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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 November

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. दलबदल विरोधी कानून

2. आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राजकोषीय घाटा सालाना लक्ष्य के 120 प्रतिशत पर पहुंचा

2. राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF)

3. पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए प्रथम TX2 पुरस्कार

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. शाहतूत बांध

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

दलबदल विरोधी कानून


(Anti-Defection Law)

संदर्भ:

लोक सभा में ‘अयोग्य’ घोषित होने वाले भारत के प्रथम संसद सदस्य को, अब मिज़ोरम में विधानसभा सदस्य के रूप में भी अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

हाल ही में, मिजोरम विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (Zoram People’s Movement ZPM) के विधायक ‘लालडूहोमा’ (Lalduhoma) को अयोग्य घोषित करते हुए सदन से बाहर कर दिया गया है।

निर्हरता / अयोग्यता का आधार:

श्री लालडूहोमा को विधायक के रूप में निरर्हता (Disqualification) का आधार, उनके द्वारा सेरछिप विधानसभा क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने जाने के बावजूद स्वयं को ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के प्रतिनिधि के रूप में घोषित करना था।

विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, अपनी इस घोषणा के कारण उन्होंने एक स्वतंत्र विधायक का दर्जा खो दिया।

दलबदल विरोधी कानून क्या है?

संविधान में, 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा एक नयी अनुसूची (दसवीं अनुसूची) जोड़ी गई थी।

  • इसमें सदन के सदस्यों द्वारा एक राजनीतिक दल से दूसरे दल में सम्मिलित होने पर ‘दल-बदल’ के आधार पर निरर्हता (Disqualification) के बारे में प्रावधान किया गया है।
  • इसमें उस प्रक्रिया को निर्धारित किया गया है, जिसके द्वारा विधायकों तथा सांसदों को सदन के किसी अन्य सदस्य की याचिका के आधार पर सदन के पीठासीन अधिकारी द्वारा ‘दल-बदल’ के आधार पर अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
  • दल-बदल कानून लागू करने के सभी अधिकार सदन के अध्यक्ष या सभापति को दिए गए हैं एवं उनका निर्णय अंतिम होता है

यह कानून संसद और राज्य विधानसभाओं दोनों पर समान रूप से लागू होता है।

निरर्हता (Disqualification) के आधार:

यदि किसी राजनीतिक दल से संबंधित सदन का सदस्य:

  1. स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता त्याग देता है, अथवा
  2. यदि वह सदन में अपने राजनीतिक दल के निर्देशों के विपरीत मत देता है अथवा मतदान में अनुपस्थित रहता है तथा अपने राजनीतिक दल से उसने पंद्रह दिनों के भीतर क्षमादान न पाया हो।
  3. यदि चुनाव के बाद कोई निर्दलीय उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है।
  4. यदि विधायिका का सदस्य बनने के छह महीने बाद कोई नामित सदस्य (Nominated Member) किसी पार्टी में शामिल होता है।

कानून के तहत अपवाद

सदन के सदस्य कुछ परिस्थितियों में निरर्हता के जोखिम के बिना अपनी पार्टी बदल सकते सकते हैं।

  • इस विधान में किसी दल के द्वारा किसी अन्य दल में विलय करने करने की अनुमति दी गयी है बशर्ते कि उसके कम से कम दो-तिहाई विधायक विलय के पक्ष में हों।
  • ऐसे परिदृश्य में, अन्य दल में विलय का निर्णय लेने वाले सदस्यों तथा मूल दल में रहने वाले सदस्यों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

पीठासीन अधिकारी के निर्णय की न्यायिक समीक्षा

  • इस विधान के प्रारम्भ में कहा गया है कि पीठासीन अधिकारी का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन नहीं होगा। वर्ष 1992 में उच्चत्तम न्यायालय ने इस प्रावधान को खारिज कर दिया तथा इस सन्दर्भ में पीठासीन अधिकारी के निर्णय के विरूद्ध उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में अपील की अनुमति प्रदान की।
  • हालाँकि, यह तय किया गया कि पीठासीन अधिकारी के आदेश के बिना कोई भी न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जायेगा।

दल-बदल विरोधी कानून पर समितियां

चुनावी सुधारों पर दिनेश गोस्वामी समिति:

दिनेश गोस्वामी समिति ने कहा कि निरर्हता उन मामलों तक सीमित होनी चाहिए जहाँ:

  • कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है,
  • कोई सदस्य मतदान से परहेज करता है, अथवा विश्वास प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव में पार्टी व्हिप के विपरीत वोट करता है। राजनीतिक दल तभी व्हिप केवल तभी जारी कर सकते है जब सरकार खतरे में हो।

विधि आयोग (170 वीं रिपोर्ट)

  • इसके अनुसार- ऐसे प्रावधान, जो विभाजन और विलय को निरर्हता (Disqualification) से छूट प्रदान करते हैं, समाप्त किये जाने चाहिए।
  • चुनाव पूर्व चुनावी मोर्चो (गोलबंदी) को दलबदल विरोधी कानून के तहत राजनीतिक दलों के रूप में माना जाना चाहिए।
  • इसके अलावा राजनीतिक दलों को व्हिप जारी करने को केवल उन मामलों में सीमित करना चाहिए जब सरकार खतरे में हो।

चुनाव आयोग

राष्ट्रपति / राज्यपाल द्वारा, दसवीं अनुसूची के अंतर्गत, किये जाने वाले निर्णयों में चुनाव आयोग की सलाह बाध्यकारी सलाह होनी चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दल-बदल कानून संबधित विभिन्न समितियों और आयोगों के नाम
  2. समिति तथा आयोग में अंतर
  3. पीठासीन अधिकारी तथा न्यायिक समीक्षा का निर्णय
  4. राजनीतिक दलों के विलय तथा विभाजन में अंतर
  5. क्या पीठासीन अधिकारी पर दलबदल विरोधी कानून लागू होता है?
  6. संबंधित मामलों में उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय

मेंस लिंक:

दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। क्या यह कानून अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus)


(ASEAN Defence Ministers’ Meeting Plus)

संदर्भ:

दिसंबर 2020 में, वियतनाम की अध्यक्षता में आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ASEAN Defence Ministers’ Meeting PlusADMM-Plus) आयोजित की जा रही है। वियतनाम ने भारत को बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।

ADMM-Plus के बारे में

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ASEAN Defence Ministers’ MeetingADMM) के खुले और सार्वजनिक प्रकार के मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप, वर्ष 2007 में सिंगापुर में सिंगापुर में आयोजित ADMM की दूसरी बैठक में ADMM Plus की स्थापना हेतु संकल्पना पत्र (Concept Paper) अपनाया गया था।

  • ADMM-Plus, आसियान और इसके वार्ता साझेदार (Dialogue partners) देशों के लिए क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास हेतु सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूती प्रदान करने वाला एक मंच है।
  • ADMM Plus के वार्ता साझेदारों में ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूज़ीलैंड, दक्षिणी कोरिया , रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इन्हें सामूहिक रूप से “प्लस देशों” के रूप में संदर्भित किया जाता है।

इस तंत्र के तहत सहयोग के क्षेत्र:

इस नए तंत्र के तहत रक्षा के क्षेत्र में सहयोग के निम्नलिखित पाँच क्षेत्रों पर सहमति व्यक्त की गई है: समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी, मानवीय सहायता और आपदा राहत, शांति व्यवस्था और सैन्य चिकित्सा।

वर्ष 2013 में, सहयोग के क्षेत्रों में एक नए प्राथमिकता क्षेत्र ‘बारूदी सुरंग पर मानवीय कार्रवाई (Humanitarian Mine Action)’ पर सहमति व्यक्त की गयी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ADMM क्या है?
  2. ADMM plus क्या है?
  3. सदस्य
  4. उद्देश्य
  5. ADMM plus के अंतर्गत सहयोग क्षेत्र

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

राजकोषीय घाटा सालाना लक्ष्य के 120 प्रतिशत पर पहुंचा


(Fiscal deficit reaches 120% of annual target)

संदर्भ:

केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर के अंत तक बढ़कर 9.53 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया जो सालाना बजट अनुमान का करीब 120 प्रतिशत है।

कारण:

  • राजकोषीय घाटे में वृद्धि का मुख्य कारण राजस्व संग्रह में कमी होना रहा है।
  • कोरोनावायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से कारोबारी गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं, जिससे राजस्व प्राप्ति सुस्त पड़ गई।

‘राजकोषीय घाटा’ क्या होता है?

‘राजकोषीय घाटा’ (Fiscal Deficit), सरकार के गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों (Non-debt Capital ReceiptsNDCR) सहित राजस्व प्राप्तियों तथा कुल व्यय के बीच का अंतर होता है।

दूसरे शब्दों में, राजकोषीय घाटा “सरकार की कुल ऋण आवश्यकताओं को दर्शाता है” ।

उच्च राजकोषीय घाटे का प्रभाव:

अर्थव्यवस्था में, निवेश योग्य बचतों का सीमित पूल होता है। इन बचतों का उपयोग वित्तीय संस्थानों, जैसे कि बैंकों, द्वारा निजी व्यवसायों (लघु और बड़े, दोनों प्रकार के) और सरकारों (केंद्र और राज्य) को ऋण प्रदान करने हेतु किया जाता है।

  • यदि राजकोषीय घाटे का अनुपात काफी अधिक होता है, तो इसका तात्पर्य है कि बाजार में, निजी उद्यमियों और व्यवसायों को ऋण प्रदान करने हेतु कम राशि बची है।
  • बाजार में ऋण प्रदान करने हेतु कम राशि होने से, ऋण पर ब्याज दरें उच्च हो जाती हैं।
  • उच्च राजकोषीय घाटे और उच्च ब्याज दरों का तात्पर्य यह भी होता है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों को कम करने के प्रयास प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।

विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए राजकोषीय घाटे का स्वीकार्य स्तर

विकासशील अर्थव्यवस्था में निवेश करने हेतु प्रायः निजी उद्यमों की तुलना में सरकार बेहतर स्थिति में होती है, और विकसित अर्थव्यवस्था की तुलना में राजकोषीय घाटा अधिक हो सकता है।

  • विकासशील अर्थव्यवस्था में सरकारों को राजस्व वृद्धि के पर्याप्त साधन नहीं होने पर भी सामाजिक और भौतिक अवसंरचनाओं पर अग्रिम निवेश करना पड़ता है।
  • भारत में, राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (Fiscal Responsibility and Budget Management – FRBM) अधिनियम के तहत, राजकोषीय घाटे में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 3 प्रतिशत तक की कमी एक आदर्श स्थिति बताई गयी है। दुर्भाग्य से, सरकारें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थ रही हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF)


(National Investment and Infrastructure Fund)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) द्वारा प्रायोजितNIIF ऋण प्लेटफॉर्म में सरकार द्वारा 6000 करोड़ रुपये के इक्विटी संचार के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी है।

सरकार का यह प्रस्ताव, इस महीने की शुरुआत में घोषित किए गए आत्मनिर्भर भारत  3.0 पैकेज का हिस्सा है।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) के बारे में:

सरकार द्वारा वर्ष 2015  में व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य ग्रीनफ़ील्ड, ब्राउनफ़ील्ड और रुकी हुई अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु निवेश साधन के रूप में 40,000 करोड़ रूपये के राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) की स्थापना की गयी थी।

इसे श्रेणी-II  के वैकल्पिक निवेश कोष (Alternate Investment Fund) के रूप में स्थापित किया गया था।

  • NIIF में, भारत सरकार द्वारा 49% निवेश किया जाएगा और शेष राशि का वित्त पोषण निजी निवेशकों द्वारा स्वतन्त्र संपत्ति कोष, बीमा और पेंशन निधि, दान आदि के माध्यम से जुटाया जाएगा।
  • राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के अधिदेश में, भारत में ऊर्जा, परिवहन, आवास, जल, अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य बुनियादी ढाँचे से संबंधित क्षेत्रों में निवेश किया जाना शामिल है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NIIF क्या है?
  2. इसे किस प्रकार प्रशासित किया जाता है?
  3. श्रेणी-II का ‘वैकल्पिक निवेश कोष’ क्या है?
  4. राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष का अधिदेश

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए प्रथम TX2 पुरस्कार


(Pilibhit tiger reserve gets the first TX2 award)

संदर्भ:

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (Pilibhit Tiger ReservePTR) को निर्धारित समय से कम समय में बाघों की संख्या दोगुना करने वाले तेरह टाइगर रेंज के देशों में पहला अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार ‘TX2प्रदान किया गया है।

वर्ष 2014 में अखिल भारतीय बाघ अनुमानों के तहत, पीलीभीत में 25 बाघों का अनुमान लगाया गया था, और वर्ष 2018 के अनुमानों के अनुसार पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में बाघों की संख्या बढ़ कर 65 हो गयी है।

संरक्षण उत्कृष्टता पुरस्कार, 2020

(Conservation Excellence Award for 2020)

भारत-भूटान सीमा पर विस्तारित पारदेशीय मानस संरक्षण क्षेत्र को वर्ष 2020 का TX2 संरक्षण उत्कृष्टता पुरस्कार (TX2 Conservation Excellence Award) प्रदान किया गया है।

पारदेशीय मानस संरक्षण क्षेत्र (Transboundary Manas Conservation Area or TraMCA) में भारत के मानस राष्ट्रीय उद्यान का 500 वर्ग किमी क्षेत्र तथा भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क का 1,057 वर्ग किमी क्षेत्र सम्मिलित है।

TX2 क्या है?

यह एक वैश्विक पुरस्कार है जिसे वर्ष 2010 में WWF, UNDP, IUCN, ग्लोबल टाइगर फंड (GTF), CATS और द लायन शेयर (Lion’s Share) जैसे बाघ संरक्षण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में स्थापित किया गया था।

राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण के प्रयास:

  1. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority- NTCA) द्वारा वन- रक्षकों के लिए एक मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम, M-STrIPESमॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स (Monitoring system for Tigers’ Intensive Protection and Ecological Status) लॉन्च किया गया है।
  2. वर्ष 2010 में आयोजित पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में, वैश्विक स्तर पर 13 बाघ रेंज वाले देशों के नेताओं ने T X 2’ नारा के साथ बाघों की संख्या को दोगुना करने हेतु अधिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
  3. विश्व बैंक ने अपने ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) कार्यक्रम, के माध्यम से, अपनी उपस्थिति और संगठन क्षमता का उपयोग करते हुए, बाघ एजेंडे को मजबूत करने हेतु वैश्विक साझेदारों को एक मंच पर एकत्रित किया है।
  4. इन वर्षों में, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) पहल, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव काउंसिल (GTIC) के संस्थागत रूप में स्थापित हो गयी है, तथा अब यह, – ग्लोबल टाइगर फोरम (Global Tiger Forum) तथा ग्लोबल स्नो लेपर्ड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन प्रोग्राम (Global Snow Leopard Ecosystem Protection Program)- के माध्यम से बाघ संरक्षण संबंधी कार्यक्रम चला रही है।
  5. भारत में वर्ष 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत की गयी, जो वर्तमान में 50 से अधिक संरक्षित क्षेत्रों में, देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 2.2% के बराबर क्षेत्रफल, में सफलतापूर्वक जारी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र के मध्य अंतर।
  2. भारत में महत्वपूर्ण बायोस्फीयर रिजर्व।
  3. M-STREIPES किससे संबंधित है?
  4. GTIC क्या है?
  5. प्रोजेक्ट टाइगर कब लॉन्च किया गया था?
  6. NTCA- रचना और कार्य।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


शाहतूत बांध

(Shahtoot Dam)

हाल ही में, भारत द्वारा एक बैठक में अफगान सरकार को काबुल के पास शाहतूत बाँध के निर्माण में मदद करने पर सहमति जताई गयी है।

  • यह बांध से काबुल शहर के 2 मिलियन लोगों को पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
  • इस बांध का निर्माण काबुल नदी की सहायक, मैदान नदी (Maidan river) पर किया जाएगा।

Shahtoot_Dam


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