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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 November

 

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. ‘अदालत की अवमानना’ और इसकी कार्यवाही हेतु महान्यायवादी की सहमति

2. निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट

3. RCEP वॉकआउट के बावजूद भारत-आसियान में मध्य व्यापार विस्तार

4. चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा

5. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी

सामान्य अध्ययन-III

1. पनडुब्बियों की कलवरी श्रेणी

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चीन की अध्यक्षता में दक्षिण एशियाई साझेदारों (आभासी) सम्मेलन

2. चीन द्वारा अरुणाचल सीमा तक रेल लाइन पर काम का आरंभ

3. गृह मंत्रालय द्वारा FCRA नियमों में संशोधन

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

अदालत की अवमाननाऔर इसकी कार्यवाही हेतु महान्यायवादी की सहमति


संदर्भ:

हाल ही में, महान्यायवादी (Attorney General) के के वेणुगोपाल द्वारा स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी सहमति दे दी गयी है।

कुणाल कामरा ने टेलीविजन एंकर अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्वीट्स के माध्यम से तथाकथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

‘अदालत की अवमानना’ क्या है?

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) के अनुसार, अदालत की अवमानना दो प्रकार की हो सकती है: सिविल अवमानना तथा आपराधिक अवमानना।

सिविल अवमानना: सिविल अवमानना को किसी भी फैसले, आदेश, दिशा, निर्देश, रिट या अदालत की अन्य प्रक्रिया अथवा अदालत में दिए गए वचन के जानबूझ कर किये गए उल्लंघन के रूप में परिभाषित किया गया है।

आपराधिक अवमानना: आपराधिक अवमानना ​​से किसी भी ऐसे विषय (मौखिक या लिखित शब्दों से, या संकेतों से, या दृश्य प्रतिनिधित्व द्वारा, अथवा किसी अन्य प्रकार से) के प्रकाशन अथवा किसी भी ऐसे कार्य का करना अभिप्रेत है;

  1. जो किसी अदालत की निंदा करता है अथवा जिसकी प्रवृत्ति अदालत की निंदा करने की है, या जो अदालत के प्राधिकार को अवनत करने या जिसकी प्रवृत्ति उसे अवनत करने की है; अथवा
  2. जो किसी नयायिक कार्यवाही के सम्यक अनुक्रम पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, अथवा उसमे हस्तक्षेप करता है या जिसकी प्रवृत्ति उसमे हस्तक्षेप करने की है; अथवा
  3. जो न्याय प्रशासन में किसी अन्य रीति से हस्तक्षेप करता है या जिसकी प्रवृत्ति उसमे हस्तक्षेप करने की है अथवा जो उसमे बाधा डालता है या जिसकी प्रवृत्ति उसमे बाधा डालने की है।

अदालत की अवमानना कार्यवाही शुरू करने हेतु महान्यायवादी की सहमति की आवश्यकता

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के प्रावधानों के अनुसार: अधिनियम की  धारा 14 में निर्दिष्ट अवमानना ​​से भिन्न ‘आपराधिक अवमानना ​​के मामले में, उच्चत्तम न्यायलय या उच्च न्यायलय या स्वप्रेरणा से या- (a) महाधिवक्ता के, अथवा (b) महाधिवक्ता की लिखित सम्मति से किसी अन्य व्यक्ति के समावेदन पर कार्यवाही कर सकेगा।

इस धारा में ‘महाधिवक्ता’ पद से अभिप्रेत है-

  1. उच्चत्तम न्यायालय के संबंध में महान्यायवादी; तथा
  2. उच्च न्यायालय के सम्बन्ध में राज्य का महाधिवक्ता।

अदालत की अवमानना के मामले में सजा

अदालत की अवमानना मामले में दोषसिद्ध होने पर छह महीने तक साधारण कारावास, अथवा दो हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है। आरोपी द्वारा माफी मांगने और इससे अदालत के संतुष्ट होने पर, आरोपी की सजा माफ़ की जा सकती है और उसे मुक्त किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवमानना के संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायलय की शक्तियां
  2. न्यायलय की अवमानना (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा किये गए परिवर्तन
  3. सिविल बनाम आपराधिक अवमानना
  4. अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार
  5. अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 10 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

भारत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामलों को किस प्रकार हल किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट


(Pneumonia and Diarrhoea Progress Report)

संदर्भ:

निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट, प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय वैक्सीन एक्सेस सेंटर (International Vaccine Access Centre IVAC) द्वारा जारी की जाती है।

इस वर्ष की रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  • निमोनिया और डायरिया के कारण होने वाली बच्चों की मौतों को रोकने के लिए भारत ने अपने टीकाकरण कवरेज में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
  • हालाँकि, कुल मिलाकर विश्व की स्वास्थ्य प्रणालियां बच्चों के लिए बीमारी की रोकथाम और उपचार सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराने में पूर्णतयः सफल नहीं हो पा रही हैं, फिर भी भारत ने रिपोर्ट में कवरेज संबंधी निगरानी किये जाने वाले पाँच टीकों में से तीन टीकों के लिए 90% कवरेज का वैश्विक लक्ष्य हासिल कर लिया है।
  • रिपोर्ट में कवरेज निगरानी किये जाने वाले टीके है: डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी) और टेटनस (DPT) वैक्सीन, खसरा-रोधी वैक्सीन की पहली खुराक, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (Pneumococcal Conjugate Vaccine- PCV) और रोटावायरस वैक्सीन।
  • भारत ने अभूतपूर्व तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर रोटावायरस वैक्सीन का ‘100-दिवसीय एजेंडा’ भी पूरा कर लिया है। यह महत्वपूर्ण वैक्सीन विस्तार, रोटावायरस डायरिया के जानलेवा मामलों में प्रतिवर्ष 26 मिलियन बच्चों को बचाने में मदद करेगा।
  • हालांकि, भारत उपचार के लिए निर्धारित सभी चार लक्ष्यों– स्तनपान एवं टीकाकरण, देखभाल की मांग और एंटीबायोटिक दवाओं, ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन (ORS) (ओआरएस), और जिंक अनुपूरण, को पूरा करने में विफल रहा है।

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पृष्ठभूमि- निमोनिया और डायरिया

निमोनिया और डायरिया (Pneumonia and Diarrhoea) विश्व में नवजात शिशुओं की मौतों का सबसे बड़ा कारण है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों की प्रतिवर्ष होने वाली कुल मौतों में से 29 प्रतिशत अथवा 2 मिलियन से अधिक मौतें इन रोगों के कारण होती हैं। फिर भी, इन रोगों की रोकथाम और उपचार का स्तर विश्व में, विशेषकर गरीब आबादी के मध्य, काफी कम है।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. निमोनिया- प्रकार, कारण और लक्षण
  2. एंटीजन बनाम एंटीबाडी
  3. टीका कैसे काम करता है?
  4. टीकों के प्रकार
  5. DGCI के बारे में
  6. भारत में वैक्सीन की मंजूरी के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया
  7. न्यूमोकोकल पॉलीसेकेराइड कंजुगेट वैक्सीन के बारे में

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

RCEP वॉकआउट के बावजूद भारत-आसियान में मध्य व्यापार विस्तार


संदर्भ:

हाल ही में, भारत और आसियान देशों द्वारा कहा गया है, कि वे भारत के 15देशों की क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (Regional Comprehensive Economic Partnership- RCEP) समझौते से बाहर निकल जाने के बाद भी परस्पर व्यापार में वृद्धि हेतु अन्य रास्तों की तलाश करेंगे।

RCEP क्या है?

  1. क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) मूल रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 16 देशों के मध्य किया जाने वाला एक मुक्त व्यापार समझौता है।
  2. हालाँकि, अब चीन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान और आसियान (ASEAN) के दस देशों के मध्य क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते पर 15 नवंबर को हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।
  3. इस समझौते में सदस्य देशों के मध्य वस्तुओं और सेवाओं के स्वतंत्र प्रवाह हेतु करों व शुल्कों को समाप्त किए जाना प्रस्तावित है

भारत और RCEP

भारत के लिए क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) वार्ता में पुनः सम्मिलित होने को एक नया प्रस्ताव दिया गया था। भारत के लिए इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के लिए 15 मई तक की समय सीमा दी गयी थी।

भारत द्वारा RCEP पर हस्ताक्षर नहीं करने के कारण

  1. भारत का RCEP राष्ट्रों के साथ व्यापार घाटा $ 105 बिलियन का है, जिसमें अकेले चीन के साथ 54 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा है। इस समझौते में प्रस्तावित छूटों से भारत के व्यापार घाटे में वृद्धि होगी।
  2. इसके अतिरिक्त, चीन निर्मित वस्तुओं और न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पादों की भारतीय बाजारों में भरमार होने की संभावना भी चिंता का विषय है।
  3. यह व्यापार समझौते, भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के लिए हानिकारक समझा जा रहा था।
  4. भारत, गैर-साझेदार देशों द्वारा व्यापार समझौते का दुरुपयोग रोकने के लिए उत्पादों की उत्पत्ति संबंधी नियमों को सम्मिलित किये जाने, तथा आयातित वस्तुओं की लहर को रोकने के लिए स्वतः सक्रिय हो जाने वाली प्रणाली की मांग कर रहा था।
  5. समझौते में अन्य प्रमुख क्षेत्रों के साथ ई-कॉमर्स और व्यापार सुधारात्मक उपायों पर भी संतोषजनक समाधान नहीं खोजा जा सका था।
  6. भारत ने अन्य देशों के उत्पादों पर शुल्क कम करने तथा समाप्त करने पर अपनी चिंता व्यक्त की है, क्योंकि यह भारत के कृषि उत्पादों और औद्योगिक क्षेत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले थे।
  7. समझौते में 2014 को टैरिफ कटौती का आधार वर्ष निश्चित किया गया था, भारत इसके लिए तैयार नहीं था।

RCEP

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RCEP – संरचना और उद्देश्य
  2. आसियान देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते
  3. भारत का डेयरी क्षेत्र
  4. आसियान देशों की भौगोलिक अवस्थिति

मेंस लिंक:

भारत द्वारा क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) में सम्मिलित नहीं होने संबंधी कारणों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा


(What is the Sino-British Joint Declaration?)

संदर्भ:

हाल ही में, बीजिंग द्वारा सुरक्षा आधार पर हांगकांग की (Hong Kong)  की लेजिस्लेटिव काउंसिल से लोकतंत्र समर्थक चार विपक्षी सांसदों को निष्कासित करने के बाद ब्रिटेन ने चीन पर अपने अंतरराष्ट्रीय संधि दायित्वों को तोड़ने का आरोप लगाया है।

ब्रिटेन ने कहा कि निर्वाचित विधानसभा सदस्यों को अयोग्य ठहराने संबंधी नए नियम “कानूनी रूप से बाध्यकारी चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा का स्पष्ट उल्लंघन” हैं।

चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा के बारे में:

  1. यह हांगकांग का भविष्य निर्धारित करने के लिए वर्ष 1984 में ब्रिटेन और चीन के मध्य एक समझौता है।
  2. 1840 में हुए अफीम युद्ध (Opium War) के बाद से हांगकांग पर ब्रिटेन का कब्ज़ा था। ब्रिटेन तथा चीन, दोनों देशों के मध्य 1 जुलाई 1997 से हांगकांग पर चीन के नियंत्रण पर सहमति हुई थी।
  3. इस संबंध में की गयी चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा को बाद में संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया गया था।

संयुक्त घोषणा के प्रमुख बिंदु

  • इसमें कहा गया है, कि चीन की हांगकांग के संबंध में मूल नीतियां अगले ‘50 वर्षों तक अपरिवर्तित रहेंगी’, इसके साथ ही घोषणा में, शहर के लिए उच्च स्तर की स्वायत्तता बरकरार रखने का वादा किया गया था।
  • इसमें यह भी कहा गया है कि 1997 के बाद से हांगकांग की कानूनी और न्यायिक प्रणाली भी 50 वर्षों तक अपरिवर्तित रहेगी।
  • चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा के अनुसार, वर्ष 1997 तक हांगकांग पर ब्रिटेन का प्रशासन जारी रहेगा और चीन सरकार इसमें अपना सहयोग प्रदान करेगी।

बीजिंग द्वारा हांगकांग पर नियंत्रण के पश्चात चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा की स्थिति

  • वर्ष 1997 में हुए हस्तांतरण के समय बीजिंग द्वारा हांगकांग को उच्च स्तर की स्वायत्तता दिए जाने का वादा उस समय से एक पेचीदा विषय रहा है।
  • जून 2014 में स्टेट काउंसिल द्वारा जारी एक श्वेत पत्र में बीजिंग ने हांगकांग पर ‘व्यापक अधिकार क्षेत्र’ की घोषणा की, जिससे यह विषय और अधिक बिगड़ गया।
  • चीन का कहना है कि संयुक्त घोषणा “अब अमान्य है और इसमें केवल वर्ष 1984 में हस्ताक्षर किए जाने से लेकर वर्ष 1997 में हस्तांतरित किये जाने की अवधि को ही शामिल किया गया था।”
  • लेकिन, ब्रिटेन का तर्क है कि यह समझौता अभी भी प्रभावी है और कानूनी रूप से बाध्यकारी है जिसका पालन जाना चाहिए।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. हांगकांग की भौगोलिक अवस्थिति
  2. ‘एक देश दो प्रणाली’ नियम क्या है?
  3. चीन- मकाऊ संबंध
  4. चीन-ब्रिटेन संयुक्त घोषणा के बारे में

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)


(International Atomic Energy Agency)

संदर्भ:

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy AgencyIAEA) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार भंडार अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसकी प्रतिक्रिया में उत्तरी कोरिया ने ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ पर उसके शत्रु देशों की कठपुतली होने का आरोप लगाया है।

उत्तर कोरिया द्वारा की गयी टिप्पणियाँ

  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) पश्चिमी देशों के राजनीतिक उपकरण से अधिक नहीं है।
  • यह उत्तर कोरिया के खिलाफ ‘शत्रु ताकतों की धुन पर नाचने वाली कठपुतली’ है।

संबंधित प्रकरण

उत्तरी कोरिया वर्ष 2003 में परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation TreatyNPT) से अलग हो गया था, इसके बाद से इसने धीरे-धीरे एक बड़े परमाणु भंडार का निर्माण किया है। NPT से बाहर निकलने के बाद से प्योंगयांग द्वारा परमाणु बमों के कई परीक्षण किए गए हैं।

  • इसके अलावा, एक दशक से अधिक समय से IAEA के निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है।
  • हाल ही में, IAEA द्वारा प्योंगयांग का हथियार कार्यक्रम ‘अत्यंत खेदजनक’, और देश की परमाणु गतिविधियों को ‘गंभीर चिंता का विषय’ बताया गया है।

पृष्ठभूमि:

ऐसा माना जाता है कि उत्तर कोरिया अपने शस्त्रागार को विकसित करना व्यापक रूप से जारी रखेगा। उत्तर कोरिया का कहना है कि उसे अमेरिकी आक्रमण से खुद को बचाने के लिए शस्त्रागार विकसित करना आवश्यक है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की स्थापना, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र संघ भीतर ‘वैश्विक शांति के लिए परमाणु संगठन’ के रूप की गयी थी। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वायत संगठन है।

  • इसका उद्देश्य विश्व में परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। यह परमाणु ऊर्जा के सैन्य उपयोग को किसी भी प्रकार रोकने में प्रयासरत रहती है।
  • IAEA, संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों को रिपोर्ट करती है।
  • इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।

प्रमुख कार्य

  1. IAEA, अपने सदस्य देशों तथा विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
  2. इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना तथा परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।

बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स

  • 22 सदस्य राज्यों (प्रत्येक द्वारा निर्धारित भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व) – सामान्य सम्मेलन द्वारा निर्वाचन (प्रत्येक वर्ष 11 सदस्य) – 2 वर्ष का कार्यकाल
  • कम से कम 10 सदस्य देश – निवर्तमान बोर्ड द्वारा नामित

IAEA के कार्य:

  • IAEA गतिविधियों और बजट पर जनरल कॉन्फ्रेंस के लिए सिफारिशें करना
  • IAEA मानकों को प्रकाशित करना
  • IAEA की अधिकांश नीतियों का निर्माण करना
  • जनरल कॉन्फ्रेंस के अनुमोदन से महानिदेशक की नियुक्त करना

IAEA द्वारा जारी कार्यक्रम

  1. कैंसर थेरेपी के लिए कार्रवाई का कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy- PACT)
  2. मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम
  3. जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना
  4. अभिनव परमाणु रिएक्टरों और ईंधन चक्र पर अंतर्राष्ट्रीय परियोजना, 2000

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  2. IAEA के सदस्य
  3. IAEA के कार्यक्रम।
  4. बोर्ड ऑफ गवर्नर- रचना, मतदान और कार्य
  5. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

पनडुब्बियों की कलवरी श्रेणी


(Kalvari class of submarines)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय नौसेना की कलवरी श्रेणी की पांचवी डीजल इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बी आईएनएस वागीर (INS Vagir) को मुंबई के मझगांव डॉक पर लॉन्च किया गया।

इस श्रेणी के अन्य पोत आईएनएस कलवरी, आईएनएस खंडेरी, आईएनएस करंज, आईएनएस वेला और आईएनएस वाघशीर हैं।

कलवरी श्रेणी पनडुब्बियों के बारे में

  • पनडुब्बियों के इस वर्ग में डीजल इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन सिस्टम होता हैं और ये मुख्य रूप से आक्रमण करने वाली या ‘हंटर-किलर’ पनडुब्बियां होती है। अर्थात, इन्हें शत्रु नौसेना जहाजों को लक्षित करने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इनका उपयोग, युद्धपोत-रोधी और पनडुब्बी-रोधी अभियानों, खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और समुद्री सुंरगें बिछाने में किया जा सकता है।
  • इन पनडुब्बियों को प्रोजेक्ट 75 के तहत निर्मित किया गया है और इनका डिज़ाइन स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों पर आधारित है।
  • इनका निर्माण मुंबई में सार्वजनिक क्षेत्र के शिपबिल्डर मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) द्वारा किया जाता है।
  • इन पनडुब्बियों का डिजाइन फ्रांसीसी डिफेंस के प्रमुख नौसेना ग्रुप (DCNS) और स्पेन के स्वामित्व वाली इकाई नवेंटिया (Navantia) द्वारा डिजाइन और विकसित की गयी स्कॉर्पीन श्रेणी पनडुब्बियों के आधार पर तैयार किया गया है।

(नोट: समुद्री वार्तालाप में जहाजों की श्रेणी (class of ships), समान बनावट, उद्देश्य और विस्थापन वाले जहाजों का एक समूह होता है।)

प्रीलिम्स के लिए तथ्य:

ऊपर उल्लिखित जहाजों का नामकरण:

  1. कलवरी (Kalvari) – टाइगर शार्क।
  2. वागीर (Vagir) का नाम एक शिकारी समुद्री प्रजाति सैंड फिश के नाम पर रखा गया है।
  3. खंडेरी (Khanderi)– छत्रपति शिवाजी द्वारा निर्मित एक द्वीप किले के नाम पर रखा गया है, जिसने उनकी नौसेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  4. करंज (Karanj)– मुंबई के दक्षिण में स्थित एक द्वीप के नाम पर रखा गया है।

भारत का पनडुब्बी बेड़ा:

वर्तमान में, भारत के पनडुब्बी बेड़े में, परमाणु चालित श्रेणी चक्र और अरिहंत में, प्रत्येक में एक-एक पनडुब्बी है। इसके अलावा डीजल इलेक्ट्रिक श्रेणी के तीन वर्गों – कलवरी, शिशुकुमार और सिंधुघोष, में 14 पनडुब्बियां शामिल हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

चीन की अध्यक्षता में दक्षिण एशियाई साझेदारों (आभासी) सम्मेलन

प्रतिभागी: चीन, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान।

उद्देश्य: कोविड-19 की दूसरी लहर पर सामूहिक प्रतिक्रिया पर चर्चा।

द फाइव पार्टीज: सम्मलेन में भाग लेने वाले देशों ने खुद को “द फाइव पार्टीज” का नाम दिया है।

सम्मलेन का महत्व तथा निहितार्थ

  • यह आभासी सम्मलेन, लगभग चार माह पूर्व चीन द्वारा अफगानिस्तान, नेपाल और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ कोरोना महामारी पर प्रतिक्रिया और आर्थिक सुधार में सहयोग को मजबूत करने एक हेतु चतुश्पक्षीय बैठक किये जाने के बाद आयोजित किया गया है।
  • ये दो आभासी सम्मलेन, वैश्विक महामारी के मद्देनजर इस क्षेत्र में चीन की गतिविधियों में वृद्धि प्रतीत होते हैं।

चीन द्वारा अरुणाचल सीमा तक रेल लाइन पर काम का आरंभ

  • चीन ने सिचुआन प्रांत को नियंग्ची (Nyingchi) से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेलवे लाइन पर काम शुरू कर दिया है।
  • यह रेलवे लाइन भारत में अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास स्थित है।
  • ल्हासा को पृष्ठक्षेत्र (Hinterland) से जोड़ने वाली, वर्ष 2006 में निर्मित, किंघई-तिब्बत रेलवे लाइन की भांति, यह दूसरा ऐसा मार्ग होगा जो तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) को भीतरी प्रदेश से जोड़ता है।

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गृह मंत्रालय द्वारा FCRA नियमों में संशोधन

हाल ही में, गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 के तहत नए नियमों को अधिसूचित किया गया है।

नए नियमों के अंतर्गत:

  1. अधिनियम के उप-नियम (1) के खंड (v) और (vi) के तहत निर्दिष्ट संगठनों को, सक्रिय राजनीति या पार्टी की राजनीति में भाग लेने पर राजनीतिक प्रकृति का माना जाएगा।
  2. अधिनियम में एक नया अनुच्छेद सम्मिलित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि अनुच्छेद V और VI में उल्लिखित संगठनों को “सक्रिय राजनीति या पार्टी राजनीति” में भाग लेने पर केंद्र द्वारा उन्हें मात्र राजनीतिक समूह माना जाएगा।
  3. नए नियमो में नए FCRA पंजीकरणों को अधिक सख्त बनाया गया है। FCRA के तहत पंजीकरण कराने वाले किसी संगठन के लिए ‘तीन साल से कार्यरत होना चाहिए’ और इसके द्वारा “पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान सामाजिक हित में अपनी मूल गतिविधियों पर न्यूनतम 15 लाख रुपये खर्च किये जाने चाहिए”।

पृष्ठभूमि:

FCRA 2011 के नियम 3 के खंड V के अनुसार– ‘किसानों, श्रमिकों, छात्रों, जाति, समुदाय, धर्म, भाषा या किसी अन्य पर आधारित संगठनो’, जो प्रत्यक्ष रूप से किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं होते हैं, किन्तु उनके संगठन के ज्ञापन के अनुसार या उनकी गतिविधियों आदि से राजनीतिक हितों की दिशा में कार्य करने के भौतिक साक्ष्य मिलते हैं, को राजनीतिक समूह के रूप में माना जाएगा।


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