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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 November

 

विषय सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. सरना आदिवासियों के लिए एक झारखंड में पृथक धार्मिक कोड

2. लद्दाख गतिरोध: भारत व चीन द्वारा वापस हटने की योजना को अंतिम रूप

 

सामान्य अध्ययन-III

1. उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन (PLI) योजना

2. OTT प्लेटफॉर्म्स पर सरकारी नियंत्रण

3. गुजरात के GIFT सिटी में समुद्री क्लस्टर परियोजना

4. स्पेसएक्स-नासा का आगामी क्रू -1 मिशन

5. पन्ना टाइगर रिजर्व को यूनेस्को ‘बायोस्फीयर रिजर्व’ का दर्जा

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हैदरपुर आद्रभूमि

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

सरना आदिवासियों के लिए एक झारखंड में पृथक धार्मिक कोड


संदर्भ:

हाल ही में, झारखंड सरकार द्वारा सरना धर्म को मान्यता देने और 2021 की जनगणना में एक पृथक कोड के रूप में सम्मिलित करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया है। इस पप्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।

‘सरना धर्म’ क्या है?

‘सरना धर्म’ के विश्वास के मूल तत्व “जल, जंगल, ज़मीन” हैं और इसके अनुयायी वृक्षों और पहाड़ियों की पूजा करते हैं तथा वन क्षेत्रों की रक्षा करने में विश्वास करते हैं।

ऐसा माना जाता है, कि 2011 की जनगणना में समस्त देश के 50 लाख आदिवासियों ने अपने धर्म को ‘सरना’ घोषित किया था, यद्यपि जनगणना में ऐसा कोई कोड नहीं था।

वर्तमान विवाद का विषय

इस धर्म को मानने वाले कई आदिवासी बाद में धर्म परिवर्तित कर ‘ईसाई’ बन गए हैं– राज्य की कुल आबादी में लगभग 4% से अधिक ईसाई हैं, जिनमें से अधिकांश आदिवासी हैं।

  • वर्तमान में विवाद का विषय यह है, कि धर्म परिवर्तित कर ‘ईसाई’ बने आदिवासी अल्पसंख्यक के रूप में आरक्षण का लाभ ले रहे हैं और साथ ही अनुसूचित जनजातियों को मिलने वाले लाभ भी ले रहे हैं।
  • सरना धर्म का पालन करने वाले आदिवासियों का कहना हैं, कि अनुसूचित जनजातियों को मिलने वाले लाभ धर्म परिवर्तित कर ‘ईसाई’ बने लोगों को न देकर केवल उन्हें मिलने चाहिए।

पृथक कोड की आवश्यकता

  • राज्य में सरना आदिवासियों की जनसंख्या वर्ष 1931 में कुल आबादी की 3 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011 में घटकर 26.02 प्रतिशत हो गई है। इसका एक कारण दूसरे राज्यों में काम के लिए जाने वाले आदिवासी भी थे, इन्हें राज्य की जनगणना में दर्ज नहीं किए गया था।
  • अन्य राज्यों में इनकी गणना जनजाति में रूप में नहीं की जाती है।
  • इसलिए, एक पृथक कोड सरना आदिवासियों को जनगणना में दर्ज किया जाना सुनिश्चित करेगा।

पृथक कोड का औचित्य

1871 और 1951 के बीच, जनगणना में आदिवासियों के लिए एक पृथक कोड सम्मिलित किया जाता था, मगर, 1961-62 के आसपास इसमें परिवर्तन कर दिया गया।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि आज जब सम्पूर्ण विश्व में प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण की रक्षा करने पर ध्यान दिया जा रहा है, तो ऐसे में सरना को धर्म का दर्जा प्रदान करना दूरदर्शी निर्णय होगा, क्योंकि इस धर्म का मूल तत्व प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करना है।
  • इनकी भाषा और इतिहास का संरक्षण भी आदिवासियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  • यदि केंद्र ने नए सरना कोड को मंजूरी प्रदान कर देता है वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना में एक नए धर्म के लिए स्थान देना होगा।
  • वर्तमान में, जनगणना के प्रारूप में नागरिक केवल छह धर्मों, हिंदू, इस्लाम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन में से किसी एक को अपना धर्म घोषित कर सकते हैं।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. एक पृथक कोड के निहितार्थ
  2. सरना आदिवासियों के बारे में
  3. सरना आदिवासियों की आस्था और विश्वास

मेंस लिंक:

एक पृथक कोड का क्या औचित्य है? सरना समुदाय द्वारा इसे एक अलग धर्म के रूप में मान्यता देने और 2021 की जनगणना में एक अलग कोड के रूप में शामिल करने की मांगों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

लद्दाख गतिरोध: भारत चीन द्वारा वापस हटने की योजना को अंतिम रूप


संदर्भ:

भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने और सैन्य दलों की वापसी हेतु योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर पर काम कर रहे हैं।

हाल ही में आयोजित कोर कमांडर वार्ता के आठवें दौर में, चीन ने पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर फिंगर 4 से फिंगर 8 तक अपने सैनिकों और सैन्य उपकरणों को वापस बुलाने का प्रस्ताव रखा गया है।

इस स्थान पर विवाद का कारण

वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual ControlLAC) – सामान्यतः यह रेखा पैंगोंग त्सो के चौड़ाई में विस्तार को छोड़कर स्थलीय क्षेत्र से होकर गुजरती है तथा वर्ष 1962 से भारतीय और चीनी सैनिकों को एक दूसरे से अलग करती है। पैंगोंग त्सो झील में यह रेखा पानी से होकर गुजरती है।

  • दोनों पक्षों ने अपने क्षेत्रों को चिह्नित करते हुए अपने- अपने क्षेत्रों को घोषित किया हुआ है।
  • भारत का पैंगोंग त्सो क्षेत्र में 45 किमी की दूरी तक नियंत्रण है, तथा झील के शेष भाग को चीन के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

वर्तमान में मुठभेड़ का स्थान, काराकोरम श्रेणी के पूर्वी विस्तार ‘चांग चेनमो’ (Chang Chenmo) का एक उभरा हुआ पर्वत स्कंध (Spur) है। इन बाहर की ओर निकले हुए पर्वत स्कंधों को फिंगर्स (fingers) कहा जाता है

 इन फिंगर्स पर नियंत्रण स्थिति

पैंगोंग त्सो झील को फिंगर्स के रूप में विभाजित किया गया है। इस क्षेत्र में भारत और चीन के बीच LAC को लेकर मतभेद है, तथा यहाँ पर 8 फिंगर्स विवादित है।

  • भारत का दावा है कि LAC फिंगर 8 से होकर गुजरती है, और यही पर चीन की अंतिम सेना चौकी है।
  • भारत इस क्षेत्र में, फिंगर 8 तक, इस क्षेत्र की संरचना के कारण पैदल ही गश्त करता है। लेकिन भारतीय सेना का नियंत्रण फिंगर 4 तक ही है।
  • दूसरी ओर, चीन का कहना है कि LAC फिंगर 2 से होकर गुजरती है। चीनी सेना हल्के वाहनों से फिंगर 4 तक तथा कई बार फिंगर 2 तक गश्त करती रहती है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. LoC क्या है और इसकी स्थापना, भौगोलिक सीमा और महत्व
  2. LAC क्या है?
  3. नाथू ला कहाँ है?
  4. पैंगोंग त्सो कहाँ है?
  5. अक्साई चिन का प्रशासन कौन करता है?
  6. नाकु ला कहाँ है?
  7. पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में में नियंत्रण

मेंस लिंक:

भारत और चीन के लिए पैंगोंग त्सो के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन (PLI) योजना


(Production-Linked Incentive (PLI) scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा दस अन्य क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन योजना (Production-Linked Incentive Scheme- PLI Scheme) का आरंभ किया गया है। इसके अंतर्गत अगले पांच वर्षों के लिए 1.46 लाख करोड़ रूपये का अनुमानित परिव्यय निर्धारित किया गया है।

इन क्षेत्रों को रोजगार उत्पन्न करने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने संबंधी क्षमता के आधार पर चिह्नित किया गया है।

इन दस क्षेत्रों में शामिल हैं:

खाद्य प्रसंस्करण, दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, औषधि, विशेष प्रकार के इस्पात, मोटर वाहन और वाहन कल-पुर्जे, उच्च दक्षता वाले सौर फोटो-वोल्टिक मोड्यूल्स, एयर कंडीशनर और एलईडी जैसे उत्पाद (व्हाइट गुड्स)।

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उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन योजना (PLI Scheme) के बारे में

भारत को एक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए, हाल ही में, सरकार द्वारा मोबाइल फोन, फार्मा उत्पादों और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों के लिए उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन (Production Linked Incentive- PLI) योजना की घोषणा की गयी थी।

  • 1 अप्रैल को, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के भाग के रूप में PLI योजना को अधिसूचित किया गया था।
  • इसके तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रॉनिक घटकों के निर्माण में व्यापक निवेश को आकर्षित करने के लिये वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।

PLI योजना का लक्ष्य

  1. घरेलू विनिर्माण के लिए प्रतिस्पर्धी और कुशल बनाना।
  2. भारत के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का भागीदार बनाना।
  3. प्रमुख विनिर्माण उद्योगों और अत्याधुनिक तकनीक में निवेश आकर्षित करना।
  4. प्रतिस्पर्धी विनिर्माण उद्योगों के परिणाम स्वरूप निर्यात में वृद्धि।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के तहत प्रमुख प्रस्ताव।
  2. ‘उत्‍पादन से संबद्ध प्रोत्‍साहन’ योजना- इसकी घोषणा कब की गई थी?
  3. इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि है?
  4. किस तरह के निवेश पर विचार किया जाएगा?
  5. योजना की अवधि
  6. इसे कौन कार्यान्वित करेगा?

मेंस लिंक:

इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण के लिए ‘उत्‍पादन से संबद्ध प्रोत्‍साहन’ योजना क्या है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

OTT प्लेटफॉर्म्स पर सरकारी नियंत्रण


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा ‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म्स या वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा प्रदाताओं को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाया गया है।

राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार:

  • ऑनलाइन फिल्में, डिजिटल समाचार और समसामयिक मुद्दों से संबंधित सामग्री अब सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे के अधीन है। I & B मंत्रालय के प्रमुख केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर हैं।
  • OTT प्लेटफॉर्म्स अभी तक विनियमित नहीं किये गए थे, सरकार के इस आदेश से OTT प्लेटफॉर्म सरकारी नियंत्रण के अधीन आ जाएंगे।

अब तक इस क्षेत्र को किस प्रकार विनियमित किया जाता था?

वर्तमान में, डिजिटल सामग्री को नियंत्रित करने वाला कोई कानून अथवा स्वायत्त निकाय नहीं है। लेकिन, समय-समय पर, सरकार द्वारा इन प्लेटफार्मों की निगरानी किये जाने की आवश्यकता का संकेत दिया जाता रहा।

  • पिछले वर्ष अक्टूबर में सरकार ने संकेत दिया था कि वह नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार जैसी वीडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं के लिए निषिद्ध कार्यक्रमों की एक ‘नकारात्मक’ सूची जारी करेगी।
  • सरकार द्वारा इन प्लेटफॉर्म्स से समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण की तर्ज पर एक स्व-नियामक संस्था गठित किये जानी की अपेक्षा की गयी थी।

स्व-नियामक कोड:

  • जनवरी 2019 में, आठ वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा प्रदाताओं द्वारा एक स्व-नियामक कोड पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत इन प्लेटफार्मों पर दिखाई जाने वाली सामग्री के लिए निर्देशक सिद्धांतों का एक सेट तैयार किया गया था।
  • इस स्व-नियामक कोड को OTT द्वारा पिछली जनवरी में अपनाया गया, और इसमें पांच प्रकार की सामग्री को प्रतिबंधित किया गया है, जिसमें, किसी भी प्रकार से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्वक राष्ट्रीय प्रतीक या ध्वज का अपमान करने वाली सामग्री तथा बाल पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने वाली स्टोरी-लाइन्स को शामिल किया गया है।

ओवर-द-टॉप (OTT) स्ट्रीमिंग क्या है?

  • ‘ओवर-द-टॉप’ मीडिया सेवा, एक ऑनलाइन सामग्री प्रदाता होती है, जो एकल उत्पाद के रूप में स्ट्रीमिंग मीडिया उपलब्ध कराती है।
  • ओवर-द-टॉप (OTT) का प्रयोग प्रायः वीडियो-ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म के संबंध में किया जाता है, लेकिन इसका ऑडियो स्ट्रीमिंग, मैसेज सर्विस या इंटरनेट-आधारित वॉयस कॉलिंग सोल्यूशन के संदर्भ में भी प्रयोग होता है।
  • ‘ओवर-द-टॉप’ सेवाएं पारंपरिक मीडिया वितरण चैनलों जैसे दूरसंचार नेटवर्क या केबल टेलीविजन प्रदाताओं को दरकिनार करती हैं।
  • यदि आपके पास इंटरनेट कनेक्शन है तो आप अपनी सुविधानुसार ओवर-द-टॉप’ सेवा का उपयोग कर सकते हैं।

 ओवर-द-टॉप (OTT) की लोकप्रियता का कारण

  • कम कीमत पर उच्च मूल्य की सामग्री।
  • नेटफ्लिक्स और अमेज़ॅन प्राइम जैसे ओरिजिनल सामग्री प्रदाता।
  • कई उपकरणों के साथ संगतता (Compatibility)।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

गुजरात के GIFT सिटी में समुद्री क्लस्टर परियोजना


संदर्भ:

गुजरात मैरीटाइम बोर्ड (GMB) द्वारा अपनी सहायक कंपनी गुजरात पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (GPIDCL) के माध्यम से राज्य की राजधानी गांधीनगर में GIFT सिटी में एक समुद्री क्लस्टर (maritime cluster) को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

‘समुद्री क्लस्टर’ क्या होते हैं?

  • समुद्री क्लस्टर (maritime cluster) किसी क्षेत्र में फर्मों, संस्थानों और व्यवसायों का एक समूह होता है, जो भौगोलिक रूप से एक दूसरे के करीब स्थित होते हैं।
  • भारत के लिए यह अवधारणा नई है, किंतु ये क्लस्टर विश्व के कुछ सर्वाधिक प्रतिस्पर्द्धी बंदरगाहों जैसे रॉटरडैम, सिंगापुर, हांगकांग, ओस्लो, शंघाई और लंदन में कार्य कर रहे हैं।

गुजरात मैरीटाइम क्लस्टर में विशिष्ट संस्थान

  • इस क्लस्टर में गुजरात मैरीटाइम यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी।
  • इस यूनिवर्सिटी में एक वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) केंद्र स्थापित किया जाएगा।
  • यह केंद्र भारतीय व्यापारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्रों का एक विकल्प प्रदान करेगा, जिससे उनके लिए ADR में लगने वाली लागत, समय और यात्रा की बचत होगी।
  • इस क्लस्टर को डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग के अधीन रखे जाने की संभावना है।

समुद्री क्लस्टर की आवश्यकता

  • देश में सही पारिस्थितिकी तंत्र की अनुपस्थिति के कारण वर्षों से विदेशी जगहों पर स्थानातरित हो चुके व्यवसायों को वापस लाना।
  • गुजरात में बहुत सारे बंदरगाह हैं जो देश के लगभग 40 प्रतिशत नौभार (Cargo) की आवाजाही को संभालते हैं, किंतु ये बंदरगाह मूल्य-श्रृंखला को लक्षित नहीं कर पाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘समुद्री क्लस्टर’ क्या होते हैं?
  2. IFSCs क्या होते हैं?
  3. क्या IFSC को SEZ में स्थापित किया जा सकता है?
  4. भारत का पहला IFSC
  5. IFSC द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं?
  6. IFSC की सीमाएं

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

स्पेसएक्स-नासा का आगामी क्रू –1 मिशन


संदर्भ:

हाल ही में, नासा द्वारा स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल (Crew Dragon capsule) और फाल्कन 9 (Falcon 9) रॉकेट को प्रमाणित कर दिया गया है। यह अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा प्रदान किया गया पहला अंतरिक्ष यान प्रमाणन (first spacecraft certification) है।

  • इसका तात्पर्य है कि स्पेसएक्स अब अंतरिक्ष स्टेशन के लिए नियमित उड़ानें संचालित कर सकता है।
  • स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान 14 नवंबर को फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा।

‘क्रू-1 मिशन’ क्या है?

  • क्रू-1 (Crew-1) मिशन, नासा के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लागत के संदर्भ में अंतरिक्ष तक पहुंच को आसान बनाना है, जिससे कार्गो और चालक दल को अंतरर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से आसानी से भेजा और लाया जा सके। इससे वैज्ञानिक शोध में सुगमता हो सकेगी।
  • गौरतलब है कि, क्रू -1, अंतरर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान की पहली परिचालन उड़ान होगी तथा यह 2020-2021 के दौरान निर्धारित तीन उड़ानों में से पहली उड़ान है।

स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल के बारे में:

स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन कैप्सूल, नासा के मिशनों पर चार अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा तथा अंतरिक्ष स्टेशन पर सात सदस्यों के दल की देख-रेख करेगा, जिससे इन्हें अंतरिक्ष में परिक्रमा कर रही प्रयोगशाला पर वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अधिकतम समय मिल सकेगा।

अंतरर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर क्रू-1 के सदस्यों का कार्य

  • क्रू -1 टीम, ISS पर माइक्रोग्रैविटी का अध्ययन करेगी।
  • इसके सदस्यों द्वारा खाद्य शरीर क्रिया विज्ञान (food physiology) पर शोध किया जा रहा है, जिससे अंतरिक्ष यात्रा के दौरान चालक दल की शरीर प्रतिरक्षा प्रणाली और पाचन तंत्र के अनुकूलन में सहयोग मिल सकता है।
  • कक्षा में पहुचने के बाद अंतरिक्ष यात्री, पृथ्वी पर वैज्ञानिकों के लिए डेटा प्रदान करने हेतु नमूने एकत्र करेंगे, जिससे आहार परिवर्तन से शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जा सकेगा।
  • इसके अलावा, छात्रों द्वारा डिजाइन किया गया ‘जींस इन स्पेस-7नामक प्रयोग किया जाएगा, इसका उद्देश्य यह समझना है, कि अंतरिक्ष उड़ान, मस्तिष्क के कार्य को किस प्रकार प्रभावित करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नासा का कमर्शियल क्रू प्रोग्राम- भागीदार
  2. अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम
  3. डेमो-1 बनाम डेमो -2 मिशन
  4. ISS क्या है?
  5. अंतरिक्ष स्टेशन के बारे में

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पन्ना टाइगर रिजर्व को यूनेस्को ‘बायोस्फीयर रिजर्व’ का दर्जा


संदर्भ:

हाल ही में, मध्य प्रदेश के पन्ना नेशनल पार्क को यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया गया है। यूनेस्को के मान्यता प्रमाणपत्र में पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) को एक महत्वपूर्ण बाघ निवास स्थान के रूप में उद्धृत किया गया है।

पृष्ठभूमि:

यूनेस्को (UNESCO) द्वारा, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने, मानव-जीव संघर्ष का समाधान करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संवहनीय उपयोग के लिए प्रतिवर्ष नए जैव मंडल संरक्षित क्षेत्रों (Biosphere Reserves) को सम्मिलित किया जाता है।

यूनेस्को का ‘मैन एंड द बायोस्फीयर प्रोग्राम’ (MAB)

यूनेस्को द्वारा बायोस्फीयर रिजर्व के विचार की शुरुआत 1974 में ‘मैन एंड द बायोस्फीयर प्रोग्राम’ (Man and the Biosphere Programme-MAB) के तहत की गयी थी, इसका उद्देश्य जैवमंडल संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जुटाना था।

  • यूनेस्को के MAB कार्यक्रम की शुरुआत 1971 में की गयी थी यह एक अंतर सरकारी वैज्ञानिक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य मनुष्यों और उनके वातावरण के मध्य संबंधों में सुधार हेतु एक वैज्ञानिक आधार स्थापित करना है।
  • MAB के तहत, प्राकृतिक और सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र और शिक्षा को मानव आजीविका और लाभों के समान बंटवारे में सुधार करने तथा प्राकृतिक और प्रबंधित पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा हेतु समन्वित किया जाता है। इस प्रकार, यह कार्यक्रम पर्यावरणीय रूप से संवहनीय, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त आर्थिक विकास के लिए अभिनव दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
  • इसके तहत, संरक्षित क्षेत्र के वनस्पतियों और जीवों को संरक्षण दिया जाता है और साथ ही इन क्षेत्रों में निवास करने वाले मानव समुदायों और उनकी जीवन पद्धतियों को भी संरक्षित किया जाता है।
  • संरक्षण न केवल संरक्षित क्षेत्र के वनस्पतियों और जीवों को दिया जाता है, बल्कि उन मानव समुदायों को भी दिया जाता है, जो इन क्षेत्रों में निवास करते हैं, और उनके जीवन के तरीके।
  • तमिलनाडु में स्थित नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व यूनेस्को की सूची में भारत के सबसे पहला जैव मंडल संरक्षित क्षेत्र था, इसे वर्ष 2000 में शामिल किया गया था।

पन्ना बाघ अभ्यारण्य के बारे में:

  • पन्ना बाघ अभयारण्य मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है।
  • केन नदी (यमुना नदी की एक सहायक नदी) पन्ना बाघ अभयारण्य से होकर बहती है।
  • यह क्षेत्र पन्ना व हीरा खनन के लिए भी प्रसिद्ध है।
  • केन-बेतवा नदी इंटरलिंकिंग परियोजना बाघ अभ्यारण्य में स्थापित की जाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पन्ना टाइगर रिजर्व के बारे में
  2. यूनेस्को के MAB नेटवर्क के बारे में
  3. भारत में बायोस्फीयर रिजर्व
  4. भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना

मेंस लिंक:

यूनेस्को के मैन एंड बायोस्फियर प्रोग्राम (MAB) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हैदरपुर आद्रभूमि

(Haiderpur wetland)

संदर्भ:

उत्तर प्रदेश का वन विभाग, विभिन्न संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर मुजफ्फरनगर जिले के हैदरपुर वेटलैंड को रामसर स्थल बनाने के लिए कार्य कर रहा है।

प्रमुख बिंदु:

उत्तरप्रदेश में मुजफ्फरनगर जनपद की सीमा के अंतर्गत आने वाला हैदरपुर वेटलैंड गंगा के तटबंध का इलाका है।

  • हैदरपुर वेटलैंड को गंगा और सोलानी नदियों द्वारा जल की आपूर्ति होती है, तथा यह गंगा नदी पर 1984 में मध्य गंगा बैराज के निर्माण के बाद अस्तित्व में आया।
  • यह 1,214 हेक्टेयर में विस्तारित है।
  • यह हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य की सीमा में स्थित है।
  • यह सर्दियों में प्रवासी पक्षियों जैसे, ग्रेलेग गूज (Greylag goose) और बारहेडेड गूज (Bar-headed goose) के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव स्थल है।
  • 2014 में शुरू किये गए भारत सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम, नमामि गंगे के तहत, हैदपुर वेटलैंड को गंगा के किनारे मॉडल वेटलैंड के रूप में चिह्नित किया गया है।

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