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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. सूर्य ग्रहण

 

सामान्य अध्ययन-II

1. वर्ष 2031 की जनगणना के आधार पर ‘परिसीमन’ किये जाने की सलाह

2. जल बंटवारे के संदर्भ में दायर याचिका को वापस ले तेलंगाना: केंद्र

 

सामान्य अध्ययन-III

1. चांग’ई-5 प्रोब

2. उत्सर्जन कटौती की दिशा में अग्रसर भारत

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 2019-20 (NFHS-5)

2. मिरिस्टिका स्वैम्प ट्रीफ्रॉग

3. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं वाघ अभ्यारण्य

4. भारतीय कंपनियों के लिए विविधता आवश्यकताएँ

5. भारत में व्यापक स्वास्थ्य कवरेज रुपरेखा तय करने हेतु ‘लांसेट नागरिक आयोग’

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान।

सूर्य ग्रहण


(Solar Eclipse)

संदर्भ:

14 दिसंबर को होने वाला सूर्य ग्रहण वर्ष 2020 का अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण (total solar eclipse) होगा।

यह सूर्य ग्रहण, चिली और अर्जेंटीना के अलावा, दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में, दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका और अंटार्कटिका में आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।

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‘सूर्य ग्रहण’ क्या है?

यह पृथ्वी पर घटित होने वाली एक प्राकृतिक घटना है। सूर्यग्रहण की स्थिति में चंद्रमा की कक्षीय अवस्थिति, पृथ्वी और सूर्य के मध्य होती है।

  • सूर्यग्रहण, अमावस्या के दिन घटित होता है, इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक दूसरे के साथ युति (conjunction) अवस्था में होते हैं।
  • ग्रहण के दौरान, चंद्रमा की छाया, जो कि दो भागों में विभाजित होती है- अदीप्‍त छाया (dark umbra) एवं हल्की प्रकाशित उपच्छाया (lighter penumbra), पृथ्वी की सतह को आच्छादित करती है।
  • सूर्यग्रहण की स्थिति में, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी पूर्णतयः संरेखित नहीं होते हैं, तो केवल आंशिक ग्रहण होता है। जब तीन खगोलीय पिंड एक सीधी रेखा में होते हैं, तो पूर्ण सूर्य ग्रहण का अवलोकन होता है।

फिर, हर महीने सूर्यग्रहण क्यों नहीं होता?

यदि चंद्रमा पृथ्वी के थोड़ा करीब होता तथा एक ही वृत्तीय कक्षा में पृथ्वी के परिक्रमा कर रहा होता, तब प्रत्येक माह सूर्यग्रहण की घटना देखी जा सकती है। परन्तु, चंद्रमा अण्डाकार कक्षा में तथा पृथ्वी की कक्षीय स्थिति में कुछ झुकी हुई स्थिति में गति करता है, अतः हम प्रति वर्ष केवल 5 ग्रहण देख सकते हैं।

सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की ज्यामितीय स्थिति के अनुसार, सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पूर्णतयः अथवा आंशिक रूप से अवरुद्ध हो सकता है।

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प्रीलिम्स लिंक

  1. सूर्यग्रहण तथा चंद्रग्रहण में अंतर
  2. सौर ग्रहण के प्रकार।
  3. प्रतिछाया (Umbra) तथा उपच्छाया (Penumbra)
  4. पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा
  5. हर महीने सूर्यग्रहण क्यों नहीं होता है
  6. सक्रांति

मेंस लिंक:

वलयाकार सूर्यग्रहण पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

वर्ष 2031 की जनगणना के आधार पर ‘परिसीमन’ किये जाने की सलाह


(Delimitation should be based on 2031 Census)

संदर्भ:

दिवंगत राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जयंती की पूर्व संध्या पर प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन (PMF) द्वारा जारी किये गए एक पत्र में, अगली परिसीमन प्रक्रिया को दो चरणों में पूरी किए जाने का सुझाव दिया गया है:

  1. वर्ष 2031 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनः परिभाषित करने के लिए परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन किया जाना चाहिए।
  2. राज्यों को छोटे राज्यों में विभाजित करने हेतु एक राज्य पुनर्गठन अधिनियम (State Reorganisation Act) पारित किया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि:

2002 में हुए 84 वें संशोधन में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में वर्ष 2026 तक कोई परिवर्तन न करने का प्रावधान किया गया था। यद्यपि, वर्तमान निर्वाचन सीमाओं को वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर निर्धारित किया गया है, परंतु, लोकसभा और राज्य सभा में सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर ही तय की गयी है।

पुनर्विचार की आवश्यकता:

संसद में सीटों की संख्या निर्धारित किये जाने से पहले की जनगणना के अनुसार देश के जनसंख्या 50 करोड़ थी, जो कि 50 वर्षों में बढ़कर 130 करोड़ हो गई है। इसके परिणामस्वरूप देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर भारी विषमता उत्पन्न हुई है।

परिसीमन’ क्या होता है?

परिसीमन (Delimitation) का शाब्दिक अर्थ, ‘विधायी निकाय वाले किसी राज्य में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारण प्रक्रिया’ होता है।

‘परिसीमन प्रक्रिया’ किसके द्वारा पूरी की जाती है?

परिसीमन प्रक्रिया, एक उच्च अधिकार प्राप्त आयोग द्वारा पूरी की जाती है। इस आयोग को औपचारिक रूप से परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) या सीमा आयोग (Boundary Commission) कहा जाता है।

परिसीमन आयोग के आदेशों को क़ानून के समान बल प्राप्त होता है, और इन्हें किसी भी अदालत के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती है।

भारत में अब तक चार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है –

  1. परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952 के तहत वर्ष 1952 में;
  2. परिसीमन आयोग अधिनियम, 1962 के तहत वर्ष 1963 में;
  3. परिसीमन अधिनियम, 1972 के तहत वर्ष 1973 में; और
  4. परिसीमन अधिनियम, 2002 के तहत वर्ष 2002 में।

परिसीमन आयोग के आदेश भारत के राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट तिथि के अनुसार लागू किए जाते हैं। इन आदेशों की प्रतियां लोकसभा या संबंधित विधान सभा के समक्ष रखी जाती हैं और इनमे किसी प्रकार के संशोधन की अनुमति नहीं होती है।

आयोग की संरचना:

परिसीमन आयोग अधिनियम, 2002 के अनुसार, केंद्र द्वारा नियुक्त परिसीमन आयोग में तीन सदस्य होते हैं: अध्यक्ष- उच्चतम न्यायालय का सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, तथा पदेन सदस्य के रूप में मुख्य निर्वाचन आयुक्त अथवा इनके द्वारा नामित निर्वाचन आयुक्त एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पूर्ववर्ती परिसीमन आयोग- शक्तियाँ और कार्य
  2. आयोग की संरचना
  3. आयोग का गठन किसके द्वारा किया जाता है?
  4. आयोग के अंतिम आदेशों में परिवर्तन की अनुमति?
  5. परिसीमन आयोग से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

मेंस लिंक:

निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किस प्रकार और क्यों किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

जल बंटवारे के संदर्भ में दायर याचिका को वापस ले तेलंगाना: केंद्र


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र ने स्पष्ट किया है कि, तेलंगाना द्वारा जल बंटवारे को लेकर उच्चतम न्यायालय में दायर की गयी याचिका को वापस लेने के बाद, केंद्र सरकार, अन्तर्राज्यीय नदी-जल विवाद अधिनियम की धारा 3 के तहत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच कृष्णा नदी-जल के पुनर्वितरण मामले को एक नए न्यायाधिकरण अथवा न्यायमूर्ति बृजेश कुमार की अध्यक्षता में मौजूदा कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण- II को सौंपने पर विचार करेगी।

संबंधित प्रकरण

  • तेलंगाना सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में एक ‘विशेष अनुमति याचिका’ (Special Leave Petition- SLP) दायर की गयी है, जिसमे आंध्र प्रदेश सरकार को ‘रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना’ (Rayalaseema Lift Irrigation Scheme) हेतु निविदा संबंधी प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए निर्देश दिए जाने की मांग की गयी है।
  • तेलंगाना सरकार का कहना है कि, आंध्रप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों के तहत, कृष्णा नदी पर किसी भी नई परियोजना के प्रस्ताव को पहले कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के सामने रखा जाना चाहिए और फिर इसके अनुमोदन हेतु शीर्ष परिषद के समक्ष रखा जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि:

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, दोनों राज्यों में प्रवाहित होने वाली कृष्णा और गोदावरी नदियों तथा इनकी सहायक नदियों के जल को परस्पर साझा करते हैं।

इन राज्यों के द्वारा, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 द्वारा अनिवार्य की गयी, नदी जल बोर्ड, केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री एवं मुख्यमंत्रियों की शीर्ष परिषद की अनुमति के बगैर कई नई परियोजनाएँ शुरू की गयी हैं।

कृष्णा नदी:

  • यह पूर्व दिशा में प्रवाहित होने वाली नदी है।
  • इसका उद्गम महाराष्ट्र में महाबलेश्वर की पहाड़ियों से होता है और बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों से होकर बहती है।
  • नदी-बेसिन: कृष्णा नदी अपनी सहायक नदियों सहित एक विशाल बेसिन का निर्माण करती है। इसका बेसिन चार राज्यों के लगभग 33% भाग में विस्तृत है।

संबंधित विवाद

कृष्णा नदी जल विवाद की शुरुआत पूर्ववर्ती हैदराबाद और मैसूर रियासतों के बीच हुई थी, जोकि बाद में गठित महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों बीच जारी है।

अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत वर्ष 1969 में  कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (Krishna Water Disputes TribunalKWDT) का गठन किया गया था, जिसके द्वारा वर्ष 1973 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी।

कृष्णा नदी जल विवाद न्यायाधिकरण की रिपोर्ट वर्ष 1976 में प्रकाशित की गयी, इसमें कृष्णा नदी जल के 2060 TMC (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) को 75 प्रतिशत निर्भरता के आधार पर तीन भागों में पर विभाजित किया गया था:

  1. महाराष्ट्र के लिए 560 TMC
  2. कर्नाटक के लिए 700 TMC
  3. आंध्र प्रदेश के लिए 800 TMC

संशोधित आदेश:

  • राज्यों के मध्य असंतोष व्यक्त किये जाने पर वर्ष 2004 में दूसरे कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (KWDT) का गठन किया गया।
  • दूसरे KWDT द्वारा वर्ष 2010 में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। इस रिपोर्ट में 65 प्रतिशत निर्भरता के आधार पर कृष्णा नदी के अधिशेष जल का 81 TMC महाराष्ट्र को, 177 TMC कर्नाटक को तथा 190 TMC आंध्र प्रदेश के लिये आवंटित किया गया था।

वर्ष 2014 में तेलंगाना को एक अलग राज्य के रूप में गठित किये जाने के पश्चात, आंध्र प्रदेश द्वारा तेलंगाना को KWDT में एक अलग पक्षकार के रूप में शामिल करने और कृष्णा नदी-जल को तीन के बजाय चार राज्यों में आवंटित किये जाने की मांग की जा रही है।

आंध्र प्रदेश द्वारा बृजेश कुमार ट्रिब्यूनल के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कृष्णा की सहायक नदियाँ
  2. गोदावरी की सहायक नदियाँ
  3. भारत में पूर्व तथा पश्चिम की बहने वाली नदियाँ
  4. अंतरराज्यीय नदी जल विवाद- प्रमुख प्रावधान
  5. कृष्णा एवं गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड- गठन, कार्य और अधिदेश

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चांग’ई-5 प्रोब


Chang’e-5 probe

संदर्भ:

चीनी अंतरिक्ष यान,चंद्रमा की सतह से चट्टानों और मिट्टी के नमूने लेकर पृथ्वी की ओर वापसी कर रहा है। इस अभियान की सफलता के बाद चीन, वर्ष 1970 के बाद से, चंद्रमा की सतह से नमूनों को पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लाने वाला पहला देश बन जाएगा।

प्रमुख बिंदु:

  • चीनी अंतरिक्ष यान इनर मंगोलिया में उतरेगा। चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बाद, चंद्रमा के नमूनों को पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लाने वाला मात्र तीसरा देश होगा।
  • अंतरिक्ष यान द्वारा चंद्रमा की सतह से 2 किलोग्राम (4 पाउंड) भार के नमूने एकत्र करने की योजना थी, किंतु एकत्रित नमूनों की वास्तविक मात्रा को अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

पृष्ठभूमि:

  • चांग’ई-5 प्रोब, 24 नवंबर को प्रक्षेपित किया गया था और इसने 1 दिसंबर को चंद्रमा की सतह को सपर्श किया। इस मिशन को कुल 23 दिन में पूरा किए जाने की संभावना की गयी थी।
  • इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह से चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाना है। यह पिछले चार दशकों में, चंद्रमा से नमूने लाने के लिए किसी भी राष्ट्र द्वारा किया गया पहला प्रयास है।

चांग’ई-5 प्रोब के बारे में:

  • चांग’ई-5 प्रोब, चीन द्वारा प्रक्षेपित किया गया मानवरहित अंतरिक्ष यान है।
  • चांग’ई-5 प्रोब, चार हिस्सों से मिलकर बना है: एक ऑर्बिटर (Orbiter), एक रिटर्नर (Returner), एक आरोहक (Ascender) और एक लैंडर (Lander)।

चांग’ई-5 प्रोब मिशन द्वारा, चीन के अंतरिक्ष इतिहास में निम्नलिखित ‘चार घटनाएं’ पहली बार होंगी:

  1. चंद्रमा की सतह से उड़ान भरने वाला यह पहला प्रोब होगा।
  2. चंद्रमा की सतह से, स्वचालित रूप से नमूने एकत्र करने वाला पहला प्रोब।
  3. चंदमा की सतह पर पहली बार मानवरहित प्रोब का भ्रमण और चन्द्र कक्षा में डॉकिंग।
  4. चंद्र-सतह से नमूनों सहित पलायन वेग (Escape Velocity) से पृथ्वी पर लौटने का पहला अवसर।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मिशन के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. मिशन का महत्व
  4. अन्य देशों द्वारा इस तरह के पिछले अभियान

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

उत्सर्जन कटौती की दिशा में अग्रसर भारत


(India is on track to reduce emissions)

संदर्भ:

हाल ही में, पर्यावरण मंत्री ने कहा है कि, भारत जी-20 राष्ट्रों में एकमात्र प्रमुख देश है, जो भूमंडलीय तापन (Global Warming) में वृद्धि को रोकने के लिए अपनी राष्ट्रीय निर्धारित प्रतिबद्धताओं (Nationally Determined Commitments) को पूरा करने की राह में अग्रसर है।

भारत द्वारा अपने सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में उत्सर्जन कटौती लक्ष्य के 21 प्रतिशत को पूरा कर लिया गया है। ज्ञात हो, भारत ने वर्ष 2030 तक उत्सर्जन में 33-35% कटौती की प्रतिबद्धता निर्धारित की गयी थी

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, पेरिस समझौते की पांचवीं वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस द्वारा चिली और इटली की साझेदारी में संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय जलवायु महत्वाकांक्षी शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन से भारत के पर्यावरण मंत्री द्वारा उपरोक्त टिप्पणियां की गयी थी।

‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC)

वर्ष 2015 में, पेरिस में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र के महत्वपूर्ण जलवायु सम्मेलन से पूर्व, भारत द्वारा ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (Nationally Determined Contribution- NDC) के  रूप में तीन प्रमुख स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं की घोषणा की गयी थी:

  1. वर्ष 2030 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के मुकाबले 33-35 फीसदी तक कम करना।
  2. वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत् की हिस्सेदारी में 40% तक की वृद्धि करना।
  3. 5 से 3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने हेतु वन आवरण में वृद्धि करना।

पेरिस समझौता:

यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसे 12 दिसंबर, 2015 को पेरिस में आयोजित COP 21 में अपनाया गया था।

  • पेरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस के अंदर सीमित रखने और तापमान वृद्धि को 5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • यह समझौता 4 नवंबर, 2016 को लागू किया गया और वर्तमान में, इसमें 188 सदस्य शामिल हैं।
  • सभी पक्षकारों से, समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु महत्वाकांक्षी प्रयास किये जाने और ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) के रूप में, प्रत्येक पांच वर्ष में, अपनी प्रतिबद्धताएं जाहिर करने की अपेक्षा की जाती है।
  • समझौते के पहले दौर में, 186 सदस्य देशों द्वारा अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) को प्रस्तुत किया गया था।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. पेरिस समझौता क्या है?
  2. किन देशों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं?
  3. पेरिस समझौते के लक्ष्य
  4. पेरिस समझौते के तहत निर्धारित वित्त व्यवस्था।

मेंस लिंक:

पेरिस जलवायु समझौते के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 2019-20 (NFHS-5)

असम राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण निष्कर्ष:

  • असम के लिंगानुपात में महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। राज्य में वर्ष 2019-20 के दौरान, प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,012 महिला शिशुओं ने जन्म लिया है। राज्य में वर्ष 2015-16 के दौरान प्रति हजार पुरुषों पर 993 महिलाओं का लिंगानुपात था।
  • हालांकि, पिछले सर्वेक्षण की तुलना में, निर्धारित आयु से पूर्व शादी करने वाली महिलाओं और पुरुषों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गयी। सर्वेक्षण में शामिल 31. 8% महिलाओं द्वारा 18 वर्ष की उम्र से पहले शादी की गयी थी, जबकि 2015-16 में इन महिलाओं का प्रतिशत 30.8 था।
  • हालांकि, नवीनतम सर्वेक्षण में कुल प्रजनन दर प्रति महिला 2.2 दर्ज जीवित जन्म दर्ज की गयी, जबकि NFHS-4 कुल प्रजनन दर 1.9 थी।
  • दोनों सर्वेक्षणों के मध्य, महिला नसबंदी  9.5% से कम होकर 9% हो गयी जबकि पुरुष नसबंदी 0.1% पर स्थिर रही।
  • सर्वेक्षण के अनुसार, पांच वर्ष पहले की तुलना में, 6-59 महीने की आयु वर्ग के अधिक बच्चे रक्त-अल्पता से ग्रसित पाए गए।

मिरिस्टिका स्वैम्प ट्रीफ्रॉग

(Myristica swamp treefrog)

यह पश्चिमी घाट के लिए स्थानिक, पेड़ों पर रहने वाली (arboreal) दुर्लभ प्रजाति है।

ये मेढक अपने प्रजनन काल के दौरान केवल कुछ हफ्तों के लिए सक्रिय होते हैं।

प्रजनन-काल की समाप्ति से पहले, मादा मेंढ़क अपने नर मेढकों सहित जंगलों की सतह पर उतर आते हैं।

मादा मेढक, जमीन में कम गहराई के बिल खोद कर, इनमे अंडे देती है। प्रजनन और अंडे देने के बाद ये मेढक वापस ऊँचे वृक्षों की शाखाओं पर पहुँच जाते है, और अगले प्रजनन काल तक दिखाई नहीं देते हैं।

संदर्भ:

हाल ही में, केरल के त्रिशूर जिले में वाज़चल रिजर्व फ़ॉरेस्ट (Vazhachal Reserve Forest) के शेंकोटा दर्रे (Shencottah gap) के उत्तर में पहली बार इस प्रजाति को देखा गया है।

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काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं वाघ अभ्यारण्य

(Kaziranga National Park and Tiger Reserve)

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं वाघ अभ्यारण्य में अब नावों के द्वारा भ्रमण किया जा सकता है, और साइकिलों द्वारा भ्रमण किये जाने की योजना अंतिम दौर में है। किंतु, नई गतिविधियों को 1,302  वर्ग किमी में, काज़ीरंगा के 482 वर्ग किमी के कोर क्षेत्र से बाहर, किये जाने की अनुमति दी गयी है।

प्रमुख तथ्य:

  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम में स्थित है।
  • मैरी कर्जन की सिफारिश पर वर्ष 1908 में गठित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पूर्वी हिमालयी जैव विविधता के आकर्षण के केंद्र – गोलाघाट और नागांव जिले में विस्तृत है।
  • इस उद्यान में, विश्व के दो-तिहाई एक सींग वाले प्रसिद्ध गैंडे पाए जाते हैं।
  • इस उद्यान को ‘विश्व धरोहर-स्थल’ का दर्जा प्राप्त है।
  • इसे स्थानीय पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिए बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र काजीरंगा में ‘बड़ी चार’ प्रजातियों- राइनो, हाथी, रॉयल बंगाल टाइगर और एशियाई जल भैंस के संरक्षण के प्रयासों हेतु कार्यक्रम चलाये जा रहे है।
  • काज़ीरंगा भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले प्राइमेट्स की 14 प्रजातियों में से 9 का आवास भी है।

 भारतीय कंपनियों के लिए विविधता आवश्यकताएँ

(diversity requirements that Indian companies)

  • स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध, 100 करोड़ रुपये की निवल पूंजी या 300 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाली सभी सार्वजनिक कंपनियों में कंपनी अधिनियम के तहत कम से कम एक महिला बोर्ड सदस्य होना आवश्यक है।
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा बाजार में शीर्ष 1000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए न्यूनतम एक महिला को बोर्ड सदस्य तथा स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है।

भारत में व्यापक स्वास्थ्य कवरेज रुपरेखा तय करने हेतु ‘लांसेट नागरिक आयोग’

  • यह भारत में दस वर्षों की अवधि के भीतर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (universal health coverage– UHC) प्राप्त करने के लिए नागरिकों के रोडमैप को विकसित करने के लिए सभी क्षेत्रों में लागू की जाने वाली एक पहल है।
  • इसे, हाल ही में शुरू किया गया है।
  • यह विश्व की प्रमुख स्वास्थ्य पत्रिका ‘द लांसेट’ और लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की भागीदारी वाली देशव्यापी पहल है।
  • आयोग का मिशन आगामी दशक में सभी हितधारकों के साथ काम करते हुए भारत में UHC को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करना है।

यह आयोग को चार सिद्धांतों के तहत कार्य करेगा: पहला, सभी स्वास्थ्य चिंताओं को UHC  के अंतर्गत लाना; दूसरा, रोकथाम और दीर्घकालिक देखभाल; तीसरा, स्वास्थ्य संबंधी सभी व्यय को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना; और अंतिम, सभी को समान गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने वाली स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण करना।


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