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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 21 October

 

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. सरकार द्वारा चुनाव-व्यय सीमा में 10% की बढ़ोत्तरी

2. भारतीय वन्यजीव संस्थान का स्वायत्त दर्जा समाप्त

3. ‘क्वाड समूह’ (Quad group)

4. चीन- ताइवान संबंध

 

सामान्य अध्ययन-III

1. आयुष्मान सहकार योजना

2. भारत में साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा

3. कालेश्वरम सिंचाई परियोजना को कानून का उल्लंघन कर पर्यावरण मंजूरी दी गयी: NGT

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. इंड स्प्रिंग बोर्ड

2. अवसंरचना निवेश न्यास मॉडल (InvIT)

3. डेमचोक सेक्टर

4. LoC पर स्मार्ट फेंस

5. समुद्री यातायात सेवा (VTS) और पोत यातायात निगरानी व्‍यवस्‍था (VTMS)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

सरकार द्वारा चुनाव-व्यय सीमा में 10% की बढ़ोत्तरी


(Govt. Increases poll spend ceiling by 10%)

संदर्भ:

हाल ही में, विधि मंत्रालय द्वारा विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए चुनाव-व्यय सीमा में 10% की बढ़ोत्तरी कर दी गयी है।

  • इस संदर्भ में, निर्वाचन संचालन नियम (Conduct of Elections Rules), 1961 में एक संशोधन किये जाने की अधिसूचना जारी कर दी गयी है।
  • पिछली बार, चुनाव-व्यय सीमा में वृद्धि वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले की गयी थी।

इस निर्णय का महत्व:

  • सरकार का कदम, निर्वाचन आयोग द्वारा कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों के मद्देनजर की गयी सिफारिशों के अनुरूप है।
  • यह निर्णय राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए राहत प्रदान करने वाला है, क्योंकि कोविड-19 स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुरूप सार्वजनिक रैलियों और बैठकों पर अतिरिक्त व्यय की आवश्यकता है।
  • इसमें सैनिटाइजर, मास्क और भीड़ द्वारा सामाजिक दूरी मानकों का पालन करने संबंधी व्यय को सम्मिलित किया गया है।

नए परिवर्तनों के अनुसार:

  • जिन राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में लोकसभा चुनाव-व्यय सीमा 70 लाख रुपये थी, उसे बढाकर 77 लाख रुपये कर दिया गया है; और जिन राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में मौजूदा चुनाव-व्यय सीमा 54 लाख रु. थी, उसमे वृद्धि करके 59.4 लाख रु कर दी गयी है।
  • विधानसभा चुनावों के लिए, जिन राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में उम्मीदवारों के लिए चुनाव-व्यय सीमा 28 लाख रुपये थी, इसे बढाकर 30.8 लाख रुपये कर दिया गया है तथा जहाँ मौजूदा चुनाव-व्यय सीमा 20 लाख रुपये थी, वहां उम्मीदवार 22 लाख रुपये तक खर्च कर सकते हैं।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु उपाय:

  • उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन आयोग के समक्ष चुनाव-व्यय का वास्तविक विवरण दाखिल करना अनिवार्य होगा।
  • चुनाव-व्यय का गलत विवरण या निर्धारित सीमा से अधिक व्यय दाखिल करने पर, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10A के तहत उम्मीदवार को तीन साल तक के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

चुनाव-व्यय पर सीमा निर्धारण की आवश्यकता

  • चुनाव अभियान खर्च पर सीमा निर्धारित करने का उद्देश्य चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मेदवारों के लिए एक सामान अवसर प्रदान करना है। चुनाव-व्यय पर सीमा यह सुनिश्चित करती है कि एक उम्मीदवार, चुनाव में केवल धनवान होने के कारण नहीं जीत सकता।
  • चुनावी सुधारों पर विधि आयोग की 255 वीं रिपोर्ट के अनुसार- अनियमित अथवा कम-नियमित चुनावी वित्तपोषण के कारण ‘लॉबिंग तथा कैप्चरिंग’ जैसी घटनाएँ हो सकती हैं, जिसमे राजनीतिक दलों और बड़े दानदाताओं के मध्य ‘अनुचित लाभों की अदलाबदली’ जैसे समझौते भी शामिल हो सकते हैं।

अन्य सुधार: राजनीतिक दलों के व्यय पर सीमा निर्धारण

निर्वाचन आयोग द्वारा सरकार से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव अभियान खर्च पर सीमा निर्धारण करने हेतु निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के नियम 90 तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करने के लिए कहा गया है।

  • यह चुनाव लड़ने वाले दल के उम्मीदवारों की संख्या तथा उम्मीदवारों के लिए निर्धारित की गयी व्यय सीमा के गुणन की आधी अथवा उससे कम होनी चाहिए।
  • यह सीमा सभी राजनीतिक दलों के लिए चुनाव में समान अवसर सुनिश्चित करेगी तथा चुनावों में बेहिसाब धन प्रयोग के संभावित खतरों को कम करेगी।
  • यह राजनीतिक दलों और उनके सहयोगियों द्वारा उपयोग की जाने वाली धन-शक्ति को भी नियंत्रित करेगा।

इस संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय की टिप्पणी

  • भारत के उच्चत्तम न्यायालय ने कंवर लाल गुप्ता बनाम अमरनाथ चावला मामले में कहा है, कि चुनाव अभियान के सफल आयोजन में धन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • उम्मीदवार और राजनीतिक की अधिक दृश्यता से मतदाता प्रभावित हो जाते हैं और इस तरह भारी चुनावी खर्च मतदाता की पसंद को प्रभावित करते हैं।

इस संबंध में विभिन्न समितियाँ और आयोग

  1. वर्ष 1999 में ‘भारत के विधि आयोग की ‘चुनावी कानूनों में सुधार’ पर 170 वीं रिपोर्ट।
  2. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 2004 में ‘प्रस्तावित चुनावी सुधारों’ पर रिपोर्ट।
  3. वर्ष 1990 में चुनावी सुधारों पर गोस्वामी समिति।
  4. वर्ष 1993 में वोहरा समिति की रिपोर्ट।
  5. इंद्रजीत गुप्ता कमेटी ऑन स्टेट फंडिंग ऑफ इलेक्शन 1998।
  6. वर्ष 2001 में संविधान के कामकाज की समीक्षा हेतु राष्ट्रीय आयोग।
  7. वर्ष 2008 में दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग।

हाल ही में, विधि आयोग द्वारा अपनी 255 वीं रिपोर्ट में तीन श्रेणियों के अंतर्गत चुनावी सुधारों पर कई सिफारिशें की हैं:

  1. राजनीतिक अंशदान और पार्टी उम्मीदवार खर्च पर सीमा।
  2. प्रकटीकरण मानदंड और अनिवार्यताएं।
  3. चुनावों हेतु राज्य द्वारा वित्तपोषण।

विधि आयोग की ये सिफारिशें सरकार के विचाराधीन हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. निर्वाचन संचालन नियम, 1961 का अवलोकन
  2. संशोधित चुनाव खर्च सीमा
  3. चुनाव आयोग के बारे में
  4. चुनाव खर्च से जुड़े मुद्दों पर निर्णय कौन करता है?
  5. क्या पार्टी के खर्च की कोई सीमा है?
  6. इस संबंध में विभिन्न समितियाँ और आयोग

मेंस लिंक:

चुनाव अभियान के सफल आयोजन में धन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

भारतीय वन्यजीव संस्थान का स्वायत्त दर्जा समाप्त


(Finance Ministry to divest Wildlife Institute of India)

संदर्भ:

वित्त मंत्रालय द्वारा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ‘भारतीय वन्यजीव संस्थान’ (Wildlife Institute of IndiaWII) को स्वायत्त निकाय (Autonomous Body) के दर्जे से वंचित करने की योजना बनायी जा रही है। इससे संगठन के वैज्ञानिकों में चिंता बढ़ गई है।

इस कदम पर क्या चिंताएं व्यक्त की गई है?

भारतीय वन्यजीव संस्थान का प्रमुख दायित्व वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर देश के वन्यजीव संसाधनों के प्रबंधन और संबंधित नीतियों पर पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) को सलाह प्रदान करना है। संस्थान द्वारा यह भूमिका केवल तब तक ही निभाई जा सकती है, जब तक यह MoEF भाग बना रहता है।

इसके अलावा, सरकार द्वारा इस संस्थान को प्रदान की जाने वाली राशि में प्रतिवर्ष 25% की कटौती की जाएगी, और इसे केवल शिक्षण और अनुसंधान में संलग्न ‘डीम्ड विश्वविद्यालय’ बनाया जा सकता है।

वित्त मंत्रालय के इस निर्णय का कारण

वित्त मंत्रालय द्वारा यह कदम व्यय विभाग द्वारा 18 मंत्रालयों में 194 स्वायत्त निकायों की एक समीक्षा के पश्चात उठाया गया है।

समीक्षा के अनुसार, 109 निकायों को कुल 26 निकायों में विलय कर दिया जाना चाहिए, तथा 23 निकायों से सरकार से विलग कर दिया जाना चाहिए। ‘भारतीय वन्यजीव संस्थान’ (WII) इन 23 निकायों में से एक है।

स्वायत्त निकाय क्या होते हैं?

कुछ विशिष्ट कार्यों को, सरकारी मशीनरी के दिन-प्रतिदिन के हस्तक्षेप के बिना, स्वतंत्रता और अनुकूलनीय प्रकार से पूरा करने के लिए सरकारी प्रभाव से बाहर ‘स्वायत्त निकायों’ (Autonomous Bodies) की स्थापना की जाती है।

स्वायत्त निकायों  की स्थापना कार्य-विषय से संबंधित मंत्रालय / विभागों द्वारा की जाती है, तथा इन्हें पूरी तरह या आंशिक रूप से विभिन्न अनुदानों द्वारा वित्त-पोषित किया जाता है। अनुदान की राशि, स्वायत्त निकायों  द्वारा आंतरिक संसाधनों के स्वतः अर्जित करने की क्षमता पर निर्भर करती है।

सरकार द्वारा इस प्रकार के उपाय करने का कारण

स्वायत्त संस्थानों (Autonomous Bodies – ABs) में एक निर्धारित प्रशासनिक ढाँचे के बावजूद, प्रशासन संबंधी कई ऐसे विषय होते हैं, जिनकी समीक्षा की आवश्यकता होती है।

स्वायत्त निकायों की प्रकृति

इस प्रकार के संस्थानों को अधिकांशतः ‘सोसायटी पंजीकरण अधिनियम’ के तहत सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया जाता हैं तथा कुछ मामलों में इन्हें विभिन्न अधिनियमों में निहित प्रावधानों के तहत वैधानिक संस्थानों के रूप में स्थापित किया गया है।

स्वायत्त निकायों से संबंधित मुद्दे

  1. जवाबदेही (Accountability): इन निकायों को करदाता के पैसों से वित्त-पोषित किया जाता है। हालांकि, अक्सर ऐसी शिकायतें आती है कि ये संस्थान सरकार की नीतियों का पालन नहीं करते हैं जबकि ये सरकारी विभागों की भांति जवाबदेह होते हैं।
  2. भर्ती संबंधी मामले (Recruitment issues): प्रत्येक स्वायत्त निकाय में भर्ती प्रक्रिया व नियम एक दुसरे से भिन्न होते हैं।
  3. गैर-अनुपालन (Non-Adherence): परिकल्पित लक्ष्यों का पालन नहीं किया जाता है।
  4. विषम ऑडिट प्रक्रिया (No uniform audit procedure): कुछ स्वायत्त निकायों का ऑडिट CAG द्वारा जाता हैं, तथा कई स्वायत्त निकायों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट करते हैं।

सुझाए गए सुधार

स्वायत्त निकायों के कार्य सीमाओं, स्वायत्तता और विभिन्न नीतियों को परिभाषित करने तथा अनुपालन करने हेतु एक विधिक ढाँचा तैयार किया जाना चाहिए।

  • इनकी नीतियों में एकरूपता लाने के लिए, UPSC या SSC जैसी अखिल भारतीय एजेंसी के तहत एक कार्यबल गठित किये जाने की आवश्यकता है।
  • अपनी स्थापना के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के पश्चात् स्वायत्त निकायों को समाप्त कर देना चाहिए अथवा इनका समान लक्ष्यों वाले अन्य संस्थानों में विलय कर देना चाहिए।
  • समन्वित दृष्टिकोण: मंत्रालय के अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, एक समान स्वायत्त निकायों की समितियों की एक साथ बैठकें आयोजित की जानी चाहिए ताकि उपयुक्त अधिकारी सार्थक सुझाव प्रदान कर सकें।
  • सामान स्वतन्त्र लेखा परीक्षण: स्वायत्त निकायों के लेखा परीक्षण (Auditing) एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय वन्यजीव संस्थान के बारे में।
  2. पर्यावरण मंत्रालय के तहत विभिन्न स्वायत्त और वैधानिक निकाय।
  3. स्वायत्त निकाय क्या हैं? उनका गठन कौन करता है?

मेंस लिंक:

विभिन्न स्वायत्त निकायों के कामकाज से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए और सुधारों हेतु सुझाव प्रदान कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

‘क्वाड समूह’ (Quad group)


संदर्भ:

संयुक्त राज्य अमेरिका के राज्य उप-सचिव स्टीफन बेजगन (Stephen Biegun) ने कहा है कि सहयोग संबंधी मापदंडों को समझने के बाद अंततः क्वाड (QUAD) देशों के समूह को अधिक औपचारिक हो जाना चाहिए।

औपचारिकता की आवश्यकता

नवीकृत प्रयासों के बावजूद, क्वाड (QUAD) समूह को किसी औपचारिक संरचना के न होने कारण  आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस समूह को संस्थागत (Institutionalisation) किये जाने, एक अपराजेय ‘चीन-विरोधी’ गुट में रूपांतरित होने के लिए एक औपचारिक समझौते की आवश्यकता है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान वैश्विक राजनीतिक स्थितियों में बहुत कुछ परिवर्तित हुआ है। क्वाड समूह के प्रत्येक सदस्य देश ने चीन की बढ़ती आक्रामकता का सामना किया है।

  1. चीन की ताकत और प्रभाव में वृद्धि हुई है और वह किसी भी प्रकार के मुठभेड़ के लिए उत्सुक है।
  2. ऑस्ट्रेलिया की घरेलू नीतियों को प्रभावित करने के प्रयासों के पश्चात, चीन द्वारा देश पर दंडात्मक कर (Punitive Tariffs) आरोपित लगा दिये गए है।
  3. चीन, भारत के साथ अक्सर सीमा विवादों में उलझता रहता है।
  4. चीन के सेनकाकू द्वीपों के संबंध में जापान के साथ क्षेत्रीय विवाद भड़का हुआ है।
  5. संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चीन व्यापार युद्ध में पूरी तरह से लिप्त है।

क्वाड समूह पर भारत का रवैया

भारत, हालांकि, ऐतिहासिक रूप से अपने चीन-विरोधी नजरिए व संगठनों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने से हिचकिचाता रहा है, लेकिन, लद्दाख में चीन के साथ हुई हालिया सीमा-मुठभेड़ ने इस प्रकार के औपचारिक समूह से जुड़ने संबंधी लाभ और नुकसान का आंकलन करने हेतु पर्याप्त कारण प्रदान किये है।

‘क्वाड समूह’ क्या है?

यह एक चतुष्पक्षीय संगठन है जिसमे जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सम्मिलित हैं।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी साझा हित रखते हैं।
  • इस विचार को पहली बार वर्ष 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे द्वारा प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के समूह में सम्मिलित नहीं होने के कारण यह विचार आगे नहीं बढ़ सका है।

क्वाड समूह की उत्पत्ति

क्वाड समूह की उत्पत्ति के सूत्र, वर्ष 2004 में आयी सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए चारो देशों द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों में खोजे जा सकते हैं।

  • इसके बाद इन चारो देशों के मध्य वर्ष 2007 में हुए आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पहली बार बैठक हुई।
  • इसका उद्देश्य, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, चारो देशों के मध्य समुद्री सहयोग बढ़ाना था।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

‘क्वाड समूह’ के प्रति चीन की आशंकाएं

  1. बीजिंग, काफी समय से भारत-प्रशांत क्षेत्र में इन लोकतांत्रिक देशों के गठबंधन का विरोध करता रहा है।
  2. चीन, इसे एशियाई-नाटो (Asian-NATO) चतुष्पक्षीय गठबंधन के रूप में देखता है, जिसका उद्देश्य चीन के उत्थान को रोकना है।
  3. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

निष्कर्ष:

भारत के लिए QUAD, अपने उद्देश्य, एक भू-रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक नेटवर्किंग के माध्यम से चीन को संतुलित करने के लिए एक विदेश नीति का साधन है। यह विश्व की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकतों के साथ एक गठबंधन की संभावना प्रदान करता है। फिलहाल, क्वाड (QUAD) का भविष्य एक बहुपक्षीय संबंधो हेतु एक मंच के रूप में सुरक्षित है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड – संरचना।
  2. यह पहली बार कब प्रस्तावित किया गया था?
  3. हिंद महासागर क्षेत्र में देश और महत्वपूर्ण द्वीप।
  4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भौगोलिक अवलोकन।
  5. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्र और जलडमरूमध्य।

मेंस लिंक:

शांति और सुरक्षा बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र के समुद्रीय कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए क्वाड की औपचारिक बहाली और पुन: प्रवर्तन की आवश्यकता है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन-ताइवान संबंध


(China- Taiwan relations)

संदर्भ:

हाल ही में, चीन ने भारत से ताइवान के साथ अपने संबंधो को ‘विवेकपूर्ण और उचित’ तरीके से बढाने के लिए कहा है। इसके साथ ही चीन ने कहा है कि, वह नई दिल्ली और ताइपे के मध्य होने वाले किसी भी आधिकारिक आदान-प्रदान का ‘सख्त विरोध’ करेगा।

विवाद का विषय

चीन द्वारा यह बयान, भारत और ताइवान द्वारा परस्पर व्यापार समझौते पर वार्ता आगे बढाने पर विचार करने संबंधी रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया के रूप में जारी किया गया है।

  • भारत और ताइवान के मध्य वर्ष 2018 में पहले ही एक द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं।
  • इसके बाद से, भारत-ताइवान व्यापार संबंधों का विस्तार हुआ है, और ताइवान की कंपनियां भारत में प्रमुख निवेशक हैं। हालांकि, भारत और ताइवान के मध्य अभी औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं हुए हैं।

चीन- ताइवान संबंध: पृष्ठभूमि

चीन, अपनी ‘वन चाइना’ (One China) नीति के जरिए ताइवान पर अपना दावा करता है। सन् 1949 में चीन में दो दशक तक चले गृहयुद्ध के अंत में जब ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के संस्थापक माओत्से तुंग ने पूरे चीन पर अपना अधिकार जमा लिया तो विरोधी राष्ट्रवादी पार्टी के नेता और समर्थक ताइवान द्वीप पर भाग गए। इसके बाद से ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ ने ताइवान को बीजिंग के अधीन लाने, जरूरत पड़ने पर बल-प्रयोग करने का भी प्रण लिया हुआ है।

  • चीन, ताइवान का शीर्ष व्यापार भागीदार है। वर्ष 2018 के दौरान दोनों देशों के मध्य 226 बिलियन डॉलर के कुल व्यापार हुआ था।
  • हालांकि, ताइवान एक स्वशासित देश है और वास्तविक रूप से स्वतंत्र है, लेकिन इसने कभी भी औपचारिक रूप से चीन से स्वतंत्रता की घोषणा नहीं की है।
  • एक देश, दो प्रणाली” (one country, two systems) सूत्र के तहत, ताइवान, अपने मामलों को खुद संचालित करता है; हांगकांग में इसी प्रकार की समान व्यवस्था का उपयोग किया जाता है।
  • ताइवान, विभिन्न नामों से विश्व व्यापार संगठन, एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग और एशियाई विकास बैंक का सदस्य है।

भारत-ताइवान संबंध

  • यद्यपि भारत-ताइवान के मध्य औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, फिर भी ताइवान और भारत विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर सहयोग कर रहे हैं।
  • भारत ने वर्ष 2010 से चीन की ‘वन चाइना’ नीति का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. ताइवान की अवस्थिति और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।
  2. वन चाइना नीति के तहत चीन द्वारा प्रशासित क्षेत्र।
  3. क्या ताइवान का WHO और संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व किया गया है?
  4. दक्षिण चीन सागर में स्थित देश।
  5. कुइंग राजवंश (Qing dynasty)।

मेंस लिंक:

भारत- ताइवान द्विपक्षीय संबंधों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

आयुष्मान सहकार योजना


(Ayushman Sahakar)

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री द्वारा आयुष्मान सहकार योजना का शुभारम्भ किया गया है।

यह क्या है?

  • यह सहकारी समितियों द्वारा देश में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए एक अनूठी योजना है।
  • इसे कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक शीर्ष स्वायत्त विकास वित्त संस्थान राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, (National Cooperative Development CorporationNCDC) द्वारा तैयार किया गया है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन

  • NCDC प्रत्याशित सहकारी समितियों के लिए आवधिक ऋण मुहैया कराएगा।
  • इस उद्देश्य हेतु एक कोष का गठन किया जाएगा।
  • स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित गतिविधियाँ संचालित करने संबंधी उपयुक्त प्रावधान बनाने वाली कोई कोई भी सहकारी समिति NCDC निधि से सहायता प्राप्त कर सकेगी।
  • पात्र सहकारी समितियों के लिए, राज्य सरकारों/ केंद्र शासित क्षेत्रों के प्रशासनों के माध्यम से NCDC सहायता प्रत्यक्ष रूप से प्रदान की जाएगी।
  • यह योजना, दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी तथा मार्जिन मनी प्रदान करती है ।
  • यह योजना महिला बहुमत वाली सहकारिताओं को एक प्रतिशत आर्थिक सहायता (subvention) प्रदान करेगी ।

स्वास्थ्य सेवा में सहकारी समितियां

  • सहकारी समितियों द्वारा देश भर में लगभग 52 अस्पताल संचालित किये जाते हैं। तथा इनकी संचयी शैय्या क्षमता 5,000 से अधिक है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति के चलते, योजना का फायदा उठाने वाली सहकारी समितियां व्यापक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में क्रांति लाएंगी।

योजना के लाभ

कोविड-19 महामारी ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए तत्काल आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया है ।

  • इसलिए, NCDC की यह योजना केंद्र द्वारा किए जाने वाले किसान कल्याण क्रियाकलापों को मजबूत करने की दिशा में यह योजना सहायक होगी।
  • इस योजना से ग्रामीणों को अस्पताल, मेडिकल कॉलेज सहित कई सुविधाएं प्राप्त होंगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 के अनुरूप

NCDC की योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही अपने सभी आयामों में स्वास्थ्य प्रणालियों को आकार देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य में निवेश, स्वास्थ्य सेवाओं के संगठन, प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, मानव संसाधन का विकास करने, किसानों को सस्ती स्वास्थ्य देखभाल इत्यादि को सम्मिलित करती है ।

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के अनुरूप

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के क्रम में एनसीडीसी की आयुष्मान सहकार योजना ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन लाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना का लक्ष्य
  2. यह किसके द्वारा तैयार की गयी है?
  3. पात्रता
  4. योजना के तहत कार्यशील पूंजी का प्रावधान
  5. ब्याज अनुदान का प्रावधान

मेंस लिंक:

आयुष्मान सहकार योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

भारत में साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा


संदर्भ:

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) राजेश पंत ने हाल ही में भारत में साइबर अपराधों पर निम्नलिखित टिप्पणियां की हैं:

  • भारत में साइबर अपराधों के कारण 2019 में 1.25 ट्रिलियन रुपये का नुकसान हुआ।
  • देश में अन्य पहलों के साथ-साथ स्मार्ट सिटी विकसित करने और 5 जी नेटवर्क को चालू करने से साइबर खतरों में वृद्धि होगी।
  • मात्र कुछ ही भारतीय कंपनियाँ साइबर सुरक्षा उत्पाद बना रही हैं और इस क्षेत्र में एक बड़ा स्थान रिक्त है।
  • साइबर हमलों की जांच के लिए विश्वसनीय स्वदेशी समाधान विकसित करने हेतु साइबर सुरक्षा के लिए एक समर्पित उद्योग मंच स्थापित किया जाना चाहिए।

साइबर अपराधों के बारे में जागरूकता फैलाने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • शिकायतकर्ताओं के लिए, चाइल्ड पोर्नोग्राफी / बाल यौन शोषण सामग्री, बलात्कार / सामूहिक बलात्कार अभिकल्पनाएं या यौन सामग्री से संबंधित शिकायतों की रिपोर्ट करने के लिए ऑनलाइन साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल शुरू किया गया है।
  • देश में साइबर अपराध से संबंधित मुद्दों को व्यापक और समन्वित तरीके से हल करने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre I4C) के गठन करने की योजना बनाई गई है।
  • देश में महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना सुरक्षा केंद्र (National Critical Information Infrastructure Protection CentreNCIIPC) की स्थापना की गयी है।
  • डिजिटल सेवाएँ प्रदान करने वाले सभी इकाईयों को साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं को CERT-In में रिपोर्ट करने के लिए अनिवार्य किया गया है।
  • दुर्भावनापूर्ण कार्यक्रमों का पता लगाने और इन्हें हटाने के लिए साइबर स्वच्छ केंद्र (बोटनेट क्लीनिंग एंड मालवेयर एनालिसिस सेंटर) की शुरुआत की गयी है।
  • साइबर हमलों और साइबर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए संकट प्रबंधन योजना (Crisis Management Plan) का गठन किया गया है।

अन्य उपाय

  • नियमित रूप से अलर्ट / सलाह जारी करना
  • कानून प्रवर्तन कर्मियों / अभियोजकों / न्यायिक अधिकारियों हेतु क्षमता निर्माण / प्रशिक्षण
  • साइबर फोरेंसिक सुविधाओं में सुधार करना।
  • जांच में तेजी।

अंत में, पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ भारत के संविधान के अनुसार राज्य के विषय हैं। राज्य / संघ शासित प्रदेश अपनी कानून प्रवर्तन मशीनरी के माध्यम से अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के बारे में
  2. राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना सुरक्षा केंद्र (NCIIPC) के बारे में
  3. CERT- In
  4. साइबर स्वच्छ केंद्र

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

कालेश्वरम सिंचाई परियोजना को कानून का उल्लंघन कर पर्यावरण मंजूरी दी गयी: NGT


संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (National Green TribunalNGT) द्वारा एक निर्णय में कहा गया है, कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा, कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (Kaleshwaram Lift Irrigation ProjectKLIP) को आवश्यक कार्य पूरा हो जाने के बाद कानून का उल्लंघन कर पूर्वव्यापी (ex post facto) पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance EC) प्रदान की गई थी।

आगे की राह

  • जवाबदेही तय की जाए और उपचारात्मक उपाय किये जाएँ।
  • इस उद्देश्य के लिए, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) द्वारा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को इस मामले की जांच करने हेतु संबंधित क्षेत्रीय विशेषज्ञता वाले सात सदस्यों की एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया है।

संदर्भ शर्तें (Terms of Reference- ToR)

  • विशेषज्ञ समिति, वर्ष 2008 से 2017 तक की अवधि के दौरान पर्यावरणीय मंजूरी (EC) के बिना परियोजना को आगे बढ़ाने के कारण होने वाले नुकसान का आकलन करेगी तथा नुकसान की बहाली हेतु आवश्यक उपायों का पता लगाएगी।
  • यह लागू किये गए राहत और पुनर्वास उपायों की जांच कर सकती है और परियोजना के प्रस्तावकों द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण प्रबंधन योजना के प्रभावी कार्यान्वयन की जांच कर सकती है।

कालेश्वरम् लिफ्ट सिंचाई परियोजना (KLIP)

कालेश्वरम् लिफ्ट सिंचाई परियोजना (Kaleshwaram Lift Irrigation Project- KLIP)  को पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश में प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना (Pranahita-Chevella project) कहा जाता था।

  • तेलंगाना के गठन के पश्चात वर्ष 2014 में इसे कालेश्वरम् लिफ्ट सिंचाई परियोजना (KLIP) के रूप में फिर से तैयार किया गया।
  • इसका उद्देश्य गोदावरी के बाढ़ के पानी का दोहन करके तेलंगाना को सूखा-मुक्त बनाना है।
  • यह परियोजना कालेश्वरम्, भूपलपल्ली, तेलंगाना में गोदावरी नदी पर एक निर्माणाधीन बहुउद्देश्यीय सिंचाई परियोजना है।
  • यह परियोजना प्राणहिता नदी और गोदावरी नदी के संगम स्थल से आरंभ होती है।

परियोजना का महत्व

  • गोदावरी के पानी का रिवर्स पम्पिंग और भंडारण द्वारा उपयोग किया जाएगा, जिससे 38 लाख एकड़ भूमि में कृषि सिचाई की सुविधा प्राप्त होगी तथा हजारों टंकियों को फिर से भरा जायेगा।
  • उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध कराने और भंडारण टैंकों की श्रृंखला तथा पाइपलाइनों का नेटवर्क बनाकर हैदराबाद और सिकंदराबाद को पीने के पानी की आपूर्ति करने में मदद मिलेगी।
  • यह परियोजना मिशन काकतीय (Mission Kakatiya) और मिशन भगीरथ योजनाओं में भी सहायता प्रदान करेगी। ये योजनाएं कई गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने और टैंकों की क्षमता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
  • कालेश्वरम् लिफ्ट सिंचाई परियोजना, पूरी हो जाने पर विश्व की सबसे बड़ी सिंचाई और पेयजल प्रणाली होगी।

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स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


इंड स्प्रिंग बोर्ड

(Ind Spring Board)

यह इंडियन बैंक तथा IIT मद्रास इनक्यूबेशन सेल (IIT-MIC) की एक पहल है।

  • इसका उद्देश्य स्टार्ट-अप्स के वित्तपोषण करना है।
  • IITMIC, प्रमाणित प्रौद्योगिकी और स्थापित नकदी प्रवाह वाले स्टार्ट-अप को बैंक के पास भेजेगा। बैंक इन इकाइयों के लिए 50 करोड़ तक का ऋण प्रदान करेगा।

अवसंरचना निवेश न्यास मॉडल (InvIT) 

(Infrastructure Investment Trust)

  • यह एक म्यूचुअल फंड की भांति एक सामूहिक निवेश योजना है, जो अवसंरचना परियोजनाओं में निजी और संस्थागत निवेशकों से प्राप्त होने वाले धन का प्रत्यक्ष निवेश करके लाभ अर्जित करने में सक्षम बनाती है।
  • सेबी (इंफ़्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) विनियम, 2014 द्वारा InvITs को विनियमित किया जाता है।

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डेमचोक सेक्टर

(Demchok sector)

भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के लेह ज़िले में स्थित एक गाँव व सैनिक खेमा है। यह अक्साई चिन क्षेत्र से दक्षिण में स्थित है। वास्तविक नियंत्रण रेखा इस ग्राम के दक्षिणपूर्वी भाग से निकलती है।

यह एक विवादित क्षेत्र है, जो डेमचोक, लद्दाख और डेंगमॉग, नगरी प्रीफेक्चर के गांवों तक विस्तृत है, तथा चार्डिंग नाले (Charding Nullah) और सिंधु नदी के संगम के निकट अवस्थित है।

चर्चा का कारण

हाल ही में, पूर्वी लद्दाख के डेमचोक सेक्टर में भारतीय सेना द्वारा पकड़े गये चीनी सैनिक को चीन को वापस सौंप दिया गया।

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LoC पर स्मार्ट फेंस

(Smart fence along LoC)

भारत, नियंत्रण रेखा (Line of Control- LoC) पर 700 किलोमीटर से अधिक दूरी तक पूरी बाड़ को स्मार्ट बाड़ (Smart fence) में बदलने की सोच रहा है, जिसमे काफी ज्यादा लागत आयेगी।

  • इसके लिए एक हाइब्रिड मॉडल अपनाया जा रहा है। परीक्षण किए जा रहे स्मार्ट बाड़ के इस मॉडल की लागत लगभग 10 लाख प्रति किमी होगी।
  • इस बाड़ को LIDAR (Light Detection and Ranging) सेंसर, इंफ्रारेड सेंसर और कैमरों के साथ लैस किया जाएगा।

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समुद्री यातायात सेवा (VTS) और पोत यातायात निगरानी व्‍यवस्‍था (VTMS)

जहाजरानी राज्य मंत्री द्वारा हाल ही में, समुद्री यातायात सेवा (Vessel Traffic ServicesVTS) और पोत यातायात निगरानी व्‍यवस्‍था (Vessels Traffic Monitoring SystemsVTMS) के लिए स्वदेशी सॉफ्टवेयर समाधान के विकास का शुभारंभ किया गया है।

  • वीटीएस और वीटीएमएस एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो पोत की स्थिति, अन्य यातायात की स्थिति या मौसम संबंधी खतरे की चेतावनी और एक बंदरगाह या जलमार्ग के भीतर यातायात के व्यापक प्रबंधन को निर्धारित करता है।
  • समुद्री यातायात सेवा (VTS) समुद्र में जीवन की सुरक्षा, समुद्री यातायात की सुरक्षा और दक्षता, समुद्री वातावरण, आस-पास के किनारे के क्षेत्रों, कार्य स्थलों और समुद्री यातायात के संभावित दुष्प्रभावों से सुरक्षा कायम करने में सहायक होती है।
  • IMO सम्‍मेलन के SOLAS (Safety of Life at Sea) के तहत VTMS का पालन अनिवार्य है।

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