Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 October

 

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. हैदराबाद में बाढ़ के कारण

2. बाढ़ संकट को दूर करने हेतु ‘राज्य जल ग्रिड’

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ग्रामीण भारत में पौष्टिक आहार लेने हेतु सामर्थ्यता

2. भारत, कोविड-19 के उच्चत्तम प्रसरण दौर से बाहर

3. म्यांमार रोहिंग्या-संकट का अवलोकन

4. चीन द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा व संवेदनशील तकनीक सुरक्षा हेतु कानून पारित

5. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. इज़राइल और बहरीन के मध्य औपचारिक राजनयिक संबंधों का आरंभ

2. भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण द्वारा “स्किन्स ऑफ इंडिया” का प्रकाशन

3. साधना दर्रा

4. स्लीनेक्स-20

5. स्केल इंडिया ऐप

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

हैदराबाद में बाढ़ के कारण


संदर्भ:

हाल ही में, एक स्वतंत्र मौसम पूर्वानुमान एजेंसी ‘स्काईमेट’ (Skymet) द्वारा हैदराबाद को, पिछले रविवार 72.5 मिमी बारिश दर्ज करने के पश्चात, देश में सर्वाधिक वर्षा बारिश वाले स्थान के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

18 अक्टूबर, शहर में पिछले 10 वर्षों के दौरान, अक्टूबर का तीसरा सर्वाधिक बारिश वाल दिन था- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological DepartmentIMD) के आंकड़ों के अनुसार, हैदराबाद में 10 अक्टूबर, 2013 को 98.3 मिमी तथा 3 अक्टूबर, 2017 को 82.6 मिमी बारिश हुई थी।

इस महीने में वर्षा

IMD आंकड़ों के अनुसार- शहर में 18 दिनों में 356 मिमी बारिश हुई है, जोकि सामान्य वर्षा की तुलना में चार गुना अधिक है।

इस विपत्ति का कारण

शहर में होने वाली इस भयंकर बारिश का कारण बंगाल की खाड़ी में निर्मित तूफ़ान को बताया गया है। यह तूफ़ान पूर्वी तट से टकराने के पश्चात कमजोर होकर पश्चिम की ओर मुड़ गया था।

  • आम तौर पर, चक्रवातों के कारण भूस्खलन की घटनाएँ हूतीं हैं। किंतु, इस विशेष तूफानी प्रणाली ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर-आंतरिक कर्नाटक और महाराष्ट्र में पूर्व-पश्चिम तक विस्तृत एक लंबे क्षेत्र में अपना प्रभाव छोड़ा है।
  • इन सभी राज्यों में, हालिया मानसून मौसम के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। नतीजतन, इन क्षेत्रों की मृदा में पर्याप्त नमी बरकरार है। तूफ़ान के मार्ग में दूर तक फ़ैली हुए इस क्षेत्र की मृदा में नमी की मात्रा से तूफ़ान की अवधि में पर्याप्त रूप से वृद्धि हुई।
  • इसके अलावा, ऊपरी और निचले वायुमंडलीय स्तरों के मध्य वायु की गति में होने वाले महत्वपूर्ण भिन्नता के परिणामस्वरूप निर्मित ऊर्ध्वाधर वायु अपरूपण (vertical wind shear) प्रणाली ने स्थल पर एक पूर्ण विकसित निम्न दाब क्षेत्र के रूप में तूफ़ान की तीव्रता को बनाए रखने में मदद की।

coasttocoast

परंतु, हैदराबाद में बाढ़ का क्या कारण था?

हैदराबाद, एक विशिष्ट अपवाह तंत्र के मध्य अवस्थित है।

  • इसका पश्चिमी किनारा, गोदावरी नदी के बेसिन में स्थित है।
  • इसके पूर्व में, कृष्णा नदी का बेसिन है।
  • इसके अतिरिक्त, हैदराबाद दक्कन क्षेत्र में अवस्थित है, जिसमें एक अव्यवस्थित अपवाह प्रतिरूप पाया जाता है – यहां पानी एक दिशा में नहीं बहता है क्योंकि इस क्षेत्र में ढलान विभिन्न दिशाओं में पाया जाता है।

बाढ़ को नियंत्रित करने हेतु अतीत में किये गए प्रयास

वर्ष 1908 में, बादल फटने से हुई तबाही और बाढ़ से 15,000 लोगों की जान चली गयी थी तथा 80,000 लोग बेघर हो गए थे।

इस स्थिति का अध्ययन करने तथा शहर में बाढ़ नियंत्रण प्रबंधन के उपाय सुझाने हेतु सर विश्वेश्वरैया को नियुक्त किया गया था। इसके पश्चात:

  1. दो जलाशयों- उस्मानसागर और हिमायतसागर- का निर्माण किया गया।
  2. जल निकासी हेतु एक आधुनिक प्रणाली भी निर्मित की गई थी।

किन समस्याओं में ध्यान नहीं दिया गया है?

  • हैदराबाद शहर को कृषि-क्षेत्र के शीर्ष पर निर्मित किया गया है। तथा यहाँ संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है।
  • विभिन्न जल-निकायों के चारो ओर बिना किसी बफर क्षेत्र के सड़कों का निर्माण किया गया है, जो जल निकायों के आस-पास दृढ़ तटबंधो का कार्य करते हैं।
  • अनियंत्रित अचल संपत्ति में विकास।

आगे की राह

शहर में मात्र नालों पर ही नहीं, बल्कि पूरे जल-निकासी तंत्र पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

  • पूरे शहर को जलग्रहण क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए और अतिक्रमण किए गए महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सफाई की जाए।
  • इस सब उपायों को लागू करने के लिए, एक ‘झीलों एवं उद्यान प्राधिकरण’ की भांति एक कार्यकारी और ‘पारिस्थितिक’ निकाय की आवश्यकता होगी, तथा HMDA, GHMC और राजस्व, सिंचाई, सड़कों, और इमारतों जैसे विभागों के कार्यों का समन्वय किया जाए।
  • GIS तकनीक का उपयोग करके, शहरी बाढ़ से संबंधित भेद्यता का आकलन करने हेतु शहर के क्षेत्रों की जोखिम मानचित्रण किया जाना चाहिए।
  • GHMC के नगरीय योजना विभाग द्वारा अतिक्रमण रोकने हेतु निषिद्ध क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।
  • भूजल पुनर्भरण के लिए क्षेत्रों का संरक्षण और सुरक्षा की जानी चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गोदावरी नदी बेसिन
  2. कृष्णा नदी बेसिन
  3. चक्रवात क्या हैं?
  4. चक्रवात की ‘आँख’ तथा अन्य क्षेत्रों के तापमान में भिन्नता
  5. चक्रवात तथा हरिकेन में अंतर

मेंस लिंक:

हाल ही में, हैदराबाद में आयी बाढ़ के कारणों पर चर्चा कीजिए। बाढ़ प्रबंधन के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

बाढ़ संकट को दूर करने हेतु ‘राज्य जल ग्रिड’


(State Water Grid to overcome flood crisis)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री द्वारा महाराष्ट्र में बाढ़ के संकट से निपटने के स्थायी समाधान हेतु राज्य जल ग्रिड (State Water Grid) के निर्माण करने का सुझाव दिया गया है।

इसे किस प्रकार निर्मित किया जाएगा?

  • राष्ट्रीय विद्युतीकरण ग्रिड और राजमार्ग ग्रिड की तर्ज पर राज्य में राज्य जल ग्रिड का निर्माण किया जाएगा।
  • इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की नदियों का पानी राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की तरफ मोड़ना है।
  • इससे सूखा प्रभावित या कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल संकट कम होने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

राज्य जल ग्रिड के लाभ

  • यह प्रयास सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सरकार के लिए मददगार सिद्ध होगा। साथ ही बाढ़ के संकट से निपटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संसाधन की बचत होगी।
  • इससे असिंचित क्षेत्रों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी जिससे किसानों की आत्महत्याओं के मामलों में व्यापक कमी आएगी।
  • कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और ग्रामीण तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अतिरिक्त जल का प्रवाह मोड़ने से स्थानीय संसाधनों पर दबाव कम होगा।
  • इससे नजदीक भविष्य में नदियों के रास्ते जल परिवहन का विकल्प विकसित किया जा सकता है जो यात्रियों और वस्तुओं के आवागमन का वैकल्पिक मार्ग हो सकेगा।
  • मत्स्य पालन के साथ-साथ अन्य व्यवसाय विकसित हो सकते हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो सकते हैं।

आवश्यकता एवं महत्व

बाढ़ के चलते राज्य के विभिन्न भागों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, इसलिए इस प्राकृतिक आपदा के बेहतर प्रबंधन के लिए तत्काल कारगर योजना तैयार करने की आवश्यकता है। यह प्राकृतिक आपदा मानव निर्मित विभिन्न विसंगतियों के चलते अधिक भयावह होती जा रही है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जल-ग्रिड क्या होते हैं?
  2. भारत में नदी जोड़ो परियोजनायें – विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति।
  3. महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण नदियाँ।

मेंस लिंक:

बाढ़ संकट पर काबू पाने के किये राज्य जल ग्रिड के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

ग्रामीण भारत में पौष्टिक आहार लेने हेतु सामर्थ्यता


(Affordability of nutritious diets in rural India)

संदर्भ:

ग्रामीण भारत में पौष्टिक आहार लेने हेतु सामर्थ्यता (Affordability of nutritious diets in rural India),  अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (International Food Policy Research Institute) के अर्थशास्त्री कल्याणी रघुनाथन तथा अन्य के द्वारा संलिखित एक अध्ययन-रिपोर्ट है।

हाल ही में, इस अध्ययन-रिपोर्ट के निष्कर्ष जारी किए गए है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • वास्तविक भारतीय आहार – गेहूं, चावल, बाजरा, दूध, दही, प्याज, मूली, पालक, केला- में से सबसे सस्ते विकल्प का चयन करते हुए ‘अध्ययन’ में की गयी गणना के अनुसार,- एक दिन के भोजन का व्यय 45 रुपए (अथवा वयस्क व्यक्ति के लिए ₹51) होगा
  • प्रति चार में से तीन ग्रामीण भारतीय पौष्टिक आहार लेने में समर्थ नहीं है। यहां तक ​​कि अगर वे अपनी पूरी आय भोजन पर खर्च करते हैं, तो भी उनमें से, प्रति तीन में से दो के पास सभी पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने वाले सबसे सस्ते आहार हेतु पर्याप्त धन नहीं होगा।
  • यदि वे गैर-खाद्य व्यय के लिए अपनी आय का मात्र एक तिहाई हिस्सा अलग रख देते हैं, तो 76% ग्रामीण भारतीय अनुशंसित आहार का व्यय नहीं उठा पाएंगे। इसमें परिवार के गैर-कमाने वाले सदस्यों, जैसे कि बच्चों या अन्य वयस्कों के भोजन व्यय को सम्मिलित नहीं किया गया है।

अध्ययन का महत्व

यह  निष्कर्ष इस तथ्य के मद्देनजर महत्वपूर्ण हैं, भारत द्वारा खाद्य सुरक्षा हासिल कर लिए जाने के बाद भी, यह कई पोषण संकेतकों पर काफी निम्न प्रदर्शन करता है।

  • नवीनतम ग्लोबल हंगर इंडेक्स के अनुसार- भारत में, पांच वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों, जिनका वज़न उनकी लंबाई के अनुपात में कम होता है, की संख्या विश्व में सर्वाधिक है, जो तीव्र कुपोषण को दर्शाती है।
  • मात्र कैलोरी सेवन की माप करने वाले ऐसे संकेतकों के अनुसार, भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन ऐसे संकेतक कैलोरी सेवन के पोषण मूल्य को सम्मिलित नहीं करते हैं।

भारत में पोषण संबंधी दिशानिर्देश

राष्ट्रीय पोषण संस्थान के दिशानिर्देशों के अनुसार, वयस्क महिलाओं के लिए पर्याप्त पौष्टिक आहार हेतु एक दिन में 330 ग्राम अनाज और 75 ग्राम दालें खाने के साथ-साथ 300 ग्राम दुग्ध-उत्पाद, 100 ग्राम फल और 300 ग्राम सब्जियां सम्मिलित हैं। सब्जियों में कम से कम 100 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जियाँ होनी आवश्यक हैं।

अध्ययन में प्रयुक्त की गयी पद्धति

आर्थिक सर्वेक्षण के ‘थाली-अर्थशास्त्र’ (Thalinomics), जिसमे ‘भोजन की लागत’ का एक चित्ताकर्षक (rosier) चित्र प्रदान किया गया था, के विपरीत इस अध्ययन में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी को मापक के रूप में प्रयुक्त किया गया है। अकुशल श्रमिक, औद्योगिक श्रमिकों की तुलना में आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त, अध्ययन में, भारत के आधिकारिक आहार दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक डेयरी, फल और हरे पत्तेदार सब्जियां जैसी वस्तुएं सम्मिलित की गयी हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘थाली-अर्थशास्त्र’ (Thalinomics) क्या है?
  2. मध्याह्न भोजन योजना के तहत प्रति दिन प्रति बच्चे न्यूनतम भोजन और कैलोरी सामग्री?
  3. अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के बारे में
  4. भारत में गरीबी रेखा की गणना- विभिन्न पद्धतियाँ और समितियाँ

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

भारत, कोविड-19 के उच्चत्तम प्रसरण दौर से बाहर


संदर्भ:

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ‘महामारी के भविष्य की कार्यवाही पर अध्ययन करने हेतु सात विशेषज्ञों का पैनल गठित किया गया था। इस विशेषज्ञ पैनल ने एक ‘मॉडलिंग स्टडी- कोविड-19 इंडिया नेशनल सुपरमॉडल’ (COVID-19 India National Supermodel) शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • भारत ने सितंबर में कोविड-19 के उच्चत्तम प्रसरण दौर को पार कर लिया है और यदि महामारी की वर्तमान प्रवृत्ति जारी रहती है, तो फरवरी माह तक देश में ‘न्यूनतम मामले’ दर्ज होंगे।
  • दिसंबर माह में सक्रिय मामलों की संख्या 50,000 से कम रहेगी तथा इसके साथ ही, अगले साल की शुरुआत तक भारत में कोविड संक्रमण से प्रभावित मामलों की कुल संख्या 106 लाख रहने की उम्मीद है।
  • हालांकि, यह निष्कर्ष, इस अनुमान पर आधारित है कि, त्योहारों के दौरान तथा सर्दियों में फैलने वाले इस वायरस में कोई उत्परिवर्तन या तीव्रता नहीं होगी।
  • स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवा क्षमताओं के लिए संकट उत्पन्न करने में सक्षम ‘वायरस-संक्रमण में वृद्धि’ होने पर केवल उप-जिला स्तरों पर ही एक पूर्ण शटडाउन लागू किये जाने पर विचार किया जायेगा।
  • अब तक, देश की लगभग 30% आबादी वायरस के संपर्क में आ चुकी है।
  • अगर लॉकडाउन नहीं किया गया होता, तो भारत में जून माह तक संक्रमण का उच्चत्तम स्तर पहुच गया होता तथा 40-147 लाख व्यक्ति वायरस से प्रभावित हो चुके होते। यदि लॉकडाउन की शुरुआत 1 अप्रैल या मई से शुरू की जाती तो जुलाई तक 30-40 लाख लोगों के संक्रमित होने के साथ वायरस संक्रमण का उच्चत्तम स्तर पहुच गया होता।

climbing_down

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

म्यांमार रोहिंग्या-संकट का अवलोकन


(Myanmar Rohingya- an overview of the crisis)

रोहिंग्या कौन हैं?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों को, विश्व में सर्वाधिक नहीं, तो सबसे अधिक भेदभाव किये जाने वाले लोगों में से एक, के रूप में वर्णित किया गया है। रोहिंग्या, म्यांमार के कई जातीय अल्पसंख्यकों में से एक समुदाय हैं।

  • वर्ष 2017 की शुरुआत में म्यांमार में ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों की संख्या लगभग एक मिलियन थी।
  • उनकी अपनी भाषा और संस्कृति है और कहा जाता है, वे अरब व्यापारियों और अन्य समूहों के वंशज हैं, जो इस क्षेत्र में कई पीढ़ियों से बसे हुए हैं।

विवाद का विषय:

म्यांमार, जोकि मुख्य रूप से बौद्ध देश है, की सरकार ने रोहिंग्या समुदाय को नागरिकता देने से इनकार कर दिया है, और यहाँ तक कि वर्ष 2014 की जनगणना में भी इन्हें सम्मिलित नहीं किया था।

म्यांमार सरकार, इन्हें बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के रूप में देखती है।

वर्तमान संकट का आरंभ

अगस्त 2017 में, रोहिंग्या मुसलमानों पर म्यांमार की सेना द्वारा किए गए घातक हमले के परिणामस्वरूप सैकड़ों हज़ारों लोगों को बांग्लादेश की सीमा की ओर भागना पड़ा।

  • इन्हें सैन्य हमले से बचने के लिए सब कुछ जोखिम में डाल कर समुद्र से होकर अथवा पैदल भागना पड़ा। जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा बाद में ‘नृजातीय-उन्मूलन का अध्ययन योग्य उदाहरण’ बताया गया।
  • लेकिन म्यांमार (पूर्व में बर्मा) की सेना का कहना है कि, वह रोहिंग्या आतंकवादियों से लड़ रही थी, तथा उसने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार कर दिया।
  • देश की नेता आंग सान सू की (Aung San Suu Kyi), जो कि कभी मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के लिए एक प्रतिरूप (Icon) थी, कई बार नरसंहार के आरोपों से इनकार कर चुकी हैं।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  1. एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) का कहना है कि म्यांमार की सेना द्वारा रोहिंग्या महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार और दुर्व्यवहार किया गया है।
  2. अगस्त 2018 में संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में म्यांमार की सेना पर “नरसंहार के इरादे” से सामूहिक हत्याएं और बलात्कार करने का आरोप लगाया गया।
  3. पश्चिमी अफ्रीका के एक छोटे मुस्लिम बहुल राष्ट्र ‘गाम्बिया’ द्वारा, दर्जनों अन्य मुस्लिम देशों की ओर से अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of justice-ICJ) में मामला दर्ज किया गया है, जिसमे म्यांमार की सेना, जिसे तत्मादाव (Tatmadaw) कहा जाता है, के खिलाफ जांच शुरू किए जाने तथा तब तक आपातकालीन कदम उठाने का आह्वान किया गया है।

वर्तमान में रोहिंग्या

दक्षिणी बांग्लादेश में दुनिया के सबसे बड़े और सबसे घनी आबादी वाले शरणार्थी शिविर में लगभग 860,000 रोहिंग्या रहते हैं।

  • म्यांमार और बांग्लादेश की सरकारों के मध्य रोहिंग्या शरणार्थियों के म्यांमार में प्रत्यावर्तन हेतु शर्तों पर वार्ता जारी हैं।
  • गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत में लगभग 40,000 रोहिंग्या रहते हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

 चीन द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षासंवेदनशील तकनीक सुरक्षा हेतु कानून पारित


(China passes law to safeguard national security, sensitive tech)

संदर्भ:

हाल ही में, चीन द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संवेदनशील निर्यात को प्रतिबंधित करने संबंधी नया कानून पारित किया गया है। यह नया क़ानून 1 दिसंबर से लागू किया जाएगा।

नए कानून का अवलोकन

  • इस क़ानून के तहत, बीजिंग, निर्यात नियंत्रण का दुरूपयोग करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले देशों के विरुद्ध ‘प्रत्युत्तर में समान तरीके अपनाने’ में सक्षम होगा।
  • इसके अंतर्गत, चीनी अधिकारी, निर्यात नियंत्रण हेतु ‘समय-समय पर आवधिक रूप से’ प्रकाशित की जाने वाली वस्तुओं की सूची को तैयार और समायोजित करेंगे।
  • विदेशी व्यक्तियों और समूहों को भी निर्यात नियंत्रण नियमों के उल्लंघन करने के लिए भी उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।

विश्लेषणइस प्रकार के कानूनों का प्रभाव

वर्तमान में, चीन और अमेरिका के मध्य रिश्ते सामान्य नहीं है। हाल के दिनों में, अमेरिका द्वारा चीनी तकनीक फर्मों पर अभूतपूर्व शुल्क आरोपित किये गए, प्रतिबंधित किए जाने की धमकी दी गयी तथा कुछ तकनीक फर्मों को प्रतिबंधित किया गया है।

  • अमेरिका ने लोकप्रिय प्लेटफॉर्म और प्रमुख कंपनियों, जैसे कि, टिक-टॉक और वीचैट, तकनीकी दिग्गज कंपनी, हुआवेई (Huawei) और चिप-निर्माण में अग्रणी, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इंटरनेशनल कॉर्प, के खिलाफ भी कदम उठाए हैं।
  • इसलिए, चीन द्वारा पारित नया कानून एक ऐसा कदम है, जिसे चीन द्वारा अमेरिका के साथ रिश्तों में बढ़ रहे तनाव- विशेष रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र में- के दौरान अमेरिका के खिलाफ उपयोग किया जा सकता है।
  • इससे पहले, सितंबर में, चीन ने काफी लंबे समय से अपेक्षित ‘अविश्वसनीय इकाइयों की सूची’ (Unreliable Entities List) जारी की थी, जिसे अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई हेतु एक अस्त्र के रूप में देखा गया था। क्योंकि, इससे पूर्व अमेरिका ने इकाई सूची’ (Entity List) का प्रयोग करते हुए अपने बाजार से चीनी कंपनी, हुआवेई (Huawei) को प्रतिबंधित कर दिया था।
  • इसके एक महीने पूर्व, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यात हेतु प्रतिबंधित प्रौद्योगिकियों पर नियमों को विस्तारित किया था, जिसमे इस सूची में ‘नागरिक उपयोग’ को भी जोड़ा गया है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद


(UN Human Rights Council)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (United Nations Human Rights Council- UNHRC) में सीटों के लिए हुए चुनावों में पाकिस्तान और नेपाल पुनः निर्वाचित हुए है, चीन ने सबसे कम अंतर से एक सीट जीती है तथा सऊदी अरब चुनावों में हार गया है।

UNHRC के बारे में

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद‘ (UNHRC) का पुनर्गठन वर्ष 2006 में इसकी पूर्ववर्ती संस्था, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UN Commission on Human Rights) के प्रति ‘विश्वसनीयता के अभाव’ को दूर करने में सहायता करने हेतु किया गया था।

इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

संरचना

  • वर्तमान में, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) में 47 सदस्य हैं, तथा समस्त विश्व के भौगोलिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु सीटों का आवंटन प्रतिवर्ष निर्वाचन के आधार पर किया जाता है।
  • प्रत्येक सदस्य तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए निर्वाचित होता है।
  • किसी देश को एक सीट पर लगातार अधिकतम दो कार्यकाल की अनुमति होती है।

UNHRC के कार्य

  • परिषद द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों की सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा‘ (Universal Periodic Review UPR) के माध्यम से मानव अधिकार संबंधी विषयों पर गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करता है।
  • यह विशेष देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों हेतु विशेषज्ञ जांच की देखरेख करता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष चुनौतियाँ तथा इसमें सुधारों की आवश्यकता:

  • ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य-देशों जैसे सऊदी अरब, चीन और रूस के मानवाधिकार रिकॉर्ड इसके उद्देश्य और मिशन के अनुरूप नहीं हैं, जिसके कारण आलोचकों द्वारा परिषद की प्रासंगिकता पर सवाल उठाये जाते है।
  • UNHRC में कई पश्चिमी देशों द्वारा निरंतर भागीदारी के बावजूद भी ये मानव अधिकारों संबंधी समझ पर गलतफहमी बनाये रखते हैं।
  • UNHRC की कार्यवाहियों के संदर्भ में गैर-अनुपालन (Non-compliance) एक गंभीर मुद्दा रहा है।
  • अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्ट्रों की गैर-भागीदारी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNHRC के बारे में
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. ‘सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा’ (UPR) क्या है?
  5. UNHRC का मुख्यालय
  6. हाल ही में UNHRC की सदस्यता त्यागने वाले देश

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


इज़राइल और बहरीन के मध्य औपचारिक राजनयिक संबंधों का आरंभ

  • इज़राइल और बहरीन ने अमेरिका की मध्यस्था में एक समझौते पर हस्ताक्षर करके आधिकारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं।
  • मिस्र के साथ 1979 के शांति समझौते और जॉर्डन के साथ 1994 के समझौते के बाद संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन इजरायल के साथ औपचारिक संबंध बनाने वाले तीसरे और चौथे अरब राज्य बन गए है।

saudi_arabia

भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण द्वारा स्किन्स ऑफ इंडिया” का प्रकाशन

हाल ही में, भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (Zoological Survey of India- ZSI) द्वारा स्किंक प्रजातियों के वितरण पर ‘स्किन्स ऑफ इंडिया’ (Skins of India) का प्रकाशन किया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • भारत स्किंक (Skinks) की 62 प्रजातियां पायी जाती है और जिनमें से लगभग 57% (33 प्रजातियाँ) स्थानिक हैं।
  • ये प्रजातियाँ आमतौर पर देश में सभी प्रकार के आवासों, जैसे रेतीले मैदानों, उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
  • विश्व भर में स्किंक्स की 1,602 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें से भारत में 4% से भी कम प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

स्किंक (Skinks) क्या हैं?

स्किंक, लंबे आकार की, अपेक्षाकृत छोटे अथवा या बिना पैरों वाली सरीसृप प्रजाति होती है। इसमें स्पष्ट गर्दन का अभाव होता है, तथा इसकी त्वचा शल्कीय व चिकनी होती है।

zsi

साधना दर्रा

(Sadhna Pass)

  • साधना दर्रा, जिसे पहले नास्ताचुन दर्रा (Nastachun pass) कहा जाता था, जम्मू और कश्मीर में स्थित एक पर्वतीय दर्रा है।
  • यह हिमालय में स्थित है और कुपवाड़ा जिले की करनाह तहसील को शेष भारतीय प्रशासित घाटी घाटी से जोड़ता है।

sadhna_pass

स्लीनेक्स-20

(SLINEX 20)

  • यह भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास श्रृंखला है।
  • ‘स्लीनेक्स-20’ का आठवां संस्करण 19 से 21 अक्टूबर 2020 तक त्रिंकोमाली श्रीलंका के तट पर आयोजित किया जाएगा।
  • पहले SLINEX का आयोजन वर्ष 2005 में किया गया था।

स्केल इंडिया ऐप

(Scale India App)

  • हाल ही में, अपनी सभी सेवाओं में गुणवत्ता को एकीकृत करने के लिए एकल मंच प्रदान करने के प्रयास में चमड़ा क्षेत्र कौशल परिषद (Leather Sector Skill CouncilLSSC) द्वारा चमड़ा कर्मचारियों के लिए कौशल प्रमाणन आकलन (Skill Certification Assessment for Leather Employees SCALE) इंडिया एंड्रॉयड ऐप के शुभारंभ की घोषणा की गयी है।
  • चमड़ा क्षेत्र कौशल परिषद (LSSC) की स्थापना 2012 में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा अनुमोदन प्राप्त करने के बाद की गई थी।

  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos