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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 November

 

विषय – सूची

 

सामान्य अध्ययन-I

1. चक्रवात ‘निवार’

 

सामान्य अध्ययन-II

1. जम्मू-कश्मीर का ‘रोशनी अधिनियम’

 

सामान्य अध्ययन-III

1. चालू खाता अधिशेष की संभावना

2. अलवणीकरण संयंत्र

3. इसरो का शुक्रयान

4. चांग’ई-5 प्रोब

5. पांग्दा गांव

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ’अभयम’ ऐप

2. राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC)

3. अटल संकाय विकास कार्यक्रम (FDP)

4. 15वां G20 शिखर सम्मेलन

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान आदि।

चक्रवात ‘निवार’


(Cyclone ‘Nivar’)

अम्फान

अम्फान (Amphan), निसर्ग (Nisarga) और गति (Gati) चक्रवातों के पश्चात, चक्रवात ‘निवार’ (Cyclone ‘Nivar’) पुडुचेरी के कराईकल की ओर बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में 25 नवंबर को तबाही मचा सकता है।

  • उत्तर हिंद महासागर चक्रवातों के नामों के लिए नई सूची वर्ष 2020 में जारी की गयी थी, ‘निवार’ (Nivar) इस सूची का तीसरा नाम है, जिसे ईरान द्वारा सुझाया गया है।
  • अम्फान (Amphan), चक्रवात का नामकरण थाईलैंड द्वारा किया गया था, और यह वर्ष 2004 की श्रृंखला का अंतिम नाम था।
  • जून माह के दौरान महाराष्ट्र में आने वाले चक्रवात निसर्ग (Nisarga) का नामकरण बांग्लादेश द्वारा किया गया था, जबकि भारत ने, 22 नवंबर को सोमालिया में तबाही मचाने वाले चक्रवात को ‘गति (Gati)’ नाम दिया था।

चक्रवातों का नामकरण

विश्व मौसम विज्ञान मौसम संगठन (World Meteorological Organisation- WMO) और एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific) द्वारा वर्ष 2000 में आयोजित अपने 27 वें सत्र के दौरान निर्धारित किए गए फार्मूले के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उत्पन्न होने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम, बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन द्वारा सुझाए जाते हैं।

फार्मूले के अनुसार, प्रत्येक देश चक्रवातों के लिए सूची में 13 नाम प्रदान करता है।

नवीनतम सूची में भारत द्वारा प्रस्तावित नाम:

चक्रवातों के लिए नामों की नवीनतम सूची में भारत द्वारा गति, तेज, मरासु (तमिल में संगीत वाद्ययंत्र), आग और नीर, आदि नाम प्रस्तावित किए गए है।

अप्रैल 2020 में सदस्य देशों द्वारा आगामी चक्रवातों के लिए निम्नलिखित नाम प्रस्तावित किये गए हैं:

  • बुरेवी (Burevi) मालदीव, तौक्ते (Tauktae) म्यांमार, यास (Yaas) ओमान, और गुलाब (Gulab) पाकिस्तान।
  • ये 13 देशों द्वारा सुझाए गए कुल 169 नामों में से चक्रवातों के लिए प्रस्तावित कुछ नाम हैं।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. चक्रवातों के लिए भारत द्वारा सुझाए गए नामों की सूची।
  2. चक्रवात की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी कारक
  3. विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवातों का नामकरण।
  4. भारत के पूर्वी तट में अधिक चक्रवात क्यों?
  5. चक्रवातों की स्थल पर तीव्रता में अंतर का कारण

मेंस लिंक:

चक्रवात क्या होते हैं? इनका नामकरण किस प्रकार किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

जम्मू-कश्मीर का ‘रोशनी अधिनियम’


(What is J&K’s Roshni Act?)

संदर्भ:

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा रोशनी अधिनियम (Roshni Act) के तहत लाभार्थियों की एक सूची जारी की गयी है।

  • इन लाभार्थियों की सूची में पूर्व मंत्री, और सेवानिवृत्त सिविल सेवक भी शामिल हैं।
  • हाल ही में, सरकार द्वारा इस कानून को अमान्य (null and void) घोषित कर दिया गया है।

पृष्ठभूमि:

जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (कब्जाधारकों के लिए स्वामित्व अधिकार) अधिनियम (Jammu and Kashmir States Land (vesting of ownership to the occupants) Act), को ‘रोशनी अधिनयम’ के नाम से भी जाना जाता है। प्रायः, इस अधिनियम के कार्यान्वयन में अनियमितताओं से संबंधित आरोप लगाए जाते रहे है। सरकार ने हाल ही में, इस अधिनियम को अमान्य घोषित कर दिया है।

‘रोशिनी अधिनियम’ के बारे में:

इस अधिनियम को वर्ष 2001 में लागू किया गया था, इसका उद्देश्य अनधिकृत भूमि को नियमित करना था।

इस अधिनियम में, सरकार द्वारा निर्धारित की गयी कीमत चुकाए जाने के पश्चात, राज्य की भूमि पर तत्कालीन कब्जाधारकों के लिए स्वामित्व अधिकारों को हस्तांतरित करने का प्रावधान किया गया था।

  • सरकार द्वारा, इस प्रकार प्राप्त होने वाले राजस्व को पनबिजली परियोजनाएं शुरू करने पर, व्यय करने का विचार किया गया था, इसीलिये इस अधिनियम का नाम ‘रोशनी’ रख दिया गया।
  • इसके अलावा, संशोधनों के माध्यम से, सरकार द्वारा किसानों को अधिकृत कृषि भूमि पर मुफ्त में स्वामित्व अधिकार प्रदान किये गए, इसके लिए मात्र 100 रुपये प्रति कनाल, प्रलेखन शुल्क लिया गया।

इस अधिनियम को ‘अमान्य’ करने संबंधी कारण

  • वर्ष 2009 में, राज्य सतर्कता संगठन द्वारा कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, इन अधिकारियों पर, रोशनी अधिनियम के मानदंडो को पूरा नहीं करने वाले कब्जाधारकों को गैरकानूनी तरीके से भूमि के स्वामित्व अधिकार प्रदान करने की आपराधिक साजिश करने का आरोप लगाए गए थे।
  • वर्ष 2014 में, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 से वर्ष 2013 के बीच, अतिक्रमित भूमि के हस्तांतरण से 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया था, किंतु मात्र 76 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई थी। इस प्रकार इस क़ानून का उद्देश्य ही फेल हो गया।
  • रिपोर्ट में, राजनेताओं और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए, ‘स्थायी समिति’ द्वारा तय की गई कीमतों में मनमानी ढंग से कमी किये जाने संबंधी अनियमितताओं को दोषी ठहराया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रोशनी अधिनियम क्या है?
  2. अधिनियम की विशेषताएं
  3. अधिनियम में संशोधन

मेंस लिंक:

जम्मू-कश्मीर का ‘रोशनी अधिनियम’ क्या है? हाल ही में इसे क्यों समाप्त कर दिया गया? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

चालू खाता अधिशेष की संभावना


(Current account surplus likely)

संदर्भ:

भारत में वित्तीय वर्ष 2011 के दौरान चालू खाता अधिशेष (Current Account Surplus) दर्ज किये जाने की संभावना है। कोविड-19 महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में उत्पादन अधिक है, जबकि मांग कम है अर्थात, अर्थव्यवस्था में ‘अंडर हीटिंग’ (Under Heating) की स्थिति है, जिसके कारण आयात में कमी होगी और परिणाम स्वरूप देश के चालू खाते में अधिशेष की स्थिति हो सकती है।

यह संकट, टैपर टैंट्रम (Taper Tantrum) के दौरान विश्व की स्थिति से अलग है।

‘टैपर टैंट्रम’ क्या है?

टैपर टैंट्रम (Taper Tantrum) का तात्पर्य वर्ष 2013 के दौरान निवेशकों की उस सामूहिक प्रतिक्रिया से है, जिससे अमेरिकी राजकोष में जबरदस्‍त इजाफा हुआ।

निवेशकों को जब पता चलता कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी उदार मौद्रिक नीति (Quantitative EasingQE) कार्यक्रम पर रोक लगाने जा रहा है तो उनकी सामूहिक प्रतिक्रिया काफी घबराहटपूर्ण रही, जिससे अमेरिका में ट्रेजरी प्राप्ति में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रास्फीति में तेजी आयी और यह दहाई अंक में पहुंच गयी।

‘चालू खाता’ क्या होता है?

चालू खाता (Current Account) के तहत, एक निश्चित अवधि में, विशेषकर वार्षिक अथवा तिमाही अवधि के दौरान हुए, वस्तु एवं सेवाओं में शुद्ध व्यापार, निवेश पर शुद्ध कमाई, और शुद्ध हस्तांतरण भुगतानों को सम्मिलित किया जाता है।

वस्तुतः, वस्तु एवं सेवाओं में शुद्ध व्यापार, चालू खाते का एक प्रमुख घटक होता है।

प्रासंगिकता:

चालू खाता, किसी देश की आर्थिक स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। चालू खाते का उच्च संतुलन प्राय: आयात से अधिक निर्यात को व्यक्त करता है, जो कि विदेशी मुद्रा भंडार के एक स्वस्थ आगम को दर्शाता है।

भारत के चालू खाते की वर्तमान स्थिति

  • निर्यात की तुलना में महंगे आयात के कारण भारत का चालू खाता काफी हद तक घाटे में रहा है। हमारे द्वारा आयात की जाने वाली कुछ प्रमुख वस्तुएँ कच्चा तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ होती हैं।
  • हमारे देश में, सीमित घरेलू उत्पादन और घरेलू उद्योगों को, प्रतिस्पर्धा से संबंधित मुद्दों, जैसे कि स्थानीय और श्रम कानून, उच्च पूंजी लागत और उच्च कर आदि के परिणामस्वरूप, चीन जैसे देशों से होने वाले सस्ते आयात से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
  • नतीजतन, इन देशों के साथ हमारे व्यापार घाटे में वृद्धि हुई है, जिसका हमारे चालू खाता संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और इसकी कीमत हमारे घरेलू विनिर्माताओं को चुकानी पड़ी है।

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‘अधिशेष’ की स्थिति सदैव अच्छी नहीं होती है, फिर?

‘चालू खाता अधिशेष’ का अर्थ है, निकासी की तुलना में विदेशी मुद्रा का अधिक आगम।

यह विदेशी मुद्रा भंडार की वृद्धि में सहायक होता है जोकि, वित्तीय और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

हालाँकि, मौजूदा स्थिति में, हमारे चालू खाते में सुधार आयात के निम्न स्तर, और साथ ही घरेलू मांग में कमी के साथ हो रहा है। इस तरह की स्थिति अर्थव्यवस्था में संभावित कमजोरी के रूप में देखी जाती है, तथा सहायक नीतिगत उपाय किए जाने की आवश्यकता का संकेत करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘चालू खाता’ क्या होता है?
  2. घटक
  3. चालू खाता अधिशेष का प्रभाव
  4. टेपर टेंट्रम क्या होता है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

अलवणीकरण संयंत्र


(Desalination Plant)

संदर्भ:

हाल ही में, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा मुंबई में पहले अलवणीकरण संयंत्र (Desalination Plant) की स्थापना हेतु मंजूरी प्रदान की गयी है।

इस प्रस्तावित संयंत्र द्वारा 200 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) जल संसाधित किया जाएगा, इससे मुंबई में, मई और जून के महीनों के दौरान होने वाली पानी की कमी को दूर किया जा सकेगा।

स्विस चैलेंज विधि (Swiss Challenge method)

‘स्विस चैलेंज विधि’ बोली लगाने का एक तरीका होती है, जिसे प्रायः सार्वजनिक परियोजनाओं में उपयोग किया जाता है।

  • इस परियोजना के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (Brihanmumbai Municipal Corporation- BMC) द्वारा स्विस चैलेंज विधि (Swiss Challenge method) का उपयोग किये जाने की योजना बनायी जा रही है।
  • इस विधि में, परियोजना को एक अनापेक्षित बोली लगाने वाले किसी निजी व्यक्ति के लिए प्रदान किया जा सकता है।
  • इसमें, सबसे पहले प्रस्ताव पेश करने वाली निजी फर्म से सीधे वार्ता के लिए संपर्क किया जा सकता है, और इसके सहमत नही होने पर अन्य बोली लगाने वालों को आमंत्रित किया जाता है।

‘अलवणीकरण संयंत्र’ क्या हैं?

अलवणीकरण संयंत्र (Desalination Plant) द्वारा खारे पानी को पीने योग्य पानी में परिवर्तित किया जाता है।

  • इस प्रक्रिया में सर्वाधिक इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक ‘उत्क्रम परासरण/ रिवर्स ऑस्मोसिस (Reverse osmosisRO) होती है।
  • इसके तहत, बाहरी दबाव (Pressure) का उपयोग करके पानी में दूषित पदार्थो को उच्च सांद्रण वाले क्षेत्र से, एक अर्धपारगम्य झिल्ली (Membrane) के माध्यम से, दूषित पदार्थो के निम्न सांद्रण वाले क्षेत्र में धकेला जाता है।
  • झिल्ली में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों से होकर स्वच्छ जल-अणु दूसरी और पहुँच जाते है, तथा दूषित पदार्थ पीछे रह जाते हैं।
  • इन अलवणीकरण संयत्रों को अधिकांशतः सागरीय जल की पहुँच वाले क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है।

भारत में इस तकनीक का उपयोग

यह तकनीक, मुख्यतः अभी तक मध्य पूर्व के समृद्ध देशों तक ही सीमित है किंतु हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में इसका प्रयोग शुरू किया गया है।

  • भारत में, इस तकनीक का सबसे पहले तमिलनाडु में प्रयोग किया गया है। राज्य में चेन्नई के निकट वर्ष 2010 और 2013 में दो अलवणीकरण संयंत्र स्थापित किए गए।
  • गुजरात और आंध्र प्रदेश भी इस तकनीक के उपयोग पर विचार कर रहे हैं।

चुनौतियां:

  • अलवणीकरण संयंत्र स्थापित करने और इसके परिचालन की उच्च लागत।
  • अलवणीकरण प्रक्रिया के फलस्वरूप उपोत्पादों, जैसे उच्च सांद्रित लवणीय जल (Brine) का निपटान।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अलवणीकरण क्या है?
  2. अलवणीकरण संयंत्र क्या है?
  3. रिवर्स ऑस्मोसिस क्या होती है?
  4. भारत में अलवणीकरण संयंत्र

मेंस लिंक:

अलवणीकरण क्या होता है? हाल ही में मुंबई में अलवणीकरण संयंत्र की स्थापना का क्या कारण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

इसरो का शुक्रयान


(ISRO’s Shukrayaan)

संदर्भ:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा अपने प्रस्तावित शुक्रयान (Shukrayaan) मिशन के लिए अंतरिक्ष-आधारित 20 प्रायोगिक प्रस्तावों का चयन किया गया है।

शुक्रयान के बारे में:

इस मिशन के तहत शुक्र (Venus) ग्रह का चार वर्ष तक अध्ययन किया जाएगा।

  • वैज्ञानिक उद्देश्य: शुक्र ग्रह की बनावट, चक्रण, सतह विकास तथा सहज ग्रीनहाउस संकल्‍पना, सतही/उप-सतही विशेषताएँ तथा प्रक्रियाएँ, शुक्रीय वायुमंडल का अति घूर्णन तथा विकास, और सौर विकिरण/सौर पवन से अन्‍योन्‍यक्रिया के बारे में अध्ययन।
  • इस उपग्रह को जीएसएलवी मार्क II राकेट (GSLV Mk II rocket) से प्रक्षेपित किये जाने की योजना है।
  • इसकी प्रस्तावित कक्षा, शुक्र ग्रह से लगभग 500 x 60,000 किमी दूर होने की संभावना है। इस कक्षा को चरणबद्ध तरीके कम किया जाएगा, और कुछ माह पश्चात यह शुक्र से न्यूनतम अपोआपसिस (apoapsis) अर्थात ग्रह के दूरस्थ बिंदु, पर स्थापित हो जाएगी।

ISRO_Shukrayaan

शुक्र ग्रह के अध्ययन की आवश्यकता

  • शुक्र ग्रह को अक्सर आकार, द्रव्यमान, घनत्व, बनावट और गुरुत्वाकर्षण में समानता के कारण पृथ्वी की ‘जुड़वां बहन’ के रूप में वर्णित किया जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि दोनों ग्रह 5 बिलियन वर्ष पूर्व एक सघन गैस के बादल से एक ही समय पर निर्मित हुए है, जिससे दोनों की उत्‍पत्ति में समानता प्रतीत होती है।
  • शुक्र ग्रह, पृथ्वी की तुलना में सूर्य से लगभग 30 प्रतिशत अधिक नजदीक है, जिसके परिणामस्वरूप इस ग्रह पर सौर प्रवाह की तीव्रता काफी अधिक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शुक्र ग्रह की अवस्थिति
  2. शुक्रयान मिशन
  3. उद्देश्य
  4. शुक्र ग्रह के लिए विभिन्न मिशन

मेंस लिंक:

शुक्रयान मिशन के उद्देश्य और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चांग’ई-5 प्रोब


Chang’e-5 probe

संदर्भ:

चांग’ई-5 प्रोब, हाल ही में, चीन द्वारा प्रक्षेपित किया गया मानवरहित अंतरिक्ष यान है।

चांग’ई-5 प्रोब के बारे में:

  • इस प्रोब का नामकरण एक पौराणिक चीनी चंद्रमा देवी के नाम पर किया गया है।
  • चांग’ई-5 प्रोब, चार हिस्सों से मिलकर बना है: एक ऑर्बिटर (Orbiter), एक रिटर्नर (Returner), एक आरोहक (Ascender) और एक लैंडर (Lander)।
  • इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह से चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाना है। यह पिछले चार दशकों में, चंद्रमा से नमूने लाने के लिए किसी भी राष्ट्र द्वारा किया गया पहला प्रयास है।
  • यदि यह मिशन सफल होता है, तो 1960 और 1970 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ की इस सफलता के बाद, चीन, चंद्रमा के नमूने (Lunar Samples) लाने वाला तीसरा देश बन जाएगा।
  • इससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा की उत्पत्ति, निर्माण और इसकी सतह पर होने वाली ज्वालामुखी गतिविधियों के बारे में समझने में मदद मिलेगी।

नमूने एकत्रित करने हेतु चिह्नित स्थान:

चांग’ई-5 प्रोब, ओशियनस प्रोसेलरम (Oceanus Procellarum) या ‘ओशियन ऑफ स्टॉर्म’ (Ocean of Storms) के नाम से जाने जाने वाले, अब तक अनन्वेषित (Unexplored), और विशाल लावा निर्मित मैदान से 2 किलोग्राम सतही नमूने एकत्र करेगा।

चांग’ई-5 प्रोब मिशन द्वारा, चीन के अंतरिक्ष इतिहास में निम्नलिखित ‘चार घटनाएं’ पहली बार होंगी:

  1. चंद्रमा की सतह से उड़ान भरने वाला यह पहला प्रोब होगा।
  2. चंद्रमा की सतह से, स्वचालित रूप से नमूने एकत्र करने वाला पहला प्रोब।
  3. चंदमा की सतह पर पहली बार मानवरहित प्रोब का भ्रमण और चन्द्र कक्षा में डॉकिंग।
  4. चंद्र-सतह से नमूनों सहित पलायन वेग (Escape Velocity) से पृथ्वी पर लौटने का पहला अवसर।

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 स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

पांग्दा गांव


(Pangda village)

  • यह चीन द्वारा सीमा के नजदीक बसाया गया एक नया गाँव है।
  • यह गांव चीन और भूटान के मध्य विवादित क्षेत्र पर स्थित है।
  • यह क्षेत्र डोकलाम पठार पर भारत-भूटान-चीन त्रिक-संधि (Tri-Junction) के पूर्व में है। इस त्रिक-संधि पर वर्ष 2017 में भारत और चीन के मध्य 72 दिनों तक गतिरोध जारी रहा था।

पिछले उदाहरण:

  • इसी वर्ष जुलाई में, बीजिंग ने, पूर्वी भूटान में स्थित सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य, पर चीन का दावा किया था।
  • चीन ने ‘वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility-GEF) की 58 वीं बैठक में भूटान के इस क्षेत्र पर अपना दावा जताया था। जिसमे चीन ने भूटान में स्थित सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य हेतु एक परियोजना के लिए ‘वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility-GEF) द्वारा वित्त पोषण करने का विरोध किया और कि यह विवादित क्षेत्र है

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डोकलाम-विवाद क्या था?

भारत का भूटान के साथ सीमा-सुरक्षा संबंधी समझौता है। डोकलाम में चीन से भारत का आमना-सामना भूटान से संबंधित क्षेत्र में हुआ था।

  • चीनी, डोकलाम नामक स्थान पर कब्ज़ा करना चाहते थे, तथा इनका उद्देश्य भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक आना था। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मुर्गे की गर्दन (chicken’s neck) के रूप में भी जाना जाता है, यह देश के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।

 डोकलाम-विवाद किस प्रकार समाप्त हुआ?

यह व्यावहारिक रूप से ‘आँख से आँख’ मिलाने वाला गतिरोध था, जोकि ब्रिक्स (BRICS) आयोजन के मद्देनजर समाप्त हुआ था। चीन BRICS की मेजबानी कर रहा था, तथा भारत ने डोकलाम से पीछे नहीं हटने पर दृढ़ता दिखाई थी तथा भारत द्वारा BRICS बैठक का बाहिष्कार किये जाने की संभावना थी। राजनयिक हस्तक्षेप से इस गतिरोध की समाप्ति हुई थी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. पांग्दा गांव
  2. डोकलाम कहां है?
  3. चुम्बी घाटी कहाँ है?
  4. गलवान नदी के बारे में।
  5. सिलीगुड़ी कॉरिडोर।
  6. LAC बनाम LOC।
  7. डोकलाम के पड़ोसी भारतीय राज्य।

मेंस लिंक:

सरकार को लद्दाख में ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (LAC) पर, स्टैंड-ऑफ से पहले की ‘स्थिति’ की बहाली हेतु समझौता किये बिना ‘सैन्य-तीव्रता’ में कमी करने पर सहमत क्यों नहीं होना चाहिए, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अभयम’ ऐप

(Abhayam’ app)

आंध्र प्रदेश सरकार ने, हाल ही में, “अभयम” मोबाइल फोन एप्लिकेशन लॉन्च किया है। यह ऐप टैक्सियों और ऑटोरिक्शा में यात्रा करने वाली महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। यात्रा के दौरान ट्रैकिंग के लिए इस ऐप खास उपकरणों की व्यवस्था की गई है।

‘अभयम’ ऐप का परिचालन परिवहन विभाग की देखरेख में किया जा रहा है। अभयम ऐप, महिलाओं द्वारा मुसीबत में फसने पर पैनिक बटन दबाने पर, पुलिस को सतर्क करेगा।

राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC)

  • प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर राहत उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु, भारत सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (National Crisis Management CommitteeNCMC) का गठन किया गया है।
  • इसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव द्वारा की जाती है।
  • अन्य सदस्य: सभी संबंधित मंत्रालयों / विभागों तथा संगठनों के सचिव इस समिति के सदस्य होते हैं।
  • NCMC, आवश्यक समझे जाने पर, संकट प्रबंधन समूह के लिए दिशा-निर्देश जारी करती है।

अटल संकाय विकास कार्यक्रम (FDP)

(ATAL Faculty Development Programmes)

  • हाल ही में, AICTE द्वारा आयोजित 46 ऑनलाइन अटल संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया है।
  • इसका उद्देश्य अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से जुड़े उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों को प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना है।
  • बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, लंदन द्वारा ‘संकाय विकास कार्यक्रम के तहत 100 से ज्यादा उभरते क्षेत्रों में 1000 ऑनलाइन कार्यक्रमों में एक लाख से अधिक सदस्यों के प्रशिक्षण को विश्व रिकॉर्ड के रूप में अंकित किया गया है।

अटल अकादमी का मुख्य उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्रदान करना और विभिन्न उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण के माध्यम से अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

15वां G20 शिखर सम्मेलन

सऊदी अरब की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया।

  • शिखर सम्मेलन की समाप्ति, ‘लीडर्स डिक्लेरेशन’ को अपनाने और अगले G20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता इटली को सौपने के साथ हुई।
  • इसके साथ ही भारत द्वारा वर्ष 2023 में शिखर सम्मेलन की मेजबानी किये जाने की घोषणा की गयी- पूर्व में, भारत द्वारा 2022 में G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जानी थी।
  • पिछले साल G20 की ओसाका घोषणा में भारत को 2022 में शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए कहा गया था।

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