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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 December

 

विषय – सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. महाराष्ट्र सरकार द्वारा यौन अपराधों पर विधेयक

2. भारत में पड़ने वाले सभी सूखों का कारण ‘अल नीनो’ नहीं होता है।

 

सामान्य अध्ययन-II

1. संविधान की सातवीं अनुसूची पर पुनः विचार किए जाने की आवश्यकता

2. प्लास्मोडियम ओवले प्रजाति एवं मलेरिया के अन्य प्रकार

3. जस्टिस जैन समिति

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां’ (AUM)

2. ‘विदेशी पालतू जीवों का विवरण दें, अभियोजन से बचें’ योजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. WHO प्री-क्वालिफिकेशन

2. महाराष्ट्र द्वारा फिल्म क्षेत्र को उद्योग का दर्जा

3. मालदीव में वारंट जारी करने हेतु नियमों की अधिसूचना

4. महाशरद

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा यौन अपराधों पर विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार द्वारा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा संबंधी मौजूदा कानूनों में परिवर्तन करते हुए एक विधेयक का ड्राफ्ट/मसौदा पेश किया गया है।

यह विधेयक पारित होने के उपरांत ‘शक्ति अधिनियम’, 2020 के रूप में जाना जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा नया कानून बनाने का कारण

राज्य में हिंसा संबंधी मामलों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में होने वाली वृद्धि पर रोक लगाने हेतु नया क़ानून लाया गया है।

विधेयक के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधान

  • विधेयक के मसौदे में, भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) और यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम में बदलाव करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • बलात्कार, यौन उत्पीड़न, एसिड हमले और बाल यौन शोषण से संबंधित मौजूदा कानूनों की धाराओं में परिवर्तन किया जाएगा।
  • विधेयक में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा बलात्कार, नाबालिगों के यौन उत्पीड़न और एसिड हमले द्वारा गंभीर रूप से घायल करने संबंधी मामलों में मौत की सजा का प्रस्ताव किया गया है।
  • जघन्य प्रकृति के अपराधों के लिए और जहाँ पर पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है, और परिस्थितियों द्वारा एक अनुकरणीय सजा की मांग किये जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।

सोशल मीडिया से संबंधित विशिष्ट प्रावधान

  • प्रस्तावित विधेयक में सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार से निपटने के लिए एक अतिरिक्त कानून का प्रस्ताव किया गया है।
  • किसी महिला के लिए जानबूझकर ‘खतरे, धमकाने और भय का माहौल बनाने और उसकी गरिमा को ठेस पहुचाने वाले किसी कृत्य, लेख अथवा शब्दों का प्रयोग करना या घृणास्पद टिप्पणी करना भी अपराध की श्रेणी में शामिल करने और इसके लिए दो साल तक के कारावास और 1 लाख रुपये का जुर्माने का दंड दिए जाने हेतु ‘धारा 354E को जोड़ा गया है।
  • इसके तहत महिलाओं के ‘विकृत’ किये गए वीडियो (Morphed Videos) अपलोड करना या उनकी निजता का उल्लंघन करने वाले या सम्मान को ठेस पहुचाने वाले वीडियो या फोटो अपलोड करने की धमकी देना भी शामिल है।

‘मिथ्या जानकारी’ संबंधी प्रावधान

विधेयक में किसी व्यक्ति को नितांत, अपमानित करने, धमकाने या जबरदस्ती बसूली करने, बदनाम या उत्पीड़न करने के उद्देश्य से की गयी ‘झूठी शिकायत’ अथवा तथाकथित अपराध करने के संबंध में गलत जानकारी प्रदान करने पर एक वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है।

प्रीलिम्स और मेंस लिंक:

  1. ‘शक्ति अधिनियम’, 2020 के प्रमुख प्रावधान और महत्व।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ

भारत में पड़ने वाले सभी सूखों का कारण ‘अल नीनो’ नहीं होता है


संदर्भ:

नवीनतम निष्कर्षों के अनुसार, भारत में, पिछली सदी के दौरान ग्रीष्मकालीन-मानसून में गैर-अल नीनो वर्षों में पड़ने वाले 10 सूखों (Droughts) में से लगभग छह सूखों का कारण उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र से उत्पन्न वायुमंडलीय विक्षोभ हो सकता है।

भारत में वर्ष 2014 के दौरान सामान्य से 14% वर्षा की कमी- या सूखा- दर्ज किया गया और यह अल-नीनो से संबंधित नहीं था। इससे पहले, इस प्रकार की स्थितियां वर्ष 1985 और 1986 में दर्ज की गई थी।

इस प्रकार के सूखों से संबधित कारक

इस प्रकार का सूखा, अगस्त महीने में अंतिम समय के दौरान होने वाली बारिश में अचानक और तेज गिरावट होने का परिणाम होता है।

  • ऊपरी वायुमंडल में स्थित वायु, असामान्य रूप से ठंडे उत्तरी अटलांटिक जल के ऊपर निर्मित गहन चक्रवातीय परिसंचरण के साथ अभिक्रिया करती हैं। इसके परिणामस्वरूप ‘रॉस्बी तरंगे (Rossby wave)’ नामक वायु तरंगें निर्मित होती हैं।
  • ये तरंगे उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र से उठकर तिब्बती पठार की और वक्रीय मार्ग में गति करती है तथा मध्य अगस्त के आसपास उपमहाद्वीप से टकराती हैं और वर्षा का शमन करती हुई मानसून को समाप्त कर देती हैं

‘अल-नीनो’ क्या है?

  • ‘अल-नीनो’ (El Niño) एक जलवायु चक्र है, जिसके तहत पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में उच्च वायुदाब और पूर्वी प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में निम्न वायुदाब की स्थिति होती है।
  • इस घटना के दौरान, पूर्वी और मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि होती है।
  • यह, अल नीनो दक्षिणी दोलन (El Niño Southern Oscillation ENSO) कहे जाने वाले क्रमिक जलवायु चक्र का एक चरण है।

‘अल नीनो’ के कारण:

  • प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में वायुदाब तथा तापमान प्रतिरूप में विसंगति होने पर ‘अल नीनो’ (El Niño) की उत्पत्ति होती है।
  • ‘अल नीनो’ की स्थिति में, पश्चिम की ओर बहने वाली व्यापारिक पवने भूमध्य रेखा के समीप कमज़ोर हो जाती हैं और वायुदाब में परिवर्तन होने के कारण, महासागर का सतही जल पूर्व दिशा में दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट की ओर प्रवाहित होने लगता है।
  • मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के तापमान में छह महीने तक वृद्धि होने पर ‘अल-नीनो’ की स्थिति उत्पन्न होती है।

El_nino

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अल-नीनो क्या है?
  2. ला-नीना क्या है?
  3. ENSO क्या है?
  4. ये परिघटनाएँ कब होती हैं?
  5. एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया पर ENSO का प्रभाव।

मेंस लिंक:

अल-नीनो मौसमी परिघटना के भारत पर प्रभाव संबंधी चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

संविधान की सातवीं अनुसूची पर पुनः विचार किए जाने की आवश्यकता


संदर्भ:

हाल ही में, पंद्रहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह ने संविधान की सातवीं अनुसूची पर फिर से विचार किये जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। है। सातवीं अनुसूची, केंद्र और राज्यों के मध्य विषयों के बंटवारे का आधार प्रदान करती है।

वित्त आयोग के अध्यक्ष ने कहा है, कि राज्यों के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लागू करने और राजकोषीय संघवाद (fiscal federalism) में विश्वास को सुदृढ करने हेतु ‘सातवीं अनुसूची’ पर नए सिरे से विचार किया जाना आवश्यक है।

सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule)

संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत सातवीं अनुसूची संघ और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन से संबंधित है।

इसमें तीन सूचियाँ सम्मिलित हैं- संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।

  • इसमें, संघीय सूची के तहत दिये गये विषयों पर केन्द्र सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, तथा राज्य सरकारों को राज्य सूची में दिये गये विषयों पर कानून बनाने के अधिकार दिये गये हैं।
  • समवर्ती सूची के तहत आने वाले विषयों पर केन्द्र और राज्य दोनों को कानून बनाने के अधिकार दिये गये हैं। हालाँकि किसी विवाद की स्थिति में केन्द्र के कानून ही मान्य होंगे।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. सातवीं अनुसूची क्या है?
  2. सातवीं अनुसूची के तहत विषय
  3. अवशिष्ट शक्तियां
  4. केंद्रीय कानून और राज्य कानून के मध्य संघर्ष की स्थिति में परिणाम?

मेंस लिंक:

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समीक्षा की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

प्लास्मोडियम ओवले प्रजाति एवं मलेरिया के अन्य प्रकार


(Plasmodium ovale and other types of malaria)

संदर्भ:

हाल ही में, केरल में ‘सूडान’ से वापस लौटे एक सैनिक को मलेरिया की एक नई प्रजाति ‘प्लास्मोडियम ओवले’ (Plasmodium ovale) से ग्रसित पाया गया है। यह मलेरिया की एक विरल प्रजाति है।

मलेरिया के बारे में:

  • मलेरिया, एक परजीवी-जनित बीमारी है। मलेरिया परजीवी आमतौर पर एक विशेष प्रकार के मच्छर को संक्रमित करता है। यह मुख्यतः मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्‍छरों से फैलता है।
  • मलेरिया परजीवी पांच प्रकार के होते हैं: प्‍लासमोडियम फेलसिपेरम (Plasmodium falciparum), प्‍लासमोडियम वीवेक्‍स ( vivax), प्‍लासमोडियम ओवले (P. ovale), पी.

प्लास्मोडियम ओवले:

प्लास्मोडियम ओवले मलेरिया परजीवी से संक्रमित होने पर 48 घंटों तक बुखार, सिरदर्द और मतली जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसका उपचार, प्‍लासमोडियम वीवेक्‍स (P. vivax) से संक्रमित व्यक्ति के ईलाज के समान ही होता है। पी. ओवले, वायरल संक्रमण फैलने की स्थिति तक खतरनाक नहीं होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वायरस और बैक्टीरिया के कारण होने वाले विभिन्न रोगों में अंतर और उदाहरण।
  2. मलेरिया- कारण और उपचार।
  3. मलेरिया के प्रकार।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

जस्टिस जैन समिति


(Justice Jain committee)

सितंबर 2018 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित।

इस समिति का कार्य वर्ष 1994 में इसरो (ISRO) से संबंधित एक कुख्यात ‘झूठे आरोपों’ के मामले के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारी को स्पष्ट करना था। इस प्रकरण ने देश के प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में से एक, नांबी नारायणन के जीवन और प्रतिष्ठा को नष्ट कर दिया था।

संबंधित प्रकरण

  • श्री नारायणन के लिए 30 नवंबर, 1994 को जासूसी के एक झूठे मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय नारायणन प्रमुख भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में क्रायोजेनिक इंजन तकनीक पर काम कर रहे थे।
  • पुलिस जांचकर्ताओं द्वारा उन पर वाइकिंग (Viking) / विकास इंजन प्रौद्योगिकी (Vikas engine technology), क्रायोजेनिक इंजन प्रौद्योगिकी और पीएसएलवी उड़ान डेटा / ड्राइंग से संबंधित इसरो के दस्तावेजों और चित्रों को पाकिस्तान के लिए भेजने का आरोप लगाया गया था।

उक्त प्रकरण में उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही

  • वर्ष 2018 में, उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले को ‘ख्याली भ्रम’ के आधार पर एक आपराधिक ‘फ्रेम-अप’ बताते हर खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा, कि इस मामले से श्री नारायणन का करियर पूरी तरह से नष्ट हो गया।
  • इस मामले की जांच, केरल पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी गयी थी और सीबीआई ने वर्ष 1996 में तत्परता से इस मामले की क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी। किंतु श्री नारायणन ने अपने ऊपर आरोप लगाने वालों को सजा दिलाने हेतु लड़ाई जारी रखी।
  • शीर्ष अदालत ने अपने 2018 के फैसले में कहा, कि हिरासत के दौरान वैज्ञानिक श्री नारायणन से किया गया व्यवहार ‘मनो-रोगात्मक’ था।
  • अदालत ने केरल सरकार को श्री नारायणन को 50 लाख रुपए की मुआवजा राशि के भुगतान का आदेश दिया, और कहा कि, वैज्ञानिक के लिए चौबीस साल की यातना झेलनी पड़ी, इसकी भरपाई मात्र पैसों से नहीं की जा सकती है।
  • इसके अलावा, वैज्ञानिक का कहना था कि केरल पुलिस द्वारा की गयी कार्रवाई से उनके निजी जीवन और करियर पर ‘विनाशकारी प्रभाव’ पड़ा और साथ ही, इसने अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में तकनीकी प्रगति को पीछे धकेल दिया।

क्रायोजेनिक प्रोद्योगिकी

  • क्रायोजेनिक प्रोद्योगिकी में बेहद कम तापमान पर रॉकेट प्रणोदक का उपयोग किया जाता है।
  • इसमें, तरल ऑक्सीजन और तरल हाइड्रोजन के मिश्रण से रॉकेट इंजनों के लिए उच्चतम ऊर्जा दक्षता प्रदान की जाती है, जो कि बड़ी मात्रा में ‘थ्रस्ट’ उत्पन्न करने की लिए आवश्यक होती है।
  • क्रायोजेनिक प्रणोदकों (तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन) से प्राप्त होने वाला विशिष्ट आवेग (Specific impulse), पृथ्वी पर पाए जाने वाले भंडार-योग्य तरल और ठोस प्रणोदकों की तुलना में काफी अधिक होता है, जिससे इसे पर्याप्त पेलोड ले जाने में लाभ मिलता है।

भारत के लिए इस तकनीक का महत्व

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, जापान, चीन और रूस के बाद क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने वाला भारत 6 वाँ देश है।
  2. भारत, क्रायोजेनिक इंजनों की मदद से भारी उपग्रहों (2500-3000 किलोग्राम से अधिक वजन) को प्रक्षेपित कर सकता है, और यह तकनीक जीएसएलवी कार्यक्रम की सफलता के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।
  3. यह प्रौद्योगिकी इस संदर्भ में भी महत्व रखती है, कि 1990 के दशक में भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस तकनीक को देने से मना कर दिया था। उस समय भारत, रूसी एजेंसी के साथ प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए समझौता प्रक्रिया जारी थी।
  4. इस तकनीक को हासिल करने बाद भारत को अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है।
  5. यह तकनीक इसरो के लिए अंतरिक्ष का गहन अन्वेषण करने में मदद करेगी और साथ ही भारी भारी उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण से अतिरिक्त राजस्व भी उपलब्ध कराएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी क्या है?
  2. यह किस प्रकार कार्य करती है?
  3. लाभ
  4. चुनौतियां
  5. क्रायोजेनिक तकनीक हासिल करने वाले देश

मैंस लिंक:

क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी के विकास में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

‘प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां’ (AUM)


(Asset Under Management)

संदर्भ:

चालू वित्त वर्ष में ‘संकुचन’ (contraction) होने की संभावना के दौरान, पिछले दस सालों में पहली बार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) की ‘प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों’ (Asset Under ManagementAUM) में अगले वित्तीय वर्ष में 5-6% की अपेक्षाकृत मंद दर से दोबारा वृद्धि हो सकती है।

इस बदलाव में सर्वाधिक प्रतिशत भाग बड़ी संस्थाओं का होगा।

आगे की चुनौतियां:

  • अगले वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी में 10% वृद्धि होने के अनुमान के बावजूद, कुल मिलकर NBFC क्षेत्र की वृद्धि दर धीमी होने की संभावना है क्योंकि परिसंपत्तियों की गुणवत्ता पर महामारी के प्रभाव संबंधी चिंताओं के कारण धन तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है।
  • इसके अतिरिक्त, छोटी जमाओं की अधिकता वाली बैंकों से प्रतिस्पर्धा अधिक तीव्र होने की उम्मीद है। इन बैंकों के पास पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर पूंजी बफर उपलब्ध है।

‘प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां’ क्या होती हैं?

  • ‘प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों’ (Asset Under Management- AUM) में, किसी वित्तीय संस्थान द्वारा निजी तथा अपने ग्राहकों की ओर से प्रबंधित की जाने वाली ‘वित्तीय परिसंपत्तियां’ शामिल होती है। इसके तहत, इस प्रकार की सभी ‘वित्तीय परिसंपत्तियों’ के कुल बाजार मूल्य को मापा जाता है।
  • प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (AUM), किसी वित्तीय संस्थान के आकार और सफलता का सूचक होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. AUM क्या है?
  2. इसके घटक
  3. सकारात्मक और नकारात्मक AUM
  4. NBFC क्या हैं?
  5. NBFC के प्रकार
  6. बैंक बनाम NBFC – समानताएं और अंतर

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘विदेशी पालतू जीवों का विवरण दें, अभियोजन से बचें’ योजना


(Declare exotic pets, avoid prosecution: how one-time scheme works)

संदर्भ:

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति को, जून और दिसंबर के मध्य, विदेशी वन्यजीव प्रजातियों को अवैध रूप से हासिल करने या अपने कब्जे में रखने की घोषणा करने पर जांच और अभियोजन से उन्मुक्ति प्रदान किये जाने का आदेश दिया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस आदेश को बरकरार रखा है।

‘स्वैच्छिक प्रकटीकरण’ योजना क्या है?

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा  एकमुश्त स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना (one-time voluntary disclosure scheme) पर एक एडवाइजरी जारी की गयी है, जिसमे जून से दिसंबर 2020 के मध्य विदेशज प्रजातियों के मालिकों द्वारा अवैध रूप से, या दस्तावेजों के बिना हाशिल किये गए विदेशी जीवित प्रजातियों का विवरण देने की अनुमति दी गयी है।

निहितार्थ:

इस योजना का उद्देश्य जूनोटिक रोगों की चुनौती का समाधान करना, ‘वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) के अनुपालन हेतु विदेशी प्रजातियों की एक सूची विकसित करना और उनके आयात को विनियमित करना है।

योजना के तहत विदेशज़ प्रजातियों की सूची

  • एडवाइजरी के अनुसार, ‘विदेशज जीवित प्रजातियां’ (Exotic live species) के अंतर्गत ‘वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora- CITES) की परिशिष्ट I, II तथा III में अधिसूचित लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में शामिल किया गया है।
  • इसमें ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972‘ (Wild Life (Protection) Act, 1972) के तहत अधिसूचित प्रजातियों को शामिल नहीं किया गया है।
  • एडवाइजरी में विदेशी पक्षियों को एमनेस्टी योजना से बाहर रखा गया है।

‘वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय’ (CITES)

  • CITES, एक अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय समझौता है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों पक्षियों और वनस्पतिक पौधों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से इनकी सुरक्षा करना है।
  • भारत, CITES का एक सदस्य देश है।
  • CITES की परिशिष्ट I, II और III में 5,950 प्रजातियों की सूची है, जिनको अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से होने वाले अत्यधिक शोषण से संरक्षित किया गया है।
  • भारत में भारी मांग वाले विदेशज जीवों में बॉल पाइथन (Ball python), स्कारलेट मैकॉ (Scarlet Macaw), समुद्री कछुए, सुग ग्लाइडर (Petaurus breviceps), अफ्रीकन बंदर (marmoset) और भूरे अफ्रीकी तोते, आदि सम्मिलित हैं।

भारत में विदेशज जीवों के अवैध व्यापार की समस्या

  • तस्करी विरोधी कानूनों को लागू करने वाले राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence-DRI) के अनुसार, भारत, विदेशी पक्षियों और जानवरों के लिए एक बड़े मांग केंद्र के रूप में उभरा है और इस कारण भारत में विश्व के विभिन्न हिस्सों से लुप्तप्राय प्रजातियों की तस्करी में वृद्धि हुई है।
  • अधिकांश विदेशज जीवों का आयात अवैध मार्गों से किया जाता है और फिर इन्हें पालतू पशुओं के रूप में घरेलू बाजार में बेचा जाता है।

cites

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विदेशज प्रजातियां क्या हैं- एडवाइजरी में दी गयी परिभाषा?
  2. CITES क्या है?
  3. CITES के तहत प्रजातियों का वर्गीकरण?
  4. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम क्या है?
  5. नए दिशानिर्देशों के अनुसार, नई विदेशी प्रजातियों का आयात करते समय क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
  6. राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन

मेंस लिंक:

देश में विदेशज प्रजातियों के आयात के लिए हाल ही में जारी किये गए दिशा-निर्देशों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


WHO प्री-क्वालिफिकेशन

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्री-क्वालिफिकेशन प्रोजेक्ट को वर्ष 2001 में शुरू किया गया था।
  • इसके तहत एचआईवी / एड्स, मलेरिया और तपेदिक के लिए गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के एकीकृत मानकों को पूरा करने वाली दवाओं तक पहुंच को सुगम बनाया जाता है।
  • प्री-क्वालिफिकेशन प्रक्रिया में उत्पाद का एक पारदर्शी, वैज्ञानिक रूप से उचित मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें संबंधित कागजातों की समीक्षा, स्थिरता परीक्षण या प्रदर्शन मूल्यांकन और निर्माण स्थल का दौरा भी शामिल होता है।

संदर्भ:

बायोलॉजिकल ई (Biological E) के एक सिंगल-डोज इंजेक्शन टाइफाइड कांजुगेट वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्री-क्वालिफाईड घोषित किया गया है।

महाराष्ट्र द्वारा फिल्म क्षेत्र को उद्योग का दर्जा

महाराष्ट्र सरकार ने फिल्म और मनोरंजन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है।

  • हालांकि, ‘उद्योग का दर्जा’ शब्द वास्तव में भारत के किसी कानून में विशेष रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
  • उद्योग का दर्जा प्रदान करना, वस्तुतः किसी क्षेत्र के राज्य / केंद्रीय औद्योगिक नीति में समावेशन को दर्शाता है।

तत्कालिक लाभ: (i) कम ब्याज दरों पर और कम परेशानी के साथ ऋण प्राप्त करना; (ii) बड़े निवेशक किसी प्रोजेक्ट में भागीदार बन सकेंगे; (iii) क्षेत्र में इक्विटी निवेश को आकर्षित करना; और (iv) डेवलपर्स को अपने मौजूदा ऋणों को पुनर्वित्त करने में सक्षम होंगे।

 मालदीव में वारंट जारी करने हेतु नियमों की अधिसूचना

गृह मंत्रालय द्वारा, दोनों देशों के बीच एक समझौते के अनुसार, मालदीव और भारत में वांछित अभियुक्तों को सम्मन भेजने या तलाशी वारंट भेजने के लिए भारतीय अदालतों के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया गया है।

महाशरद

(MahaSharad)

  • महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा शुरू किया जाएगा।
  • यह एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो विकलांग लोगों के लिए आवश्यक उपकरणों को मुफ्त में प्रदान करेगा।
  • महाशरद (MahaSharad) का पूरा नाम ‘महाराष्ट्र स्वास्थ्य पुनर्वास और दिव्यांग हेतु सहायता प्रणाली’ (Maharashtra System of Health Rehabilitation and Assistance for Divyang) है।

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