Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 October

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को जमीन खरीदने की अनुमति

2. सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (SIAC)

3. यूरोपीय संघ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. इंडीजीन कार्यक्रम

2. पीली धूल

3. अमेरिका की ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची

4. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. परम्परा श्रृंखला – संगीत और नृत्य के राष्ट्रीय पर्व

2. हार्पून तटीय रक्षा प्रणाली

3. 27 अक्टूबर: इन्फैंट्री दिवस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को जमीन खरीदने की अनुमति


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश के लिए नए भूमि कानूनों को अधिसूचित किया गया है। गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A को निरस्त करने से पहले, गैर-निवासी जम्मू-कश्मीर में कोई अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते थे।

नए परिवर्तनों को किसके द्वारा लागू किया गया है?

  • गृह मंत्रालय द्वारा लागू किये गए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का संयोजन) तीसरा आदेश, 2020 (UT of J&K Reorganisation (Adaptation of Central Laws) Third Order, 2020) से जम्मू-कश्मीर में पहले से लागू 11 भूमि कानूनों को निरस्त कर दिए गए हैं।
  • इन निरस्त किये गए कानूनों में ‘जम्मू-कश्मीर बड़ी भू-संपदा उन्मूलन अधिनियम (J&K Big Landed Estates Abolition Act) भी सम्मिलित है, जिसके द्वारा ‘जोतने वाले को जमीन’ का अधिकार दिया गया था।

नवीनतम परिवर्तन

  • नए लागू किए गए जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम (J&K Development Act) के तहत, जम्मू-कश्मीर से बाहर के निवेशकों द्वारा केंद्र शासित प्रदेश में निवेश करने का मार्ग प्रशस्त करने हेतु ‘राज्य का स्थायी निवासी’ होने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
  • कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जाने वाली कोई भी भूमि जिला कलेक्टर की अनुमति के बिना किसी भी गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं की जाएगी।
  • सरकार, अब जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य और माध्यमिक या उच्च शिक्षा अथवा विशिष्ट शिक्षा के प्रसार के उद्देश्य से किसी व्यक्ति या संस्था के पक्ष में भूमि के हस्तांतरण की अनुमति दे सकती है।
  • इसके अलावा, गैर—कृषक व्यक्ति के पक्ष में, भूमि की बिक्री, उपहार, विनिमय, या बंधक रखना अवैध होगा।
  • कोर कमांडर या इससे उच्च सैन्य अधिकारी, सीधी कार्यवाही तथा सशस्त्र बलों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के लिए किसी स्थानीय क्षेत्र के भीतर किसी क्षेत्र को ‘रणनीतिक क्षेत्र’ के रूप में घोषित कर सकते है।

open_sales

नए भूमि क़ानून की आवश्यकता

केंद्र सरकार का तर्क है कि, अनुच्छेद 370 के कारण निवेशक 5 अगस्त, 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने में असमर्थ थे, अतः इससे केद्र शासित प्रदेश के विकास में पहुँची।

निहितार्थ

जम्मू-कश्मीर के बाहर के निवेशक सहित अन्य लोग अब केंद्र शासित प्रदेश में जमीन खरीद सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नया जम्मू-कश्मीर केद्र शासित प्रदेश भूमि कानून
  2. अब इस क्षेत्र में जमीन कौन खरीद सकता है?
  3. किसी क्षेत्र को ‘रणनीतिक क्षेत्र’ घोषित करने की शक्ति
  4. अनुच्छेद 370 क्या है?

मेंस लिंक:

नए जम्मू-कश्मीर केद्र शासित प्रदेश भूमि कानून के निहितार्थ पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (SIAC)


(Singapore International Arbitration Centre)

संदर्भ:

SIAC rules in Amazon’s favour, puts Future-Reliance deal on hold.

  • This order came on a plea from global e-commerce giant Amazon.

हाल ही में, सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (Singapore International Arbitration CentreSIAC) द्वारा वैश्विक ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़ॅन की याचिका पर ‘फ्यूचर-रिलायंस’ सौदे पर रोक लगा दी गयी।

SIAC के निर्णय का प्रभाव

सिंगापुर स्थित मध्यस्थता अदालत के आदेशानुसार, फ्यूचर ग्रुप द्वारा अपने खुदरा व थोक कारोबार, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग इकाइयों को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और फैशनस्टाइल को बेचने पर रोक लगा दी गयी है। फ्यूचर ग्रुप तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मध्य अगस्त में  24,713 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था।

अमेज़ॅन द्वारा SIAC में याचिका दायर करने का कारण

आमतौर पर, किसी सौदे में सभी पक्षकारों द्वारा एक अनुबंध समझौते (contractual agreement) पर हस्ताक्षर किये जाते हैं, जिसमे मुख्यतः निम्नलिखित विवरणों का उल्लेख होता है:

  1. मध्यस्थता करने वाला मध्यस्थ न्यायाधिकरण (The arbitral institution administering the arbitration) ।
  2. लागू होने वाले नियम (applicable rules) ।
  3. मध्यस्थता का स्थान (seat of arbitration) ।

इस मामले में, अमेज़ॅन और फ्यूचर ग्रुप के मध्य हुए एक समझौते के तहत, दोनों पक्षों के मध्य कोई विवाद होने पर, सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (SIAC) द्वारा निर्णय कराने पर सहमति हुई थी।

SIAC के तहत प्रक्रिया

सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (SIAC) में किसी विवाद को फैसले के लिए जाने के पश्चात, मध्यस्थ न्यायाधिकरण (arbitral tribunal) की नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया शुरू होती है।

मध्यस्थ न्यायाधिकरण का गठन: प्रायः, तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण होने पर, दोनों पक्षों द्वारा न्यायाधिकरण में एक-एक सदस्य की नियुक्ति की जाती हैं, तथा तीसरे सदस्य को दोनों पक्षों की सहमति से नियुक्त किया जाता है। सहमति नहीं होने पर, तीसरे सदस्य की नियुक्ति SIAC द्वारा की जाती है।

आपातकालीन मध्यस्थ की नियुक्ति:

आमतौर पर मध्यस्थ न्यायाधिकरण की नियुक्ति में समय लगता है।

अतः, SIAC के नियमों के तहत, पक्षकारों द्वारा सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र’ से अंतरिम राहत पाने हेतु आपातकालीन मध्यस्थ (Emergency Arbitrator) नियुक्त करने को कहा जा सकता है। इसके साथ ही मुख्य मध्यस्थ न्यायाधिकरण की नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया जारी रहती है।

पक्षकारों द्वारा फैसला मानने से इंकार करने पर:

वर्तमान में भारतीय कानून के तहत, आपातकालीन मध्यस्थ (Emergency Arbitrator) के आदेशों के प्रवर्तन के लिए कोई अभिव्यक्‍त तंत्र नहीं है।

  • हालांकि, पक्षकारों द्वारा आपातकालीन मध्यस्थ (इमरजेंसी आर्बिट्रेटर) के आदेशों का स्वेच्छा से अनुपालन किया जाता है।
  • यदि, पक्षकारों द्वारा आदेशों का स्वेच्छा से अनुपालन नहीं किया जाता है, तो जिस पक्ष के हक़ में निर्णय दिया गया होता है, इस मामले में अमेज़ॅन, वह मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम (Arbitration & Conciliation Act), 1996 की धारा 9 के तहत, भारत में उच्च न्यायालय से सामान राहत पाने के लिए अपील कर सकता है।

सिंगापुर के ‘अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता’ केंद्र बनने का कारण

  • भारत में निवेश करने वाले विदेशी निवेशक आमतौर पर भारतीय अदालतों की नीरस और निरर्थक प्रक्रिया से बचना चाहते हैं।
  • विदेशी निवेशकों को लगता है, कि विवादों के समाधान में सिंगापुर तटस्थ रहने वाला देश है।
  • समय के साथ सिंगापुर ने अंतरराष्ट्रीय मानकों और उच्च सत्यनिष्ठा सहित विधि के शासन द्वारा शासित क्षेत्राधिकार के रूप में एक उत्कृष्ट प्रतिष्ठा अर्जित कर ली है। इससे निवेशकों को विश्वास होता है कि मध्यस्थता प्रक्रिया त्वरित, निष्पक्ष और न्यायपूर्ण होगी।

SIAC की 2019 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत, मध्यस्थता केंद्र का शीर्ष उपयोगकर्ता था। भारत से वर्ष 2019 में 485 मामले निर्णय करवाने हेतु SIAC में भेजे गए। इसके पश्चात, फिलीपींस (122 मामले), चीन (76 मामले) और संयुक्त राज्य अमेरिका (65 मामले) का स्थान रहा।

भारत का निजी अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र

मुंबई में अब भारत का अपना अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र है।

सिंगापुर अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (SIAC) के बारे में:

यह सिंगापुर में स्थित एक गैर-लाभकारी अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता संगठन है। यह मध्यस्थता संबंधी अपने नियमों और UNCITRAL मध्यस्थता नियमों के तहत मध्यस्थता प्रबंधन करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मध्यस्थता न्यायाधिकरण क्या है?
  2. SIAC के बारे में
  3. मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 का अवलोकन
  4. UNCITRAL के बारे में

मेंस लिंक:

सिंगापुर, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केंद्र क्यों बन गया है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

यूरोपीय संघ (EU)


(The European Union)

संदर्भ:

हाल ही में, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा फ्रांसीसी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया गया था। इसके बाद फ्रांस ने यूरोपीय संघ के सहयोगियों से तुर्की के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा है।

यूरोपीय संघ आयोग ने तुर्की को चेतावनी देते हुए कहा है, कि एर्दोगन की टिप्पणी के मद्देनजर यूरोपीय संघ में तुर्की सदस्यता पहले से कहीं मुश्किल हो सकती है।

पृष्ठभूमि

तुर्की द्वारा वर्ष 1987 में तत्कालीन यूरोपीय आर्थिक समूह (European Economic Community) में शामिल होने के लिए आवेदन किया गया था और इस संदर्भ में वर्ष 2005 में यूरोपीय संघ से औपचारिक वार्ता शुरू की गयी थी। किंतु यह वार्ता फिलहाल प्रभावी रूप से अवरुद्ध स्थिति में है।

यूरोपीय संघ के बारे में:

यूरोपीय संघ (European Union- EU) कुल 27 देशों का एक संघ है जो एक संसक्त आर्थिक और राजनीतिक समूह के रूप में कार्य करता है।

यूरोपीय संघ को अक्सर एक अद्वितीय (Sui Generisसूइ जेनेरिस) राजनीतिक इकाई के रूप में वर्णित किया जाता है।

यूरोपीय संघ की उत्पत्ति:

यूरोपीय संघ (European Union- EU) का आधिकारिक रूप से गठन वर्ष 1993 में हुआ था, लेकिन इसकी की नींव वास्तव में वर्ष 1957 में यूरोपीय आर्थिक समूह (European Economic CommunityEEC) की स्थापना के साथ ही पड़ गयी थी।

  • EEC का गठन, वर्ष 1951 में शुरू किये गए यूरोपीय कोयला और इस्पात समूह (European Coal and Steel Community) से किया गया था।
  • वर्ष 1993 में, नई मास्ट्रिच संधि (Maastricht Treaty) के बाद यूरोपीय आर्थिक समूह (EEC), यूरोपीय संघ (European Union) में परिवर्तित हो गया। मास्ट्रिच संधि को यूरोपीय संधि के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसके अतिरिक्त, वर्ष 2009 में लागू की गई लिस्बन की संधि (Treaty of Lisbon) के द्वारा यूरोपीय संघ को और अधिक व्यापक शक्तियां प्रदान की गयीं। जिसमे यूरोपीय संघ को सुरक्षा और प्रवर्तन प्रावधानों को लागू करने सहित सहित अंतरराष्ट्रीय संधियों पर हस्ताक्षर करने, सीमा पर गश्त बढ़ाने के लिए अधिकृत किया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यूरोपीय संघ के बारे में।
  2. यूरोजोन क्या है?
  3. यूरोपीय आयोग के बारे में
  4. मास्ट्रिच की संधि
  5. लिस्बन की संधि

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

इंडीजीन कार्यक्रम


(IndiGen Program)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के 1029 अनुक्रमित जीनोम के व्यापक संगणना विश्लेषण परिणामों को प्रकाशित किया गया है।

जीनोम अनुक्रमण विश्लेषण को  इंडीजीन कार्यक्रम (IndiGen Program) के अंतर्गत निष्पादित किया गया था।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • इस विश्लेषण से भारत जीनोम डेटासेट में 55,898,122 एकल न्यूक्लियोटाइड वेरिएंट की पहचान हुई।
  • वैश्विक जीनोम डेटासेट के साथ तुलना से यह पता चला है कि 18,016,257 (32.23 %) वेरिएंट अद्वितीय थे और यह केवल भारत से अनुक्रमित नमूनों में ही पाए गए थे। यह भारत केंद्रित जनसंख्या जीनोमिक पहल की आवश्यकता पर जोर देता है।

जीनोम डेटा का महत्व एवं उपयोग

  • वर्तमान इंडिजीनोम्स डेटा संसाधन मेंडेलियन विकारों (Mendelian Disorders) और सटीक दवा परिणामों में सुधार में करने में मदद करता है।
  • यह संसाधन नैदानिक ​​रूप से कार्रवाई योग्य फार्माकोजेनेटिक वेरिएंट के माईनिंग डेटा के माध्यम से कैरियर स्क्रीनिंग के लिए मार्करों की पहचान, आनुवंशिक रोगों की भिन्नता, प्रतिकूल घटनाओं की रोकथाम, बेहतर निदान और इष्टतम चिकित्सा प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं।
  • यह डेटा शोधकर्ताओं को भारतीय-विशिष्ट संदर्भ में जीनोम डाटासेट का निर्माण करने और कुशलता से हेप्लोटाईप (Haplotype) जानकारी प्रदान करने को स्वीकृति प्रदान करेगा।
  • यह संसाधन न केवल आबादी के स्तर पर बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी आनुवांशिकी में चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

भारत में जन स्वास्थ्य हेतु जीनोमिक्स (IndiGen) कार्यक्रम

इंडीजीन कार्यक्रम (IndiGen Program) की शुरुआत CSIR द्वारा अप्रैल 2019 में की गयी थी।

  • इसका लक्ष्य भारत में विविध जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों व्यक्तियों का संपूर्ण जीन अनुक्रमण (Genome Sequencing) करना है।
  • इसका उद्देश्य आनुवंशिक महामारी विज्ञान को सक्षम बनाना और जनसंख्या जीनोम डेटा का उपयोग करके सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोगों को विकसित करना है।

जीन अनुक्रमण (Gene Sequencing) क्या है?

जीनोम (Genome) एक डीएनए (DNA) अथवा कोशिका में जीन का अनुक्रम होता है।

अधिकांश DNA नाभिक में होते हैं और एक जटिल संरचना में परस्पर गुथित होते है, जिसे गुणसूत्र (Chromosome) कहा जाता है।

  • प्रत्येक मानव कोशिका में गुणसूत्रों का एक युग्म होता है, जिनमें से प्रत्येक गुणसूत्र में तीन बिलियन आधार-युग्म होते है, अथवा प्रत्येक चार अणुओं में एक अणु विशिष्ट तरीके से युग्मित होता है।
  • आधार युग्मों के अनुक्रम और इन अनुक्रमों की अलग-अलग लंबाई ‘जीन’ (Genes) का निर्माण करती है।

जीनोम अनुक्रमण का अर्थ है, ‘व्यक्ति में आधार युग्म के सटीक क्रम को समझना’। जीनोमिक अनुक्रमण एक ऐसी तकनीक है जो हमें DNA या RNA के भीतर पाए जाने वाले आनुवंशिक विवरण को पढ़ने और व्याख्या करने की अनुमति प्रदान करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जीन’ (Genes) क्या होते हैं?
  2. जीनोम अनुक्रमण क्या है?
  3. गुणसूत्र क्या हैं?
  4. इंडीजीन कार्यक्रम के बारे में
  5. जीन अनुक्रमण के अनुप्रयोग

मेंस लिंक:

जीनोम अनुक्रमण से आप क्या समझते हैं? इस संबंध में भारत द्वारा किये गए विभिन्न प्रयासों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पीली धूल


(Yellow Dust)

संदर्भ:

हाल ही में उत्तर कोरिया के कोरियन सेंट्रल टेलीविज़न (KCTV) द्वारा चीन से पीले धूल (Yellow Dust) भरे बादलों के आने की चेतावनी जारी की गयी है।

उत्तर कोरिया के अधिकारियों के अनुसार- यह ‘येलो डस्ट’ (Yellow Dust) अपने साथ कोविड-19 महामारी ला सकती है।

पीली धूल (Yellow Dust) क्या है?

पीली धूल, वास्तव में चीन और मंगोलिया के रेगिस्तान की धूल है, जिसे एक विशिष्ट अवधि के दौरान प्रति वर्ष तीव्र गति से चलने वाली सतही हवाएं अपने साथ उड़ाकर उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों देशों में लेकर आती हैं।

इस रेत के कणों में औद्योगिक प्रदूषकों जैसे अन्य विषाक्त पदार्थों मिश्रित होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ‘पीली धूल’ श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बन जाती है।

कोविड-19 का धूल के बादलों के माध्यम से संचरण

अमेरिका के रोग नियंत्रण केंद्र (Centres for Disease Control- CDC) के अनुसार, कोविड-19 विषाणु घंटों तक हवा में रह सकता है। हालांकि, CDC ने यह भी कहा है, हवा के माध्यम से, विशेषकर खुले स्थानों पर, कोविड-19 के फैलने की संभावना नहीं है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

अमेरिका की ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची


(US ‘State Sponsor of Terrorism’ list)

संदर्भ:

हाल ही में, सूडान पिछले दो महीनों में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध बनाने वाला तीसरा अरब देश बन गया है। इसके साथ ही अमेरिका ने सूडान को अपनी ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची (State Sponsor of Terrorism list) से हटा दिया है।

अमेरिका की ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची के निहितार्थ

अमेरिकी विदेश मंत्री के लिए, ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी कृत्यों को अक्सर समर्थन प्रदान करने वाले देशों’ को आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ (State Sponsors of Terrorism) घोषित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची में शामिल देशों पर अमेरिका चार श्रेणियों में प्रतिबंध लगा सकता है:

  1. अमेरिकी विदेशी सहायता पर प्रतिबंध
  2. रक्षा निर्यात और बिक्री पर प्रतिबंध
  3. दोहरे उपयोग की वस्तुओं के निर्यात पर नियंत्रण
  4. विविध वित्तीय और अन्य प्रतिबंध

वर्तमान में इस सूची में सम्मिलित देश

सूडान को हटाये जाने के पश्चात, ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची में तीन देश बने हुए हैं: सीरिया (1979 में सूचीबद्ध), ईरान (1984) और उत्तर कोरिया (2017)

सूडान को इस सूची में कब रखा गया था?

  • ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची में सूडान को वर्ष 1993 में शामिल किया गया था। सूडान पर हिजबुल्लाह और फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठनों को प्रश्रय देने का आरोप लगाया गया था। इस संगठनों को वाशिंगटन आतंकवादियों के रूप में मानता है।
  • अब, ट्रम्प ने अमेरिका में इंजील ईसाई मतदाताओं (Evangelical Christian Voters) को प्रभावित करने की उम्मीद से सूडान को ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची से हटा दिया है। इंजील ईसाईयों को इजराइल समर्थक नीतियों के पक्ष में माना जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘आतंकवाद प्रायोजक राष्ट्र’ सूची क्या है?
  2. सूची में कितने देश हैं?
  3. हाल ही में किस देश को इस सूची हटाया गया है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967


(Unlawful Activities (Prevention) Act)

संदर्भ:

हाल ही में, विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (Unlawful Activities (Prevention) Act), 1967 के तहत 18 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया गया है।

  • कुछ समय पूर्व ही, केन्द्र सरकार ने किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने संबंधी प्रावधान को शामिल करने के लिए अगस्त 2019 में विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 मे संशोधन किया था।
  • इस संशोधन से पहले, केवल संगठनों को आतंकवादी संगठनों के रूप में घोषित किया जा सकता था।

विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के बारे में:

  • 1967 में पारित, विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम [Unlawful Activities (Prevention) Act-UAPA] का उद्देश्य भारत में गैरकानूनी गतिविधि समूहों की प्रभावी रोकथाम करना है।
  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, जिसके द्वारा यदि केंद्र किसी गतिविधि को गैरकानूनी घोषित कर सकता है।
  • इसके अंतर्गत अधिकतम दंड के रूप में मृत्युदंड तथा आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

UAPA के तहत, भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों को आरोपित किया जा सकता है।

  • यह अधिनियम भारतीय और विदेशी अपराधियों पर सामान रूप से लागू होता है, भले ही अपराध भारत के बाहर विदेशी भूमि पर किया गया हो।
  • UAPA के तहत, जांच एजेंसी गिरफ्तारी के बाद अधिकतम 180 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर सकती है और अदालत को सूचित करने के बाद इस अवधि को और आगे बढ़ाया जा सकता है।

2019 के संशोधनों के अनुसार:

  • यह अधिनियम राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक को एजेंसी द्वारा मामले की जांच के दौरान आतंकवाद से होने वाली आय से बनी संपत्ति पाए जाने पर उसे ज़ब्त करने का अधिकार देता है।
  • यह अधिनियम राज्य में डीएसपी अथवा एसीपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के अतिरिक्त आतंकवाद के मामलों की जांच करने हेतु NIA के इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार देता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप की परिभाषा।
  2. अधिनियम के तहत केंद्र की शक्तियां।
  3. क्या ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा लागू है?
  4. 2004 और 2019 में संशोधन द्वारा बदलाव लाया गया।
  5. क्या विदेशी नागरिकों को अधिनियम के तहत आरोपित किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

क्या आप सहमत हैं कि विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन अधिनियम मौलिक अधिकारों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वतंत्रता का बलिदान करना न्यायसंगत है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


परम्परा श्रृंखला – संगीत और नृत्य के राष्ट्रीय पर्व

संयुक्त राष्ट्र के साथ साझेदारी में नाट्य तरंगिनी द्वारा आयोजित संगीत और नृत्य के राष्ट्रीय पर्व ‘परम्परा श्रृंखला – 2020’  इस वर्ष ऑनलाइन आयोजित की जाएगी।

पृष्ठभूमि:

नाट्य तरंगिणी’ – प्रदर्शन कला केंद्र,की शुरुआत वर्ष 1976 में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की कुचिपुड़ी शैली को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से की गयी थी।

  • इसे पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. राजा और राधा रेड्डी और कौशल्या रेड्डी द्वारा स्थापित किया गया था।
  • नाट्य तरंगिणी, आज एक साधारण कुचिपुड़ी नृत्य विद्यालय से दिल्ली में एक विश्व स्तरीय प्रदर्शन कला केंद्र के रूप में विकसित हुई है।

हार्पून तटीय रक्षा प्रणाली

(Harpoon coastal defence systems)

संदर्भ:

अमेरिका द्वारा 2.4 बिलियन डॉलर मूल्य की हार्पून रक्षा प्रणाली ताइवान बेची जा रही है।

प्रमुख तथ्य:

हार्पून एक प्रत्येक मौसम में कार्य करने में सक्षम,ओवर-द-हराइज़न, एंटी-शिप मिसाइल है, जिसे मैकडॉनेल डगलस (बोइंग डिफेंस, स्पेस एंड सिक्योरिटी) द्वारा विकसित और निर्मित किया गया है।

27 अक्टूबर: इन्फैंट्री दिवस

भारतीय सेना प्रत्येक वर्ष 27 अक्तूबर को इन्फेंट्री दिवस के रूप में मनाती है।

  • वर्ष 1947 में इसी दिन भारतीय सेना के पैदल सैनिक श्रीनगर हवाई अड्डे पर पहली बार उतरे थे।
  • सेना की इस टुकड़ी ने श्रीनगर के बाहरी इलाके से आक्रमणकारियों को वापस खदेड़ दिया और जम्मू एवं कश्मीर राज्य को पाकिस्तान समर्थित कबायलियों के हमले से बचा लिया था।

  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos