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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 November

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

 

सामान्य अध्ययन-II

1. सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ (GSP) व्यापार विशेषाधिकार

2. आर्मेनिया एवं अजरबैजान के मध्य शांति समझौते पर सहमति

 

सामान्य अध्ययन-III

1. mRNA वैक्सीन के बारे में प्रमुख तथ्य

2. थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) परियोजना

3. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस


(National Education Day)

संदर्भ:

वर्ष 2008 से,  भारत में 11 नवंबर को मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को, शिक्षा क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के सम्मान में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और उनके प्रमुख योगदान

  • मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • वह एक प्रसिद्ध भारतीय विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे।
  • उन्होंने शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान एक राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का गठन किया।
  • उनका लक्ष्य सभी के लिए मुफ्त प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने पर था।
  • आजाद को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
  • उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की स्थापना करने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नींव रखने में भी अग्रणी भूमिका निभाई थी।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका:

  • मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने वर्ष 1912 में अल-हिलाल (Al-Hilal) नामक उर्दू में एक साप्ताहिक पत्रिका शुरू किया।
  • इस साप्ताहिक पत्रिका ने मोर्ले-मिंटो सुधारों (Morley-Minto reforms) के बाद दो समुदायों के मध्य उत्पन्न हुई नफरत की खाई को समाप्त करने तथा हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार ने अल-हिलाल के लिए अलगाववादी विचारधारा को फ़ैलाने वाला मानते हुए वर्ष 1914 में प्रतिबंधित कर दिया।
  • मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने गांधीजी द्वारा शुरू किए गए असहयोग आंदोलन का समर्थन किया और वर्ष 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित हो गए।
  • वर्ष 1923 में, उन्हें पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में चुना गया तथा वह वर्ष 1940 में फिर से कांग्रेस के अध्यक्ष बने।

धर्मनिरपेक्षता के सशक्तिकरण में योगदान:

  • आज़ाद के लिए धर्मनिरपेक्षता ने एक तरफ वहादत-ए-दीन (wahadat-e-din) के सिद्धांत पर आधारित थी और दूसरी ओर उन्होंने मध्यस्थों के रूप में पुरोहित वर्ग की उपेक्षा करते हुए धर्म को संस्थागत करने का विरोध किया।
  • उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के वास्तविक स्वरूप को ग्रहण किया और मानव मस्तिष्क की शिक्षा और विकास तथा मनुष्य की चेतना को विकसित करने को सर्वाधिक महत्व दिया।
  • शिक्षा मंत्री आज़ाद का विचार था, कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष शिक्षा भी प्रदान की जाए क्योंकि धार्मिक शिक्षा जैसा गंभीर विषय, विभिन्न समुदायों के धार्मिक नेताओं के हाथों में नहीं दिया जा सकता। अधिकांशतः धार्मिक नेताओं की प्रवृत्ति वर्चस्ववादी और सांप्रदायिक होती है।
  • मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की इच्छा थी कि छात्रों को सभी धर्मों के सामान्य मूल्यों के बारे में पढाया जाना चाहिए ताकि उनमे एक-दूसरे के प्रति पूर्वाग्रह विकसित न हो सकें।

आजाद के अनुसार, धर्मनिरपेक्षता का मतलब, धर्म को, घर की चाहरदीवारी में कुछ कर्मकांडों के पालन करने तक सीमित करना नहीं था, बल्कि धर्म के द्वारा अनुयायियों को उचित रास्ते पर चलने और सर्वशक्तिमान ईश्वर से उचित रास्ते को समझने हेतु मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना था। इसके लिए प्रत्येक मनुष्य को अपने-अपने धर्मों का बेहतर अनुयायी बनने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अबुल आज़ाद की महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियाँ
  2. भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में भूमिका- प्रमुख घटनाएं
  3. खिलाफत आंदोलन में भूमिका
  4. धर्मनिरपेक्षता पर उनके विचार
  5. राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के बारे में

मेंस लिंक:

भारत में धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के योगदानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली(GSP) व्यापार विशेषाधिकार


(Generalized System of Preferences trade privilege)

संदर्भ:

भारत दवारा बिडेन प्रशासन पर भारत के लिए सामान्यीकृत अधिमानी प्रणालीव्यापार विशेषाधिकार (Generalized System of Preferences trade privilegeGSP trade privilege) बहाल करने हेतु दबाव बनाया जा सकता है।

भारत के GSP व्यापार विशेषाधिकार कब समाप्त किये गए थे?

जून 2019 में निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा भारत के ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ व्यापार विशेषाधिकार (GSP व्यापार विशेषाधिकार) को समाप्त कर दिया गया था। भारत द्वारा इसकी बहाली के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली(GSP) क्या है?

यह संयुक्त राज्य अमेरिका का एक व्यापार कार्यक्रम है, जिसके तहत विकासशील देशों में आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने हेतु 129 निर्दिष्ट लाभार्थी देशों और राज्य-क्षेत्रों के 4,800 उत्पादों को वरीयता देते हुए शुल्क मुक्त प्रवेश की अनुमति प्रदान की जाती है

  • ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ (GSP) की स्थापना 1 जनवरी, 1976 को व्यापार अधिनियम, 1974 (Trade Act of 1974) के द्वारा की गई थी।
  • GSP दर्जा गैर- व्युत्क्रमिक (non-reciprocal) आधार पर प्रदान किया जाता है। फिर भी अमेरिका इसे बाजार तक पहुंच और टैरिफ में कमी के साथ जोड़ता है, जो कि जीएसपी के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

GSP के उद्देश्य

  • ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ (GSP) का उद्देश्य विकासशील देशों और अल्प विकसित देशों में निर्यात को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है ।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार को बढ़ाने और इसमें विविधता लाने के लिए लाभार्थी देशों को सहायता प्रदान करके सतत विकास को बढ़ावा देना।

GSP के लाभ

  • भारतीय निर्यातकों को अप्रत्यक्ष लाभ – निर्दिष्ट उत्पादों पर निम्न शुल्क दर अथवा शुल्क मुक्त प्रवेश से आयातक को होने वाले लाभ से भारतीय निर्यातकों को अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है।
  • भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी अथवा छूट से आयातक के लिए ये उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते है। क्योंकि अन्य देशों से सामान उत्पाद लेने पर आयातकों को अधिक कर चुकाना पड़ता है।
  • इस टैरिफ वरीयता से नए निर्यातकों को बाजार में प्रवेश करने और स्थापित निर्यातकों को बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने और GSP प्रदाता देश में लाभांश सुधार करने में सहायता मिलती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जीएसपी के बारे में
  2. इस कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले देश
  3. भारत के GSP व्यापार विशेषाधिकार कब समाप्त किये गए थे?
  4. कार्यक्रम के तहत लाभ

मेंस लिंक:

भारत के लिए ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ (GSP) व्यापार विशेषाधिकार के क्या लाभ हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

आर्मेनिया एवं  अजरबैजान के मध्य शांति समझौते पर सहमति


संदर्भ:

हाल ही में, आर्मेनिया और अज़रबैजान द्वारा रूस की मध्यस्थता में नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र में जारी भयंकर लड़ाई को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की गयी है।

पृष्ठभूमि:

नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र में आर्मेनिया और अज़रबैजान के मध्य लड़ाई को समाप्त कराने के उद्देश्य से रूस, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता में किये गए तीन संघर्ष विराम समझौते शीघ्र ही टूट गए।

रूस द्वारा यह शान्ति समझौते का यह नया प्रयास पहले किये गए प्रयासों से भिन्न है, इसमें रूस द्वारा नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र में शांति सेना तैनात की गयी है, और आर्मेनिया को युद्ध के नुकसानों की भरपाई के लिए व्यापक रियायतें प्रदान की गयी है।

संघर्ष का कारण

  • नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र पर आर्मेनिया और अजरबैजान के मध्य दशकों से जारी संघर्ष सितंबर के अंत में भयंकर युद्ध में बदल गया। यह, इस क्षेत्र में 1990 के दशक में हुए क्रूरतापूर्ण जातीय युद्ध के बाद सबसे भयानक लड़ाई थी।
  • नागोर्नो-काराबाख़ की सीमा पर होने वाली झड़पें वर्षो से आम बात हो चुकी हैं। इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अजरबैजान के एक हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसमें जातीय तौर पर अर्मेनियाई लोगों की आबादी है।

संघर्ष भड़कने के हालिया कारण

  1. यह क्षेत्र एक नस्लीय विस्फोटक स्थिति वाला स्थान (tinderbox) है।
  2. क्षेत्रीय ताकतों के मध्य स्थानीय लड़ाईयां।
  3. चेतावनी संकेतों की अनदेखी।

नागोर्नो-काराबाख़ की कहानी:

नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र को आर्त्शाख़ (Artsakh) नाम से भी जाना जाता है। यह काराबाख़ पर्वत श्रेणी में स्थित दक्षिण काकेशस का स्थलरुद्ध क्षेत्र है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अज़रबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है।

  • यह स्थलरुद्ध नागोर्नो-काराबाख़ का यह पर्वतीय क्षेत्र, अज़रबैजान तथा इसकी आर्मीनियाई मूल की आबादी के बीच अनसुलझे विवाद का विषय बना हुआ है। अलगाववादियों को पड़ोसी देश आर्मेनिया का समर्थन मिला हुआ है।
  • वर्ष 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद एक संघर्ष में यह अज़रबैजान से अलग हो गया। हालांकि वर्ष 1994 में एक संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, किंतु अजरबैजान और अर्मेनिया, अक्सर एक-दूसरे पर नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र के आसपास हमले का आरोप लगाते रहते हैं।
  • अर्मेनिया में ईसाई बहुसंख्यक है जबकि अजरबैजान में मुस्लिम बहुसंख्यक है। तुर्की का अजरबैजान से घनिष्ठ संबंध है, जबकि रूस को आर्मेनिया के साथ जोड़ा जाता है – हालाँकि रूस के अजरबैजान के साथ भी अच्छे संबंध हैं।

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स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

mRNA वैक्सीन के बारे में प्रमुख तथ्य


संदर्भ:

पुणे स्थित जेनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स की नोवल mRNA वैक्सीन कैंडिडेट के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा जुलाई की शुरुआत में वित्तपोषण हेतु मंजूरी दी गई थी।

  • चूंकि, यह एक जैविक उत्पाद है और इसमें आनुवांशिक हेर-फेर किये जाने की आवश्यकता है, अतः इसके मानव परीक्षण हेतु भारतीय औषधि महानियंत्रक (Drug Controller General of India) की अनुमति लेने से पूर्व जैव प्रौद्योगिकी विभाग की आनुवांशिक हेर-फेर समीक्षा समिति (Review Committee on Genetic ManipulationRCGM) की मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक होगा।
  • अब, इस वैक्सीन के अगले वर्ष मार्च में तैयार होने की संभावना बताई जा रही है।

टीकाकरण कार्य-विधि

टीकों के द्वारा, विषाणु अथवा जीवाणु रोगजनकों (Pathogens) द्वारा निर्मित प्रोटीन को पहचानने और उसे नष्ट करने के लिए शरीर को प्रशिक्षित किया जाता है।

पारंपरिक टीके, रोगजनक जीवों अथवा इनके द्वारा उत्पन्न की गयी प्रोटीन के सूक्ष्म अथवा निष्क्रिय अंश से निर्मित किये जाते हैं, जिन्हें प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया शक्ति को सक्रिय करने हेतु शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है।

mRNA वैक्सीन’ क्या हैं?

mRNA वैक्सीन द्वारा रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरल प्रोटीन का स्वतः उत्पादन करने के लिए भ्रमित किया जाता है।

  • इसके लिए मैसेंजर RNA अथवा mRNA उपयोग किये जाता है। mRNA अणु, डीएनए (DNA) निर्देशों को कार्य करने हेतु सक्रिय करते हैं।
  • कोशिका के भीतर mRNA का उपयोग एक ‘नमूने’ (Template) के रूप में किया जाता है।

यह किस प्रकार कार्य करता है?

  1. ‘mRNA वैक्सीन’ का उत्पादन करने के लिए, वायरस द्वारा संक्रामक प्रोटीन के निर्माण में प्रयुक्त mRNA का वैज्ञानिक एक सिंथेटिक संस्करण तैयार करते हैं।
  2. इस सिंथेटिक mRNA को मानव शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है, शरीर की कोशिकाएं सिंथेटिक mRNA को वायरल प्रोटीन के निर्माण करने के लिए निर्देशों के रूप में पढ़ती हैं, और इसलिए वायरस के कुछ अणुओं को स्वतः निर्माण करती हैं।
  3. ये प्रोटीन एकाकी होते हैं, अतः ये वायरस निर्माण हेतु एकत्रित नहीं होते हैं।
  4. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तब इन वायरल प्रोटीनों का पता लगाती है और उनके लिए सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करना शुरू कर देती है।

mRNA वैक्सीन’ का महत्व

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के दो भाग होते हैं: जन्मजात (Innate), जन्म के साथ उत्पन्न रक्षा-प्रणाली और अधिग्रहित (Acquired), जिसे रोगजनकों के संपर्क में पर विकसित किया जाता है।

  • क्लासिकल वैक्सीन अणु आमतौर पर केवल अधिग्रहीत प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ कार्य करते हैं, तथा जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली किसी अन्य घटक द्वारा सक्रिय की जाती है, जिसे सहायक (Adjuvant) कहा जाता है।
  • दिलचस्प बात यह है कि टीकों में mRNA भी जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर सकता है, और यह बिना किसी सहायक की आवश्यकता के सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करते है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वैक्सीन क्या होती है?
  2. वैक्सीन किस प्रकार कार्य करती है?
  3. प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यविधि
  4. mRNA क्या है?
  5. mRNA के टीकों के संभावित अनुप्रयोग

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) परियोजना


संदर्भ:

भारतीय खगोलविदों द्वारा थर्टी मीटर टेलीस्कोप प्रोजेक्ट पर नोबेल पुरस्कार विजेता के साथ सहयोग में कार्य किया जा रहा है।

वर्ष 2020 के भौतिकी नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर घेज़ ने दूरबीन परियोजना में प्रयुक्त बैक एंड उपकरणों से जुड़े तकनीकी पहलुओं के विकास में भारतीय खगोलविदों के साथ अहम भूमिका निभाई है।

थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) के संबंध में:

  • थर्टी मीटर टेलीस्कोप (Thirty Meter Telescope- TMT), विशालकाय टेलिस्कोप (Extremely Large Telescope- ELT) वाली एक खगोलीय वेधशाला है।
  • यह कनाडा, चीन, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिक संगठनों द्वारा वित्त पोषित एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना है।
  • नियोजित स्थान: अमेरिका के हवाई प्रांत में हवाई द्वीप समूह के मौना की (Mauna Kea) पर TMT परियोजना को स्थापित किया जा रहा है।
  • उद्देश्य: TMT को मध्य-अवरक्त से लेकर पराबैंगनी अवलोकन के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें चित्रों के धुंधलेपन को सही करने में सहायता करने हेतु अनुकूलक प्रकाशिकी को प्रयुक्त किया गया है।

महत्व:

  • TMT, बैज्ञानिकों के लिए ब्रहमांड में दूर स्थित धुंधले पिंडो का अध्ययन करने में सक्षम बनाएगा, जिससे ब्रहमांड की उत्पत्ति के प्रारम्भिक चरणों के संबंध में जानकारी प्राप्त होगी।
  • यह अज्ञात ग्रहों और सौर मंडल में अन्य पिंडो तथा अन्य तारों के समीप स्थित ग्रहों के बारे में सूक्ष्म विवरण प्रदान करेगा।

TMT

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)


संदर्भ:

दिल्ली और नोएडा में वायु गुणवत्ता स्थिति लगातार छठे दिन भी ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रही।

अतः एक अंतरिम उपाय के रूप में नवगठित  वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission on Air Quality Management) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को वायु प्रदूषण पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan- GRAP) के अंतर्गत उपायों को लागू करने की शक्ति प्रदान की है।

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) क्या होता है?

GRAP, वायु गुणवत्ता के आधार पर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किए जाने वाले आपातकालीन उपाय होते हैं।

  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान को वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूरी दी गयी थी।
  • GRAP को पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण द्वारा तैयार किया जाता है।
  • GRAP केवल आपातकालीन उपाय के रूप में कार्य करते हैं।
  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, प्रकृति में वृद्धिशील होते हैं, तथा वायु की गुणवत्ताखराब’ सेबहुत खराब’ होने पर सूचीबद्ध उपायों का पालन किया जाता है।

योजना का अवलोकन

  1. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान (NCR क्षेत्रों) में 13 विभिन्न एजेंसियों के बीच कार्रवाई और समन्वय आवश्यक है।
  2. GRAP को लागू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शीर्ष पर पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) को नियुक्त किया गया है।
  3. EPCA द्वारा किसी भी उपाय को लागू करने से पहले, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सभी राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की जाती है, इसके पश्चात विभिन्न शहरों में कार्यवाही करने के संबंध में निर्णय किये जाते हैं।

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‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ के संबंध में:

‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ की स्थापना इस साल अक्टूबर में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश’, 2020  (‘Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Ordinance’) के तहत की गयी थी।

  • यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकायों का अधिक्रमण (Supersede) करेगा।
  • इस आयोग को वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर इन राज्य सरकारों को निर्देश जारी करने की शक्तियां प्राप्त होंगी।

संरचना:

  • ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ एक स्थायी निकाय होगा और इसमें 20 से अधिक सदस्य होंगे।
  • आयोग की अध्यक्षता भारत सरकार के सचिव अथवा राज्य सरकार के मुख्य सचिव के रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी।

अधिकार-क्षेत्र:

इस आयोग का वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के क्षेत्रों सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) पर विशेष अधिकार क्षेत्र होगा, तथा यह संबंधित राज्य सरकारों तथा CPCB और ISRO के साथ कार्य करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्या EPCA एक वैधानिक निकाय है?
  2. यह कब और क्यों स्थापित किया गया था?
  3. शक्तियाँ और कार्य
  4. रचना
  5. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान क्या है?
  6. ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश’, 2020 का अवलोकन’।

स्रोत: द हिंदू


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