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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 5 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. आयुर्वेद के भाग के रूप में सर्जरी

2. तकनीकी वस्त्र निकाय के गठन हेतु प्रस्तावों का आमंत्रण

3. संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘भांग’ को ‘सबसे हानिकारक ड्रग्स’ की सूची से हटाने का तात्पर्य

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पाकिस्तानी सीमा के निकट भारत का नवीकरणीय ऊर्जा पार्क

2. क्वांटम सुप्रीमेसी

3. प्रयोगशाला में उत्पादित मांस: विश्व में उभरता हुआ विकल्प

4. केन-बेतवा इंटरलिंकिंग परियोजना बांध

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. नौसेना दिवस 2020

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

आयुर्वेद के भाग के रूप में सर्जरी


(Surgery as part of Ayurveda)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार ने आयुर्वेद के स्नातकोत्तर छात्रों के लिए अनिवार्य सर्जिकल प्रक्रियाओं के संदर्भ में अधिसूचना जारी की है।

आयुर्वेद में शल्यचिकित्सा / सर्जरी की स्थिति

आयुर्वेद में शल्यचिकित्सा की दो शाखाएँ हैं:

  1. शल्य तंत्र (Shalya Tantra): यह सामान्य शल्य चिकित्सा से संबंधित है, और
  2. शलाक्य तंत्र (Shalakya Tantra): यह आंख, कान, नाक, गले और दांतों की सर्जरी से संबंधित है।

आयुर्वेद के सभी स्नातकोत्तर छात्रों को इन पाठ्यक्रमों का अध्ययन करना होता है, और इनमें से कुछ छात्र विशेषज्ञता हासिल करके आयुर्वेद सर्जन बन जाते हैं।

अधिसूचना से पहले, स्नातकोत्तर छात्रों हेतु जारी नियम

वर्ष 2016 के नियमों के अनुसार, स्नातकोत्तर छात्रों को शल्य तंत्र, शलाक्य तंत्र, और प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics and Gynecology), तीन विषयों में विशेषज्ञता प्राप्त करने की अनुमति है।

  • इन तीनों क्षेत्रों में प्रमुख सर्जिकल प्रक्रियाएं सम्मिलित होती हैं।
  • इन तीन विषयों के छात्रों को MS (आयुर्वेद में सर्जरी में मास्टर) की डिग्री प्रदान की जाती है।

अधिसूचना का निहतार्थ

अधिसूचना में 58 सर्जिकल प्रक्रियाओं का उल्लेख है जिनमे स्नातकोत्तर छात्रों के लिए प्रशिक्षित करना और स्वतंत्र रूप से सर्जरी करने की क्षमता हासिल करनी होगी।

  • अधिसूचना में जिन शल्यचिकित्साओं का उल्लेख किया गया है, वे सभी पहले से ही आयुर्वेद पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।
  • अब, रोगियों को आयुर्वेद चिकित्सकों की क्षमताओं के बारे में ठीक से पता चल सकेगा। स्किल-सेट को स्पष्टतया परिभाषित किया गया है।
  • यह आयुर्वेद चिकित्सक की क्षमता पर लगे हुए प्रश्न चिह्नों को हटा देगा।

भारतीय चिकित्सक संघ (IMA) की आपत्तियां

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा इस अधिसूचना की तीखी आलोचना की गयी है। IMA ने इन प्रक्रियाओं के कार्यान्वयन हेतु आयुर्वेद चिकित्सकों की क्षमता पर सवाल उठाया है, और अधिसूचना को ‘मिक्सोपैथी’ (Mixopathy) का प्रयास बताया है।

  • आईएमए के डॉक्टर्स का कहना है, कि वे प्राचीन चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के विरोध में नहीं हैं।
  • किंतु, इनके अनुसार, नई अधिसूचना इस संकेत देती है, कि आधुनिक सर्जरी प्रक्रियाओं को पूरा करने हेतु आयुर्वेद चिकित्सकों का कौशल या प्रशिक्षण, आधुनिक चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर्स के समान हैं।
  • इनका कहना है कि, यह भ्रमित करने वाला है, और ‘आधुनिक चिकित्सा के अधिकार क्षेत्र और दक्षताओं में अतिक्रम’ है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

तकनीकी वस्त्र निकाय के गठन हेतु प्रस्तावों का आमंत्रण

संदर्भ:

वस्त्र मंत्रालय ने एक समर्पित निर्यात संवर्धन परिषद (Export Promotion CouncilEPC) के गठन हेतु आमंत्रित किए हैं।

आवेदन हेतु पात्रता

कंपनी अधिनियम या सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत निर्यातक संघ और व्यापार निकाय 15 दिसंबर तक प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि:

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा फरवरी, 2020 में चार साल की कार्यान्वयन अवधि हेतु एक राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन स्थापित करने को लेकर अपनी मंजूरी दी गयी थी।

तकनीकी वस्त्रों के लिये निर्यात संवर्धन परिषद, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन का एक घटक है।

भारत में तकनीकी वस्त्र उद्योग:

  • भारत में 14,000 करोड़ रुपए वार्षिक के तकनीकी वस्त्र निर्यात किए जाते है।
  • सरकार ने तकनीकी वस्त्र क्षेत्र हेतु वर्ष 2024-2025 तक $ 350 बिलियन का बाजार निर्मित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में तकनीकी वस्त्र बाजार $ 167 बिलियन है।

‘तकनीकी वस्त्र’ क्या होते हैं?

  • तकनीकी वस्त्रों को मुख्य रूप से, सौंदर्य और सजावटी विशेषताओं के बजाय, उनके तकनीकी प्रदर्शन और कार्यात्मक गुणों के लिए निर्मित वस्त्र सामग्री और उत्पादों के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • तकनीकी वस्त्रों में ऑटोमोटिव एप्लिकेशन, मेडिकल टेक्सटाइल्स, जियोटेक्सटाइल्स, एग्रोटेक्स्टाइल और सुरक्षा उपयोग के वस्त्र शामिल होते हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘भांग’ को ‘सबसे हानिकारक ड्रग्स’ की सूची से हटाने का तात्पर्य


संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र मादक औषध आयोग (United Nations Commission on Narcotic DrugsCND) द्वारा एकमात्र ‘मादक औषध अभिसमय’ (Convention on Narcotic Drugs), 1961 की अनुसूची IV से भांग (Cannabis) और भांग की राल (Cannabis Resin) को हटाए जाने हेतु मतदान कराया गया। भांग को अनुसूची  में एक दशक पहले शामिल किया गया था।

इसी के साथ, CND ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 2019 में की गयी सिफारिश का अनुमोदन किया है, जिसमे ‘भांग’ को ‘सबसे हानिकारक ड्रग्स’ की सूची से हटाने के लिए कहा गया था।

पक्ष और विपक्ष में मतदान

  • भारत सहित अमेरिका और अधिकांश यूरोपीय राष्ट्रों ने भांग को ‘सबसे हानिकारक ड्रग्स’ की सूची से हटाने के पक्ष में मतदान किया। इस समूह को बहुमत प्राप्त हुआ।
  • चीन, पाकिस्तान और रूस द्वारा प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया गया, यूक्रेन ने मतदान में भाग नहीं लिया।

भांग का पौधा (Cannabis Plant)

WHO के अनुसार, भांग / कैनबिस एक जेनेरिक शब्द है जिसका इस्तेमाल कैनाबिस सैटाइवा (Cannabis sativa) पौधे से निर्मित मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली साइकोएक्टिव (Psychoactive) औषधि मिश्रण के लिये किया जाता है।

  • कैनबिस का प्रमुख साइकोएक्टिव घटक डेल्टा -9 टेट्राहाइड्रोकार्बनबिनोल (Delta-9 tetrahydrocannabinol- THC) है।
  • कई देशों में भांग की पत्तियों या अन्य पौधे की कच्ची सामग्री को इसके मैक्सिकन नाम मारिजुआना के रूप में जाना जाता है।

भांग का विनियमन

  • 1946 में गठित, वियना स्थित ‘मादक औषध आयोग’ (Commission on Narcotic Drugs- CND) संयुक्त राष्ट्र की संस्था है, जो वैश्विक स्तर पर मादक दवाओं से संबंधित अभिसमयों में खतरनाक ड्रग्स को सूचीबद्ध कर उनके नियंत्रण का दायरा तय करती है।
  • भांग को ‘मादक औषध अभिसमय’ (Convention on Narcotic Drugs), 1961 की अनुसूची IV में रखा गया है, जो कि इस विषय पर एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय है।
  • भारत में, स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (Narcotic Drugs And Psychotropic Substances Act, 1985) / NDPS Act के तहत भांग के विनियमन से संबंधित क़ानून बनाए गए है।

भांग उद्योग पर इसका प्रभाव

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी द्वारा भांग का पुनर्वर्गीकरण किया जाना महत्वपूर्ण है, किंतु, भांग उद्योग पर इसका विश्व में तत्काल ही प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके लिए देशों को अपने संबंधित कानूनों में परिवर्तन करना होगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

पाकिस्तानी सीमा के निकट भारत का नवीकरणीय ऊर्जा पार्क


संदर्भ:

15 दिसंबर को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के कच्छ जिले में 30,000 मेगावाट की परियोजना का शिलान्यास किया जाएगा। यह विश्व में अपनी तरह की सबसे बड़ा परियोजना बताई जा रही है।

नवीकरणीय ऊर्जा पार्क में दो जोन होंगे:

  1. हाइब्रिड पार्क ज़ोन: यह 49,600 हेक्टेयर में विस्तृत होगा और 24,800 मेगावाट क्षमता के पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों को समायोजित करेगा।
  2. विशिष्ट पवन पार्क ज़ोन: जो 23,000 हेक्टेयर में विस्तृत होगा।

रणनीतिक अवस्थिति:

  • परियोजना स्थल, खावड़ा (Khavda) से लगभग 25 किमी दूर स्थित है। इस क्षेत्र में कोई नागरिक केवल ‘खावड़ा’ तक ही पहुँच सकता है, इसके आगे सामान्य नागरिकों का आवागमन वर्जित है।
  • विशिष्ट पवन पार्क ज़ोन, अंतरराष्ट्रीय सीमा से 1-6 किमी के भीतर स्थित होगा।
  • हाइब्रिड पार्क ज़ोन भारत-पाक सीमा से 6 किमी की दूरी पर स्थित होगा।

परियोजना के लिए इस जगह को इसलिए चुना गया है, क्योंकि यह पूर्णतयः बंजर भूमि है और इसके अलावा, सीमा के पास स्थित पवन चक्कियां एक सीमा के रूप में भी कार्य करेंगी।

इस पार्क में पवन और सौर परियोजनाएं किसके द्वारा स्थापित की जाएंगी?

  • सीमा क्षेत्र के निकट पवन परियोजनाओं को स्थापित करने का कार्य, प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया नीति के तहत भारतीय सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (Solar Energy Corporation of IndiaSECI) को सौंपा गया है।
  • इस पार्क में उत्पादित विद्युत् को पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा वितरित किया जाएगा।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता:

  • देश में कुल अनुमानित उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का 39% हिस्सा है, अर्थात 368.98 GW (29 फरवरी, 2020 तक)।
  • वर्तमान में, भारत कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में विश्व स्तर पर पांचवे स्थान पर है।
  • पिछले 5 वर्षों के दौरान, स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 226% की वृद्धि हुई है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

क्वांटम सुप्रीमेसी


(Quantum Supremacy)

संदर्भ:

चीन ने, गूगल के प्रोटोटाइप से 10 बिलियन गुना तेज कंप्यूटर का निर्माण कर क्वांटम सुप्रीमेसी (Quantum Supremacy) हासिल करने का दावा किया है।

पिछले वर्ष गूगल ने विश्व का सबसे उन्नत सुपर कंप्यूटर बनाने की घोषणा करते हुए कहा था, कि यह किसी 200 सेकंड में कर सकता है, जिसे सबसे तेज सुपरकंप्यूटर को हल करने में 10,000 वर्ष का समय लगेगा।

‘क्वांटम सुप्रीमेसी’ क्या है?

‘क्वांटम सुप्रीमेसी’ शब्द को सर्वप्रथम कैलिफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर जॉन प्रेस्किल द्वारा वर्ष 2012 में प्रस्तावित किया था।

  • यह उस स्थिति को व्यक्त करता है, जिसमे क्वांटम कंप्यूटर किसी भी ऐसी गणना कर सकते है जिसे पारंपरिक कंप्यूटर द्वारा नहीं किया जा सकता है।
  • सुपरपोजिशन (Superposition) और इनटैंगलमेंट (Entanglement), क्वांटम कंप्यूटर्स के लिए अत्याधिक सूचना को अत्याधिक तीव्रता से संशाधित करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

मानक कंप्यूटर और क्वांटम कंप्यूटर के मध्य अंतर

  1. पारंपरिक कंप्यूटर, गणना करने के लिए बिट्स (Bits) का प्रयोग करते हैं, जिसमे 0 तथा 1 क्रमशः ‘ऑफ़’ और ‘ऑन’ को व्यक्त करते हैं। यह कंप्यूटर बाइनरी भाषा कहे जाने वाले ‘जीरो’ तथा ‘वन’ के संयोजनों के माध्यम से सूचना संसाधित करने के लिए ट्रांजिस्टर का उपयोग करते हैं। इसमें जितने अधिक ट्रांजिस्टर होते है उतनी अधिक प्रसंस्करण क्षमता होती है।
  2. क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम यांत्रिकी के नियमों का उपयोग करते है। यहाँ अणुओं में, इनके आंतरिक कोणीय आवेग, जिसे ‘स्पिन’ (Spin) कहा जाता है, के कारण विभिन्न स्थितियां हासिल की जा सकती है। 0 तथा 1 की दो स्थितियां को अणुओं के स्पिन से व्यक्त किया जाता है।

पारंपरिक कंप्यूटर में सूचना को एकल नंबर 0 या 1 के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

क्वांटम कंप्यूटर में क्यूबिट्स (Qubits) का उपयोग किया जाता है जिसे एक साथ 0 और 1 के रूप में दर्शाया जाता है, जिससे अधिक प्रसंस्करण क्षमता प्राप्त होती है।

संभावनाएं:

हालांकि, क्वांटम कंप्यूटर अभी अपने प्रारंभिक अवस्था में है, फिर भी इसे कंप्यूटर की क्षमता और प्रोसेसिंग गति में आमूल-चूल सुधार करने की कुंजी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे कंप्यूटर बड़ी प्रणालियों और भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में प्रगति को बढ़ावा देने में सक्षम होंगे।

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

प्रयोगशाला में उत्पादित मांस: विश्व में उभरता हुआ विकल्प


(Lab-grown meat: emerging alternative worldwide)

संदर्भ:

हाल ही में, सिंगापुर खाद्य एजेंसी (Singapore Food Agency– SFA)  द्वारा प्रयोगशाला में उत्पादित मांस (lab-grown meat) उत्पादों को बिक्री के लिए स्वीकृति प्रदान की गयी है।

इसका महत्व:

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture OrganisationFAO) द्वारा जून 2020 में जारी की गयी खाद्य आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, मांस के वैश्विक उत्पादन में 333 मिलियन टन की कमी आने की संभावना है, जो कि वर्ष 2019 की तुलना में 1.7% कम होगी।

  • इसका मुख्य कारण कोविड-19 होगा किंतु, जूनोटिक बीमारियाँ, विशेषकर अफ्रीकी स्वाइन फ़ीवर और उच्च रोगजनक पक्षियों से होने वाले इन्फ्लुएंजा की आशंका, भी मांस-उत्पादन में होने वाली कमी में प्रमुख कारक होगी।
  • यह वैकल्पिक मांस उद्योग (alternative meat industry) के लिए एक अच्छा अवसर है।

प्रयोगशाला-उत्पादित या संवर्धित मांस तथा वनस्पति निर्मित मांस में अंतर

  • वनस्पति निर्मित मांस (Plant-Based Meat), सोया अथवा मटर प्रोटीन जैसे स्रोतों से निर्मित किया जाता है, जबकि संवर्धित मांस (Cultured Meat) को प्रयोगशाला में सीधे कोशिकाओं से उगाया जाता है।
  • दोनों प्रकार के मांस का उद्देश्य एक ही होता है: पारंपरिक मांस उत्पादों का विकल्प पेश करना, अधिक संख्या में लोगों की खाद्य जरूरतों को पूरा करना, जूनोटिक रोगों के खतरे को कम करना, मांस की खपत के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना।
  • कोशकीय संरचना के संदर्भ में, संवर्धित मांस, पारंपरिक मांस के समान होता है सिवाय इसके कि संवर्धित मांस प्रत्यक्षतः जानवरों से उत्पादित नहीं होता है।

संवर्धित मांस के लाभ:

  • चूंकि संवर्धित मांस का उत्पादन स्वच्छ जगहों किया जाता है, अतः साल्मोनेला (Salmonella) और ई-कोलाई (E coli) जैसे रोगजनकों द्वारा दूषित होने का खतरा काफी कम हो जाता है, जबकि पारंपरिक बूचड़खानों और मांस-पैकिंग कारखानों में इसका खतरा रहता है।
  • इसमें मांस के लिए पाले जाने वाले जानवरों के विपरीत, एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे एंटीबायोटिक प्रतिरोध क्षमता में वृद्धि होती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा कम हो जाता है।

उपभोक्ताओं के लिए संवर्धित मांस की उपलब्धता

संवर्धित मांस के व्यापक रूप से उपलब्ध होने में अभी कई महत्वपूर्ण बाधाएं है। जैसे:

  1. सामर्थ्यता
  2. उपभोक्ताओं का अविश्वास
  3. पारंपरिक मांस उत्पादकों का विरोध

संवर्धित मांस का उत्पादन

GFI की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 के अंत तक 55 कंपनियों द्वारा मुख्य रूप से संवर्धित मांस उत्पादों का उत्पादन किया जा रहा था। इसमें शामिल है:

  • इज़राइल में फ्यूचर मीट टेक्नोलॉजीज (चिकन, मेमना, बीफ़), तुर्की में बिफ़टेक (बीफ़), स्पेन में क्यूबिक फ़ूड्स (चिकन वसा), नीदरलैंड स्थित मीटेबल (सूअर का मांस, बीफ़), फ्रेंच कंपनी गॉरमेट (फ़िबीस) और यूएस-बेस्ड टेक्नोलॉजीज मेम्फिस मीट (बीफ, चिकन, बतख)।
  • इसके अलावा दिल्ली स्थित क्लियर मीट, संवर्धित चिकन विकसित कर रहा है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

केन-बेतवा इंटरलिंकिंग परियोजना बांध


(Ken-Betwa Interlinking Project Dam)

संदर्भ:

भारत के पर्यावरण मंत्रालय के एक विशेषज्ञ समिति द्वारा निचले ऑर्र बाँध (Orr Dam) के लिए दी गयी पर्यावरण मंजूरी को स्थगित कर दिया गया है और समिति ने नए आंकड़ो की मांग की है। इसके बाद ही इस परियोजना पर एक नई सार्वजनिक सुनवाई किए जाने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। ऑर्र बाँध, केन-बेतवा इंटरलिंकिंग परियोजना का एक भाग है।

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केन-बेतवा परियोजना के बारे में:

दो-भागों में पूरी की जाने वाली परियोजना के रूप में परिकल्पित ‘केन-बेतवा परियोजना’ देश की पहली नदी इंटरलिंकिंग परियोजना है।

  • इसे अंतरराज्यीय नदी स्थानांतरण मिशन हेतु एक मॉडल परियोजना के रूप में माना जाता है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य, मध्य प्रदेश में केन नदी से अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित करना है, जिससे सूखा-प्रवण बुंदेलखंड क्षेत्र के उत्तरप्रदेश में झांसी, बांदा, ललितपुर और महोबा जिलों और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर जिलों को सिंचित किया जा सकेगा।

प्रमुख तथ्य:

  1. केन और बेतवा नदियों का उद्गम मध्यप्रदेश में होता है और ये यमुना की सहायक नदियाँ हैं।
  2. केन नदी, उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में और बेतवा नदी हमीरपुर जिले में यमुना में मिल जाती हैं।
  3. राजघाट, परीछा और माताटीला बांध, बेतवा नदी पर स्थित हैं।
  4. केन नदी, पन्ना बाघ अभ्यारण्य से होकर गुजरती है।

इंटरलिंकिंग के लाभ:

  • जल और खाद्य सुरक्षा में वृद्धि
  • जल का समुचित उपयोग
  • कृषि को बढ़ावा
  • आपदा न्यूनीकरण
  • परिवहन को बढ़ावा देना

स्रोत: TOI

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


नौसेना दिवस 2020

(Navy Day)

4 दिसंबर को भारत में प्रतिवर्ष ‘नौसेना दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। भारतीय नौसेना के इतिहास में यह दिन काफ़ी महत्वपूर्ण है।

  • इसी दिन, भारत को 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान निर्णायक जीत हासिल हुई थी।
  • भारतीय नौसेना की मिसाइल बोट्स ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत कराची बंदरगाह में पाकिस्तानी जलपोतों, तेल भंडारों तथा समुद्री रक्षा ठिकानों पर सफलतापूर्वक हमला कर भारी नुकसान पहुंचाया था।
  • 4 दिसंबर को, ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत, भारतीय नौसेना ने पाकिस्तानी बंदरगाह शहर कराची के पास तीन जहाजों को डूबो दिया।

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