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सामान्य अध्ययन – 2
विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।
1. अमेरिकी संविधान, अपने सभी प्रावधानों में, “अविनाशी राज्यों से निर्मित अविनाशी संघ” प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर भारत “विनाशकारी राज्य का अविनाशी संघ” है। दोनों की तुलना कीजिए एवं अंतर स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Indian Express
निर्देशक शब्द:
स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
संघ और राज्य के संबंध में भारतीय संविधान के प्रावधानों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
विषय वस्तु:
संयुक्त राज्य में निर्वाचक मंडल के पास अभी भी राष्ट्रपति के चुनाव की शक्तियां क्यों हैं, विस्तार से समझाइये। इस तथ्य पर चर्चा कीजिए कि राज्य विधानसभाओं में यह निर्धारित करने की शक्ति निहित है कि अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव कौन करेगा।
भारतीय संवैधानिक व्यवस्था पर चर्चा कीजिए, दोनों की तुलना कीजिए एवं विभेद स्पष्ट कीजिए, दोनों शासन प्रणालियों के औचित्य के पुष्टिकरण के लिए अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
दोनों प्रणालियों से समबद्ध खामियों पर प्रकाश डालिए।
निष्कर्ष:
दोनों प्रणालियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
2. भारत अंततः उन लोकतंत्रों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिन्होंने सम लैंगिक संबंधों का वि-अपराधीकरण किया है। अब ऐसे लोकतंत्रों की श्रेणी में शामिल होने का समय आ गया है, जो अपने नागरिकों को विवाह हेतु व्यक्ति का चयन करने के अधिकार को मान्यता देते हैं। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Indian Express
निर्देशक शब्द:
टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
सर्वप्रथम प्रश्न की पृष्ठभूमि पर संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
विषय वस्तु:
इस तथ्य को स्पष्ट कीजिए कि भारत अंततः उन लोकतंत्रों में शामिल हो गया है, जिन्होंने सम लैंगिक संबंधों का विअपराधीकरण किया है। अब उन लोकतंत्रों की श्रेणी में शामिल होने का समय आ गया है, जो किसी भी नागरिक को विवाह हेतु चयन का अधिकार देता है।
सम लैंगिक संबंधों में शामिल व्यक्तियों द्वारा सामना की जा रही चिंताओं और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
समझाइये कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था में इसके अब तक क्या निहितार्थ रहे हैं। गैर-स्वीकृति के कारणों को प्रस्तुत कीजिए।
उनके विवाह के संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए क्या किया जाना चाहिए, सुझाव दीजिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
3. देश में पोषण सुनिश्चित करने के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण के साथ रणनीतिक, साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप को कार्यान्वित करना, बाल एवं महिला पोषण में निवेश के लिए आर्थिक प्रतिफल सुनिश्चित करने की कुंजी है। स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Financial Express
निर्देशक शब्द:
स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
प्रमुख रिपोर्ट और आंकड़े प्रस्तुत करते हुए देश में महिलाओं और बच्चों के पोषण की स्थिति को दर्शाइए।
विषय वस्तु:
समझाइए कि पहले 1,000 दिनों में पोषण सुनिश्चित करने के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण के साथ रणनीतिक, साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप को कार्यान्वित करना आवश्यक क्यों है।
देश में पोषण से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
इस दिशा में अतीत से वर्तमान तक की नीतियों को सूचीबद्ध कीजिए, जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसे संबोधित करने के तरीके को बदलने की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
संदर्भित लेख से संकेत लेते हुए उपयुक्त समाधान सुझाएं।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
4. भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के विकास के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: vikaspedia.in
निर्देशक शब्द:
आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
अनुसूचित जातियाँ देश में वे जातियाँ / नस्लें हैं, जो अस्पृश्यता की सदियों पुरानी प्रथा से उत्पन्न विषम सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन तथा बुनियादी सुविधाओं और भौगोलिक अलगाव से पीड़ित हैं तथा जिन्हें अपने हितों की रक्षा और उनके त्वरित सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए विशेष महत्त्व दिए जाने की आवश्यकता है।
विषय वस्तु:
देश में अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए उपलब्ध संवैधानिक व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और अनुसूचित जाति के विकास के प्रति उसकी जिम्मेदारियों पर चर्चा कीजिए।
अनुसूचित जाति के विकास के लिए प्रारम्भ की गई पहलों के बारे में विस्तार से बताइए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 3
विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।
5. “भारत में बाढ़ एक आवर्तक घटना रही है तथा इससे जान, माल, आजीविका व्यवस्था, बुनियादी ढाँचे, और सार्वजनिक क्षमताओं को भारी नुकसान होता है।” उपर्युक्त कथन के आलोक में, आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए कि भारत में अनियोजित शहरीकरण इन समस्याओं को कैसे प्रेरित करता है। (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
यह समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए कि बाढ़ के मैदानी क्षेत्रों में शहरीकरण के कारण बाढ़ के खतरे में वृद्धि हुई है।
विषय वस्तु:
शहरीकरण बाढ़ को कैसे प्रभावित करता है? समझाइए।
केस स्टडी की सहायता से इस चुनौती का सामना करने के लिए उपाय बताइये।
निष्कर्ष:
देश में शहरीकरण के कारण बाढ़ की घटनाओं में होने वाली लगातार वृद्धि के समाधान के लिए उपाय बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 4
विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।
6. नैतिकता, सामाजिक मानदंडों से ग्रहण की जाती है लेकिन सभी सामाजिक मानदंड नैतिक नहीं होते हैं। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन
निर्देशक शब्द:
स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
सामाजिक मानदंड का अर्थ संक्षेप में स्पष्ट करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
सामाजिक मानदंडों को परिभाषित कीजिए।
समझाइए कि नैतिकता के विकास में सामाजिक मानदंड कैसे योगदान देते हैं।
सभी सामाजिक मानदंडों को नैतिक क्यों नहीं माना जा सकता है, स्पष्ट कीजिए।
उपर्यक्त की पुष्टि के लिए उदाहरण दीजिए।
निष्कर्ष:
निष्कर्ष निकालिेए कि नैतिकता केवल सामाजिक मानदंडों से ही सम्बंधित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक शब्द है।
विषय: भ्रष्टाचार की चुनौतियां।
7. लोक प्रशासन में भ्रष्टाचार से क्या तात्पर्य है? सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के क्या कारण हैं? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Indian Express
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार के सन्दर्भ में संक्षेप में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
लोक प्रशासन को परिभाषित कीजिए।
सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कारणों की व्याख्या कीजिए।
उपर्युक्त के पुष्टिकरण के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
निष्कर्ष:
इसके समाधान की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।








