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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. अमेरिका के कुछ भागों में ‘उत्तरी ज्योति’ की घटना

 

सामान्य अध्ययन-II

1. कर्नाटक का नया गौ-हत्या विरोधी विधेयक

2. एंथ्रेक्स से हाथियों की मौत के बाद टीकाकरण अभियान

3. आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. आत्मानिर्भर भारत योजना (ABRY)

2. क्वांटम कुंजी वितरण (QKD)

3. नया संसद भवन

4. फ्रांस के प्रस्तावित कानून में इस्लामवाद की खिलाफत

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘जगनन्ना जीवा क्रांति’ योजना

2. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार- 2020

3. बेटर देन कैश एलायंस

4. हनुकाह पर्व

5. इस्किमम जंतरमनामी

6. कोइलवर ब्रिज

7. भारत में दुनिया का पहला सैटेलाइट आधारित नैरोबैंड-आईओटी नेटवर्क

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ

अमेरिका के कुछ भागों में ‘उत्तरी ज्योति’ की घटना


संदर्भ:

उत्तरी ज्योति’ (Northern Lights), जिसे ‘ऑरोरा बोरेलिस’ या ‘उत्तर धुर्वीय ज्योति’ (Aurora Borealis) भी कहा जाता है, आमतौर पर ध्रुवीय क्षेत्रों या यूरोप के उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों में देखी जाती है। किंतु, 11 दिसंबर को अमेरिका के इलिनॉयस (Illinois) और पेंसिल्वेनिया (Pennsylvania) के कुछ हिस्सों में ‘उत्तर धुर्वीय ज्योति’ (Aurora Borealis) देखी जा सकती है।

इसका कारण:

इस घटना का कारण, एक सौर-धब्बे (Sunspot) से उत्पन्न होने वाली सौर- लपट (solar flare) है। सौर-लपट के साथ कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (Coronal Mass EjectionCME) भी हो रहा है। कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (CME), सूर्य से उत्सर्जित होने वाले विकिरण और सौर-कणों का एक बड़ा बुलबुला होता है जो अत्यधिक तीव्र गति से अंतरिक्ष में विस्फोटित होता है। इस कारण, ‘उत्तरी ज्योति’ सामान्य से अधिक जगहों पर दिखाई देती है।

‘धुर्वीय ज्योति’ क्या होती है?

‘धुर्वीय ज्योति’ अथवा ऑरोरा (Aurora), मुख्य रूप से उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों (आर्कटिक और अंटार्कटिक) पर आकाश में दिखाई देने वाली रोशनी होती है। इसे ध्रुवीय प्रकाश (Polar light) के रूप में भी जाना जाता है।

‘धुर्वीय ज्योति’ के प्रकार:

‘धुर्वीय ज्योति’ अथवा ऑरोरा, दो प्रकार की होती है- ‘ऑरोरा बोरेलिस’ (aurora borealis) और ऑरोरा ऑस्ट्रालिस (aurora australis)। इन्हें बहुधा, उत्तर धुर्वीय ज्योति एवं दक्षिण धुर्वीय ज्योति भी कहा जाता है।

घटना-स्थल:

‘धुर्वीय ज्योति’, आमतौर पर उत्तरी और दक्षिणी उच्च अक्षांशों पर दिखाई देती हैं। इसके अलावा, मध्य अक्षांशों पर इनकी आवृत्ति कम होती है, जबकि भूमध्य रेखा के नजदीक कभी-कभार दिखाई देती है।

‘धुर्वीय ज्योति’ के रंग:

‘धुर्वीय ज्योति’ या ऑरोरा, में आमतौर पर दूधिया हरे रंग की प्रचुरता होती है, लेकिन इनमे लाल, नीले, बैंगनी, गुलाबी और सफेद भी दिखा सकता है। इन रंगो का आकार लगातार बदलता हुआ दिखाई देता है।

इसकी उत्पत्ति के पीछे विज्ञान:

  • ऑरोरा, इस बात का एक स्पष्ट संकेत है कि हमारा ग्रह विद्युतीय रूप से सूर्य से जुड़ा हुआ है। ये दिखाई देने वाला प्रकाश सूर्य की उर्जा से उत्प्रेरित होता है और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में पाए जाने वाले विद्युत-आवेशित कणों से उत्तेजित होता है।
  • आदर्श रूप में धुर्वीय ज्योति की उत्पत्ति, अंतरिक्ष से आने वाले तीव्र-गति के इलेक्ट्रानों तथा पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में उपस्थित ऑक्सीजन और नाइट्रोजन अणुओं के परस्पर टकराने से होती है।
  • पृथ्वी के चुंबकीय मंडल से आने वाले इलेक्ट्रान की उर्जा, पृथ्वी के उपरी वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के परमाणुओं और अणुओं में स्थानांतरित होकर इन्हें उत्तेजित कर देती है।
  • ये गैसें अपनी सामान्य स्थिति में वापस आने पर, प्रकाश के रूप उर्जा के छोटे बंडलों, फोटॉन (photons) का उत्सर्जन करती हैं।
  • जब पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहरी वायुमंडल में, भारी मात्रा में इलेक्ट्रानों की बमबारी होती है, तो ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से पर्याप्त मात्रा में प्रकाश का उत्सर्जन होता है, जिसे नंगी आँखों से देखा जा सकता है, और इससे बहुत खूबसूरत दृश्य दिखाई देते हैं।

इनका उत्पत्ति-स्थल

धुर्वीय ज्योति की उत्पत्ति, 100 से 400 किमी से अधिक की ऊंचाई पर होती है।

धुर्वीय ज्योति के विभिन्न रंगों और आकार का कारण

  1. ऑरोरा में दिखाई देने वाले रंग इस बात पर निर्भर करते है, कि इलेक्ट्रॉनों के द्वारा किस मात्रा में और कौन सी गैस- ऑक्सीजन या नाइट्रोजन- उत्तेजित की जा रही है। धुर्वीय ज्योति में रंग, इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता और टकराव के समय इनकी उर्जा पर भी निर्भर करते हैं।
  2. इलेक्ट्रॉनों की उच्च ऊर्जा के कारण ऑक्सीजन, हरे रंग के प्रकाश (ऑरोरा का सबसे प्रमुख रंग) का उत्सर्जन करती है, जबकि इलेक्ट्रॉन की निम्न उर्जा होने पर लाल रंग के प्रकाश का उत्सर्जन होता है। नाइट्रोजन, आमतौर रंग के प्रकाश का उत्सर्जन करती है।
  3. इन रंगों के मिश्रण से बैगनी, गुलाबी और सफ़ेद रंग दिखाई देते हैं। ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से पराबैंगनी प्रकाश का भी उत्सर्जन होता है, जिसे सॅटॅलाइट पर लगे हुए विशेष कैमरों से देखा जा सकता है।

ऑरोरा का प्रभाव:

  • ऑरोरा की घटना होने पर संचार लाइन, रेडियो लाइन और विद्युत् लाइन्स प्रभावित हो सकती हैं।
  • यहां यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस सारी प्रक्रिया के पीछे, सौर-हवाओं के रूप में सूर्य की ऊर्जा होती है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘धुर्वीय ज्योति’ या ऑरोरा क्या हैं?
  2. प्रकार?
  3. इनका निर्माण?
  4. प्रभाव
  5. सौर-लपटें क्या होती हैं?
  6. कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (CME) क्या है?
  7. ऑरोरा की उत्पत्ति पर सौर-लपटों का प्रभाव

मेंस लिंक:

धुर्वीय ज्योति की उत्पत्ति प्रक्रिया पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

कर्नाटक का नया गौ-हत्या विरोधी विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, कर्नाटक सरकार द्वारा ‘कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण विधेयक’ 2020 (Karnataka Prevention of Slaughter and Preservation of Cattle Bill, 2020) विधानसभा में पारित किया गया है।

कर्नाटक के नए विधेयक में ‘गोमांस’ और मवेशी’ की परिभाषा

  • गोधन या गाय-बैलों के मांस के किसी भी रूप को गोमांस’ (Beef) के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • मवेशी’ (Cattle) के तहत, गाय, गाय के बछड़े एवं बैल, सांड, तेरह साल से कम आयु की नर तथा मादा भैंस को सम्मिलित किया गया है।
  • गौ शाला: पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग द्वारा पंजीकृत मवेशियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए स्थापित आश्रय स्थल।

जांच करने की शक्ति

  • क़ानून का उल्लंघन करने संबंधी मामलों को जांच करने की शक्ति पुलिस सब-इंस्पेक्टर या उसके ऊपर के सक्षम अधिकारी को दी गयी है। जांच अधिकारी के पास किसी परिसर की तलाशी लेने और मवेशियों तथा अपराध में उपयोग किये गए या उपयोग करने के इरादे से रखे गए उपकरणों को जब्त करने की शक्ति होगी।
  • इस तरह की कोई बरामदगी होने पर, बिना किसी देरी के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के सामने रिपोर्ट की जाएगी।

दंड-विधान

  • गौ-हत्या एक संज्ञेय अपराध है और इसका उल्लंघन करने पर तीन से सात साल के कारावास दंड दिया जा सकता है।
  • पहली बार किये गए अपराध के लिए 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, दूसरी बार या इसके आगे पुनः अपराध करने पर 1 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधेयक की प्रमुख विशेषताएं
  2. अन्य राज्यों में इस प्रकार के कानून

मेंस लिंक:

गौ-हत्या रोधी कानूनों के पीछे तर्क और निहितार्थ पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

एंथ्रेक्स से हाथियों की मौत के बाद टीकाकरण अभियान


संबंधित प्रकरण

कुछ दिन पूर्व असम के जॉयपुर वर्षावन में दो मादा हाथियों की मौत हो गयी थी, जिसका कारण एंथ्रेक्स (Anthrax) को  बताया गया है। दोनों हाथियों की एंथ्रेक्स जीवाणुओं के संपर्क में आने से मौत हो गयी थी। एंथ्रेक्स के बीजाणु सुप्त अवस्था में 25-30 सालों तक जमीन में दबे रह सकते हैं

  • इसके बाद, इस क्षेत्र के आसपास सभी चौपायों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया गया है।
  • अक्टूबर 2019 में असम के पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य में दो एशियाई जंगली भैसों की मौत होने के बाद राज्य में एंथ्रेक्स का यह दूसरा मामला है।

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एंथ्रेक्स क्या है?

एंथ्रेक्स,  बीजाणुओं से उत्पन्न होने वाले बेसिलस ऐंथरैसिस (Bacillus Anthracis) जीवाणुओं के कारण होने वाला एक जानलेवा संक्रामक रोग है।

  • यह मानव की अपेक्षा जानवरों जैसे- घोड़ों, गायों, बकरियों और भेड़ों आदि को अधिक प्रभावित कर सकता है।
  • संक्रमित जानवरों, ऊन, मांस, या खाल के संपर्क में आने से एंथ्रेक्स, मानवों में फ़ैल सकता है।
  • प्रसरण: एंथ्रेक्स, किसी संक्रमित जानवर या व्यक्ति से दूसरे में सीधे नहीं फैलता है; बल्कि यह बीजाणुओं के माध्यम से फैलता है। एंथ्रेक्स के बीजाणु, कपड़ों या जूते से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचते है।

लक्षण एवं संक्रमण:

  • मनुष्यों में श्वसन संक्रमण: शुरू में कई दिनों तक ठंड या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, उसके बाद निमोनिया और गंभीर (और अक्सर घातक) रूप से सांस संबंधी समस्याएं होती है।
  • मनुष्यों में पाचनतंत्र संबंधी (GastrointestinalGI) संक्रमण: मनुष्यों में एंथ्रेक्स-संक्रमित मांस के सेवन के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (GI) संक्रमण होता है जिसके कारण, खून की उल्टी, गंभीर दस्त, आंतों में सूजनऔर भूख न लगना आदि समस्याएं होती हैं।
  • त्वचीय एंथ्रेक्स (Cutaneous anthrax): इसे हाइड पोर्टर बीमारी (Hide porter’s disease) के रूप में भी जाना जाता है, मनुष्यों में एंथ्रेक्स संक्रमण होने पर त्वचा पर इसका प्रभाव दिखने लगता है।

जैव-आतंकवाद (Bio-Terrorism) में उपयोग

जासूसों और आतंकवादियों द्वारा जैव-युद्धों में एंथ्रेक्स का उपयोग दुश्मन को संक्रमित करने के लिए किया जाता है। अमेरिका में एक मेल के माध्यम से यह बीमारी फ़ैली थी, जिसमे 5 लोगों की मृत्यु हो गई और 22 लोग बीमार हो गए थे।

भारत में टीका:

पिछले साल जून में ‘रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला’ (DRDO) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शोधकर्त्ताओं द्वारा एक शक्तिशाली एंथ्रेक्स वैक्सीन विकसित की गयी है। यह नयी वैक्सीन, एंथ्रेक्सॉक्सिन के साथ बीजाणुओं के प्रति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एंथ्रेक्स क्या है?
  2. कारण और संक्रमण
  3. उपचार
  4. जैव-आतंकवाद में उपयोग
  5. भारत में इस बीमारी के नवीनतम उदाहरण

मैंस लिंक:

एंथ्रेक्स क्या है? इस बीमारी का कारण क्या है? इसे किस प्रकार नियंत्रित किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

  

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus)


(ASEAN Defence Ministers’ Meeting Plus)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘वियतनाम’ की अध्यक्षता में 14वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ASEAN Defence Ministers’ Meeting PlusADMM-Plus) का आयोजन किया गया है।

ADMM-Plus के बारे में

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ASEAN Defence Ministers’ MeetingADMM) के खुले और सार्वजनिक प्रकार के मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप, वर्ष 2007 में सिंगापुर में सिंगापुर में आयोजित ADMM की दूसरी बैठक में ADMM Plus की स्थापना हेतु संकल्पना पत्र (Concept Paper) अपनाया गया था।

  • ADMM-Plus, आसियान और इसके वार्ता साझेदार (Dialogue partners) देशों के लिए क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास हेतु सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूती प्रदान करने वाला एक मंच है।
  • ADMM Plus के वार्ता साझेदारों में ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूज़ीलैंड, दक्षिणी कोरिया , रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इन्हें सामूहिक रूप से “प्लस देशों” के रूप में संदर्भित किया जाता है।

इस तंत्र के तहत सहयोग के क्षेत्र:

इस नए तंत्र के तहत रक्षा के क्षेत्र में सहयोग के निम्नलिखित पाँच क्षेत्रों पर सहमति व्यक्त की गई है:

  1. समुद्री सुरक्षा,
  2. आतंकवाद-रोधी,
  3. मानवीय सहायता और आपदा राहत,
  4. शांति व्यवस्था और
  5. सैन्य चिकित्सा।

वर्ष 2013 में, सहयोग के क्षेत्रों में एक नए प्राथमिकता क्षेत्र ‘बारूदी सुरंग पर मानवीय कार्रवाई (Humanitarian Mine Action)’ पर सहमति व्यक्त की गयी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. ADMM क्या है?
  2. ADMM plus क्या है?
  3. सदस्य
  4. उद्देश्य
  5. ADMM plus के अंतर्गत सहयोग क्षेत्र

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

आत्मानिर्भर भारत योजना (ABRY)


(Atmanirbhar Bharat Rojgar Yojana)

संदर्भ:

हाल ही में, केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा आत्‍मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 के तहत कोविड रिकवरी फेज में औपचारिक क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने और नए रोजगार अवसरों को प्रोत्‍साहित किए जाने को मंजूरी दी गयी है।

आत्मानिर्भर भारत योजना (ABRY) के बारे में:

  1. इसके तहत, भारत सरकार द्वारा 1 अक्‍टूबर, 2020 को या उसके बाद और 30 जून, 2021 तक कार्यरत सभी नए कर्मचारियों को दो वर्ष की अवधि के लिए सब्सिडी प्रदान की जाएगी करेगी।
  2. जिन रोजगार प्रदाता संगठनों में 1000 कर्मचारी हैं, उनके लिए केन्‍द्र सरकार दो वर्ष की अवधि तक 12 प्रतिशत कर्मचारी योगदान और 12 प्रतिशत नियोक्‍ता योगदान (दोनों), अर्थात वेतन भत्तों का 24 प्रतिशत कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में योगदान करेगी।
  3. जिन रोजगार प्रदाता संगठनों में 1000 से अधिक कर्मचारी हैं वहां केन्‍द्र सरकार नए कर्मचारियों के संदर्भ में दो वर्ष की अवधि तक कर्मचारी भविष्य निधि में केवल 12 प्रतिशत का योगदान करेगी।

पात्रता:

  1. कोई कर्मचारी जिसका मासिक वेतन 15000 रुपये से कम है और वह किसी ऐसे संस्‍थान में काम नहीं कर रहा था, जो 1 अक्‍टूबर, 2020 से पहले कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) से पंजीकृत था और उसके पास इस अवधि से पहले यूनिवर्सल एकाउंट नंबर (UAN) या ईपीएफ सदस्‍य खाता नंबर नहीं था, वह इस योजना के लिए पात्र होगा।
  2. कोई भी EPF सदस्‍य जिसके पास यूनिवर्सल एकाउंट नंबर है और उसका मासिक वेतन 15,000 रुपये से कम है और यदि उसने कोविड महामारी के दौरान 01 मार्च 2020 से 30 सितंबर 2020 के बीच में अपनी नौकरी छोड़ दी और उसे EPF के दायरे में आने वाले किसी रोजगार प्रदाता संस्‍थान में 30 सितंबर 2020 तक रोजगार नहीं मिला है, वह भी इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कार्यक्रम के तहत लाभ और पात्रता।

मेंस लिंक:

‘आत्मानिर्भर भारत योजना’ जैसे कार्यक्रमों की आवश्यकता और लाभों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

क्वांटम कुंजी वितरण (QKD)


(Quantum Key Distribution)

संदर्भ:

हाल ही में, रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला’ (DRDO) द्वारा क्वांटम कुंजी वितरण (Quantum Key DistributionQKD) प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए अपनी दो प्रयोगशालाओं के बीच ‘संचार’ का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।

इस प्रदर्शन में भाग लेने वाली प्रयोगशालाएं, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) और रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) थी।

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इस प्रौद्योगिकी के बारे में:

आदर्श रूप से कूटलेखन / एन्क्रिप्शन (Encryption) पारंपरिक गणित पर निर्भर होता है और अभी की जरूरतों के लिए काफी हद तक पर्याप्त है और हैकिंग से सुरक्षित है, हालांकि क्वांटम कंप्यूटिंग का विकास होने से इस तकनीक पर संकट आ सकता है।

  • क्वांटम कंप्यूटिंग, तीव्र और अधिक शक्तिशाली कंप्यूटरों के एक नए युग को संदर्भित करती है, और यह माना जाता है, कि यह तकनीक वर्तमान स्तर के कूटलेखन (Encryption) को तोड़ने में सक्षम होंगे।
  • क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) प्रौद्योगिकी में डेटा स्थानांतरित करने के लिए फोटॉन– प्रकाश उत्सर्जन करने वाले कण- का उपयोग किया जाता है।
  • QKD में दूर स्थित दो उपयोगकर्ता, जिनके पास पहले से कोई गुप्त कुंजी (secret key) नहीं होती है, ‘सीक्रेट की’ (secret key) कही जाने वाली एक सामूहिक, सीक्रेट बिट्स की यादृच्छिक लड़ी (random string) बनाने में सक्षम होते हैं।
  • वन-टाइम पैड एन्क्रिप्शन का उपयोग करते हुए यह कुंजी किसी संदेश को एन्क्रिप्ट करने और डिक्रिप्ट करने के लिए सुरक्षित साबित हुई है, तथा इस प्रकार के संदेश को सुरक्षित रूप से किसी भी मानक संचार चैनल पर भेजा जा सकता है।

इस तकनीक का महत्व:

  • इस तकनीक के माध्यम से की गयी एन्क्रिप्शन ‘अभेद्य’ होती है, क्योंकि इसमें डेटा का संचरण फोटॉन के माध्यम से होता है। फोटॉन को पूरी तरह से कॉपी नहीं किया जा सकता है और इस तरह का कोई भी प्रयास करने पर संदेश अस्त-व्यस्त हो जाएगा। इसके अलावा, डेटा इंटरसेप्ट करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति का पता भी लग सकेगा।
  • इस तकनीक के साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हो सकते हैं। इससे कार्यो का संपादन सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा, लेकिन साथ ही सरकारों को लिए संदेशों को हैक करने में अधिक कठिनाई होगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्यूबिट्स क्या होते हैं?
  2. क्वांटम तकनीक क्या है?
  3. फोटॉन क्या होते हैं?
  4. QSD क्या है?

मेंस लिंक:

अन्य तकनीकों की तुलना में QSD को बेहतर तकनीक के रूप में क्यों देखा जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

नया संसद भवन


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधानमंत्री द्वारा नए संसद भवन का शिलान्यास किया गया।

अब से लगभग सौ साल पहले 12 फरवरी, 1921 को ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा मौजूदा संसद की नींव रखी गयी थी।

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 प्रमुख बिंदु:

  • नए भवन का निर्माण, भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के साथ ही वर्ष 2022 तक पूरा होने की संभावना है।
  • इस नए भवन की थीम, देश की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित होगी।
  • इसमें क्षेत्रीय कला और शिल्प को भी शामिल किया जाएगा। नए भवन में आत्मनिर्भर भारत के प्रतीक के रूप में देश भर के कारीगरों और मूर्तियों को प्रस्थापित किया जाएगा।
  • नए संसद भवन के निर्माण के लिए इस साल सितंबर में बोली प्रक्रिया आयोजित की गयी थी, जिसमे ‘टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड’ को 90 करोड़ रुपये की लागत से भवन निर्माण का दायित्व सौंपा गया था।
  • नए भवन का निर्माण सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत मौजूदा संसद भवन के नजदीक किया जाएगा।

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‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ क्या है?

  • ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’, भारत के ‘पॉवर कॉरिडोर’ का निर्माण करने हेतु एक भव्य पुनर्विकास परियोजना है, जिसके तहत नया संसद भवन, एक सामूहिक केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाएगा, इसके अलावा राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर लंबे राजपथ को पुनर्विकासित लिया जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को, मेगा पुनर्विकास योजना को चुनौती देने वाली 10 याचिकाओं पर सुनवाई करने तक ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ पर काम शुरू नही करने की चेतावनी दी गयी है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

फ्रांस के प्रस्तावित कानून में इस्लामवाद की खिलाफत 


संदर्भ:

हाल ही में, फ्रांसीसी कैबिनेट द्वारा ‘कट्टरपंथी इस्लामवाद’ के खिलाफ एक कानून हेतु ड्राफ्ट/मसौदा पेश किया गया है, हालांकि मसौदे में ‘इस्लामिक’ शब्द शामिल नहीं है।

ड्राफ्ट पेश किए जाने का कारण:

  • फ़्रांस में हाल के वर्षों में हुए आतंकवादी हमलों की श्रृंखला के मद्देनजर इस विधेयक को पेश किया गया है।
  • हालांकि कुछ समय पहले से इस प्रकार के विधेयक लागू किये जाने की योजना थी, किंतु इसका तात्कालिक कारण, इस्लामिक आंतकवादियों द्वारा अक्टूबर में एक अध्यापक सैमुअल पैटी की हत्या की प्रतिक्रिया के रूप में माना जा रहा है।

प्रस्तावित कानून का लक्ष्य:

इस क़ानून में कई उपायों की परिकल्पना की गयी है; जिसमे, मुस्लिम बच्चों द्वारा पढ़ाई न छोड़े जाने को सुनिश्चित करने हेतु स्कूली शिक्षा सुधार करना, मस्जिदों और प्रचारकों पर कड़े नियंत्रण तथा ऑनलाइन घृणा अभियानों के खिलाफ प्रावधानों को शामिल किया गया है।

कानून के प्रवर्तन के बाद:

  • कानून लागू होने के बाद, फ्रांसीसी मस्जिदों की गतिविधियों, जैसे कि वित्तपोषण पर निगरानी में वृद्धि की जा सकती है।
  • सरकार, इमामों के प्रशिक्षण संबंधी देखरेख करने में सक्षम होगी, और सरकार के पास लैंगिक समानता जैसे ‘गणतंत्रीय सिद्धांतों’ का उल्लंघन करने पर सार्वजनिक सब्सिडी प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों को बंद करने की शक्ति होंगी।
  • फ्रांस में पहले से ही सरकारी कर्मचारियों पर क्रूस या हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीकों को प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध है। इस प्रतिबंध को सरकारी संस्थानों के अलावा सभी उप-अनुबंधित सार्वजनिक सेवाओं में लागू किया जाएगा।

प्रीलिम्स और मेंस लिंक:

हाल ही में किस देश द्वारा इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ कानून का मसौदा तैयार किया है और इसके क्या निहितार्थ हैं?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


जगनन्ना जीवा क्रांतियोजना

(Jagananna Jeeva Kranthi’ scheme)

हाल ही में, आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा ‘जगनन्ना जीवा क्रांति’ योजना की शुरुआत किया गया है।

  • इस योजना के तहत, महिलाओं के लिए, चरणबद्ध रूप से तरीके से 1,869 करोड़ रुपए के मूल्य की 49 लाख भेड़ और बकरियों को वितरित किया जाएगा।
  • इस योजना का उद्देश्य, कम निवेश में महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सहायता करना है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार- 2020

हाल ही में, हेल्पएज इंडिया (HelpAge India) को संस्थागत श्रेणी में वर्ष 2020 के लिये संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार प्रदान किया गया है।

  • संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार के इतिहास में पहली बार, किसी भारतीय संस्था को यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है।
  • पिछली बार व्यक्तिगत श्रेणी में यह पुरस्कार 28 साल पहले, वर्ष 1992 में एक भारतीय जे.आर.डी.टाटा को प्रदान किया गया था।
  • हेल्पएज इंडिया भारत में लगभग चार दशकों से बुजुर्गों और अन्य वंचितों की जीवन गुणवत्ता में सुधार करने के लिये कार्य कर रही है।

पुरस्कार के बारे में:

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1981 में की गयी थी। यह पुरूस्कार, जनसंख्या और प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये जाने वाले कार्यों को मान्यता प्रदान करता है।

बेटर देन कैश एलायंस

(Better Than Cash Alliance)

संयुक्त राष्ट्र स्थित ‘बेटर देन कैश एलायंस’ में 75 से अधिक देशों, कंपनियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की साझेदारी है।

  • यह संगठन, सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नकद के बदले डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र पूंजी विकास कोष, इस संगठन के सचिवालय के रूप में कार्य करता है।
  • भारत ने वर्ष 2015 में बेटर देन कैश एलायंस की सदस्यता ग्रहण की थी।

हनुकाह पर्व

(Hanukkah)

हनुकाह, यहूदियों का त्योहार है। इसे प्रकाशोत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

इजरायल के इतिहास के अनुसार, यह पर्व जेरुसलेम स्थित दूसरे मंदिर के पुनर्लोकार्पण तथा यहूदी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए मनाया जाता है।

hanukkah

 इस्किमम जंतरमनामी

(Ischaemum janarthanamiiin)

  • यह, भारत के चार वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक गोवा में पश्चिमी घाट पर वैज्ञानिकों द्वारा पहचान की गयी भारतीय मुरैनग्रास की एक नई प्रजाति है।
  • गोवा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रो. एम. के. जनार्थनम के सम्मान में नई प्रजाति का नाम इस्किमम जंतरमनामी रखा गया है।
  • इस्किमम जंतरमनामी, गोवा के भगवान महावीर नेशनल पार्क के बाहरी इलाके में कम ऊंचाई वाले पठारों पर उगती है।
  • नस्पति ने चरम जलवायु परिस्थितियों में खुद को बचाए रखने को लेकर खुद को तैयार किया है। इनके बारे में अध्ययन से पता चाल कि इन प्रजातियों ने कठोर परिस्थितियों से बचने और हर मानसून में खिलने के लिए अनुकूलित कर लिया है।

पृष्ठभूमि:

  • मुरैनग्रास की यह प्रजाति, पारिस्थितिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। मसलन चारा आदि।
  • वैश्विक स्तर पर 85 प्रजातियां इस्चेमम से जानी जाती हैं, जिनमें से 61 प्रजातियां विशेष रूप से भारत में पाई जाती हैं।
  • पश्चिमी घाट में इस वर्ग की उच्चतम सांद्रता वाली 40 प्रजातियां हैं।

ischaemum

कोइलवर ब्रिज

(Koilwar Bridge)

  • बिहार में सोन नदी पर 266 करोड़ रुपये की लागत से बने कोइलवर पुल का उद्घाटन किया गया है।
  • लंबाई: 5 किमी।

koilwar

भारत में दुनिया का पहला सैटेलाइट आधारित नैरोबैंड-आईओटी नेटवर्क

(Worlds’ first, satellite-based narrowband-IoT network in India)

बीएसएनएल द्वारा स्काइलो के साथ साझेदारी में भारत में दुनिया का पहला सैटेलाइट आधारित नैरोबैंड-आईओटी नेटवर्क की शुरुआत की जाएगी।

  • इस “मेड इन इंडिया” सॉल्यूशन को भारत में ही स्काइलो द्वारा विकसित किया है जो कि बीएसएनएल के सैटेलाइट, जमीन पर मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर (टॉवर आदि) के जरिए लोगों को कनेक्ट करेगा। यह सुविधा पूरे भारत में मिलने के साथ-साथ ही भारतीय समुद्री क्षेत्र में भी मिलेगी।
  • इसके कवरेज का दायरा इतना बड़ा है कि भारत की सीमा में किसी भी क्षेत्र में कनेक्टिविटी की समस्या नहीं रह जाएगी अर्थात कश्मीर और लद्दाख से कन्याकुमारी तक, गुजरात से पूर्वोत्तर भारत तक और भारतीय समुद्री क्षेत्र में यह सेवा मिलेगी।

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