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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 9 November

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. टिग्रे, इथियोपिया में सशस्त्र संघर्ष एवं हॉर्न ऑफ अफ्रीका के लिए इसके निहितार्थ

2. ‘जो बिडेन’ का अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर निर्वाचन तथा इसका भारत-अमेरिकी संबंधो पर प्रभाव

3. प्रशासनिक और बजट संबंधी प्रश्नों पर सलाहकार समिति (ACABQ)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. हरियाणा में स्थानीय लोगों को प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण

2. भयावह खाद्य संकट के निवारण हेतु संयुक्त राष्ट्र का नया गठबंधन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. स्टैनफोर्ड द्वारा जारी शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची

2. अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

टिग्रे, इथियोपिया में सशस्त्र संघर्ष एवं हॉर्न ऑफ अफ्रीका के लिए इसके निहितार्थ


संदर्भ:

इथियोपिया, ‘गृह युद्ध’ की स्थिति में पहुँच चुका है। वर्तमान में देश के उत्तरी टिग्रे (Northern Tigray) क्षेत्र में आंतरिक संघर्ष जारी है।

पृष्ठभूमि:

इथियोपिया में संघीय प्रणाली संरचना के अंतर्गत देश में दस क्षेत्रों को महत्वपूर्ण स्वायत्तता प्रदान की गयी है। इन क्षेत्रों की अपनी संसद तथा निजी सुरक्षा बल हैं, और इन्हें स्वतंत्र शासन के लिए जनमत संग्रह कराने का अधिकार भी प्राप्त है।

Impact on the Horn of Africa:

हॉर्न ऑफ अफ्रीका पर प्रभाव:

  • इथियोपिया में जारी सशस्त्र संघर्षों से, टिग्रे का निकटस्थ देश ‘इरीट्रिया’ सर्वाधिक प्रभावित हो सकता है।
  • यदि यह संघर्ष व हिंसा इथियोपिया की सीमाओं के फैलटी है, तो यह संभवतः पूरे हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है।
  • इस क्षेत्र में अमेरिका और चीन के कई रणनीतिक सैन्य ठिकाने हैं, इनमे जिबूती (Djibouti), टिग्रे के सर्वाधिक नजदीक सैन्य ठिकाना है। यदि सशस्त्र उपद्रवों की वजह से इन सैन्य-ठिकानों को कोई क्षति पहुँचती है, तो इस क्षेत्रीय संघर्ष में विदेशी सैन्य शक्तियां भी सम्मिलित हो सकती हैं।

ethiopia

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

‘जो बिडेन’ का अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर निर्वाचन तथा इसका भारत-अमेरिकी संबंधो पर प्रभाव


संदर्भ:

हाल ही में, डेमोक्रेट उम्मेदवार ‘जो बिडेन’ (Joe Biden) को वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में विजेता घोषित किया गया है।

जो बिडेन और भारत- पृष्ठभूमि

जो बिडेन, बराक ओबामा प्रशासन में उपराष्ट्रपति बनने से काफी पहले से ही भारत के साथ मजबूत संबंधों की वकालत करते रहे हैं।

  • बिडेन, अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष तथा बाद में उपराष्ट्रपति के रूप में भारत के साथ रणनीतिक संबंधो को बाकायदा मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
  • वस्तुतः, वर्ष 2006 में, अमेरिका के उपराष्ट्रपति बनने से तीन साल पहले, बिडेन ने अमेरिका-भारत संबंधों के भविष्य हेतु अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया था, उन्होंने कहा था, कि “मेरा सपना है, कि, वर्ष 2020 में ‘भारत और अमेरिका’ विश्व में दो सबसे नजदीकी देश बने”।

उपराष्ट्रपति के रूप में जो बिडेन का भारत-अमेरिकी संबंधो के संदर्भ में योगदान

  1. पुनर्गठित और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता के लिए अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अपना समर्थन घोषित किया।
  2. भारत को अमेरिकी कांग्रेस द्वारा अनुमोदित ‘प्रमुख रक्षा सहयोगी’ (Major Defense Partner) का दर्जा प्रदान किया गया। इससे रक्षा संबंधों को मजबूत करने हेतु भारत के लिए उन्नत और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी को साझा करना आसान हो गया। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अपने पारंपरिक गठबंधन सहयोगियों के अलावा पहली बार किसी अन्य देश को यह दर्जा प्रदान किया गया था।
  3. अगस्त 2016 में, दोनों पक्षों ने मध्य गहन सैन्य सहयोग के लिए तीन ‘बुनियादी समझौतों’ में से एक लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट‘ (Logistics Exchange Memorandum of Agreement- LEMOA) पर हस्ताक्षर किए।
  4. आतंकवाद से लड़ने के लिए अमेरिका-भारत सहयोग भी मजबूत हुआ।

बिडेन के राष्ट्रपति-काल में भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  1. व्यापर की दृष्टि से, जो बिडेन, वर्तमान ट्रम्प प्रशासन की तुलना में कम बाधक हो सकते है। ट्रम्प की वैश्विक दृष्टि में, व्यापार एक शून्य-संचय खेल’ (Zero-Sum Game) था, जिसमे एक देश को जितना लाभ होता है, किसी अन्य देश को ठीक उतनी ही हानि होती है।
  2. बिडेन प्रशासन के दौरान विश्व में, ट्रम्प के ‘प्रत्यक्ष तदर्थवाद’ (Outright Ad-hocism) के विपरीत, एक क़ानून-आधारित व्यापार प्रणाली की दिशा में नए सिरे से जोर दिया जा सकता है। इसके साथ ही, विश्व में जड़ जमा रहे संरक्षणवादी रवैये में भी परिवर्तन होने की संभावना है।
  3. इसके अलावा, की H1-B वीजा मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति की नीति, किसी अन्य देश की अपेक्षा भारतीय भारतीय युवाओं को की संभावनाओं को अधिक प्रभावित करती है। बिडेन, भारतीय प्रवासियों और श्रमिकों को संभवतः ट्रम्प की भांति संदेहास्पद नजरिया नहीं रखेंगे।
  4. इसी तरह, बिडेन प्रशासन द्वारा अमेरिकी सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली‘ (Generalized System of Preferences) से भारत के बहिष्कार पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
  5. डेटा स्थानीयकरण अथवा दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों पर सीमा-निर्धारण जैसे पेचीदा मुद्दों को, बिडेन के प्रशासन काल में व्यावहारिक रूप से हल किया जा सकता है।
  6. भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए, जिसे तेजी से बढ़ने के लिए सस्ते तेल की नियमित आपूर्ति की आवश्यकता है, अमेरिका-ईरान संबंधो (प्रतिबंधों को हटाना) का सामान्य होना काफी लाभप्रद होगा।
  7. बिडेन प्रशासन द्वारा, भारत और चीन के प्रति एक समान दृष्टिकोण रखने की बजाय, चीन के खिलाफ भारत की मदद करने की संभावना है।
  8. बिडेन द्वारा पेरिस जलवायु समझौते में फिर से शामिल होने का वादा किया गया है, इससे भारत जैसे देशों को इस विषय पर, तकनीकी और वित्तीय, दोनों तरह की बड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसदीय बनाम अध्यक्षीय शासन प्रणाली
  2. पेरिस समझौते के बारे में
  3. अमेरिकी ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ का अवलोकन
  4. अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले वीजा के प्रकार
  5. बुनियादी समझौते क्या हैं?

मेंस लिंक:

ओबामा प्रशासन में उपराष्ट्रपति के रूप में जो बिडेन के क्या योगदान थे? बिडेन के राष्ट्रपति-काल में भारत की अर्थव्यवस्था किस प्रकार प्रभावित हो सकती है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

प्रशासनिक और बजट संबंधी प्रश्नों पर सलाहकार समिति (ACABQ)


(Advisory Committee on Administrative and Budgetary Questions)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय राजनयिक विदिशा मैत्रा को संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रशासनिक और बजटीय प्रश्न (ACABQ) पर संयुक्त राष्ट्र सलाहकार समिति के लिए चुना गया है।

ACABQ के बारे में:

प्रशासनिक और बजटीय प्रश्नों पर सलाहकार समिति (Advisory Committee on Administrative and Budgetary QuestionsACABQ), संयुक्त राष्ट्र महासभा का अंग है और यह सोलह सदस्यों की एक विशेषज्ञ समिति होती है।

  • इसके सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है। इसके सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।
  • समिति में सदस्य व्यक्तिगत रूप से कार्य करते हैं तथा वे समिति में सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि के रूप में नहीं होते हैं।
  • समिति के प्रतिवर्ष तीन सत्र आयोजित किये जाते हैं, जिनकी कुल अवधि नौ से दस महीने की होती है।
  • समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सलाहकार समिति के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

ACABQ के कार्य:

  1. संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत किए गए बजट की जांच करना तथा रिपोर्ट करना।
  2. समिति के लिए सौंपे गए प्रशासनिक और बजटीय मामलों से संबंधित मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र महासभा को सलाह देना।
  3. संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से, विशेष एजेंसियों के प्रशासनिक बजट तथा इन एजेंसियों के लिए वित्तीय व्यवस्था हेतु प्रस्तावों की जाँच करना।
  4. संयुक्त राष्ट्र विशेष एजेंसियों के खातों संबंधी लेखा परीक्षकों के रिपोर्ट्स को स्वीकार करना और संयुक्त राष्ट्र महासभा को प्रस्तुत करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ACABQ के बारे में
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. सदस्यों का चुनाव

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

हरियाणा में स्थानीय लोगों को प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण


संदर्भ:

हाल ही में, राज्य विधानसभा द्वारा ‘हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों को रोजगार विधेयक’, 2020 (Haryana State Employment of Local Candidates Bill, 2020) पारित कर दिया गया है। इससे निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अधिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा।

प्रमुख प्रावधान:

  • लागू किये जाने वाले क्षेत्र: यह अधिनियम, सरकार द्वारा अधिसूचित, सभी कंपनियों, सोसाइटी, ट्रस्ट, सीमित देयता भागीदारी फर्म, साझेदारी वाली फर्म और 10 या अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाला कोई व्यक्ति अथवा इकाईयों पर लागू होगा।
  • अधिनियम के तहत छूट: यह अधिनियम,केंद्र सरकार या राज्य सरकार के तहत नौकरियों और केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाली किसी संस्था पर लागू नहीं होगा।
  • कवर किये जाने वाले पद: इस अधिनियम में 50,000 रुपए या उससे कम कुल मासिक वेतन या मजदूरी और समय-समय पर सरकार द्वारा अधिसूचित पदों को सम्मिलित किया गया है।
  • अधिनियम के तहत छूट प्राप्त पद: वांछित कौशल, योग्यता अथवा प्रवीणता के पर्याप्त संख्या में स्थानीय उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने पर नियोक्ता द्वारा अधिनियम के तहत छूट का दावा किया जा सकता है।
  • दंड अथवा जुर्माना: इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करने पर नियोक्ता को 5 लाख रु. तक के जुर्माने का दंड दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त की गई चिंताएं:

  • हरियाणा सरकार के इस विधेयक द्वारा अनुच्छेद 16 का उल्लंघन हो सकता है। हालांकि, हरियाणा सरकार का दावा है कि जबकि अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार’ के बारे में है, और यह विधेयक केवल “निजी क्षेत्र के रोजगार” से संबंधित है।
  • इसके अलावा, यह उद्योगों के लिए लाभप्रद नहीं होगा।
  • ऐसी आशंकाएं वयक्त की जा रही हैं कि यदि हरियाणा में इस तरह का आरक्षण लागू किया जाता है, तो अन्य राज्य भी इसका अनुसरण करेंगे और इसके परिणामस्वरूप ‘पूर्ण अराजकता’ की स्थिति हो जाएगी।
  • इससे पहले, आंध्र प्रदेश के स्थानीय उम्मीदवारों को 75% आरक्षण प्रदान करने संबंधी आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधेयक के प्रमुख प्रावधान
  2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 16 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

हरियाणा द्वारा 75% निजी नौकरियों को आरक्षित करने के निर्णय से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय।

भयावह खाद्य संकट के निवारण हेतु संयुक्त राष्ट्र का नया गठबंधन


(New UN alliance to stave off ‘catastrophic food crisis’)

संदर्भ:

कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न होने वाले भयावह खाद्य संकट से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture OrganizationFAO) द्वारा एक खाद्य गठबंधन (Food Alliance) शुरू किया गया है।

खाद्य गठबंधन के बारे में:

  • खाद्य गठबंधन (Food Alliance) का प्रस्ताव इटली द्वारा किया गया है और यह खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के नेतृत्व में कार्य करेगा।
  • इसका उद्देश्य कृषि खाद्य प्रणालियों में लचीलापन बढ़ाना और भोजन तक वैश्विक पहुंच सुनिश्चित करना है।
  • इटली और नीदरलैंड द्वारा गठबंधन को वित्तीय संसाधन और तकनीकी सहायता प्रदान करने की घोषणा की जा चुकी है।
  • यह गठबंधन COVID-19 की प्रतिक्रिया में भोजन तक पहुंच सुनिश्चित करने और कृषि खाद्य प्रणालियों में सुगमता बढ़ाने वाले उपायों की सहायता करने हेतु एकीकृत वैश्विक कार्रवाई (Unified Global Action) के लिए नेटवर्कों के नेटवर्क (network of networks) और बहु-हितधारक गठबंधन के रूप में कार्य करेगा।
  • प्रस्तावित गठबंधन में इस प्रयोजन हेतु समर्पित एक ट्रस्ट फंड और वेब-आधारित केंद्र सम्मिलित किया गया है, जिससे प्रतिभागियों के लिए प्रोजेक्ट-केंद्रित जानकारी और डेटा तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही जारी परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन और अन्य सहायता भी प्रदान होगी।

गठबंधन के प्रमुख उद्देश्य:

  1. संसाधनों, विशेषज्ञता और नवाचार को जुटाना।
  2. कोविड-19 महामारी का सामना करने हेतु संयुक्त और समन्वित प्रतिक्रिया की वकालत करना।
  3. देशों के मध्य संवाद तथा ज्ञान और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
  4. समाधान-उन्मुख योजनाओं और कार्यक्रमों की दिशा में कार्य करना।
  5. दीर्घकालिक प्रभाव के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी का विस्तार करना।

इस प्रकार के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता

  • खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा 5 नवंबर को जारी किये गए खाद्य मूल्य सूचकांक के अनुसार, वैश्विक खाद्य कीमतों में लगातार पांचवें महीने से हो रही वृद्धि अक्टूबर में भी जारी है। हालांकि, वैश्विक अनाज उत्पादन में कमी होने का पूर्वानुमान किया गया था, किंतु वर्ष 2020 में  कुल अनाज उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद की गयी थी।
  • कोविड-19 के कारण विश्व में वर्ष 2020 के दौरान 132 मिलियन से अधिक लोग कुपोषित-श्रेणी में शामिल हो सकते हैं और यह वर्ष 2030 तक भूख-उन्मूलन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए एक गंभीर चुनौती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. FAO के बारे में
  2. प्रस्तावित गठबंधन के बारे में
  3. FAO खाद्य मूल्य सूचकांक का अवलोकन

मेंस लिंक:

कोविड-19 के कारण विश्व में वर्ष 2020 के दौरान 132 मिलियन से अधिक लोग कुपोषित-श्रेणी में शामिल हो सकते हैं और यह वर्ष 2030 तक भूख-उन्मूलन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए एक गंभीर चुनौती है। इस स्थिति से बचने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


स्टैनफोर्ड द्वारा जारी शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हाल ही में एक सूची जारी की है जो विभिन्न विषयों में सबसे अधिक उद्धृत वैज्ञानिकों में से 2 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है।

  • इस पूरी सूची में 1,59,683 वैज्ञानिक सम्मिलित किये गए हैं।
  • सूची में 1,492 भारतीयों ने स्थान पाया है, जिनमें से अधिकांश IIT और IISc और अन्य शीर्ष संस्थानों से हैं, जो भौतिक विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन इंजीनियरिंग, पादप जीव विज्ञान, ऊर्जा और अन्य जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • दो अकार्बनिक और परमाणु रसायन विज्ञान के क्षेत्र में दो भारतीय वैज्ञानिकों प्रो गौतम देसीराजू (रैंक 2) और CNR राव (रैंक 3) को सूची में शीर्ष के करीब स्थान मिला है।

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY)

इस योजना को वर्ष 2018 में कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) द्वारा लॉन्च किया गया था।

उद्देश्य: इसका उद्देश्य उन लोगों का आर्थिक रूप से सहयोग करना है, जिन्होंने रोजगार प्रणाली में परिवर्तन होने के कारण अपनी नौकरी खो दी है अथवा किसी अन्य कारणवश बेरोजगार हैं।

इस योजना के तहत अगस्त में पात्रता मानदंडो में ढील दी गई थी:

  • अधिकतम 90 दिनों की बेरोज़गारी के लिये, योजना के तहत भुगतान राशि को औसत मज़दूरी के 25% से बढ़ाकर 50% तक बढ़ा दिया गया है।
  • बेरोज़गारी के 90 दिनों के बाद राहत भुगतान किये जाने के बजाय अब 30 दिनों के बाद भुगतान किया जाएगा।
  • बीमित व्यक्ति को उसकी बेरोज़गारी से पूर्व न्यूनतम दो वर्ष की अवधि के लिये बीमा योग्य रोज़गार में होना चाहिये तथा उसका बेरोज़गारी से ठीक पहले की योगदान अवधि में 78 दिनों से कम का योगदान नहीं होना चाहिये। बेरोज़गारी से 2 वर्ष पहले की शेष तीन योगदान अवधियों में से एक में न्यूनतम 78 दिनों का योगदान होना चाहिये।

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