  2. अनुच्छेद 13, 14 और 19 के बारे में।
  3. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125
  4. अनुच्छेद 142 किससे संबंधित है?
  5. भारतीय संविधान की 7 वीं अनुसूची।

मेंस लिंक:

सभी धर्मों के लिए तलाक, भरण-पोषण एवं गुजारा भत्ता हेतु एकसमान दिशा-निर्देशों की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वतंत्रता के पश्चात् देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।

विजय दिवस 2020

संदर्भ:

वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों की जीत, जिसे ‘बांग्लादेश मुक्ति संग्राम’ के नाम से भी जाना जाता है, की स्मृति में हर साल 16 दिसंबर को भारत में विजय दिवस मनाया जाता है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध की शुरुआत 3 दिसंबर, 1971 को हुई और यह 16 दिसंबर, 1971 को समाप्त हुआ था। यह सबसे कम समय (13 दिनों) तक चलने वाली लड़ाईयों में से एक थी, किंतु इसमें होने वाले आत्मसमर्पण को विश्व इतिहास के प्रमुख आत्मसमर्पणों में से एक माना जाता है।

बांग्लादेश के निर्माण में भारत की भूमिका:

13 दिवसीय भारत-पाक युद्ध की शुरुआत पूर्वी पाकिस्तान में इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ विद्रोह छिड़ने के साथ हुई थी।

  • मार्च 1971 से पाकिस्तानी बलों द्वारा बंगाली आबादी के नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर क्रूर कार्रवाईयां की जा रही थीं, जिसका बंगाली राष्ट्रवादियों द्वारा मुकाबला किया जा रहा था।
  • तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा बांग्लादेश के निर्माण हेतु महीनों से समर्थन दिया जा रहा था, हालांकि, भारतीय सेना ने 3 दिसंबर को औपचारिक रूप से पाकिस्तान के साथ पूर्ण युद्ध छेड़ दिया।
  • शीघ्र ही, युद्ध समाप्त करने के विदेशी दबाव और नुकसान में होने वाली वृद्धि के कारण इस्लामाबाद को हार मानने पर विवश हो गया, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

मुख्य परिणाम:

  • पाकिस्तानी सेना का एकतरफा और बिना शर्त आत्मसमर्पण और बाद में पूर्वी पाकिस्तान का बांग्लादेश में विलय।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला युद्ध था जिसमें भारत द्वारा निर्णायक रूप से जीत दर्ज की गयी थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विजय दिवस के बारे में
  2. महत्व
  3. बांग्लादेश मुक्ति संग्राम
  4. ऑपरेशन ट्राइडेंट

मेंस लिंक:

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

अर्नब गोस्वामी पर महाराष्ट्र विधायिका के प्रस्ताव और इसका न्यायपालिका से आमना-सामना


संदर्भ:

न्यायपालिका की शक्तियों की सीमाओं पर सवाल उठाते हुए, महाराष्ट्र राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इन प्रस्तावों में कहा गया है कि, महाराष्ट्र विधायिका द्वारा रिपब्लिक टीवी के एडिटर-एंकर अर्नब गोस्वामी के खिलाफ लाए गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय द्वारा भेजे गए किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया जाएगा।

इससे न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण पर बहस में एक नया मोड़ आ गया है।

‘शक्तियों का पृथक्करण’ सिद्धांत

(Doctrine of Separation of Power)

  • ‘शक्तियों के पृथक्करण’ का सिद्धांत भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक भाग है, हालांकि, इसका संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है।
  • इसका तात्पर्य है, कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों, अर्थात् कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका द्वारा अलग-अलग कार्य किये जाते हैं और ये पृथक इकाईयों के रूप में कार्य करते हैं।
  • ‘शक्तियों के पृथक्करण’ सिद्धांत की एक प्रमुख विशेषता यह है, कि इसके अनुसार, राज्य के एक अंग को अन्य अंगों के कामकाज में हस्तक्षेप अथवा किसी दूसरे अंग के कार्य नहीं करने चाहिए।

महाराष्ट्र विधायिका द्वारा प्रस्ताव पारित करने का वैधानिक आधार

प्रस्ताव पारित करने के लिए संविधान के निम्नलिखित दो अनुच्छेदों का हवाला दिया गया है:

  1. संविधान का अनुच्छेद 194, जिसके तहत विधानमंडलों की शक्तियों और विशेषाधिकारों संबंधी प्रावधान किए गए हैं।
  2. अनुच्छेद 212 के अनुसार- राज्य विधान-मंडल की किसी कार्यवाही की विधिमान्यता को प्रक्रिया में किसी अभिकथित अनियमितता के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 194 और अनुच्छेद 212 के बारे में
  2. ‘शक्तियों का पृथक्करण’ सिद्धांत क्या है?
  3. सर्वोच्च न्यायालय की मूल शक्तियाँ।
  4. उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय का अपीलीय अधिकार क्षेत्र

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

एलुरु में एम्स के वैज्ञानिकों द्वारा दूध के नमूनों में सीसे की खोज


संदर्भ:

हाल ही में, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के वैज्ञानिकों ने कहा है कि, आंध्र प्रदेश में पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु शहर और इसके आस-पास के गांवों से एकत्रित किए गए दूध के नमूनों में सीसे के अंश पाए गए है।

पृष्ठभूमि:

आंध्र प्रदेश के एलुरु शहर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में रहस्यमय बीमारी फैलने पर 4 दिसंबर को विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों से भोजन, पानी, दूध, रक्त और अन्य नमूने एकत्र किए गए थे।

‘सीसा’ (Lead) के बारे में:

  • मनुष्य के शरीर में सीसा (Lead) मस्तिष्क, यकृत, गुर्दे और हड्डियों में पाया जाता है। यह दांतों और हड्डियों में जमा होता है, जहां यह समय के साथ इकठ्ठा हो जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान हड्डियों में पाया जाने वाला सीसा रक्त में स्रावित हो जाता है, जिससे विकासशील भ्रूण को सीसा-संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  • WHO ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्रमुख 10 रसायनों में सीसे को शामिल किया है।
  • WHO ने सीसयुक्त पेंट उन्मूलन हेतु वैश्विक गठबंधन (Global Alliance to Eliminate Lead Paint) का निर्माण करने हेतु संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के साथ समझौता किया है।

सीसा-विषाक्तता के सामान्य कारक:

  1. लेड-एसिड बैटरियों का अनियमित और घटिया रीसाइक्लिंग
  2. वाहनों की संख्या में वृद्धि और साथ ही वाहन की बैटरी रीसाइक्लिंग से संबंधित विनियमन और बुनियादी ढांचे की कमी।
  3. खतरनाक और अक्सर अवैध रीसाइक्लिंग कार्यों में लगे अकुशल श्रमिक बैटरियों को खुली जगहों पर तोड़ते है, जिससे एसिड और सीसे की धूल (lead dust) मिट्टी में अवशोषित हो जाती है।
  4. इन श्रमिकों द्वारा अवशिष्ट सीसे को कच्ची, खुली भट्टियों में पिघलाया जाता है, जिससे जहरीले धुएं का उत्सर्जन होता है और यह आसपास के वातावरण को विषाक्त करता है।

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  प्रीलिम्स लिंक:

  1. WHO द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक घोषित प्रमुख 10 रसायन
  2. सीसयुक्त पेंट उन्मूलन हेतु वैश्विक गठबंधन के बारे में
  3. सीसा मुख्य रूप से किस उद्योग में प्रयुक्त किया जाता है?
  4. सीसे के सबसे बड़े प्राथमिक उत्पादक
  5. भारत में सीसा उत्पादन और खपत

मेंस लिंक:

सीसा विषाक्तता और इसे रोकने के तरीकों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

मानव विकास सूचकांक


(Human Development Index)

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव विकास सूचकांक (Human Development Index HDI) जारी किया गया है।

मानव विकास सूचकांक (HDI) के बारे में:

मानव विकास सूचकांक का प्रकाशन ‘संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development ProgrammeUNDP) द्वारा किया जाता है। यह किसी देश की सामाजिक और आर्थिक आयामों में समग्र उपलब्धि को मापने के लिए एक सांख्यिकीय उपकरण है। किसी देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की माप, लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के आधार पर की जाती है।

मानव विकास सूचकांक 2020 की विशिष्टता

पहली बार, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रत्येक देश के प्रति-व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन और उसकी भौतिक छाप से पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाने हेतु एक नई माप की शुरुआत की गयी है, जिसके तहत उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में प्रयुक्त जीवाश्म ईंधन, धातुओं और अन्य संसाधनों की मात्रा को मापा जाता है।

इस माप को ‘भूमंडलीय दबाव समायोजित मानव विकास सूचकांक (Planetary Pressures-adjusted HDI) अथवा PHDI कहा जाता है।

भारत का प्रदर्शन:

भारत की स्थिति में दो स्थानों की गिरावट हुई है और इसे 189 देशों की सूची में 131 वां स्थान प्राप्त हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार,यदि सूचकांक को प्रत्येक राष्ट्र के विकास के कारण उत्पन्न भूमंडलीय दबाव आकलन करने हेतु समायोजित किया जाता, तो भारत की रैंकिंग में स्थिति आठ स्थान ऊपर होती।

अन्य देशों का प्रदर्शन:

  • मानव विकास सूचकांक में नॉर्वे शीर्ष स्थान पर है। हालांकि, यदि नई माप (‘भूमंडलीय दबाव समायोजित मानव विकास सूचकांकPHDI) का प्रयोग किया जाता तो नॉर्वे की स्थिति में 15 स्थानों की गिरावट होती और आयरलैंड, सूचकांक में शीर्ष स्थान पर होता।
  • वास्तव में, नयी माप का प्रयोग करने पर 50 देश ‘अत्यधिक उच्च मानव विकास समूह’ श्रेणी से पूर्णतयः बाहर हो जाते।
  • नयी माप के अनुसार, रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया 72 वें स्थान पर, और जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा क्रमशः 45 और 40 वें स्थान पर रहेंगे, जोकि प्राकृतिक संसाधनों पर उनके प्रतिकूल प्रभाव को दर्शाता हैं।
  • तेल और गैस में समृद्ध खाड़ी देशों का भी PHDI में प्रदर्शन काफी ख़राब होता।
  • PHDI में चीन अपनी वर्तमान रैंकिंग (85) से 16 स्थान नीचे होता।

महामारी का प्रभाव:

हालांकि इस वर्ष की रिपोर्ट में मात्र 2019 को ही कवर किया गया है, और कोविड महामारी  के प्रभाव को शामिल नहीं किया गया है। यद्यपि, यह अनुमान लगाया गया है कि, सूचकांक की शुरुआत से तीन दशकों के बाद वर्ष 2020 में पहली बार वैश्विक मानव विकास सूचकांक में गिरावट हो सकती है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. HDI के बारे में
  2. HDI के घटक
  3. इसकी गणना किस प्रकार की जाती है?
  4. भारत का प्रदर्शन।
  5. भूमंडलीय दबाव समायोजित मानव विकास सूचकांक (PHDI) क्या है?
  6. UNDP के बारे में

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिका की करंसी मैन्युपुलटेर्स’ निगरानी सूची में भारत


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी राजकोष विभाग (U.S. Treasury) द्वारा स्विट्जरलैंड और वियतनाम को मुद्रा के साथ छेड़छाड़ करने वाला देश या करंसी मैन्युपुलटेर्स’ (Currency Manipulators) के रूप में घोषित किया गया है।

अमेरिकी ट्रेज़री द्वारा, ताइवान, थाईलैंड और भारत को करंसी मैन्युपुलटेर्स’ निगरानी सूची में जोड़ा गया है, इन देशों पर डॉलर के मुकाबले अपनी मुद्राओं के अवमूल्यन करने हेतु उपाय करने का संदेह किया जा रहा है।

अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा निम्नलिखित स्थितियों में ‘मैन्युपुलटेर्स’ घोषित किया जा सकता है:

  • देशों का अमेरिका के साथ न्यूनतम $ 20 बिलियन से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष।
  • सकल घरेलू उत्पाद का 2% से अधिक विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप।
  • वैश्विक चालू खाता अधिशेष को जीडीपी के 2% से अधिक।

कारण:

  • जून 2020 तक स्विट्जरलैंड और वियतनाम द्वारा भुगतान समायोजन के प्रभावी संतुलन को रोकने के लिए मुद्रा बाजारों में भारी हस्तक्षेप किया गया था।
  • भारत और सिंगापुर द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में ‘निरंतर एवं विषम तरीके’ से हस्तक्षेप किया गया था, हालांकि इनके खिलाफ ‘मैन्युपुलटेर्स’ के रूप घोषित किये जाने हेतु अन्य आवश्यक प्रमाण नहीं मिले।

निहितार्थ:

हालांकि, किसी देश को ‘करंसी मैन्युपुलटेर्स’ के रूप में घोषित किये जाने पर कोई दंड या प्रतिबंध नहीं लगाए जाते हैं, किंतु इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में देश के प्रति विश्वास में क्षति पहुँचती है।

करंसी मैन्युपुलेशन’ या मुद्रा के साथ छेड़छाड़ (Currency Manipulation) क्या होती है?

  • अमेरिकी राजकोष विभाग (S. Treasury) द्वारा एक अर्ध-वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है, जिसमे वैश्विक आर्थिक और विनिमय दर नीतियों के विकास की समीक्षा की जाती है।
  • यदि अमेरिका का कोई व्यापार भागीदार तीन मूल्यांकन मानदंडों के अनुरूप पाया जाता है, तो अमेरिका उस देश को ‘करंसी मैन्युपुलटेर्स’ घोषित कर देता है।
  • अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा ‘किसी देश द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ’ हासिल करने के लिए जानबूझकर अपनी मुद्रा और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर को प्रभावित करने को ‘करंसी मैन्युपुलेशन’ के रूप में परिभाषित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अमेरिका की ‘करंसी मैन्युपुलटेर्स’ सूची
  2. निगरानी सूची में शामिल देश
  3. मानदंड
  4. निहितार्थ
  5. भारत का स्थान

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

कृषि कानूनों में सरकार द्वारा वापस लिए जाने वाले प्रस्तावित विवाद निपटान प्रावधान


संदर्भ:

नए कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर तीन सप्ताह से ज्यादा समय से विरोध कर रहे किसानों को संतुष्ट करने हेतु, इन कानूनों के प्रमुख प्रावधानों को कमजोर करने का प्रस्ताव दिया है।

सरकार द्वारा प्रस्तावित परिवर्तनों में किसानों और खरीदारों के मध्य होने वाले विवादों को एक सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में लाने की बजाय, इस अद्वितीय विवाद समाधान तंत्र को वापस किये जाना शामिल है।

‘विवाद निपटान तंत्र’ क्या है?

कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020 के तहत, खरीदार के लिए देश भर में कृषि उपज का व्यापार और वाणिज्य करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इसका अर्थ है कि किसान को पारंपरिक बाजार के अलावा राज्य में अथवा राज्य के बाहर, खरीदारों के व्यापार करने की स्वतंत्रता है।

  • इस कानून एक विवाद समाधान तंत्र का प्रावधान भी किया गया है। किसानों के लिए विवाद समाधान तंत्र का प्रावधान करने वाली अधिनियम की धारा 8 के अनुसार, ‘किसान और व्यापारी के बीच लेनदेन से उत्पन्न किसी विवाद के मामले में, उप-मंडल मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त एक सुलह बोर्ड विवाद का निपटारा करेगा।
  • क़ानून के अनुसार, सुलह बोर्ड द्वारा किया गया समाधान दोनों पार्टियों के लिए बाध्यकारी होगा।

पक्षकारों के मध्य कोई समझौता नहीं होने की स्थिति में:

सुलह बोर्ड में लाए जाने के 30 दिनों के भीतर यदि विवाद का निपटारा नहीं किया जाता है, तो इस विवाद को निपटाने के लिए “सब-डिविजनल अथॉरिटी” के रूप में उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) द्वारा विवाद की सुनवाई की जायेगी।

सब-डिविजनल अथॉरिटी को कानून के तहत तीन प्रकार के आदेश पारित करने का अधिकार है:

  1. किसानों और व्यापारियों के लिए देय राशि की वसूली के लिए आदेश जारी करना।
  2. जुर्माना लगाने का अधिकार।
  3. इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और लेनदेन प्लेटफार्म के परिचालन अधिकार को रद्द करना अथवा अपने हिसाब से एक निश्चित अवधि के लिए निलंबित करना।

विवाद समाधान तंत्र से किसानों के असंतोष का कारण

  • अधिनियम की धारा 15 में कहा गया है, जिन मामलों की सुनवाई और निपटान इस क़ानून अथवा इसके तहत बनाए गए नियमों के तहत किया जा सकता है, ऐसे मामलों से संबंधित कोई भी सुनवाई अथवा कार्यवाही का अधिकार किसी भी सिविल कोर्ट को नहीं होगा।
  • इस प्रकार यह क़ानून, मुख्यतः सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के स्थान पर उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) के अधीन भारी-भरकम नौकरशाही प्रक्रिया को प्रतिस्थापित करता है।

क्या कोई कानून, किसी अदालत के अधिकार क्षेत्र को प्रतिबंधित कर सकता है? 

  • सिविल अदालतों का क्षेत्राधिकार सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 द्वारा प्रशासित होता है। इस प्रावधान में कहा गया है कि दीवानी अदालतों के पास सिविल प्रकृति के सभी मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार है, सिवाय उन मामलों के जिन पर संज्ञान लेने को स्पष्ट रूप से या निहित रूप से वर्जित किया गया है।
  • अतः, वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र स्थापित करने के लिए, किसी कानून द्वारा सिविल अदालतों का क्षेत्राधिकार को प्रतिबंधित किया जा सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

टीकाकरण में हिचकिचाहट


(Vaccine Hesitancy)

संदर्भ:

एक ऑनलाइन सर्वेक्षण से पता चला है कि यद्यपि देश में कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम को लागू करने संबंधी तैयारियां की जा रही हैं, किंतु सरकार के लिए आम लोगों द्वारा ‘टीकाकरण में हिचकिचाहट’ (Vaccine Hesitancy) समस्या से निपटना पड़ सकता है।

सर्वेक्षण के परिणामों से पता चला है, कि वैक्सीन उपलब्ध होने पर तत्काल टीका लगवाने में चिकित्सा समुदाय के बीच भी काफी झिझक देखी गई थी।

संबंधित चिंताएं:

महामारी के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन, चिकित्सीय साधनों में आवश्यक हथियारों में से एक है। टीका लगवाने में किसी भी तरह की हिचकिचाहट महामारी को नियंत्रित करने के प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव दाल सकती है।

समय की मांग:

  1. इस झिझक के पीछे के कारणों का उचित समाधान।
  2. दवा / टीके के निर्माण में शामिल विभिन्न प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा करके जनता को विश्वास दिलाना।
  3. इससे जनता, नैदानिक ​​परीक्षणों के दौरान की जाने वाली कठोर प्रक्रियाओं और नियामकों द्वारा किए जाने वाले अनुमोदन के बारे में जागरूक होगी।

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टीकाकरण में हिचकिचाहट: पीढ़ी का संकट

  • WHO द्वारा टीकाकरण में हिचकिचाहट को ‘टीकाकरण सेवाओं की उपलब्धता के बावजूद टीके की स्वीकृति में देरी या मनाही’ के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • इस साल ‘टीकाकरण में हिचकिचाहट’ को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए घोषित 10 खतरों में शामिल किया गया है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


CMS-01 उपग्रह

  • यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा PSLV-C50 के साथ प्रक्षेपित किया जाने वाला एक संचार उपग्रह है।
  • CMS-01 को फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम के विस्तारित सी बैंड में सेवाएं प्रदान करने के लिए परिकल्पित किया गया है।
  • इसरो के अनुसार, यह भारतीय मुख्य भूमि, और अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह को कवर करेगा।
  • इस उपग्रह की कार्य-आयु सात वर्ष से अधिक होने की उम्मीद है।
  • CMS-01 भारत का 42 वां संचार उपग्रह है और PSLV का 52 वां मिशन है।

विश्वसनीय’ दूरसंचार उपकरण कंपनियों की सूची

  • हाल ही में, सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए सुरक्षा निर्देश को मंजूरी दी है। इनमे दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को ‘विश्वसनीय’ के रूप में सूचीबद्ध स्रोतों से उपकरणों की खरीद करने का निर्देश दिया गया है।
  • इसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा की निरंतरता बनाए रखना है।
  • सरकार द्वारा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लाभ के लिए विश्वसनीय स्रोतों / उत्पादों की सूची घोषित की जाएगी।

पाकिस्तान में यौन अपराधियों के रासायनिक बंघ्यीकरण की मंजूरी

  • पाकिस्तान ने एक नए कानून में बलात्कारियों के रासायनिक बंघ्यीकरण (chemical castration) को मंजूरी दे दी है।
  • नए कानून के तहत अदालतों के बलात्कार के मामलों की तेजी से सुनवाई होगी और देश का पहला राष्ट्रीय यौन अपराधी रजिस्टर तैयार किया जाएगा।

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