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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 October

 

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. भारतीय बैंक संघ (IBA)

2. ग्लोबल हंगर इंडेक्स, 2020

3. ब्रिटेन के लिए ‘नो-डील ब्रेक्ज़िट’ का तात्पर्य

4. दक्षिण चीन सागर

5. नई स्टार्ट संधि

 

सामान्य अध्ययन-III

1. खुला बाज़ार परिचालन (OMO)

2. बीमा लोकपाल

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कैस्पियन वॉर-गेम

2. किसी कार्यवाही पर ‘रोक’ (Stay) की समय सीमा

3. ज़ोजिला सुरंग

4. राष्ट्रीय आजीविका मिशन

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

भारतीय बैंक संघ (IBA)


(Indian Banks’ Association)

संदर्भ:

भारतीय बैंक संघ (Indian Banks’ AssociationIBA) की प्रबंध समिति द्वारा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकिरण राय जी को 2020-21 के लिए एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया है।

भारतीय बैंक संघ (IBA) के बारे में:

भारतीय बैंक संघ (Indian Banks’ AssociationIBA) की स्थापना वर्ष 1946 में भारतीय बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा की गयी थी।

  • IBA, भारत से संचालित होने वाली; भारत में बैंकिंग प्रबंधन हेतु एक प्रतिनिधि संस्था है, तथा मुंबई में स्थित भारतीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों का एक संघ हैं।
  • भारतीय बैंक संघ (IBA) का गठन भारतीय बैंकिंग के विकास, समन्वय और सुदृढ़ीकरण हेतु किया गया था। IBA, सदस्य बैंकों को नई प्रणालियों के कार्यान्वयन तथा मानकों को अपनाने सहित विभिन्न प्रकार से सहायता प्रदान करता है।

भारतीय बैंक संघ के सदस्य:

भारतीय बैंक संघ (IBA) के आरंभ में 1946 के 22 भारतीय बैंक सदस्य थे। वर्तमान में यह भारत में संचालित होने वाली लगभग 237 बैंकिंग कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IBA के बारे में
  2. सदस्य
  3. कार्य

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स, 2020


(Global Hunger Index)

संदर्भ:

हाल ही में, ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2020 (Global Hunger Index- GHI) रिपोर्ट जारी की गयी है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) क्या है?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) एक सहकर्मी-समीक्षित प्रकाशन (Peer-Reviewed Publication) है, जिसे प्रतिवर्ष वेल्ट हंगर हिल्फे (Welt Hunger Hilfe) तथा कंसर्न वर्ल्डवाइड (Concern Worldwide) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है।

GHI में देशों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?

GHI स्कोर, एक सूत्र पर आधारित होता है, जिसमे भूख के तीन आयामों- अपर्याप्त कैलोरी सेवन, बाल कुपोषण और बाल मृत्यु दर– को सम्मिलित किया जाता है।

GHI रैंकिंग तैयार करने हेतु चार संकेतकों के आधार पर गणना की जाती है:

  1. अल्पपोषण (UNDERNOURISHMENT): अल्प-पोषित आबादी का हिस्सा जो अपर्याप्त कैलोरी सेवन को दर्शाता है।
  2. बाल-निर्बलता (CHILD WASTING): पांच वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे, जिनका वज़न उनकी लंबाई के अनुपात में कम होता है, तीव्र कुपोषण को दर्शाता है।
  3. बच्चों में नाटापन (CHILD STUNTING): पांच वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे आते हैं जिनकी लंबाई आयु के अनुपात में कम होती है। यह दीर्घकालिक कुपोषण को दर्शाता है।
  4. बाल मृत्यु दर (CHILD MORTALITY): पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर।

GHI स्कोर

  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) में 0 से 100 अंको के मापक पर देशों की रंकिग की जाती है, जिसमे ‘0’ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (भूख-मुक्त) तथा ‘100’ सबसे ख़राब प्रदर्शन को दर्शाता है।
  • 10 अंक से कम स्कोर ‘भूख के निम्न स्तर’ को दर्शाता है; 20 से 34.9 तक का स्कोर ‘भूख के गंभीर स्तर’ का संकेतक होता है; 35 से 49.9 तक का स्कोर ‘भूख के खतरनाक स्तर’ तथा 50 या उससे अधिक का स्कोर ‘भूख के अत्यंत चिंताजनक स्तर’ को बताता है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI)- 2020 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत में, पांच वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों, जिनका वज़न उनकी लंबाई के अनुपात में कम होता है, की संख्या विश्व में सर्वाधिक है, जो तीव्र कुपोषण को दर्शाती है।
  • भारत, 107 देशों के सूचकांक में 94 वें स्थान पर है, तथा बांग्लादेश (75) और पाकिस्तान (88) जैसे अपने पड़ोसी देशों से पीछे है।
  • रिपोर्ट में भारत को 27.2 अंक प्राप्त हुए हैं और इसे गंभीर श्रेणी में रखा गया है।
  • दक्षिण, पूर्व और दक्षिण-पूर्वी एशिया के क्षेत्र में, भारत से खराब प्रदर्शन करने वाले देश तिमोर-लेस्ते, अफगानिस्तान और उत्तर कोरिया हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों में नाटापन (Child Stunting) दर 37.4% है।
  • देश में बाल-निर्बलता (Child Wasting) दर 17.3% है।
  • भारत की अल्पपोषण (Undernourishment) दर 14% और बाल मृत्यु दर 3.7% है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) के बारे में
  2. GHI किसके द्वारा जारी किया जाता है?
  3. GHI में अंक निर्धारण
  4. देशों की रैंकिंग
  5. भारत का प्रदर्शन
  6. भारत तथा पड़ोसी देशों की GHI में स्थिति

मेंस लिंक:

नवीनतम ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत के प्रदर्शन पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

ब्रिटेन के लिए ‘नो-डील ब्रेक्ज़िट’ का तात्पर्य


(What will a no-deal Brexit mean for the UK?)

संदर्भ:

छह महीने से जारी समझौता-वार्ता और प्रमुख मुद्दों पर गतिरोधों के पश्चात्, शुक्रवार 16 अक्टूबर को,  प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि, जनवरी से यूनाइटेड किंगडम को यूरोपीय संघ के साथ ‘नो ट्रेड डील’ (No Trade Deal) के लिए तैयार रहना चाहिए। यह ब्रसेल्स के साथ वार्ता समाप्त होने का स्पष्ट संकेत समझा जा रहा है।

क्या ‘नो-डील ब्रेक्ज़िट’ संभव है?

हाँ। व्यापार समझौतों के प्रतिस्थापन पर सहमति नहीं हो पाने का अर्थ होगा कि, यूनाइटेड किंगडम 1 जनवरी को बिना किसी समझौते के अलग हो रहा है और डब्ल्यूटीओ की शर्तों पर व्यापार करेगा, जिसमे टैरिफ और कोटा लागू किया जाएगा।

  • संबंध-विच्छेद समझौता (Withdrawal Agreement), अभी भी जारी रहेगा, अतः आयरिश सीमा तथा तथाकथित ‘तलाक बिल’ (Divorce Bill) जैसे मुद्दों को इसकी शर्तों के तहत सुलझाया जाएगा, किंतु इसके बाद भी कई अन्य मुद्दे अनसुलझे शेष हैं।
  • दूसरे शब्दों में, वास्तविक ‘नो-डील’ पूर्णतया संभव नहीं हो सकती है, किंतु वर्तमान में ‘नो-डील’ के बदले हुए स्वरूप को ‘नो ट्रेड डील’ एग्जिट के रूप में देखा जा सकता है।

‘नो-डील’ का स्वरूप

यूरोपीय संघ इस बात पर अड़ा हुआ है कि ‘मैनेज्ड’ नो डील जैसी कोई चीज़ नहीं है। तथा इस बात से भयभीत है ‘नो डील’ के इतना आसान दिखने के कई जोखिम हो सकते है, और इससे संबंधित भविष्यवाणियाँ सच हो सकती है।

  • ‘नो-डील’, यूरोपीय आयोग को महत्वपूर्ण व्यवधानों को सुचारू बनाने हेतु यूरोपीय संघ के हित में होने पर अस्थायी और एकतरफा आधार पर आकस्मिक योजना बनाने से नहीं रोक सकेगी।
  • ट्रेड डील होने अथवा नहीं होने पर भी यूनाइटेड किंगडम की वित्तीय सेवाओं को यूरोपीय संघ के बाजारों तक ‘समानता’ (Equivalence) के आधार पर पहुंच प्रदान की जाएगी।

व्यापार और सीमा शुल्कों का प्रबंधन

  • बिना किसी औपचारिक ‘ट्रेड-डील’ के ब्रिटेन को डब्ल्यूटीओ के नियमों पर निर्भर होना पड़ेगा – जिसे ब्रेक्ज़िट समर्थकों द्वारा ‘ऑस्ट्रेलिया-ब्रिटेन’ संबंध (Australia-style relationship) मॉडल के रूप में बताया जा रहा है।
  • डिफ़ॉल्ट कमीशन की स्थिति के अनुसार- यूरोपीय संघ के ‘सभी प्रासंगिक’ कानून आयात और निर्यात पर लागू होंगे, जिसमें टैरिफ भी शामिल हैं।

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निष्कर्ष

यदि किसी बिंदु पर पहुचने के बाद ‘नो डील’ अपरिहार्य हो जजाती है, तब किसी भयावह परिणाम से बचने के लिए दोनों पक्षों के हित समान रूप से एकरेखीय हो जाएंगे।

  • यहां तक ​​कि अस्थायी उपाय लागू होने के बाद भी, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के भविष्य में संबंधों के स्वरूप संबंधी मूलभूत प्रश्न बने रहेंगे।
  • ‘नो डील’ दीर्घकालिक रूप से स्थायी समाधान नहीं है और अंततः दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर वापस आना होगा।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

दक्षिण चीन सागर


(South China sea)

संदर्भ:

हाल ही में, फिलीपींस सरकार द्वारा अपने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) में तेल की खोज को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून अभिसमय (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS), 1982 के अंतर्गत समुद्र तटीय देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र की सीमा, उसके तट से 320 किमी तक होती है, जिसमे वह देश विशिष्ट रूप से सागरीय संसाधनों का दोहन कर सकता है।

फिलीपींस के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र की सीमा में रीड बैंक (Reed Bank) भी आता है, जिस पर चीन भी अपना दावा करता है। यह क्षेत्र विवादित दक्षिण चीन सागर में स्थित है।

विवाद के बारे में:

चीन के दक्षिणी चीन सागर तथा क्षेत्र में स्थित अन्य देशो से विवादो के केद्र में समुद्री क्षेत्रों में संप्रभुता स्थापित करने संबंधी विवाद है।

  • इस क्षेत्र में ‘पारसेल द्वीप समूह’ (Paracels Islands) तथा ‘स्प्रैटली द्वीप समूह’ (Spratley Islands) दो श्रंखलाएं अवस्थित है, यह द्वीप समूह कई देशों की समुद्री सीमा में बिखरे हुए है, जोकि इस क्षेत्र में विवाद का एक प्रमुख कारण है।
  • पूर्ण विकसित द्वीपों के साथ-साथ स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) जैसी, दर्जनों चट्टाने, एटोल, सैंडबैंक तथा रीफ भी विवाद का कारण हैं।

विभिन्न देशों के विवादित क्षेत्र पर दावे

  1. चीन:

इस क्षेत्र में सबसे बड़े क्षेत्र पर अधिकार का दावा करता है, इसके दावे का आधार ‘नाइन-डैश लाइन’ है, जो चीन के हैनान प्रांत के सबसे दक्षिणी बिंदु से आरंभ होकर सैकड़ों मील दक्षिण और पूर्व में फली हुई है।

  1. वियतनाम:

वियतनाम का चीन के साथ पुराना ऐतिहासिक विवाद है। इसके अनुसार, चीन ने वर्ष 1940 के पूर्व कभी भी द्वीपों पर संप्रभुता का दावा नहीं किया था, तथा 17 वीं शताब्दी के बाद से ‘पारसेल द्वीप समूह’ तथा ‘स्प्रैटली द्वीप समूह’ पर वियतनाम का शासन रहा है – और इसे साबित करने के लिए उसके पास पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं।

  1. फिलीपींस:

फिलीपींस और चीन दोनों स्कारबोरो शोल (इसे चीन में हुआंग्यान द्वीप के रूप में जाना जाता है) पर अपने अधिकार का दावा करते हैं। यह फिलीपींस से 100 मील और चीन से 500 मील की दूरी पर स्थित है।

  1. मलेशिया और ब्रुनेई:

ये देश दक्षिण चीन सागर में अपने अधिकार-क्षेत्र का दावा करते हैं, इनका कहना है कि, संबंधित क्षेत्र ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी’ (United Nations Convention on the Law of the SeaUNCLOS), 1982 द्वारा निर्धारित उनके विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में आता है।

हालांकि, ब्रुनेई किसी भी विवादित द्वीप पर अपने अधिकार-क्षेत्र का दावा नहीं करता है, परन्तु मलेशिया ‘स्प्रैटली द्वीप समूह’ में एक छोटे से हिस्से पर अपना दावा करता है।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. विवाद में शामिल देश
  2. नाइ-डैश लाइन क्या है?
  3. विवादित द्वीप और उनकी अवस्थिति
  4. UNCLOS क्या है?
  5. ताइवान स्ट्रेट और लूजॉन स्ट्रेट की अवस्थिति

मेंस लिंक:

दक्षिण चीन सागर विवाद पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

‘न्यू स्टार्ट’ संधि


(New START treaty)

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा रूस तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य हुए पिछले प्रमुख ‘परमाणु हथियार शस्त्र न्यूनीकरण समझौते- ‘न्यू स्टार्ट’ संधि (New START treaty) में बिना शर्त एक साल के विस्तार का प्रस्ताव दिया गया है।

न्यू स्टार्ट संधि के बारे में:

यह संयुक्त राज्य अमेरिका और रूसी संघ के बीच एक परमाणु शस्त्र न्यूनीकरण संधि- नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (Strategic Arms Reduction Treaty-START) है, जिसे औपचारिक रूप से ‘न्यू स्टार्ट’ संधि (New START treaty) भी कहा जाता है।

  • इस संधि पर 8 अप्रैल 2010 को प्रॉग (Prague) में हस्ताक्षर किए गए थे तथा यह 5 फरवरी 2011 से लागू हुई है।
  • इस संधि ने दिसंबर 2012 में समाप्त होने वाली मॉस्को की संधि (SORT) को प्रतिस्थापित किया है।
  • यह नई स्टार्ट संधि शीत युद्ध के अंत में वर्ष 1991 में हुई स्टार्ट संधि- I (START I treaty) की अनुवर्ती है, जो दिसंबर 2009 में समाप्त हो गई थी। इसके पश्चात START II संधि प्रस्तावित की गयी, जो कभी लागू नहीं हो सकी, और एक अन्य START III संधि प्रस्तावित की गयी, जिसके लिए वार्ता कभी पूरी नहीं हो सकी।

न्यू START संधि के प्रमुख लक्ष्य

  • इसके तहत सामरिक परमाणु मिसाइल लांचर की संख्या आधी हो जाएगी।
  • SORT प्रणाली के स्थान पर एक नया निरीक्षण और सत्यापन तंत्र स्थापित किया जाएगा।
  • तैनात किये गए सामरिक परमाणु वारहेड की संख्या 1,550 तक सीमित की जाएगी।
  • तैनात और गैर-तैनात अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) लॉन्चर्स, पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) लॉन्चरों की संख्या, और परमाणु आयुध से लैस भारी बमबर्षक यानों की संख्या 800 तक सीमित की जाएगी।

संधि के अंतर्गत समयसीमा

  • संधि के लागू होने के सात वर्ष के भीतर इन दायित्वों को पूरा किया जाना चाहिए।
  • यह संधि की अवधि दस वर्ष है, जिसमें दोनों पक्षों की सहमति से पांच साल के लिए नवीनीकृत करने का विकल्प होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. STARTS और न्यू START संधियों के बारे में
  2. न्यू START के तहत समय सीमा
  3. न्यू START संधि पर हस्ताक्षरकर्ता
  4. संधि की शर्तें

मेंस लिंक:

न्यू स्टार्ट संधि के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

खुला बाज़ार परिचालन (OMO)


(Open Market Operation)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि, वह 9 अक्टूबर की घोषणा के अनुसार, राज्य विकास ऋण (State Developments Loans- SDL) की खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operation- OMO) के माध्यम से खरीद करेगा।

रिज़र्व बैंक बहु-प्रतिभूति नीलामी के माध्यम से राज्य विकास ऋण (SDL) को एकाधिक मूल्य नीलामी पद्धति का उपयोग करके खरीदेगा। यहां प्रतिभूति-वार अधिसूचित राशि नहीं है।

‘खुला बाज़ार परिचालन’ क्या होता है?

खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operation- OMO), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या देश के केंद्रीय बैंक द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों की बिक्री और खरीद होती है।

  • OMO का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को विनियमित करना है।
  • यह मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक होता है।

क्रियाविधि

भारतीय रिजर्व बैंक, खुले बाज़ार परिचालन (OMO) का निष्पादन वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से करता है तथा इसके तहत RBI जनता के साथ सीधे व्यापार नहीं करता है।

OMO बनाम तरलता

  • जब केंद्रीय बैंक मौद्रिक प्रणाली में तरलता (liquidity) में वृद्धि करना चाहता है, तो वह खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। इस प्रकार केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंकों को तरलता प्रदान करता है।
  • इसके विपरीत, जब केंद्रीय बैंक मौद्रिक प्रणाली में तरलता को कम करना चाहता है, तो वह सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री करेगा। इस प्रकार केंद्रीय बैंक अप्रत्यक्ष रूप से धन की आपूर्ति को नियंत्रित करता है और अल्पकालिक ब्याज दरों को प्रभावित करता है।

‘खुले बाज़ार परिचालन’ के प्रकार

भारतीय रिजर्व बैंक दो प्रकार से ‘खुले बाज़ार परिचालन’ (OMO) का निष्पादन करता है:

  1. एकमुश्त खरीद (Outright PurchasePEMO) – यह स्थायी प्रक्रिया होती है और इसमें सरकारी प्रतिभूतियों की एकमुश्त बिक्री या खरीद की जाती है।
  2. पुनर्खरीद समझौता (Repurchase AgreementREPO) – यह अल्पकालिक प्रक्रिया होती है और पुनर्खरीद के अधीन होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मौद्रिक बनाम राजकोषीय नीति उपकरण
  2. मात्रात्मक बनाम गुणात्मक उपकरण
  3. OMO क्या हैं?
  4. PEMO बनाम REPO

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

बीमा लोकपाल


(Insurance Ombudsman)

संदर्भ:

भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (Insurance Regulatory and Development Authority of IndiaIRDAI)  द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के सामान्य बीमाकर्ताओं को शिकायतों के उचित और समय पर निपटान को सुनिश्चित करने हेतु 17 बीमा लोकपाल कार्यालयों (Insurance Ombudsman Offices) में से प्रत्येक के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की सलाह दी गयी है।

‘बीमा लोकपाल’ के बारे में:

भारत सरकार द्वारा बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) योजना का आरंभ, निजी बीमा पॉलिसीधारकों के लिए किया गया था। इस योजना का उद्देश्य, पॉलिसीधारकों की शिकायतों का लागत प्रभावी, कुशल और निष्पक्ष तरीके से अदालतों से बाहर ही निपटान करना है।

बीमा लोकपाल तक पहुंच

बीमाकर्ता के विरुद्ध शिकायत होने पर कोई भी व्यक्ति, स्वयं या अपने विधिक उत्तराधिकारी, नामित व्यक्ति या संपत्ति-भागी के माध्यम से बीमा लोकपाल के समक्ष लिखित रूप से शिकायत कर सकता है।

बीमा लोकपाल के समक्ष किन मामलों में शिकायत की जा सकती है?

सबसे पहले शिकायतकर्ता को बीमा कंपनी में शिकायत करनी होती है, और यदि बीमा कंपनी,

  1. शिकायत को अस्वीकार कर देती है,
  2. संतोषप्रद समाधान नहीं करती है,
  3. 30 दिनों तक कोई जबाव नहीं देती है

तो शिकायतकर्ता बीमा लोकपाल के समक्ष शिकायत कर सकता है, इसके अतिरिक्त, प्रक्रिया में हुए खर्च की राशि सहित किये गए सहित दावे की राशि 30 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

बीमा लोकपाल की नियुक्ति

  • लोकपाल की नियुक्ति हेतु बीमा परिषद द्वारा बीमा उद्योग, नागरिक या न्यायिक सेवाओं में से किसी व्यक्ति को चुना जाता है।
  • बीमा लोकपाल की सेवा-अवधि तीन वर्ष होती है।

निपटान प्रक्रिया

अनुशंसाएं:

  • बीमा लोकपाल मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है और विवाद संबंधी तथ्यों के आधार पर उचित अनुशंसा करता है।
  • यदि शिकायतकर्ता, इस अधिनिर्णय को पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में स्वीकार करता है, तो लोकपाल संबंधित कंपनी को सूचित करेगा, जिसका कंपनी को 15 दिनों के भीतर अनुपालन करना होता है।

निर्णय:

  • यदि अनुशंसा के माध्यम से कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो लोकपाल शिकायतकर्ता से सभी आवश्यकत कागजातों तथा साक्ष्यों को प्राप्त करने के तीन महीने के भीतर एक निर्णय देगा। यह निर्णय बीमा कंपनी के लिए बाध्यकारी होगा।
  • बीमा लोकपाल द्वारा निर्णय दिए जाने के पश्चात, बीमाकर्ता 30 दिनों के भीतर निर्णय का अनुपालन करेगा और लोकपाल को इस संबंध में सूचित करेगा।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कैस्पियन वॉर-गेम

(Caspian war games)

  • रूस ने कैस्पियन क्षेत्र में युद्ध के खेल को शुरू कर दिया है।
  • यह युद्ध खेल अजरबैजान के अबशेरोन प्रायद्वीप (Absheron peninsula) के उत्तर में हो रहा है।

किसी कार्यवाही पर ‘रोक’ (Stay) की समय सीमा

  • सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि ‘उच्च न्यायालय सहित किसी भी अदालत द्वारा लगाई गयी किसी प्रकार की ‘रोक’ या ‘स्टे’ छह महीने की अवधि के पश्चात स्वतः समाप्त हो जाएगा।‘
  • कार्यवाही पर ‘स्टे’ का विस्तार ‘उचित कारण’ दिए जाने पर ही किया जा सकता है।

ज़ोजिला सुरंग

(Zojila tunnel)

संदर्भ: केंद्रीय परिवहन मंत्रालय द्वारा ज़ोजिला सुरंग में निर्माण-संबंधी कार्यों के लिए पहले विस्फोट का आरंभ किया गया है। यह सुरंग श्रीनगर घाटी और लेह के बीच पूरे साल की कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

प्रमुख तथ्य:

  • ज़ोजिला एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक (Bi-directional) सुरंग है।
  • यह श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह को एक सुरंग के माध्यम से प्रसिद्ध ज़ोजिला दर्रे से जोड़ेगी।
  • समुद्र तल से 11,500 फीट से अधिक ऊँचाई पर स्थित, ऑल-वेदर ज़ोजिला सुरंग 15 किमी. लंबी होगी और सर्दियों के दौरान भी सड़क संपर्क सुनिश्चित करेगी।
  • यह NH-1 के 434 किलोमीटर लंबे श्रीनगर-कारगिल-लेह खंड पर यात्रा को को हिमस्खलन से मुक्त बनाएगी और सुरक्षा बढ़ाएगी तथा यात्रा के समय को 3 घंटे से घटाकर 15 मिनट कर देगी।

राष्ट्रीय आजीविका मिशन

(Rashtriya Aajeevika Mission)

  • आधिकारिक नाम: दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)।
  • इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • मिशन का उद्देश्य: ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित करना, और उनकी आर्थिक गतिविधियों को निरंतर सहयोग प्रदान करना तथा उन्हें प्रेरित करना ताकि वे गरीबी से बाहर निकल सके।

DAY-NRLM के तहत उप-योजनाएं

  • ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI): एक प्रशिक्षु को बैंक क्रेडिट लेने और अपने स्वयं के सूक्ष्म उद्यम शुरू करने में सक्षम बनाता है।
  • सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए ग्रामीण निर्धनों की सुविधा हेतु ‘स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम’ (SVEP)
  • ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं हेतु आजिविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (AGEY)

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