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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 4 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. दोषसिद्ध निर्वाचित प्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव लड़ने की पाबंदी का विरोध

2. भारत में विकलांगों की आबादी

3. प्रवासी भारतीयों को डाक मतपत्र की सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव

4. बांग्लादेश द्वारा रोहिंग्या स्थानांतरण प्रकिया का आरंभ

5. राष्ट्रपति से क्षमादान हेतु रिश्वत’ योजना का अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा खुलासा

 

सामान्य अध्ययन-III

1. अर्थव्यस्था V-आकार के बहाली मार्ग पर अग्रसर: केंद्र सरकार

2. वर्ष 1966 के रॉकेट बूस्टर का ‘नियर अर्थ ऑब्जेक्ट’ में रूपांतरण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अमेरिका द्वारा चीन से ‘गुलाम मजदूरों’ द्वारा उत्पादित कपास पर प्रतिबंध

2. मास्क का उपयोग न करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है: उच्चतम न्यायालय

3. लॉटरी, जुआ और सट्टेबाजी, GST अधिनियम के तहत कर योग्य: उच्चतम न्यायालय

4. ‘शांति की संस्कृति’ सत्र

5. आर्सीबो टेलिस्कोप

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

दोषसिद्ध निर्वाचित प्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव लड़ने की पाबंदी का विरोध


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है, कि वह आपराधिक मामले में दोषी ठहराए गए (Convicted) नेताओं (सांसद व विधायक) पर चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टी बनाने या किसी पार्टी का पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने वाले विचार को खारिज करती है।

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय का तर्क

  • लोगों द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि की तुलना नौकरशाहों के साथ नहीं की जा सकती है। ज्ञात हो कि, किसी अपराध में दोषी ठहराए जाने पर नौकरशाहों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम,1951 के तहत अपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने पर नेताओं के लिए निर्धारित कारावास की अवधि और उसके छह वर्ष पश्चात् तक के लिए ‘निर्हरता’ (Disqualification) पर्याप्त है।

निर्वाचन आयोग की टिप्पणियों:

केंद्र सरकार का रुख, निर्वाचन आयोग के नजरिए से भिन्न है। निर्वाचन आयोग ‘राजनीति को अपराध-मुक्त बनाने हेतु’ आजीवन प्रतिबंध को अनिवार्य करने का समर्थन करता है।

पृष्ठभूमि:

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर आधारित है, इनका तर्क है कि:

  1. अपराधिक मामलों में दोषी साबित होने पर, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के सदस्यों पर समान रूप से आजीवन प्रतिबंध लागू होना चाहिए।
  2. इसमें, एक से दूसरे से किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  3. जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 में निर्दिष्ट अपराधों के लिए दोषी साबित होने वाले सांसदों अथवा विधायकों को आजीवन प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए।

इन तर्कों का आधार:

  • मनी लॉन्ड्रिंग कानून, विदेशी मुद्रा विनिमय उल्लंघन, UAPA आदि विभिन्न कानूनों के प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने पर नौकरशाहों को उनकी सेवा से जीवनभर के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाता है, लेकिन सांसदों/विधायकों को किसी अपराध में दोषी पाए जाने पर केवल निश्चित अवधि के लिए ही अयोग्य ठहराया जाता है।
  • हालांकि, इस तर्क में प्रत्युत्तर में कहा गया है, कि, निर्वाचित जनप्रतिनिधि किसी विशिष्ट “सेवा शर्तों” के अधीन नहीं होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8
  2. इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश
  3. उम्मीदवारों के चुनाव से संबंधित मामलों पर निर्वाचन आयोग की शक्तियां

मेंस लिंक:

राजनीति के अपराधीकरण से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए और इन चिंताओं को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा कौन से कदम उठाए गए हैं?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

भारत में विकलांगों की आबादी


संदर्भ:

3 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस (International Day of Persons with Disabilities) के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विकलांगों के लिए अधिक समावेशी और सुलभ विश्व को बढ़ावा देना तथा उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना है।

तथ्य एवं आंकड़े:

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा विकलांगता पर पिछले वर्ष जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लगभग 2.2% आबादी किसी न किसी प्रकार की शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता से ग्रसित है।

विकलांगों की पहचान किस प्रकार की जाती है?

वर्ष 2011 की जनगणना तक, प्रश्नावली में सात प्रकार की विकलांगताओं से संबंधित सवाल पूछे जाते थे। वर्ष 2016 में विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम (Rights of People with Disabilities) को लागू किये जाने के बाद से सूची में 21 प्रकार की विकलांगताओं को सम्मिलित किया गया था।

  • तदनुसार, वर्ष 2019 की रिपोर्ट में विकलांगता की पूर्व परिभाषा के तहत मानसिक मंदता तथा देखने, सुनने, बोलने और चलने संबंधी स्थाई अक्षमता के अलावा अस्थायी रूप से अक्षमता और न्यूरोलॉजिकल तथा रक्त विकारों से पीड़ित व्यक्तियों को विकलांगता की श्रेणी में शामिल किया गया था।
  • गौरतलब है, कि संशोधित परिभाषा में, एसिड अटैक पीडि़तों की विकृतियों और जख्मों को विकलांगता के रूप में शामिल किया गया है।

विकलांगों की स्थिति

  • भारत में, महिलाओं की तुलना में विकलांग पुरुषों का अनुपात काफी अधिक है, और शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में विकलांगता अधिक व्यापक है।
  • बिना किसी सहायता के चलने में अक्षमता, विकलांगता का सबसे सामान्य प्रकार है। चलने में अक्षम (locomotor disability) आबादी में, पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है।

विकलांगों की सही संख्या ज्ञात होने का महत्व

भारत में विकलांग व्यक्तियों को रेलवे टिकट और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण जैसे कुछ लाभ प्रदान किये जाते हैं।

  • इन लाभों को प्राप्त करने हेतु, उन्हें विकलांगता को साबित करने वाला प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है।
  • वृहद स्तर पर, कल्याणकारी योजनाओं हेतु आवंटन करते समय विकलांगता के प्रकार और इसकी व्यापकता संबंधी आकड़े उपयोगी होते हैं।

भारत में विकलांगों के लिए संवैधानिक प्रावधान:

  • राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों (DPSP) के अनुच्छेद 41 में कहा गया है कि राज्य, अपनी आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं के भीतर, काम पाने के, शिक्षा पाने के और बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निःशक्तता की दशाओं में लोक सहायता पाने के अधिकार को संरक्षित करने का प्रभावी उपबंध करेगा।
  • संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची के तहत विकलांगों और बेरोजगारों के लिए ‘सहायता’ विषय को सम्मिलित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 41 किससे संबंधित है?
  2. विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 का अवलोकन
  3. सुगम्य भारत अभियान के बारे में
  4. दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना
  5. सहायक यंत्रों / उपकरणों की खरीद / फिटिंग के लिए विकलांग व्‍यक्तियों को सहायता (ADIP)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

प्रवासी भारतीयों को डाक मतपत्र की सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव


संदर्भ:

हाल ही में, निर्वाचन आयोग (Election CommissionEC) द्वारा प्रवासी भारतीयों (NRIs) को विदेशों से डाक मतपत्र (Postal Ballot) के माध्यम से मतदान करने हेतु अनुमति दिए जाने के लिए कानून मंत्रालय को एक प्रस्ताव दिया गया है।

प्रवासी भारतीय नागरिकों के लिए मतदान की वर्तमान प्रक्रिया

प्रवासी भारतीयों के लिए मतदान अधिकार, वर्ष 2011 में, जन प्रतिनिधित्व कानून 1950 में संशोधन के माध्यम से लागू किये गए थे।

  • प्रवासी भारतीय (NRI) अपने पासपोर्ट में उल्लिखित निवास स्थान संबंधी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कर सकता है।
  • वे केवल व्यक्तिगत रूप से मतदान कर सकते हैं, और उन्हें अपनी पहचान साबित करने हेतु अपना पासपोर्ट की मूल प्रति पेश करनी होगी।

प्रवासी मतदाताओं की वर्तमान संख्या

संयुक्त राष्ट्र की 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रवासी जनसंख्या 16 मिलियन है और यह विश्व में सर्वाधिक है।

स्वीकृति मिलने पर प्रवासी भारतीयों द्वारा डाक मतपत्रों से किस प्रकार मतदान किया जाएगा?

  • निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव के अनुसार, चुनाव में डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान करने में अभिरुचि रखने वाले किसी भी NRI को चुनाव की अधिसूचना से पांच दिन पहले रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को सूचित करना होगा।
  • इस प्रकार की जानकारी प्राप्त होने पर RO बैलेट पेपर इलेक्ट्रॉनिक रूप से NRI को भेजेगा।
  • NRI मतदाताओं को बैलेट पेपर डाउनलोड कर प्रिंटआउट पर अपनी वरीयता अंकित करना होगा और इसे अपने मौजूदा देश के राजनयिक या कांसुलर प्रतिनिधि द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा सत्यापित घोषणा पत्र के साथ वापस भेजना होगा।

प्रवासी मतदाताओं को प्रॉक्सी वोटिंग अधिकार देने संबंधी प्रस्ताव

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा वर्ष 2017 में प्रवासी भारतीयों के लिए प्रॉक्सी वोटिंग अधिकार संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया था।
  • इसके लिए सरकार द्वारा जन प्रतिनिधित्व कानून 1950 में संशोधन हेतु एक विधेयक पेश किया गया।
  • यह विधेयक लोकसभा द्वारा पारित हो गया था और यह राज्यसभा में लंबित होने के दौरान 16वीं लोकसभा के भंग होने साथ ही समाप्त हो गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘डाक मतपत्र’ के बारे में
  2. ‘डाक मतपत्र’ के माध्यम मतदान करने के पात्र
  3. प्रवासी भारतीयों द्वारा किस प्रकार मतदान किया जाता है?

मेंस लिंक:

क्या प्रवासी भारतीयों को डाक मतपत्रों के माध्यम से विदेशों से मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

बांग्लादेश द्वारा रोहिंग्या स्थानांतरण प्रकिया का आरंभ


संदर्भ:

बांग्लादेश द्वारा सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों को भासन चार द्वीप (Bhashan Char island) (चक्रवात और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में एक निम्नस्थ द्वीप) पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया गया है।

इस पर, नागरिक अधिकार समूहों द्वारा लोगों को विस्थापित होने किये विवश किये जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

संबंधित चिंताएं

भासन चार द्वीप का निर्माण मात्र 20 वर्ष पूर्व बंगाल की खाड़ी में हिमालयन गाद से हुआ था। वर्ष 2015 में, बांग्लादेश द्वारा इस विचार को पेश किये जाने के समय से ही भासन चार द्वीप पर मौसमी चरम स्थितियों और आपात स्थिति में मुख्य भूमि से दूरी को लेकर लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

रोहिंग्या कौन हैं?

  • रोहिंग्या, म्यांमार के कई जातीय अल्पसंख्यकों में से एक समुदाय हैं।
  • वर्ष 2017 की शुरुआत में म्यांमार में ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों की संख्या लगभग एक मिलियन थी।
  • उनकी अपनी भाषा और संस्कृति है और कहा जाता है, वे अरब व्यापारियों और अन्य समूहों के वंशज हैं, जो इस क्षेत्र में कई पीढ़ियों से बसे हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों को, विश्व में सर्वाधिक नहीं, तो सबसे अधिक भेदभाव किये जाने वाले लोगों में से एक, के रूप में वर्णित किया गया है।

रोहिंग्या की वर्तमान स्थिति

दक्षिणी बांग्लादेश में दुनिया के सबसे बड़े और सबसे घनी आबादी वाले शरणार्थी शिविर में लगभग 860,000 रोहिंग्या रहते हैं।

  • म्यांमार और बांग्लादेश की सरकारों के मध्य रोहिंग्या शरणार्थियों के म्यांमार में प्रत्यावर्तन हेतु शर्तों पर वार्ता जारी हैं।
  • गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत में लगभग 40,000 रोहिंग्या निवासित हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रोहिंग्या कौन हैं?
  2. रखाइन राज्य की अवस्थिति
  3. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के बारे में
  4. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) बनाम अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय

मेंस लिंक:

रोहिंग्या संकट पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय संवैधानिक योजना की अन्य देशों के साथ तुलना।

‘राष्ट्रपति से क्षमादान हेतु रिश्वत’ योजना का अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा खुलासा


(What is the ‘bribery for presidential pardon’ scheme unveiled by the US justice department?)

संदर्भ:

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा एक कथित रिश्वत योजना (bribery scheme) की जांच की जा रही है, जिसमे ‘राष्ट्रपति से क्षमादान प्राप्त करने अथवा सजा के लघुकरण’ के बदले व्हाइट हाउस में अधिकारियों को पैसा भेजा जाता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की क्षमादान-शक्ति का विस्तार

  • अमेरिकी राष्ट्रपति को संघीय अपराधों से संबंधित मामलों में क्षमा प्रदान करने अथवा सजा कम करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति की यह शक्ति असीमित होती है, और यह कांग्रेस द्वारा प्रतिबंधित नहीं की जा सकती है।
  • अमेरिकी संविधान के अनुसार, क्षमादान (Clemency) एक व्यापक कार्यकारी शक्ति है और राष्ट्रपति के विवेकाधीन होती है- अर्थात, राष्ट्रपति, क्षमा प्रदान करने पर किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है, और इसके लिए उसे कोई भी कारण स्पष्ट करना आवश्यक नहीं है।

सीमाएं:

  • अमेरिकी राष्ट्रपति की क्षमादान-शक्ति का महाभियोग के मामलों में प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
  • यह शक्ति केवल संघीय अपराधों पर लागू होती है और राज्य अपराधों पर नहीं।

अनुच्छेद 72 के तहत भारतीय राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ:

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 में कहा गया है कि, राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन (Reprieve), विराम (Respite) या परिहार (Remission) करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण (Commutation) करने की शक्ति होगी।

भारत के राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान शक्ति का प्रयोग

  • उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश सेना न्यायालय ने दिया है,
  • उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय संबंधी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है,
  • उन सभी मामलों में, जिनमें दंडादेश, मृत्यु की सजा होती है।

प्रमुख तथ्य:

  1. राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर किया जाता है।
  2. संविधान में, राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल के ‘दया अधिकार क्षेत्र’ (mercy jurisdiction) से संबधित निर्णय की वैधता पर प्रश्न उठाने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
  3. हालांकि, ईपुरु सुधाकर (Epuru Sudhakar) मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा, किसी भी मनमानी को रोकने के उद्देश्य से राष्ट्रपति और राज्यपालों की क्षमादान शक्तियों की न्यायिक समीक्षा का विकल्प दिया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत में राष्ट्रपति तथा राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों में अंतर
  2. न्यायिक समीक्षा की प्रयोज्यता
  3. अनुच्छेद 72 किससे संबंधित है?
  4. अमेरिकी राष्ट्रपति को क्षमा करने की शक्ति

मेंस लिंक:

भारत में राष्ट्रपति तथा राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों की विस्तार से तुलना कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

अर्थव्यस्था V-आकार के बहाली मार्ग पर अग्रसर: केंद्र सरकार


(Economy firmly on the path of a V-shaped recovery, says govt)

संदर्भ:

हाल ही में, वित्त मंत्रालय ने कहा है कि:

  • पहली तिमाही में गिरावट के बाद भारत की अर्थव्यवस्था V-आकार के बहाली (V-shaped recovery) मार्ग पर अग्रसर है।
  • तीसरी तिमाही में, नवंबर के संकेतकों में ‘गिरावट के बावजूद’ सुधार की उम्मीद है।
  • अर्थव्यवस्था में बहाली के लिए, अनलॉक प्रक्रिया के साथ-साथ ‘कुशल’ प्रोत्साहन उपायों के लिए श्रेय दिया जा रहा है।

आर्थिक बहाली के आकार (Shapes)

जेड-आकार की बहाली

(Z-shaped recovery): सबसे आशावादी परिदृश्य होता है जिसमें अर्थव्यवस्था में गिरने के बाद तेजी से वृद्धि होती है। Z- शेप चार्ट, सामान्य पृवत्ति में आने से पहले अर्थव्यवस्था में पूर्व स्थिति पर तेजी से पहुचने का प्रयास दर्शाता है (जैसे, लॉकडाउन हटाए जाने के बाद भरपाई में की गयी खरीददारी)।

V-आकार की बहाली: में अर्थव्यवस्था तीव्रता से पूर्व स्थिति को प्राप्त करती है और सामान्य विकास की प्रवृत्ति-रेखा पर वापस आ जाती है।

U-आकार की बहाली: में ऐसा परिदृश्य होता है जिसमें अर्थव्यवस्था, गिरने, संघर्ष करने और कुछ अवधि के लिए कम विकास दर के बाद, धीरे-धीरे सामान्य स्तर तक वृद्धि करती है।

W-आकार की बहाली: जोखिम युक्त होती है – इसमें विकास दर में कमी तथा वृद्धि होती है, तथा फिर गिरती है और पुनः वृद्धि करती है, इस प्रकार, इसमें डब्ल्यू-आकार का चार्ट बनता है।

L- आकार की रिकवरी: सबसे खराब स्थिति होती है, जिसमें अर्थव्यवस्था में गिरावट के बाद विकास निम्न स्तर पर रुक जाता है और लंबे समय तक ठीक नहीं होता है।

J-आकार की बहाली: में कुछ हद तक अवास्तविक परिदृश्य होता है, इसमें निम्न स्तर पर पहुचने के बाद तीव्रता से सामान्य स्तर से आगे तक वृद्धि की प्रवृत्ति होती हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

वर्ष 1966 के रॉकेट बूस्टर का ‘नियर अर्थ ऑब्जेक्ट’ में रूपांतरण

संदर्भ:

सितंबर में, नासा द्वारा वित्त पोषित पैन-स्टारआरएस1 (Pan-STARRS1) टेलिस्कोप ने वक्रीय कक्षा में परिभ्रमण करते हुए एक अजनबी पिंड की खोज की। ये पिंड पृथ्वी के साथ निकटता का संकेत देता है।

प्रारंभ में, इस पिंड को पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला एक क्षुद्रग्रह समझा गया था और इसलिए माइनर प्लेनेट सेंटर द्वारा इसका नामकरण किया गया था।

हालांकि, वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि 2020 SO नामक यह ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट’ / पृथ्वी का निकटवर्ती पिंड (Near-Earth Object) एक रॉकेट बूस्टर है, जिसे नासा के सर्वेयर अंतरिक्ष यान (Surveyor spacecraft) को वर्ष 1966 में चंद्रमा की ओर भेजने में प्रयुक्त किया गया था।

‘सर्वेयर-2 क्या था?

सितंबर 1966 में, ‘सर्वेयर-2 अंतरिक्ष यान (Surveyor-2 spacecraft) चंद्रमा की सतह पर एक सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला था, उसी समय इसके तीन प्रक्षेपकों (Thrusters) में से एक थ्रस्टर विफल हो गया, जिसके परिणामस्वरूप अंतरिक्ष यान चक्कर काटने लगा और सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

इस मिशन का उद्देश्य, अपोलो मिशन के वर्ष 1969 में पहली बार चंद्रमा की सतह पर उतरने से पहले चंद्रमा की सतह का अन्वेषण (Reconnoitre) करना था।

‘सर्वेयर-2 दुर्घटनाग्रस्त के पश्चात

‘सर्वेयर-2’ अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और रॉकेट बूस्टर, सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण करने वाली एक अज्ञात कक्षा में अदृश्य हो गया।

Pan-STARRS1 टेलिस्कोप के बारे में:

  • पैनोरामिक सर्वे टेलीस्कोप और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम (Pan-STARRS) टेलिस्कोप, हवाई विश्वविद्यालय के खगोल विज्ञान संस्थान (Institute of Astronomy) द्वारा विकसित और संचालित विस्तीर्ण-क्षेत्र खगोलीय इमेजिंग (wide-field astronomical imaging) हेतु एक प्रणाली है।
  • Pan-STARRS1 या PS1, पैनोरामिक सर्वे टेलीस्कोप और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम (Pan-STARRS) का पहला भाग है। PS1 सर्वे में आकाश के चित्र लेने हेतु 8-मीटर टेलीस्कोप और इसके 1.4 गीगाहर्ट्ज़ कैमरे का उपयोग करता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अमेरिका द्वारा चीन से ‘गुलाम मजदूरों’ द्वारा उत्पादित कपास पर प्रतिबंध

(U.S. to block import of ‘slave labour’ cotton from China)

संयुक्त राज्य अमेरिका कपास द्वारा चीन से होने वाले कपास के आयात पर रोक लगाई जाएगी। अमेरिका का कहना है कि, इस कपास को चीन के झिंजियांग प्रांत में ‘गुलाम मजदूरों’ द्वारा उत्पादित किया जाता है।

बीजिंग, इस संसाधन-संपन्न क्षेत्र में अपनी नीतियों को लेकर तीव्र अंतर्राष्ट्रीय आलोचनाओं के घेरे में है। नागरिक अधिकार समूहों का कहना है कि इस क्षेत्र में लगभग एक लाख उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नजरबंद शिविरों में रखा जा रहा है।

 

मास्क का उपयोग न करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है: उच्चतम न्यायालय

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने कहा है, कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से मास्क नहीं पहनते हैं और शारीरिक दूरी मानदंडों का पालन नहीं करते हैं, वे दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन (fundamental rights of others) करते हैं।

लॉटरी, जुआ और सट्टेबाजी, GST अधिनियम के तहत कर योग्य: उच्चतम न्यायालय

(Lottery, gambling and betting taxable under GST Act: SC)

  • शीर्ष अदालत के अनुसार, लॉटरी, सट्टेबाजी और जुआ ‘कार्यवाही योग्य” है और केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 2(52) के तहत ‘वस्तु’ की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं।
  • अदालत ने कहा है, कि लॉटरी पर GST आरोपित करना “शत्रुतापूर्ण भेदभाव” (Hostile Discrimination) नहीं है।

संबंधित प्रकरण

स्किल लोडो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और अन्य लॉटरी एजेंटों द्वारा अपनी याचिका में केंद्रीय जीएसटी (GST) कानून की धारा-2(52) के तहत वस्तु की स्पष्ट व्याख्या करने की मांग की थी। इनका कहना था कि, लॉटरी ‘वस्तु’ नहीं है और इस पर लगाया गया जीएसटी अवैध है।

‘शांति की संस्कृति’ सत्र

(‘Culture of Peace session)

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1997 से प्रत्येक वर्ष इस सत्र का आयोजन किया जाता है।
  • 13 सितंबर, 1999 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा शांति की संस्कृति पर कार्रवाई संबंधी घोषणा और कार्यक्रम को अपनाया गया था।
  • ‘शांति की संस्कृति’ के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष की तैयारियों के संदर्भ में दस महीने की वार्ता के बाद इसे अपनाया गया था।

बीते सत्र में, भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र से तीन अब्राहमिक धर्मों – यहूदी धर्म, ईसाई और इस्लाम के अलावा अन्य धर्मों के खिलाफ नफरत और हिंसा के संदर्भ में आलोचना का विस्तार करने के लिए कहा गया।

आर्सीबो टेलिस्कोप

(Arecibo telescope)

संदर्भ:

हाल ही में, खगोल विज्ञान में अपने विशिष्ट योगदान के लिए प्रसिद्ध, प्यूर्टो रिको का विशाल आर्सीबो टेलिस्कोप (Arecibo telescope) नष्ट हो गया है।

प्रमुख बिंदु:

1963 में निर्मित, यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सिंगल-डिश रेडियो टेलीस्कोप है।

  • सबसे शक्तिशाली रडार होने के नाते, वैज्ञानिकों द्वारा आर्सीबो को ग्रहों, क्षुद्रग्रहों और आयनोस्फीयर का निरीक्षण करने के लिए तैनात किया गया था।
  • यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष की गहराइयों से आने वाले खतरों जैसे एस्टेरॉयड्स, मीटियॉर्स और एलियन दुनिया आदि की जानकारी विश्व भर के वैज्ञानिकों को प्रदान करता था।

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