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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 November

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

2. रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020

3. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS)

4. प्लाज्मा थेरेपी के अंधाधुंध प्रयोग पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का विरोध

5. अमेरिकी प्रतिबंधों के हटाए जाने पर परमाणु समझौते में वापसी: ईरान

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ब्रिक्स देशों की आतंकवाद निरोधक रणनीति

2. महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर महाजन आयोग की रिपोर्ट

3. चीन द्वारा माइक्रोवेव हथियारों के प्रयोग संबंधी रिपोर्ट्स का भारत द्वारा खंडन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. जम्मू और कश्मीर में वनवासियों का सर्वेक्षण

2. मध्य प्रदेश में ‘गौ संरक्षण कैबिनेट’ की स्थापना

3. गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (GBS)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)


(National Population Register)

संदर्भ:

भारत के महापंजीयक (Registrar General of IndiaRGI) के कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register NPR) के सूचीपत्र अथवा प्रश्नावली को ‘अंतिम रूप’ दिया जा रहा है तथा 2021 में होने वाली जनगणना के पहले चरण की संभावित तिथि के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है।

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत एक सवाल में जनगणना के पहले चरण की संभावित तिथि – मकान सूचीकरण और मकानों की गणना- राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR), जिसे 1 अप्रैल से शुरू किया जाना था, पर अद्यतन जानकारी माँगी गयी थी।

इन दोनों को अप्रैल से सितंबर के मध्य एक साथ आयोजित किया जाना था, किंतु महामारी के कारण 25 मार्च को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

यह ‘देश के सामान्य निवासियों’ की एक सूची होती है।

  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) को नागरिकता कानून, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्‍ट्रीय पहचान-पत्र जारी करना) नियम, 2003 के प्रावधानों के अनुसार स्थानीय, उप-ज़िला, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है।
  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में पंजीकरण कराना भारत के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ के लिये अनिवार्य है।

उद्देश्य: देश के प्रत्येक आम नागरिक की विस्तृत पहचान का डेटाबेस तैयार करना।

‘देश के सामान्य निवासी’ कौन है?

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘देश का सामान्य निवासी’ को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया गया है- वह व्यक्ति, जो कम-से-कम पिछले छह महीनों से किसी स्थानीय क्षेत्र में रहता है अथवा अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक के लिये किसी विशेष स्थान पर रहने का इरादा रखता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
  2. NPR डेटा के घटक।
  3. सामान्य निवासी कौन है?
  4. NPR कौन तैयार करता है?
  5. कोई व्यक्ति भारतीय नागरिकता कैसे प्राप्त कर सकता है?
  6. क्या एक भारतीय नागरिक दोहरी नागरिकता रख सकता है?

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के तहत डेटा संग्रह के लिए राज्यों द्वारा विरोध क्यों किया जा रहा है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020


(Defence Acquisition ProcedureDAP) 2020

संदर्भ:

भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा सेवा में शामिल किए जाने वाले स्वदेशी प्लेटफार्मों के पूर्णतयः विकसित होने तक, लघु अवधि के लिए प्रशिक्षण वाहनों तथा हल्के उपयोगिता हेलीकॉप्टर (Light Utility Helicopters- LUH) को लीज (lease) पर लेने का विचार किया जा रहा है।

हाल ही में जारी गयी ‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया’ (Defence Procurement Procedure DAP), 2020 में सैन्य प्लेटफार्मों को लीज पर लेने की अनुमति गी गयी है।

DAP 2020 के बारे में:

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (2020) को इसी वर्ष सितंबर में जारी किया गया था। 1 अक्टूबर से, नई नीति के द्वारा ‘रक्षा खरीद प्रक्रिया’ 2016 को समाप्त कर दिया गया।

नई नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  1. स्वदेशी फर्मों के लिए आरक्षण:

नीति में स्वदेशी फर्मों के लिए कई खरीद श्रेणियां आरक्षित की गयी हैं।

DAP 2020 में ‘भारतीय विक्रेता’ को ऐसी कंपनी के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका स्वामित्व और नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास है और जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 49 प्रतिशत से अधिक नहीं है।

  1. नई खरीद (भारत में वैश्विक-विनिर्माण) श्रेणी:

इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सहित भारत में विनिर्मित करने के आशय से की गयी विदेशी खरीद के समग्र अनुबंध मूल्य के कम से कम 50 प्रतिशत भाग का स्वदेशीकरण किए जाना अनिवार्य किया गया है।

  1. अधिकतम स्वदेशी सामग्री का उपयोग:

इसमें लाइसेंस के तहत भारत में निर्मित उपकरणों सहित हथियारों और सैन्य खरीद के उपकरणों में अथिकतम स्वदेशी सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। अधिकांश अधिग्रहण श्रेणियों में, रक्षा खरीद प्रक्रिया (DAP) 2016 की तुलना में DAP-2020 में 10 प्रतिशत अधिक स्वदेशीकरण के अनुबंध शामिल हैं।

  1. आयात प्रतिषेध सूची (Import embargo list):

विगत माह में सरकार द्वारा प्रवर्तित 101 वस्तुओं की ‘आयात प्रतिषेध सूची’ को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। (व्यापार प्रतिषेध एक सरकारी आदेश होता है, जिसमे किसी निर्दिष्ट देश से व्यापार अथवा विशिष्ट वस्तुओं के आदान-प्रदान को प्रतिबंधित किया जाता है।)

  1. ऑफसेट देयता:

सरकारी निर्णय के अनुसार- यदि अंतर–सरकारी समझौते (IGA), सरकार–से–सरकार अथवा प्रारंभिक एकल विक्रेता के माध्यम से सौदा किया जाता है, तो सरकार रक्षा उपकरणों की खरीद में ऑफसेट क्लॉज का प्रावधान नहीं रखेगी।

ऑफसेट क्लॉज़ के प्रावधान के तहत विदेशी विक्रेता के लिए ‘अनुबंध मूल्य’ के एक भाग का निवेश भारत में करना आवश्यक होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऑफसेट देयता क्या है?
  2. आधार अनुबंध मूल्य क्या है?

मेंस लिंक:

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS)


संदर्भ:

हाल ही में, लिबटेक इंडिया (LibTech India) द्वारा  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme-MGNREGS) पर एक अध्ययन किया गया था, जिसकी हाल ही में रिपोर्ट जारी की गई है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) पर निर्भर अधिकांश ग्रामीण श्रमिकों के लिए, उनका काम केवल कार्य-स्थल पर ही समाप्त नहीं होता है।
  • इनमे से कई श्रमिकों को अपनी मजदूरी प्राप्त करने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जाता है, जहाँ उन्हें भुगतान की बारंबार नामंजूरी, बायोमेट्रिक त्रुटियों और गलत जानकारी का सामना करना पड़ता है, जिसमें उन्हें किराए-भाड़े में व्यय करना पड़ता है, इसके साथ ही उनकी आय की हानि भी होती है।
  • सामान्य स्थिति में भी, ये अंतिम पड़ाव वाली चुनौतियां श्रमिकों को समय पर ढंग से अपने स्वयं की मजदूरी का उपयोग करना कठिन बना देती हैं।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान, यह स्थिति और ख़राब हो गयी क्योंकि इस दौरान परिवहन व्यवस्था बाधित होने से बैंकों के चक्कर लगाना कठिन हो गया और एक ग्रामीण बैंक में शारीरिक-दूरी बनाए रखने का तो कोई सवाल ही नहीं है।

‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) के बारे में:

मनरेगा (MGNREGA) को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में एक सामाजिक उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया था। जिसके अंतर्गत ‘काम करने के अधिकार’ (Right to Work) की प्रदान की जाती है।

इस सामाजिक उपाय और श्रम कानून का मुख्य सिद्धांत यह है कि स्थानीय सरकार को ग्रामीण भारत में न्यूनतम 100 दिनों का वैतनिक रोजगार प्रदान करना होगा ताकि ग्रामीण श्रमिकों के जीवन स्तर में वृद्धि की जा सके।

मनरेगा कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य:

  1. मनरेगा कार्यक्रम के तहत प्रत्येक परिवार के अकुशल श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों के लिये न्यूनतम 100 दिन का वैतनिक रोजगार।
  2. ग्रामीण निर्धनों की आजीविका के आधार को सशक्त करके सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करना।
  3. कुओं, तालाबों, सड़कों और नहरों जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थाई परिसंपत्ति का निर्माण करना।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले शहरी प्रवासन को कम करना।
  5. अप्रशिक्षित ग्रामीण श्रम का उपयोग करके ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण करना।

मनरेगा योजना के तहत लाभ प्राप्त करने हेतु पात्रता मानदंड:

  1. मनरेगा (MGNREGA) लाभ लेने के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए।
  2. कार्य हेतु आवेदन करने के लिए व्यक्ति की आयु 18 वर्ष अथवा इससे अधिक होनी चाहिए।
  3. आवेदक के लिए एक स्थानीय परिवार का भाग होना चाहिए (अर्थात, आवेदन स्थानीय ग्राम पंचायत के माध्यम से किया जाना चाहिए)।
  4. आवेदक को स्वेच्छा से अकुशल श्रम के लिए तैयार होना चाहिए।

योजना से संबंधित प्रमुख तथ्य:

  1. इस योजना के संपूर्ण कार्यान्वयन की निगरानी, ग्रामीण विकास मंत्रालय (MRD), भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों के साथ मिलकर की जाती है।
  2. व्यक्तिगत लाभार्थी-उन्मुख कार्यों को, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, लघु या सीमांत किसानों या भूमि सुधार लाभार्थियों तथा भारत सरकार की इंदिरा आवास योजना लाभार्थियों के कार्ड पर किया जा सकता है।
  3. आवेदन जमा करने के 15 दिनों के भीतर या जिस दिन से काम की मांग होती है, उस दिन से आवेदक को वैतनिक रोजगार प्रदान किया जाएगा।
  4. रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में, आवेदन जमा करने के पंद्रह दिनों के भीतर या काम की मांग करने की तिथि से बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार होगा।
  5. मनरेगा के कार्यों का सामाजिक लेखा-परीक्षण (Social Audit) अनिवार्य है, जिससे कार्यक्रम में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  6. मजदूरी की मांग करने वालों के लिए अपनी आवाज उठाने और शिकायतें दर्ज कराने के लिए ग्राम सभा एक प्रमुख मंच है।
  7. मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों को मंजूरी देने और उनकी प्राथमिकता तय करने का दायित्व ग्राम सभा और ग्राम पंचायत का होता है।

ग्राम पंचायत की भूमिका:

  • पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त करना
  • पंजीकरण आवेदनों का सत्यापन
  • परिवारों का पंजीकरण करना
  • जॉब कार्ड (JCs)जारी करना
  • काम के लिए आवेदन प्राप्त करना
  • काम की मांग करने वाले इन आवेदनों के लिए दिनांकित रसीदें जारी करना
  • आवेदन जमा करने के पंद्रह दिनों के भीतर या उसी तारीख से काम आवंटित करना।
  • कार्यों की पहचान और नियोजन, उनकी प्राथमिकता के क्रम के निर्धारण सहित योजना बनाना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मनरेगा के तहत ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, राज्यों, राज्य खाद्य आयोग, केंद्र की भूमिकाएँ क्या हैं?
  2. जॉब कार्ड क्या हैं, जो उन्हें जारी करता है?
  3. SEGF की स्थापना कौन करता है?
  4. वैतनिक रोजगार क्या होता है?
  5. सामाजिक लेखा परीक्षण किसके द्वारा किया जाता है?

मेंस लिंक:

मनरेगा की प्रमुख विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

प्लाज्मा थेरेपी के अंधाधुंध प्रयोग पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का विरोध


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical ResearchICMR) द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए कान्वलेसंट प्लाज़्मा थेरेपी (Convalescent Plasma Therapy-CPT) के अंधाधुंध इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी जारी की गयी है।

कारण:

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)  द्वारा कान्वलेसंट प्लाज़्मा थेरेपी (CPT) को कोविड की गंभीरता को फैलने से रोकने, अथवा कान्वलेसंट प्लाज़्मा थेरेपी प्राप्त नहीं करने वाले समूह की तुलना में, ये थेरेपी प्राप्त करने वाले समूह में होने वाली मौतों में कमी करने में अप्रभावी पाया गया है।

आगे की राह

  • कान्वलेसंट प्लाज़्मा थेरेपी (CPT) के लिए विशिष्ट मानदंडों सहित इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें संभावित प्रदाता में लक्षणों दिखने और उसके ठीक होने के 14 दिनों के बाद, वह प्लाज्मा दान कर सकता है।
  • एक संभावित प्लाज़्मा प्राप्तकर्ता में कोविड-19 शुरुआती चरण में होना चाहिए (लक्षणों की शुरुआत से तीन से सात दिन के मध्य, किंतु 10 दिनों से अधिक नहीं) और उसके शरीर में उचित परीक्षण द्वारा प्राप्त परिणामों में कोविड-19 के खिलाफ कोई IgG एंटीबॉडी नहीं पायी जानी चाहिए।

‘प्लाज्मा थेरेपी’ क्या होती है?

प्लाज्मा, रक्त का एक तरल भाग होता है। संक्रमण से ठीक होने वाले रोगियों के रक्त से निकाले गए कान्वलेसंट प्लाज़्मा (Convalescent plasma), संक्रमण के विरुद्ध एंटीबॉडीज का एक स्रोत होता है।

  • इस थेरेपी में कान्वलेसंट प्लाज़्मा का प्रयोग अन्य रोगियों को ठीक करने में किया जाता है।
  • यह थेरेपी कोविड-19 के लिए उपचार के लिए उपलब्ध विकल्पों में से एक है। इसके तहत प्लाज्मा दानकर्ताओं को कोविड-19 संक्रमण से ठीक होने संबंधित प्रलेखित मामले के रूप में दर्ज होना चाहिए और संक्रमण के अंतिम लक्षणों के समाप्त होने के बाद 28 दिनों तक स्वस्थ रहना आवश्यक होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. टीकाकरण और प्लाज्मा थेरेपी के बीच अंतर?
  2. अप्रतिरोधी प्रतिरक्षण क्या है?
  3. एंटीबॉडी और एंटीजन क्या हैं?
  4. चिकित्सा में प्रथम नोबेल पुरस्कार?
  5. रक्तदान और प्लाज्मा दान के बीच अंतर।

मेंस लिंक:

कान्वलेसन्ट प्लाज्मा थेरेपी के महत्व पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिकी प्रतिबंधों के हटाए जाने पर परमाणु समझौते में वापसी: ईरान


(Will return to nuclear deal if U.S. sanctions are lifted: Iran)

संदर्भ:

हाल ही में, ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति-निर्वाचित, जो बिडेन, पिछले दो वर्षों के दौरान ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटा लेते हैं, तो वह ‘स्वतः’ ही अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं पर वापस लौट आएगा।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को ऐतिहासिक परमाणु समझौते से एकतरफा रूप से अलग कर लिया था, और ईरान पर कठोर प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके पश्चात से, दशकों पुराने अमेरिकी-ईरानी तनाव में और अधिक वृद्धि हो गयी।

मई 2019 के बाद से, ईरान ने समझौते के तहत निर्धारित किये गए अपने अधिकांश महत्वपूर्ण दायित्वों को धीरे-धीरे निलंबित कर दिया है।

ईरान के लिए आगे की राह

हालांकि, डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने और इसे विश्व स्तर पर अलग-थलग करने का प्रयास किया गया था, नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति ‘जो बिडेन’ द्वारा इस्लामी गणतंत्र को ‘दोनों देशों के मध्य राजनयिक संबंधो की बहाली के लिए विश्वसनीय मार्ग’ की पेशकश करने का प्रस्ताव दिया है।

इसके अलावा, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और इसके सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में संकल्प 2231 (Resolution 2231) को लागू करने के लिए भी बाध्य है।

  • 20 जुलाई 2015 को सुरक्षा परिषद द्वारा सर्वसम्मति से संयुक्त व्यापक कार्य योजना (Joint Comprehensive Plan of ActionJCPOA) के समर्थन में संकल्प 2231 (2015) को पारित किया गया था।
  • संकल्प 2231 में, ईरानी परमाणु मुद्दे पर सुरक्षा परिषद द्वारा लागू किए गए पिछले प्रस्तावों के प्रावधानों को समाप्त करने का प्रावधान किया गया है, और इसमें, बिना किसी अपवाद के सभी देशों पर लागू होने वाले विशिष्ट प्रतिबंधों की स्थापना की गयी है।

ईरान परमाणु समझौता क्या था?

ईरान परमाणु समझौता, 2015 में ईरान तथा विश्व के छह देशों– अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के बीच सम्पन्न हुआ था। इस समझौते में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने पर सहमति व्यक्त की।

  • संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत तेहरान ने मध्यम संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडारण को पूर्ण रूप से समाप्त करने, निम्न-संवर्द्धित यूरेनियम के भण्डारण को 98% तक कम करने तथा आगामी 13 वर्षों में अपने गैस सेंट्रीफ्यूजों की संख्या को दो-तिहाई तक कम करने पर सहमति व्यक्त की।
  • इस समझौते के माध्यम से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाये गए प्रतिबंधों की निगरानी के लिए कठोर तंत्रों की स्थापना की गई थी।

अमेरिका द्वारा इस समझौते से अलग होने के कारण

ट्रम्प तथा इस समझौते के विरोधियों का कहना है कि ‘ईरान परमाणु समझौता’ दोषपूर्ण है क्योंकि इससे ईरान को अरबों डॉलर की सहायता तक पहुंच प्राप्त होती है, लेकिन यह हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को ईरान द्वारा समर्थन देने पर प्रतिबंध नहीं लगाता है। इन संगठनो को अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।

अमेरिका का यह भी कहना है कि, यह समझौता ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर अंकुश नहीं लगाता है तथा यह मात्र 2030 तक लागू होगा। इसका कहना है कि ईरान ने अतीत में अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में झूठ बोला था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. JCPOA क्या है? हस्ताक्षरकर्ता
  2. ईरान और उसके पड़ोसी।
  3. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  4. IAEA के सदस्य
  5. IAEA के कार्यक्रम।
  6. बोर्ड ऑफ गवर्नर- रचना, मतदान और कार्य
  7. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA)  पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

ब्रिक्स देशों की आतंकवाद निरोधक रणनीति


(BRICS counter-terror strategy)

संदर्भ:

हाल ही में, ब्रिक्स समूह द्वारा सदस्य देशों के मध्य द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए आतंकवादी संबंधी खतरों से प्रभावी तरीके से निपटने हेतु आतंकवाद निरोधक रणनीति जारी की गयी है।

नई आतंकवाद रोधी रणनीति को, समूह के हाल ही में आभासी प्रारूप में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाया गया था।

रणनीति का अवलोकन:

  • इस रणनीति का उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों के सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन अधिकारियों के मध्य व्यावहारिक सहयोग में सुधार करना है ताकि समय पर और सही जानकारी साझा करके आतंकवाद को रोका जा सके।
  • रणनीति में आतंकवादी समूहों, संस्थाओं और संबंधित व्यक्तियों को प्राप्त हो रही सहायता को समाप्त किये जाने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा, इसके लिए उनके वित्तीय और भौतिक संसाधनों पर रोक लगाई जाएगी।
  • ब्रिक्स देशों द्वारा आतंकवाद में सहायक ‘अतिवादी बयानों’ से निपटने हेतु संकल्प लिया गया और आतंकी समूहों द्वारा, इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग, भर्ती और कट्टरता फ़ैलाने पर रोक लगाने का प्रण किया गया।
  • इस रणनीति का कार्यान्वयन ब्रिक्स आतंकवाद-निरोधी कार्य समूह (counter-terrorism working group CTWG) द्वारा किया जाएगा और ब्रिक्स के उच्च सुरक्षा प्रतिनिधियों को इस रणनीति के कार्यान्वयन की समीक्षा का दायित्व सौंपा जाएगा।

महत्व:

इन प्रयासों से ‘आतंकवाद के आगे भौगोलिक विस्तार’ पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और संघर्ष क्षेत्रों से अपने मूल देश अथवा किसी तीसरे देश में लौटने वाले आतंकवादियों से होने वाले संभावित  खतरों से भी निपटा जा सकेगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर महाजन आयोग की रिपोर्ट


संदर्भ:

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार द्वारा महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर, हाल ही में, एक विवादित बयान दिया गया है।

Genesis of the dispute:

विवाद की उत्पत्ति:

पूर्ववर्ती बॉम्बे प्रेसीडेंसी एक एक बहुभाषी प्रांत था, जिसमे वर्तमान कर्नाटक राज्य के बीजापुर, बेलागवी, धारवाड़ और उत्तर-कन्नड़ जिले सम्मिलित थे। बॉम्बे प्रेसीडेंसी में मराठी, गुजराती और कन्नड भाषाएं बोलने वाले लोग रहा करते थे।

  • वर्ष 1948 में, बेलगाम नगरीय निकाय ने अनुरोध किया था कि मुख्य रूप से मराठी भाषी जनसँख्या वाले जिले को प्रस्तावित महाराष्ट्र राज्य में शामिल कर दिया जाए।
  • हालाँकि, भाषाई और प्रशासनिक आधार पर राज्यों को विभाजित करने वाले राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत बेलगाम और बॉम्बे प्रेसीडेंसी के 10 अन्य तालुकों को तत्कालीन मैसूर राज्य (जिसे 1973 में कर्नाटक का नाम दिया गया था) का एक हिस्सा बना दिया गया।

महाजन आयोग

राज्य पुनर्गठन आयोग द्वारा, राज्यों का सीमांकन करते हुए, 50 प्रतिशत से अधिक कन्नड़ भाषी आबादी वाले तालुकों को मैसूर राज्य में शामिल कर दिया गया।

  • इस क्षेत्र के मैसूर में शामिल किए जाने का काफी विरोध किया गया। विरोध करने वालों का कहना था, कि इस क्षेत्र में मराठी भाषियों की संख्या 1956 में यहाँ रहने वाले कन्नड़ भाषियों से अधिक हो गयी है।
  • सितंबर 1957 में, बॉम्बे सरकार द्वारा इनकी मांग को आवाज दी गयी और केंद्र के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप अक्टूबर 1966 में पूर्व मुख्य न्यायाधीश मेहर चंद महाजन की अध्यक्षता में महाजन आयोग का गठन किया गया।

महाजन आयोग की सिफारिश:

अगस्त 1967 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश के अनुसार- 264 गांवों को महाराष्ट्र (जिसका 1960 में गठन किया गया) में स्थानांतरित किया जाएगा तथा  बेलगाम और 247 गाँव कर्नाटक में रखे जाएंगे।

बाद का घटनाक्रम:

  • महाराष्ट्र द्वारा इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया गया तथा इसे पक्षपाती और अतार्किक बताते हुए इसकी समीक्षा किए जाने की मांग की गई।
  • कर्नाटक ने इस रिपोर्ट का स्वागत किया और इसके कार्यान्वयन हेतु दबाव देता रहा है, हालांकि इसे केंद्र द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है।
  • महाराष्ट्र, बेलगाम शहर, जो वर्तमान में कर्नाटक का हिस्सा है, सहित सीमा पर स्थित 814 से अधिक गाँवों पर दावा करता है।
  • महाराष्ट्र की सरकारों द्वारा इन क्षेत्रों को राज्य में सम्मिलित किये जाने की मांग की जाती रही है- जबकि कर्नाटक के द्वारा इन दावों का विरोध किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. महाजन आयोग के बारे में
  2. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के बारे में।

मेंस लिंक:

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

चीन द्वारा माइक्रोवेव हथियारों के प्रयोग संबंधी रिपोर्ट्स का भारत द्वारा खंडन


संदर्भ:

भारतीय सेना ने उन ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है जिनमें दावा किया गया था कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने लद्दाख में माइक्रोवेव हथियारों का इस्तेमाल किया था।

भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन रिपोर्ट्स को सीमा पार से मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन का हिस्सा करार दिया है, और इसे आधारहीन तथा फर्जी खबर बताया है।

पृष्ठभूमि:

बीजिंग और नई दिल्ली के मध्य, मई के बाद से, लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध जारी है।

माइक्रोवेव हथियार’ क्या होते हैं?

‘माइक्रोवेव हथियारों’ (Microwave Weapons) को प्रत्यक्ष ऊर्जा हथियारों (Direct Energy Weapons) का एक प्रकार माना जाता है, जिनके द्वारा किसी लक्ष्य पर ध्वनि, लेजर या माइक्रोवेव के रूप में अत्यधिक केंद्रित ऊर्जा से हमला किया जाता है।

“माइक्रोवेव हथियार” रखने वाले देश

माना जाता है कि कुछ देशों द्वारा मानव और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, दोनों को लक्षित करने के उद्देश्य से इन हथियारों को विकसित किया गया है।

  • चीन द्वारा पहली बार 2014 में एक एयर शो के दौरान पॉली डब्ल्यूबी –1 (Poly WB-1) नामक “माइक्रोवेव हथियार” का प्रदर्शन किया गया था।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा एक प्रोटोटाइप माइक्रोवेव-शैली का हथियार विकसित किया गया है, जिसे ‘एक्टिव डिनाइअल सिस्टम’ का नाम दिया गया है।

अतीत में ‘माइक्रोवेव हथियारों’ का प्रयोग

अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में इस तरह के एक हथियार को तैनात किया गया था, किंतु किसी मानव लक्ष्य के खिलाफ इस्तेमाल किए बिना ही इसे वापस ले लिया।

  • 2017 के उत्तरार्ध में आयी कुछ रिपोर्ट्स में, पिछले साल हवाना, क्यूबा के अमेरिकी दूतावास में कर्मचारियों पर एक गुप्त ध्वनिक हथियार (covert sonic weapon) से संभावित हमला किए जाने का जिक्र किया गया था।
  • इसके बाद, 2018 में, चीन के ग्वांगझू में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों ने 2017 में इसी प्रकार के एक हमले की शिकायत की थी।

प्रीलिम्स और मेन्स लिंक:

‘माइक्रोवेव हथियार’ क्या होते हैं? इनके उपयोग से संबंधित आशंकाओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


जम्मू और कश्मीर में वनवासियों का सर्वेक्षण

जम्मू और कश्मीर प्रशासन द्वारा वनवासियों को वनाधिकार प्रदान किये हेतु ‘वन अधिकार अधिनियम’ 2006 के को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गयी है।

पृष्ठभूमि: वन अधिकार अधिनियम’ 2006 में देश भर के वनवासियों को वनाधिकार प्रदान प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम 31 अक्टूबर, 2019 तक जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं था।

मध्य प्रदेश में गौ संरक्षण कैबिनेटकी स्थापना

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गोधन संरक्षण व संवर्धन हेतु गौ कैबिनेट’ स्थापित करने का निर्णय लिया है।

  • पशुपालन, वन, पंचायत व ग्रामीण विकास, राजस्व, गृह और किसान कल्याण विभाग गौ कैबिनेट में शामिल होंगे।
  • पहली बैठक 22 नवंबर को गोपाष्टमी पर दोपहर 12 बजे गौ अभ्यारण, आगर मालवा में आयोजित की जाएगी।

गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (GBS)

(Guillain Barre Syndrome)

संदर्भ:

एक दुर्लभ जटिल मामले में, कोविड -19 से संक्रमित कुछ रोगियों को गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (Guillain Barre Syndrome- GBS) से पीड़ित पाया गया है। भारत में अगस्त से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।

गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (GBS) क्या है?

  • यह एक बहुत ही दुर्लभ स्वप्रतिरक्षी विकार (Autoimmune Disorder) है।
  • इसमें रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली कोरोनोवायरस को नष्ट करने के प्रयास में गलती से परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) पर हमला करना शुरू कर देती है।
  • परिधीय तंत्रिका तंत्र तंत्रिकाओं का एक नेटवर्क होता है जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी द्वारा शरीर के विभिन्न हिस्सों से संबद्ध होता है। इस पर हमला करने से शरीर के अंगों की कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (GBS), बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण के कारण होता है।
  • सिंड्रोम से प्रभावित होने के प्रारम्भिक लक्षणों में त्वचा में झुनझुनी या खुजली की अनुभूति होती है, इसके बाद मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द और सुन्न होने लगती है।

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