Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. दिल्ली के तापमान में गिरावट संबंधी कारण

 

सामान्य अध्ययन-II

1. समीक्षा याचिका

2. प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI)

3. खाड़ी देशों के प्रवासी भारतीयों को डाक मतपत्र से मतदान का फिलहाल अधिकार नहीं

 

सामान्य अध्ययन-III

1. S-400 सौदा एवं तुर्की पर अमेरिकी प्रतिबंध

2. ‘उइगर’ कौन हैं?

3. बांग्लादेश के लिए वापसी करने वालों की संख्या में वृद्धि

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘डाक पे’

2. वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC)

3. हिमालयन सीरो

4. राष्ट्रीय कामधेनु आयोग

5. मेघदूत पुरस्कार

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान ।

दिल्ली के तापमान में गिरावट संबंधी कारण


संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 14.4 डिग्री सेल्सियस  से गिर कर 4.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। यह सामान्य तापमान से पांच डिग्री कम था।

दिल्ली में तापमान गिरावट के कारण

  • पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में पश्चिमी हिमालय श्रेणी में स्थित राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से भारी मात्रा में बर्फबारी हुई है।
  • पश्चिमी हिमालय श्रेणी में बर्फबारी होने से उच्च तुंगता वाले क्षेत्रों से ठंडी, उत्तर-पश्चिमी हवाएँ दिल्ली की और बहने लगती है, इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ के गुजर जाने के बाद बादल हट जाते हैं और आसमान साफ़ हो जाता है, जिससे तापमान में गिरावट होती है।
  • बादल रहित आसमान होने से रात्रि के समय पृथ्वी की सतह से वायुमंडल में उच्च विकिरण होता है, जिससे धरातल ठंडा हो जाता है।
  • इसके अलावा, ‘ला-नीना’ जलवायु दशाओं के सक्रिय होने के कारण, पूरे विश्व के तापमान में गिरावट हुई है।

पृष्ठभूमि:

भूमध्य सागर में उत्पन्न होने वाले पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) को एक असाधारण उष्णकटिबंधीय चक्रवात भी कहा जाता है। यह एक निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है जिसके कारण उत्तर पश्चिम भारत में अचानक बारिश, बर्फ और घना कोहरा पड़ता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पश्चिमी विक्षोभ’ क्या है?
  2. ‘ENSO’ दोलन क्या है?
  3. भारत पर ‘ला-नीना’ का प्रभाव।
  4. ‘जेट स्ट्रीम’ क्या है?
  5. ‘आम्रवर्षा’ क्या हैं?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

समीक्षा याचिका (Review Petition)


संदर्भ:

हाल ही में, सामाजिक कार्यकर्त्ता-अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में एक आवेदन दायर कर यह निर्देश देने का अनुरोध किया है, कि उनके द्वारा, अवमानना का दोषी ठहराने और सजा के आदेशों पर पुनर्विचार के लिए दायर की गई दो याचिकाओं पर सुनवाई, इस प्रकार के मामले में अपील करने के अधिकार संबंधी उनकी एक अलग याचिका पर फैसला होने के बाद की जाए।

समीक्षा / पुनर्विचार याचिका (Review Petition) क्या है?

संविधान के अनुसार, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय देश का क़ानून बन जाता है। यह निर्णय अंतिम होता है तथा यह भविष्य में सुनवाई हेतु आए मामलों पर निर्णय देने के लिए तथ्य प्रदान करता है।

  • हालाँकि अनुच्छेद 137 के तहत उच्चत्तम न्यायालय को अपने किसी भी निर्णय या आदेश की समीक्षा करने की शक्ति प्राप्त है। उच्चत्तम न्यायालय के अंतिम प्राधिकरण संबधी स्थिति में यह विचलन किसी विशिष्ट तथा संकीर्ण आधार होने पर ही किया जाता है।
  • इसलिए, जब किसी निर्णय की समीक्षा की जाती है, तो नियम यह होता है, कि उस मामले में नए साक्ष्यों को अनुमति नहीं दी जाती है, परन्तु न्याय देने में हुई गंभीर त्रुटियों को ठीक किया जाता है।

समीक्षा याचिका कब स्वीकार की जा सकती है?

वर्ष 1975  में एक मामले में तत्कालीन न्यायमूर्ति कृष्ण/कृष्णा अय्यर ने निर्णय देते हुए कहा था कि किसी समीक्षा याचिका को तभी स्वीकार किया जा सकता है जब न्यायालय द्वारा दिये गए किसी निर्णय में भयावह चूक या अस्पष्टता जैसी स्थिति उत्पन्न हुई हो।

  • समीक्षा, किसी भी प्रकार से एक अपील नहीं होती है।
  • अर्थात, न्यायालय अपने पूर्व के निर्णय में निहित ‘स्पष्टता का अभाव’ तथा ‘महत्त्वहीन आशय’ की गौण त्रुटियों की समीक्षा कर उसमें सुधार कर सकता है।

समीक्षा याचिका किस प्राकर दायर की जाती है?

नागरिक प्रक्रिया संहिता और उच्चतम न्यायालय के नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो फैसले से असंतुष्ट है, समीक्षा याचिका दायर कर सकता है। इरका अर्थ है, कि समीक्षा याचिका दायर करने के लिए व्यक्ति का उक्त मामले में पक्षकार होना अनिवार्य नहीं होता है।

समीक्षा याचिका, निर्णय या आदेश की तारीख के 30 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिये।

कुछ परिस्थितियों में, न्यायालय समीक्षा याचिका दायर करने की देरी को माफ़ कर सकती है यदि याचिकाकर्ता देरी के उचित कारणों को अदालत के सम्मुख प्रदर्शित करे।

  1. समीक्षा याचिका निर्णय की तारीख के 30 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिये।
  2. कुछ परिस्थितियों में, याचिकाकर्ता द्वारा देरी के उचित कारणों को न्यायालय के समक्ष पेश करने पर, न्यायालय समीक्षा याचिका दायर करने की देरी को माफ़ कर सकती है।

समीक्षा याचिका हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:

  1. न्यायालय के नियमों के अनुसार, ‘समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई वकीलों की मौखिक दलीलों के बिना की जाएगी’। सुनवाई न्यायधीशों द्वारा उनके चैम्बरों में की जा सकती है।
  2. समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई, व्यवहारिक रूप से न्यायाधीशों के संयोजन से अथवा उन न्यायधीशों द्वारा भी की जा सकती है जिन्होंने उन पर निर्णय दिया था।
  3. यदि कोई न्यायाधीश सेवानिवृत्त या अनुपस्थित होता है तो वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्थापन किया जा सकता है।
  4. अपवाद के रूप में, न्यायालय मौखिक सुनवाई की अनुमति भी प्रदान करता है। वर्ष 2014 के एक मामले में, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि “मृत्युदंड” के सभी मामलों संबधी समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा खुली अदालत में की जाएगी।

समीक्षा याचिका के असफल होने के बाद विकल्प:

  • रूपा हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा मामले (2002) में, उच्चत्तम न्यायालय ने एक क्यूरेटिव पिटीशन की अवधारणा विकसित की, जिसे पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सुना जा सकता है।
  • क्यूरेटिव पिटीशन / उपचारात्मक याचिका पर सुनवाई तभी होती है जब याचिकाकर्त्ता यह प्रमाणित कर सके कि उसके मामले में न्यायालय के फैसले से न्याय के नैसर्गिक सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है साथ ही अदालत द्वारा निर्णय/आदेश जारी करते समय उसे नहीं सुना गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. समीक्षा याचिका तथा क्यूरेटिव याचिका में अंतर
  2. समीक्षा याचिका प्रक्रिया
  3. कौन दाखिल कर सकता है?
  4. समीक्षा याचिका दायर करने की समय-अवधि
  5. IPC की धारा 497 क्या है?
  6. अनुच्छेद 137 क्या है?

मेंस लिंक:

समीक्षा याचिका क्या है? समीक्षा याचिका हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI)


(Overseas Citizens of India)

संदर्भ:

हाल ही में, कर्नाटक के उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि प्रवासी भारतीय नागरिक (Overseas Citizens of India- OCI) श्रेणी के अंतर्गत आने वाले छात्रों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के लिए इन्हें ‘भारत का नागरिक’ माना जाएगा।

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, कर्नाटक राज्य सरकार द्वारा अप्रैल 2019 के एकल-न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी, जिसमे अदालत ने व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में OCI छात्रों को नियमित कोटे की सीटों पर प्रवेश लेने की अनुमति दी थी। राज्य सरकार, प्रवासी छात्रों को केवल NRI कोटे के तहत प्रवेश देने के पक्ष में है।

‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्डधारक कौन होते हैं?

  • भारत सरकार द्वारा अगस्त, 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करते हुए प्रवासी भारतीय नागरिकता (Overseas Citizenship of IndiaOCI) योजना आरंभ की गई थी।
  • भारत सरकार द्वारा 09 जनवरी 2015 को भारतीय मूल के नागरिक (PIO) कार्ड को समाप्त करते हुए इसे ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्ड के साथ संयुक्त कर दिया गया।

पात्रता:

भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित श्रेणियों के विदेशी नागरिकों को प्रवासी भारतीय नागरिकता कार्ड हेतु आवेदन करने की अनुमति दी गयी है:

  1. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु संविधान के लागू होने के समय, 26 जनवरी 1950 या उसके पश्चात् किसी समय भारत का नागरिक थे; या
  2. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु 26 जनवरी 1950 को भारत का नागरिक होने के लिए पात्र थे; या
  3. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु ऐसे राज्यक्षेत्र से संबद्ध थे, जो 15 अगस्त, 1947 के पश्चात् भारत का भाग बन गया था; या
  4. जो किसी ऐसे नागरिक का पुत्र/पुत्री या पौत्र/पौत्री, दौहित्र/दौहित्री या प्रपौत्र/प्रपौत्री, प्रदौहित्र/प्रदौहित्री है; या
  5. किसी ऐसे व्यक्ति को, जो खंड (क) में वर्णित किसी व्यक्ति का अप्राप्तवय पुत्र/पुत्री है।

eligible

अपवाद:

  • ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्ड के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास किसी अन्य देश का वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है।
  • ऐसे व्यक्ति जिनके पास किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं है, वे ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ का दर्जा प्राप्त करने के पात्र नहीं हैं।
  • ऐसे व्यक्ति जिनके माता-पिता या दादा-दादी पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिक हैं, वे प्रवासी भारतीय नागरिक’ कार्ड हेतु आवेदन करने के पात्र नहीं हैं।

ओसीआई कार्डधारकों के लिए लाभ:

  1. भारत आने के लिए जीवनपर्यंत वीजा।
  2. प्रवास के दौरान विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) या विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO) के पास पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  3. अनिवासी भारतीयों (NRI) को मिलने वाली आर्थिक, वित्तीय, शैक्षिक, सुविधा उपलब्ध होती है, किंतु कृषि, संपत्ति या बागान खरीदने की छूट नहीं होती है।
  4. भारतीय बच्चों के अंतर-देशीय गोद लेने के संबंध में अनिवासी भारतीयों के समान व्यवहार।
  5. राष्ट्रीय स्मारकों में प्रवेश शुल्क, डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, नर्सों, अधिवक्ताओं, वास्तुकारों, चार्टर्ड एकाउंटेंट और फार्मासिस्ट जैसे व्यवसाय अपनाने पर अनिवासी भारतीयों के समान व्यवहार।
  6. अखिल भारतीय प्री-मेडिकल परीक्षाओं एवं इस तरह की अन्य परीक्षाओं में भाग लेने के लिए अनिवासी भारतीयों समान व्यवहार।
  7. भारतीय घरेलू क्षेत्रों में वायु-यातायात के मामलों में भारतीय नागरिकों के समान व्यवहार।
  8. भारत के राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में प्रवेश हेतु भारतीयों के लिए समान प्रवेश शुल्क।
  9. प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) बुकलेट का उपयोग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पहचान के रूप में किया जा सकता है। OCI कार्ड को स्थानीय पता और एक शपथपत्र लगाकर आवासीय प्रमाण के रूप में संलग्न किया जा सकता है।

ओसीआई कार्ड धारकों पर प्रतिबंध:

  1. वोट देने का अधिकार नहीं है।
  2. किसी भी सार्वजनिक सेवा / सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं है।
  3. प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-प्रधान, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय, संसद के सदस्य या राज्य विधान सभा या परिषद के सदस्य – के पद पर नियुक्त का अधिकार नहीं होता है।
  4. कृषि संपत्ति को नहीं खरीद सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागरिक की परिभाषा।
  2. POI बनाम OCI बनाम NRI
  3. नागरिकता प्रदान करने और निरस्त करने की शक्ति?
  4. भारत में दोहरी नागरिकता।
  5. ओसीआई कार्ड धारकों के लिए चुनाव में वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार।
  6. क्या ओसीआई धारक कृषि भूमि खरीद सकते हैं?
  7. ओसीआई कार्ड किसे जारी नहीं किए जा सकते हैं?

मेंस लिंक:

भारत के प्रवासी नागरिक कौन होते हैं? ओसीआई कार्ड धारकों के लिए क्या लाभ उपलब्ध हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

खाड़ी देशों के प्रवासी भारतीयों को डाक मतपत्र से मतदान का फिलहाल अधिकार नहीं


संदर्भ:

निर्वाचन आयोग (Election CommissionEC) द्वारा प्रवासी भारतीयों (NRIs) को विदेशों से डाक मतपत्र (Postal Ballot) के माध्यम से मतदान लागू करने हेतु प्रायोगिक तौर पर कुछ देशों को चुना गया है।

निर्वाचन आयोग का यह प्रस्ताव, पहले संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका में बसने वाले मतदाताओं के लिए लागू हो सकता है।

प्रवासी मतदाताओं की वर्तमान संख्या

  • संयुक्त राष्ट्र की 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रवासी जनसंख्या 16 मिलियन है और यह विश्व में सर्वाधिक है।
  • तुलनात्मक रूप से, प्रवासी मतदाताओं का पंजीकरण बहुत कम रहा है: चुनाव आयोग के अनुसार, मात्र 1 लाख से कुछ अधिक प्रवासी भारतीयों ने भारत में मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया है।
  • पिछले लोकसभा चुनावों में, इनमें से लगभग 25,000 पंजीकृत प्रवासी मतदाता, मतदान करने हेतु भारत आए।
  • 18 लाख प्रवासी मतदाताओं में से सर्वाधिक- लगभग 89,000 मतदाता ेरल में तथा इसके बाद लगभग 7,500 मतदाता आंध्र प्रदेश में पंजीकृत हैं।

निर्वाचन आयोग द्वारा खाड़ी देशों के प्रवासियों को सम्मिलित नहीं करने का कारण

गैर-लोकतांत्रिक देशों में, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का कार्यान्वयन करने हेतु- जिसमे भारतीय मिशनों और दूतावासों के बाहर मतदाताओं की कतारें लग सकती है- अनुमति की आवश्यकता होती है, जिसके लिए मेजबान देश मना भी कर सकते हैं। इन चिंताओं को देखते हुए, निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रस्तावित पायलट योजना में अब तक खाड़ी देशों को शामिल नहीं किया है।

स्वीकृति मिलने पर प्रवासी भारतीयों द्वारा डाक मतपत्रों से किस प्रकार मतदान किया जाएगा?

  1. निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव के अनुसार, चुनाव में डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान करने में अभिरुचि रखने वाले किसी भी NRI को चुनाव की अधिसूचना से पांच दिन पहले रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को सूचित करना होगा।
  2. इस प्रकार की जानकारी प्राप्त होने पर RO बैलेट पेपर इलेक्ट्रॉनिक रूप से NRI को भेजेगा।
  3. एक निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा मतदाता की ओर से बैलेट पेपर डाउनलोड करके प्रवासी मतदाता को भेजा जाएगा ।
  4. NRI मतदाताओं को बैलेट पेपर पर अपनी वरीयता अंकित करना होगा और इसे अपने मौजूदा देश के राजनयिक या कांसुलर प्रतिनिधि द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा सत्यापित घोषणा पत्र के साथ वापस भेजना होगा।

प्रवासी भारतीय नागरिकों के लिए मतदान की वर्तमान प्रक्रिया

  • प्रवासी भारतीयों के लिए मतदान अधिकार, वर्ष 2011 में, जन प्रतिनिधित्व कानून 1950 में संशोधन के माध्यम से लागू किये गए थे।
  • प्रवासी भारतीय (NRI) अपने पासपोर्ट में उल्लिखित निवास स्थान संबंधी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कर सकता है।
  • वे केवल व्यक्तिगत रूप से मतदान कर सकते हैं, और उन्हें अपनी पहचान साबित करने हेतु अपना पासपोर्ट की मूल प्रति पेश करनी होगी।

no_paints

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘डाक मतपत्र’ के बारे में
  2. ‘डाक मतपत्र’ के माध्यम मतदान करने के पात्र
  3. प्रवासी भारतीयों द्वारा किस प्रकार मतदान किया जाता है?
  4. NRI बनाम POI
  5. अनिवासी भारतीयों के अधिकार।

मेंस लिंक:

क्या प्रवासी भारतीयों को डाक मतपत्रों के माध्यम से विदेशों से मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

S-400 सौदा एवं तुर्की पर अमेरिकी प्रतिबंध


संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम‘ (CAATSA) के तहत तुर्की पर रूस की  S-400 वायु रक्षा प्रणाली हासिल करने पर प्रतिबंध आरोपित किये हैं।

S-400 वायु रक्षा प्रणाली एवं भारत के लिए इसकी आवश्यकता

  • S-400 ट्रायम्फ (Triumf) रूस द्वारा डिज़ाइन की गयी एक मोबाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (surface-to-air missile system- SAM) है।
  • यह विश्व में सबसे खतरनाक, आधुनिक एवं परिचालन हेतु तैनात की जाने वाली लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली SAM (MLR SAM) है, जिसे अमेरिका द्वारा विकसित,टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस’ (Terminal High Altitude Area Defence THAAD) से काफी उन्नत माना जाता है।
  • भारत के लिए दो मोर्चों पर लड़ाई के लिए S-400 ट्रायम्फ और अत्याधुनिक F-35 अमेरिकी लड़ाकू विमान हासिल करना बहुत महत्वपूर्ण है।

CAATSA क्या है?

अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम‘ (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act- CAATSA) का प्रमुख उद्देश्य दंडात्मक उपायों के माध्यम से ईरान, उत्तर कोरिया और रूस को प्रत्युत्तर देना है।

यह अधिनियम मुख्य रूप से, यूक्रेन में रूसी सैन्य हस्तक्षेप और 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में कथित रूसी छेड़छाड़ की पृष्ठभूमि में रूसी हितों, जैसे कि, इसके तेल और गैस उद्योग, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र, और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित है।

अमेरिका द्वारा CAATSA जैसे कानून को लागू करने का कारण

  • संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए चुनावों के बाद चुनावों में तथाकथित रूसी हस्तक्षेप, जिसे कुछ अमेरिकियों द्वारा मिलीभगत भी कहा गया था, का आरोप लगाया गया था। इसके बाद वाशिंगटन और मॉस्को के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया।
  • विश्व भर में मॉस्को की कार्रवाइयों से नाराज, अमेरिकी कानूनविदों द्वारा रूस को इसके संवेदनशील जगहों, जैसे कि रक्षा और ऊर्जा व्यवसाय, पर चोट पहुचाने के उद्देश्य से CAATSA क़ानून पारित किया गया था।

भारत के रक्षा परिदृश्य हेतु इसका निहितार्थ

  • स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) आर्म्स ट्रांसफर डेटाबेस के अनुसार, वर्ष 2010-17 के दौरान रूस, भारत के लिए शीर्ष हथियार आपूर्तिकर्ता था।
  • भारत के अधिकांश हथियार सोवियत / रूसी मूल के हैं – परमाणु पनडुब्बी आईएनएस चक्र (INS Chakra), किलो-क्लास पारंपरिक पनडुब्बी, सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, मिग 21/27/29 और Su-30 MKI लड़ाकू विमान, IL-76/78 परिवहन विमान, T-72 और T-90 टैंक, Mi- श्रंखला के हेलीकॉप्टर, और विक्रमादित्य विमान वाहक पोत।
  • इसलिए, CAATSA से भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव पड़ सकता है और एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अमेरिका की छवि भी धूमिल हो सकती है।

हालांकि, भारत को S-400 वायु रक्षा प्रणाली संबंधी सौदे के लिए निवर्तमान ट्रम्प प्रशासन से छूट मिली हुई है, और दिल्ली को उम्मीद है कि बिडेन प्रशासन द्वारा इस छूट संबंधी निर्णय में परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

us_vs_russia

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. CAATSA किससे संबंधित है?
  2. CAATSA के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियां।
  3. लगाये जाने वाले प्रतिबंधों के प्रकार।
  4. भारत और रूस के बीच महत्वपूर्ण रक्षा सौदे।
  5. ईरान परमाणु समझौते का अवलोकन।

मेंस लिंक:

CAATSA की विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

‘उइगर’ कौन हैं?


संदर्भ:

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में सैकड़ों प्रजातीय अल्पसंख्यक मजदूरों को राज्य द्वारा संचालित योजना के तहत बलपूर्वक कपास बीनने पर मजबूर किया जा रहा है।

इस रिपोर्ट से नाइकी, गैप और एडिडास जैसे वैश्विक ब्रांडों पर अधिक दबाव पड़ने की संभावना है। इन ब्रांडों पर इनकी कपड़ा आपूर्ति श्रृंखलाओं में उइगर बलात श्रम का उपयोग करने का आरोप लगाया जाता है।

पृष्ठभूमि:

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिनजियांग प्रांत में अवैध नजरबन्दी शिविरों का बड़ा नेटवर्क है, जिसमे कम से कम दस लाख लोग कैद हैं। चीन द्वारा इन शिविरों को उग्रवाद से निपटने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र बताया जाता है।

उइगर कौन हैं?

उइगर, चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में निवास करने वाले अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय हैं। शिनजियांग प्रांत में इनकी जनसंख्या तकरीबन 40 प्रतिशत है।

उइगर, चीन की तुलना में तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से करीबी नृजातीय संबंधों का दावा करते हैं।

चीन उइगरों को क्यों निशाना बना रहा है?

शिनजियांग तकनीकी रूप से चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। शिनजियांग, चीन का सबसे बड़ा क्षेत्र है तथा खनिजों से समृद्ध है इसके साथ ही इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।

  1. पिछले कुछ दशकों में, शिनजियांग प्रांत आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है, इसके साथ ही बड़ी संख्या में बहुसंख्यक हान चीनी (Han Chinese) इस क्षेत्र में आकर बस गए तथा बेहतर नौकरियों पर कब्जा कर लिया है। हान चीनीयों ने उइगरों के लिए आजीविका तथा पहचान के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है।
  2. इन्ही कारणों से, छिटपुट हिंसा की शुरुआत हुई तथा वर्ष 2009 में शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमकी में 200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हान चीनी थे। तब से कई अन्य हिंसक घटनाएं हुई हैं।
  3. बीजिंग का कहना है कि उइगर समुदाय एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहता है और, उइगरों के तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से सांस्कृतिक संबंधों के कारण, चीनी नेताओं को डर है कि पाकिस्तान जैसी जगहों से संचालित होने वाले उग्रवादी तत्व शिनजियांग में अलगाववादी आंदोलन को प्रोत्साहन व सहयोग दे सकते हैं।
  4. इसलिए, चीन की नीति पूरे समुदाय को संदिग्ध मानने तथा उइगरों की अलग पहचान को समाप्त करने हेतु एक व्यवस्थित परियोजना के आरम्भ करने की प्रतीत होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उइगर कौन हैं?
  2. शिनजियांग कहाँ है?
  3. हान चीनी कौन हैं?
  4. शिनजियांग प्रांत की सीमा से लगे भारतीय राज्य।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

बांग्लादेश के लिए वापसी करने वालों की संख्या में वृद्धि


संदर्भ:

सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार-

  1. पिछले चार वर्षों के दौरान अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों द्वारा बांग्लादेश वापस जाने वालों की संख्या, अवैध रूप से देश में घुसने वालों की संख्या की दोगुनी थी।
  2. इस वर्ष 14 दिसंबर तक, बीएसएफ द्वारा बांग्लादेश में घुसने का प्रयास करते हुए 3,173 अवैध प्रवासियों को पकड़ा गया था, जबकि अवैध रूप से भारत की सीमा घुसते हुए 1,115 बांग्लादेशियों को पकड़ा गया।
  3. वर्ष 2019, 2018 और 2017 में, देश छोड़ने वाले बांग्लादेशियों की संख्या क्रमशः 2,638, 2,971 और 821 थी, जबकि इन वर्षों में भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वालों की संख्या क्रमशः 1,351, 1,118 और 871 थी।
  4. वर्ष 2017 में, बांग्लादेश में घुसने की कोशिश करने के दौरान 892 भारतीय पकड़े गए और 276 भारतीय बिना किसी दस्तावेज के देश में प्रवेश करते हुए पकड़े गए।

इस पलायन का कारण

एक अन्य अधिकारी के अनुसार, कोविड-19 महामारी और उसके बाद लॉकडाउन के बाद काम में होने वाली कमी, अवैध बांग्लादेशियों द्वारा बड़ी संख्या में देश छोड़ने का प्रमुख कारण रही है।

पकड़े जाने पर सुरक्षा एजेंसियां ​​उनके साथ क्या करती हैं?

यदि अवैध रूप से सीमा पार करने वालों को पकड़ लिया जाता है, तो सुरक्षा एजेंसियां इन्हें वापस जाने देती हैं। यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो लंबी कानूनी प्रक्रिया चलती है और अवैध प्रवासियों को इनकी राष्ट्रीयता साबित होने तक आश्रय या निरोध गृह में रखा जाता है।

चिंता का विषय:

रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के बीच अंतर करना मुश्किल हो रहा है और बीएसएफ के जवान बोली के आधार पर इन दोनों समुदायों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं।

पृष्ठभूमि:

भारत और बांग्लादेश के मध्य 4096.7 किमी लंबी सीमा-रेखा है, और यह भारत की पड़ोसी देशों के साथ सबसे लंबी स्थलीय सीमा-रेखा है।

भारत-बांग्लादेश स्थलीय सीमा समझौता (Land Boundary Agreement LBA) जून 2015 में सत्यापन दस्तावेजों (instruments of ratification) के आदान-प्रदान के बाद लागू किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत- बांग्लादेश सीमा
  2. भारत और पड़ोसी देश- अवस्थिति
  3. भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार
  4. स्थलीय-सीमा समझौता क्या है?

मेंस लिंक:

भारत में अप्रवासियों के सीमा-पार आवाजाही को हल करने के उपाय सुझाइए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘डाक पे’

(DakPay)

यह डाक विभाग और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) द्वारा शुरू किया गया एक नया डिजिटल भुगतान एप्लिकेशन है।

  • ‘डाकपे’ देशभर में फैले डाक विभाग के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से प्रदान की जाने वाली डिजिटल वित्तीय और सहायक बैंकिंग सेवाओं का एक समूह है, जिसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करना है।
  • इसके द्वारा, पैसा भेजना (डोमेस्टिक मनी ट्रांसफर-डीएमटी), क्यूआरकोड को स्कैन कर विभिन्न सेवाओं के लिए दुकानदार को भुगतान करना (यूपीआई सुविधा और वर्चुअल डेबिट कार्ड), बायोमेट्रिक के माध्यम से नकदरहित व्यवस्था को सक्षम बनाना, किसी भी बैंक के ग्राहकों को अंतर-बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना(एईपीएस), ज़रूरी सेवाओं के बिलों का भुगतान जैसी तमाम सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।

 

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC)

(Financial Stability and Development Council)

  • वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) का गठन दिसंबर, 2010 को किया गया था।
  • FSDCके गठन का उद्देश्य वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, अंतर-नियामक समन्वय को बढ़ाने और वित्तीय क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने हेतु तंत्र को मजबूत और संस्थागत करना था।
  • यह एक वैधानिक निकाय नहीं है।
  • परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा की जाती है।

हिमालयन सीरो

(Himalayan serow)

  • इसे हिमालय के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश) में पहली बार देखा गया।
  • हिमालयन सीरो एक बकरी, एक गधा, एक गाय और एक सुअर के बीच एक संकर प्रजाति जैसा दिखता है।
  • यह एक बड़े सिर, मोटी गर्दन, खच्चर जैसे कान, और काले बालों वाला मध्यम आकार का स्तनपायी है।
  • IUCN की रेड लिस्ट में ‘असुरक्षित’ (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध है।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची- I के तहत सूचीबद्ध है।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग

  • राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) का गठन वर्ष 2019 में गायों और गौवंश के संरक्षण, सुरक्षा और विकास तथा पशु विकास कार्यक्रम को दिशा प्रदान करने के लिए किया गया था।
  • यह मवेशियों से संबंधित योजनाओं के बारे में नीति बनाने और कार्यान्वयन को दिशा प्रदान करने के लिए एक उच्च स्तरीय स्थायी सलाहकार संस्था है।
  • यह मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • राष्ट्रीय कामधेनु आयोग, ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के अभिन्न अंग के रूप में कार्य करेगा।

The_Himalayan_serow

मेघदूत पुरस्कार:

यह डाक विभाग द्वारा हर साल डाक सेवा में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया जाता है।


  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos