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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 October

 

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. संसदीय समिति द्वारा अमेजन के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार

2. सरकारी संस्थाओं में ‘इंटिग्रिटी पैक्ट’

3. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की ‘ग्रे लिस्ट’ में पाकिस्तान

4. भारत-नेपाल सीमा विवाद

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सरकार द्वारा ‘भंडारण सीमा’ लगाने हेतु प्रक्रिया एवं परिस्थितियां

2. हिम तेंदुआ परियोजना (PSL)

3. भारत द्वारा ‘फ्लैश फ्लड गाइड सेवा’ की शुरुआत

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

संसदीय समिति द्वारा अमेजन के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार


संदर्भ:

संसद की संयुक्त समिति द्वारा डाटा प्रोटेक्शन बिल (Data Protection Bill) के मसौदे की जांच की जा रही है।

  • संसदीय समिति द्वारा अमेज़ॅन, ट्विटर, फेसबुक, गूगल और पेटीएम कंपनियों को डेटा सुरक्षा और संरक्षण संबंधी मसलों पर पूछताछ के लिए तलब किया जा रहा है।
  • इन कंपनियों पर व्यावसायिक हितों के लिए उपभोक्ताओं की गोपनीयता को जोखिम में डालने का आरोप लगाया जा रहा है।
  • तथापि, अमेज़ॅन ने संसदीय समिति के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। अमेज़न ने कहा है, कि उसके ‘संबंधित मामलों के विशेषज्ञ’ कोरोनोवायरस महामारी के दौरान अमेरिका से यात्रा करने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं।

संसदीय समिति द्वारा अमेज़ॅन का ‘पेश होने से इनकार करना’ संसदीय विशेषाधिकार के हनन के बराबर बताया गया है।

संसदीय समिति द्वारा पूछे गए प्रश्न:

  • क्या सोशल मीडिया दिग्गज अपने उपयोगकर्ताओं के डेटा को किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा करने से पहले उनकी सहमति प्राप्त करते हैं?
  • सोशल मीडिया दिग्गजों के राजस्व मॉडल, कर-भुगतान करने के तरीके, विज्ञापनदाताओं और इनके लिए लक्षित दर्शकों को चुनने की प्रक्रिया, किसी नए उपयोगकर्ता की आयु का पता लगाने संबंधी प्रक्रिया, तथा उपयोगकर्ताओं की पृष्ठभूमि का सत्यापन करने की प्रक्रिया संबंधी सवाल।

व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 का अवलोकन

प्रमुख प्रावधान:

  • व्यक्तिगत डेटा क्या है? व्यक्तिगत डेटा, उन सूचनाओं, लक्षणों या पहचान, विशेषताओं से संबंधित होता है, जिसका उपयोग किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए किया जा सकता है। इस तरह की विशेषताओं या लक्षणों में, प्रोफाइलिंग के उद्देश्य से तैयार किए गए डेटा से लगाए जा सकने वाले अनुमान को भी सम्मिलित किया जाएगा।
  • संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा में स्वास्थ्य, यौन-जीवन, यौन अभिरुचि, वित्तीय डेटा आदि को सम्मिलित किया जाता है।
  • व्यक्तिगत डेटा को संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के रूप में श्रेणीबद्ध करने की शक्ति केंद्र सरकार (डेटा सुरक्षा प्राधिकरण और संबंधित क्षेत्र नियामक के परामर्श से) को प्रदान की गयी है।
  • हालांकि कुछ मामलों में व्यक्ति की सहमति के बिना भी डेटा प्रोसेसिंग की अनुमति दी जा सकती है। यह अनुमति निम्नलिखित आधार पर दी जा सकती है: (1) यदि राज्य द्वारा व्यक्ति को लाभ प्रदान करने के लिए आवश्यक होने पर, और (2) प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट उचित उद्देश्यों के लिए, जैसे धोखाधड़ी का पता लगाना, ऋण वसूली, और व्हिसिल ब्लोइंग के मामलों में।
  • विधेयक में ‘सोशल मीडिया मध्यस्थ’ (social media intermediary) को एक मध्यस्थ के रूप में परिभाषित किया गया है, जो उपयोगकर्ताओं को परस्पर ऑनलाइन संपर्क करने में सक्षम बनाता है तथा जानकारी साझा करने की अनुमति देता है।
  • सभी सोशल मीडिया मध्यस्थों को महत्वपूर्ण डेटा फ़िड्युसरीज/ न्यासीय (data fiduciaries) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनके लिए भारत में सभी उपयोगकर्ताओं को एक ‘स्वैच्छिक उपयोगकर्ता सत्यापन तंत्र’ (voluntary user verification mechanism) प्रदान करना आवश्यक है।
  • कुछ मामलों में व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण हेतु सरकार अपनी किसी भी एजेंसी को अधिनियम के किसी भी या सभी प्रावधानों से छूट दे सकती है। इनमें शामिल हैं: (i) राज्य की सुरक्षा के हित में, सार्वजनिक आदेश, भारत की संप्रभुता और अखंडता और विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, और (ii) उपरोक्त मामलों से संबंधित किसी भी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए।
  • विधेयक में, सभी व्यक्तिगत डेटा के देश में अनिवार्य भंडारण करने संबंधी प्रावधान को हटा दिया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसदीय तथा मंत्रिमंडल समितियों के बीच अंतर।
  2. तदर्थ बनाम प्रवर बनाम वित्त समितियां।
  3. इन समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?
  4. केवल लोकसभा के लिए विशिष्ट समितियां
  5. लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली समितियाँ

मेंस लिंक:

संसदीय स्थायी समितियाँ क्या हैं? वे क्यों आवश्यक हैं? उनकी भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

सरकारी संस्थाओं में ‘इंटिग्रिटी पैक्ट’


(Integrity Pact in Govt. Organisations)

चर्चा का कारण

हाल ही में, केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance CommissionCVC) द्वारा खरीद संबंधी  क्रियाकलापों के लिए सरकारी संस्थाओं को ‘इंटिग्रिटी पैक्ट’ (Integrity Pact) अपनाने हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure- SOP) में संशोधन किया गया है।

CVC के इस नए आदेश से, जनवरी 2017 में जारी किए गए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में संशोधन किया गया है।

संशोधित SOP के अनुसार:

  • बाहरी इंटीग्रिटी मॉनिटर (Integrity External MonitorsIEM) के रूप में नियुक्ति के लिए, संबंधित मंत्रालय, विभाग या संस्था द्वारा पात्र व्यक्तियों की एक सूची CVC के पास भेजी जाती है।
  • बाहरी इंटीग्रिटी मॉनीटर्स (IEMs) का संस्था में अधिकतम कार्यकाल 3 वर्ष का होगा।

‘इंटिग्रिटी पैक्ट’ क्या होता है?

इंटिग्रिटी पैक्ट (Integrity Pact), सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है।

  • इस पैक्ट को सार्वजनिक अनुबंधों में भ्रष्टाचार रोकने हेतु एक उपकरण के रूप में विकसित किया गया था।
  • यह एक सतर्कता उपकरण है जो भावी विक्रेताओं / बोली लगाने वालों और क्रेता के मध्य होने वाले सौदों पर निगाह रखता है, तथा दोनों पक्षों को अनुबंध के किसी भी पहलू पर किसी प्रकार के भ्रष्टचार करने से रोकता है।
  • इसे ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ (Transparency International) द्वारा विकसित किया गया है।

बाहरी इंटीग्रिटी मॉनीटर्स कौन होते हैं?

इंटिग्रिटी पैक्ट में प्रत्येक संस्था के लिए एक स्वतंत्र बाहरी इंटीग्रिटी मॉनीटर्स (IEMs) के पैनल को गठित करने की परिकल्पना की गयी है।

  • IEM, विभिन्न पक्षों द्वारा ‘पैक्ट’ के तहत दायित्वों के अनुपालन किए जाने की स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से समीक्षा करता है।
  • भ्रष्टाचार अधिनियम के प्रावधानों के तहत गंभीर अनियमितताएं मिलने पर, IEM, संबंधित संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा सीधे CVO और CVO को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इंटिग्रिटी पैक्ट क्या है?
  2. बाहरी इंटीग्रिटी मॉनीटर्स कौन होते हैं?
  3. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के बारे में
  4. IEM का कार्यकाल

मेंस लिंक:

इंटिग्रिटी पैक्ट क्या है? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की ग्रे लिस्टमें पाकिस्तान


(Pakistan to remain on FATF grey list)

संदर्भ:

वैश्विक आतंकी वित्तपोषण पर नजर रखने वाले संगठन ‘वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ (Financial Action Task ForceFATF)  द्वारा पाकिस्तान को फरवरी 2021 तक ‘ग्रे-सूची’ में रखने का फैसला किया गया है। यह निर्णय पाकिस्तान द्वारा ‘FATF के छह प्रमुख दायित्वों’ को पूरा करने में विफल रहने के परिणामस्वरूप किया गया है।

अब तक, पाकिस्तान द्वारा सभी कार्ययोजनाओं में प्रगति की गयी है और अब 27 कार्रवाई विषयों में से 21 कार्य-विषयों को लगभग पूरा कर चुका है।

पृष्ठभूमि

वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) द्वारा जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा गया था तथा इस्लामाबाद से वर्ष 2019 के अंत तक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने हेतु कार्ययोजना लागू करने के लिए कहा गया था,  जिसकी बाद में COVID-19 महामारी के कारण समय सीमा बढ़ा दी गई थी।

पाकिस्तान, निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर कार्यवाही करने में विफल रहा है:

  1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों से जुड़े धर्मार्थ संगठनों या गैर-लाभकारी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की कमी।
  2. प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं जैसे लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba- LeT) के प्रमुख हाफिज सईद और LeT ऑपरेशंस प्रमुख, जकी उर रहमान लखवी सहित जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ मुकदमा चलाने में देरी।

पाकिस्तान के ‘ग्रे-सूची’ में निहितार्थ:

  • पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ सम्मिलित होने के बाद, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और यूरोपियन यूनियन जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा।
  • पाकिस्तान, पहले से अस्थिर आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है, ऐसे में FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ से उसकी स्थिति अधिक खराब होगी।
  • इसके अतिरिक्त, वैश्विक संस्था द्वारा पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टमें सूचीबद्ध करने की पूरी संभावना है।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के बारे में:

FATF का गठन 1989 में जी-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में हुआ था। यह एक अंतर-सरकारी निकाय है।

  • इसका सचिवालय पेरिस में ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Economic Cooperation and DevelopmentOECD) मुख्यालय में स्थित है।
  • सदस्य देश: फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) वर्त्तमान में 39 सदस्य सम्मिलित हैं। इसके सदस्य विश्व के अधिकांश वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें 2 क्षेत्रीय संगठन भी सम्मिलित हैं- गल्फ ऑफ कोऑपरेशन कौंसिल (GCC) तथा यूरोपियन कमीशन (EC)।
  • FATF की डिसीज़न मेंकिंग बॉडी FATF प्लैनरी है जिसकी हर साल तीन बार बैठक होती है। इसकी प्रति वर्ष तीन बैठकें होती है।

ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट

ब्लैक लिस्ट: आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों का समर्थन करने वाले तथा इन गतिविधियों पर रोक लगाने वाले वैश्विक प्रावधानों से सहयोग नहीं करने वाले देशों (Non-Cooperative Countries or TerritoriesNCCTs) को ‘ब्लैक लिस्ट’ में रखा जाता है।

FATF द्वारा नियमित रूप से ब्लैकलिस्ट का संशोधन किया जाता है, जिसमे नयी प्रविष्टियों को शामिल अथवा हटाया जाता है।

ग्रे लिस्ट: जिन देशों को आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों के लिए सुरक्षित माना जाता है, उन्हें FATF द्वारा ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जी-7, जी-8 तथा जी- 20 में अंतर
  2. ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट
  3. क्या FATF के निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं?
  4. FATF का प्रमुख कौन है?
  5. इसका सचिवालय कहाँ है?

मेंस लिंक:

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) का अधिदेश तथा उद्देश्य क्या हैं? भारत – पाकिस्तान संबंधों के लिए FATF के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

भारत-नेपाल सीमा विवाद


चर्चा का कारण

हाल ही में, कालापानी मुद्दे पर भारत के साथ कई महीनों के विवाद के बाद, प्रधान मंत्री के.पी. शर्मा ओली द्वारा नरम रूख के संकेत दिया गया है। प्रधानमंत्री ओली ने विजयादशमी के त्योहार पर बधाई देते हुए नेपाल के पुराने नक्शे का प्रयोग किया है।

नेपाल के पुराने नक्शे में कालापानी-लिपुलेख-लिंपियाधुरा के क्षेत्र को नहीं दिखाया जाता है। यह क्षेत्र भारत के पिथौरागढ़ जिले के अंतर्गत आता है।

विवाद का विषय:

20 मई को नेपाल द्वारा संविधान संशोधन कर देश का नया मानचित्र घोषित किया गया था, जिसमे भारत के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीन क्षेत्रों- लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख – को सम्मिलित किया गया था, तथा इसे 13 जून को एक संशोधन द्वारा नेपाली राज्य के प्रतीक चिन्ह का हिस्सा बनाया गया था।

कालापानी की अवस्थिति

  • कालापानी, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के पूर्वी कोने में स्थित है।
  • यह उत्तर में चीन के अधीन तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के साथ तथा पूर्व और दक्षिण में नेपाल के साथ सीमा बनाता है।
  • यह लिंपियाधुरा और लिपुलेख के बीच में स्थित है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लिपुलेख कहाँ है?
  2. काली नदी का स्रोत।
  3. भारत और नेपाल की सीमा।
  4. कालापानी कहाँ है?
  5. माउंट कैलाश और मानसरोवर के लिए मार्ग।
  6. चीन और भारत से गुजरने वाली नदियाँ।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

सरकार द्वारा ‘भंडारण सीमा’ लगाने हेतु प्रक्रिया एवं परिस्थितियां


(How and under what circumstances can the government impose stock limits?)

संदर्भ:

कुछ शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने पर, सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 2020 (Essential Commodities Act, 2020) के प्रावधानों को लागू किया गया है। अधिनियम के तहत प्याज के भंडारण हेतु अधिकतम सीमा, थोक विक्रेताओं के लिए 25 मीट्रिक टन, और खुदरा विक्रेताओं के लिए 2 मीट्रिक टन लागू की गयी है।

ये भंडारण सीमा तत्काल रूप से लागू होगी तथा 31 दिसंबर तक जारी रहेगी।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून के बारे में:

  • यह अधिनियम असाधारण रूप से मूल्य-वृद्धि होने की स्थिति में खराब हो जाने वाली वस्तुओं को विनियमित करने का प्रावधान करता है है।
  • इस कानून के प्रावधानों के तहत, किसी वस्तु पर स्टॉक सीमा लगाने की कोई भी कार्रवाई, उस वस्तु की मूल्य-वृद्धि पर आधारित होगी।
  • भंडारण सीमा केवल (i) बागवानी उपज के खुदरा मूल्य में 100% की वृद्धि होने पर और (ii) बिना ख़राब होने वाले कृषि खाद्य पदार्थों के खुदरा मूल्य में 50% की वृद्धि होने पर लगाई जा सकती है। कीमतों में वृद्धि की गणना, पिछले बारह महीने की कीमतों अथवा पिछले पांच वर्षों के औसत खुदरा कीमतों, जो भी कम हो, के आधार पर की जाएगी।

क़ानून में किन असाधारण परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है?

(i) युद्ध, (ii) अकाल, (iii) कीमतों में अत्यधिक वृद्धि, और (iv) गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा।

कानून के तहत छूट:

किसी भी कृषि उपज के प्रसंस्करण-कर्ता अथवा ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (PDS) से संबंधित मांग के संदर्भ में ‘भंडारण-सीमा’ से छूट प्रदान की जायेगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित वस्तुएं।
  2. सूची से वस्तुओं को शामिल करने और हटाने की शक्तियाँ।
  3. क्या राज्यों को केंद्र के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है?
  4. आर्थिक सर्वेक्षण कब और किसने जारी किया?
  5. क्या सरकार इस अधिनियम के तहत किसी उत्पाद का MRP तय कर सकती है?
  6. नवीनतम संशोधन।

मेंस लिंक

आवश्यक वस्तु अधिनियम के महत्व पर चर्चा कीजिए। हाल के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि यह अधिनियम पुराना हो चुका है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए, क्यों? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

हिम तेंदुआ परियोजना (PSL)


(Project Snow Leopard)

संदर्भ:

23 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस मनाया गया।

हिम तेंदुआ रेंज के 12 देशों (अफगानिस्तान, भूटान, चीन, भारत, कज़ाखस्तान, किर्गिज गणराज्य, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान) द्वारा हिम तेंदुए के संरक्षण के संबंध में बिश्केक घोषणा (Bishkek Declaration) पर हस्ताक्षर करने के पश्चात 23 अक्टूबर 2013 को अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस के रूप में अपनाया गया।

हिमाल संरक्षक’ (HimalSanrakshak)

अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस पर इस वर्ष, भारत सरकार द्वारा हिम तेंदुओं के संरक्षण हेतु सामुदायिक स्वयंसेवी कार्यक्रम हिमाल संरक्षक शुरू किया गया है।

भारत में हिम तेंदुआ संरक्षण:

  • भारत सरकार प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (Project Snow Leopard– PSL) के माध्यम से हिम तेंदुए और उसके निवास स्थान का संरक्षण कर रही है।
  • भारत, वर्ष 2013 से ‘वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण’ (Global Snow Leopard and Ecosystem Protection GSLEP) कार्यक्रम में भी भागीदार रहा है।
  • हिम तेंदुआ संरक्षण के लिए, भारत ने तीन बड़े परिदृश्यों को चिन्हित किया है: लद्दाख एवं हिमाचल प्रदेश में हेमिस- स्पिति, (Hemis-Spiti),उत्तराखंड के गंगोत्री-नंदा देवी और सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश में विस्तृत खंगचेंदजोंगा- तवांग (Khangchendzonga – Tawang)।
  • हिम तेंदुआ और उसके वास स्थान के संरक्षण हेतु समावेशी और भागीदारी के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2009 में प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (Project Snow Leopard- PSL) की शुरुआत की गयी थी।
  • हिम तेंदुआ, पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बहाली कार्यक्रम (Recovery Programme) हेतु 21 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में सम्मिलित है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IUCN के तहत हिम तेंदुए की संरक्षण स्थिति
  2. प्रोजेक्ट हिम तेंदुए के बारे में
  3. भारत में हिम तेंदुए- वितरण और संरक्षण केंद्र
  4. GSLEP के बारे में
  5. बिश्केक घोषणा के बारे में

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

भारत द्वारा ‘फ्लैश फ्लड गाइड सेवा’ की शुरुआत


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों – बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका के लिए अपनी तरह की पहली अचानक आनेवाली बाढ़ से जुड़ी मार्गदर्शन सेवाओं (Flash Flood Guidance services) की शुरुआत की गयी है।

  • इसके तहत, भारतीय मौसम विभाग सभी सदस्य देशों के लिए एकदम अचानक आनेवाली और अल्पकालिक बाढ़ के बारे में जल-विभाजक और शहर स्तर पर प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करेगा।

फ्लैश फ्लड गाइडेंस के बारे में:

अचानक आने वाली बाढ़ संबंधी मार्गदर्शन (फ्लैश फ्लड गाइडेंस) एक सशक्त एवं सक्षम प्रणाली है, जो भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए 4किमी x 4 किमी के विस्तार में जल–विभाजक स्तर पर लगभग 6 -12 घंटे पहले ही अचानक आने वाली बाढ़ संबंधी  चेतावनी प्रणाली के विकास प्रक्रिया में सहयोग की दृष्टि से वास्तविक समय में आवश्यक सामग्री मुहैया कराने के लिए डिज़ाइन की गई है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) क्यों?

अचानक आनेवाली बाढ़ से प्रभावित आबादी के जीवन और संपत्तियों पर विशेष रूप से विनाशकारी प्रभाव को देखते हुए, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की पंद्रहवीं कांग्रेस ने वैश्विक कवरेज के साथ एक फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम (Flash Flood Guidance System- FFGS) परियोजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दी थी

  • इसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन जलविज्ञान आयोग (WMO Commission for Hydrology) तथा कुछ अन्य संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग कंप्यूटिंग पावर, न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन, अवलोकन संबंधी विशाल नेटवर्क (जमीन, वायु और अंतरिक्ष पर आधारित) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली के संदर्भ में अत्यधिक उन्नत क्षमताओं से लैस है।
  • इसलिए, विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने बेहतर समन्वय, विकास और कार्यान्वयन के लिए दक्षिण एशिया फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम के क्षेत्रीय केंद्र की जिम्मेदारी भारत को सौंपी है।

अचानक आने वाली बाढ़’ (फ्लैश फ्लड) क्या हैं?

‘अचानक आने वाली बाढ़’ (Flash floods) बहुत अधिक उफान के साथ छोटी अवधि वाली अत्यधिक स्थानीयकृत घटनाएं होती हैं। आमतौर पर वर्षा और चरम उफान वाली बाढ़ की घटना के बीच की अवधि छह घंटे से कम होती हैं।

स्रोत: पीआईबी


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