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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 1 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. NOTA के पक्ष में अधिकतम मतदान होने पर पुनः चुनाव कराया जाए: याचिका

2. मंत्री पद पर नियुक्ति हेतु विधान परिषद सदस्य अयोग्य घोषित

3. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF)

  

सामान्य अध्ययन-III

1. यमुना नदी प्रदूषण

2. ‘फर्जी खबरों’ से लड़ाई: ब्रिक्स मीडिया फोरम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘इंडियन पीकॉक सॉफ्ट-शेल कछुआ’

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

NOTA के पक्ष में अधिकतम मतदान होने पर पुनः चुनाव कराया जाए: याचिका


संदर्भ:

हाल ही में, एक वकील द्वारा उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गयी है, जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र में नोटा (उपरोक्त में से कोई भी नहीं’ विकल्प) / NOTA  (‘None of the above’ option) के पक्ष में अधिकतम मतदान होने पर पुनः चुनाव कराए जाने के संदर्भ में दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गयी है।

इसके अलावा, NOTA से पराजित वाले किसी भी उम्मीदवार को नए सिरे से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिका में दिए गए तर्क:

  • यदि मतदाताओं द्वारा NOTA के पक्ष में मतदान करके उम्मीदवारों को खारिज कर दिया जाए, तो नए चुनावों में राजनीतिक दलों को पुनः उन्ही उम्मीदवारों को उतारने पर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। राजनीतिक दलों को यह स्वीकार स्वीकार करना चाहिए कि मतदाताओं ने पहले ही अपने असंतोष को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर दिया है।
  • अस्वीकार करने का अधिकार (Right to Reject) और नए उम्मीदवार का चुनाव, मतदाताओं को अपना असंतोष व्यक्त करने की शक्ति देगा।
  • अस्वीकार करने का अधिकार/ राईट टू रिजेक्ट, भ्रष्टाचार, अपराधीकरण, जातिवाद, सांप्रदायिकता पर अंकुश लगाएगा। राजनीतिक दल, ईमानदार और देशभक्त उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए विवश होंगे।

अस्वीकार करने का अधिकार

  • अस्वीकार करने का अधिकार (Right to Reject) को पहली बार वर्ष 1999 में विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
  • इसी तरह, चुनाव आयोग ने, पहली बार वर्ष 2001 में, जेम्स लिंगदोह (तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त) के तहत, ‘राइट टू रिजेक्ट’ का समर्थन किया और इसके पश्चात वर्ष 2004 में टी.एस. कृष्णमूर्ति (तत्कालीन CEC) द्वारा प्रस्तावित चुनावी सुधारों में इसका समर्थन किया गया।
  • इसके अलावा, वर्ष 2010 में कानून मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए ‘चुनावी सुधारों पर आवश्यक पत्र’ (Background Paper on Electoral Reforms) ने प्रस्ताव किया गया था कि एक निश्चित प्रतिशत सीमा से अधिक नकारात्मक मतदान होने पर चुनाव परिणाम को शून्य घोषित करके नए चुनाव आयोजित कराए जाने चाहिए।

चुनाव में NOTA का उपयोग

  • उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2013 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए NOTA का विकल्प निर्धारित किया गया था।
  • वर्ष 2014 में निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यसभा चुनावों में NOTA का विकल्प लागू किया गया था।

इस प्रकार, भारत नकारात्मक मतदान की शुरुआत करने वाला 14 वां देश बन गया।

NOTA मतदान किस प्रकार किया जाता है?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में उम्मीदवारों की सूची के अंत में NOTA का विकल्प होता है। इससे पहले, एक नकारात्मक मतदान करने के लिए, मतदाता को मतदान केंद्र पर पीठासीन अधिकारी को सूचित करना पड़ता था। वर्तमान में, NOTA वोट के लिए पीठासीन अधिकारी की आवश्यकता नहीं होती है।

NOTA का चुनावी महत्व

  1. चुनावी उम्मीदवारों के प्रति असंतुष्ट होने पर, NOTA आम लोगों को अपनी नापसंदगी व्यक्त करने का अवसर देता है।
  2. यह, अधिक लोगों द्वारा अधिक मतदान करने की संभावना को बढ़ाता है, भले ही वे किसी भी उम्मीदवार का समर्थन न करते हों, और इससे फर्जी वोटों की संख्या में भी कमी होती है।
  3. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि नकारात्मक मतदान “चुनावों में एक संस्थागत बदलाव ला सकता है और इससे राजनीतिक दलों को स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को पेश करने के लिए विवश होना पड़ेगा”।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NOTA क्या है?
  2. NOTA मतदान प्रक्रिया
  3. यह पहली बार कब इस्तेमाल किया गया था?

मेंस लिंक:

NOTA, अस्वीकार करने का अधिकार और नए उम्मीदवार का चुनाव, मतदाताओं को अपना असंतोष व्यक्त करने की शक्ति देगा। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

मंत्री पद पर नियुक्ति हेतु विधान परिषद सदस्य अयोग्य घोषित


(MLC disqualified for being appointed as a Minister)

संदर्भ:

हाल ही में, कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्णय दिया है कि विश्वनाथ, दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किये गए हैं और इसलिए इन्हें राज्य मंत्रिमंडल में सम्मिलित नहीं किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने कहा है कि ए एच विश्वनाथ को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1B) और अनुच्छेद 361 B के तहत अयोग्य घोषित किया गया है।

अनुच्छेद 164(1B)

अनुच्छेद 164(1B) के अनुसार- किसी भी राजनीतिक दल का कोई विधानसभा सदस्य अथवा जिस राज्य में विधान परिषद है, उसके किसी भी सदन का कोई सदस्य, यदि दसवीं अनुसूची के अधीन उस सदन का सदस्य होने के लिए निरर्हित (Disqualified) घोषित किया जाता है, तो वह अपनी निरर्हता की अवधि पूरी होने तक मंत्री के रूप में नियुक्त होने के लिए भी निरर्हित अथवा अयोग्य रहेगा।

संबंधित प्रकरण

कर्नाटक उच्च न्यायालय में दायर की गयी एक याचिका में आरोप लगाया गया था, कि ए एच विश्वनाथ को मंत्री बनाने के एकमात्र उद्देश्य हेतु विधान परिषद सदस्य (MLC) के रूप में नियुक्त किया गया है, हालांकि, वह उपचुनाव में पराजित हो गए थे।

  • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि 19 नवंबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, वह अभी भी सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार द्वारा विश्वनाथ को अयोग्य घोषित किये जाने संबधी आदेश को बरकरार रखा था।
  • याचिका में दलील दी गई है कि एक अयोग्य घोषित किया गया सदस्य, अपने निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव जीतने पर ही मंत्री पद पर नियुक्त होने के लिए योग्य हो सकता है।

पृष्ठभूमि:

अनुच्छेद 361B- लाभप्रद राजनीतिक पद पर नियुक्ति के लिए निरर्हता

किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित, किसी भी सदन का कोई सदस्य, जो दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 2 के अधीन सदन का सदस्य होने के लिए निरर्हित है, अपनी निरर्हता की तारीख से, सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्ति की तारीख तक अथवा किसी सदन के लिए होने वाले चुनाव में निर्वाचित घोषित किये जाने की तारीख तक, इनमे से जो भी पहले हो, कोई भी लाभप्रद राजनीतिक पद धारण करने के लिए भी निरर्हित होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 361B
  2. अनुच्छेद 164(1B)
  3. भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची
  4. विधायकों और सांसदों का का निलंबन- शक्ति एवं प्रक्रिया
  5. विधायकों की अयोग्यता हेतु आधार

मेंस लिंक:

भारतीय संविधान की 10 वीं अनुसूची की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF)


(Financial Action Task Force)

चर्चा का कारण

हाल ही में, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task ForceFATF) द्वारा संयुक्त विशेषज्ञों की वार्षिक बैठक आयोजित की गयी।

  • इसमें पूरे विश्व की विभिन्न सरकारी एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और इंटरपोल जैसे अंतर्राष्ट्रीय निकायों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।
  • FATF ने कहा है, कि वह प्रभावी जानकारी साझा करने पर सर्वाधिक महत्व देता है, और यह AML/CFT (Anti-Money Laundering/Combating the Financing of Terrorism) अर्थात, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने के सुचारू कार्यान्वयन हेतु अत्याधिक आवश्यक है।

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वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के बारे में:

FATF का गठन 1989 में जी-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में हुआ था। यह एक अंतर-सरकारी निकाय है।

  • यह एक नीति-निर्माणक निकाय है, जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तरों पर विधायी और नियामक सुधार लाने हेतु आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति पैदा करने हेतु कार्य करता है।
  • इसका सचिवालय पेरिस में ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Economic Cooperation and Development- OECD) मुख्यालय में स्थित है।

भूमिका एवं कार्य:

  • शुरुआत में FATF को मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने संबंधी उपायों की जांच करने तथा इनका विकास करने के लिए स्थापित किया गया था।
  • अक्टूबर 2001 में, FATF द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने संबंधी प्रयासों को शामिल करने हेतु अपने अधिदेश का विस्तार किया गया।
  • अप्रैल 2012 में, इसके द्वारा सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार हेतु वित्तपोषण पर रोक लगाने को अपने प्रयासों में सम्मिलित किया गया।

संरचना:

वर्त्तमान में, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) में 39 सदस्य तथा दो क्षेत्रीय संगठन सम्मिलित हैं। इसके सदस्य विश्व के अधिकांश वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें पर्यवेक्षक और सहयोगी सदस्य भी शामिल होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जी-7, जी-8 तथा जी- 20 में अंतर
  2. ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट
  3. क्या FATF के निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं?
  4. FATF का प्रमुख कौन है?
  5. इसका सचिवालय कहाँ है?

मेंस लिंक:

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) का अधिदेश तथा उद्देश्य क्या हैं? भारत – पाकिस्तान संबंधों के लिए FATF के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

यमुना नदी प्रदूषण


संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा यमुना की सफाई पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को एक मासिक प्रगति रिपोर्ट सौंपी गयी थी।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  1. दिल्ली में, यमुना में परीक्षण किए गए सभी बिंदुओं पर मल कॉलिफॉर्म / Faecal coliform (मानव तथा पशु द्वारा मलमूत्र उत्सर्जन) का स्तर वांछनीय सीमा से अधिक है।
  2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, किसी नदी में स्नान करने हेतु, मल कॉलिफॉर्म का वांछनीय स्तर 500 MPN/100 मिली या उससे कम होना चाहिए।
  3. इसके अलावा, दिल्ली में चार अपशिष्ट भराव क्षेत्रों के निकट अलग-अलग स्थानों पर भू-जलीय नमूनों में विभिन्न प्रदूषकों का स्तर स्वीकार्य सीमा से अधिक है।
  4. अपशिष्ट भराव क्षेत्रों के निकट अलग-अलग स्थानों पर लिए गए भू-जलीय नमूनों से पता चला है, कि इन स्थानों पर पानी की कठोरता, वांछनीय सीमा 300 मिग्रा./ लीटर, से अधिक है
  5. इन सभी चारो नमूनों में क्लोरीन और कैल्शियम की मात्रा भी वांछनीय सीमा से अधिक पायी गयी।
  6. कुछ स्थानों पर सल्फेट का स्तर भी वांछनीय सीमा, 200 मिग्रा./ लीटर, से अधिक था।

इंस्टा फैक्ट्स:

  • यमुना नदी, गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • इसकी उत्पत्ति उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बंदरपूँछ शिखर के पास यमुनोत्री नामक ग्लेशियर से निकलती है।
  • यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से प्रवाहित होने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी से मिलती है।
  • इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा और केन हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यमुना नदी कितने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर बहती है?
  2. यमुना की सहायक नदियाँ
  3. पीने के पानी में अमोनिया की अधिकतम स्वीकार्य सीमा?
  4. सल्फेट का स्वीकार्य स्तर
  5. पानी की कठोरता की वांछनीय सीमा
  6. मल कोलिफॉर्म का वांछनीय स्तर

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

‘फर्जी खबरों’ से लड़ाई: ब्रिक्स मीडिया फोरम


(Fight ‘fake news’: BRICS Media Forum)

संदर्भ:

हाल ही में पांचवें ब्रिक्स मीडिया फोरम को आयोजित किया गया।

शिखर सम्मेलन के अंत में, प्रतिनिधियों द्वारा पांच देशों को महामारी काल में “फर्जी खबरों के वायरस” से निपटने के लिए संयुक्त रूप से काम करने का आह्वान किया गया।

संबंधित चिंताएँ:

‘फर्जी ख़बरें’ अथवा झूठी सूचनाओं में वृद्धि सदस्य देशों के मध्य एक सामूहिक समस्या है।

  • विश्व भर के समाचार मीडिया, विशेष रूप से दैनिक समाचार पत्रों और मीडिया के अन्य रूपों पर भी महामारी के दौरान एक बड़ी चोट पड़ी है।
  • विश्व स्तर पर झूठी सूचनाओं का प्रसार तथाकथित प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों, विशेष रूप से फेसबुक, ट्विटर, गूगल, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के माध्यम से तीव्र गति से किया जा रहा है।
  • यह “मुख्य धारा की मीडिया के साथ-साथ लाखों लोगों के जीवन और उनके कल्याण तथा समग्र रूप से समाज की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक बड़ा खतरा” है।

समय की मांग:

प्रायोजित और हानिकारक झूठी खबरों के खिलाफ लड़ाई में ब्रिक्स मीडिया फोरम निम्नलिखित रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है:

  • प्रासंगिक मीडिया आदान-प्रदान, कार्यशालाओं, पत्रकारों के प्रशिक्षण, और प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ वार्ता को बढ़ावा देना और इस संकट को समाप्त करने में साथ कार्य करने वालों को सशक्त करना।
  • पत्रकारों की अच्छी तरह से प्रशिक्षित टीमों द्वारा सही तथ्य-परीक्षण और जाँच करना। तथ्य-परीक्षण करने वाले संगठनों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे तकनीकी समाधानों से सक्षम करना।

ब्रिक्स मीडिया फोरम के बारे में:

मीडिया सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ब्रिक्स मीडिया फोरम का प्रस्ताव वर्ष 2015 में चीन की शिन्हुआ समाचार एजेंसी द्वारा किया गया था।

फोरम के उद्देश्य:

  • ब्रिक्स मीडिया के मध्य कुशल समन्वय तंत्र स्थापित करना।
  • अत्याधुनिक नवाचार-संचालित मीडिया का विकास करना।
  • प्रणाली के तहत आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से ब्रिक्स देशों के विकास हेतु सशक्त आवेग जुटाना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. BRICS- उत्पत्ति, दक्षिण अफ्रीका कब सम्मिलित हुआ?
  2. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के बारे में
  3. भारत में NDB द्वारा वित्त पोषित परियोजनाएं कौन सी हैं?
  4. फोर्टालेजा घोषणा किससे संबंधित है?
  5. ब्रिक्स आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था क्या है?

मेंस लिंक:

न्यू डेवलपमेंट बैंक और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के क्या उद्देश्य है? जांच करें कि क्या NDB और AIIB के आने से पश्चिमी वित्त पोषित बहुपक्षीय वित्त पोषण संस्थानों के विकास वित्तपोषण नियमों में बदलाव होगा?

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘इंडियन पीकॉक सॉफ्ट-शेल कछुआ’

(Indian Peacock Soft-shell Turtle)

यह भारत, नेपाल और बांग्लादेश में पायी जाने वाली स्थानिक प्राजाति है, और यह मुख्यतः नदी व जोहड़ में पायी जाती है।

ये प्रायः सर्वाहारी (मुख्य रूप से मांसाहारी) और निशाचर होते हैं।

संरक्षण स्थिति:

  1. IUCN की रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)
  2. प्रजाति को CITES के परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध
  3. भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: अनुसूची I के तहत संरक्षित

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