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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 October

 

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. एशियाई विकास बैंक

2. शंघाई सहयोग संगठन

3. एनहांस्ड फॉलो-अप’ लिस्ट

4. ईरान परमाणु समझौता

 

सामान्य अध्ययन-III

1. जीएसटी क्षतिपूर्ति

2. अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार

3. लाइन ऑफ क्रेडिट

4. राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA)

5. इंडिया एनर्जी मॉडलिंग फोरम (IEMF)

6. ‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ डिज़ास्टर्स 2000-2019’ रिपोर्ट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. गौसत्त्व कवच

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

एशियाई विकास बैंक (ADB)


(Asian Development Bank)

संदर्भ:

हाल ही में, एशियाई विकास बैंक (Asian Development BankADB) और भारत सरकार के द्वारा मध्य प्रदेश राज्य के 64 छोटे शहरों में बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए 270 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

एशियाई विकास बैंक (ADB) के बारे में:

यह एक क्षेत्रीय विकास बैंक है।

  • 19 दिसंबर 1966 को स्थापित किया गया।
  • मुख्यालय – मनीला, फिलीपींस।
  • इसे संयुक्त राष्ट्र प्रेक्षक का आधिकारिक दर्जा प्राप्त है।

एशियाई विकास बैंक की सदस्यता

  • एशियाई विकास बैंक, एशिया एवं प्रशांत के लिये आर्थिक तथा सामाजिक आयोग (United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific UNESCAP), जिसे पहले ‘एशिया एवं सुदूर-पूर्व के लिए आर्थिक आयोग’ अथवा ECAFE कहा जाता था, तथा गैर-क्षेत्रीय विकसित देशों को सदस्य के तौर पर सम्मिलित करता है।
  • वर्तमान में ADB में 68 सदस्य हैं, जिनमें से 49 एशिया-प्रशांत क्षेत्र के हैं।

एशियाई विकास बैंक में मताधिकार (Voting rights):

  • एशियाई विकास बैंक को विश्व बैंक की तर्ज पर स्थापित किया गया है। इसमें विश्व बैंक के समान ही भारित मतदान प्रणाली है, जिसमे किसी सदस्य राष्ट्र के मताधिकार का निर्धारण बैंक की अधिकृत पूंजी में उस राष्ट्र के अंश के आधार पर होता है।
  • 31 दिसंबर 2019 तक, ADB के पांच सबसे बड़े शेयरधारक, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका (दोनों देशों में प्रत्येक के पास कुल शेयरों का 6%), पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (6.4%), भारत (6.3%), और ऑस्ट्रेलिया (5.8%) हैं।

भूमिकाएँ एवं कार्य

  • एशियाई विकास बैंक, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में समावेशी आर्थिक विकास, पर्यावरणीय रूप से संवहनीय विकास और क्षेत्रीय एकीकरण के माध्यम से गरीबी को कम करने के लिए समर्पित है।
  • इन कार्यों को, ऋण, अनुदान और सूचना की साझेदारी – बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, वित्तीय और सार्वजनिक प्रशासन प्रणालियों, राष्ट्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के लिए तैयार करने में सहयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन आदि क्षेत्रों में निवेश, के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ADB के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
  2. ADB का मुख्यालय
  3. ADB सदस्यों के वोटिंग अधिकार
  4. यह विश्व बैंक से किस प्रकार भिन्न है?
  5. ADB के सदस्य कौन हो सकते हैं।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO)


(Shanghai Cooperation Organisation)

संदर्भ:

केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री, 16 अक्टूबर, 2020 को ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (Shanghai Cooperation OrganisationSCO) सदस्य देशों के विधि मंत्रियों की 7वीं बैठक की मेजबानी करेंगे।

शंघाई सहयोग संगठन के बारे में:

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।

  • SCO की घोषणा, 15 जून 2001 को शंघाई (चीन) में कजाकिस्तान गणराज्य, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, किर्गिज गणराज्य, रूसी संघ, ताजिकिस्तान गणराज्य और उजबेकिस्तान गणराज्य द्वारा की गयी थी।
  • SCO की स्थापना से पूर्व कज़ाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान ‘शंघाई-5’ नामक संगठन के सदस्य थे।
  • जून 2002 में सेंटपीटर्सबर्ग में हुई SCO देशों के प्रमुखों की बैठक के दौरान शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए तथा यह 14 अप्रैल 2003 से प्रभावी हुआ।
  • SCO की आधिकारिक भाषाएं रूसी और चीनी हैं।

शंघाई सहयोग संगठन के प्रमुख लक्ष्य

  • सदस्य राज्यों के मध्य परस्पर विश्वास और सद्भाव को मज़बूत करना।
  • राजनैतिक, व्यापार, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान व प्रौद्योगिकी तथा संस्कृति में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना।
  • संबंधित क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने और सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करना।
  • एक लोकतांत्रिक, निष्पक्ष एवं तर्कसंगत नव-अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक प्रणाली की स्थापना करना।

वर्तमान में SCO:

  • SCO में आठ सदस्य देश शामिल हैं – भारत गणराज्य, कजाकिस्तान गणराज्य, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना, किर्गिज़ गणराज्य, इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान, रूसी संघ, ताजिकिस्तान गणराज्य और उज़्बेकिस्तान गणराज्य।
  • SCO द्वारा चार देशों को पर्यवेक्षक राज्य का दर्जा प्रदान किया गया है – इस्लामिक गणराज्य, बेलारूस गणराज्य, इस्लामी गणतंत्र ईरान और मंगोलिया गणराज्य।
  • SCO के छह संवाद साझेदार हैं- अज़रबैजान गणराज्य, आर्मेनिया गणराज्य, कंबोडिया साम्राज्य, नेपाल का संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य, तुर्की गणराज्य और श्रीलंका।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. शंघाई फाइव क्या है?
  2. SCO चार्टर पर कब हस्ताक्षर किए गए और यह कब लागू हुआ?
  3. SCO संस्थापक सदस्य।
  4. भारत SCO में कब शामिल हुआ?
  5. SCO के पर्यवेक्षक और संवाद सहयोगी।
  6. SCO के तहत स्थायी निकाय।
  7. SCO की आधिकारिक भाषाएं।

मेंस लिंक:

शंघाई सहयोग संगठन के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

‘एनहांस्ड फॉलो-अप’ लिस्ट


(Enhanced Follow-up list)

संदर्भ:

वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) से संबद्ध एशिया-पैसिफिक ग्रुप के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने हेतु पाकिस्तान द्वारा लागू किये गए उपाय अभी ‘फिर से रेटिंग’ करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, और इस समूह ने पाकिस्तान को अपनी ‘एनहांस्ड फॉलो-अप’ लिस्ट’ (Enhanced Follow-up list) में ही बरकरार रखा है।

यह एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group- APG) द्वारा जारी की गयी पाकिस्तान के पारस्परिक मूल्यांकन पर पहली फॉलो-अप रिपोर्ट थी।

इस सूची में पाकिस्तान को बनाए रखने का कारण

मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने हेतु प्रणाली (Anti-Money Laundering and Combating Financing TerrorAML/CFT) की प्रभावशीलता पर वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) द्वारा की गयी 40 अनुशंसाओं के तहत पाकिस्तान की प्रगति काफी हद तक अपरिवर्तित रही है। पाकिस्तान की प्रगति चार अनुशंसाओं पर गैर-अनुपालनीय (Non-Compliant), 25 अनुशंसाओं पर आंशिक रूप से अनुपालन तथा नौ अनुशंसाओं पर काफी हद तक अनुपालनीय रही है।

‘पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट’ क्या है?

APG ‘पारस्परिक मूल्यांकन’ (Mutual Evaluation) एक समकक्ष समीक्षा प्रणाली (Peer-Review System) है, जिसके द्वारा विभिन्न देशों द्वारा लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के अनुपालन मानकों को पूरा करने संबंधी जांच की जाती है।

किसी देश द्वारा पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, APG  द्वारा किसी सदस्य को  ‘रेगुलर’ या ‘एनहांस्ड फॉलो-अप’ सूची में रखने संबंधी निर्णय लिया जाता है।

  1. एक ‘रेगुलर फॉलो-अप’ का तात्पर्य द्विवार्षिक रिपोर्ट से होता है।
  2. एनहांस्ड फॉलो-अप’ सूची के अंतर्गत रखे गए देश को आगामी वर्ष में अनुपालन संबंधी चार रिपोर्ट भेजनी होती है।

पृष्ठभूमि

वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) द्वारा जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा गया था तथा इस्लामाबाद से वर्ष 2019 के अंत तक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने हेतु कार्ययोजना लागू करने के लिए कहा गया था,  जिसकी बाद में COVID-19 महामारी के कारण समय सीमा बढ़ा दी गई थी।

एशिया-प्रशांत समूह (APG)  के बारे में:

मनी लॉन्ड्रिंग पर एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group- APG), वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) की भांति  एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी (अंतरराष्ट्रीय) निकाय है। इसके सदस्य मनी लॉन्ड्रिंग के विरुद्ध (AML), आतंकवाद के वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार हेतु वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करने हेतु प्रतिबद्ध होते हैं।

  • एशिया-प्रशांत समूह (APG) की स्थापना वर्ष 1997 में बैंकाक, थाईलैंड में हुई थी।
  • वर्तमान में एशिया-प्रशांत समूह (APG) के क्षेत्राधिकार में 41 सदस्य और अंतर्राष्ट्रीय / क्षेत्रीय पर्यवेक्षक संगठन शामिल हैं।
  • एशिया-प्रशांत समूह (APG) में शामिल होने वाले सदस्य या पर्यवेक्षक, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की सिफारिशों के अनुपालन हेतु प्रतिबद्ध होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ब्लैक लिस्ट बनाम ग्रे लिस्ट।
  2. क्या FATF के निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी होते हैं?
  3. FATF का प्रमुख कौन है?
  4. इसका सचिवालय कहाँ है?
  5. ‘पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट’ क्या है?
  6. मनी लॉन्ड्रिंग पर एशिया-प्रशांत समूह (APG) क्या है?

 मेंस लिंक:

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल का अधिदेश और उद्देश्य क्या है? भारत – पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

ईरान परमाणु समझौता


(What was the iran nuclear deal?)

संदर्भ:

हाल ही में, चीन द्वारा ‘ईरान परमाणु समझौते’ का समर्थन किया गया है तथा एक नए पश्चिमी एशिया फोरम के गठन की आवश्यकता बतायी गयी है।

यह फोरम पश्चिम एशिया में ‘वार्ता के माध्यम से आपसी समझ को बढ़ाएगा और सुरक्षा मुद्दों के राजनीतिक और राजनयिक समाधान खोजेगा’।

पृष्ठभूमि:

ईरान, यमन में युद्ध, इराक में ईरानी प्रभाव और तेहरान पर वाशिंगटन द्वारा लगाये गए प्रतिबंधों का सऊदी अरब के समर्थन, मामलों में एक अन्य प्रमुख पश्चिम एशियाई शक्ति ‘सऊदी अरब’ के साथ कटुतापूर्ण संबंधो में उलझ गया है।

ईरान परमाणु समझौता क्या था?

ईरान परमाणु समझौता, 2015 में ईरान तथा विश्व के छह देशों– अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के बीच सम्पन्न हुआ था। इस समझौते में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने पर सहमति व्यक्त की।

  • संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत तेहरान ने मध्यम संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडारण को पूर्ण रूप से समाप्त करने, निम्न-संवर्द्धित यूरेनियम के भण्डारण को 98% तक कम करने तथा आगामी 13 वर्षों में अपने गैस सेंट्रीफ्यूजों की संख्या को दो-तिहाई तक कम करने पर सहमति व्यक्त की।
  • इस समझौते के माध्यम से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाये गए प्रतिबंधों की निगरानी के लिए कठोर तंत्रों की स्थापना की गई थी।

अमेरिका इस समझौते से क्यों अलग हो गया?

  • ट्रम्प तथा इस समझौते के विरोधियों का कहना है कि ‘ईरान परमाणु समझौता’ दोषपूर्ण है क्योंकि इससे ईरान को अरबों डॉलर की सहायता तक पहुंच प्राप्त होती है, लेकिन यह हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को ईरान द्वारा समर्थन देने पर प्रतिबंध नहीं लगाता है। इन संगठनो को अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।
  • अमेरिका का यह भी कहना है कि, यह समझौता ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर अंकुश नहीं लगाता है तथा यह मात्र 2030 तक लागू होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. JCPOA क्या है? हस्ताक्षरकर्ता
  2. ईरान और उसके पड़ोसी।
  3. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  4. IAEA के सदस्य
  5. IAEA के कार्यक्रम।
  6. बोर्ड ऑफ गवर्नर- रचना, मतदान और कार्य
  7. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA)  पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

जीएसटी क्षतिपूर्ति


(GST Compensation)

संदर्भ:

वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax- GST) परिषद, उपकर संग्रह (Cess Collections) में होने वाली कमी को पूरा करने हेतु ऋण संबंधी विवादास्पद मुद्दे पर किसी समझौते तक पहुंचने में फिर से विफल रही है।

  • उपकर संग्रह का उपयोग, अप्रत्यक्ष कर लागू किये जाने से राज्यों को होने वाली हानि की भरपाई हेतु किया जाता है।
  • यह क्षतिपूर्ति कमी पर बिना किसी निर्णय के समाप्त होने वाली लगातार तीसरी बैठक थी।

केंद्र और राज्यों के मध्य विवाद का प्रमुख बिंदु

  • केंद्र का कहना है, कि वह उन राज्यों की मदद करने के लिए तैयार है जिन्होंने उपकर संग्रह में हुई हानि को पूरा करने के लिए ऋण लेने का फैसला किया है।
  • परंतु, कुछ राज्यों की मांग है, कि राज्यों पर ऋण लेने हेतु दबाव डालने के बजाय केंद्र को ऋण लेना चाहिए।

GST हानि की भरपाई हेतु केंद्र द्वारा राज्यों को भुगतान क्यों करना चाहिए?

जीएसटी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 2017 के अनुसार, राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद पहले पांच वर्षो तक, अर्थात वर्ष 2022 तक, होने वाले राजस्व के किसी भी नुकसान की भरपाई, पातक एवं विलासिता वस्तुओं (Sin and Luxury Goods), अर्थात सिगरेट और तंबाकू उत्पादों, पान मसाला, कैफीनयुक्त पेय, कोयला एवं  कुछ लक्ज़री यात्री वाहनों आदि पर लगाये गए ‘उपकरों’ की वसूली से की जाएगी।

  • हालांकि, आर्थिक मंदी के कारण जीएसटी और उपकर, दोनों के संग्रह में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट आयी है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वर्ष भुगतान किए गए मुआवजे तथा संग्रहीत उपकर के मध्य 40% का अंतर हो गया है।
  • COVID-19 के कारण अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से राज्यों को इस वर्ष तीन लाख करोड़ के जीएसटी राजस्व अंतर का सामना करना पड़ सकता है। इसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अप्रत्याशित ‘भगवान का कार्य’ (Act of God) करार दिया गया है।

क्षतिपूर्ति उपकर क्या है?

क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) के विधि-विधान जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) संशोधन विधेयक, 2017 द्वारा निर्दिष्ट किए गए थे।

  1. इस अधिनियम में माना गया है कि सभी करों को जीएसटी में समाहित करने के बाद से प्रत्येक राज्य के जीएसटी राजस्व में, वित्तीय वर्ष 2015-16 में एकत्र की गई राशि से, प्रति वर्ष 14% की दर से वृद्धि होगी।
  2. राज्य द्वारा किसी भी वर्ष में इस राशि से कम कर-संग्रह किये जाने पर होने वाली हानि की भरपाई की जाएगी। राज्यों को इस राशि का भुगतान प्रति दो महीने में अनंतिम खातों के आधार पर किया जाएगा, तथा प्रति वर्ष राज्य के खातों के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट किए जाने के पश्चात समायोजित किया जाएगा।
  3. यह योजना पाँच वर्षों, अर्थात् जून 2022 तक के लिए वैध है।

क्षतिपूर्ति उपकर निधि:

राज्यों को राजस्व हानि होने पर क्षतिपूर्ति प्रदान करने के एक क्षतिपूर्ति उपकर निधि (Compensation cess fund) का गठन किया गया है। कुछ वस्तुओं पर अतिरिक्त उपकर लगाया जाएगा और इस उपकर का उपयोग राज्यों को मुआवजे का भुगतान करने के लिए किया जाएगा।

  • इन वस्तुओं में पान मसाला, सिगरेट और तम्बाकू उत्पाद, वायवीय पानी, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, कोयला और कुछ यात्री मोटर वाहन सम्मिलित हैं।
  • जीएसटी अधिनियम में कहा गया है कि संग्रीह्त उपकर तथा जीएसटी परिषद द्वारा निर्धारित की गयी इस ​​तरह की अन्य राशि को क्षतिपूर्ति उपकर निधि में जमा की जायेगी।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. जीएसटी क्या है?
  2. SGST और IGST क्या हैं?
  3. संबंधित संवैधानिक प्रावधान।
  4. GST के दायरे से बाहर वस्तुएं।
  5. उपकर क्या होता है?
  6. अधिभार (Surcharge) क्या होता है?
  7. क्षतिपूर्ति उपकर निधि क्या होती है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार


(Nobel Prize in Economics)

संदर्भ:

वर्ष 2020  अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार, अमेरिकी अर्थशास्त्री पॉल आर. मिल्ग्राम (Paul R. Milgrom) एवं रॉबर्ट बी. विल्सन (Robert B. Wilson) को ‘नीलामी सिद्धांत में सुधार तथा नए नीलामी प्रारूपों के आविष्कार’ (Improvements to Auction Theory and Inventions of New Auction Formats) के लिये प्रदान किया गया है।

इनका योगदान:

  1. रॉबर्ट विल्सन ने अपने सिद्धांत के माध्यम से दिखाया कि तर्कसंगत बोली लगाने वाले क्यों अपने सामान्य मूल्य के अपने सर्वश्रेष्ठ अनुमान से नीचे बोलियां लगाते हैं। वे विजेता होने के नुकसान के बारे में चिंतित होते हैं। अर्थात, ज्यादा भुगतान करने और इससे होने वाले नुकसान की उन्हें चिता रहती है।
  2. लॉरेट पॉल मिलग्राम ने नीलामी का एक सामान्य सिद्धांत तैयार किया जो न केवल सामान्य मूल्यों की अनुमति देता है, बल्कि निजी मान भी रखता है। यह निजी मान बोली हर बोली लगाने वाले के लिए अलग-अलग होता है।

नीलामी सिद्धांतक्या होता है?

किसी नीलामी (या खरीद) का परिणाम तीन कारकों पर निर्भर करता है:

  1. नीलामी के नियम, या प्रारूप।
  1. सबसे ऊंची बोली।
  2. अनिश्चितता।

नीलामी सिद्धांत का उपयोग करके, यह स्पष्ट करना संभव है कि ये तीन कारक, बोली लगाने वालों के रणनीतिक व्यवहार तथा इस प्रकार से नीलामी के परिणाम को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं।

नीलामी सिद्धांत यह भी दर्शाता है, कि अधिकतम संभावित कीमत का निर्माण करने हेतु नीलामी को किस प्रकार डिज़ाइन किया जा सकता है।

अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार:

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिए जाने वाले इस पुरस्कार को तकनीकी रूप से ‘स्वीरिजेज रिक्सबैंक प्राइज’ (Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences) कहा जाता है और यह अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिया जाता है।

  • इस पुरस्कार को वर्ष 1969 और वर्ष 2019 के मध्य 51 बार 84 विद्वानों को दिया जा चुका है।
  • पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोना (लगभग 27 करोड़ रुपये) की राशि दी जाती है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

लाइन ऑफ क्रेडिट


(What is line of credit?)

संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली और ‘मालदीव’ के मध्य ‘ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट’ (Greater Male Connectivity ProjectGMCP) के लिए $ 400 मिलियन पाउंड के लाइन ऑफ क्रेडिट (line of creditLoC) समझौते पर हस्ताक्षर किये गए है।

द्वीपीय राष्ट्र मालदीव के लिए यह एकलौता सबसे बड़ा कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है।

लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) क्या है?

  • लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) विकासशील देशों को रियायती ब्याज दरों पर दिया जाने वाला एक सॉफ्ट लोनहोता है, जिसे ऋणकर्ता सरकार को चुकाना होता है। लाइन ऑफ क्रेडिट ‘अनुदान’ नहीं होता है।
  • लाइन ऑफ क्रेडिट भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने में भी मदद करता है, क्योंकि इसके तहत किये गए अनुबंध की कुल कीमत की 75% सामग्री की आपूर्ति भारत द्वारा की जाती है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA)


(Rashtriya Kamdhenu Aayog)

 संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग द्वारा इस वर्ष दिवाली महोत्सव में गाय के गोबर / पंचगव्य उत्पादों के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “कामधेनु दीपावली अभियान” मनाने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया गया है।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) का लक्ष्य इस वर्ष दीपावली त्योहार के दौरान 11 करोड़ परिवारों में गाय के गोबर से बने 33 करोड़ दीयों को प्रज्वलित करना है।

अभियान का महत्व:

  • हजारों गाय आधारित उद्यमियों / किसानों / महिला उद्यमियों को व्यवसाय के अवसर पैदा करने के अलावा, गाय के गोबर से बने उत्पादों के उपयोग से स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी बनेगा।
  • चीन निर्मित दीयों का पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करके यह अभियान ‘मेक इन इंडिया’ परिकल्पना को बढ़ावा देगा और पर्यावरणीय क्षति को कम करते हुए स्वदेशी ’आंदोलन को भी प्रोत्साहित करेगा।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के बारे में:

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (Rashtriya Kamdhenu AayogRKA) का गठन वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गायों और गौवंश के संरक्षण, सुरक्षा और विकास तथा पशु विकास कार्यक्रम को दिशा प्रदान करने के लिए किया गया था।

  • यह मवेशियों से संबंधित योजनाओं के बारे में नीति बनाने और कार्यान्वयन को दिशा प्रदान करने के लिए एक उच्च स्तरीय स्थायी सलाहकार संस्था है।
  • राष्ट्रीय कामधेनु आयोग, ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के अभिन्न अंग के रूप में कार्य करेगा।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के कार्य:

  • मौजूदा कानूनों, नीतियों की समीक्षा करना और साथ ही उन्नत उत्पादन और उत्पादकता हेतु गौ-धन के इष्टतम आर्थिक उपयोग के लिए उपाय सुझाना, ताकि कृषि आय में वृद्धि तथा डेयरी किसानों के लिए बेहतर व गुणवत्तापूर्ण जीवन की प्राप्ति हो सके।
  • गायों के संरक्षण, संरक्षण, विकास और कल्याण से संबंधित नीतिगत मामलों पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को सलाह देना और मार्गदर्शन करना।
  • जैविक खाद के उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु योजनाओं को बढ़ावा देना और रासायनिक खादों के उपयोग को कम करने हेतु किसानों द्वारा जैविक खाद में गाय के गोबर व मूत्र के उपयोग के लिए प्रोत्साहन योजनाओं सहित उपयुक्त उपायों की सिफारिश करना।
  • गौशालाओं और गो-सदनों को तकनीकी जानकारी प्रदान करके देश में परित्यक्त गायों से संबंधित समस्याओं के समाधान संबंधी प्रावधान करना।
  • चारागाहों और गौशालाओं को विकसित करना तथा इनके विकास हेतु निजी या सार्वजनिक संस्थानों या अन्य निकायों के साथ सहयोग करना।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

इंडिया एनर्जी मॉडलिंग फोरम (IEMF)


(India Energy Modelling Forum)

संदर्भ:

हाल ही में, नीति आयोग द्वारा ‘इंडिया एनर्जी मॉडलिंग फोरम’ (India Energy Modelling ForumIEMF) हेतु संचालक संरचना की घोषणा की गयी है।

IEMF की संचालन समिति

इंडिया एनर्जी मॉडलिंग फोरम (IEMF) की संचालक संरचना में एक अंतर-मंत्रालयी और एक संचालन समिति शामिल है।

अंतर-मंत्रालयी समिति:

  • अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठक नीति आयोग द्वारा बुलाई जाएगी और इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इसकी अध्यक्षता करेंगे, और इसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय; ऊर्जा मंत्रालय; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा; कोयला; पर्यावरण; वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
  • यह समिति अध्ययन/मॉडलिंग गतिविधियों की समीक्षा करेगी और अनुसंधान को दिशा देने के साथ नए क्षेत्र भी उपलब्ध कराएगी।

संचालन समिति:

  • यह समिति अध्ययन के लिए नीतिगत मुद्दों को छांटेगी और विशिष्ट अध्ययनों/मॉडलिंग अभ्यासों के आधार पर विभिन्न कार्यबल (टास्क फोर्स) का भी गठन कर सकेगी।

इंडिया एनर्जी मॉडलिंग फोरम के बारे में:

‘इंडिया एनर्जी मॉडलिंग फोरम’ (India Energy Modelling Forum- IEMF) को यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक एनर्जी पार्टनरशिप के तहत संयुक्त रूप से नीति आयोग तथा यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) द्वारा लॉन्च किया गया है।

संरचना: इस फोरम में ज्ञान-साझेदार, डेटा एजेंसियां और संबंधित सरकारी मंत्रालय शामिल होंगे।

फोरम का उद्देश्य

  1. महत्वपूर्ण ऊर्जा और पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करना;
  2. निर्णय लेने की प्रक्रिया से भारत सरकार को अवगत कराना;
  3. मॉडलिंग टीमों, सरकार और ज्ञान के भागीदारों और वित्त पोषकों  के बीच सहयोग में सुधार;
  4. विचारों के आदान-प्रदान को सुगम बनाना, उच्च गुणवत्ता वाला अध्ययन सुनिश्चित करना ;
  5. विभिन्न स्तरों पर और विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान के बीच परस्पर कमी की पहचान करना;
  6. भारतीय संस्थानों की क्षमता बढ़ाने में मदद करना।

ऊर्जा मॉडलिंग क्या है?

ऊर्जा मॉडलिंग या ऊर्जा प्रणाली मॉडलिंग एक प्रक्रिया है, जिसमे ऊर्जा प्रणालियों के कंप्यूटर मॉडल तैयार किये जाते है, तथा, इसके पश्चात इनका विश्लेषण किया जाता है।

  • इस तरह के मॉडल अक्सर किसी परियोजना में तकनीकी और आर्थिक स्थितियों के संदर्भ में विभिन्न अनुमानों के परीक्षण हेतु परिदृश्य विश्लेषण का उपयोग करते हैं।
  • इसके परिणामों में, प्रणाली की व्यवहार्यता, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, संचयी वित्तीय लागत, प्राकृतिक संसाधन उपयोग, तथा प्रणाली की ऊर्जा दक्षता के बारे में पता चलता है।

ऊर्जा मॉडलिंग फ़ोरम (EMF) क्या हैं?

  • संयुक्त राज्य अमेरिका में ऊर्जा मॉडलिंग फोरम (Energy Modelling Forums- EMF) की स्थापना 1976 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में सरकार, उद्योग, विश्वविद्यालयों और अन्य शोध संगठनों के प्रमुख मॉडलिंग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने के लिए की गई थी।
  • फोरम, ऊर्जा और पर्यावरण से संबधित समकालीन मुद्दों पर चर्चा के लिए एक निष्पक्ष मंच प्रदान करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नीति आयोग – रचना और प्रमुख कार्य।
  2. EMF की भूमिका।
  3. सतत विकास स्तंभ क्या है?
  4. ऊर्जा मॉडलिंग क्या है?

मेंस लिंक:

भारतीय ऊर्जा मॉडलिंग फोरम के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ डिज़ास्टर्स 2000-2019’ रिपोर्ट


(The Human Cost of Disasters 2000-2019 Report)

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (United Nations Office for Disaster Risk Reduction- UNISDR) द्वारा ‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ डिज़ास्टर्स 2000-2019’ (The Human Cost of Disasters 2000-2019) रिपोर्ट जारी की गयी है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • पिछले 20 वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं के लगभग दोगुने हो जाने के लिए जलवायु परिवर्तन काफी हद तक जिम्मेदार है।
  • वर्ष 2000 और 2019 के मध्य 7,348 प्रमुख आपदा घटनाएं घटित हुईं हैं, जिससे 4.2 बिलियन लोग प्रभावित हुए और वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग 2.97 ट्रिलियन डॉलर की क्षति हुई है।

UNISDR के बारे में:

संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (United Nations Office for Disaster Risk Reduction UNISDR), को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 1999 में स्थापित किया गया था।

  • इसका उद्देश्य आपदा न्यूनीकरण हेतु अंतर्राष्ट्रीय रणनीति के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है।

कार्य:

UNISDR को 18 मार्च, 2015 को सेंदाई, जापान में आयोजित आपदा जोखिम में कमी को लेकर तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में अपनाया गया था।

संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNISDR), आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर सेंदाई फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन, फॉलो-अप और समीक्षा करने में सहयोग करता है।

सेंदाई फ्रेमवर्क द्वारा निर्धारित की गयी चार प्राथमिकताओं पर UNISDR

  1. आपदा जोखिम का अध्ययन
  2. आपदा जोखिम प्रबंधन हेतु आपदा जोखिम प्रबंधन में सुधार करना
  3. लचीलेपन हेतु आपदा जोखिम में कमी के लिये निवेश करना
  4. प्रभावी प्रतिक्रिया के लिये आपदा-रोधी तैयारी को बढ़ावा देना तथा पुनः प्राप्ति, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण में बेहतर निर्माण पर बल देना

सेंदाई फ्रेमवर्क के बारे में:

जापान के सेंदाई में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीसरा संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन जून 2015 में आयोजित किया गया था। इस सम्मलेन में ‘आपदा न्यूनीकरण के लिये सेंदाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) 2015-30’ को अपनाया गया था।

  • यह वर्ष 2015 के विकास एजेंडे के बाद होने वाला पहला बड़ा समझौता है, जिसमें सात लक्ष्य और कार्रवाई के लिए चार प्राथमिकताएं निर्धारित की गयी हैं।
  • इसकी संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा तीसरे ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण विश्व सम्मेलन’ (UN World Conference on Disaster Risk ReductionWCDRR) 2015 पश्चात् अभिपुष्टि की गयी थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNISDR के बारे में।
  2. सेंदाई फ्रेमवर्क क्या है?
  3. WCDRR के बारे में।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


गौसत्त्व कवच (Gausatva Kavach)

  • यह गोबर से निर्मित एक विशेष ‘ चिप’ है।
  • इसे राजकोट स्थित श्रीजी गौशाला द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह दावा किया जाता है कि यह चिप मोबाइल हैंडसेट से होने वाले विकिरण को कम करती है।

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