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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 22 अक्टूबर 2020

 

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

1. प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत के रूप में बौद्ध एवं जैन साहित्यों का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  प्राचीन भारतीय इतिहास NCERT: आर एस शर्मा

निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजियेऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

बौद्ध और जैन साहित्य दोनों को ब्राह्मण साहित्य के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।

विषय वस्तु:

अधिकांश प्राचीन बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक हैं। बुद्ध के धार्मिक विचारों और शब्दों को सुत्त पिटक में एकत्रित किया गया है। इसे बौद्ध धर्म का विश्वकोश कहा जाता है। दूसरी ओर जैन साहित्य को दो प्रमुख श्रेणियों आगम और निगम सूत्र में वर्गीकृत किया गया है। आगम साहित्य में कई ग्रंथ शामिल हैं, जो जैन धर्म की पवित्र पुस्तकें हैं। वे अर्ध-मागधी, प्राकृत भाषा के एक रूप में लिखे गए हैं। निगम साहित्य में आगम साहित्य की व्याख्या एवं टिप्पणी और स्वतंत्र कार्य संकलित किये गए हैं, जिसका निर्माण संन्यासियों और विद्वानों द्वारा किया गया है। इन्हें प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश, प्राचीन मराठी, राजस्थानी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, तमिल, जर्मन और अंग्रेजी जैसी उनके भाषाओं में लिखा गया है।

दोनों साहित्यों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए तथा समझाइए कि किस प्रकार से वे प्राचीन भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक सिद्ध होते हैं।

 निष्कर्ष:

दोनों संप्रदायों की विचारधाराओं एवं साहित्य के माध्यम से वतर्मान समय में उनकी प्रासंगिकता को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे। 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

2. एक समाज सुधारक के रूप में बासवन्ना की अभिनीत भूमिका और उनके प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Insights on India

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

बासवन्ना (1106-1167) एक दार्शनिक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपने समय की सामाजिक बुराइयों जैसे जाति व्यवस्था और हिंदू धर्म के कर्मकांडों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

 विषय वस्तु:

समझाइए कि उनकी शिक्षाएं और दर्शन सभी सीमाओं को पार करते हैं और सार्वभौमिक और शाश्वत को संबोधित करते हैं। बसवा एक महान मानवतावादी थे, जिन्होंने जीवन के एक नए तरीके की वकालत की, जिसमें दिव्य अनुभव जीवन के केंद्र में थे और जहां जाति, लिंग और सामाजिक भेदों का कोई विशेष महत्व नहीं था।

भारतीय समाज में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

उनके द्वारा लिंगायत संप्रदाय प्रारम्भ करने, वचनों के माध्यम से उनके योगदान आदि की व्याख्या कीजिए।

निष्कर्ष:

आज के समय में भी प्रासंगिक, उनकी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

3. भारत में वर्तमान में प्रचलित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और इसे बढ़ावा देने के सरकारी उपायों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  The Hindu 

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

एक नवाचार प्रणाली से आपका क्या तात्पर्य है, समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:   

नवाचार प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालिए; उसके महत्व के पुष्टिकरण के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

इस दिशा में सरकार द्वारा किए गए उपायों की व्याख्या कीजिए। बेहतर औचित्य के लिए प्रत्येक के उदाहरण दीजिए।

निष्कर्ष:

एक सकारात्मक नोट पर निष्कर्ष निकालिए कि भारत सही राह पर है।

 

विषय: सा.अ.-2: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

सा.अ.-3: आपदा और आपदा प्रबंधन।

4. भारतीय शहरों में बाढ़ के मामले उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे हैं। उनकी वृद्धि के प्रमुख कारण क्या हैं? शहरी बाढ़ के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण शमन उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:   wr i-india.org 

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारत में शहरी बाढ़ प्रबंधन के बारे में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

बाढ़ के मामले में शहरी क्षेत्रों द्वारा सामना किये जा रहे मुद्दों पर चर्चा कीजिए। शहरी जल की कमी और स्वच्छता के बुनियादी ढांचे, इस क्षेत्र में शहरी शासन की कमी आदि के अंतर्निहित कारणों की व्याख्या कीजिए।

समझाइए कि वैश्विक स्तर पर ग्रे इन्फ्रास्ट्रक्चर की अनेक बार सतत विफलताओं के बाद

अब विकल्प तलाशे जा रहे हैं। प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र जैसे झीलें, बाढ़ के मैदान या उद्यान, वन-प्रकृति-आधारित समाधान (ब्लू-ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर) और बाढ़ शमन एवं प्रबंधन के लिए लचीले, कम लागत वाले समाधान एवं अनेक सह-लाभ प्रदान करते हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए उपाय सुझाइए। अधिक स्पष्ट रूप में सिद्ध करने के लिए देश के किसी एक शहर की केस स्टडी पर चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

 5. भारत में रक्षा ऑफसेट नीति की विशेषताएं बताइये एवं नीति के उद्देश्यों में हाल ही में किये गए संशोधनों के प्रभावों का आकलन कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  The Hindu 

 निर्देशक शब्द:

 आकलन कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के सर्वकालिक और तात्कालिक दोनों महत्त्व को स्पष्ट करते हुए उसकी सारगर्भित उपयोगिता बताइये।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

ऑफसेट नीति का अर्थ क्या है, समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

रक्षा ऑफसेट नीति के उद्देश्यों को विस्तारपूर्वक सूचीबद्ध कीजिए।

इसका महत्व समझाइए। उदाहरण भी दीजिए।

इस प्रकार की नीति का अभ्यास करने में शामिल संभावित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए की यदि ऑफ़सेट नीति को सही तरीके से अभिकल्पित एवं निष्पादित किया जाता है, तो यह एक जीवंत घरेलू रक्षा क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन, शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन व्यवस्था।

6. सरकारी और निजी संस्थानों में नैतिक दुविधाओं के बारे में एक लेख लिखिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

नैतिक दुविधा को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

सार्वजनिक एवं निजी प्रशासन में देखी जा सकने वाली नैतिक दुविधा के प्रकारों पर चर्चा कीजिए।

बेहतर तरीके से समझाने के लिए उदाहरण भी प्रस्तुत कीजिए।

ऐसी परिस्थितियों का समाधान करने के लिए उपाय बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 निष्कर्ष:

इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र।

 7. जे.एस. मिल के कर्म उपयोगितावाद, चार्वाक एवं कर्मयोग के संदर्भ में मानव कर्म के सार, निर्धारक और परिणामों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

इस तथ्य की व्याख्या करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए कि ‘मानव कर्म’ में नैतिकता के निर्धारक और परिणाम नैतिकता का प्रारंभिक बिंदु है। किसी व्यक्ति के किसी भी कार्य की नैतिकता या अनैतिकता को पहचानने में विचारणीय प्रथम बिंदुओं में से एक यह है कि यह एक सचेतन मानव कर्म होना चाहिए।

विषय वस्तु:

मानव कर्म के सार, निर्धारकों और परिणामों से आप क्या समझते हैं, इस पर विस्तारपूर्वक चर्चा कीजिए।

तीनों अवधारणाओं- जे.एस. मिल का उपयोगितावाद, चार्वाक और कर्मयोग में से प्रत्येक को समझाइए।

निष्कर्ष:

इस प्रकार के दर्शन के महत्व को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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