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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 October

 

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. घरेलू हिंसा के खिलाफ वर्ष 2005 का कानून ‘एक मील का पत्थर’: उच्चत्तम न्यायालय

 

सामान्य अध्ययन-II

1. सरल जीवन बीमा

2. राष्ट्रीय जहाज पुनर्चक्रण प्राधिकरण

3. भारत व बांग्लादेश के मध्य प्रति व्यक्ति जीडीपी की तुलना।

4. GLP पर OECD कार्यकारी समूह के उपाध्यक्ष पद पर भारत की नियुक्ति

 

सामान्य अध्ययन-III

1. एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन संदेशों के खिलाफ ब्रिटेन के नेतृत्व में लड़ाई

2. ‘चैप्टर प्रोसीडिंग्स’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC)

2. नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क (NZP)

3. पीपुल्स अलायन्स फॉर गुपकर डिक्लेरेशन

4. ताइवान जलडमरूमध्य

5. ‘रेड लाइट ऑन, गाडी ऑफ’ पहल

6. ‘ईट राइट मूवमेंट’

7. महिला किसान दिवस

8. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के तीसरे सम्मलेन के परिणाम

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

घरेलू हिंसा के खिलाफ वर्ष 2005 का कानून ‘एक मील का पत्थर’: उच्चत्तम न्यायालय


(Supreme Court Terms 2005 Law On Domestic Violence As ”Milestone”)

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने एक फैसले में कहा है कि फौजदारी अदालत द्वारा घरेलू हिंसा कानून में किसी विवाहित महिला को दिया गया आवास का अधिकार ‘‘प्रासंगिक’’ है और सुसराल के घर से उसे निष्कासित करने की दीवानी कार्यवाही में भी उस पर विचार किया जा सकता है।

साथ ही, न्यायालय ने घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण पर 2005 के कानून को “मील का पत्थर” करार दिया है।

न्यायालय द्वारा की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  • 2005 के कानून के बावजूद, अदालत ने कहा, ‘‘इस देश में घरेलू हिंसा बढ़ी है और कई महिलाएं किसी न किसी रूप में या लगभग रोजाना हिंसा का सामना करती हैं। हालांकि, इस क्रूर व्यवहार की सबसे कम रिपोर्ट दर्ज होती है।’’
  • शीर्ष अदालत ने कहा कि महिला, पूरे जीवन एक बेटी, बहन, पत्नी, मां और साथी या अकेली औरत के तौर पर कभी भी खत्म नहीं होने वाली हिंसा और भेदभाव के अंतहीन चक्र के आगे अपने भाग्य का समर्पण कर देती है।
  • महिलाएं अपने खिलाफ हिंसा का प्रतिकार उनके मुद्दों को सुलझाने वाले कानून की कमी, मौजूदा कानूनों की अनदेखी की वजह से नहीं करतीं और सामाजिक बर्ताव से वे सबसे अधिक असुरक्षित हो जाती हैं। मौजूदा कानूनों की अज्ञानता और सामाजिक रवैया उन्हें कमजोर बनाता है।

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, (Protection of Womens From Domestic Violence Act), 2005 संविधान के अंतर्गत प्रद्दत महिलाओं के अधिकारों के प्रभावी संरक्षण हेतु एक अधिनियम है।

  • इसके तहत, परिवार के भीतर होने वाली किसी भी तरह की हिंसा अथवा इससे जुड़े मामलों के शिकार होने वाली महिलाओं सुरक्षा तथा राहत उपलब्ध कराई जाती है।
  • घरेलू अपराधों को दंडनीय अपराध के रूप में मान्यता देने के लिए, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों को इसके प्रावधानों का विस्तार करने और कानूनी सहायता के अलावा पीड़ितों के लिए आपातकालीन राहत प्रदान करने के लिए यह भारत में पहला महत्वपूर्ण प्रयास है।

निष्कर्ष

किसी भी समाज की प्रगति उसकी महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा तथा उन्हें बढ़ावा देने की क्षमता पर निर्भर करती है। भारत के संविधान द्वारा महिलाओं को समान अधिकारों और विशेषाधिकारों की गारंटी देते हुए इस देश में महिलाओं की स्थिति के परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाया गया था।

प्रीलिम्स लिंक और मेन्स लिंक:

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की प्रमुख विशेषताएं और महत्व।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

सरल जीवन बीमा


(Saral Jeevan Bima)

यह बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (Insurance Regulatory and Development AuthorityIRDA) द्वारा हाल ही में आरंभ किया गया एक स्टैंडर्ड इंडिविजुअल टर्म लाइफ इंश्योरेंस उत्पाद (Standard Individual Term Life Insurance Product) है।

  • यह ग्राहकों को एक सुविज्ञ विकल्प चुनने तथा बीमा उत्पाद की गलत बिक्री को कम करने में सहायक होगा।
  • सभी बीमा कंपनियों को अगले साल 1 जनवरी 2021 तक ‘मानक उत्पाद’ पेश करना होगा।

सरल जीवन बीमा की प्रमुख विशेषताएं

  1. पॉलिसीधारक की पॉलिसी अवधि के दौरान मृत्यु के पश्चात उसके नॉमिनी को बीमित राशि के बराबर क्लेम मिलेगा।
  2. इसके तहत जेंडर, आवास, यात्रा, पेशा या शैक्षणिक योग्यता से कोई मतलब नहीं है और कोई भी इसे खरीद सकता है।
  3. पात्रता: यह पॉलिसी 18-65 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध होगी।
  4. पॉलिसी की अवधि 5-40 वर्ष होगी।
  5. पॉलिसी की अधिकतम परिपक्वता अवधि 70 वर्ष है।
  6. सरल बीमा योजना में न्यूनतम बीमित राशि 5 लाख और अधिकतम बीमित राशि 25 लाख रखी गई है। हालांकि, बीमाकर्ताओं के पास अन्य नियमों और शर्तों के अंतर्गत, 25 लाख से अधिक की राशि के चुनाव का विकल्प होगा।
  7. पॉलिसी के तहत मात्र एक अपवर्जन होगा – आत्महत्या करने पर अपवर्जन।
  8. इसके तहत को परिपक्वता लाभ प्राप्त नहीं होगा तथा इसमें पॉलिसी सरेंडर करने पर कोई लाभ प्राप्त नहीं होगा और न ही पॉलिसी के खिलाफ कोई ऋण लिया जा सकता है।
  9. पॉलिसी वैकल्पिक दुर्घटना लाभ और स्थायी विकलांगता लाभ भी प्रदान करेगी।

इस पॉलिसी की आवश्यकता

अलग-अलग नियम और शर्तों के साथ बाजार में कई ‘टर्म पॉलिसी’ उपलब्ध हैं। किंतु, जिन ग्राहकों के पास एक सुविज्ञ विकल्प चुनने हेतु पर्याप्त समय और ऊर्जा नहीं होती है, उन्हें उचित उत्पाद का चयन करना मुश्किल लगता है। इसलिए, सरल सुविधाओं और मानक नियमों और शर्तों के साथ एक मानक, निजी जीवन बीमा उत्पाद को शुरू करना आवश्यक महसूस किया गया था।

अनिवार्य शुद्ध जीवन बीमा देश में समावेशन और बीमा-पैठ बनाने में भी सहायक होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IRDA के बारे में
  2. सरल जीवन बीमा- प्रमुख विशेषताएं
  3. नीति के तहत अपवर्जन
  4. पात्रता
  5. परिपक्वता लाभ

मेंस लिंक:

सरल जीवन बीमा योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय जहाज पुनर्चक्रण प्राधिकरण


(National Authority for Recycling of Ships)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा जहाजरानी महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) को राष्ट्रीय जहाज पुनर्चक्रण प्राधिकरण (National Authority for Recycling of Ships) के रूप में अधिसूचित किया गया है।

इस अधिसूचना को ‘जहाजों के पुनर्चक्रण अधिनियम’ (Recycling of Ships Act), 2019 की धारा 3 के तहत जारी किया गया है।

भूमिकाएँ और कार्य

  • नौवहन महानिदेशक, एक शीर्ष निकाय के रूप में, जहाजों के पुनर्चक्रण से संबंधित सभी गतिविधियों के प्रबंधन, निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए अधिकृत होंगे।
  • राज्य सरकारों और जहाज-रीसाइक्लिंग यार्ड-मालिकों द्वारा आवश्यक विभिन्न अनुमोदन के लिए नौवहन महानिदेशक (DG Shipping) अंतिम प्राधिकरण होगा।

जहाज पुनर्चक्रण हेतु हांगकांग अभिसमय:

भारत सरकार ने जहाज़ों का पुनर्चक्रण विधेयक, 2019 के तहत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime Organization- IMO) के अधीन जहाज पुनर्चक्रण हेतु हांगकांग अभिसमय में सम्मिलित होने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन(IMO), द्वारा वर्ष 2009 में जहाजों के सुरक्षित और पर्यावरणीय रूप से अनुकूलित पुनर्चक्रण के लिए हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय को अपनाया गया था।
  • इस अभिसमय को लागू करने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि, परिचालन अवधि (Operational Life) समाप्त होने के बाद किसी जहाज़ का पुनर्चक्रण करने से उसका मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर कोई हानिकारक प्रभाव न पड़े।
  • कृपया ध्यान दें, यह अभिसमय अभी तक लागू नहीं हुआ है।

भारत और पड़ोसी देशों में जहाजों का पुनर्चक्रण

  • भारत, विश्व का प्रमुख जहाज तोड़ने वाला देश है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख सकल टन का पुनर्चक्रण करता है। इसके बाद बांग्लादेश का स्थान है, जहाँ करीब 68 लाख सकल टन भार का पुनर्चक्रण किया जाता है।
  • पाकिस्तान और चीन, जहाज तोड़ने वाले क्रमशः तीसरे और चौथे सबसे बड़े देश हैं। इन देशों में प्रतिवर्ष 30 लाख से अधिक टन भार का पुनर्चक्रण किया जाता है।

विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 800 जहाजों को सेवामुक्त कर तोड़ने के लिए विभिन्न स्थानों पर भेजा जाता है। भारत के पास इस कार्य में लगभग 30% की भागीदारी है, और यहाँ प्रमुख रूप से अलंग बंदरगाह में औसतन 250 जहाजों का पुनर्चक्रण किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हांगकांग अभिसमय किससे संबंधित है?
  2. इसके लागू होने की स्थिति
  3. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन(IMO) के बारे में
  4. भारत में जहाजों के पुनर्चक्रण के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण
  5. जहाजों के पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 का अवलोकन

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं उसके पड़ोसी- संबंध।

भारत बांग्लादेश के मध्य प्रति-व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद की तुलना


(Comparison between India, Bangladesh per capita GDP)

संदर्भ:

भारत व बांग्लादेश के मध्य प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद की यह तुलना अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary FundIMF) द्वारा जारी ‘वर्ल्ड इकनोमिक आउटलुक’ के नवीनतम आकड़ों पर आधारित है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • वर्ष 2020 में, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic ProductGDP) की वृद्धि 10% से अधिक की गिरावट होने की संभावना है।
  • औसतन, पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी, बांग्लादेश की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक रही है।
  • किंतु, वर्ष 2020 में, एक औसत बांग्लादेशी नागरिक की प्रति व्यक्ति आय, एक औसत भारतीय नागरिक की प्रति व्यक्ति आय से अधिक रहेगी (वर्ष 1991 में भी इस प्रकार उलटफेर हो चुका है)। नाममात्र अमेरिकी डॉलर (nominal US dollar) के पदों में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी वर्ष 2020 में 1,876.53 डॉलर अनुमानित रहेगी, जो कि बांग्लादेश के लिए अनुमानित प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,887.97 डॉलर से कम रहेगी।

‘प्रति व्यक्ति आय’ क्या होती है?

‘प्रति व्यक्ति आय’ (Per Capita Income) की गणना कुल ‘सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को कुल जनसंख्या से विभाजित करके की जाती है।

इस वर्ष भारत की प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश के कम होने का कारण

  • विकास दर: दोनों देश वर्ष 2004 के बाद से तीव्र वृद्धि कर रहे हैं। किंतु, वर्ष 2017 के बाद से, भारत की विकास दर में तेजी से गिरावट आई है जबकि बांग्लादेश की विकास दर में और तेजी से वृद्धि हो रही है।
  • जनसंख्या वृद्धि: पिछले 15 वर्षों में, भारत की जनसंख्या में (21% के आसपास) तीव्र वृद्धि हुई है, जबकि बांग्लादेश की जनसंख्या में (18% से कम) भारत की तुलना में निम्न वृद्धि हुई है।
  • कोविड-19 का प्रभाव: वर्ष 2020 में दोनों देशों के प्रति-व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में भिन्नता का सबसे तात्कालिक कारक कोविड-19 का सापेक्षिक प्रभाव है। इस वर्ष, भारत की जीडीपी में 10% की कमी आई है, जबकि बांग्लादेश की जीडीपी में लगभग 4% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

बांग्लादेश की जीडीपी भारत से अधिक रहने के कारक

  • बांग्लादेश में विकास का एक प्रमुख चालक कपड़ा उद्योग है। चीन के वैश्विक निर्यात बाजार से पीछे हट जाने तथा महिला श्रमिकों के योगदान से बांग्लादेश को वैश्विक निर्यात बाजारों में बढ़त प्राप्त हुई है।
  • बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की संरचना में सर्वाधिक जीडीपी औद्योगिक क्षेत्र से आता है, इसके पश्चात जीडीपी में सेवा क्षेत्र का स्थान है। ये दोनों क्षेत्र काफी रोजगार पैदा करते हैं तथा कृषि की तुलना में अधिक पारिश्रमिक प्रदान करते हैं।
  • पिछले दो दशकों के दौरान, बांग्लादेश में कई सामाजिक और राजनीतिक आयामों, जैसे स्वास्थ्य, स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सुधार हुआ है।
  • वित्तीय समावेशन पर, विश्व बैंक के ग्लोबल फाइनेक्स डेटाबेस के अनुसार, बांग्लादेश की आबादी के एक कम भाग के पास ही बैंक खाते हैं तथा भारत की तुलना में निष्क्रिय बैंक खातों का अनुपात काफी कम है।
  • नवीनतम लैंगिक समानता रैंकिंग में भी बांग्लादेश, भारत से आगे है।
  • बांग्लादेश का ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ में भी अच्छा प्रदर्शन रहा है।

अन्य पड़ोसी देशों की प्रति-व्यक्ति जीडीपी स्थिति

  • वर्ष 2020 में, चीन का अनुमानित प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद $ 10,839.43 है।
  • नेपाल और श्रीलंका का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद क्रमशः $ 1,115.56 और $ 3,697.89 रहने का अनुमान है।

आगे की राह:

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों से पता चलता है कि भारत में अगले साल प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के तेजी से बढ़ने की संभावना है तथा सभी संभावनाएं फिर से बढ़ सकती हैं। किंतु, बांग्लादेश की निम्न जनसंख्या वृद्धि और तेज आर्थिक विकास को देखते हुए, भारत और बांग्लादेश को प्रति व्यक्ति आय के मामले में आगे रहने के लिए कड़ी प्रतिद्वंदिता होने की संभावना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जीडीपी क्या है?
  2. जीएनपी क्या है?
  3. प्रति व्यक्ति आय क्या है?
  4. भारत तथा पड़ोसी देशों की प्रति व्यक्ति आय

मेंस लिंक:

इस वर्ष भारत की प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश से कम होने के कारणों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

GLP पर OECD कार्यकारी समूह के उपाध्यक्ष पद पर भारत की नियुक्ति


संदर्भ:

भारतीय गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (Good Laboratory PracticeGLP) कार्यक्रम के योगदान को मान्यता देते हुए, भारत को आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (Organisation for Economic Co-operation and DevelopmentOECD) के कार्यकारी समूह, गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) का ‘उपाध्यक्ष’ नामित किया गया है।

GLP क्या है?

गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (Good Laboratory PracticeGLP), आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) द्वारा विकसित एक गुणवत्ता प्रणाली है। इसका उद्देश्य औद्योगिक रसायनों, फार्मास्यूटिकल्स (मानव और पशु चिकित्सा), एग्रोकेमिकल्स, कॉस्मेटिक, भोजन / खाद्य योजक, और चिकित्सा उपकरण, आदि पर तैयार किये गये डेटा , नियामक अधिकारियों द्वारा पर विश्वास किया जाना सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय जीएलपी अनुपालन निगरानी प्राधिकरण (NGCMA) के बारे में:

  • भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा 24 अप्रैल, 2002 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से राष्ट्रीय जीएलपी अनुपालन निगरानी प्राधिकरण (National GLP Compliance Monitoring AuthorityNGCMA) की स्थापना की गयी।
  • NGCMA एक राष्ट्रीय संस्‍था है, जो GLP और OECD के मानदंडों के अनुसार उपर्युक्त श्रेणियों के नए रसायनों पर सुरक्षा अध्ययन करने के लिए परीक्षण सुविधाओं (Test Facilities – TFs) को GLP प्रमाणन प्रदान करता है।

oecd

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. OECD – संरचना।
  2. OECD की सदस्यता हेतु मानदंड।
  3. राष्ट्रीय जीएलपी अनुपालन निगरानी प्राधिकरण (NGCMA) के बारे में।
  4. गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) क्या है?

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन संदेशों के खिलाफ ब्रिटेन के नेतृत्व में लड़ाई


(India joins UK-led fight against encrypted online messages)

संदर्भ:

हाल ही में, एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन संदेशों के खिलाफ ब्रिटेन के नेतृत्व वाली लड़ाई में भारत  सम्मिलित हो गया है।

  • ब्रिटेन और भारत के बाद अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान भी इस मुहिम से जुड़ गए हैं।
  • यह खुफिया मुद्दों पर एक वैश्विक गठबंधन ‘फाइव आईज’ कहे जाने वाले समूह का, भारत और जापान को सम्मिलित करते हुए एक विस्तार माना जा रहा है।

इस मुहिम की मांग

यह अभियान, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया दिग्गजों द्वारा संदेशों के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (end-to-end encryption) के खिलाफ है।

  • इन सोशल मीडिया दिग्गजों पर सरकारी एजेंसियों के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन संदेशों तक पहुँच को बाधित करके कानून प्रवर्तन में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया जा रहा है।
  • इन देशों ने कंपनियों से, अपने प्लेटफार्मों पर बाल उत्पीड़न की छवियों सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए ‘आँखे बंद नही करें’।

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ समस्या

ब्रिटेन के नेतृत्व में एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन संदेशों के खिलाफ हस्ताक्षरकर्ता देशों ने दावा किया कि सोशल मीडिया दिग्गज द्वारा नियोजित की गई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नीतियां सार्वजनिक सुरक्षा को ऑनलाइन मिटा देती हैं।

  • अंतर्वस्तु सामग्री तक पहुंच को बाधित करते हुए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को नियोजित किये जाने से यह कंपनियां अपने ही प्लेटफार्मों पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने संबंधी क्षमता को गंभीर रूप से कम कर देती हैं।
  • इस प्रकार यह, बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण तथा आतकंवादी संगठनो में भर्ती को प्रेरित करने जैसी सामग्री तथा अन्य गंभीर अपराधों की जांच करने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए कानून प्रवर्तन को भी रोकता है।

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन क्या है?

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (end-to-end encryption) का तात्पर्य है कि, इसमें संदेश केवल प्रेषक और प्राप्तकर्ता को दिखाई देते हैं, और यहाँ तक कि, इन सेवाओं को प्रदान करने वाली कंपनियों, जैसे-व्हाट्सएप या किसी भी तीसरी पार्टी को दिखाई नहीं देते हैं।

कार्यविधि (संक्षिप्त अवलोकन)

एन्क्रिप्शन तकनीक में डेटा को इस तरह से गड्डमड्ड तथा अस्पष्ट करके ट्रांसफर किया जाता है कि, जिसे केवल प्रेषक और रिसीवर द्वारा ही पढ़ा जा सकता है।

  • पहले चरण में, जब कोई प्रेषक संदेश भेजता है, तो यह ‘साधारण लेख’ के रूप में होता है जो कि सामान्य रूप से पठनीय होता है।
  • अगले चरण में, जैसे ही डेटा नेटवर्क में पहुँचता है, यह एन्क्रिप्ट हो जाता है। एन्क्रिप्शन, एक विशेष कुंजी की मदद से साधारण पठनीय लेख को कोड में बदलने की एक प्रक्रिया होती है।
  • इसके पश्चात, जब वही डेटा इच्छित गंतव्य तक पहुंचता है, तो उसे डिक्रिप्ट किया जाता है। यह एक विशेष कुंजी की सहायता से डेटा कोड को पुनः पठनीय लेख में परिवर्तित करने की एक प्रक्रिया होती है।
  • अंत में, प्राप्तकर्ता को गूढ़लेख के रूप में संदेश प्राप्त होता है जिसे डिक्रिप्शन के बाद पढ़ा जा सकता है।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

‘चैप्टर प्रोसीडिंग्स’


(Chapter Proceedings)

संदर्भ:

पिछले सप्ताह, मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ ‘चैप्टर प्रोसीडिंग्स’ (Chapter Proceedings) शुरू की गयी है।

‘चैप्टर प्रोसीडिंग्स’ क्या होती है?

  • ‘चैप्टर प्रोसीडिंग्स’ (Chapter Proceedings), किसी विशेष व्यक्ति के संकट उत्पन्न करने तथा समाज में शांति भंग करने की संभावना होने पर, उस व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस द्वारा की जाने वाली निवारक कार्रवाइयाँ होती हैं।
  • इसके तहत, पुलिस दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं के तहत नोटिस जारी कर सकती है ताकि उस व्यक्ति को यह सुनिश्चित हो सके कि उपद्रव पैदा करने से उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, जिसमें उसे जुर्माना भरना पड़ सकता है, तथा उसे सलाखों के पीछे भी रखा जा सकता है।

‘चैप्टर प्रोसीडिंग्स’ की प्रक्रिया

  • दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 111 के तहत किसी व्यक्ति को एक नोटिस जारी किया जाता है जिसमे उसे नोटिस जारी करने वाले कार्यकारी मजिस्ट्रेट– कमिश्नरी क्षेत्र में एसीपी-रैंक अधिकारी तथा ग्रामीण इलाकों में डिप्टी कलेक्टर- के समक्ष प्रस्तुत होने के लिए कहा जाता है।
  • संबंधित व्यक्ति को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष यह सपष्ट करना होता है कि उसके लिए ‘अच्छे व्यवहार’ के अनुपालन हेतु एक बांड पर हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए जाने चाहिए।
  • यदि कार्यकारी मजिस्ट्रेट उसके जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो व्यक्ति को ‘अच्छे व्यवहार’ के अनुपालन हेतु एक बांड पर हस्ताक्षर करने और इसे सुनिश्चित करने हेतु जमानती लाने को कहा जाता है।
  • अपराध और व्यक्ति की वित्तीय क्षमता के अनुसार, एक जुर्माना राशि भी तय की जाती है – जिसे व्यक्ति को बांड में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने पर भुगतान करना होगा।

नोटिस के विरूद्ध कानूनी विकल्प

नोटिस प्राप्त करने पर कोई व्यक्ति, न्यायालय के समक्ष नोटिस के विरूद्ध अपील कर सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC)

(Broadcast Audience Research Council)

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council), विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और प्रसारण कंपनियों के संयुक्त स्वामित्व वाला एक औद्योगिक निकाय है। जिसका प्रतिनिधित्व द इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइज़र्स, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन और एडवरटाइजिंग एजेंसीज़ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा किया जाता है।

  • इसका गठन वर्ष 2010 में किया गया था।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 10 जनवरी, 2014 को भारत में टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों के लिए नीतिगत दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया गया और इन दिशानिर्देशों के तहत जुलाई 2015 में BARC को पंजीकृत किया गया।

चर्चा का कारण

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) द्वारा अगले तीन महीनों के लिए सभी समाचार चैनलों के लिए दर्शकों के अनुमान और रेटिंग को निलंबित करने की घोषणा की गयी है।

नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क (NZP)

  • यह भारत का एकमात्र प्राणि उद्यान है, जो वाज़ा (World Association of Zoos and Aquarium – WAZA) का संस्थागत सदस्य बना है।
  • यह सफेद बाघों का वास स्थल है।
  • वर्ष 1980 में विश्व में पहली बार नंदानकानन जूलॉजिकल पार्क में घडियालों का संरक्षित प्रजनन कराया गया।
  • कंजिया झील – राष्ट्रीय महत्व का एक आर्द्रभूमि (2006)
  • भारतीय पैंगोलिन और लॉन्ग-बिल्ड गिद्धों (long-billed vulture) के लिए संरक्षण प्रजनन केंद्र।
  • घड़ियाल और दरियाई घोड़े के आवास हेतु सबसे बड़ा जलाशय।
  • 2012 में लुप्तप्राय भारतीय रटेल का संरक्षित प्रजनन।
  • वर्ष 2014 में मेलेनिस्टिक टाइगर की ब्रीडिंग वाला दुनिया का पहला चिड़ियाघर।

चर्चा का कारण

चिड़ियाघर ने जानवरों के लिए संसाधन जुटाने हेतु अपने अभिनव ‘एडॉप्ट-एन-एनिमल‘ (Adopt-An-Animal) कार्यक्रम को पुनः शुरू किया है।

पीपुल्स अलायन्स फॉर गुपकर डिक्लेरेशन

(Peoples Alliance for Gupkar Declaration)

  • यह विभिन्न राजनीतिक दलों का एक नया संगठन है।
  • इसका लक्ष्य जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति की बहाली हेतु संघर्ष करना है।

पृष्ठभूमि

अनुच्छेद 370 के निरसित होने से पूर्व, 4 अगस्त, 2019 को, पहले गुपकर डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए गए थे।

22 अगस्त, 2020 को, जम्मू और कश्मीर के छह राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के खिलाफ सामूहिक रूप से लड़ने के लिए गुप्कर घोषणा- II’ के रूप में एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

ताइवान जलडमरूमध्य

(Taiwan Strait)

  • ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) 110 मील चौड़ा एक चैनल है जो चीन की मुख्य भूमि को ताइवान द्वीप से अलग करता है।
  • इसे फॉर्मोसा स्ट्रेट (Formosa Strait) या ताई-हाई (Tai-hai)/ ताई सागर के रूप में भी जाना जाता है।
  • ताइवान स्ट्रेट, दक्षिण चीन सागर का हिस्सा बनाता है, और इसका उत्तरी भाग पूर्वी चीन सागर से जुड़ा हुआ है।
  • जलडमरूमध्य, चीन के दक्षिण पूर्वी भाग की सीमा में अवस्थित है और चीन के फुजियान प्रांत के पूर्वी भाग के साथ विस्तारित है।

चर्चा का कारण

ताइवान स्ट्रेट में अमेरिकी युद्धपोत की उपस्थित से चीन खिन्न हो उठा है। चीन, ताइवान द्वीप और आसपास के समुद्री क्षेत्रों पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है।

taiwan

‘रेड लाइट ऑन, गाडी ऑफ’ पहल

इस पहल को सरकार के ‘युद्ध-प्रदूषण के विरुध’ अभियान के तहत दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किया गया है।

यह राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक पहल है।

पृष्ठभूमि: दिल्ली में एक करोड़ वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से यदि 10 लाख ट्रैफिक सिग्नलों पर अपना इंजन बंद करते हैं, तो एक वर्ष में लगभग PM10  के उत्सर्जन में  लगभग 1.5 टन की कमी तथा 10 कम हो जाएगा और PM 2.5 के उत्सर्जन में 0.4 टन की कमी आएगी।

ईट राइट मूवमेंट’

(Eat Right Movement)

इसे वर्ष 2018 में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा शुरू किया गया था।

  • इस आंदोलन का उद्देश्य तीन वर्षों में नमक / चीनी और तेल की खपत में 30% की कटौती करना है।
  • इसका उद्देश्य नागरिकों को सही भोजन विकल्प उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार करना है।

महिला किसान दिवस

15 अक्टूबर को महिला किसान दिवस मनाया जाता है।

  • कृषि क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने इस दिन को चिह्नित किया है।
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा 15 अक्टूबर को ग्रामीण महिलाओं के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया गया।
  • इसका उद्देश्य राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में विभिन्न आय सृजन गतिविधियों के लिए जागरूकता पैदा करना और महिला किसानों को प्रोत्साहित करना है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के तीसरे सम्मलेन के परिणाम

हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance- ISA) के तीसरे सम्मलेन का आयोजन किया गया था।

मुख्य परिणाम:

भारत और फ्रांस को फिर से अध्यक्ष और सह- अध्यक्ष के रूप में चुना गया।

संवहनीय जलवायु कार्यवाही हेतु गठबंधन (Coalition for Sustainable Climate ActionCSCA) के माध्यम से निजी और सार्वजनिक कॉर्पोरेट क्षेत्र के साथ ISA के समन्वय हेतु ISA सचिवालय की पहल को मंजूरी दी गयी।

पुरस्कार:

विश्वेश्वरैया पुरस्कार: यह पुरस्कार, एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए जापान तथा यूरोप एवं अन्य क्षेत्रों के लिए नीदरलैंड को प्रदान किया गया।

कल्पना चावला पुरस्कार: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने हेतु प्रदान किया जाता है।

दिवाकर पुरस्कार: विकलांग व्यक्तियों के हितों के लिए कार्य कर रहे तथा देश में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने वाले संगठनों और संस्थानों को प्रदान किया जाता है।


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