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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 15 October

 

विषय-सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. संसद की घटती भूमिका

2. विश्व बैंक की STARS परियोजना

3. थैलेसीमिया बाल सेवा योजना

4. थाईलैंड में विरोध-प्रदर्शन

5. खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की 75 वीं वर्षगांठ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. होलोग्राफिक इमेजिंग

2. जैव-संवर्धन’ क्या होता है?

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. न्यू शेफर्ड रॉकेट प्रणाली

2. ‘इनवायरन्मेंटल इनफॉरमेशन फ्यूजन सर्विस’ (ENFUSER)

3. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान का पुनःनिर्वाचन

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

संसद की घटती भूमिका


संदर्भ:

वर्तमान सरकार की कार्रवाइयाँ किस तरह से आज संसद की भूमिका को कम करती जा रही हैं।

संसद की भूमिका को कम करने वाले कार्य:

प्रधानमंत्री मोदी, एक वर्ष के दौरान संसद में मात्र 3.6 बार बोलते हैं: छह वर्ष में 22 बार।

  • यह प्रधानमंत्री मोदी के संवाद करने की लोकलुभावन शैली को दर्शाता है, जो लोगों से, या तो रेडियो पर (1970 के दशक में इंदिरा गांधी की तरह) या सोशल मीडिया के माध्यम से (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरह), सीधे संवाद करना पसंद करते हैं।
  • इसमें मुख्य चिंता का विषय यह है कि ये विधियाँ एकतरफ़ा संवाद की प्राथमिकता दर्शाती हैं, जिसमे श्रोता द्वारा प्रश्न पूछने अथवा विरोध किये जाने का जोखिम कम होता है।

अध्यादेश पद्धति: मोदी सरकार द्वारा, बहुधा, संसद को दरकिनार करने के लिए, अक्सर अध्यादेश पद्धति का अनुसरण किया गया है।

  • आमतौर पर अध्यादेशों का प्रयोग अल्पसंख्यक सरकारों या गठबंधन सरकारों द्वारा किया जाता है, किंतु मोदी सरकार ने भाजपा के लोकसभा में बहुमत होने पर भी पूर्ववर्ती सरकार से अधिक इसका इस्तेमाल किया है।
  • पूर्व-प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में प्रतिवर्ष औसतन अध्यादेशों की संख्या छह थी, जो कि वर्तमान सरकार में 11 हो गई है।

संसदीय समितियों की नगण्य भूमिका

संसदीय समितियां, संसद में पारित किये जाने वाले विभिन्न कानूनों के संदर्भ में ‘जांच-पड़ताल व विमर्श’ का कार्य करती है। इन समितियों को भेजे जाने वाले विधेयकों की संख्या – 15 वीं लोकसभा में 68 (कुल विधेयकों का 71 प्रतिशत) से घटकर 24 (कुल विधेयकों का 25 प्रतिशत) हो गया है, तथा यह 16 वीं लोकसभा और वर्ष 2020 में शून्य हो गया है।

‘धन विधेयक’ का सहारा

कानूनों के कई प्रमुख अंश ‘धन विधेयक’ (Money Bill) के रूप में पारित किए गए हैं, जबकि ये विधेयक इस श्रेणी में उचित रूप से नहीं आते थे।

विधेयकों पर होने वाली चर्चा में कमी

वर्तमान में, साधारण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं की जाती है। विधेयकों के ‘मूल-पाठ’ को अंतिम समय पर सांसदों को सौंपाहै, जिससे इन पर बहस के लिए बहुत कम समय मिलता है।

विचार-विमर्श में संसद की भूमिका और महत्व

परिभाषा के अनुसार, संसद, विचार-विमर्श, आलोचना तथा सर्वसम्मति बनाने के लिए अनिवार्य होती है।

संसदीय-वाद, लोकलुभावनवाद से अलग महत्व रखता है। यह प्रतिनिधि-लोकतंत्र का प्रतीक होता है, और इसमें विरोधियों को शत्रु के रूप में नहीं, बल्कि विपक्षी के रूप में माना जाता है।

चिंता का विषय

प्रत्यक्षतः, लोकसभा और राज्यसभा में विमर्श तथा बहस के लिए स्थान मिलना कम होता जा रहा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसदीय तथा मंत्रिमंडल समितियों के बीच अंतर।
  2. तदर्थ बनाम प्रवर बनाम वित्त समितियां।
  3. इन समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?
  4. केवल लोकसभा के लिए विशिष्ट समितियां
  5. लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली समितियाँ

मेंस लिंक:

संसदीय स्थायी समितियाँ क्या हैं? वे क्यों आवश्यक हैं? उनकी भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

विश्व बैंक की STARS परियोजना


(World Bank’s STARS project)

संदर्भ:

हाल ही में, केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्‍कूली शिक्षा में सुधार के लिए विश्‍व बैंक से सहायता प्राप्‍त  5718 करोड़ रुपये की परियोजना ‘स्‍टार्स’ (STARS) को मंजूरी दी गयी है।

स्‍टार्स’ (STARS) परियोजना के बारे में:

STARS का पूरा नाम (Strengthening Teaching-Learning and Results for States ProgramSTARS) है।

  • STARS, छह भारतीय राज्यों में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और शासन में सुधार करने हेतु विश्व बैंक समर्थित एक परियोजना है।
  • स्‍टार्स परियोजना, स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education- MOE) के तहत एक केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना के रूप में लागू की जाएगी।
  • परियोजना में सम्मिलित छह राज्य- हिमाचल प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान हैं।
  • इस परियोजना से 1.5 मिलियन स्कूलों में 10 मिलियन शिक्षक और 250 मिलियन स्कूली छात्र लाभान्वित होंगे।

परियोजना के अंतर्गत सुधार:

  1. स्कूल सुधार की दिशा में स्थानीय स्तर पर विशिष्ट रूप से निर्मित उपायों के माध्यम से राज्य, जिला और उप जिला स्तरों पर शिक्षा सेवाओं के प्रतिपादन पर ध्यान केंद्रित करना
  2. अध्ययन गुणवत्ता का आकलन करने हेतु बेहतर डेटा संग्रह करना;
  3. बृहत्तर जवाबदेही तथा समावेशन हेतु हितधारकों, विशेष रूप से माता-पिता की मांगों का समाधान करना;
  4. कमजोर वर्ग के छात्रों पर विशेष ध्यान देना।
  5. इन परिवर्तनों के प्रबंधन हेतु शिक्षकों को तैयार करना।
  6. भारत की मानव-पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों की शिक्षा पर निवेश करना, तथा इनका संज्ञानात्मक, सामाजिक-व्यवहार और भाषा कौशल विकास सुनिश्चित करना।

परियोजना के विशिष्ट घटक

आकस्मिकता आपातकालीन प्रतिक्रिया घटक (CERC):

स्टार्स परियोजना में राष्‍ट्रीय घटक के तहत आकस्मिकता, आपातकालीन प्रतिक्रिया घटक (Contingency Emergency Response Component CERC) शामिल हैं जो इसे किसी प्राकृतिक, मानव निर्मित और स्‍वास्‍थ्‍य आपदाओं के लिए अधिक जवाबदेह बनाएंगे।

  • ये स्‍कूल बंदी/ बुनियादी ढांचा हानि, अपर्याप्‍त सुविधाएं और रिमोर्ट लर्निंग में सहायता प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसी शिक्षण हानि को बढ़ावा देने वाली स्थितियों से निपटने में सरकार की मदद करेंगे।
  • CERC घटक वित्त पोषण के त्‍वरित पुन:वर्गीकरण और सहज वित्तीय अनुरोध प्रकियाओं को सुव्यवस्थित करने में सहयोग करेगा।

परख (PARAKH):

परियोजना का एक प्रमुख घटक एक राष्‍ट्रीय आकलन केन्‍द्र ‘परख’ (Performance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic DevelopmentPARAKH) की स्थापना करना है।

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शामिल, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत ‘परख’ एक स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करेगा तथा यह देश में सभी स्कूल बोर्डों के लिए छात्र आकलन तथा मूल्यांकन मानक निर्धारित करेगा। वर्तमान में अधिकांश स्कूल बोर्ड, राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करते हैं।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार, यह राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर अध्ययन-परिणामों की निगरानी हेतु मानकीकृत परीक्षण के लिए दिशा-निर्देश देगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. STARS परियोजना के तहत शामिल राज्य
  2. विश्व बैंक और इसके वित्त पोषण के बारे में
  3. विश्व बैंक की संस्थाएँ
  4. विश्व बैंक समूह
  5. ओपन डेटा पहल क्या है?
  6. परख (PARAKH) क्या है?

मेंस लिंक:

विश्व बैंक की STARS परियोजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

थैलेसीमिया बाल सेवा योजना


(Thalassemia Bal Sewa Yojna)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री द्वारा थैलेसीमिया (Thalassemia) बीमारी से ग्रस्त शोषित समाज के रोगियों के लिए ‘थैलेसीमिया बाल सेवा योजना’ के दूसरे चरण का शुभारंभ किया गया।

थैलेसीमिया बाल सेवा योजना के बारे में:

  • 2017 में में शुरू की गई यह योजना, कोल इंडिया की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (CSR) वित्त पोषित हेमाटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन (Hematopoietic Stem Cell TransplantationHSCT) कार्यक्रम है।
  • जिसका उद्देश्य थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसे हीमोग्लोबिनोपैथी रोग के लिए परिवार को जीवन में एक बार इलाज कराने का अवसर प्रदान करना है।

‘थैलेसीमिया’ क्या है?

थैलेसीमिया (Thalassemia) एक जीर्ण रक्त विकार (chronic blood disorder) है। यह एक आनुवांशिक विकार है जिसके कारण मरीज में ‘लाल रक्त कणिकाएं (Red Blood Cells- RBC’s) में पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन पर्याप्त मात्रा में निर्मित नहीं हो पाता है। इससे रोगी में ‘रक्त की कमी’ (anemia) हो जाती है और रोगी को जीवित रहने के लिए प्रति दो से तीन सप्ताह में रक्‍ताधान (Blood Transfusions) की आवश्यकता होती है।

भारत में थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों की संख्या लगभग 40 मिलियन है तथा इसे विश्व की थैलेसीमिया राजधानी कहा जाता है। यहाँ प्रतिमाह 1,00,000 से अधिक रोगियों को रक्‍ताधान (Blood Transfusions) प्रदान किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. थैलेसीमिया क्या है?
  2. इसका कारण
  3. क्या यह एक आनुवंशिक विकार है?

thalassemia

 स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

थाईलैंड में विरोध-प्रदर्शन


संदर्भ:

पिछले तीन महीनों के दौरान, थाईलैंड में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की संख्या में वृद्धि हुई है।

पृष्ठभूमि

पहले थाईलैंड की सेना प्रमुख रहे प्रयुत्त चान-ओ-चा 2014 में तख्तापलट कर देश की सत्ता हथिया ली थी। उनके ही नेतृत्व में 2016 में थाईलैंड का नया संविधान तैयार हुआ था।

  • जिसमें कई ऐसे नियम बनाए गए थे जो मानवाधिकार के खिलाफ थे। इसमें सरकार और राजा की आलोचना करने वालों को गंभीर सजा देने का प्रावधान भी है।
  • थाईलैंड में 2019 में चुनाव भी हुए थे जिसमें प्रयुत्त की पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि, लोगों का आरोप है कि सरकार ने अपनी ताकत के बल पर गड़बड़ी करवा कर चुनाव में जीत हासिल की थी। तभी से उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

  1. वर्तमान प्रधानमंत्री ‘प्रयुत्त चान-ओ-चा’ (Prayuth Chan-ocha) को पद से हटाया जाए
  2. एक नया संविधान
  3. कार्यकर्ताओं (Activists) के उत्पीड़न का अंत
  4. राजतंत्र में सुधार की मांग

वर्तमान शासन-प्रणाली में समस्यायें

वर्ष 2017 में राजा की संवैधानिक शक्तियों में वृद्धि किये जाने के बाद से थाईलैंड में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं।

  • लोकतंत्र-समर्थक कार्यकर्ताओं का कहना है कि, वर्ष 1932 में पूर्ण शाही शासन समाप्त होने के बाद, थाईलैंड अब पुनः संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना की ओर बढ़ रहा है। उनका कहना है कि राजशाही सेना के काफी नजदीक है और इनका तर्क है कि इससे लोकतंत्र कमजोर हो गया है।
  • प्रदर्शनकारी, सरकार और राजा की आलोचना करने पर लागू किये जाने वाले कठोर ‘लेज़ मेजस्टे कानूनों’ (lese majeste laws) को रद्द किये जाने की मांग कर रहे हैं।
  • प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि, राजा ने अरबों डॉलर के महल तथा सेना की कुछ इकाइयों पर अपने नियंत्रण को त्याग दे।

लेज़ मेज़स्टे कानूनों का तात्पर्य

थाईलैंड में राजतंत्र को दंड संहिता की धारा 112 द्वारा संरक्षित किया गया है। जिसके अनुसार- राजा, रानी, ​​उत्तराधिकारी या रीजेंट की आलोचना करने अथवा अपमानित करने पर तीन से 15 साल तक कारावास की सजा दी जायेगी।

आगे की चुनौतियां

कुछ रूढ़िवादी (conservatives) राजतंत्र में सुधार के खिलाफ हैं। इनका कहना है कि, राजशाही एक संस्था है, जिसके लिए संविधान में ‘राजगद्दी पर आसीन व्यक्ति को श्रद्धेय तथा पूजा-योग्य’ कहा गया है।

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की 75 वीं वर्षगांठ


संदर्भ:

16 अक्टूबर 2020 को ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (Food and Agriculture Organization- FAO) की 75 वीं वर्षगांठ मनायी जा रही है। भारत ने इस अवसर पर 75 रुपये मूल्य के स्मारक सिक्का जारी किया है।

भारत और FAO:

भारत का खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है।

  • भारतीय सिविल सेवा अधिकारी डॉ. बिनय रंजन सेन 1956-1967 के दौरान FAO के महानिदेशक थे।
  • वर्ष 2020 में नोबेल शांति पुरस्कार जितने वाले ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ की स्थापना उनके समय में ही की गई थी।
  • वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दलहन और 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किए जाने के भारत के प्रस्तावों को भी FAO द्वारा समर्थन दिया गया।

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)  के बारे में:

यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भूख समाप्त करने हेतु किये जाने वाले प्रयासों का नेतृत्व करती है।

मुख्यालय: रोम, इटली

स्थापना: 16 अक्टूबर 1945

FAO का लक्ष्य: खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का लक्ष्य सभी के लिए खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना है और लोगों तक सक्रिय, स्वस्थ जीवन जीने के लिए पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले भोजन की नियमित पहुंच सुनिश्चित कराना है।

महत्वपूर्ण रिपोर्ट और कार्यक्रम (संक्षिप्त विवरण):

  1. खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट
  2. प्रति दो वर्ष में, वैश्विक वन-स्थिति का प्रकाशन
  3. वर्ष 1961 में FAO और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा खाद्य मानकों तथा दिशानिर्देशों को विकसित करने हेतु कोडेक्स एलेमेंट्रिस आयोग (Codex Alimentarius Commission) का गठन
  4. वर्ष 1996 में, FAO ने विश्व खाद्य सम्मलेन (World Food Summit) का आयोजन किया। इस शिखर सम्मेलन रोम घोषणा (Rome Declaration) पर हस्ताक्षर किये गए, जिसके तहत वर्ष 2015 तक भूख से पीड़ित लोगों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
  5. वर्ष 1997 में, FAO ने भूख से लड़ने में सहायता प्राप्त करने हेतु टेलीफूड, संगीत, खेल कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों का एक अभियान शुरू किया।
  6. वर्ष 1999 में FAO सद्भावना राजदूत कार्यक्रम शुरू किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लगभग 1 अरब लोग भरपूर खाद्य सामग्री होने के दौरान भी भूख और कुपोषण से पीड़ित व्यक्तियों की ओर जनता और मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है।
  7. वर्ष 2004 में भोजन के अधिकार संबंधी दिशा-निर्देशों को अपनाया गया, जिसके तहत राष्ट्रों के लिए ‘भोजन के अधिकार’ संबंधी उनके दायित्वों को पूरा करने हेतु मार्गदर्शन दिए गया।
  8. FAO ने 1952 में ‘इंटरनेशनल प्लांट प्रोटेक्शन कन्वेंशन’ (International Plant Protection Convention IPPC) गठित किया।
  9. 29 जून 2004 को ‘खाद्य एवं कृषि हेतु पादप आनुवांशिक संसधानों पर अन्तराष्ट्रीय संधि’ (International Treaty on Plant Genetic Resources for Food and Agriculture, also called Plant TreatyITPGRFA), जिसे ‘सीड ट्रीटी’ (Seed Treaty) भी कहा जाता है, लागू की गयी।
  10. दक्षिण अफ्रीका में जोहान्सबर्ग में सतत विकास पर विश्व शिखर सम्मेलन के दौरान 2002 में विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण कृषि विरासत प्रणाली (Globally Important Agricultural Heritage SystemsGIAHS) भागीदारी पहल की अवधारणा तैयार की गई थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. FAO, स्थापना और उद्देश्यों के बारे में
  2. महत्वपूर्ण रिपोर्ट और कार्यक्रम

मेंस लिंक:

विश्व खाद्य कार्यक्रम पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

होलोग्राफिक इमेजिंग


(Holographic Imaging)

चर्चा का कारण

हाल ही में, वैज्ञानिकों द्वारा वायरस और एंटीबॉडी दोनों का पता लगाने के लिए हेतु होलोग्राफिक इमेजिंग (Holographic Imaging) का उपयोग करके एक विधि विकसित की गयी है।

कार्यविधि

  • इस विधि में टेस्ट बीड्स (Test Beads) का होलोग्राम बनाने हेतु लेजर बीम का उपयोग किया जाता है।
  • टेस्ट बीड्स की सतहों को जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से सक्रिय किया जाता है, जो इच्छित परीक्षण के अनुसार, एंटीबॉडी अथवा वायरस अणुओं को आकर्षित करती हैं।
  • बाइंडिंग एंटीबॉडी या वायरस एक मीटर के अरबवें हिस्से के बराबर बीड्स में वृद्धि का कारण बनते है।
  • इससे, वैज्ञानिक बीड्स के होलोग्राम में होने वाले परिवर्तन के माध्यम से इस वृद्धि का पता लगा सकते हैं।

इस विधि के लाभ:

  • इस विधि में किसी परीक्षण को 30 मिनट से कम समय में किया जा सकता है।
  • यह अत्यधिक सटीक परिणाम देती है।
  • इस विधि में परीक्षण को न्यूनतम प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा किया जा सकता है।

‘होलोग्राफी’ क्या है?

यह किसी वस्तु अथवा किसी अति सूक्ष्म अणु के ‘त्रि-आयामी’ चित्र बनाने की एक प्रक्रिया है। इन त्रि-आयामी’ चित्रों को होलोग्राम कहा जाता है।

  • इस प्रक्रिया में, लेजर बीम, व्यतिकरण और विवर्तन (interference and diffraction), प्रकाश की तीव्रता की रिकॉर्डिंग तथा रिकॉर्डिंग की प्रदीप्ति उपयोग किया जाता है।
  • हंगेरियन-ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी डेनिस गबोर (Dennis Gabor) को वर्ष 1971 में “होलोग्राफिक पद्धति के आविष्कार और विकास के लिए” भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

होलोग्राफिक छवियों के संभावित अनुप्रयोग

  1. सैन्य मानचित्रण
  2. सूचना भंडारण
  3. चिकित्सा
  4. धोखाधड़ी और सुरक्षा
  5. कला

प्रीलिम्स लिंक:

  1. होलोग्राफी क्या है?
  2. होलोग्राफिक इमेजिंग क्या है?
  3. अनुप्रयोग

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

‘जैव-संवर्धन’ क्या होता है?


(What is Biofortification?)

चर्चा का कारण

प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में विकसित 8 फसलों की 17 जैव-संवर्धित (Biofortified) किस्में भी राष्ट्र को समर्पित की गयी है।

महत्व:

  • 8 फसलों की हाल ही में विकसित जैव-विविधता वाली किस्में पोषण के मामले में 3.0 गुना अधिक हैं।
  • फसलों की ये किस्में, अन्य खाद्य सामग्री के साथ, सामान्य भारतीय थाली को पोषक तत्वों वाली थाली में बदल देंगी।

‘जैव-संवर्धन’ के बारे में:

यह पारंपरिक विधियों से पौधों को उगाने, कृषि अभ्यास या जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसी फसल में विटामिन और खनिजों की मात्रा में वृद्धि करके खाद्य फसलों के पोषण मूल्य में वृद्धि करने की प्रक्रिया है।

‘जैव-संवर्धन’ (Biofortification) के माध्यम से फसलों में ‘प्रोविटामिन, कैरोटेनॉयड्स, जिंक और लौह आदि विटामिनों और खनिजों की वृद्धि की जा सकती है।

फसलों का संवर्धन किस प्रकार किया जाता है?

  1. वांछित पोषक तत्वों की विशेष रूप से उच्च सांद्रता वाली किस्मों की पहचान करने के लिए पारंपरिक फसल प्रजनन तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  2. जैव-संवर्धित किस्मों को विकसित करने हेतु लक्षित क्षेत्रों (जैसे वायरस प्रतिरोध, सूखा सहिष्णुता, उच्च उपज, स्वाद) के साथ अन्य वांछनीय लक्षणों वाली, जिनमें उच्च स्तर के सूक्ष्म पोषक तत्व (जैसे विटामिन ए, आयरन या जिंक) मौजूद होते हैं, किस्मों की क्रॉस-ब्रीडिंग कराई जाती है।

कृषि-विज्ञानी जैव संवर्धन (Agronomic biofortification)

इसमें, पौधों के खाद्य योग्य भाग में प्रमुख सूक्ष्म पोषक तत्वों की बढ़ी हुई मात्रा के लिए, पौधों के प्रबंधन, मृदा कारकों और पौधों की विशेषताओं के अनुसार, पत्तियों अथवा मृदा में जिंक अथवा लौह खनिजों के अनुप्रयोग पर जोर बल दिया जाता है।

जैव-संवर्धन तथा खाद्य-संवर्धन में भिन्नता

  • जैव-संवर्धन के द्वारा उगाई जाने वाली फसल में पोषक सूक्ष्म पोषक ततत्वों की मात्रा में वृद्धि की जाती है।
  • खाद्य-संवर्धन में प्रसंस्करण के दौरान खाद्य पदार्थों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा बढाकर खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य में वृद्धि की जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जैव-संवर्धन तथा आनुवांशिक-संवर्धन में भिन्नता
  2. सूक्ष्म पोषक बनाम वृहद पोषक
  3. भारत में जैव उर्वरक और जीएम फसलों के लिए स्वीकृति
  4. भारत में अनुमति प्राप्त जीएम फसलें
  5. जैव-संवर्धन तथा खाद्य-संवर्धन में भिन्नता

मेंस लिंक:

खाद्य पदार्थों के संवर्धन से आप क्या समझते हैं? इसके फायदों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


न्यू शेफर्ड  रॉकेट प्रणाली

(New Shephard rocket system)

  • यह पर्यटकों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में ले जाने हेतु एक रॉकेट प्रणाली है।
  • इसने हाल ही में अपना सातवां परीक्षण पूरा किया है।
  • यह प्रणाली अमेज़ॅन के संस्थापक जेफ बेजोस की अंतरिक्ष कंपनी, ब्लू ओरिजिन द्वारा निर्मित की गई है।
  • अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री एलन शेफर्ड के नाम पर इसका नाम ‘न्यू शेफर्ड’ रखा गया है।
  • पृथ्वी से 100 किलोमीटर तक ऊपर जाने वाला यह रॉकेट सिस्टम अंतरिक्ष में एक तरह से पूरी लैब ले जा सकने की क्षमता भी रखता है।
  • हालांकि यह, स्पेस में तय अंतर्राष्ट्रीय सीमा कैरमान लाइन (Karman line) के दायरे में अंतरिक्ष में रिसर्च भी करेगा।

rocket

इनवायरन्मेंटल इनफॉरमेशन फ्यूजन सर्विस’ (ENFUSER)

यह दिल्ली के लिए, हाल ही में, लॉन्च किया गया एक बहुत ही उच्च रिज़ॉल्यूशन वाला सिटी स्केल मॉडल है।

  • हाल ही में IMD द्वारा वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट और सड़क स्तर तक के प्रदूषण की पहचान करने के लिए इसका लागू किया गया है।
  • इसे फ़िनलैंड मौसम विज्ञान संस्थान (Finnish Meteorological InstituteFMI) के साथ तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है।
  • ENFUSER की विशेषता में मापन डेटा का अत्यधिक रिजोल्युशन वाला होना शामिल है, जैसे कि वायु गुण्वत्ता का अवलोकन, सड़क नेटवर्क, भवन, भूमि उपयोग सूचना, अत्यधिक रिजोल्युशन वाली अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरें, जमीन की ऊंचाई और आबादी के आंकड़ों का विस्तृत विवरण आदि।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान का पुनःनिर्वाचन

हाल हे में, पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में फिर से चुना गया है।

  • UNHRC में चार सीटों के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र के पांच उम्मीदवारों में से, पाकिस्तान ने सबसे अधिक मत हासिल किए।
  • वर्तमान में पाकिस्तान 1 जनवरी, 2018 से UNHRC में अपनी सेवायें दे रहा है।
  • अपने पुनःनिर्वाचन के बाद, पाकिस्तान 1 जनवरी, 2021 को शुरू होने वाले तीन साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक सदस्य के रूप में बना रहेगा।

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