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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 3 December

 

विषय – सूची

 

सामान्य अध्ययन-I

1. चक्रवात निवार की अपेक्षा चक्रवाती तूफान बुरेवी कम शक्तिशाली क्यों होगा?

 

सामान्य अध्ययन-II

1. अवमानना कार्यवाही हेतु सहमति

2. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की विश्‍व मलेरिया रिपोर्ट 2020

3. ईरान परमाणु समझौता

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भारत के पेरिस जलवायु लक्ष्यों की निगरानी हेतु समिति का गठन

2. चांग’ई-5 प्रोब

3. जैव हथियार

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बिहार में ‘प्रवासी पक्षी उत्सव’

2. सुमदोरोंग चू

3. परमाणु चुंबकीय अनुनाद (NMR) परीक्षण

4. इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ इंश्योरेंस सुपरवाइज़र्स (IAIS)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान आदि।

चक्रवात निवार की अपेक्षा चक्रवाती तूफान बुरेवी कम शक्तिशाली क्यों होगा?


संदर्भ:

चक्रवात निवार के कराइकल तट से टकराने के सात दिन पश्चात, एक अन्य चक्रवात, बुरेवी (Burevi), इस सप्ताह के अंत तक तमिलनाडु के दक्षिणी जिले कन्याकुमारी के तट पर दस्तक देने वाला है। चक्रवात बुरेवी का नामकरण मालदीव द्वारा किया गया है।

पिछले 10 दिनों के दौरान, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाला तीसरा चक्रवात है।

क्या चक्रवात बुरेवी भी चक्रवात निवार की भांति तीव्र होगा?

चक्रवात निवार द्वारा निर्मित समुद्रीय उद्दवेलन के कारण चक्रवात बुरेवी की तीव्रता सीमित होगी।

  • जब समुद्र के एक ही क्षेत्र में इस प्रकार की प्रणालियां क्रमिक रूप से विकसित होती हैं, तो पहली प्रणाली के द्वारा उद्दवेलन (Upwelling) आरंभ हो जाता है। उद्दवेलन वह प्रक्रिया होती है, जिसमे महासागर की निचली सतह से ठंडा पानी ऊपरी महासागरीय सतह की ओर धकेल दिया जाता है।
  • उष्ण महासागरीय सतह के अभाव में, किसी भी चक्रवात, जैसे बुरेवी, को समुद्री क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पर्याप्त ईंधन नहीं मिलेगा, परिणामस्वरूप इसकी तीव्रता में कमी होगी।

‘चक्रवात’ क्या होते है?

उष्णकटिबंधीय चक्रवात, हवाओं की एक बृहद् प्रणाली होते है, जिसमे हवाएं एक निम्न वायुदाब के केंद्र के चारो ओर घूर्णन करती हैं, इसमें हवाओं की दिशा, भूमध्य रेखा के उत्तर में वामावृत (counter-clockwise) और भूमध्य रेखा के दक्षिण में दक्षिणावर्त (clockwise) होती है।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. चक्रवातों के लिए भारत द्वारा सुझाए गए नामों की सूची।
  2. चक्रवात की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी कारक
  3. विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवातों का नामकरण।
  4. स्थल पर चक्रवातों की तीव्रता में अंतर का कारण
  5. भारत के पूर्वी तट पर अधिक चक्रवात आने का कारण

मेंस लिंक:

चक्रवात क्या होते हैं? इनका नामकरण किस प्रकार किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

अवमानना कार्यवाही हेतु सहमति


‘अदालत की अवमानना’ से संबंधित कानून

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) में सिविल अवमानना तथा आपराधिक अवमानना को परिभाषित किया गया है, तथा अवमानना ​​के मामले में दोषियों को दण्डित करने हेतु अदालत की शक्तियाँ एवं प्रक्रिया निर्धारित की गयी है।

अदालत की अवमानना का अर्थ, अदालत की गरिमा, न्याय और इसके प्राधिकार का विरोध अथवा अवज्ञा करने वाले व्यवहार से किसी न्यायालय तथा इसके अधिकारियों की अवहेलना करना तथा उसके अधिकारों के प्रति अनादर प्रदर्शित करना है।

अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने के लिए अटार्नी जनरल की सहमति क्यों आवश्यक है?

किसी शिकायत को संज्ञान में लेने से पहले अटॉर्नी जनरल की सहमति की आवश्यकता का उद्देश्य अदालत का समय बचाना है।

  • अवमानना कार्यवाही शुरू करने हेतु अदालत पहला मंच होती है, यदि सार-हीन याचिकाएं दायर की जाती हैं, तो अदालतों का कीमती समय बर्बाद होता है।
  • अटार्नी जनरल सहमति का उद्देश्य सार-हीन याचिकाओं पर रोक लगाना है। ऐसा माना जाता है, कि अदालत के अधिकारी के रूप में, अटार्नी जनरल स्वतंत्र रूप शिकायतों की वैधता संबंधी जांच करेगा।

किन परिस्थितियों में अटार्नी जनरल की सहमति की आवश्यकता नहीं होती है?

  • जब कोई प्राइवेट सिटीजन, किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना कार्यवाही शुरू करना चाहता है, तो इसके लिए अटार्नी जनरल की सहमति अनिवार्य होती है।
  • हालाँकि, जब अदालत द्वारा स्वयं ही अवमानना ​​कार्यवाही शुरू की जाती है, तो अटार्नी जनरल की सहमति की आवश्यकता नहीं होती है।
  • ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भारतीय संविधान में अदालत को अवमानना कार्यवाही शुरू करने शक्ति प्रदान की गयी है, और अदालत अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अटार्नी जनरल की सहमति पर निर्भर नहीं है।

अटार्नी जनरल द्वारा सहमति देने से मना करने की स्थिति में:

  • यदि अटार्नी जनरल सहमति देने से इनकार करता है, तो मामला इसके साथ ही खत्म हो जाता है।
  • हालांकि, शिकायतकर्ता, इस मामले को अलग से अदालत के संज्ञान में ला सकता है और अदालत से इस मामले पर संज्ञान लेने का आग्रह कर सकता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 में क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय को न्यायालय की अवमानना ​​के लिए दोषी व्यक्तियों को दंडित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवमानना के संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायलय की शक्तियां
  2. इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान।
  3. न्यायलय की अवमानना (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा किये गए परिवर्तन
  4. सिविल बनाम आपराधिक अवमानना
  5. अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार
  6. अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 10 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

भारत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामलों को किस प्रकार हल किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की विश्‍व मलेरिया रिपोर्ट 2020


प्रमुख निष्कर्ष:

भारत ने मलेरिया के मामलों में कमी लाने के काम में प्रभावी प्रगति की है।

  • भारत इस बीमारी से प्रभवित वह अकेला देश है जहां 2018 के मुकाबले 2019 में इस बीमारी के मामलों में 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
  • भारत की वार्षिक परजीवी घटनाएँ (Annual Parasitic Incidence API) 2017 के मुकाबले 2018 में घटकर 6 प्रतिशत और 2018 के मुकाबले 2019 में 18.4 प्रतिशत हो गयी हैं। भारत ने वर्ष 2012 से API को एक से भी कम पर बरकरार रखा है।
  • भारत ने मलेरिया के क्षेत्रवार मामलों में सबसे बडी गिरावट लाने में भी योगदान किया है यह 20 मिलियन से घटकर करीब 6 मिलियन पर आ गई है।
  • वर्ष 2000 से 2019 के बीच मलेरिया के मामलों में 8 प्रतिशत की गिरावट और मौत के मामलों में 73.9 प्रतिशत की गिरावट आई है।

उच्‍च जोखिम और उच्‍च प्रभाव (HBHI) पहल

(High Burden to High Impact initiative)

  • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन में मलेरिया के अधिक जोखिम वाले 11 देशों में उच्‍च जोखिम और उच्‍च प्रभाव (HBHI) पहल शुरू की है।
  • भारत में, इस पहल को पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश – इन चार राज्‍यों में शुरू किया गया है।

मलेरिया के बारे में:

  • मलेरिया, परजीवी से होने वाली बीमारी है। मलेरिया परजीवी आमतौर पर एक विशेष प्रकार के मच्छर को संक्रमित करता है।
  • संक्रमण: मलेरिया, मादा एनोफिलीज मच्‍छरों से फैलता है। मादा एनोफिलीज मच्‍छर स्पोरोजोइट्स (sporozoites) परजीवी को मनुष्य की त्वचा में प्रविष्ट करते है।

चार प्रकार के मलेरिया परजीवी मनुष्यों को संक्रमित करते हैं:

  • प्‍लासमोडियम फेलसिपेरम (Plasmodium falciparum), प्‍लासमोडियम वीवेक्‍स ( vivax), पी. ओवले (P. ovale) और पी. मलेरिया (P. malariae)।
  • इसके अलावा, दक्षिण पूर्व एशिया में मैकाक लंगूरों को संक्रमित कने वाला पी. नोलेसी ( knowlesi) परजीवी मनुष्यों को भी संक्रमित करता है, जिससे मलेरिया का संक्रमण पशुओं से मनुष्यों (जूनोटिक मलेरिया) में फैलता है।

दुर्गम अंचलारे मलेरिया निराकरण (DAMaN) पहल

  • भारतीय राज्यों में, ओडिशा (Odisha) की मलेरिया उन्मूलन की दिशा में दुर्गम अंचलारे मलेरिया निराकरण (Durgama Anchalare Malaria NirakaranDAMaN) पहल महत्वपूर्ण है।
  • इस पहल का उद्देश्य राज्य के ‘पहुँच से बाहर’ और सर्वाधिक प्रभावित लोगों तक अपनी सेवाएं पहुंचाना है। इस पहल में स्पर्शोन्मुख मलेरिया से निपटने के लिए इन-बिल्ट इनोवेटिव रणनीतियाँ सम्मिलित की गयी हैं।
  • इस कार्यक्रम को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च (ICMR-NIMR), नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (NVBDCP), ओडिशा और मेडिसिन फॉर मलेरिया वेंचर (MMV) द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वायरस और बैक्टीरिया के कारण होने वाले विभिन्न रोगों में अंतर और उदाहरण।
  2. मलेरिया- कारण और उपचार।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

ईरान परमाणु समझौता


(Iran nuclear deal)

संदर्भ:

ईरान परमाणु समझौते को पुनः लागू किए जाने के लिए बिडेन द्वारा नई मांगें रखीं गयी हैं।

क्या हैं मांगें?

ईरान को प्रॉक्सी (proxies) रूप से लेबनान, इराक, सीरिया और यमन में जारी ‘उग्र’ क्षेत्रीय गतिविधियों को वार्ता के माध्यम से हल करना होगा और इसमें सऊदी अरब जैसे अरब पड़ोसियों को शामिल करना होगा।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को इस समझौते एकतरफा रूप से अलग कर लिया और अमेरिका के कट्टर दुश्मनों के खिलाफ ‘अधिकतम दबाव’ अभियान के रूप में ईरान पर पंगु कर देने वाले प्रतिबंध लगा दिए।

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के बारे में:

(Joint Comprehensive Plan of Action)

वर्ष 2015 में ईरान ने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी के साथ एक समझौते में अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने पर सहमति व्यक्त की थी।

2015 के परमाणु समझौते से ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने के बदले में प्रतिबंधों से राहत प्रदान की गयी।

समझौते के तहत:

  1. अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी के साथ 2015 के समझौते में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने पर सहमत हुआ।
  2. तेहरान ने सेंट्रीफ्यूज, समृद्ध यूरेनियम और भारी पानी, परमाणु हथियारों के सभी प्रमुख घटकों के अपने भंडारों में महत्वपूर्ण कटौती करने पर सहमति व्यक्त की।
  3. समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए, सभी वार्ताकारों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त आयोग की स्थापना की गई थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. JCPOA क्या है? हस्ताक्षरकर्ता
  2. ईरान और उसके पड़ोसी।
  3. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  4. IAEA के सदस्य
  5. IAEA के कार्यक्रम।
  6. बोर्ड ऑफ गवर्नर- रचना, मतदान और कार्य
  7. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA)  पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारत के पेरिस जलवायु लक्ष्यों की निगरानी हेतु समिति का गठन


संदर्भ:

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा MoEFCC के सचिव की अध्यक्षता में पेरिस समझौते के कार्यान्वयन हेतु एक उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति (apex committee for Implementation of Paris Agreement AIPA) का गठन किया गया है। AIPA यह सुनिश्चित करेगी कि भारत पेरिस समझौते के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने की सही दिशा में है।

यह समिति भारत में कार्बन बाजारों को विनियमित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्राधिकरण के रूप में भी कार्य करेगी।

उद्देश्य:

AIPA का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के मामलों पर एक समन्वित प्रतिक्रिया पैदा करना है, जो सुनिश्चित करता है कि भारत अपने राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (Nationally Determined ContributionsNDC) सहित पेरिस समझौते के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने की दिशा में अगसर है।

राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC)

NDC ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और मानवजनित जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने हेतु पेरिस समझौते का हिस्सा रहे देशों द्वारा किए जाने वाले स्वैच्छिक प्रयासों का लेखा-जोखा है।

  • NDC को वर्ष 2020 के बाद की अवधि में लागू किया जाएगा।
  • भारत के द्वारा वर्ष 2015 में अपने राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) प्रस्तुत कर दिए गए थे।

भारतीय राष्ट्रीय निर्धारित योगदानों के तीन मात्रात्मक लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

  1. वर्ष 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद उत्सर्जन की तीव्रता में, वर्ष 2005 के स्तर से, 33-35 प्रतिशत की कमी।
  2. वर्ष 2030 तक कुल उर्जा में 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत्।
  3. वनीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से 5-3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बन सिंक बनाना।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. पेरिस समझौता क्या है?
  2. किन देशों द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं?
  3. पेरिस समझौते के तहत लक्ष्य
  4. पेरिस समझौते के तहत घोषित वित्त व्यवस्था
  5. NDC क्या हैं?

मेंस लिंक:

पेरिस जलवायु समझौते के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

  

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चांग’ई-5 प्रोब


Chang’e-5 probe

संदर्भ:

चांग’ई-5 प्रोब, हाल ही में, चीन द्वारा प्रक्षेपित किया गया मानवरहित अंतरिक्ष यान है।

चांग’ई-5 प्रोब के बारे में:

  • इस प्रोब का नामकरण एक पौराणिक चीनी चंद्रमा देवी के नाम पर किया गया है।
  • चांग’ई-5 प्रोब, चार हिस्सों से मिलकर बना है: एक ऑर्बिटर (Orbiter), एक रिटर्नर (Returner), एक आरोहक (Ascender) और एक लैंडर (Lander)।
  • इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह से चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाना है। यह पिछले चार दशकों में, चंद्रमा से नमूने लाने के लिए किसी भी राष्ट्र द्वारा किया गया पहला प्रयास है।
  • यदि यह मिशन सफल होता है, तो 1960 और 1970 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ की इस सफलता के बाद, चीन, चंद्रमा के नमूने (Lunar Samples) लाने वाला तीसरा देश बन जाएगा।
  • इससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा की उत्पत्ति, निर्माण और इसकी सतह पर होने वाली ज्वालामुखी गतिविधियों के बारे में समझने में मदद मिलेगी।

नमूने एकत्रित करने हेतु चिह्नित स्थान:

चांग’ई-5 प्रोब, ओशियनस प्रोसेलरम (Oceanus Procellarum) या ‘ओशियन ऑफ स्टॉर्म’ (Ocean of Storms) के नाम से जाने जाने वाले, अब तक अनन्वेषित (Unexplored), और विशाल लावा निर्मित मैदान से 2 किलोग्राम सतही नमूने एकत्र करेगा।

चांग’ई-5 प्रोब मिशन द्वारा, चीन के अंतरिक्ष इतिहास में निम्नलिखित ‘चार घटनाएं’ पहली बार होंगी:

  1. चंद्रमा की सतह से उड़ान भरने वाला यह पहला प्रोब होगा।
  2. चंद्रमा की सतह से, स्वचालित रूप से नमूने एकत्र करने वाला पहला प्रोब।
  3. चंदमा की सतह पर पहली बार मानवरहित प्रोब का भ्रमण और चन्द्र कक्षा में डॉकिंग।
  4. चंद्र-सतह से नमूनों सहित पलायन वेग (Escape Velocity) से पृथ्वी पर लौटने का पहला अवसर।

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 स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

जैव हथियार


(Bioweapons)

संदर्भ:

उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस के सैनी ने कहा है कि ‘भविष्य में होने वाले युद्ध शून्य-लागत वाले युद्धों की ओर अग्रसर हो सकते हैं, जिसमे कोई एक बहुत ही घातक रोगाणु (Pathogen),  उच्च तकनीकों युक्त शस्त्रागार को गतिहीन कर सकता है।’

उन्होंने कहा है, कि कमजोर सेनाएं किसी अप्रतिबंधित युद्ध क्षेत्रों में अपने-अपने लाभप्रद स्थितियों की तलाश में रहेंगी, और वहीं बयानबाजी (Narratives) की लड़ाई के लिए सोशल मीडिया पसंदीदा मार्ग बना रहेगा। 

‘जैविक हथियार’ क्या होते हैं?

‘जैविक हथियारों’ (Biological weapons) को रोगाणु हथियार (Germ Weapons) भी कहा जाता है। ये कई रोग फैलाने वाले एजेंटों में से कोई भी हो सकते हैं – जैसे कि बैक्टीरिया, वायरस, रिकेट्सिया, कवक, विषाक्त पदार्थ, या अन्य जैविक एजेंट – जिनका उपयोग मनुष्यों, जानवरों या वनस्पति के खिलाफ हथियारों के रूप में किया जा सकता है।

आमतौर पर, जैविक हथियारों को रासायनिक हथियारों, रेडियोलॉजिकल हथियारों और परमाणु हथियारों की भांति ‘सामूहिक विनाश के हथियार’ (weapons of mass destruction) के रूप में जाना जाता है।

जैविक हथियार अभिसमय (BWC)

जैविक हथियार अभिसमय (Biological Weapons Convention- BWC), सामूहिक विनाश के हथियारों की पूरी श्रेणी के विकास, उत्पादन और भंडार पर प्रतिबंध लगाने वाली पहली बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण संधि है। इस संधि को 10 अप्रैल 1972 को हस्ताक्षर के लिए खोला गया था। जैविक हथियार अभिसमय (BWC) 26 मार्च 1975 को लागू किया गया था।

BWC के तहत प्रतिबंध

जैविक हथियार अभिसमय (BWC) के तहत निम्नलिखित के विकास, भंडार, अधिग्रहण, प्रतिधारण, और उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया गया है:

  1. रोगनिरोधी, सुरक्षात्मक या अन्य शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अतर्कसंगत जैविक एजेंटों और विषाक्त पदार्थों के प्रकार और उनकी मात्रा;
  2. शत्रुतापूर्ण उद्देश्यों के लिए या सशस्त्र संघर्ष में जैविक एजेंटों या विषाक्त पदार्थों का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किए गए हथियार, उपकरण और डिलीवरी वाहन;
  3. ऊपर वर्णित एजेंटों, विषाक्त पदार्थों, हथियारों, उपकरणों और डिलीवरी वाहनों को हासिल करने अथवा इनका हस्तांतरण।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बिहार में ‘प्रवासी पक्षी उत्सव’

बिहार में, प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में आने वाले प्रवासी पक्षियों को बचाने हेतु अपनी पहल के तहत पहली बार एक पक्षी उत्सव आयोजित किया जा रहा है।

  • यह उत्सव पूर्वी बिहार के भागलपुर जिले में आयोजित किया जा रहा है। पक्षी महोत्सव के लिए भागलपुर का चयन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि सुल्तानगंज और कहलगांव के बीच विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य का 60 किलोमीटर लंबा इलाका काफी समय से प्रवासी पक्षियों का केंद्र रहा है।
  • भागलपुर में आने वाले कुछ प्रमुख प्रवासी पक्षियों में बार-हेडेड गूज, स्टेपी ईगल, यूरेशियन कर्लेव, व्हाइट वैगेट, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब, कॉमन ग्रीनशंक और यूरेशियन कूट शामिल हैं।

सुमदोरोंग चू

(Sumdorong Chu)

वर्ष 1986–87 में, भारत और चीन के मध्य तवांग जिले, अरुणाचल प्रदेश और कोना काउंटी, तिब्बत की सीमा पर स्थित सुमदोरोंग चू (Sumdorong Chu) घाटी में एक सैन्य गतिरोध हुआ था।

वर्ष 1962 में हुए युद्ध के बाद से, विवादित मैकमोहन रेखा पर होने वाला, यह पहला सैन्य टकराव था और इसके तीव्र होने की आशंकाएं व्यक्त की गयी थीं।

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परमाणु चुंबकीय अनुनाद (NMR) परीक्षण

(Nuclear Magnetic Resonance test)

NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी एक विश्लेषणात्मक रसायनिक तकनीक है जिसका उपयोग गुणवत्ता नियंत्रण और नमूने (sample) के अवयवों और शुद्धता और साथ ही आणविक संरचना का निर्धारण करने के लिए किया जाता है।

चर्चा का कारण

  • भारत में शहद के 13 ब्रांडों में से 10 ब्रांड इस ‘शुद्धता परीक्षण’ में विफल रहे हैं।
  • भारतीय कानून में स्थानीय स्तर पर विपणन किए जाने वाले शहद के लिए NMR परीक्षण की आवश्यकता नहीं है, किंतु निर्यात करने हेतु शहद के लिए यह परीक्षण आवश्यक है।

इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ इंश्योरेंस सुपरवाइज़र्स (IAIS)

संदर्भ:

हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) को इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ इंश्योरेंस सपुरवाइजर्स (IAIS) की सदस्यता प्राप्त हुई है।

IAIS के बारे में:

  • इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ इंश्योरेंस सपुरवाइजर्स (IAIS) का गठन वर्ष 1994 में हुआ, जिसका मुख्यालय स्विटजरलैंड में स्थित है। यह एक स्वैच्छिक संगठन है।
  • इसमें 200 से ज्यादा न्यायाधिकरण (अधिकार क्षेत्र) के दायरे में आने वाले इन्श्योरेंस सुपरवाइजर और नियामक जुड़े हुए हैं, जिनकी विश्व के इंश्योरेंस प्रीमियम में 97% हिस्स्दारी हैं।
  • इन्श्योरेंस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक बनाने, नियमों को तय करने और उसके लिए जरूरी सहयोग देने में यह संगठन की अहम भूमिका निभाता है।
  • IAIS, अपने सदस्यों को अपने, इंश्योरेंस सुपरविजन और इंश्योरेंस बाजार के अनुभवों को साझा करने हेतु एक प्लेटफॉर्म भी मुहैया कराता है।
  • अपनी इन्हीं विशेषताओं की वजह से IAIS को G20 देशों के नेताओं और दूसरे अंतराष्ट्रीय संगठनों द्वारा नियमित से आमंत्रित किया जाता है।

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