[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 6 नवम्बर 2020

 

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सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: गरीबी एवं भूख से संबंधित विषय।

2. भारतीय समाज में गरीबी की गंभीरता में वृद्धि करने वाले कारकों की जाँच कीजिए। क्या आपको लगता है कि गरीबी का कारण न केवल व्यक्तिगत है बल्कि समाज की संरचना भी है? (250 शब्द)

सन्दर्भ:  www.ncbi.nlm.nih.gov

निर्देशक शब्द:

 जांच कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

गरीबी को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

देश में गरीबी को बढ़ाने में योगदान देने वाले प्रमुख कारणों पर चर्चा कीजिए।

भारतीय सामाजिक संरचना के उन विशिष्ट तत्वों के बारे में विस्तार से चर्चा कीजिए, जो गरीबी में वृद्धि करते हैं।

निष्कर्ष:

इसके समाधान के लिए क्या किया जाना चाहिए, इस दिशा में सरकार के प्रयासों पर टिप्पणी कीजिए और देश में गरीबी को कम करने के प्रयासों में बाधा बन रहे समाज के ढांचे में जागरूकता लाने और बदलाव लाने का सुझाव देते हुए निष्कर्ष निकलिए।

 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

2. राजनीति के अपराधीकरण के खतरे को रोकने में सक्षम न हो पाने के क्या कारण हैं? विश्लेषण कीजिए एवं इसके समाधान के लिए सुझाव भी दीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Indian Express

 निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजियेऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रमुख आंकड़ों की सहायता से देश में राजनीति के अपराधीकरण के कारकों को संक्षेप में समझाइये।

 विषय वस्तु:

राजनीति का अपराधीकरण से आपका क्या तात्पर्य है, समझाइए। इसके लिए उत्तरदायी विभिन्न कारकों पर चर्चा कीजिए।

कुछ पंक्तियों में उसके प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

इसके अवगुणों को सूचीबद्ध कीजिए, सुझाव दीजिए कि इससे उत्पन्न चुनौतियों को दूर करने के लिए क्या किया जाना चाहिए।

राजनीति के अपराधीकरण पर अंकुश लगाने के लिए शीर्ष न्यायालय के प्रयासों (संबंधित निर्णय) पर चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

इसके समाधान और आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: सा.अ.-2: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

सा.अ.-3: मीडिया की भूमिका।

3. टीआरपी (TRP) रेटिंग क्या है? ये रेटिंग कैसे दर्ज की जाती हैं? उनके महत्व पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Indian Express 

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

टीआरपी (TRP) क्या है, परिभाषित कीजिए।

विषय वस्तु:   

समझाइए कि भारत में ये रेटिंग कैसे दर्ज की जाती हैं।

इन रेटिंग के महत्व पर चर्चा कीजिए। इनसे सम्बंधित चुनौतियों (यदि कोई हो) का उल्लेख कीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।

4. वर्तमान समय में भारतीय राज्यों की घटती वित्तीय क्षमता, इसके प्रेरक कारक एवं इसके परिणामों पर चर्चा कीजिए। भारत में राजकोषीय संघवाद के मुद्दे के सन्दर्भ में टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu 

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सर्वप्रथम राजकोषीय संघवाद को परिभाषित कीजिए एवं वर्तमान में भारतीय राज्यों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

 विषय वस्तु:  

राज्यों की घटती वित्तीय क्षमता के कारकों पर टिप्पणी कीजिए; वास्तविक विचलन में ह्रास, कम होते जा रहे विभाज्य पूल, जीएसटी की कमी, केंद्रीय अनुदान में अनुपलब्धता / कमी इत्यादि।

राज्यों की वित्तीय क्षमता के उपर्युक्त कारकों के परिणामों पर चर्चा कीजिए।

इसके अल्पावधिक एवं दीर्घावधिक दोनों प्रकार के प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि राज्य ही वृध्दि एवं विकास का नेतृत्व करते हैं। एक सशक्त राज्य, सशक्त भारत का नेतृत्व करता है। यह देखते हुए कि राज्यों का कमजोर होना न तो संघवाद और न ही राष्ट्रीय हित में कार्य करता है, ऐसी कोई भी नीति, जो राज्यों की स्थिति या क्षमताओं को कमजोर करती हो, के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान किये जाने की आवश्यकता है।

  

विषय: सा.अ.-2: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

सा.अ.-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 5. “गंगा कायाकल्प एक सतत कार्य है, जिसमें जन भागीदारी की आवश्यकता है”, इस कथन का विश्लेषण कीजिए एवं हाल के दिनों में इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  pib.gov.in

 निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजियेऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

गंगा कायाकल्प के संदर्भ में की गई हालिया पहलों पर टिप्पणी कीजिए।

 विषय वस्तु:

गंगा नदी के कायाकल्प के लिए अतीत से लेकर वर्तमान तक सरकार द्वारा किये गए प्रयासों पर चर्चा कीजिए।

हाल ही में इस दिशा में प्रारम्भ की गई योजनाओं और नीतियों पर प्रकाश डालिए।

गंगा कायाकल्प जैसी परियोजनाओं में जन भागीदारी की आवश्यकता और महत्व को सामझाइए। इसके अतिरिक्त, इसके लिए किए जा रहे प्रयासों का विश्लेषण कीजिए।

निष्कर्ष:

इस प्रकार की परियोजनाओं में सार्वजनिक भागीदारी के महत्व को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।

6. “ए थ्योरी ऑफ़ जस्टिस” में, जॉन रॉल्स ने निष्पक्षता की एक सार्वभौमिक प्रणाली पेश की है। उन्होंने शासन की एक ऐसी प्रणाली का समर्थन किया है, जो अपने प्रभाव में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हो। स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

“ए थ्योरी ऑफ़ जस्टिस” (1971) में, रॉल्स ने निष्पक्षता की एक सार्वभौमिक प्रणाली और इसे प्राप्त करने के लिए प्रक्रियाओं का एक समूह पेश किया। उन्होंने शासन की एक ऐसी व्यावहारिक, आनुभविक रूप से सत्यापित प्रणाली का समर्थन किया, जो अपने प्रभावों में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हो।

विषय वस्तु:

जॉन रॉल्स के “न्याय के सिद्धांत” के बारे में संक्षेप में विचार प्रस्तुत कीजिए।

निष्पक्षता और इसके घटकों की सार्वभौमिक प्रणाली के बारे में विस्तार से बताइये।

चर्चा कीजिए कि वे शासन के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं पर कैसे लागू हो सकते हैं।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि चूंकि वर्तमान संदर्भ में न्याय और सामाजिक न्याय प्राप्त करना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, जॉन रॉल्स का न्याय का सिद्धांत व्यक्तियों, समाज और प्रशासकों, नेताओं को इसके आदर्शों का पालन करने और प्रचार करने का आह्वान करता है।

  

विषय: केस स्टडी।

 7. एक राज्य में, यह पाया जाता है कि विद्यालयों में जाति आधारित भेदभावपूर्ण प्रथाएं प्रचलन में हैं। इनमें अमानवीय प्रथाएं, जैसे कि छात्रों द्वारा जाति बैंड पहनना, दलित जातियों के छात्रों को शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों द्वारा विद्यालयों में शौचालय साफ करने के लिए मजबूर किया जाना, दलित छात्रों को पीछे की सीटों पर बिठाया जाना, मातापिता द्वारा आंगनवाड़ियों में एक दलित रसोइया का विरोध करना आदि शामिल हैं।

 राज्य में सर्व शिक्षा अभियान की कार्यप्रणाली की एक रिपोर्ट ने भी विद्यालयों में भेदभावपूर्ण प्रथाओं की पुष्टि की। इस प्रकार के भेदभाव से विद्यालयों में दलित बच्चों के नामांकन पर प्रभाव पड़ रहा है। आप राज्य के किसी एक जिले में बीडीओ हैं, जहां इस प्रकार की प्रथाएं देखी जाती हैं। राज्य सरकार ने विद्यालयों में भेदभावपूर्ण प्रथाओं के खिलाफ एक परिपत्र जारी किया है। (250 शब्द) 

  1. परिपत्र को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने में आपका क्या दृष्टिकोण होगा? 
  1. ऐसी प्रथाओं के लिए उत्तरदायी सामाजिकमनोवैज्ञानिक कारकों की व्याख्या कीजिए।

निर्देशक शब्द:

 व्याख्या कीजिये- प्रश्न में पूछी गई जानकारी को सरल भाषा में व्यक्त कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सर्वप्रथम आपके समक्ष उपस्थित मामले का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।

 विषय वस्तु:

इसमें शामिल हितधारकों की पहचान कीजिए।

सम्बंधित मुद्दों को प्रस्तुत कीजिए; विद्यालय में जाति आधारित भेदभावपूर्ण प्रथाएँ, अधिकारियों द्वारा जाँच में कमी, उच्च जाति का प्रभुत्व आदि।

जिले के बीडीओ होने के नाते इन समस्याओं के समाधान के लिए आप क्या कार्रवाई करेंगे।

ऐसी प्रथाओं के लिए उत्तरदायी सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कारकों के बारे में विस्तार से बताएं।

निष्कर्ष:

इसके समाधान के लिए उपाय बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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