HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
भारत में, निम्नलिखित में से किन्हें वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) माना जाता है।
- सोशल वेंचर कैपिटल फंड
- रियल एस्टेट फंड
- हेज फंड
- प्राइवेट इक्विटी (PE) फंड
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund: AIF) एक ऐसे निवेश को संदर्भित करता है जो पारंपरिक निवेश जैसे स्टॉक, ऋण प्रतिभूतियों, आदि से भिन्न होता है।
AIF को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के विनियमन अधिनियम, 2012 के विनियमन 2 (1) (बी) के तहत वर्णित किया गया है। AIF को एक कंपनी या एक कॉर्पोरेट निकाय या एक ट्रस्ट या सीमित देयता भागीदारी (Limited Liability Partnership: LLP) के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
आमतौर पर, उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों और संस्थान वैकल्पिक निवेश कोष में निवेश करते हैं क्योंकि इसमें म्यूचुअल फंड के विपरीत उच्च निवेश राशि की आवश्यकता होती है।
Incorrect
उत्तर: d)
वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund: AIF) एक ऐसे निवेश को संदर्भित करता है जो पारंपरिक निवेश जैसे स्टॉक, ऋण प्रतिभूतियों, आदि से भिन्न होता है।
AIF को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के विनियमन अधिनियम, 2012 के विनियमन 2 (1) (बी) के तहत वर्णित किया गया है। AIF को एक कंपनी या एक कॉर्पोरेट निकाय या एक ट्रस्ट या सीमित देयता भागीदारी (Limited Liability Partnership: LLP) के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
आमतौर पर, उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों और संस्थान वैकल्पिक निवेश कोष में निवेश करते हैं क्योंकि इसमें म्यूचुअल फंड के विपरीत उच्च निवेश राशि की आवश्यकता होती है।
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Question 2 of 5
2. Question
जीडीपी अपस्फीतिकारक (GDP deflator) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- जीडीपी अपस्फीतिकारक मूल रूप से मुद्रास्फीति का मापक है।
- यह इसे प्रदर्शित करने में मदद करता है कि उत्पादन में वृद्धि के बजाय सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि किस हद तक अधिक हुई है।
- यह केवल उन वस्तुओं और सेवाओं को शामिल करता है जिनका प्रत्यक्षत परिवारों द्वारा उपभोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
जीडीपी अपस्फीतिकारक (GDP deflator), जिसे निहित मूल्य अपस्फीतिकारक भी कहा जाता है, मुद्रास्फीति का मापक है। यह किसी अर्थव्यवस्था द्वारा किसी विशेष वर्ष में प्रचलित कीमतों पर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं तथा आधार वर्ष के दौरान प्रचलित उन्हीं वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों का अनुपात होता है।
यह अनुपात यह इसे प्रदर्शित करने में मदद करता है कि उत्पादन में वृद्धि के बजाय सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि किस हद तक अधिक हुई है।
चूंकि अपस्फीतिकारक अर्थव्यवस्था में थोक या उपभोक्ता मूल्य सूचकांकों के लिए सीमित कमोडिटी बास्केट के विपरीत उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की पूरी श्रृंखला को कवर करता है। अत: इसे मुद्रास्फीति के अधिक व्यापक मापक के रूप में माना जाता है।
उपभोग के पैटर्न में बदलाव या वस्तुएं और सेवाएँ स्वत जीडीपी अपस्फीतिकारक में परिलक्षित होती है। अत: यह जीडीपी अपस्फीतिक को अर्थव्यवस्था की खपत या निवेश पैटर्न में बदलाव को संतुलित करने में मदद करता है। प्राय:, जीडीपी अपस्फीतिकारक का रुझान CPI के समान होगा।
Incorrect
उत्तर: b)
जीडीपी अपस्फीतिकारक (GDP deflator), जिसे निहित मूल्य अपस्फीतिकारक भी कहा जाता है, मुद्रास्फीति का मापक है। यह किसी अर्थव्यवस्था द्वारा किसी विशेष वर्ष में प्रचलित कीमतों पर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं तथा आधार वर्ष के दौरान प्रचलित उन्हीं वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों का अनुपात होता है।
यह अनुपात यह इसे प्रदर्शित करने में मदद करता है कि उत्पादन में वृद्धि के बजाय सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि किस हद तक अधिक हुई है।
चूंकि अपस्फीतिकारक अर्थव्यवस्था में थोक या उपभोक्ता मूल्य सूचकांकों के लिए सीमित कमोडिटी बास्केट के विपरीत उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की पूरी श्रृंखला को कवर करता है। अत: इसे मुद्रास्फीति के अधिक व्यापक मापक के रूप में माना जाता है।
उपभोग के पैटर्न में बदलाव या वस्तुएं और सेवाएँ स्वत जीडीपी अपस्फीतिकारक में परिलक्षित होती है। अत: यह जीडीपी अपस्फीतिक को अर्थव्यवस्था की खपत या निवेश पैटर्न में बदलाव को संतुलित करने में मदद करता है। प्राय:, जीडीपी अपस्फीतिकारक का रुझान CPI के समान होगा।
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Question 3 of 5
3. Question
मुद्रा जमा अनुपात (Currency Deposit Ratio: CDR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- CDR की गणना केवल सावधि जमा के संबंध में की जाती है।
- यह तरलता के लिए लोगों की वरीयता को दर्शाता है।
- यह आम तौर पर त्योहारों के मौसम के दौरान बढ़ जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: b)
मुद्रा जमा अनुपात (Currency Deposit Ratio: CDR) मुद्रा के रूप में जनता द्वारा रखे गए धन का अनुपात होता है जो वे बैंक जमाओं के रूप में रखते हैं। cdr = CU / DD। यदि किसी व्यक्ति को 1 रुपया मिलता है, तो वह अपने बैंक खाते में 1 / (1 + cdr) जमा करेगा और नकद रूप में cdr / (1 + cdr) रखेगा। यह तरलता के लिए लोगों की वरीयता को दर्शाता है। यह एक विशुद्ध रूप से व्यवहार का पैरामीटर है, जो अन्य बातों के अलावा, व्यय के मौसमी पैटर्न पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, त्योहारों के मौसम के दौरान सीडीआर बढ़ जाता है क्योंकि लोग ऐसी अवधियों के दौरान अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए जमा राशि को नकद रूप में बदल देते हैं।
Incorrect
उत्तर: b)
मुद्रा जमा अनुपात (Currency Deposit Ratio: CDR) मुद्रा के रूप में जनता द्वारा रखे गए धन का अनुपात होता है जो वे बैंक जमाओं के रूप में रखते हैं। cdr = CU / DD। यदि किसी व्यक्ति को 1 रुपया मिलता है, तो वह अपने बैंक खाते में 1 / (1 + cdr) जमा करेगा और नकद रूप में cdr / (1 + cdr) रखेगा। यह तरलता के लिए लोगों की वरीयता को दर्शाता है। यह एक विशुद्ध रूप से व्यवहार का पैरामीटर है, जो अन्य बातों के अलावा, व्यय के मौसमी पैटर्न पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, त्योहारों के मौसम के दौरान सीडीआर बढ़ जाता है क्योंकि लोग ऐसी अवधियों के दौरान अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए जमा राशि को नकद रूप में बदल देते हैं।
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Question 4 of 5
4. Question
सरकार की राजस्व प्राप्ति और पूंजी प्राप्तियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- राजस्व प्राप्तियों के विपरीत पूंजीगत प्राप्तियां सदैव ऋण भार उत्पन्न करने वाली होती हैं।
- राजस्व प्राप्तियों के विपरीत पूंजी प्राप्तियां अमोचनीय होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सहीं नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
राजस्व प्राप्तियों और पूंजी प्राप्तियों के बीच मुख्य अंतर यह है कि राजस्व प्राप्तियों के मामले में, सरकार पर भविष्य में इसे वापस लौटने का कोई दायित्व नहीं होता है, अर्थात, ये अमोचनीय होती हैं। लेकिन पूंजी प्राप्तियों के मामले ब्याज सहित राशि वापस लौटने का दायित्व होता है।
पूंजी प्राप्तियां ऋण सृजन या गैर-ऋण सृजन हो सकती हैं। ऋण सृजक प्राप्तियों के उदाहरण हैं- घरेलू स्तर पर सरकार द्वारा प्राप्त शुद्ध उधार, विदेशी सरकारों से प्राप्त ऋण, RBI से उधार प्राप्त करना। गैर-ऋण सृजक पूंजी प्राप्तियों के उदाहरण हैं – ऋणों की वसूली, सार्वजनिक उद्यमों की बिक्री से प्राप्त आय (अर्थात, विनिवेश), आदि। ये ऋण भार उत्पन्न नहीं करती हैं।
Incorrect
उत्तर: c)
राजस्व प्राप्तियों और पूंजी प्राप्तियों के बीच मुख्य अंतर यह है कि राजस्व प्राप्तियों के मामले में, सरकार पर भविष्य में इसे वापस लौटने का कोई दायित्व नहीं होता है, अर्थात, ये अमोचनीय होती हैं। लेकिन पूंजी प्राप्तियों के मामले ब्याज सहित राशि वापस लौटने का दायित्व होता है।
पूंजी प्राप्तियां ऋण सृजन या गैर-ऋण सृजन हो सकती हैं। ऋण सृजक प्राप्तियों के उदाहरण हैं- घरेलू स्तर पर सरकार द्वारा प्राप्त शुद्ध उधार, विदेशी सरकारों से प्राप्त ऋण, RBI से उधार प्राप्त करना। गैर-ऋण सृजक पूंजी प्राप्तियों के उदाहरण हैं – ऋणों की वसूली, सार्वजनिक उद्यमों की बिक्री से प्राप्त आय (अर्थात, विनिवेश), आदि। ये ऋण भार उत्पन्न नहीं करती हैं।
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Question 5 of 5
5. Question
नगद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio: CRR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह भारत में एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के कुल निवल मांग और मीयादी देयता (NDTL) का अंश होता है जिसे RBI के पास नकद जमा के रूप में बनाए रखना होता है।
- यह देश के सभी बैंकों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे किसी भी बैंक की वित्तीय स्थिति या आकार कुछ भी हो।
- बैंकों को सीआरआर के तहत आवश्यक नकदी जमा करने पर ब्याज का भुगतान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
नगद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio: CRR) का तात्पर्य भारत में एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के कुल निवल मांग और मीयादी देयता (NDTL) के अंश से है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास नकद जमा के रूप में बनाए रखना होता है। यह देश के सभी बैंकों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे किसी भी बैंक की वित्तीय स्थिति या आकार कुछ भी हो। इसके विपरीत, कुछ देश उदाहरण के लिए चीन ’बड़े’ और ‘छोटे’ बैंकों के लिए अलग-अलग आरक्षित आवश्यकताओं को निर्धारित करता है।
RBI अधिनियम 1934 के अनुसार, सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं) को RBI के पास सीआरआर आवश्यकता के लिए पाक्षिक आधार पर नकदी संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता हैं ।
वर्तमान में, बैंकों को सीआरआर के तहत आवश्यक नकदी जमा करने पर कोई ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है। यदि कोई बैंक अपनी आवश्यक आरक्षित आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहता है, तो आरबीआई को उस पर दंडात्मक ब्याज दर के रूप में जुर्माना लगाने का अधिकार है।
Incorrect
उत्तर: b)
नगद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio: CRR) का तात्पर्य भारत में एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के कुल निवल मांग और मीयादी देयता (NDTL) के अंश से है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास नकद जमा के रूप में बनाए रखना होता है। यह देश के सभी बैंकों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे किसी भी बैंक की वित्तीय स्थिति या आकार कुछ भी हो। इसके विपरीत, कुछ देश उदाहरण के लिए चीन ’बड़े’ और ‘छोटे’ बैंकों के लिए अलग-अलग आरक्षित आवश्यकताओं को निर्धारित करता है।
RBI अधिनियम 1934 के अनुसार, सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं) को RBI के पास सीआरआर आवश्यकता के लिए पाक्षिक आधार पर नकदी संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता हैं ।
वर्तमान में, बैंकों को सीआरआर के तहत आवश्यक नकदी जमा करने पर कोई ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है। यदि कोई बैंक अपनी आवश्यक आरक्षित आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहता है, तो आरबीआई को उस पर दंडात्मक ब्याज दर के रूप में जुर्माना लगाने का अधिकार है।









