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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 4 November

 

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. ला–नीना (La Niña)

 

सामान्य अध्ययन-II

1. प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP)

2. अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए निर्वाचन प्रक्रिया

 

सामान्य अध्ययन-III

1. चावल को पोषणयुक्त बनाने हेतु परियोजना

2. श्रीलंका में समुद्र तट पर फंसी 100 से अधिक ह्वेल

3. प्रोजेक्ट लायन: छह पुनर्वास स्थलों की पहचान

4. WWF द्वारा वर्ष 2050 तक ‘गंभीर जल-संकट’ का सामना करने वाले 100 शहरों की पहचान

 

प्रारम्भिक परीक्षा के लिए तथ्य

1. वर्चुअल ग्लोबल इनवेस्टर राउंडटेबल (VGIR)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ।

ला–नीना (La Niña)


संदर्भ:

29 अक्टूबर, 2020 को जारी विश्व मौसम संगठन (World Meteorological OrganizationWMO) के नवीनतम वैश्विक मौसमी अपडेट के अनुसार- मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में लगभग एक दशक के पश्चात ला–नीना (La Niña) मौसमी परिघटना की वापसी हुई है।

निहितार्थ:

  • ला–नीना के परिणामस्वरूप सागरीय सतह के तापमान में औसत से दो-तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है।
  • ला–नीना की स्थिति वर्ष 2021 तक कायम रह सकती है, जिससे विश्व के कई भागों में तापमान, वर्षा और चक्रवातों के पैटर्न प्रभावित हो सकते हैं।

ला–नीना क्या है?

ला–नीना (La Niña) एक मौसमी परिघटना है, जिसके दौरान मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के सतहीय तापमान में असामन्य रूप से कमी आती है और इसके साथ ही उष्णकटिबंधीय वायुमंडलीय परिसंचरण, अर्थात् हवाओं, दबाव और वर्षा में व्यापक रूप से परिवर्तन होता है।

  • ला–नीना का मौसम और जलवायु पर अल–नीनो के ठीक विपरीत प्रभाव पड़ता है। अल-नीनो दक्षिणी दोलन (El Niño Southern Oscillation- ENSO) के दौरान प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में सतहीय तापमान में वृद्धि हो जाती है।

ला-नीना के कारण मौसम में बदलाव:

  1. ला-नीना के कारण, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका और मध्य एशिया में औसत से कम वर्षा होगी।
  2. पूर्वी अफ्रीका को सामान्य स्थितियों से अधिक सूखे का सामना करना पड़ सकता है, इसके साथ ही इस क्षेत्र में रेगिस्तान टिड्डियों के हमलों के कारण खाद्य सुरक्षा की स्थिति भयावह हो सकती है।
  3. ला-नीना के आने से दक्षिणी अफ्रीका में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।
  4. इससे दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तीव्रता में कमी हो सकती है, जिससे इस क्षेत्र में मौसम व्यापक रूप से प्रभावित होगा।
  5. इसके आने से दक्षिण पूर्व एशिया, कुछ प्रशांत द्वीप समूहों और दक्षिण अमेरिका के उत्तरी क्षेत्र में औसत से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है।
  6. ला-नीना के आने से भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होगी, जिससे देश के विभिन्न भागों में बाढ़ की प्रवणता में वृद्धि होगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अल-नीनो क्या है?
  2. ला-नीना क्या है?
  3. ENSO क्या है?
  4. ये घटनाएँ कब होती हैं?
  5. एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया पर ENSO का प्रभाव

मेंस लिंक:

ला–नीना मौसमी परिघटना के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चर्चा कीजिए।

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स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP)


(Pradhan Mantri Bhartiya Janaushdhi Pariyojana)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) की सविस्तार समीक्षा बैठक की गयी।

  • चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों (31 अक्टूबर तक) के दौरान जन-आयुष दुकानों के माध्यम से 358 करोड़ रुपये के फार्मा उत्पादों की बिक्री की गयी।
  • 2019-20 में 419 करोड़ रुपये के मुकाबले इस वित्त वर्ष में 600 करोड़ रुपये से अधिक के फार्मा उत्पादों की बिक्री होने की संभावना है

PMBJP के बारे में:

यह रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग द्वारा चलाया गया एक अभियान है।

  • इसके अंतर्गत विशेष केंद्रों के माध्यम से आम लोगों को सस्ती कीमत पर गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध करायी जाती है। इन विशेष केंद्रों को प्रधान मंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र के रूप में जाना जाता है।
  • इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2008 में की गयी थी, तथा वर्ष 2015 में इस योजना को फिर से नए रूप में किया शुरू गया था।

कार्यान्वयन

  • इस योजना का कार्यान्वयन ‘भारतीय फार्मा पीएसयू ब्यूरो’ (Bureau of Pharma PSUs of India- BPPI) के द्वारा किया जाता है।
  • भारतीय फार्मा पीएसयू ब्यूरो’ (BPPI) की स्थापना फार्मास्युटिकल विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत की गई है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इस योजना का आरंभ कब किया गया था?
  2. इसका नाम परिवर्तन कब किया गया?
  3. यह योजना किस मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी?
  4. BPPI के बारे में- स्थापना और कार्य
  5. जेनेरिक दवाएं क्या है?

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना (PMBJP) की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारतीय संवैधानिक योजना की अन्य देशों के साथ तुलना।

अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए निर्वाचन प्रक्रिया


(How is the American President elected?)

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के राष्ट्रपति पद पर चुने जाने हेतु पात्रताएं

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर चुने जाने के लिए किसी उम्मीदवार को निम्नलिखित शर्ते पूरा करना आवश्यक होता है:

  1. उम्मीदवार को संयुक्त राज्य अमेरिका का जन्म से नागरिक होना चाहिए।
  2. न्यूनतम 14 साल से संयुक्त राज्य अमेरिका का निवासी होना चाहिए।
  3. उम्मीदवार की आयु 35 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

मतदान कौन कर सकता है?

अमेरिकी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का निर्वाचन लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जाता है। इसके बजाय, इन्हें निर्वाचक मण्डल (Electoral College) नामक एक प्रक्रिया के माध्यम से ‘निर्वाचकों’ (Electors) द्वारा चुना जाता है।

निर्वाचक मंडल पद्धति प्रक्रिया

प्रत्येक राज्य से निर्वाचकों की संख्या, उस राज्य की जनसँख्या-आकार के लगभग अनुरूप होती है।

प्रत्येक राज्य के पास निर्वाचकों की संख्या भिन्न होती है, यह संख्या अमेरिकी कांग्रेस (हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स और सीनेट) में राज्य के प्रतिनिधियों की संख्या के अनुपात में निर्धारित होती है।

  • निर्वाचक मण्डल में कुल 538 सदस्य होते हैं जो अलग-अलग राज्यों से आते हैं। जनता सीधे तौर पर इन्हीं सदस्यों को चुनती है जो आगे जाकर राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।
  • प्रत्येक निर्वाचक एक चुनावी मत का प्रतिनिधित्व करता है, और राष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 270 या अधिक निर्वाचकों के समर्थन की जरूरत होती है।

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किसी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होने पर क्या होता है?

चुनाव में किसी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होने की स्थिति में अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन (House of Representatives) के सदस्यों द्वारा राष्ट्रपति का चुनाव करने हेतु मतदान किया जाता है।

  • अमेरिकी इतिहास में इस प्रकार की स्थिति केवल एक बार हुई है, वर्ष 1824 के राष्ट्रपति चुनाव में ‘निर्वाचकों के मत’ चार उम्मीदवारों में विभाजित हो गए और किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।
  • वर्तमान में अमेरिकी चुनाव प्रणाली में दो दलों का वर्चस्व होने के कारण, इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शासन की संसदीय और अध्यक्षीय प्रणाली के मध्य अंतर
  2. अमेरिकी राष्ट्रपति का निर्वाचन किस प्रकार किया जाता है?
  3. भारत और अमेरिका के राष्ट्रपति के मध्य अंतर

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चावल को पोषणयुक्त बनाने हेतु परियोजना


(Scheme on Fortification of Rice)

संदर्भ:

चावल को पोषणयुक्त बनाने (Fortification of Rice) तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए इसके वितरण को मजबूत करने हेतु केन्द्र प्रायोजित पायलट योजना लागू करने के लिए 15 राज्यों की पहचान की गई है।

इस पायलट योजना को 2019-2020 से आरंभ होकर तीन साल की अवधि के लिए मंजूरी दी गई है।

पोषणयुक्त चावल किस प्रकार बनाया जाता है?

किसी खाद्यान्न को पोषणयुक्त बनाने के लिए उसमे सावधानी से आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों अर्थात् विटामिन और खनिज तत्वों, की मात्रा में वृद्धि की जाती है। इसका उद्देश्य आपूर्ति किए जाने वाले खाद्यान्न की पोषण गुणवत्ता में सुधार करना तथा न्यूनतम जोखिम के साथ उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना है।

चावल को पोषणयुक्त बनाना (Rice Fortification), चावल में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा की वृद्धि करना और चावल की पोषण गुणवत्ता में सुधार करने की एक विधि होती है।

पोषणयुक्त चावल/ राइस फोर्टिफिकेशन की आवश्यकता

चावल विश्व का सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख भोजन है। प्रतिदिन लगभग 2 बिलियन लोग चावल का भोजन के रूप में खाते हैं तथा यह एशिया और अफ्रीका के अधिकाँश भाग में आहार का मुख्य आधार है।

  • मिल से निकले हुए सामान्य चावल में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती है, और यह शरीर में मुख्य रूप से केवल कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति करता है। पोषण को बेहतर बनाने के लिए राइस फोर्टिफिकेशन एक प्रमुख तरीका है।
  • पोषणयुक्त चावल में विटामिन ए, विटामिन बी 1, विटामिन बी 12, फोलिक एसिड, आयरन और जिंक उपयुक्त मात्रा में पाए जाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जैव फोर्टिफिकेशन बनाम आनुवंशिक परिवर्तन
  2. सूक्ष्म पोषक बनाम वृहद पोषक तत्व
  3. भारत में जैव उर्वरक और जीएम फसलों के लिए स्वीकृति
  4. भारत में अनुमति प्राप्त जीएम फसलें

मेंस लिंक:

किसी खाद्यान्न को पोषणयुक्त बनाने से आप क्या समझते हैं? इसके फायदों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

श्रीलंका में समुद्र तट पर फंसी 100 से अधिक ह्वेल


संदर्भ:

हाल ही में श्रीलंका में समुद्र तट पर फंसी 100 से अधिक ह्वेल मछलियों को बचाया गया है। इस बचाव कार्य को नौसेना द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिकारियों, पुलिस और स्थानीय निवासियों की सहायता से किया गया।

ह्वेल मछलियों के समुद्र तट स्वतः आने का कारण

ह्वेल अंतर्पणन (Cetacean stranding) को आमतौर पर समुद्र तट पर आने/ बीचिंग (Beaching) के रूप में जाना जाता है। इस शब्द का प्रयोग, प्रायः डॉल्फिन और ह्वेल मछलियों के समुद्र तट पर फंस जाने की घटना के संदर्भ में किया जाता है।

ह्वेल बीचिंग, कोई असामान्य घटना नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि इस परिघटना के कारणों के बारे अभी तक पता नहीं है, किंतु इस संदर्भ में कई सिद्धांत पेश किये गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • पानी के तापमान में परिवर्तन
  • ह्वेल के प्रतिध्‍वनिस्थान-निर्धारण (Echolocation) में अनियमितताएँ
  • भू-चुम्बकत्व में गड़बड़ी (Geomagnetic disturbances)
  • नेविगेशन में त्रुटियां
  • समुद्र तट के निकट भोजन की उपस्थिति
  • सोनार व्यतिकरण (Sonar interference)
  • कठोर मौसम

सामूहिक अंतरपणन (Mass Stranding) का कारण:

ह्वेलों (Cetaceans) का एक जटिल समाजिक व्यवस्था के तहत बड़े समूहों में रहना एक आम बात है। यदि इनके समूह के कोई सदस्य बीमार हो जाता है, अथवा किसी मुसीबत में फंस जाता है, तो उसकी सहायता की पुकार सुनकर समूह के अन्य सदस्य समुद्र तट की ओर पहुँच जाते है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर सामूहिक अंतरपणन (Mass Stranding) की घटनाएँ होती है।

पायलट ह्वेल (Pilot Whales) काफी सामाजिक स्तनधारी जीव होते हैं, तथा विशेष रूप से सामूहिक अंतरपणन के लिए जाने जाते है। पायलट ह्वेल, बड़े और परस्पर गुथित समूहों में यात्रा करते हैं और सतत संचार पर निर्भर रहते हैं।

हालिया उदाहरण:

  • सितंबर महीने में, ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया तट पर कई सौ व्हेलों की मौत हो गई। यह ऑस्ट्रेलिया के रिकॉर्ड में अब तक सबसे बड़े सामूहिक अंतरपणन की घटना थी।
  • अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार- इतिहास में सबसे बड़ा सामूहिक अंतरपणन वर्ष 1918 में प्रशांत महासागर में न्यूजीलैंड के केथम द्वीप (Chatham Islands) के तट पर हुआ था, जिसमे 1,000 ह्वेल मछलियाँ तट पर आकर फंस गयी थी।

पायलट ह्वेल के बारे में:

  • इन्हें पायलट ह्वेल नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इन ह्वेल के समूह को एक पायलट या नेता द्वारा नेविगेट किया जाता है।
  • पायलट ह्वेल की दो प्रजातियां पायी जाती हैं: लघु पंख वाले पायलट ह्वेल, जो मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और गर्म-समशीतोष्ण क्षेत्रों में पाई जाती हैं, तथा लंबे पंख वाले पायलट ह्वेल, जो ठंडे पानी में रहते हैं।
  • दोनों प्रजातियां IUCN की रेड लिस्ट में अपर्याप्त डेटा वाली संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में दर्ज हैं।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

प्रोजेक्ट लायन: छह पुनर्वास स्थलों की पहचान


पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त, 2020 को घोषित ‘प्रोजेक्ट लायन’ (Project Lion) के तहत कूनो-पालपुर वन्यजीव अभयारण्य के अलावा छह नए पुनर्वास स्थलों की पहचान की गयी है।

इन नए छह स्थलों में निम्नलिखित को सम्मिलित किया गया है:

  1. माधव राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश
  2. सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य, राजस्थान
  3. मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, राजस्थान
  4. गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य, मध्य प्रदेश
  5. कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, राजस्थान
  6. जेसोर-बलराम अंबाजी वन्यजीव अभयारण्य और निकटवर्ती क्षेत्र, गुजरात

वर्ष 1995 में कुनो वन्यजीव अभयारण्य को शेरों के वास हेतु एक वैकल्पिक स्थल के रूप में चिह्नित किये जाने के समय से ही शेरों के पुनर्वास संबंधी बातें जारी हैं।

शेरों के पुनर्वासन की आवश्यकता

  • गिर में जीवों की आबादी में आनुवंशिक विविधता काफी कम है, जिससे इस क्षेत्र के जीवों में किसी महामारी के फैलने संबंधी खतरे अधिक हैं।
  • गुजरात के 30,000 वर्ग किमी क्षेत्र में शेरों की आबादी पायी जाती है, जिसे एशियाई शेर परिदृश्य (Asiatic Lion LandscapeALL) कहा जाता है।
  • इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2013 में गुजरात सरकार के लिए एशियाई शेरों को कूनो-पालपुर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था।

एशियाई शेरों के बारे में:

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की रेड सूची के अंतर्गत संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध।
  • भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972’ के तहत अनुसूची-I में सूचीबद्ध।
  • एशियाई शेरों की आबादी भारत के गुजरात राज्य तक ही सीमित है। यह मुख्यतः गिर के जंगलों और जूनागढ़, अमरेली तथा भावनगर ज़िलों में फैले कुछ अन्य संरक्षित क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एशियाई शेर बनाम अफ्रीकी शेर- संरक्षण स्थिति और वितरण
  2. शेरों की पहली गणना कब हुई थी?
  3. गणना- नर-मादा संख्या, संख्या में वृद्धि, क्षेत्र में विस्तार
  4. शेरों के पुनर्वास पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था?
  5. एशियाई शेर संरक्षण परियोजना क्या है?
  6. भारतीय संविधान की 7 वीं अनुसूची के तहत वन्यजीव।
  7. गिरि जंगलों के बारे में

मेंस लिंक:

एशियाई शेर संरक्षण परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

WWF द्वारा वर्ष 2050 तक ‘गंभीर जल-संकट’ का सामना करने वाले 100 शहरों की पहचान


संदर्भ:

प्रकृति संरक्षण हेतु विश्व वन्यजीव कोष (Worldwide Fund for Nature-WWF) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार,  विश्व के 100 शहरों के सामने वर्ष 2050 तक ‘गंभीर जल-संकट’ की समस्या का संकट उत्पन्न हो जायेगा, जिसमे भारत के भी 30 शहर सम्मिलित है।

इन चिह्नित शहरों में सम्मिलित प्रमुख शहर:

  • वैश्विक केंद्र: बीजिंग, जकार्ता, जोहान्सबर्ग, इस्तांबुल, हांगकांग, मक्का और रियो डी जनेरियो आदि।
  • भारतीय शहर: जयपुर, इंदौर, ठाणे, श्रीनगर, राजकोट, बेंगलुरु आदि।
  • विश्व वन्यजीव कोष द्वारा चिह्नित कुल शहरों में आधे से अधिक शहर चीन और भारत के हैं।

संबंधित चिंताएं और चुनौतियाँ

चिह्नित शहरों में ‘गंभीर जल-संकट’ का प्रमुख कारण इनकी आबादी में होने वाली नाटकीय वृद्धि होगा। इन शहरों की आबादी, वर्ष 2020 की 17 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2050 तक 51 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

आगे की राह

  1. इन शहरों में प्रकृति-आधारित समाधानों में अधिक निवेश किये जाने, जल-संकट को कम करने हेतु नदी घाटियों, वाटरशेड और वेटलैंड्स के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  2. इन पहलों का प्रबंधन करने के लिए, निजी क्षेत्र के साथ मिलकर निवेश करने, जोखिम कम करने और लाभ प्राप्त करने तथा सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सार्वजनिक वित्त पूल को गठित करने की आवश्यकता है।
  3. शहरों को इन हालातों तक पहुँचने से बचने हेतु ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए वैश्विक प्रयासों का अधिकतम समर्थन करने की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. WWF के बारे में
  2. WWF की रिपोर्ट में चिह्नित महत्वपूर्ण वैश्विक शहर
  3. WWF की रिपोर्ट में चिह्नित प्रमुख भारतीय शहर

मेंस लिंक:

जल-संकट से आप क्या समझते हैं? भारत में पानी की कमी और इसके कारणों की गंभीर रूप से चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


वर्चुअल ग्लोबल इनवेस्टर राउंडटेबल (VGIR)

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 5 नवंबर, 2020 को वर्चुअल ग्लोबल इन्वेस्टर राउंडटेबल (VGIR) की अध्यक्षता करेंगे।

  • इस VGIR का आयोजन वित्त मंत्रालय, भारत सरकार तथा राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) द्वारा किया जा रहा है।
  • यह अग्रणी वैश्विक संस्थागत निवेशकों, भारतीय व्यापार जगत के प्रमुखों और भारत सरकार तथा वित्तीय बाजार नियामकों के शीर्ष नीति-निर्माताओं के बीच एक विशेष संवाद है।

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