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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 November

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. इस वर्ष अक्टूबर माह में चक्रवात नहीं आने का कारण

 

सामान्य अध्ययन-II

1. हरियाणा में पंचायत सदस्यों को ‘वापस बुलाने का अधिकार’ संबंधी विधेयक पारित

2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013

 

सामान्य अध्ययन-III

1. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी – सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-MFIs)

2. EOS-01: भारत का नवीनतम पृथ्वी निगरानी उपग्रह

3. तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मानदंड

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बांग्लादेश में ट्रांसजेंडरों के लिए मदरसा

2. राष्ट्रीय जल पुरस्कार।

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ।

इस वर्ष अक्टूबर माह में चक्रवात नहीं आने का कारण


(Why did cyclones give October a miss?)

संदर्भ:

अक्टूबर से दिसंबर तक की अवधि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए अनुकूल होती है। इस वर्ष, हालांकि, अक्टूबर माह के दौरान कोई भी चक्रवाती तूफ़ान नहीं देखा गया।

सामान्यतः चक्रवातों की उत्पात्ति और इनके भारतीय तटों पर पहुँचने का समय

पूरे विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 80 चक्रवातों का निर्माण होता है, जिनमें से पाँच चक्रवात, उतरी हिंद महासागर के ‘बंगाल की खाड़ी’ और ‘अरब सागर’ क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं।

  • उत्तर हिंद महासागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवात प्रकृति में द्विबहुलक (Bi-modal) होते हैं, अर्थात ये दो मौसमों में निर्मित होते हैं– अप्रैल से जून (मॉनसून-पूर्व) और अक्टूबर से दिसंबर (मॉनसून के बाद)।
  • इनमें से, मई और नवंबर महीने, चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए सबसे अनुकूल होते है।

इस वर्ष चक्रवात नहीं बनने के कारण

  • आमतौर पर महासागरीय विक्षोभ दक्षिण चीन सागर की ओर से बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करते हैं, और भारतीय तट की ओर मुड़ जाते है। इस वर्ष, अब तक उत्तरी हिंद महासागर में, चक्रवात निर्माण के लिए आवश्यक तीव्रता वाले, किसी महासागरीय विक्षोभ का प्रवेश नहीं हुआ।
  • इस वर्ष चक्रवात नहीं बनने का एक अन्य कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में ला-नीना की कमजोर स्थिति भी है।
  • मैडेन जूलियन ऑसिलेशन (Madden Julian OscillationMJO) के प्रभाव से भी उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों का अभाव रहा है। मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन (MJO) एक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बारिश, हवाओं, समुद्र की सतह के तापमान और बादलों को प्रभावित करती है, और यह आमतौर पर प्रति 30 से 60 दिनों में स्वयं की पुनरावृत्ति करती है।
  • इसके अलावा, नवंबर माह के दौरान, उच्च और निचले वायुमंडलीय स्तर के मध्य प्रवाहित होने वाली हवाओं की गति में अंतर से ऊर्ध्वाधर पवन अपरूपण होता है, जो निम्न-दाब प्रणाली और अवदाब के लिए चक्रवात संबंधी दशाओं को मजबूत करने से रोक देता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चक्रवात की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार कारक
  2. विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवातों का नामकरण
  3. भारत के पूर्वी तट में अधिक चक्रवात आने का कारण
  4. कोरिओलिस बल क्या है?
  5. संघनन की गुप्त ऊष्मा क्या होती है?
  6. मैडेन जूलियन ऑसिलेशन (MJO) क्या है?

मेंस लिंक:

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार कारकों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

हरियाणा में पंचायत सदस्यों को ‘वापस बुलाने का अधिकार’ संबंधी विधेयक पारित


(Haryana clears Bill on right to recall panchayat member)

संदर्भ:

हाल ही में, हरियाणा राज्य विधानसभा द्वारा हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2020 (Haryana Panchayati Raj (Second Amendment) Bill, 2020) पारित कर दिया गया है।

इस संशोधन का उद्देश्य पंचायत सदस्यों की मतदाताओं के प्रति जवाबदेही में वृद्धि करना है।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  • विधेयक में, निर्वाचकों के लिए पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों को वापस बुलाने का अधिकार (Right to Recall) प्रदान किया गया है।
  • इसके अंतर्गत, ग्रामीण निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त, पिछड़े वर्गों में ‘अधिक वंचित वर्गों’ को 8% आरक्षण प्रदान किया गया है।
  • इस विधेयक में काम ना करने वाले सरपंचों, ब्लाक समिति सदस्यों व जिला परिषद सदस्यों को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटाने का अधिकार मतदाताओं को दिया गया है।

अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:

  • पंचायती राज निकायों के सदस्यों व सरपंच को वापस बुलाने हेतु कार्यवाही शुरू करने के लिए वार्ड अथवा ग्राम सभा के 50% सदस्यों को लिखित में देना होगा।
  • इसके पश्चात, एक गुप्त मतदान कराया जायेगा, जिसमें दो-तिहाई मतदाताओं द्वारा जन प्रतिनिधि के खिलाफ मतदान करने पर उन्हें पदमुक्त कर दिया जाएगा।

73वें और 74वें संशोधन के प्रमुख प्रावधान

  • सभी स्थानीय निकायों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन
  • राज्य स्तरीय चुनाव आयोग और वित्त आयोगों की स्थापना
  • प्रत्येक स्थानीय निकाय में दलितों और आदिवासियों के लिए, उनकी आबादी के अनुपात में, सीटों का अनिवार्य आरक्षण।
  • स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण
  • ग्रामीण और शहरी निकायों की योजनाओं को समेकित करने हेतु जिला योजना समितियों का गठन

प्रीलिम्स लिंक:

  1. 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन का अवलोकन
  2. भारतीय संविधान की 11 वीं अनुसूची में शामिल विषयों की सूची
  3. राज्य चुनाव आयोग के बारे में
  4. हरियाणा पंचायती राज (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2020 का अवलोकन

मेंस लिंक:

हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2020 के प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013


(National Food Security Act)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत सही लाभार्थियों की पहचान करने के लिए 2013 से 4.39 करोड़ फर्जी राशन कार्डों को रद्द किया गया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act- NFSA) 2013 का उद्देश्य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्‍यों पर अच्‍छी गुणवत्‍ता के खाद्यान्‍न की पर्याप्‍त मात्रा उपलब्‍ध कराते हुए उन्‍हें मानव जीवन-चक्र दृष्‍टिकोण में खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताऐं:

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के तहत कवरेज और पात्रता: TPDS के अंतर्गत 5 किलोग्राम प्रति व्‍यक्‍ति प्रति माह की एक-समान हकदारी के साथ 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी को कवर किया जाएगा। हालांकि, मौजूदा अंत्‍योदय अन्‍न योजना (AAY) में सम्मिलित निर्धनतम परिवारों की 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह की हकदारी सुनिश्‍चित रखी जाएगी।

टीपीडीएस के अंतर्गत राजसहायता प्राप्‍त मूल्‍य और उनमें संशोधन: इस अधिनियम के लागू होने की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के लिए टीपीडीएस के अंतर्गत खाद्यान्‍न अर्थात् चावल, गेहूं और मोटा अनाज क्रमश: 3/2/1 रूपए प्रति किलोग्राम के राजसहायता प्राप्‍त मूल्‍य पर उपलब्‍ध कराया जाएगा। तदुपरान्‍त इन मूल्‍यों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के साथ उचित रूप से जोड़ा जाएगा।

परिवारों की पहचान: टीपीडीएस के अंतर्गत प्रत्‍येक राज्‍य के लिए निर्धारित कवरेज के दायरे में  पात्र परिवारों की पहचान संबंधी कार्य राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा किया जाएगा।

महिलाओं और बच्‍चों के लिए पोषण सहायता: गर्भवती महिलाएं और स्‍तनपान कराने वाली माताएं तथा 6 माह से लेकर 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्‍चे एकीकृत बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) और मध्‍याह्न भोजन (एमडीएम) स्‍कीमों के अंतर्गत निर्धारित पौषणिक मानदण्‍डों के अनुसार भोजन के हकदार होंगे । 6 वर्ष की आयु तक के कुपोषित बच्‍चों के लिए उच्‍च स्‍तर के पोषण संबंधी मानदण्‍ड निर्धारित किए गए हैं।

महिलाओं और बच्चों को पोषण संबंधी सहायता: 6 महीने से 14 वर्ष की आयु के बच्चों और गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) और मिड-डे मील (MDM) योजनाओं के तहत निर्धारित पोषण मानदंडों के अनुसार भोजन का अधिकार होगा। 6 वर्ष की आयु तक के कुपोषित बच्चों के लिए उच्च पोषण मानदंड निर्धारित किये गए है।

मातृत्व लाभ: गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को 6,000 रु. का मातृत्व लाभ भी प्रदान किया जाएगा।

महिला सशक्तीकरण: राशन कार्ड जारी करने के उद्देश्य से, परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला को परिवार का मुखिया माना जाएगा।

शिकायत निवारण तंत्र: जिला और राज्य स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध कराया जाएगा।

खाद्यान्न की रखरखाव व परिवहन लागत तथा उचित मूल्य की दुकान (FPS) व्यापारियों का लाभ:

राज्य के भीतर खाद्यान्न के परिवहन पर खर्च, इसके रखरखाव तथा उचित मूल्य की दुकान (FPS) व्यापारियों के लाभ को इस प्रयोजन हेतु तैयार किए गए मानदंडों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा, तथा उपरोक्त व्यय को पूरा करने के राज्यों केंद्र सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही: पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु, पीडीएस, सामाजिक लेखापरीक्षा और सतर्कता समितियों के गठन से संबंधित रिकॉर्ड को दिखाए जाने संबंधी प्रावधान किए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा भत्ता: उपयुक्त खाद्यान्न अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं होने की स्थिति में, लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा भत्ता का प्रावधान किया गया है।

दंड अथवा जुर्माना: यदि कोई लोक सेवक या प्राधिकरण, जिला शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा अनुशंसित राहत सहायता प्रदान करने में विफल रहता है, तो प्रावधान के अनुसार राज्य खाद्य आयोग द्वारा जुर्माना लगाया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. TPDS के बारे में
  2. योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता किसे प्रदान किया जाता है?
  3. अधिनियम के तहत दंड प्रावधान
  4. मातृत्व लाभ संबंधित प्रावधान
  5. एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना का अवलोकन
  6. मध्याह्न भोजन (MDM) योजना का अवलोकन
  7. योजना के तहत पात्र परिवारों की पहचान

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी – सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-MFIs)


(Non-Banking Financial Company – Micro Finance Institutions)

संदर्भ:

कई बड़े सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFIs) के लघु वित्तीय बैंकों में परिवर्तित हो जाने से, समग्र सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों – सूक्ष्म वित्त संस्थानों (NBFC-MFIs) की भागेदारी लगभग 30% तक रह गयी है।

NBFC- MFI क्या हैं?

NBFC-MFIs एक प्रकार की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (भारतीय कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत लाइसेंस प्राप्त कंपनी से भिन्न) होते है, जिसमें धन जमा करने की सुविधा नहीं होती।

NBFC-MFIs को निम्नलिखित शर्तें पूरा करना अनिवार्य होता है:

  • NBFC-MFIs की न्यूनतम सकल स्वामित्व निधि (Minimum Net Owned Funds NOF) 5 करोड़ रु. होनी चाहिए। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में पंजीकृत NBFC-MFIs के लिए यह राशि 2 करोड़ रुपये होनी आवश्यक है।
  • NBFC-MFIs की कुल संपत्ति में से 85% अर्हक संपत्ति (Qualifying Assets) के रूप में होनी चाहिये।

‘अर्हक परिसंपत्तियां’ क्या होती हैं?

‘निवल संपत्तियां (Net assets), नकदी, बैंक में जमा राशि और मुद्रा बाजार के उपकरणों को छोड़कर कुल संपत्ति होती है।

अर्हक परिसंपत्तियां’ (Qualifying Assets), वे संपत्तियां होती हैं, जिन्हें इच्छित उपयोग अथवा बिक्री हेतु तैयार होने के लिए पर्याप्त समय लगता है। RBI द्वारा ‘अर्हक परिसंपत्तियों’ को किसी व्यक्ति या समूह को दिए गए ऋण के रूप में परिभाषित किया है।

NBFCs

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. NBFCs – अर्थ।
  2. प्रकार
  3. RBI के तहत NBFCs
  4. NBFC-MFI- पात्रता, कार्य।
  5. निवल स्वामित्व राशि (NOF) क्या है?
  6. अर्हक संपत्ति क्या होती हैं?
  7. लघु वित्त बैंक (SFB) क्या हैं?
  8. NBFCs, SFBs और भुगतान बैंकों के मध्य अंतर

मेंस लिंक:

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी – सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-MFIs) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

EOS-01:  भारत का नवीनतम पृथ्वी निगरानी उपग्रह


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान (ISRO) द्वारा श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्‍पेस सेंटर से ‘पृथ्वी निगरानी उपग्रह’ / ‘अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-1 (EOS-1) को प्रक्षेपित किया गया है। पिछले साल 11 दिसंबर को RISAT-2BR1 के प्रक्षेपण के बाद से यह ISRO का पहला मिशन है।

(नोट: इसरो द्वारा इस वर्ष जनवरी में एक संचार उपग्रह जीसैट –30 को भी अंतरिक्ष में भेजा गया था, किंतु इस उपग्रह को फ्रेंच गुयाना एरियन रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया था)।

EOS-01 क्या है?

यह एक पृथ्वी निगरानी उपग्रह (Earth Observation Satellite) है।

  • EOS-01 एक अन्य रडार इमेजिंग सैटेलाइट (Radar Imaging SatelliteRISAT) है, यह पिछले साल प्रक्षेपित किये गए RISAT-2B और RISAT-2BR1 उपग्रहों के साथ मिलकर काम करेगा।
  • EOS-01 के प्रक्षेपण के बाद से सभी पृथ्वी निगरानी उपग्रहों को EOS – सीरीज कहा जाएगा।

पृथ्वी निगरानी उपग्रहों का उपयोग

पृथ्वी निगरानी उपग्रहों (Earth Observation Satellites) का उपयोग, भूमि एवं वन मानचित्रण तथा निगरानी, ​​जल एवं खनिज या मछलियां आदि संसाधनों का मानचित्रण, मौसम और जलवायु निगरानी, मृदा-अवलोकन , भू-स्थानिक समोच्च मानचित्रण आदि कार्यो हेतु किया जाता है।

ऑप्टिकल उपकरणों की अपेक्षा रडार इमेजिंग के लाभ

रडार इमेजिंग में मौसम, बादल, कोहरे अथवा सौर-प्रकाश की कमी आदि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह सभी परिस्थितियों में और हर समय उच्च-गुणवत्ता वाले चित्र प्रदान कर सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रडार इमेजिंग क्या है?
  2. पृथ्वी-निगरानी उपग्रह क्या हैं?
  3. GSLV और PSLV के बीच अंतर
  4. EOS-01 के अनुप्रयोग
  5. पृथ्वी की निचली कक्षा और भूस्थिर कक्षाओं के मध्य अंतर

मेंस लिंक:

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (PSLV) दुनिया के सबसे विश्वसनीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों में से एक क्यों माना जाता है? यह भारत को व्यावसायिक और तकनीकी रूप से कैसे मदद कर रहा है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मानदंड


(Coastal Regulation Zone norms)

संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय द्वारा कोच्चि जिले में मरादु नगरपालिका के फ्लैट मालिकों को दिए जाने वाले मुआवजे को तय करने हेतु गठित केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. बालाकृष्णन अय्यर की एक सदस्यीय समिति के अधिदेश में विस्तार किया गया है।

इन फ्लैट मालिकों के घरों को राज्य में तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation ZoneCRZ) मानदंडो का उल्लंघन के कारण गिरा दिया गया था।

संबंधित प्रकरण (मामले की पृष्ठभूमि)

पिछले साल 23 सितंबर को शीर्ष अदालत द्वारा की गयी टिप्पणी के अनुसार, केरल के तटीय इलाकों में किया गया अवैध निर्माण, पर्यावरण के लिए एक ‘बहुत बड़ा नुकसान’ है, और कोच्चि के मरादु में इतने बड़े पैमाने पर इन अनाधिकृत संरचनाओं का निर्माण आश्चर्यजनक है।

  • शीर्ष अदालत ने केरल सरकार द्वारा तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) का उल्लंघन करते हुए बनाये गए चार अपार्टमेंट्स को ध्वस्त करने संबंधी आदेश का पालन नहीं किये जाने पर रोष व्यक्त किया और राज्य के मुख्य सचिव को इस अवैध निर्माण के कारण प्रकृति को होने वाली क्षति को मापने के लिए एक सर्वेक्षण करने को कहा।
  • 8 मई, 2019 को शीर्ष अदालत ने अधिसूचित तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) में निर्मित इन इमारतों को एक महीने के भीतर हटाए जाने का निर्देश दिया। कोच्चि का यह तटीय विनियमन क्षेत्र, केरल के ज्वार-प्रभावित जल निकाय का एक भाग है।

तटीय विनियमन क्षेत्र  मानदंड

पहली बार फरवरी 1991 में, भारत के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत, तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना जारी की गई थी।

वर्ष 2018 में, तटीय विनियमन क्षेत्र संबंधी नए नियम जारी किए गए थे। इनका उद्देश्य इस क्षेत्र में निर्माण पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाना, अनापत्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और तटीय क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित करना था।

तटीय विनियमन क्षेत्र  मानदंडों का उद्देश्य:

ये मानदंड, सागर तट से एक निश्चित दूरी के भीतर कुछ विशेष गतिविधियों, जैसे- बड़े निर्माण, नए उद्योगों की स्थापना, खतरनाक सामग्री का भंडारण या निपटान, खनन, भूमि-उपयोग परिवर्तन और बांध निर्माण पर रोक लगाते हैं ।

‘विनियमन क्षेत्र’ की परिभाषा

सभी नियमों में, विनियमन क्षेत्र (Regulation Zone) को उच्च-ज्वार रेखा से 500 मीटर तक के क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है।

CRZ में प्रतिबंध

  • CRZ में प्रतिबंध, क्षेत्र की आबादी, पारिस्थितिक संवेदनशीलता, किनारे से दूरी तथा क्षेत्र के प्राकृतिक उद्यान अथवा वन्यजीव क्षेत्र के रूप में अधिसूचित होने जैसे मानदंडों पर निर्भर करते है।
  • नए नियमों के अनुसार, मुख्यभूमि के तट के निकटवर्ती सभी द्वीपों और मुख्य भूमि के सभी अप्रवाही जल वाले (Backwater) द्वीपों के लिए 20 मीटर की सीमा तक नो-डेवलपमेंट ज़ोन घोषित किया गया है।

CRZ-III (ग्रामीण) के लिए प्रतिबंधो की दो भिन्न श्रेणियों को निर्धारित किया गया है:

  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, 2,161 प्रति वर्ग किमी जनसंख्या घनत्व सहित घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों (CRZ-IIIA) में, नो-डेवलपमेंट ज़ोन की सीमा, उच्च-ज्वार रेखा से 50 मीटर तक निर्धारित की गयी है, जबकि पहले यह सीमा 200 मीटर थी।
  • CRZ-IIIB श्रेणी (2,161 प्रति वर्ग किमी से कम जनसंख्या घनत्व वाले ग्रामीण क्षेत्र) में नो-डेवलपमेंट ज़ोन की सीमा, उच्च-ज्वार रेखा से 200 मीटर तक निर्धारित की गयी है।

कार्यान्वयन

हालांकि, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) संबंधी नियम केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा बनाए गए हैं, किन्तु, इनका कार्यान्वयन तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरणों (Coastal Zone Management Authorities) के माध्यम से राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CRZ मानदंड क्या हैं?
  2. CRZ की परिभाषा
  3. तटीय विनियमन क्षेत्रों का वर्गीकरण
  4. CRZ-III (ग्रामीण) क्षेत्रों के अंतर्गत श्रेणियाँ

मेंस लिंक:

पर्यावरणीय न्याय और वितरणात्मक न्याय के दृष्टिकोण से तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों का क्या तात्पर्य है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बांग्लादेश में ट्रांसजेंडरों के लिए मदरसा

बांग्लादेश में ट्रांसजेंडर मुसलमानों के लिए अपना पहला इस्लामिक स्कूल खोला गया है। मौलवियों ने इसे समाज में भेदभाव से ग्रस्त इस अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा में एकीकृत करने की दिशा में पहला कदम बताया है।

राष्ट्रीय जल पुरस्कार

जल संसाधन संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के प्रयासों का सम्मान करने के लिए दूसरे राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे।

पुरस्कार के बारे में:

  • ये पुरस्कार, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।
  • राष्ट्रीय जल पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों, जैसे सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान / नवाचार / नई तकनीक आदि में प्रदान किये जाते है।

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