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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 November

 

विषय – सूची

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘चंडीगढ़’ पर हरियाणा की तुलना में पंजाब का दावा अधिक मजबूत

2. राष्ट्रपति ट्रम्प को कोविड-19 के ईलाज हेतु दी गयी प्रायोगिक दवा को FDA की अनुमति

3. UNSC में, भारत द्वारा अफगानिस्तान में तत्काल युद्ध विराम के मांग

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘डीप ओशन मिशन’ के आरंभ हेतु भारत तैयार

2. सेंटिनल-6 सेटेलाइट

3. केरल का नया विवादास्पद पुलिस कानून 118A

4. सीमांत राजमार्ग परियोजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. सिटमैक्‍स-20

2. आपराधिक वित्त और क्रिप्टोकरेंसी पर वैश्विक सम्मेलन

3. राष्ट्रीय नवजात सप्ताह 2020

4. अवास दिवस और अवास सप्ताह

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

‘चंडीगढ़’ पर हरियाणा की तुलना में पंजाब का दावा अधिक मजबूत


संदर्भ:

हाल ही में, हरियाणा सरकार ने सुझाव दिया है, कि यह उचित होगा कि हरियाणा और पंजाब दोनों एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में चंडीगढ़ पर सहमत हों तथा दोनों प्रदेश अपनी स्वतंत्र राजधानियाँ और उच्च न्यायालयों की स्थापना करें।

चंडीगढ़ का निर्माण क्यों किया गया था?

  • विभाजन के दौरान तत्कालीन पंजाब की राजधानी लाहौर, पाकिस्तान का हिस्सा बन गयी थी, इसके पश्चात पंजाब की नयी राजधानी के रूप में चंडीगढ़ का निर्माण किया गया था।
  • 1952 से 1966 तक (हरियाणा राज्य के पंजाब से अलग होने तक) चंडीगढ़, पंजाब की राजधानी रहा।
  • 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के समय से इस शहर को पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी होने का अनूठा गौरव प्राप्त है। हालांकि, इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया और इस पर केंद्र का प्रत्यक्ष नियंत्रण है।

तत्कालीन घोषणा

तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने उस समय घोषणा की थी कि उचित समय पर हरियाणा की अपनी राजधानी होगी तथा चंडीगढ़ पंजाब राज्य में सम्मिलित हो जाएगा।

पुनः वर्ष 1985 में, राजीव-लोंगोवाल समझौते (Rajiv-Longowal accord) के तहत, 26 जनवरी, 1986 को चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपा जाना था, लेकिन राजीव गांधी सरकार ने अंतिम समय पर निर्णय वापस ले लिया।

हालिया घटनाक्रम

वर्ष 2018 में, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा चंडीगढ़ के विकास हेतु एक विशेष निकाय गठित करने का सुझाव दिया गया, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री ने इसे अस्वीकार कर दिया गया, और शहर को “निर्विवाद रूप से पंजाब का भाग बताया”।

हरियाणा, अपनी ओर से, एक अलग उच्च न्यायालय की मांग कर रहा है तथा विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमे विधानसभा परिसर में पंजाब के कब्जे वाले 20 कमरों की मांग की गयी है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

राष्ट्रपति ट्रम्प को कोविड-19 के ईलाज हेतु दी गयी प्रायोगिक दवा को FDA की अनुमति


संदर्भ:

पिछले महीने राष्ट्रपति ट्रम्प को कोविड-19 से संक्रमित होने पर एक प्रायोगिक एंटीबॉडी उपचार दिया गया था। हाल ही में, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration- FDA) द्वारा इस प्रायोगिक एंटीबॉडी उपचार के आपातकालीन इस्तेमाल हेतु अनुमति प्रदान की गयी है।

दवा के बारे में:

  • यह दवा, रेजेनेरॉन फार्मास्यूटिकल्स(Regeneron Pharmaceuticals) द्वारा निर्मित की गयी है।
  • यह दवाई, कासिरविमाब (Casirivimab) तथा इमडेविमाब (Imdevimab) नामक दो एंटीबाडीज का मिश्रण है।
  • इसे संक्रमित व्यक्तियों को गंभीर बीमारी होने से बचाने हेतु तैयार किया गया है।
  • शरीर द्वारा अपनी सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करने की प्रतीक्षा के स्थान पर, यह दवा स्वतः ही शरीर में प्राकृतिक सुरक्षा की प्रतिकृति के रूप में कार्य करती है।
  • मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के नाम से जानी जाने वाली यह इस प्रकार की दूसरी दवा है – जिसे कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूरी प्रदान की गयी है।

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी क्या हैं?

  • मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (Monoclonal Antibodies) एक प्रकार का प्रोटीन होती हैं जो वायरस पर हमला करने के लिए जो प्रतिरक्षा प्रणाली में मानव एंटीबॉडी की भांति कार्य करती है।
  • ये मानव-निर्मित प्रोटीन होती हैं

polyclonal

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एंटीबॉडी क्या होती हैं?
  2. एंटीजन क्या होते हैं?
  3. इम्यूनिटी सिस्टम हमारे शरीर में किस प्रकार कार्य करता है?
  4. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी क्या हैं?
  5. पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी क्या हैं?

मेंस लिंक:

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी क्या होती हैं?  ये किस प्रकार कार्य करती है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

UNSC में, भारत द्वारा अफगानिस्तान में तत्काल युद्ध विराम के मांग


संदर्भ:

भारत द्वारा अफगानिस्तान में ‘तत्काल व्यापक युद्ध विराम’ की मांग की गयी है।

  • हाल ही में, अरिया-फार्मूला (Arria Formula) के तहत बुलाई गयी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council- UNSC) की बैठक में, भारत ने फिर से दोहराया है, कि ‘अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए डूरंड रेखा (Durand Line) के पार से जारी आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों और शरण स्थलों को समाप्त करना होगा।
  • ज्ञातव्य है, कि अरिया-फार्मूला के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्यों द्वारा अनौपचारिक रूप से मीटिंग बुलाई जाती है।

भारत की चिंता का कारण

  • अफगान शांति प्रक्रिया और नाटो / अमेरिकी गठबंधन सेना की समयपूर्व वापसी से आतंकवादी नेटवर्क के लिए फिर से सक्रिय होने के मौके मिल सकते है, जिससे ये अफगानिस्तान और भारत, दोनों को निशाना बना सकते हैं।
  • इसी वर्ष मई में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट में प्रमाण दिया गया कि, तालिबान द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका को दिए गए आश्वासन के बावजूद, इस क्षेत्र में अल-कायदा अभी भी मौजूद है तथा तालिबान द्वारा इसे आश्रय दिया जा रहा है और यह अफगानिस्तान में सक्रिय है।

आगे की राह

अफगानिस्तान में हिंसा समाप्त करने के लिए आतंकवादी आपूर्ति श्रृंखलाओं को नष्ट करना होगा।

भारत द्वारा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए चार आवश्यकताएं सुझाई गयी हैं:

  1. इस प्रक्रिया को अफगान के नेतृत्व में और अफगान के स्वामित्व में संपन्न होना चाहिए।
  2. आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) होनी चाहिए।
  3. महिलाओं के अधिकारों को मजबूती से संरक्षित किये जाने चाहिए और साथ ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों और निर्बल लोगों की सुरक्षा हेतु उपाय किये जाने की आवश्यकता है।
  4. अफगानिस्तान के पारगमन अधिकारों का उपयोग, अन्य देशों द्वारा ‘अफगानिस्तान से राजनीतिक कीमत’ वसूलने हेतु नहीं किया जाना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. डूरंड रेखा कहाँ स्थित है?
  2. भारत और इसकी विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ
  3. अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी
  4. UNSC- स्थायी सदस्य

मेंस लिंक:

अफगानिस्तान में “तत्काल व्यापक युद्ध विराम” की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

‘डीप ओशन मिशनके आरंभ हेतु भारत तैयार


संदर्भ:

भारत द्वारा शीघ्र ही एक महत्वाकांक्षी डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission) की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए जा रहे हैं।

भारत काडीप ओशन मिशन’

‘डीप ओशन मिशन’ (Deep Ocean Mission) के तहत, 35 साल पहले इसरो द्वारा शुरू किये गए अंतरिक्ष अन्वेषण के समान गहरे महासागर में अन्वेषण करने का प्रस्ताव किया गया है।

  • यह मिशन, गहरे समुद्र में खनन, समुद्री जलवायु परिवर्तन संबंधी सलाहकारी सेवाओं, अन्तर्जलीय वाहनों एवं अन्तर्जलीय रोबोटिक्स संबंधी प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित होगा।
  • रिपोर्ट के अनुसार, ‘डीप ओशन मिशन’ में दो प्रमुख परियोजनाओं, ज्वारीय ऊर्जा द्वारा संचालित एक विलवणीकरण संयंत्र (Desalination Plant) तथा कम से कम 6,000 मीटर की गहराई पर अन्वेषण करने में सक्षम एक पनडुब्बी वाहन (Submersible Vehicle) को सम्मिलित किया गया है।

महत्व:

  • यह मिशन भारत के विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय शेल्फ में अन्वेषण करने संबंधी प्रयासों को बढ़ावा देगा।
  • यह योजना भारत को मध्य हिंद महासागर बेसिन (Central Indian Ocean BasinCIOB) में संसाधनों का दोहन करने की क्षमता विकसित करने में सक्षम बनाएगी।

संभावनाएं:

भारत को मध्य हिंद महासागर बेसिन (CIOB) में पॉली-मेटैलिक नॉड्यूल्स (Polymetallic nodulesPMN) अन्वेषण के लिये संयुक्त राष्ट्र सागरीय नितल प्राधिकरण (UN International Sea Bed Authority for exploration) द्वारा 75,000 वर्ग किलोमीटर का आवंटन किया गया है।

  • मध्य हिंद महासागर बेसिन क्षेत्र में लोहा, मैंगनीज, निकल और कोबाल्ट जैसी धातुओं के भण्डार हैं।
  • अनुमानित है कि, इस विशाल भण्डार के मात्र 10% दोहन से भारत की अगले 100 वर्षों के लिए ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी हो सकती हैं।

पॉली-मेटैलिक नॉड्यूल्स (PMN)

  • पॉली-मेटैलिक नॉड्यूल्स (जिन्हें मैंगनीज नॉड्यूल्स भी कहा जाता है) आलू के आकार के तथा प्रायः छिद्रयुक्त होते हैं। ये विश्व महासागरों में गहरे समुद्र तलों पर प्रचुर मात्रा में बिछे हुए पाए जाते हैं।
  • अवगठन: पॉली-मेटैलिक नॉड्यूल्स में मैंगनीज और लोहे के अलावा, निकल, तांबा, कोबाल्ट, सीसा, मोलिब्डेनम, कैडमियम, वैनेडियम, टाइटेनियम पाए जाते है, जिनमें से निकल, कोबाल्ट और तांबा आर्थिक और सामरिक महत्व के माने जाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘गहरे समुद्र में खनन’ क्या होता है?
  2. PMN क्या हैं?
  3. मध्य हिंद महासागर बेसिन (CIOB) की अवस्थिति
  4. संयुक्त राष्ट्र सागरीय नितल प्राधिकरण के कार्य

मेंस लिंक:

भारत द्वारा शुरू किए जाने वाले ‘डीप ओशन मिशन’ की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

सेंटिनल-6 सेटेलाइट


(Sentinel-6 satellite)

संदर्भ:

‘कोपर्निकस सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलीच उपग्रह’ (Copernicus Sentinel-6 Michael Freilich satellite) का निर्माण महासागरों की निगरानी के लिए किया गया है।

  • इसे, हाल ही में, कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया है।
  • यह वैश्विक समुद्रीय स्तर में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी करने हेतु एक मिशन का एक हिस्सा है।

सेंटिनल-6 मिशन (Sentinel-6 Mission)

इस मिशन को जेसन निरंतरता सेवा (Jason Continuity of Service: Jason-CS) मिशन भी कहा जाता है।

  • इस मिशन को ‘महासागरों की ऊंचाई’ को मापने हेतु तैयार किया गया है, जो कि, पृथ्वी की जलवायु में होने वाले परिवर्तनों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • सेंटिनल-6 मिशन को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), नासा (NASA), मौसम संबंधी उपग्रहों के उपयोग हेतु यूरोपीय संगठन (European Organisation for the Exploitation of Meteorological Satellites -EUMETSAT) और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय एडमिनिस्ट्रेशन (National Oceanic and Atmospheric Administration – NOAA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इसमें फ़्रांस के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अध्ययन केंद्र (France’s National Centre for Space Studies -CNES) द्वारा सहयोग किया गया है।

सेंटिनल-6 उपग्रह का कार्य

  • वैश्विक समुद्र-स्तर में वृद्धि संबंधी आंकड़े प्रदान करना।
  • स्पंदनो (Pulses) को पृथ्वी की सतह पर भेजना और उनके वापस लौटने में लगे समय की माप करना, इससे वैज्ञानिकों को समुद्रीय सतह की ऊँचाई मापने में मदद मिलेगी।
  • मार्ग में उपस्थित जल वाष्प की माप करना और जीपीएस और पृथ्वी पर स्थित लेजर का उपयोग करके इसकी अवस्थिति का पता लगाना।

मिशन का महत्व:

सेंटिनल-6 मिशन द्वारा उपलब्ध कराये गए आंकड़ों से अल-नीनो और ला लीना जैसी मौसमी स्थितियों के लिए दीर्घकालिक पूर्वानुमान और दो-से-चार-सप्ताह के दौरान (हरिकेन तीव्रता भविष्यवाणी) अल्पकालिक मौसम की भविष्यवाणी हेतु सटीकता में सुधार करने में सहायता प्रदान करेंगे।

महासागरों की ऊंचाई को मापना क्यों महत्वपूर्ण है?

  • वैश्विक स्तर पर महासागरों की ऊंचाई की निगरानी करना और अंतरिक्ष से महासागरीय धाराओं और उष्मा भंडारण में होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों की निगरानी करना केवल अंतरिक्ष से संभव हो सकता है।
  • इससे वैज्ञानिकों को महासागरों में होने वाले परिवर्तनों से जलवायु पर पड़ने वाले प्रभाव को आंकने में सहायता मिलती है।
  • महासागरीय ताप बजट में परिवर्तनों को मापने और उनका अध्ययन करने हेतु, वैज्ञानिकों को महासागरीय धाराओं और उष्मा भंडारण को जानने की आवश्यकता होती है, जिसे सागरीय सतह की ऊंचाई से ही निर्धारित किया जा सकता है।

वैश्विक स्तर पर महासागरों में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए वर्ष 1992 से लांच किये गए अन्य उपग्रहों में टोपेक्स/ पोसेइडॉन (TOPEX/Poseidon), जैसन-1 (Jason-1), OSTN/Jason-2 शामिल हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सेंटिनल-6 मिशन का उद्देश्य एवं महत्व
  2. टोपेक्स/ पोसेइडॉन, जैसन-1, OSTN/Jason-2 के बारे में
  3. महासागरीय धाराएँ क्या हैं? ये किस प्रकार उत्पन्न होती हैं?

मेंस लिंक:

जेसन निरंतरता सेवा (Jason-CS) मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

केरल का नया विवादास्पद पुलिस कानून 118A  


संदर्भ:

हाल ही में, केरल सरकार द्वारा सोशल मीडिया में ‘घृणास्पद’, ‘अपमानजनक’ और ‘धमकी भरे’ पोस्ट डालने पर दंडित करने हेतु, केरल पुलिस अधिनियम में एक नई धारा 118A जोड़ी गयी है।

इस क़ानून को एक अध्यादेश के माध्यम से जारी किया गया है।

नए कानून के अनुसार:

“संचार के किसी माध्यम से, यदि कोई व्यक्ति जानबूझ कर गलत और भ्रामक तरीके से, धमकाने, गाली देने, अपमानित करने या बदनाम करने वाली किसी सामग्री का प्रकाशन करता है, जिससे किसी अन्य व्यक्ति अथवा किसी वर्ग को या निजी हित साधने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को, मानसिक  प्रताणना, उसकी प्रतिष्ठा अथवा संपत्ति को क्षति पहुँचती है, तो साबित होने पर उसे तीन साल तक का कारावास अथवा दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।“

  • अर्थात, किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर ‘घृणास्पद’ या “अपमानजनक” समझी जाने वाली पोस्ट करने पर तीन साल की जेल और दस हजार रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
  • इस प्रकार की पोस्ट अथवा विचारों को लिखने और बनाने वाले के अलावा इसे साझा करने वालों को समान दंड भुगतना पड़ेगा।

इस कानून की आवश्यकता

वर्ष 2015 में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईटी एक्ट की धारा 66A सहित इसी तरह का एक क़ानून- केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118(d)अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खतरा बताते हुए रद्द कर दिया गया था।

इन दोनों कानूनों के रद्द हो जाने से, निजता के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले साइबर हमलों और समाज में महिलाओं के लिए काफी तकलीफ देने वाले ऑनलाइन अपराधों को रोकने में वर्तमान क़ानून अपर्याप्त साबित हो रहे थे, अतः इस कमी को पूरा करने के लिए केरल सरकार द्वारा यह नया कानून लाया गया।

118

इस नए कानून की आलोचना का कारण

विशेषज्ञों द्वारा इस कानून को ‘क्रूर’ बताया जा रहा है, क्योंकि:

  1. इस क़ानून को न केवल ‘असहमति’, बल्कि वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी दमन करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
  2. इस क़ानून के द्वारा, आईटी एक्ट की धारा 66A के कानूनी दोषों को पुनर्जीवित कर दिया गया है, जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने क़ानून रद्द कर समाप्त कर दिया था।
  3. यह कानून, व्यापक और अस्पष्ट है और इसका किन्ही व्यक्तियों द्वारा, अथवा सरकार और पुलिस द्वारा, अपने पक्ष में असहमति रखने वालों के विरुद्ध अंधाधुंध तरीके से दुरुपयोग किया जा सकता है।
  4. हालांकि केरल सरकार का दावा है, कि इस क़ानून का प्रयोग महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों से लड़ने के लिए किया जायेगा, लेकिन इसका कानून में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
  5. यह क़ानून, बिना किसी क्षेत्र सीमा के अभिव्यक्ति को प्रतिबंधित करता है तथा सक्रिय रूप से संविधान के अनुच्छेद 19 को बाधित करता है और इसमें अनुच्छेद 19 (2) के तहत संरक्षण नहीं दिया गया है।
  6. यह क़ानून, राज्य में पुलिस कार्यप्रणाली पर प्रभावी रूप से डीडीओएस हमला (Denial-of-Service Attack) होगा। इससे लोगों के बीच हर तरह के मुद्दों को लेकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए भारी भीड़ लग जाएगी।
  7. इस क़ानून में, पुलिस को किसी के भी खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

सीमांत राजमार्ग परियोजना


(Frontier Highway Project)

संदर्भ:

भारतीय और चीनी सेनाओं के मध्य मई में हुए लद्दाख गतिरोध के बाद से, अरुणाचल प्रदेश द्वारा युद्ध जैसी परिस्थितयां होने पर सैन्य बलों की तीव्र आवाजाही में सुगमता के लिए ‘भारत-तिब्बत सीमा’ से लगे हुए एक महत्वाकांक्षी फ्रंटियर राजमार्ग परियोजना (Frontier Highway Project) पर जोर दिया जा रहा है।

‘सीमांत राजमार्ग परियोजना’ के बारे में:

  • इसे अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे तथा मागो-थिंग्बु-विजयनगर बॉर्डर हाईवे (Mago-Thingbu–Vijaynagar Border Highway) भी कहा जाता है।
  • यह 2,000 किलोमीटर लंबी सड़क मैकमोहन रेखा के साथ-साथ चलती है।
  • यह ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (बीच से होते हुए) और अरुणाचल पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (असम की सीमा के साथ तलहटी में) के साथ अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख राजमार्गों के रूप में लुक ईस्ट कनेक्टिविटी (Look East connectivity) अवधारणा को आगे बढ़ाता है।
  • यह राजमार्ग, अरुणाचल प्रदेश की तलहटी में भैरवकुंड, असम और भूटान की त्रिक-संधि (Tri-Junction) पर प्रस्तावित पूर्वी-पश्चिम औद्योगिक गलियारे राजमार्ग से होकर गुजरेगा और पूर्वी सियांग जिले में रुक्सिन तक जाएगा।
  • यह राजमार्ग दिबांग वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरेगा, जिससे पर्यावरणीय मुद्दे उठने की संभवना है।

आवश्यकता:

  • यह राजमार्ग इन दुर्गम क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देगा और रोजगार उत्पन्न करेगा।
  • यह राजमार्ग भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ पर रोक लगाएगा। चीन द्वारा अपनी सीमा में सड़क और रेलवे नेटवर्क का विस्तृत निर्माण किया है, जिससे भारत को सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हुआ है। यह क्षेत्र भारतीय सीमा की ओर से अपेक्षाकृत अधिक दुर्गम है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सीमांत राजमार्ग परियोजना के बारे में
  2. ट्रांस-अरुणाचल हाईवे के बारे में

मेंस लिंक:

हमें सीमांत राजमार्ग परियोजना की आवश्यकता क्यों है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


सिटमैक्‍स-20

(SITMEX-20)

यह भारत, थाईलैंड और सिंगापुर के बीच एक त्रिपक्षीय नौसेना अभ्यास है।

  • इसका नवीनतम संस्करण अंडमान सागर में आयोजित किया जा रहा है।
  • यह अभ्‍यास कोविड-19 महामारी के मद्देनजर बिना किसी संपर्क के, सिर्फ सागर में (non-contact, at sea only) आयोजित किया जा रहा है।
  • इसका लक्ष्‍य तीनों मित्र देशों और शांतिकालीन पड़ोसियों के बीच शांतिकाल में समन्‍वय, सहयोग और साझेदारी का विकास करना है।

आपराधिक वित्त और क्रिप्टोकरेंसी पर वैश्विक सम्मेलन

(Global Conference on Criminal Finances and Cryptocurrencies)

  • हाल ही में आपराधिक वित्त और क्रिप्टोकरेंसी पर 4 वां वैश्विक सम्मेलन आयोजित किया गया था।
  • इसका आयोजन इंटरपोल, यूरोपोल और बेसल संस्थाओं द्वारा किया गया।
  • प्रतिभागी: कानून प्रवर्तन और न्यायपालिका, वित्तीय खुफिया इकाइयों (FIUs), अंतरराष्ट्रीय संगठनों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि।

पृष्ठभूमि:

यह सम्मेलन 2016 में स्थापित क्रिप्टोकरेंसी और मनी लॉन्ड्रिंग पर गठित एक कार्य समूह की एक पहल है।

इसे वर्चुअल संपत्तियों और क्रिप्टोकरेंसी से सम्बंधित वित्तीय अपराधों और खुफिया मामलों की जांच के लिए ज्ञान, विशेषज्ञता और सर्वोत्तम विधियों को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

राष्ट्रीय नवजात सप्ताह 2020

(National Newborn Week)

इसे प्रतिवर्ष 15 से 21 नवंबर के मध्य मनाया जाता है।

2020 के लिए थीम: ‘हर स्वास्थ्य केंद्र और हर जगह, हर नवजात शिशु के लिए गुणवत्ता, समानता, गरिमा।’

  • इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में नवजात शिशु स्वास्थ्य के महत्व को सुदृढ़ करना और नवजात अवधि में शिशुओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों में सुधार करके शिशु मृत्यु दर को कम करना है।
  • भारत 2014 में, ग्लोबल एवरी न्यूबोर्न एक्शन प्लान (Global Every Newborn Action Plan) के अनुरूप नवजात कार्य योजना (Newborn Action PlanINAP) शुरू करने वाला पहला देश बना था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य, ‘रोके न सकने वाली नवजातों की मौत और जन्म के समय मृत पाए जाने की समस्या को खत्म करना है’।

अवास दिवस और अवास सप्ताह

नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) नामक ग्रामीण आवास योजना का शुभारंभ किया गया था। इसका उद्देश्य वर्ष 2022 तक ‘‘सभी के लिए आवास’’ उपलब्‍ध कराना था।

  • PMAY-G के शुभारंभ की वर्षगांठ मनाने के लिए हर वर्ष 20 नवंबर को ‘‘आवास दिवस’’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था।
  • इस कार्यक्रम में यह परिकल्‍पना की गई थी कि वर्ष 2022 तक सभी आधारभूत सुविधाओं से संपन्‍न 2.95 करोड PMAY-G मकानों का निर्माण कार्य संपन्‍न किया जाएगा।

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