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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 20 November

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. राजस्थान सरकार द्वारा दूसरी संतान होने पर मातृत्व लाभ योजना का आरंभ

 

सामान्य अध्ययन-II

1. संविधान के अनुच्छेद 102 (1) एवं अनुच्छेद 191 (1)

2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति हेतु उच्चतम न्यायालय का निर्देश

3. भारत और लक्समबर्ग के मध्य दो दशकों में पहली बैठक

4. वेस्ट बैंक एवं इससे संबंधित मुद्दे

5. एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कॉर्ड ब्लड बैंकिंग

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज

2. फाइव आइज़

3. विलो वार्बलर

4. विश्व के 100 सबसे शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर में भारत के दो सुपर कंप्यूटर शामिल

5. वैश्विक एचआईवी रोकथाम गठबंधन

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

राजस्थान सरकार द्वारा दूसरी संतान होने पर मातृत्व लाभ योजना का आरंभ


संदर्भ:

राजस्थान सरकार द्वारा चार जिलों में मातृत्व लाभ योजना का आरंभ किया गया है, इसके तहत, दूसरी संतान होने पर माताओं को छः हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना को इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना का नाम दिया गया है।

यह योजना, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) की सहायक योजना होगी। ज्ञात हो कि, PMMVY के तहत माताओं को पहली संतान के जन्म होने पर पांच हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस योजना को प्रायोगिक आधार पर उदयपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर में पाँच वर्षों के लिए लागू किया जा रहा है।
  • इन चयनित जिलों में बच्चों का पोषण स्तर और माताओं में एनीमिया का स्तर राज्य के समग्र औसत से काफी कम है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • इस योजना का उद्देश्य: काम करने वाली महिलाओं के लिए गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद होने वाली मजदूरी के नुकसान की भरपाई करना; बच्चों में दुर्बलता और नाटेपन पर नियंत्रण करना; माताओं में एनीमिया की कमी पर अंकुश लगाना है।
  • लाभार्थियों को कुछ शर्तों के अधीन पांच किस्तों में नकद आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
  • केंद्रीय योजना के विपरीत, इन्हें राज्य योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड जमा नहीं करना होगा और पैसा सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में:

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) केंद्र सरकार की एक मातृत्व लाभ योजना है।

  • इस योजना को 2010 में इंदिरा गांधी मातृ सहयोग योजना (IGMSY) के रूप में शुरू किया गया था जिसे 1 जनवरी 2017 से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के रूप में पूरे देश में लागू किया गया है।
  • यह योजना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए एक सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है।
  • इस योजना के तहत काम-काजी महिलाओं के लिए गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद होने वाली मजदूरी के नुकसान की आंशिक भरपाई, तथा सुरक्षित प्रसव और अच्छे भोजन एवं पोषण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के बारे में
  2. पात्रता
  3. लाभ
  4. इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना और PMMVY के मध्य अंतर

मेंस लिंक:

इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

संविधान के अनुच्छेद 102 (1) एवं अनुच्छेद 191 (1)


संविधान के अनुच्छेद 102 (1) और अनुच्छेद 191 (1) के तहत, किसी सांसद अथवा विधायक (अथवा विधान परिषद् सदस्य) को केंद्र या राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद धारित करने से निषिद्ध किया गया है।

चर्चा का कारण

‘लाभ के पद’ (Office of Profit) पर गठित संयुक्त संसदीय समिति द्वारा इस बात पर विचार-विमर्श किया जा रहा है, कि ‘क्या कोई सांसद किसी विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य जारी रख सकता है? तथा क्या इस पर ‘लाभ के पद’ हेतु निर्धारित नियमों लागू होते हैं?

‘लाभ के पद’ से तात्पर्य:

यदि कोई सांसद अथवा विधायक किसी सरकारी पद पर आसीन होता है तथा उस पद से लाभ प्राप्त करता है, तो उस पद को ‘लाभ का पद’ (Office of Profit) कहा जाता है।

किसी सांसद अथवा विधायक को केंद्र या राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद धारण करने पर सदस्यता हेतु अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि, संसद अथवा विधानसभा द्वारा पारित नियम के तहत निर्धारित पदों पर आसीन होने पर से सांसद अथवा विधायक अयोग्य घोषित नहीं किये जा सकते।

लाभ के पदको अयोग्यता मानदंड के रूप में सम्मिलित करने के निहितार्थ:

  • संविधान निर्माताओं का मानना था, कि विधि-निर्माताओं को किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होना चाहिए, ताकि वे विधायी कार्यों का निर्वहन करते समय किसी से प्रभावित नहीं हो सकें।
  • दूसरे शब्दों में, किसी सांसद या विधायक को किसी भी प्रकार के सरकारी दबाव के बिना अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। अर्थात, निर्वाचित सदस्य के कर्तव्यों और हितों के बीच कोई संघर्ष नहीं होना चाहिए।
  • ‘लाभ के पद’ संबंधी प्रावधान संविधान में वर्णित- विधायिका और कार्यपालिका के मध्य शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत को लागू करने का एक प्रयास है।

 विवाद का कारण:

  • ‘लाभ के पद’ को संविधान अथवा ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम’, 1951 में परिभाषित नहीं किया गया है।
  • ‘लाभ के पद’ सिद्धांत के महत्व और अर्थ की न्यायालय द्वारा व्याख्या की गयी है। न्यायालय ने समय-समय पर विशिष्ट तथ्यात्मक स्थितियों के संदर्भ इस मामले पर अपने निर्णय दिए हैं।
  • भारतीय संविधान में अनुच्छेद 102(1) तथा अनुच्छेद 191(1) में लाभ के पद का उल्लेख किया गया है, जिनमे केंद्रीय और राज्य स्तर पर विधि-निर्माताओं द्वारा सरकारी पदों को स्वीकार करने पर प्रतिबंधित किया गया है।

लाभ के पद को परिभाषित करने में न्यायपालिका की भूमिका:

प्रद्योत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय (2001) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने किसी व्यक्ति के लाभ के पद पर आसीन होने अथवा नहीं होने संबंधी जांच करने हेतु चार सिद्धांतों का निर्धारण किया:

  1. क्या सरकार, ‘पद’ पर नियुक्ति, निष्कासन तथा इसके कार्यों पर नियंत्रण रखती है?
  2. क्या सरकार उस पद से संबंधित पारिश्रमिक को निर्धारित करती है?
  3. क्या पद के मूल निकाय में सरकारी शक्तियां निहित हैं (धन जारी करना, भूमि आवंटन, लाइसेंस देना आदि)?
  4. क्या उस पद को धारण करने वाला व्यक्ति संरक्षण के माध्यम से किसी निर्णय को प्रभावित करने में सक्षम है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘लाभ के पद’ क्या है? क्या इसे संविधान में परिभाषित किया गया है?
  2. किसी सांसद या विधायक को अयोग्य ठहराने हेतु आधारिक मापदंड क्या हैं?
  3. संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 किससे संबंधित हैं?
  4. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति के लाभ के पद पर आसीन होने अथवा नहीं होने संबंधी जांच करने हेतु निर्धारित चार सिद्धांत कौन से है?

मेंस लिंक:

‘लाभ के पद’ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। अयोग्यता मानदंड के रूप में ‘लाभ के पद’ को सम्मिलित करने के निहितार्थो पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति हेतु उच्चतम न्यायालय का निर्देश


संदर्भ:’

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ (MOEFCC) को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green TribunalNGT) में रिक्त पदों पर लंबित नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय ने प्रक्रिया पूरी करने हेतु चार सप्ताह का समय दिया है।

संबंधित प्रकरण

उच्चतम न्यायालय में दाखिल की गयी याचिका में याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है, कि  राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्तियां, नियुक्ति समिति के समक्ष सितंबर से लंबित है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के बारे में:

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green TribunalNGT) की स्थापना 18 अक्तूबर, 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
  • इसकी स्थापना, पर्यावरण बचाव और वन संरक्षण और अन्य प्राकृतिक संसाधन सहित पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार केप्रवर्तन और इससे जुडे़ हुए मामलों का प्रभावी एवं त्वरित निपटान करने हेतु की गयी है।
  • अधिकरण की मुख्य पीठ नई दिल्ली में है, जबकि अन्य चार क्षेत्रीय पीठ भोपाल, पुणे, कोलकाता एवं चेन्नई में स्थित हैं।
  • यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, तथा यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होगा।
  • अधिकरण के लिए, आवेदनों और याचिकाओं को, उनके दायर किये जाने से 6 माह के भीतर, निपटान करने का अधिदेश दिया गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना के साथ भारत ‘विशेष पर्यावरण न्यायाधिकरण’ स्थापित करने वाला विश्व में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बाद तीसरा देश तथा पहला विकासशील देश बन गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की संरचना:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण, में एक पूर्णकालिक अध्यक्ष और न्यूनतम 10 तथा अधिकतम 20 पूर्णकालिक न्यायिक एवं विशेषज्ञ सदस्य होते हैं।

अध्यक्ष: इस अधिकरण का प्रशासनिक प्रमुख होता है तथा वह न्यायिक सदस्य के रूप में भी कार्य करता है। अध्यक्ष पद पर नियुक्त किये जाने वाले व्यक्ति के लिए उच्च न्यायालय का सेवारत अथवा सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश होना आवश्यक है।

सदस्यों का चयन:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण के सदस्यों को एक चयन समिति (भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में) द्वारा चुना जाता है। यह समिति सभी आवेदनों की समीक्षा करती है और साक्षात्कार आयोजित करती है।

न्यायिक सदस्यों के रूप में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का चयन किया जाता है।

विशेषज्ञ सदस्यों के रूप में चयनित होने क लिए आवेदकों को, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव या उससे ऊपर के पद पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत नौकरशाह; राज्य सरकार के अधीन सेवारत प्रधान सचिव पद पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत नौकरशाह तथा पर्यावरणीय मामलों से निपटने का न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। अथवा विशेषज्ञ सदस्य सदस्यों के पास संबंधित क्षेत्र में डॉक्टरेट डिग्री होना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NGT के बारे में
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. प्रमुख निर्णय

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

भारत और लक्समबर्ग के मध्य दो दशकों में पहली बैठक


संदर्भ:

हाल ही में, भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच 20 वर्षों में पहली बैठक आयोजित की गयी।

  • भारत-लक्ज़मबर्ग वर्चुअल समिट के दौरान तीन नए द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।
  • ये तीनो समझौते भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने हेतु वित्तीय क्षेत्र में किये गए।
  • लक्ज़मबर्ग, भारत का तीसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है।

हस्ताक्षरित समझौते:

  1. भारतीय स्टेट बैंक और लक्ज़मबर्ग स्टॉक एक्सचेंज के मध्य समझौता ज्ञापन
  2. इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज (इंडिया INX) और लक्ज़मबर्ग स्टॉक एक्सचेंज के मध्य समझौता ज्ञापन
  3. इन्वेस्ट इंडिया और लक्सिनोवेशन (LuxInnovation) के मध्य समझौता ज्ञापन

आपदा रोधी अवसंरचना हेतु गठबंधन (CDRI)

भारत द्वारा लक्समबर्ग को आपदा रोधी अवसंरचना हेतु गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient InfrastructureCDRI) के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया गया है।

CDRI के बारे में:

आपदा रोधी अवसंरचना हेतु गठबंधन (CDRI) की शुरुआत, सितंबर 2019 में अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित, संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्यवाही शिखर सम्मलेन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गयी थी।

  • इस मंच पर आपदा एवं जलवायु रोधी अवसंरचना के विभिन्न पहलुओं पर ज्ञान तथा जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है।
  • CDRI द्वारा देशों को उनकी जोखिम संबंधी और आर्थिक जरूरतों के अनुसार बुनियादी ढांचे के विकास के संबंध में उनकी क्षमताओं और उनके तरीकों को उन्नत करने हेतु सहायता के लिए एक प्रणाली विकसित की जाएगी।

लाभ और महत्व:

इस पहल से समाज के सभी वर्गों को लाभ प्राप्त होगा।

  • महिलाएं और बच्चे तथा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, आपदाओं से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं और ये आपदा रोधी अवसंरचनाओं में निर्माण में सुधार होने से लाभान्वित होंगे।
  • भारत में, उत्तर-पूर्वी और हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप, तटीय क्षेत्रों में चक्रवात और सुनामी और मध्य प्रायद्वीपीय क्षेत्र में सूखा पड़ने का खतरा रहता है।
  • यह उच्च आपदा जोखिम वाले सभी क्षेत्रों के लिए भी लाभान्वित करेगा।

वैश्विक गठबंधन की आवश्यकता

भारत सहित कई देशों द्वारा वर्षों में सशक्त आपदा प्रबंधन प्रणालियों को विकसित किया गया है, जो  आपदा के दौरान जान-माल की हानि को कम करने में सहायक सिद्ध हुई हैं।

  • हालांकि, आपदा के दौरान, मुख्यतः बड़े बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान के कारन व्यापक आर्थिक क्षति होती है।
  • आपदा रोधी अवसंरचना के लिए वैश्विक गठबंधन, विकासशील और विकसित देशों, छोटी और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अवसंरचना विकास के शुरुआती और अग्रिम चरणों वाले देशों तथा मध्यम या उच्च आपदा जोखिम वाले देशों की आपदा संबंधी आम समस्यों का समाधान करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लक्समबर्ग- अवस्थिति
  2. आपदा रोधी अवसंरचना हेतु गठबंधन (CDRI) के बारे में

मेंस लिंक:

आपदा रोधी अवसंरचना हेतु गठबंधन (CDRI) के लिए गठबंधन के उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

वेस्ट बैंक एवं इससे संबंधित मुद्दे


संदर्भ:

हाल ही में, माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) द्वारा इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक (West Bank) में एक इजरायली बस्ती की यात्रा की गयी। यह किसी अमेरिकी विदेश सचिव द्वारा इस विवादित स्थान पर पहली यात्रा थी। इसके अलावा, यह निवर्तमान ट्रम्प प्रशासन द्वारा प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ समन्वय व एकजुटता का आंशिक प्रदर्शन भी था।

अमेरिकी विदेश सचिव ने इस बस्ती में निर्मित संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए आयात किए जाने पर उत्पादों पर “इजरायल-निर्मित” अथवा “इजरायल के उत्पाद” के रूप में लेबल लगाए जाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। इसका उद्देश्य, इजरायल में निर्मित उत्पादों तथा कब्जे वाले क्षेत्र में निर्मित उत्पादित उत्पादों के मध्य अंतर को दूर करना था।

निहितार्थ:

अमेरिकी विदेश सचिव माइक पोम्पियो का इस विवादित स्थल का दौरा अमेरिका की पिछली नीतियों से हटकर था। अब तक अमेरिकी अधिकारियों को इन विवादित बस्तियों से दूर रखा जाता था, क्योंकि फिलिस्तीनी इसे राज्य के व्यवहारिक भविष्य के लिए एक बाधा के रूप में मानते है।

पृष्ठभूमि:

फिलिस्तीन वेस्ट बैंक के इस क्षेत्र को अपने राज्य के रूप में मानता है, तथा इसने माइक पोम्पियो पर इस क्षेत्र पर इजराइल के कब्जे को मजबूत करने का आरोप लगाया है।

‘वेस्ट बैंक’ की अवस्थिति

यह पश्चिमी एशिया के भूमध्यसागरीय तट के पास एक स्थल-रुद्ध क्षेत्र है। पूर्व में इसकी सीमा जॉर्डन से मिलती है तथा यह दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में ‘ग्रीन-लाइन’ द्वारा इज़राइल से पृथक होता है। वेस्ट बैंक के अंतर्गत पश्चिमी मृत सागर तट का काफी हिस्सा भी आता है।

इस क्षेत्र की विवादित बस्तियाँ

  1. वर्ष 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के पश्चात् वेस्ट बैंक पर जॉर्डन द्वारा कब्जा कर लिया गया था।
  2. इजरायल ने वर्ष 1967 के छह दिवसीय युद्ध के पश्चात इसे वापस छीन लिया, और तब से वेस्ट बैंक पर इसका अधिकार है।
  3. इजराइल ने वेस्ट बैंक में लगभग 130 बस्तियों का निर्माण किया है, तथा पिछले 20-25 वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में इसी तरह की कई छोटी, अनौपचारिक बस्तियां विकसित हो चुकी हैं।
  4. इस क्षेत्र में 4 लाख से अधिक इजरायल उपनिवेशी निवास करते है, उनमें से कई यहूदी धार्मिक लोग, इस भूमि पर बाइबिल के अनुसार अपने पैदाइशी हक़ का दावा करते हैं।
  5. इनके अतिरिक्त्त, इस क्षेत्र में 26 लाख फिलिस्तीनियों इस क्षेत्र में निवास करते है।

इन बस्तियों की वैधानिक स्थिति

संयुक्त राष्ट्र महासभा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अनुसार- वेस्ट बैंक में स्थित इजराइली बस्तियां, चतुर्थ जेनेवा अभिसमय (Fourth Geneva Convention) का उल्लंघन करती हैं।

  • चौथे जिनेवा अभिसमय (1949) के अनुसार- किसी क्षेत्र पर कब्ज़ा करने वाली शक्ति, अपनी नागरिक आबादी के किसी भी हिस्से को अधिकृत क्षेत्र में निर्वासित या स्थानांतरित नहीं करेगी ।
  • 1998 में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना करने वाले रोम अधिनियम (Rome Statute) के अनुसार- कब्ज़ा करने वाली शक्ति द्वारा इस तरह का कोई भी स्थानांतरण ‘युद्ध अपराध’ के समान होगा, जिसमे सैन्य बलों द्वारा अवैध और निर्दयतापूर्वक संपतियों का नुकसान व उन पर कब्ज़ा किया जाता है।

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भारत का विचार:

भारत, पारंपरिक रूप से दोराज्य समाधान (Two-state solution) में विश्वास करता है और एक संप्रभु स्वतंत्र और फिलिस्तीन राज्य की स्थापना का समर्थन करता है। हालांकि, फिलिस्तीन के लिए भारत का समर्थन, भारत-इजरायल के मध्य बढ़ते संबंधों में बाधक नहीं बना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सिक्स डे वॉर क्या है?
  2. ‘गाजापट्टी’ कहाँ अवस्थित है?
  3. जेरुशलम कहाँ अवस्थित है?
  4. फिलिस्तीनी कौन है और उनकी मांगे क्या है?
  5. इजरायल के चारो ओर के देश

मेंस लिंक:

क्या भारत फिलिस्तीन के संप्रभु स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापना का समर्थन करता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC)


(Asia-Pacific Economic Cooperation)

संदर्भ:

इस वर्ष महामारी के कारण, एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (Asia-Pacific Economic Cooperation– APEC) फोरम का आयोजन ऑनलाइन किया गया था।

एपेक (APEC):

एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC), वर्ष 1989 में स्थापित एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देशों के मध्य बढ़ती हुई परस्पर निर्भरता का लाभ उठाने के लिए एक क्षेत्रीय आर्थिक मंच है।

उद्देश्य: संतुलित, समावेशी, सतत, अभिनव और सुरक्षित विकास को बढ़ावा देकर और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण में तीव्रता लाकर क्षेत्र के लोगों को समृद्ध करना।

एपेक के कार्य:

  1. APEC एशिया-प्रशांत के सभी निवासियों के लिए वृद्धिशील अर्थव्यवस्था में भागेदारी हेतु सहायता प्रदान करने का कार्य करता है।
  2. विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से APEC द्वारा ग्रामीण समुदायों को डिजिटल कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता हैं और स्थानीय महिलाओं को बाहरी देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करने में सहायता प्रदान की जाती है।
  3. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को पहचानते हुए, APEC सदस्यों द्वारा ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और वन एवं समुद्री संसाधनों के स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु पहलें की जाती हैं।
  4. यह मंच सदस्य देशों के लिए क्षेत्र की आर्थिक भलाई हेतु महत्वपूर्ण चुनौतियों से निपटने की अनुमति प्रदान करता है। इसमें आपदा रोधी अवसंरचना का निर्माण, महामारियों से निपटने हेतु योजना निर्माण और आतंकवाद की समस्या का समाधान करना सम्मिलित हैं।

एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) के सदस्य:

APEC में 21 राष्ट्र सम्मिलित हैं: ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई दारुस्सलाम, कनाडा, चिली, चीनी जनवादी गणराज्य, हांगकांग- चीन, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया गणराज्य, मलेशिया, मेक्सिको, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, फिलीपींस, रूसी संघ, सिंगापुर, चीनी-ताइपेई, थाईलैंड, संयुक्त राज्य अमरीका, वियतनाम।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. APEC सदस्यों की भौगोलिक अवस्थिति
  2. क्षेत्रीय समूह जिनमे भारत की सदस्यता नहीं है?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

कॉर्ड ब्लड बैंकिंग


(Cord Blood Banking)

संदर्भ:

लाइफ सेल (LifeCell) द्वारा 2017 में शुरू की गयी स्टेम सेल बैंकिंग पहल के सामुदायिक कॉर्ड ब्लड बैंकिंग (Community Cord Blood Banking) द्वारा एप्लास्टिक एनीमिया (aplastic anaemia) से पीड़ित नासिक, महाराष्ट्र की एक सात वर्षीय लड़की की जान बचाने में सहायता मिली।

गर्भनाल रक्त (Cord Blood) क्या होता है?

गर्भनाल रक्त, जिसे संक्षेप में कॉर्ड ब्लड (Cord Blood) कहा जाता है, जन्म के पश्चात शिशु की गर्भनाल (Umbilical Cord) और अपरा (प्लेसेंटा- Placenta) में बचा हुआ रक्त होता है।

इसमें हेमटोपोइएटिक स्टेम सेल (Hematopoietic Stem Cells) नामक विशेष कोशिकाएं होती हैं जिनका उपयोग कुछ प्रकार के रोगों के उपचार के लिए किया जा सकता है।

‘कॉर्ड ब्लड बैंकिंग’ क्या है?

प्रसव के पश्चात शिशु की गर्भनाल और अपरा (Placenta) में बचे रक्त को भविष्य में चिकित्सकीय इस्तेमाल के लिए एकत्रित करने, क्रायोजेनिक रूप से प्रशीतित (freezing) करने और संग्रहीत करके रखने की प्रक्रिया को कॉर्ड ब्लड बैंकिंग कहा जाता है।

  • वैश्विक स्तर पर, हेमेटोलॉजिकल कैंसर और डिसऑर्डर में हेमटापोएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण हेतु स्रोत के रूप कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के उपयोग की सिफारिश की जाती है।
  • अन्य स्थितियों में, स्टेम कोशिकाओं के स्रोत के रूप में गर्भनाल रक्त के उपयोग की अभी तक अभिपुष्टि नहीं की गयी है।

कॉर्ड ब्लड’ का संभावित उपयोग

गर्भनाल (Umbilical Cord) द्रव्य में स्टेम कोशिकाएं पायी जाती है।

  • ये स्टेम सेल, कैंसर, एनीमिया जैसे रक्त विकारों और शरीर की रक्षा प्रक्रिया को बाधित करने वाले कुछ प्रतिरक्षा प्रणाली विकारों का इलाज कर सकने में सक्षम होती हैं।
  • गर्भनाल द्रव्य को एकत्रित करना आसान होता है और इसमें अस्थि मज्जा की तुलना में 10 गुना अधिक स्टेम कोशिकाएं होती हैं।
  • कॉर्ड ब्लड की स्टेम कोशिकाएं द्वारा किसी संक्रामक रोग फैलने की संभावना काफी कम होती है।

‘स्टेम सेल बैंकिंग’ सम्बंधित चिंताएँ:

  • पिछले कुछ दशकों में ‘स्टेम सेल बैंकिंग’ की मार्केटिंग का बहुत तेजी से विकास हुआ है, जबकि फिलहाल यह अपने प्रायोगिक चरणों से गुजर रहा है। किंतु, कोशिकाओं को संरक्षित करने के नाम पर कंपनियां पेरेंट्स से अत्यधिक शुल्क वसुलती हैं।
  • यहाँ चिंता का विषय यह है कि, कंपनियां केवल इमोशनल मार्केटिग के जरिए भविष्य के चिकित्सीय उपयोग का वादा करते हुए कई वर्षों तक माता-पिता को कोशिकाओं को बैंक करने के लिए मनाती हैं।
  • चूंकि, कॉर्ड ब्लड का भविष्य में इस्तेमाल का अभी तक कोई भी वैज्ञानिक आधार स्थापित नहीं है, इसलिए यह नैतिक और सामाजिक रूप से दोनों से ही चिंता का विषय है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्टेम सेल क्या हैं?
  2. स्टेम सेल के प्रकार?
  3. उनके लाभ?
  4. स्टेम सेल थेरेपी क्या है?
  5. इस संबंध में विभिन्न परियोजनाएँ।

मेंस लिंक:

कॉर्ड ब्लड क्या होता है? माता-पिता, किस प्रकार स्टेम सेल बैंकिंग कंपनियों द्वारा भावनात्मक विपणन रणनीति का शिकार हो रहे हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज

इसे केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।

  • इसके तहत 30 अप्रैल, 2021 तक 243 शहरों को सीवरों और सेप्टिक टैंकों की मशीनीकृत सफाई पर स्विच करने की चुनौती दी गयी है।
  • इस चैलेंज का उद्देश्य सीवरों और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई को रोकना और उनकी मशीन से सफाई को बढ़ावा देना है।
  • इस पहल को विश्व शौचालय दिवस (19 नवंबर) के अवसर पर शुरू किया गया है।

पृष्ठभूमि:

‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार का निषेध और उनके पुनर्वास अधिनियम’ (2013)  और माननीय उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णय स्पष्ट रूप से खतरनाक एवं हानिकारक सफाई गतिविधियों पर प्रतिबंधित लगाते हैं, अर्थात कोई भी व्यक्ति सुरक्षात्मक उपकरण धारण किए बिना किसी सेप्टिक टैंक या सीवर में प्रवेश नहीं कर सकता है और न ही ऐसी किसी प्रक्रियाओं में भाग ले सकता है।

फाइव आइज़

(Five Eyes)

यह एक खुफिया गठबंधन है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।

ये देश बहुपक्षीय यूके-यूएसए समझौते (UKUSA Agreement) के पक्षकार हैं। यूके-यूएसए समझौता, सिग्नल की खुफिया जानकारी हेतु सहयोग के लिए एक बहुपक्षीय समझौता है।

उत्पत्ति: इसकी शुरुआत वर्ष 1946 में हुई थी। इसके अंतर्गत, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम, अन्य विदेशी राष्ट्रों के संचार पर खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के लिए सहमत हुए थे। वर्ष 1948 में कनाडा तथा वर्ष 1956 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड, इस गठबंधन में सम्मिलित हुए।

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विलो वार्बलर

(Willow warbler)

  • हाल ही में, इसे देश में पहली बार केरल के तिरुवनंतपुरम में देखा गया है।
  • यह सबसे लंबे समय तक प्रवास करने वाले छोटे पक्षियों में से एक है जो पूरे उत्तरी एवं समशीतोष्ण यूरोप और पैलेआर्कटिक (Palearctic) क्षेत्र में प्रजनन करते हैं।
  • IUCN स्थिति: संकटमुक्त (Least Concern)

केरल से वार्बलर की 17 प्रजातियाँ मिलने की पुष्टि की गई है और विलो वार्बलर केरल में दर्ज की जाने वाली 18 वीं प्रजाति तथा 533 वां पक्षी है।

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विश्व के 100 सबसे शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर में भारत के दो सुपर कंप्यूटर शामिल

वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाता एटोस (Atos) ने घोषणा की है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एचपीसी-एआई) सुपरकम्‍प्‍यूटर परम सिद्धी (PARAM Siddhi) को विश्‍व के सर्वाधिक शक्तिशाली 500 नॉन-डिस्‍ट्रीब्‍यूटेड कम्‍प्‍यूटर प्रणालियों में 63वां स्‍थान प्राप्‍त हुआ है। और यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे तेज़ सुपर कंप्यूटर है।

  • PARAM Siddhi – AI सुपर कंप्यूटर को नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत निर्मित किया गया है। NSM, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा शुरू की गयी एक पहल है।
  • इसके अतिरिक्त, मौसम के पूर्वानुमान के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रत्यूष (Pratyush) को इस सूची में 78 वां स्थान दिया गया है।

वैश्विक सुपर कंप्यूटर

  • Top500 परियोजना दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपर कंप्यूटरों को ट्रैक करती है तथा वर्ष में दो बार इस सूची को प्रकाशित किया जाता है।
  • सूची के अनुसार, जापानी सुपरकंप्यूटर फुगाकू (Fugaku), 442 पेटाफ्लॉप्स और आईबीएम का समिट (IBM’s Summit), 8 पेटाफ्लॉप्स, विश्व के दो सबसे शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर हैं ।

वैश्विक एचआईवी रोकथाम गठबंधन

(Global HIV Prevention Coalition)

  • यह संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों, दानकर्ताओं (Donors), नागरिक समाज संगठनों का एक वैश्विक गठबंधन है।
  • वर्ष 2017 में इसकी स्थापना, एचआईवी रोकथाम में तेजी लाने के वैश्विक प्रयासों का समर्थन करने के उद्देश्य से की गयी थी।
  • इस वर्ष का सम्मेलन 2016 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वर्ष 2030 तक एड्स को समाप्त करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए बेहद महत्व रखता है।
  • जीपीसी के सदस्य देशों ने 2010 की तुलना में नये वयस्कों में एचआईवी संक्रमण को 2020 के अंत तक 75 प्रतिशत तक कम करने पर सहमति व्यक्त की थी।

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