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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 2 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. महान्यायवादी

2. दवा निर्माताओं द्वारा कोविड-19 वैक्सीन के ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ की मांग

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कृषि संबंधी अधिनियमों पर किसानों का प्रदर्शन जारी

2. फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण हेतु ‘डेढ़-गुना फॉर्मूला’

3. पेड़ के छल्लों द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ की चेतावनी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चारधाम परियोजना

2. ‘क्रय प्रबंधक सूचकांक’ (PMI)

3. ग्रीन चारकोल हैकथॉन

4. आदि महोत्सव

5. SCO ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

महान्यायवादी


(Attorney General of India)

संदर्भ:

हाल ही में, महान्यायवादी (Attorney General) के.के. वेणुगोपाल ने एक विधि के छात्र को कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दे दी है।

अटॉर्नी जनरल ने कार्टून सहित ट्वीट्स को उच्चतम न्यायालय को बदनाम करने और जनता की निगाह में अदालत के प्राधिकार को कम करने के उद्देश्य से प्रेरित बताया।

किन मामलों में अवमानना कार्यवाही हेतु पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता होती है?

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के लिए आपराधिक अवमानना ​​कार्रवाई शुरू करने हेतु अटॉर्नी जनरल की लिखित में पूर्व सहमति की आवश्यकता होती है।

भारत के महान्यायवादी (AGI) की सहमति, आपराधिक अवमानना ​​के संदर्भ में अत्याधिक विवादित ‘स्वतः संज्ञान’ (suo-motu) लेकर कार्रवाई शुरू करने की शक्ति पर नियंत्रण का एक प्रकार है।

भारत के महान्यायवादी- तथ्य:

  • भारत के महान्यायवादी केंद्र सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार होते है, और भारत के उच्चत्तम न्यायलय में इसके प्रधान अधिवक्ता होते हैं।
  • वह संघीय कार्यकारिणी का एक भाग होते है।

नियुक्ति और पात्रता:

महान्यायवादी की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 76 (1) के तहत की जाती है तथा वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारित करता है।

  • वह उच्चत्तम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए योग्य व्यक्ति होना चाहिए।
  • वह एक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • उसे भारत के किसी राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पांच वर्ष कार्य करने का अनुभव हो अथवा किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में 10 साल पूरे किए हों।
  • राष्ट्रपति के मतानुसार वह न्यायायिक मामलों का विशेषज्ञ व्यक्ति हो।

कार्य एवं शक्तियां:

भारत सरकार के मुख्य क़ानून अधिकारी के रूप में महान्यायवादी के निम्नलिखित कर्तव्य हैं:

  1. वह भारत सरकार को विधि संबंधी निर्दिष्ट कानूनी मामलों में सलाह प्रदान करता है। वह राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए अन्य विधिक कर्तव्यों का पालन भी करता है।
  2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है। इसके अतिरिक्त संसद के दोनों सदनों में बोलने अथवा कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है, उसे संसद की कार्यवाही में मतदान का अधिकार नहीं है।
  3. महान्यायवादी, उच्चत्तम न्यायालय में सभी मामलों (मुकदमों, अपीलों और अन्य कार्यवाही सहित) भारत सरकार की ओर से पेश होता है।
  4. वह संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करता है।
  5. अटॉर्नी जनरल भारत सरकार के खिलाफ कोई सलाह अथवा विश्लेषण नहीं कर सकते।
  6. बिना भारत सकरार की अनुमति के वह किसी आपराधिक मामले में किसी अभियुक्त का बचाव नहीं कर सकता तथा सरकार की अनुमति के बगैर किसी परिषद या कंपनी के निदेशक का पद ग्रहण नहीं कर सकता है।
  7. महान्यायवादी को दो महाधिवक्ता (सॉलिसिटर जनरल) तथा चार अपर महाधिवक्ताओं द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संविधान का अनुच्छेद 143
  2. महान्यायवादी और महाधिवक्ता की नियुक्ति कौन करता है?
  3. संसद की कार्यवाही में भाग लेने के लिए महान्यायवादी का अधिकार?
  4. महान्यायवादी के रूप में किसे नियुक्त किया जा सकता है?
  5. संविधान का अनुच्छेद 76 (1)
  6. संघीय की कार्यकारिणी में कौन सम्मिलित होता है?

मेंस लिंक:

भारत के महान्यायवादी की भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

दवा निर्माताओं द्वारा कोविड-19 वैक्सीन के ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ की मांग


(What is the emergency use authorisation drug makers are seeking for the Covid-19 vaccine?)

संदर्भ:

  • अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी मॉडर्ना (Moderna) द्वारा कोविड-19 वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल हेतु अनुमति के लिए आवेदन किया जा रहा है।
  • कुछ दिन पहले, फाइजर (Pfizer) द्वारा BioNTech के सहयोग से विकसित किए गए टीके के आपातकालीन इस्तेमाल हेतु अनुमति के लिए आवेदन किया गया था।
  • भारत में, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि, वह आगामी दो हफ्तों में टीके के आपातकालीन इस्तेमाल हेतु स्‍वीकृति प्राप्‍त करने के लिए आवेदन करेगा। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन (AstraZeneca-Oxford vaccine) के एक संस्करण का परीक्षण किया जा रहा है।

 दवाओं के अनुमोदन हेतु नियमित प्रक्रिया:

टीकों और दवाओं तथा नैदानिक ​​परीक्षणों (Diagnostic Tests) और चिकित्सा उपकरणों को रोगियों पर इस्तेमाल किये जाने से पहले एक विनियामक प्राधिकरण का अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होता है।

  • भारत में यह विनियामक प्राधिकरण, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organization- CDSCO) है।
  • टीकों और दवाओं के लिए, परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उनकी सुरक्षा और प्रभावशीलता के आकलन के बाद अनुमोदन प्रदान किया जाता है।

‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ (EUA) कब प्रदान किया जा सकता है?

अमेरिका में, खाद्य और औषधि प्रशासन (Food and Drug AdministrationFDA) द्वारा पहले यह सुनिश्चित किया जाता है, कि किसी दवा अथवा वैक्सीन के ज्ञात एवं संभावित लाभ, उसके ज्ञात एवं संभावित प्रतिकूल प्रभावों से अधिक हैं। इसके पश्चात, उस दवा अथवा वैक्सीन को ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ (Emergency Use Authorisation-EUA) प्रदान किया जाता है।

  • अर्थात, चरण-3 के परीक्षणों से पर्याप्त प्रभावकारिता आंकड़ों की प्राप्ति के बाद ही EUA आवेदनों पर विचार किया जा सकता है।
  • केवल चरण 1 या चरण 2 परीक्षणों के डेटा के आधार पर EUA नहीं दिया जा सकता है।

भारत में ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ (EUA) हासिल करने की प्रक्रिया

  • विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारत के औषधि विनियामकों में ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ (EUA) संबधी कोई प्रावधान नहीं है, और इसे हासिल करने की कोई स्पष्ट तथा सुसंगत प्रकिया नहीं है।
  • इसके बावजूद, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा इस महामारी के दौरान कोविड-19 के ईलाज हेतु रेमेडिसिविर (Remdesivir) और फेविपिरवीर (favipiravir) के लिए आपातकालीन या प्रतिबंधित आपातकालीन अनुमति दी गयी है।

मात्र ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ प्राप्त उत्पादों के उपयोग संबंधी जोखिम

अमेरिकी एफडीए (FDA) के अनुसार, ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल से पहले, जनता को यह सूचित किया जाना चाहिए कि, उत्पाद को मात्र ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ (EUA) दिया गया है तथा इसे पूर्ण अनुमोदन प्राप्त नहीं है।

कोविड-19 वैक्सीन के मामले में, उदाहरण के लिए, लोगों को वैक्सीन के ज्ञात और संभावित लाभों और जोखिमों, तथा किस हद तक इसके लाभ या जोखिम अज्ञात है, के बारे में सूचित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही जनता को ‘वैक्सीन के लिए मना करने संबंधी अधिकार’ के बारे में भी बताया जाना चाहिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

कृषि संबंधी अधिनियमों पर किसानों का प्रदर्शन जारी


संदर्भ:

कृषि संबंधी तीन नए कानूनों के खिलाफ किसान के विरोध प्रदर्शन ने गति पकड़ ली है।

मौजूदा विवाद निम्नलिखित कानूनों से संबंधित है:

  • कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020
  • मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020
  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश 2020

संबधित प्रकरण

सितंबर में, केंद्र सरकार द्वारा भारत के विशाल कृषि क्षेत्र को नियंत्रण-मुक्त करने के उद्देश्य से तीन कानून पारित किये गए थे।

  • सरकार का कहना है कि ये कानून किसानों को बिचौलियों के उत्पीडन से ‘मुक्त’ करेंगे।
  • किंतु, कई किसानों को इन नए कानूनों से कुछ हासिल होने की अपेक्षा खोने का भय अधिक है और इसे विशाल वित्तीय शक्तियों वाले कृषि कारपोरेशन इनके मुख्य लाभार्थी होंगे।

भारत के नए कृषि कानूनों का उद्देश्य

  1. ये क़ानून, किसानों को सरकार द्वारा विनियमित बाजारों (जिन्हें स्थानीय रूप से मंडियों के रूप में जाना जाता है) की उपेक्षा करने और अपनी उपज को सीधे निजी खरीदारों को बेचने हेतु सक्षम बनाते हैं।
  2. किसान, अब निजी कंपनियों के साथ अनुबंध कर सकते हैं, भारत में इसे अनुबंध कृषि (Contract Farming) के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा अपनी उपज को राज्य के बाहर बेच सकते हैं। वे अब निजी कंपनियों के साथ अनुबंध कर सकते हैं, भारत में अनुबंध खेती के रूप में जानी जाने वाली एक प्रथा, और राज्य की सीमाओं के पार बेच सकते हैं।
  3. नए कानूनों में व्यापारियों के लिए खाद्यान्न के भण्डारण की अनुमति दी गई है। यह जमाखोरी के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों के विपरीत है, और इससे महामारी जैसी स्थितियों के दौरान व्यापारियों के लिए कीमतों में वृद्धि का लाभ उठाना आसान होगा। पुराने नियमों के तहत, इस प्रकार की व्यवस्था आपराधिक कृत्य के रूप में घोषित थी।

किसानों की चिंताएं:

भारत में 86 प्रतिशत से अधिक कृषि योग्य भूमि पर छोटे किसानों द्वारा खेती की जाती है,  इन किसानो में प्रत्येक के पास दो हेक्टेयर (पांच एकड़) से कम भूमि होती है।

  • नए क़ानून इन किसानों के कई सुरक्षात्मक उपायों को समाप्त कर देते हैं। छोटे किसानों को डर है, कि उनके पास बड़ी कंपनियों को अपनी उपज बेचते समय, अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाने हेतु उपज की आवश्यक कीमतों की मांग करने हेतु पर्याप्त मोलभाव करने की शक्ति नहीं है।
  • नए कानूनों में अनुबंधों को लिखित में तैयार करना अनिवार्य नहीं बनाया गया है। इससे, अनुबंध की शर्तो के उल्लंघन होने पर, किसानों के पास अपनी तकलीफों को साबित करना बहुत कठिन हो सकता है, और क़ानून में राहत के लिए मामूली उपाय किए गए हैं।
  • नए नियमों में किसी भी उपज के लिए किसी प्रकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं दी गयी है, इससे किसानों को चिंता है कि मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को किसी भी समय समाप्त कर दिया जाएगा।

प्रदर्शनकारी किसानों से सरकार को किस प्रकार निपटना चाहिए?

केंद्र सरकार, किसानों से संवाद स्थापित करने में पूर्ण रूप से विफल रही है। केंद्र द्वारा किसानों को ‘नए कानूनों के बारे में तथा ये किस प्रकार किसानों के हित में हैं?’ समझाने के प्रयास नहीं किये गए हैं।

  1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और उपज खरीद के बारे में आशंकाएं, नए कानूनों को शांता कुमार कमेटी की रिपोर्ट और CACP की रिपोर्टों से जोड़े जाने से उत्पन्न होती है। इन रिपोर्ट्स में उपज खरीद को कम करने और भारत खाद्य निगम (FCI) के व्यय को कम करने के लिए पंजाब जैसे राज्यों में खुली-खरीद (open-ended procurement) को समाप्त करने के सुझाव दिए गए थे।
  2. एक आशंका यह व्यक्त की जा रही है कि भारत खाद्य निगम (FCI) द्वारा नए व्यापार क्षेत्र से सीधे खरीद शुरू की जा सकती है, जिससे उसके मंडी-शुल्क और आढतिया-कमीशन में कटौती की जा सकेगी।
  3. इस प्रकार की आशंकाओं का मूल कारण, काफी हद तक, राज्य के किसानों और केंद्र सरकार के बीच ‘सामाजिक अनुबंध’ में होने वाला परिवर्तन है।

सरकार को पहले इन चिंताओं का समाधान करना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. APMC क्या हैं? उनका नियमन कैसे किया जाता है?
  2. मॉडल अनुबंध कृषि अधिनियम का अवलोकन
  3. सरकार द्वारा जारी किये गए अध्यादेश कौन से है?
  4. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 में मूल्य सीमा में उतार-चढ़ाव की अनुमति।
  5. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के तहत भण्डार सीमा विनियमन किसके लिए लागू नहीं होगा?

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित सुधार किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण हेतु ‘डेढ़-गुना फॉर्मूला’


संदर्भ:

प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांग रही है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली के संबध में लिखित गारंटी दी जाए, जिसमे उनकी फसलों के लिए उत्पादन-लागत का निश्चित डेढ़ गुना मूल्य दिए जाना निर्धारित किया गया है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है?

न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price- MSP) किसानों को उनकी फसलों के लिए निर्धारित किया गया एक निश्चित मूल्य होता है।

पहले MSP का निर्धारण किस प्रकार किया जाता था?

  • कृषि मंत्रालय के कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs & PricesCACP) द्वारा 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सिफारिश की जाती है।
  • CACP द्वारा किसी वस्तु के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश करते समय कृषि-लागत सहित विभिन्न कारकों पर विचार किया जाता है।
  • आयोग द्वारा, वस्तु की मांग और आपूर्ति की स्थ‍िति; बाजार में मौजूदा कीमतों का रुख (घरेलू और वैश्विक); अंतरफसलीय मूल्य समतुल्यता; जीवन यापन पर लागत का प्रभाव (मुद्रास्फीति); पर्यावरण (मृदा और पानी का उपयोग) तथा कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों के मध्य व्यापार शर्तों, पर भी विचार किया जाता है।

केंद्रीय बजट 2018-19 के साथ होने वाले परिवर्तन

  • 2018-19 के बजट में घोषणा की गई थी कि अब से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) “पूर्व-निर्धारित सिद्धांत” के रूप में फसलों की उत्पादन लागत का डेढ़-गुना निर्धारित किया जाएगा।
  • आसान शब्दों में, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) का कार्य अब केवल एक सीजन की उत्पादन लागत का अनुमान लगाना तथा डेढ़-गुना फार्मूला (5-times formula) का उपयोग करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सिफारिश करना होगा।

MSP निर्धारित करने हेतु सम्मिलित की गयी उत्पादन लागतें

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की खरीफ फसलों के लिए मूल्य नीति: विपणन सत्र 2018-19 की रिपोर्ट में कहा गया है कि CACP द्वारा की गयी MSP अनुशंसा A2 + FL लागत के डेढ़-गुना पर आधारित थी।

  • ‘A2’ में कि‍सान द्वारा सीधे नकद रूप में और बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई आदि पर किये गए सभी तरह के भुगतान को शामिल किया जाता है।
  • ‘A2 + FL’ में A2 सहित अतिरिक्त अवैतनिक पारिवारिक श्रम का एक अनुमानित मूल्य शामिल किया जाता है।

MSP निर्धारित करने हेतु C2 लागतों को सम्मिलित नहीं किया जाता है। C2 में अधिक विस्तारित लागतों को शामिल किया जाता है। इसमें कुल नगद लागत और किसान के पारिवारिक पारिश्रामिक (A2+FL) के अलावा खेत की जमीन का किराया और कुल कृषि पूंजी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CCEA की संरचना।
  2. CACP क्या है?
  3. MSP योजना में कितनी फसलें शामिल हैं?
  4. MSP की घोषणा कौन करता है?
  5. खरीफ और रबी फसलों के बीच अंतर

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

पेड़ के छल्लों द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ की चेतावनी


संदर्भ:

वर्तमान में, ब्रह्मपुत्र नदी में आने वाली बाढ़ का अनुमान पिछले वर्षा प्रतिरूपों के आंकड़ो पर आधारित होता हैं,  किंतु ये मुख्य रूप से केवल 1950 के दशक के डिस्चार्ज-गेज रिकॉर्ड पर निर्भर करते है।

इसलिए, अब वैज्ञानिक एक नवीन विचार लेकर आए हैं जिसमें उन्होंने पेड़ों के छल्लों (Tree Rings) के आधार पर बाढ़ का विश्लेषण करने का प्रयास किया है।

नया अध्ययन में दिए गए सुझाव

नया अध्ययन, नदी के जलक्षेत्र में और उसके आसपास प्राचीन पेड़ों के छल्लों (Tree Rings) के परीक्षण पर आधारित है, जिसमे ब्रह्मपुत्र नदी में जल प्रवाह के सात शताब्दियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।

  • नए अध्ययन से पता चलता है कि 1950 के दशक के बाद का समय, 1300 के दशक के पश्चात सबसे शुष्क कालों में से एक था।
  • छल्ले बताते हैं, कि हाल के दशक (विशेष रूप से 1950 से 1980 के दशक) असामान्य रूप से शुष्क रहे थे। अतीत में यह अवधि बहुत अधिक नम रही है।
  • यह अध्धयन बताता है, हमारे द्वारा किए जा रहे कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन के कारण भविष्य में अधिक नमी होगी।

पेड़ के छल्ले किस प्रकार सहायक होते हैं?

  • जैसे-जैसे पेड़ों में वृद्धि होती है, इनके वार्षिक विकास छल्लों में तत्कालीन पर्यावरणीय परिस्थितियों संबंधी जानकारी समाहित होती जाती है।
  • जिन वर्षों में मृदा में नमी की मात्रा अधिक होती है, उस दौरान पेड़ के छल्ले अधिक चौड़े होते हैं। आर्द्र मानसून वाले वर्षों में क्षेत्र के पेड़ों में अधिक वृद्धि होती है तथा चौड़े छल्ले बनते हैं।
  • इसके विपरीत, शुष्क मानसून वाले वर्षों (या सूखे के दौरान) पेड़ों की वृद्धि कम होती हैं और संकीर्ण छल्लों का निर्माण होता है।

चूंकि इनमें से कुछ पेड़ लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं, इन पेड़ों से एक छोटा, पेंसिल के आकार का नमूना लेकर और माइक्रोस्कोप से उसके छल्ले को मापकर पिछले कई शताब्दियों की जलवायु परिस्थितियों के बारे में जाना जा सकता है।

महत्व:

इस नए अध्ययन के निष्कर्ष स्पष्ट रूप से असम और पूर्वोत्तर भारत के लिए भी प्रासंगिक हैं। इसके द्वारा, इस क्षेत्र में बाढ़ के जोखिमों को योजनाबद्ध परियोजनाओं द्वारा संयोजित किया जा सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चारधाम परियोजना

  • इस परियोजना में 889 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास और सुधार किया जाना सम्मिलित है।
  • इस परियोजना के द्वारा बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, गंगोत्री, यमुनोत्री और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले मार्ग को जोड़ा जाएगा।

संदर्भ:

पर्यावरणविदों का आरोप है कि चारधाम परियोजना के रूप में सड़क निर्माण के लिए सरकार द्वारा प्रतिनियुक्त किए गए ठेकेदार पहाड़ी इलाकों में सड़क की चौड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं।

‘क्रय प्रबंधक सूचकांक’ (PMI)  

PMI अथवा ‘क्रय प्रबंधक सूचकांक’ (Purchasing Managers’ Index PMI), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, दोनों में व्यावसायिक गतिविधियों का एक संकेतक होता है।

  • यह एक सर्वेक्षण-आधारित प्रणाली है, इसमें उत्तरदाताओं से कुछ प्रमुख व्यावसायिक कारकों के प्रति पिछले महीने से उसकी धारणा में बदलाव के संबंध में सवाल पूछे जाते हैं।
  • यह विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए अलग-अलग गणना की जाती है और फिर एक समग्र सूचकांक का निर्माण किया जाता है।
  • इसे 0 से 100 तक के सूचकांक पर मापा जाता है।
  • 50 से ऊपर का आँकड़ा व्यावसायिक गतिविधि में विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का आँकड़ा संकुचन (गिरावट) को प्रदर्शित करता है।

ग्रीन चारकोल हैकथॉन

(Green Charcoal Hackathon)

NTPC लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी NVVN (एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम) द्वारा शुरू किया गया है NVVN

यह EESL (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड) के साथ साझेदारी में NVVN द्वारा आयोजित त्वरित प्रौद्योगिकी विकास हेतु उद्देश्य से एक प्रौद्योगिकी चुनौती है।

इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य तकनीकी अंतर को दूर करने हेतु अभिनव भारतीय कौशल का लाभ उठाना है। अन्य उद्देश्य:

  1. कृषि भूमि पर जलाई जाने वाली अग्नि को कम करना,
  2. कृषि अवशेषों से अक्षय ऊर्जा का उत्पादन करना,
  3. स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और
  4. किसानों की आय में वृद्धि करते हुए वायु को स्वच्छ करना।

आदि महोत्सव

(Aadi Mahotsav)

  • हाल ही में, आदि महोत्सव-मध्य प्रदेश (Aadi Mahotsav-Madhya Pradesh) का शुभारंभ किया गया है। (वर्चुअल संस्करण)
  • आदि महोत्सव एक राष्ट्रीय जनजातीय उत्सव है, यह जनजातीय मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार और जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) की संयुक्त पहल है।
  • यह उत्सव देश की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

SCO ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी

  • शंघाई सहयोग संगठन के प्रमुखों (SCO CHG) की 19वीं बैठक के दौरान साझी बौद्ध विरासत पर पहली SCO ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी की शुरुआत की गयी।
  • यह अपनी तरह का पहला आयोजन है। यह SCO ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी, SCO देशों के सक्रिय सहयोग से, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली द्वारा पहली बार विकसित और क्यूरेट की गई है।
  • प्रतिभागी: भारत, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिज गणराज्य, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के संग्रहालय।

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