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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 2 नवम्बर 2020

 

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: भारतीय संस्कृति, जिसमें प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

1. भारत में प्रमुख सूफी व्यवस्था पर एक लेख लिखिए। उनका लक्ष्य क्या था? समझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: मध्यकालीन भारतीय इतिहास NCERT: आर एस शर्मा

 निर्देशक शब्द:

 लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।

 समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सूफी व्यवस्था को समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

सूफी व्यवस्था के तीन भाग हैं:

सिलसिला – सूफी संतों ने अनेक सिलसिलों का निर्माण किया। तेरहवीं शताब्दी तक, 12 सूफी सिलसिले थे।

खानकाह- सूफी संत खानकाह में रहते थे। संतों का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न धर्मों के भक्त इन खनकाहों में आते थे।

समा – संगीत और नृत्य का आयोजन।

उनके प्रारंभिक इतिहास पर प्रकाश डालिए।

समझाइए कि कैसे उन्होंने इस्लाम को बदलने और भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया।

उनके प्रमुख लक्ष्यों पर चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

उनके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्मनिरपेक्षता।

2. सांप्रदायिकता का कैंसर, सांप्रदायिक हमले भारतीय राष्ट्र के शरीर को प्रभावित करते हैं, टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Times of India

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सांप्रदायिकता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

भारत में सांप्रदायिकता के कारण और परिणामों पर चर्चा कीजिए।

सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाले वाले कारणों को सूचीबद्ध कीजिए। अतीत से लेकर वर्तमान तक के उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

भारतीय समाज पर सांप्रदायिकता के प्रभावों को सोदाहरण समझाइए।

सांप्रदायिकता के प्रभाव को नियंत्रित करने और रोकने के लिए इस दिशा में सरकार के प्रयासों का सुझाव दीजिए।

निष्कर्ष:

क्या किया जाना चाहिए; सरकार, नागरिकों और अन्य हितधारकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

3. दिन के समय की बचत (Daylight savings time) के लाभ एवं हानि दोनों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Indian Express 

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सर्वप्रथम दिन के समय की बचत (Daylight savings time) को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:   

इस अवधारणा की उत्पत्ति और इसकी शुरूआत के बारे में संक्षेप में चर्चा कीजिए।

इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों पर प्रकाश डालिए।

भारतीय समय के संबंध में इसके परिवर्तनों पर संक्षेप में चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

एक निष्पक्ष और संतुलित राय के साथ इस बात की पुष्टि करते हुए कि क्या दिन के समय की बचत (Daylight savings time) अच्छा है या बुरा है और वर्तमान आधुनिक समय में इसकी क्या उपयोगिता है, निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण एवं नवीन प्रौद्योगिकी का विकास। आपदा तथा आपदा प्रबंधन।

 4. देश में प्रभावी आपदा प्रबंधन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu 

निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

देश में आपदाओं की प्रवणता को दर्शाने वाले कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:  

आपदा प्रबंधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की क्या भूमिका है, स्पष्ट कीजिए।

मौसम पूर्वानुमान उपकरण, भूकंप की पहचान आईसीटी उपकरण, बाढ़ चेतावनी प्रणाली आदि की भूमिका पर प्रकाश डालिए।

समझाइए कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से देश में आपदा प्रबंधन को बेहतर कैसे किया जा सकता है।

उत्तर को और अधिक स्पष्ट रूप से समझाने के लिए मामला अध्ययन प्रस्तुत कीजिए।

 निष्कर्ष:

प्रभावी आपदा प्रबंधन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 5. जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन से मानवीय चिंताओं में अत्यंत कमी आएगी। स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: pib.gov.in

 निर्देशक शब्द:

 स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रमुख तथ्यों/ आंकड़ों के साथ देश और विश्व भर में जल संसाधनों की वर्तमान स्थितियों के बारे में संक्षेप में बताइए।

 विषय वस्तु:

जल संसाधनों से जुड़ी मानवीय चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

एक प्रभावी जल प्रबंधन, मानवीय चिंताओं को कैसे कम कर सकता है, स्पष्ट कीजिए।

उदाहरण सहित चर्चा कीजिए एवं औचित्य दीजिए।

निष्कर्ष:

यह समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए कि 21 वीं सदी में जल संकट, जल की वास्तविक कमी एवं तनाव के संकट की तुलना में उसके प्रबंधन से बहुत हद तक संबंधित है। इस प्रकार समय पर इसे संबोधित करना समय की मांग है।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

6. जैन नैतिकता के स्रोतों एवं आधार के बारे में समझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: opensiuc.lib.siu.edu

 निर्देशक शब्द:

समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

जैन नैतिकता के घटकों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

विषय वस्तु:

जैन नैतिक संहिता दो धर्मों या आचरण के नियमों को निर्धारित करती है। एक उन लोगों के लिए जो संन्यासी बनना चाहते हैं और दूसरे श्रावक (गृहस्थ) के लिए। दोनों के लिए पाँच मौलिक संकल्प निर्धारित किये गए हैं। इन संकल्पों को श्रावक (गृहस्थ) द्वारा आंशिक रूप से अपनाया जाता है और उन्हें अणुव्रत (छोटी प्रतिज्ञा) कहा जाता है। संन्यासी इन संकल्पों का पालन अधिक सख्ती से करते हैं और इसलिए पूर्ण संयम का पालन करते हैं।

ये पाँच संकल्प हैं:

  • अहिंसा
  • सत्य
  • अस्तेय
  • ब्रह्मचर्य
  • अपरिग्रह

जैन नैतिकता के महत्व और उनके अनुप्रयोग पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

उत्तर के एक भाग में जैन धर्म के नैतिकता के स्रोतों को भी स्पष्ट कीजिए।

निष्कर्ष:

इस प्रकार के नैतिक दिशानिर्देशों और शिक्षाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

 7. नैतिक कर्तव्य के संदर्भ में कांट के विचारों को स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

नैतिकता के बारे में कांट के विचारों पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

कांट के द्वारा नैतिक कर्तव्य की व्याख्या किस रूप में की गयी है, स्पष्ट कीजिए।

नैतिक कर्तव्य पर उनके विचारों की पुष्टि करने के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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