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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 10 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)

2. IAF द्वारा आरटीआई के तहत सूचना देने संबंधी निर्देश के खिलाफ अदालत में अपील

3. क्वाड, अमेरिका का चीन विरोधी एक खेल है: रूस

4. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. लक्षद्वीप में ऑप्टिकल फाइबर केबल कनेक्टिविटी

2. पीएम वाणी

3. तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मानदंड

4. खालिस्तानी चरमपंथियों पर आरोपपत्र दायर

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. मिनी काजीरंगा

2. कर्नाटक विधानसभा में गोहत्या के खिलाफ विधेयक पारित

3. आईएनएस कलवरी की स्मृति में ‘पनडुब्बी दिवस’ का आयोजन

4. सिंधु घाटी के बर्तनों में गाय तथा भैंस के मांस के अवशेष

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)


(National Register of Citizens)

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्राधिकारियों द्वारा गौहाटी उच्च न्यायालय में एक शपथपत्र दाखिल किया गया है। इस शपथपत्र में उन तथाकथित ‘अवैध विदेशियों’ का विवरण है जिनके नाम वर्ष 2019 में जारी की गयी अद्यतन नागरिक सूची में शामिल हो गए थे।

पृष्ठभूमि:

31 अगस्त, 2019 को जारी की गयी अद्यतन ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (National Register of Citizens – NRC) की अंतिम सूची में 3.3 करोड़ कुल आवेदकों में से 19.06 लाख आवेदक सम्मिलित नहीं किये गए थे। बाद में यह पाया गया, कि कुछ अपात्र व्यक्तियों के नाम नागरिक सूची में शामिल किए गए हैं, जिनके पास 24 मार्च 1971 से पहले असम में अपना अधिवास साबित करने वाले कागजात नहीं थे।

‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ क्या है?

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को वर्ष 1951 में तैयार किया गया था, इसका उद्देश्य असम में जन्म लेने वाले भारतीय नागरिकों और पूर्वी पाकिस्तान, अब बांग्लादेश, से आए हुए अवैध प्रवासियों की पहचान करना था।
  • वर्ष 1980 में अवैध-प्रवासियों के खिलाफ हुए आंदोलनों के दौरान पहली बार ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन द्वारा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को अद्यतन करने की मांग की गयी थी।
  • वर्ष 2009 में एक गैर-सरकारी संगठन ‘असम पब्लिक वर्क्स’ द्वारा उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दिसंबर 2013 में ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ के अद्यतन करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी किया था।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनगणना और NPR के बीच संबंध।
  2. NPR बनाम NRC
  3. NRC, असम समझौते से किस प्रकार संबंधित है।
  4. नागरिकता प्रदान करने और रद्द करने के लिए संवैधानिक प्रावधान।
  5. जनगणना किसके द्वारा की जाती है?

मेंस लिंक:

एक राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)  प्रक्रिया क्यों नहीं संभव हो सकती है, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

IAF द्वारा आरटीआई के तहत सूचना देने संबंधी निर्देश के खिलाफ अदालत में अपील


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय वायु सेना (IAF) ने ‘केंद्रीय सूचना आयोग’ (Central Information CommissionCIC) द्वारा जारी निर्देश को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर की है। केंद्रीय सूचना आयोग ने भारतीय वायु सेना को एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा IAF के विमानों से की गयी विदेश यात्राओं के बारे में माँगी गयी जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया है।

संबंधित प्रकरण

  • केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भारतीय वायु सेना (IAF) को सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत विदेश दौरों पर प्रधान मंत्री के साथ जाने वाले सदस्यों (Entourage) के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया था।
  • भारतीय वायुसेना ने अपनी याचिका में कहा है, कि मांगी गई जानकारी ‘अत्यंत संवेदनशील प्रकृति’ की है और यह प्रधानमंत्री के सुरक्षा तंत्र के विवरण से संबंधित है। और, संभावतः इस प्रकार की सूचना से भारत की संप्रभुता और अखंडता प्रभावित हो सकती है।

मांगी गई जानकारी

आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा भारत के प्रधान मंत्री के विदेशी दौरों के दौरान उनकी निजी सुरक्षा हेतु जाने वाले विशेष सुरक्षा समूह (SPG) कर्मियों के नाम और प्रधान मंत्री के साथ विदेशी दौरों पर जाने वाले सदस्यों (Entourage) के बारे में जानकारी माँगी गयी थी।

इस संदर्भ में आरटीआई के तहत छूट

  • भारतीय वायुसेना का कहना है, माँगी गयी जानकारी, आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(a), 8(1)(e) और 8(1)(g) के तहत सूचना देने की बाध्यता से मुक्त है।
  • इसके अलावा, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की अनुसूची-II और धारा 24 (1) के तहत विशेष सुरक्षा समूह (SPG) को ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’, 2005 के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।

प्रमुख प्रावधान:

  1. सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 24 के अनुसार– यह क़ानून दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्‍ट ख़ुफ़िया एवं सुरक्षा संगठनों लागू नहीं होता है। हालांकि, ‘भ्रष्‍टाचार और मानव अधिकार उल्‍लंघन के आरोपों से संबंधित सूचना के संबंध में इन संगठनों को इस क़ानून से छूट प्राप्त नहीं है’।
  2. दूसरी अनुसूची: इसमें 26 खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां ​​सम्मिलित हैं। इनमे से कुछ प्रमुख एजेंसियां, (i) इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), (ii) कैबिनेट सचिवालय के अधीन अनुसंधान और विश्लेषण विंग (RAW) (iii) राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), (iv) स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF), (v) सीमा सुरक्षा बल (BSF) (vi) राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और (vii) असम राइफल्स हैं।
  3. आरटीआई की धारा 8: यह इस कानून के तहत सूचना के प्रकटीकरण से छूट से संबंधित है। इस धारा के अनुसार, सरकार किसी नागरिक को निम्नलिखित सूचना देने की बाध्यता नहीं होगी-जिसके प्रकटन से, (i)भारत की प्रभुता और अखण्डता, (ii) राज्य की सुरक्षा, (iii) रणनीति, वैज्ञानिक या आर्थिक हित, (iv) विदेश से सम्बंध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो या (v) किसी अपराध को बढ़ावा मिलता हो।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण की परिभाषा
  2. अधिनियम के तहत अपवाद
  3. मुख्य सूचना आयुक्त के बारे में
  4. राज्य सूचना आयुक्त
  5. सार्वजनिक सूचना अधिकारी
  6. नवीनतम संशोधन

मेंस लिंक:

आरटीआई अधिनियम, 2005 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

क्वाड, अमेरिका का चीन विरोधी एक खेल है: रूस


संदर्भ:

हाल ही में, रूस ने चार देशों के चतुश्पक्षीय रणनीतिक संवाद अथवा क्वाड (Quad) को पश्चिमी शक्तियों की ‘कुटिल नीति’ बताया है, और कहा है कि, पश्चिमी ताकतें इसके माध्यम से भारत को एंटी चाइना गेम्स में उलझा रही हैं।

संबंधित प्रकरण

रूस द्वारा अमेरिकी इंडो-पैसिफिक नीति के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए क्वाड की आलोचना की गयी है। साथ ही, रूस में पहली बार संकेत दिया है कि, इससे भारत-रूस संबध प्रभावित हो सकते हैं।

रूस की चिंताएं:

  • भारत वर्तमान में पश्चिमी देशों की निरंतर, आक्रामकता और कुटिल नीति का एक साधन बन गया है और ये देश तथाकथित क्वाड के जरिए हिंद-प्रशांत रणनीति को बढ़ावा देकर भारत को चीन विरोधी खेलों में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • इसके साथ ही पश्चिमी देश, भारत के साथ रूस की घनिष्ठता को कमतर आंकने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका की ओर से भारत पर मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल (MTC) क्षेत्र में सख्त दबाव दिए जाने का उद्देश्य भी यही है।
  • आगामी बिडेन प्रशासन के द्वारा भारत पर रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के विरुद्ध दबाव दिए जाने की संभावना है, जिसके लिए अमेरिका भारत पर प्रतिबंध भी लगा सकता है।
  • कुल मिलाकर, अमेरिकी और यूरोपीय देश अमेरिकी नेतृत्व में एकध्रुवीय मॉडल को “बहाल” करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘क्वाड समूह’ क्या है?

यह एक चतुष्पक्षीय संगठन है जिसमे जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सम्मिलित हैं।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी साझा हित रखते हैं।
  • इस विचार को पहली बार वर्ष 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे द्वारा प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के समूह में सम्मिलित नहीं होने के कारण यह विचार आगे नहीं बढ़ सका है।

क्वाड समूह की उत्पत्ति

क्वाड समूह की उत्पत्ति के सूत्र, वर्ष 2004 में आयी सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए चारो देशों द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों में खोजे जा सकते हैं।

  • इसके बाद इन चारो देशों के मध्य वर्ष 2007 में हुए आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पहली बार बैठक हुई।
  • इसका उद्देश्य, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, चारो देशों के मध्य समुद्री सहयोग बढ़ाना था।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

‘क्वाड समूह’ के प्रति चीन की आशंकाएं

  1. बीजिंग, काफी समय से भारत-प्रशांत क्षेत्र में इन लोकतांत्रिक देशों के गठबंधन का विरोध करता रहा है।
  2. चीन, इसे एशियाई-नाटो (Asian-NATO) चतुष्पक्षीय गठबंधन के रूप में देखता है, जिसका उद्देश्य चीन के उत्थान को रोकना है।
  3. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

 क्वाड के लिए औपचारिकता की आवश्यकता

नवीकृत प्रयासों के बावजूद, क्वाड (QUAD) समूह को किसी औपचारिक संरचना के न होने कारण  आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस समूह को संस्थागत (Institutionalisation) किये जाने, एक अपराजेय ‘चीन-विरोधी’ गुट में रूपांतरित होने के लिए एक औपचारिक समझौते की आवश्यकता है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान वैश्विक राजनीतिक स्थितियों में बहुत कुछ परिवर्तित हुआ है। क्वाड समूह के प्रत्येक सदस्य देश ने चीन की बढ़ती आक्रामकता का सामना किया है।

  1. चीन की ताकत और प्रभाव में वृद्धि हुई है और वह किसी भी प्रकार के मुठभेड़ के लिए उत्सुक है।
  2. ऑस्ट्रेलिया की घरेलू नीतियों को प्रभावित करने के प्रयासों के पश्चात, चीन द्वारा देश पर दंडात्मक कर (Punitive Tariffs) आरोपित लगा दिये गए है।
  3. चीन, भारत के साथ अक्सर सीमा विवादों में उलझता रहता है।
  4. चीन के सेनकाकू द्वीपों के संबंध में जापान के साथ क्षेत्रीय विवाद भड़का हुआ है।
  5. संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चीन व्यापार युद्ध में पूरी तरह से लिप्त है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड – संरचना।
  2. यह पहली बार कब प्रस्तावित किया गया था?
  3. हिंद महासागर क्षेत्र में देश और महत्वपूर्ण द्वीप।
  4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भौगोलिक अवलोकन।
  5. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्र और जलडमरूमध्य।

मेंस लिंक:

शांति और सुरक्षा बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र के समुद्रीय कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए क्वाड की औपचारिक बहाली और पुन: प्रवर्तन की आवश्यकता है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस)


(South Asian Association for Regional CooperationSAARC)

संदर्भ:

हाल ही में, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional CooperationSAARC) के चार्टर दिवस की 36 वीं वर्षगाँठ मनाई गई।

8 दिसंबर 1985 को ढाका में आयोजित पहली शिखर बैठक के दौरान, ‘दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन’ की स्थापना हेतु, SAARC देशों के प्रमुखों द्वारा चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए थे।

SAARC के बारे में:

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस), दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है।

  • दक्षेस के संस्थापक सदस्य, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान है।
  • वर्ष 2005 में आयोजित हुए 13वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान ‘अफगानिस्तान’ दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) का सबसे नवीनतम सदस्य बना।
  • इस संगठन का मुख्यालय एवं सचिवालय नेपाल के काठमांडू में अवस्थित है।

दक्षेस (SAARC) का महत्व:

  1. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC), विश्व के 3% क्षेत्रफल, 21% आबादी और 8% (US $ 2.9 ट्रिलियन) वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  2. यह विश्व की सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है और सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में से एक है।
  3. दक्षेस देशों की परंपरा, पोशाक, भोजन और संस्कृति और राजनीतिक पहलू लगभग सामान हैं, जिससे इनके कार्यों के समन्वय में मदद मिलती है।
  4. सभी दक्षेस देशों में गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, प्राकृतिक आपदाएं, आंतरिक संघर्ष, औद्योगिक और तकनीकी पिछड़ेपन, निम्न जीडीपी और खराब सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसी समान समस्याएं और मुद्दे हैं।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. सार्क बनाम बिम्सटेक
  2. BBIN
  3. मोटर वाहन समझौता
  4. CPEC क्या है?
  5. बेल्ट एंड रोड पहल (Belt and Road initiative)

मेंस लिंक:

SAARC का पुनरुत्थान भारत को चीन से निपटने में किस प्रकार सहायक होगा, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

लक्षद्वीप में ऑप्टिकल फाइबर केबल कनेक्टिविटी


संदर्भ:

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बेहतर बनाने हेतु मई 2023 तक मुख्‍य भू-भाग (कोच्चि) और लक्षद्वीप के 11 द्वीपों के मध्य सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने के लिए मंजूरी प्रदान की गयी है।

इस परियोजना को यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

  • प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा अगस्त में चेन्नई से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को जोड़ने वाली अंतःसमुद्रीय ऑप्टिकल फाइबर केबल (Optical Fibre Cable- OFC) की शुरुआत की गयी थी।
  • उसी समय प्रधानमंत्री ने 1,000 दिनों के भीतर लक्षद्वीप को ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ने की घोषणा की थी।

महत्व:

  • अंतःसमुद्रीय ऑप्टिकल फाइबर केबल कनेक्टिविटी परियोजना नागरिकों को उनके घर पर ही ई-सुशासन सेवाओं की डिलीवरी में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
  • इसके अलावा, मत्‍स्‍य क्षेत्र की क्षमता विकास, नारियल आधारित उद्योगों, पर्यटन, दूरस्‍थ शिक्षा के जरिए शैक्षिक विकास और टेलीमेडिसिन सुविधाओं से स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल क्षेत्र में काफी मदद मिलेगी।
  • इस परियोजना से अनेक उद्यमों की स्‍थापना, ई-कॉमर्स गतिविधियों को बढ़ावा देने और शैक्षिक संस्‍थानों में ज्ञान साझा करने में पर्याप्‍त मदद मिलेगी।

‘अंतःसागरीय संचार केबल’ क्या होती है?

  • यह समुद्र तल पर विछाई गयी ऑप्टिकल फाइबर केबल होती है, जिसके माध्यम से मुख्य भूमि तथा सागरों तथा महासागरों में स्थित स्थलीय भागों के मध्य दूरसंचार संकेतों को भेजा जाता है।
  • ऑप्टिकल फाइबर के तत्वों को विशिष्ट प्रकार से प्लास्टिक की परतों का लेप चढ़ाया जाता है तथा पर्यावरण के लिए उपयुक्त एक सुरक्षात्मक ट्यूब में अंतर्विष्‍ट किया जाता है।

अंतःसागरीय केबलों का महत्व:

  • वर्तमान में पार-महासागरीय 99 प्रतिशत डेटा ट्रैफ़िक, अंतःसागरीय केबलों के द्वारा होता है।
  • अंतःसागरीय केबलों की विश्वसनीयता काफी अधिक होती है, तथा कभी केबल टूटने की स्थिति होने पर डेटा संचार के अन्य कई रास्ते उपलब्ध हो जाते हैं।
  • अंतःसागरीय केबलों की डेटा संचरण क्षमता प्रति सेकंड टेराबाइट्स में होती है, जबकि उपग्रहों द्वारा आमतौर पर प्रति सेकंड केवल 1,000 मेगाबाइट्स की गति से डेटा का संचरण करते हैं और इनमे विलंबता-दर अधिक होती है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऑप्टिकल फाइबर के बारे में
  2. अंतःसागरीय फाइबर केबल के प्रकार
  3. चेन्नई-अंडमान और निकोबार द्वीप अंतःसागरीय संचार केबल के बारे में।
  4. यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड की प्रमुख विशेषताएं

मेंस लिंक:

चेन्नई-अंडमान और निकोबार द्वीप अंतःसागरीय संचार केबल पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

पीएम वाणी


(PM Wani)

संदर्भ:

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने टेलीकॉम विभाग को देशभर में सार्वजनिक वाई-फाई योजना ‘पीएम वानी’  हेतु स्वीकृति दे दी है।

  • इस पहल का उद्देश्य ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं को तेज करने में मदद करना है।
  • वर्ष 2017 में, इस योजना हेतु सर्वप्रथम भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा सिफारिश की गई थी।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:

  1. इस योजना के तहत, पब्लिक डेटा ऑफिस (Public Data Offices- PDOs) के माध्यम से पूरे देश में सार्वजनिक वाईफाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जाएंगे।
  2. पब्लिक डेटा ऑफिस कंपनियों से वाई-फाई और ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए किसी तरह का लाइसेंस शुल्‍क नहीं लिया जाएगा।
  3. इसमें, ऐप सेवा प्रदाता, पीडीओ और पब्लिक डेटा ऑफिस एग्रीगेटर्स (PDOA) और एक सेंट्रल रजिस्ट्री सहित कई घटक सम्मिलित होंगे।

कार्यान्वयन:

  1. पीडीओ, सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ताओं के मध्य एक ‘कड़ी’ की भूमिका निभाएंगे।
  2. PDOA, द्वारा पब्लिक डेटा ऑफिस (PDO) के समूहक का कार्य किया जाएगा, यह उपयोगकर्ताओं के प्रमाणीकरण और लेखा खातों के रखरखाव का काम करेंगे।
  3. एक ऐप के माध्यम से सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग किया जा सकेगा, और इसके लिए उपयोग के अनुसार भुगतान करना होगा।
  4. इस परियोजना में ऐप प्रदाता, यह पंजीकृत ग्राहकों के लिए मोबाइल ऐप विकसित करेंगे और वाई-फाई वाले हॉट स्‍पाट इलाकों की खोज करने के बाद उसके अनुरुप ऐप में इसकी जानकारी डालेंगे ताकि ग्राहक अपने मोबाइल पर इंटरनेट सेवा का उपयोग कर सकें।
  5. सेंट्रल रजिस्‍ट्री: यह ऐप सेवा प्रदाता पीडीओ और पीडीओएएस की जानकारी रखेगा। सेंट्रल रजिस्‍ट्री का रखरखाव शुरुआती स्‍तर पर टेलीकॉम विभाग द्वारा किया किया जाएगा।

परियोजना का महत्व:

सरकारी सेवा प्रदाताओं के जरिए सार्वजनिक रूप से ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्‍ध कराने की व्‍यवस्‍था डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ाया गया एक और कदम है। यह कनेक्टिविटी सेवाओं का एकीकृत भुगतान इंटरफेस (unified payments interface UPI) के रूप में कार्य करेगा।

यह सेवा उपलब्‍ध कराने के लिए किसी तरह का लाइसेंस शुल्‍क नहीं लिये जाने से देशभर में बड़े स्‍तर पर इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाओं का आमलोगों को लाभ मिल सकेगा जिससे रोजगार और आमदनी के अवसर पैदा होंगे, कारोबारी सुगमता में इजाफा होगा और लोगों का जीवन स्‍तर बेहतर हो सकेगा।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मानदंड


(Coastal Regulation Zone norms)

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal- NGT) द्वारा गठित छह-सदस्यीय पैनल द्वारा आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के कर्वाक (Karavaka) और अंतर्वेदी पल्लीपालम (Antarvedi Pallipalem) के मध्य तटीय पेटी पर तटीय नियामक क्षेत्र मानदंडों के कथित उल्लंघन की क्षेत्र में जाकर जांच की गयी।

पैनल ने जलीय-कृषि और समुद्र तट की रेत के निष्कर्षण के लिए दी गई अनुमति संबधी आवश्यक डेटा की मांग की गयी।

तटीय विनियमन क्षेत्र  मानदंड (CRZ norms)

  • फरवरी 1991 में, भारत के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत, पहली बार ‘तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ norms) अधिसूचित किये गए थे।
  • वर्ष 2018-19 में, तटीय विनियमन क्षेत्र संबंधी नए नियम जारी किए गए थे। इनका उद्देश्य इस क्षेत्र में निर्माण पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाना, अनापत्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और तटीय क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित करना था।

तटीय विनियमन क्षेत्र  मानदंडों का उद्देश्य:

ये मानदंड, सागर तट से एक निश्चित दूरी के भीतर कुछ विशेष गतिविधियों, जैसे- बड़े निर्माण, नए उद्योगों की स्थापना, खतरनाक सामग्री का भंडारण या निपटान, खनन, भूमि-उपयोग परिवर्तन और बांध निर्माण पर रोक लगाते हैं ।

CRZ में प्रतिबंध

  • CRZ में प्रतिबंध, क्षेत्र की आबादी, पारिस्थितिक संवेदनशीलता, किनारे से दूरी तथा क्षेत्र के प्राकृतिक उद्यान अथवा वन्यजीव क्षेत्र के रूप में अधिसूचित होने जैसे मानदंडों पर निर्भर करते है।
  • नए नियमों के अनुसार, मुख्यभूमि के तट के निकटवर्ती सभी द्वीपों और मुख्य भूमि के सभी अप्रवाही जल वाले (Backwater) द्वीपों के लिए 20 मीटर की सीमा तक नो-डेवलपमेंट ज़ोन घोषित किया गया है।

CRZ-III (ग्रामीण) के लिए प्रतिबंधो की दो भिन्न श्रेणियों को निर्धारित किया गया है:

  1. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, 2,161 प्रति वर्ग किमी जनसंख्या घनत्व सहित घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों (CRZ-IIIA) में, नो-डेवलपमेंट ज़ोन की सीमा, उच्च-ज्वार रेखा से 50 मीटर तक निर्धारित की गयी है, जबकि पहले यह सीमा 200 मीटर थी।
  2. CRZ-IIIB श्रेणी (2,161 प्रति वर्ग किमी से कम जनसंख्या घनत्व वाले ग्रामीण क्षेत्र) में नो-डेवलपमेंट ज़ोन की सीमा, उच्च-ज्वार रेखा से 200 मीटर तक निर्धारित की गयी है।

कार्यान्वयन

हालांकि, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) संबंधी नियम केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा बनाए गए हैं, किन्तु, इनका कार्यान्वयन तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरणों (Coastal Zone Management Authorities) के माध्यम से राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CRZ मानदंड क्या हैं?
  2. CRZ की परिभाषा
  3. तटीय विनियमन क्षेत्रों का वर्गीकरण
  4. CRZ-III (ग्रामीण) क्षेत्रों के अंतर्गत श्रेणियाँ

मेंस लिंक:

पर्यावरणीय न्याय और वितरणात्मक न्याय के दृष्टिकोण से तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों का क्या तात्पर्य है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

खालिस्तानी चरमपंथियों पर आरोपपत्र दायर


संदर्भ:

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency NIA) द्वारा 16 विदेशी खालिस्तानी चरमपंथियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए गए है।

संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा में रहने वाले आरोपियों को देश में क्षेत्र और धर्म के आधार पर देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त होने और शत्रुता को बढ़ावा देने हेतु आतंकवाद- रोधी, विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (Unlawful Activities (Prevention) Act) आरोपित किया गया है।

संबंधित प्रकरण

आरोपपत्र में कहा गया है, कि सभी आरोपी ‘रिफ़रेंडम 2020’ (Referendum 2020) के झंडे तले ’खालिस्तान’ के निर्माण हेतु एक अलगाववादी अभियान शुरू करने की साजिश में सम्मिलित थे।

‘ख़ालिस्तान आंदोलन’ क्या था?

यह एक पृथक सिख राज्य के लिए किया जाने वाला एक संघर्ष था और इसकी उत्पत्ति पंजाबी सूबा आंदोलन (Punjabi Suba Movement) से हुई थी।

’खालिस्तान’ मूवमेंट के दौरान, अकाली दल- एक सिख बहुल राजनीतिक दल- द्वारा एक पृथक सिख सूबा या प्रांत बनाने की माँग की गई थी।

  • भाषाई समूहों द्वारा पृथक राज्यों की मांगो का आकलन करने गठित ‘राज्य पुनर्गठन आयोग’ (States Reorganization Commission) द्वारा की गयी सिफारिशों में अकाली दल की मांग को खारिज कर दिया गया था।
  • पूर्व पंजाब प्रांत को पंजाबी भाषा बहुल पंजाब, हिंदी भाषा बहुल हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में विभाजित कर दिया गया था। पूर्व पंजाब प्रांत के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों को हिमाचल प्रदेश में शामिल कर दिया गया था।

‘आनंदपुर साहिब प्रस्ताव’ क्या था?

आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को वर्ष 1973 में शिरोमणि अकाली दल द्वारा आनंदपुर साहिब में पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में पंजाब को एक स्वायत्त राज्य के रूप में स्वीकारने तथा राज्य के लिए अलग आंतरिक संविधान बनाने के अधिकार की मांग की गयी थी।

इस प्रस्ताव को ख़ालिस्तान आंदोलन की शुरुआत माना जाता है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


मिनी काजीरंगा

(Mini Kaziranga)

असम के पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य को ‘मिनी काजीरंगा’ के नाम से भी जाना जाता है।

इस अभ्यारण्य में एक सींग वाले गैंडों का घनत्व विश्व में सर्वाधिक है और इसमें, असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बाद एक सींग वाले गैंडों की सर्वाधिक आबादी पायी जाती है।

चर्चा का कारण

  • ‘मिनी काजीरंगा’ वन्यजीवों की संख्या अधिक होने से गैडों के पोषण-आहार में कमी हो रही है।
  • हाल ही में, दो गैंडों की मौत हो जाने से इसकी पुष्टि हुई है। पोषण-आहार के अभाव में इनके आंतरिक अंगों में काफी मात्रा में सूखे नरकट और अन्य जंगली ‘जंक फूड’ पाए गए थे।

कर्नाटक विधानसभा में गोहत्या के खिलाफ विधेयक पारित

‘कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण विधेयक’ 2020 (Karnataka Prevention of Slaughter and Preservation of Cattle Bill, 2020) में उल्लंघन करने पर तीन से सात साल की कैद और ‘50,000 से 7 लाख रुपए तक जुर्माने के कड़े प्रावधान किये गए हैं।

  • विधेयक में, गौ-वंश का वध करने के उद्देश्य से बेचने या जानबूझकर गौ-वंश की हत्या करने को अपराध घोषित किया गया है। यदि कोई अभियुक्त दोषी साबित होता है, तो अदालत द्वारा राज्य सरकार की ओर से मवेशियों, वाहन, संबंधित परिसर और उपकरणों को जब्त कर लिया जाएगा।
  • सरकार, प्रस्तावित कानून के तहत वध से संबंधित विभिन्न मामलों की निगरानी करने के लिए अधिकारी के रूप में तहसीलदार अथवा पशुपालन या मत्स्य विभाग के पशु चिकित्सा अधिकारी या इससे ऊचें पदाधिकारी को नियुक्त कर सकती है।

आईएनएस कलवरी की स्मृति में ‘पनडुब्बी दिवस’ का आयोजन

भारतीय नौसेना द्वारा 8 दिसंबर को प्रतिवर्ष ‘पनडुब्बी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

  • 8 दिसंबर 1967 को भारतीय नौसेना में आईएनएस कलवरी पहली पनडुब्बी के रूप में शामिल किया गया था। आईएनएस कलवरी को तत्कालीन USSR में, लातविया के रीगा में भारतीय नौसेना में सम्मिलित किया गया था।
  • ‘कलवरी’ हिंद महासागर में पायी जाने वाली एक शिकारी टाइगर शार्क का मलयालम नाम है।
  • 29 वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 1996 में कलवरी को भारतीय नौसेना से सेवा-मुक्त कर दिया गया था।

सिंधु घाटी के बर्तनों में गाय तथा भैंस के मांस के अवशेष

एक नए अध्ययन में, वर्तमान में हरियाणा और उत्तर प्रदेश में स्थित, सिंधु घाटी सभ्यता के सात स्थलों पर लगभग 4,600 साल पुराने चीनी मिट्टी के बर्तन में गाय और भैंस के मांस सहित अन्य पशु उत्पादों की मौजूदगी पाई गई है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • सिंधु घाटी स्थलों पर पाई गयी पालतू पशुओं की हड्डियों में से लगभग 50-60% हड्डियां गाय/ भैंसों की है।
  • गाय/ भैंसों की हड्डियों का बड़े अनुपात में पाया जाना सिंधु सभ्यता के दौरान खाद्य पदार्थो में, गोमांस को वरीयता दिए जाने, भेंड तथा बकरी के मांस को पूरक आहार के रूप में शामिल किए जाने का संकेत करता है
  • सिंधु सभ्यता के मृद-भाडों के अवशेषों में पाए गए चर्बी के अवशेषों में पशु उत्पादों की अधिकता मिलती है, इनमे सूअर जैसे गैर-जुगाली करने वाले जानवरों, और गाय या भैंस और भेड़ या बकरी जैसे जुगाली करने वाले जानवरों का मांस तथा अन्य डेयरी उत्पाद पाए गए हैं।

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