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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 10 October

 

विषय- सूची

 सामान्य अध्ययन-II

 1. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

2. इंडो-श्री लंका समझौता

3. चीन ने किया क्वाड का विरोध

 

सामान्य अध्ययन-III

 1. लक्षित दीर्घावधि रेपो परिचालन (TLTRO)

2. संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

3. वृक्ष प्रत्यारोपण नीति

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

 1. विकिरण-रोधी मिसाइल: रुद्रम

2. अप्रवासी भारतीय कोटा बाध्यकारी नहीं है: सर्वोच्च न्यायालय

3. जोखिम भार (risk weightage) क्या है?

4. चर्चित स्थल- किर्गिस्तान

5. राष्ट्रीय तितली

6. 2+2 वार्ता

7. मारु मणि

8. गरबा

9. पशु एवं पादप खोज 2019

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, नियामक एवं विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR):


समाचारों में क्यों?

देखभाल गृहों में रहने वाले बच्चों को उनके परिवारों के साथ “तत्काल प्रत्यावर्तन” के लिए “स्थानीय बाल कल्याण समितियों” के समक्ष उन्हें प्रस्तुत करने हेतु राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आठ राज्यों को किये गए अनुरोध के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायलय ने जवाब माँगा है।

  • न्यायालय स्वतः संज्ञान के माध्यम से महामारी के दौरान देखभाल घरों में रखे गए बच्चों के कल्याण की निगरानी कर रहा है।

मुद्दा क्या है?

NCPCR ने इस संबंध में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मिजोरम, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और मेघालय को लिखा था।

  • इन राज्यों के देखभाल घरों में कुल 1.84 लाख बच्चे रहते हैं। यह देखभाल घरों में रहने वाले बच्चों की संख्या का 70% से अधिक है।

न्यायालय ने अब किस सन्दर्भ में जवाब माँगा है?

  • न्यायालय ने NCPCR से जवाब मांगा कि बच्चों का उनके परिवारों के साथ ऐसा प्रत्यावर्तन व्यक्तिगत आधार पर क्यों नहीं होना चाहिए।
  • न्यायालय ने इस बात पर भी प्रश्न चिह्नन लगाया कि क्या NCPCR शिक्षा, स्वास्थ्य, बच्चों की सुरक्षा, उनके माता-पिता की सहमति और उनकी आर्थिक स्थिति पर विचार किए बिना राज्यों को ऐसे सामान्य निर्देश जारी कर सकता है।

NCPCR के बारे में:

बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत मार्च 2007 में स्थापित किया गया।

यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।

परिभाषा: बच्चे को 0 से 18 आयुवर्ग के एक व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है।

  • आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी कानून, नीतियां, कार्यक्रम और प्रशासनिक तंत्र भारत के संविधान में निहित बाल अधिकार के दृष्टिकोण और बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय के अनुरूप हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत, NCPCR निम्नलिखित कार्य भी कर सकता है:

  • कानून के उल्लंघन की शिकायतों के बारे में पूछताछ करना।
  • किसी व्यक्ति को बुलाना और साक्ष्यों की मांग करना।
  • एक मजिस्ट्रेट स्तर की जांच की मांग करना।
  • उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करना।
  • अपराधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से संपर्क करना।
  • प्रभावित लोगों को अंतरिम राहत देने की सिफारिश करना।

संरचना:

इस आयोग में एक अध्यक्ष और छह सदस्य हैं, जिनमें से कम से कम दो महिलाएँ होनी चाहिए।

  • इन सभी को तीन वर्ष के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • आयोग में सेवा करने के लिए अधिकतम आयु अध्यक्ष के लिए 65 वर्ष और सदस्यों के लिए 60 वर्ष है।

बाल कल्याण समितियों के बारे में:

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (जेजे एक्ट) की धारा 27 (1) के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक जिले के लिए बाल कल्याण समितियों का गठन किया जायेगा, जिनका कार्य, ऐसे बच्चों जिन्हें देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता है, के सम्बन्ध में इन समितियों को प्रदान किये गए अधिकारों एवं कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा।

समितियों की संरचना:

समिति में एक अध्यक्ष एवं चार अन्य सदस्य होंगे। जिनमें से कम से कम एक महिला होगी और एक बच्चों से संबंधित मामलों का विशेषज्ञ होगा।

पात्रता की शर्तें:

अध्यक्ष और सदस्य की उम्र पैंतीस वर्ष से अधिक होनी चाहिए एवं उनके पास शिक्षा, स्वास्थ्य, या कल्याणकारी गतिविधियों के क्षेत्र में बच्चों के साथ काम करने का न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव होना चाहिए, अथवा बाल मनोविज्ञान या मनोरोग या सामाजिक कार्य या समाजशास्त्र या मानव विकास या कानून के क्षेत्र में एक डिग्री के साथ एक अभ्यासरत पेशेवर होना चाहिए या एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी होना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCPCR- संरचना एवं कार्य
  2. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत NCPCR की शक्तियां
  3. शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएं
  4. बाल कल्याण समितियां- गठन और संरचना

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स्त्रोत: द हिन्दू

 

विषय: भारत और उसके पड़ोसी- संबंध।

 इंडोश्री लंका समझौता:


समाचारों में क्यों?

संविधान के 13 वें संशोधन के कार्यान्वयन के साथ तमिल आकांक्षाओं को संबोधित करने के लिए श्रीलंकाई समकक्ष को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किये गए अनुरोध के पश्चात् श्रीलंका के तमिल सांसदों ने 1987 के इंडो-लंका समझौते से पूर्ववर्ती सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है।

 समझौते के बारे में:

1987 में हस्ताक्षर किए गए।

इसके रचनाकार प्रधानमंत्री राजीव गांधी और राष्ट्रपति जे. आर. जयवर्धने के नाम पर इसे लोकप्रिय रूप से “राजीव-जयवर्धने समझौते” के रूप में जाना जाता है।

  • इसने भारत और श्रीलंका के मध्य सभी तीन विवादास्पद मुद्दों- रणनीतिक हित, श्रीलंका में भारतीय मूल के लोग और श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यक अधिकार; को सामूहिक रूप से संबोधित करने की मांग की।
  • इस समझौते के परिणामस्वरूप श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) को स्थापित किया गया।
  • इस समझौते से यह आशा की गयी थी कि यह श्रीलंका के संविधान में तेरहवें संशोधन और 1987 के प्रांतीय परिषद अधिनियम को सक्षम बनाकर श्रीलंकाई गृह युद्ध को हल करने में सहायक होगा।

 प्रीलिम्स और मेन्स लिंक:

  • प्रमुख प्रावधान।

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 स्त्रोत: द हिन्दू

 

विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, एजेंसियां ​​एवं फोरम, उनकी संरचना, उद्देश्य।

 चीन ने किया क्वाड का विरोध:


सन्दर्भ:

चीन ने टोक्यो में आयोजित क्वाड (भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका) के विदेश मंत्रियों की बैठक की आलोचना करते हुए कहा है कि वह तीसरे पक्ष के हितों को क्षति पहुंचाने वाले “विशिष्ट समूहों” के गठन का विरोध करता है।

 पृष्ठभूमि:

इंडो-पैसिफिक देशों के विदेश मंत्रियों को क्वाड समूह के रूप में जाना जाता है- अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में टोक्यो में बैठक संपन्न की, जो कि कोरोनो महामारी प्रारम्भ होने के बाद उनकी पहली व्यक्तिगत वार्ता है।

 चीन क्यों चिंतित है?

  • यह बैठक इंडो-पैसिफिक, दक्षिण चीन सागर एवं पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीन के आक्रामक सैन्य व्यवहार की पृष्ठभूमि में आयोजित की गयी।
  • इसके अतिरिक्त, चीन के रणनीतिक समुदाय ने क्वाड को एक उभरते हुए “एशियाई नाटो” के रूप में संदर्भित कर दिया है।

 क्वाड समूह क्या है?

चतुर्भुज सुरक्षा संवाद में जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।

  • सभी चार राष्ट्रों में लोकतांत्रिक राष्ट्र का साझा आधार एवं निर्बाध रूप से समुद्री व्यापार एवं सुरक्षा के साझा हित पाए जाते हैं।
  • इस विचार को पहली बार 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे द्वारा प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, यह विचार ऑस्ट्रेलिया के इससे बाहर निकल जाने के कारण आगे नहीं बढ़ सका था।

 समूह का महत्व:

  • क्वाड समान विचारधारा वाले देशों के लिए पारस्परिक हित की परियोजनाओं पर सहयोग करने का एक अवसर है।
  • सदस्य एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक की दूरदर्शिता को साझा करते हैं। प्रत्येक सदस्य विकास और आर्थिक परियोजनाओं के साथ-साथ समुद्री डोमेन जागरूकता और समुद्री सुरक्षा को प्रोत्साहित करने में शामिल है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. QUAD- संरचना
  2. यह पहली बार कब प्रस्तावित किया गया था?
  3. हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित देश एवं महत्वपूर्ण द्वीप।
  4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भौगोलिक अवलोकन।
  5. इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्र और जलडमरूमध्य।

 मेंस लिंक:

समुद्री क्षेत्रों में शांति स्थापित करने एवं इससे सम्बंधित संयुक्त राष्ट्र के कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए क्वाड का एक औपचारिक पुरूद्धार एवं उसमें नवशक्ति संचार किया गया। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधन जुटाना, प्रगति, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

लक्षित दीर्घावधि रेपो परिचालन (TLTRO):


सन्दर्भ:

भारतीय रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था में तरलता प्रवाह को सुविधाजनक बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की राशि के लिए लक्षित दीर्घावधि रेपो परिचालन (TLTRO) करने का निर्णय लिया है।

RBI द्वारा लिए गए अन्य निर्णय

इस योजना के तहत बैंकों द्वारा प्राप्त तरलता को कॉरपोरेट बॉन्ड, वाणिज्यिक पत्र, ऋण और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में नियोजित किया जायेगा, जिन्हें 30 सितंबर, 2020 तक ऐसे उपकरणों में अपने निवेश के उत्कृष्ट स्तर से ऊपर विशिष्ट क्षेत्रों में इन संस्थाओं द्वारा जारी किया गया था।

LTRO क्या है?

LTRO एक ऐसा उपकरण है, जिसके तहत केंद्रीय बैंक प्रचलित रेपो दर पर बैंकों को एक वर्ष से तीन वर्ष की अवधि के लिए धन उपलब्ध कराती है एवं कोलैटरल के रूप में समान अवधि अथवा अधिक अवधि की सरकारी प्रतिभूतियां स्वीकार करती है।

यह तरलता समायोजन सुविधा (LAF) एवं सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) से कैसे भिन्न है?

 RBI की तरलता समायोजन सुविधा एवं सीमांत स्थायी सुविधा जैसे वर्तमान उपकरण बैंकों को उनकी तत्काल आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए 1-28 दिनों की अवधि के लिए धनराशि उपलब्ध कराते हैं, जबकि LTRO 1 से 3 वर्ष की अवधि के लिए उनकी आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए तरलता की आपूर्ति करता है।

 यह महत्वपूर्ण क्यों है?

जब बैंकों को निम्न दर पर दीर्घावधिक ऋण प्राप्त होता है, तो उनके ऋण की लागत में कमी आती है।

  • बदले में, वे उधारकर्ताओं से प्राप्त होने वाली ब्याज दरों में कमी करते हैं।
  • LTRO, RBI को यह सुनिश्चित करने में सहायता करता है कि बैंक नीतिगत दरों को कम किए बिना अपनी ऋण-आधारित उधार दर की सीमांत लागत को कम करते हैं।
  • LTRO ने बाजार को यह भी दिखाया कि RBI केवल रेपो दरों को संशोधित करने और अपनी मौद्रिक नीति के लिए खुले बाजार की संचालन प्रक्रियाओं पर ही निर्भर नहीं है बल्कि यह अपने इच्छित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए नए उपकरणों का भी उपयोग करेगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. LTRO क्या है?
  2. MSF क्या है?
  3. LAF क्या है?
  4. खुले बाजार की प्रक्रियाएं क्या हैं?
  5. मौद्रिक नीति बनाम राजकोषीय नीति

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: खाद्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दे

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम को मिला नोबेल शांति पुरस्कार:


सन्दर्भ:

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को विश्व में भुखमरी से निपटने और संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना के लिए स्थितियों में सुधार के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम का योगदान एवं उपलब्धियां:

  • यह प्रत्येक वर्ष लगभग 88 देशों में लगभग 97 मिलियन लोगों की सहायता करता है।
  • युद्ध और संघर्ष के हथियार के रूप में भुखमरी के उपयोग को रोकने के प्रयासों में WFP एक प्रेरणा शक्ति है।
  • WFP एक रसद सेवा चलाता है, जिसने COVID-19 का सामना कर रहे सरकारों और स्वास्थ्य सहयोगियों की सहायता करने के लिए महामारी के दौरान 120 से अधिक देशों में चिकित्सा से सम्बंधित सामग्री भेजी।
  • इसने वाणिज्यिक उड़ानों की अनुपलब्धता की दशा में मानवीय सेवा और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए यात्री सेवाएं भी प्रदान की हैं।

विश्व भूख से सम्बंधित चुनौतियां:

  • विश्व भर में नौ में से एक व्यक्ति के पास अभी भी खाने के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं है।
  • एक अनुमान के अनुसार, एक वर्ष में कुल 265 मिलियन लोग भूखे रहते हैं।

आधारभूत ज्ञान:

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (UN-WFP) क्या है?

विश्व खाद्य कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता शाखा है और विश्व का सबसे बड़ा मानवतावादी संगठन है, जो भुखमरी को संबोधित करता है और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

1961 में स्थापित WFP भोजन सहायता की आवश्यकता को समाप्त करने के अंतिम लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भूख और कुपोषण के उन्मूलन का प्रयास करता है।

यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह का सदस्य है और इसकी कार्यकारी समिति का एक भाग है।

  • WFP खाद्य सहायता को सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से लड़ने, बाल मृत्यु दर को कम करने, मातृ स्वास्थ्य में सुधार करने एवं एचआईवी/ एड्स सहित रोगों से लड़ने के लिए भी निर्देशित किया गया है।

वर्ल्ड हंगर मैप” क्या है?

अलीबाबा की क्लाउड कंप्यूटिंग शाखा-अलीबाबा क्लाउड, डिजिटल “वर्ल्ड हंगर मैप” विकसित करने के लिए WFP के साथ मिलकर काम कर रही है।

  • यह मैप 2030 तक वैश्विक भूख और इससे सम्बंधित अभियानों की निगरानी करने में सहायता करेगा, जो संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सतत विकास लक्ष्यों में से एक है।
  • इसका उद्देश्य हस्तक्षेपों की दक्षता में वृद्धि करना एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया में लगने वाले समय को कम करना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. WFP किसके द्वारा स्थापित किया गया था?
  2. उद्देश्य?
  3. वर्ल्ड हंगर मैप
  4. संयुक्त राष्ट्र विकास समूह के सदस्य।
  5. नोबेल शांति पुरस्कार के बारे में।

मेंस लिंक:

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: संरक्षण से संबंधित मुद्दे।

वृक्ष प्रत्यारोपण नीति:


सन्दर्भ:

दिल्ली कैबिनेट ने ‘वृक्ष प्रत्यारोपण नीति’ को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही दिल्ली इस नीति को पारित करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।

नीति की मुख्य विशेषताएं:

  • संबंधित एजेंसियों को अपनी परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले वृक्षों की कुल संख्या के 80 प्रतिशत भाग को नवीन स्थानों पर प्रत्यारोपित करना होगा।
  • इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि काटे गए प्रत्येक पेड़ के एवज में 10 पौधे लगाए जाएंगे और उन्हें दूसरे स्थान पर वैज्ञानिक रूप से प्रत्यारोपित किया जाएगा।
  • नीति के तहत वृक्ष प्रत्यारोपण के अनुभव वाली सरकारी एजेंसियों का एक समर्पित पैनल

गठित किया जा रहा है।

  • प्रत्यारोपण के एक वर्ष पश्चात् पौधों की स्थिति सुनिश्चित करने के बाद ही भुगतान किया जाएगा, और यदि प्रत्यारोपित किए गए पौधों में से 80 प्रतिशत से कम जीवित रहते हैं, तो भुगतान की राशि को कम कर दिया जाएगा।
  • सरकार स्थानीय समितियों का भी गठन करेगी, जिसमें नागरिकों को शामिल किया जाएगा एवं वे पेड़ प्रत्यारोपण की जाँच, निगरानी और प्रमाणन करेंगे।
  • दिल्ली सरकार और स्थानीय समितियों द्वारा एक समर्पित ट्री ट्रांसप्लांटेशन सेल का भी गठन किया जाएगा, जिसमें सरकारी अधिकारियों, नागरिकों को प्रत्यारोपित वृक्षों की निगरानी करने और यह प्रमाणित करने के लिए शामिल किया जायेगा कि कार्य पूरी लगन के साथ किया गया है।

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स्रोत: द हिन्दू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


विकिरणरोधी मिसाइल: रुद्रम

 सन्दर्भ:

हाल ही में एक सुखोई -30 लड़ाकू विमान से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

 प्रमुख बिंदु:

  • इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है।
  • इसमें लगभग 100 से 150 किमी की स्ट्राइक रेंज है।
  • सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल, जिसे रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित किया गया था, के पश्चात् यह DRDO द्वारा विकसित प्रथम स्वदेशनिर्मित “वायु-से-सतह” पर मार करने वाली मिसाइल है।
  • मिसाइल को दुश्मन देश की हवाई सुरक्षा के दमन (सप्रेशन ऑफ़ एनिमी एयर डिफेंस- SEAD) के लिए डिजाइन किया गया है।
  • दुश्मन देशों के निगरानी राडार, ट्रैकिंग एवं संचार प्रणालियों को नष्ट करने के लिए मिसाइल को अलग-अलग दूरी से प्रक्षेपित किया जा सकता है।

 अप्रवासी भारतीय कोटा बाध्यकारी नहीं है: सर्वोच्च न्यायालय:

 सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय लिया है कि:

  • पेशेवर और तकनीकी पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाले निजी कॉलेजों और संस्थानों को उचित पूर्व सूचना देने के पश्चात् सीटों के अपने अप्रवासी भारतीय (NRI) कोटे को समाप्त करने का पूर्ण विवेकाधिकार होगा।
  • अप्रवासी भारतीय कोटा बाध्यकारी नहीं है और कोटा के तहत उम्मीदवार प्रवेश प्राप्त करने के अपने अधिकार पर जोर नहीं दे सकते हैं।

पृष्ठभूमि: स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए राजस्थान के निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में सीट मैट्रिक्स में परिवर्तन के विरोध में की गयी अपील पर यह फैसला आया।

 जोखिम भार (risk weightage) क्या है?

जोखिम भार पूंजी का वह भाग है, जिसे बैंक द्वारा किसी भी ऋण चूक (Loan Default) के जोखिम से बचने के लिए पृथक रखा जाता है।

 समाचारों में क्यों?

RBI ने आवास ऋणों पर जोखिम भार को युक्तिसंगत बनाने का निर्णय लिया है।

  • अब, ऋण-एवं-मूल्य के मध्य का अनुपात (Loan To Value) 80% से कम या बराबर होने की दशा में जोखिम भार का अनुपात 35% होगा एवं ऋण-एवं-मूल्य के मध्य का अनुपात (Loan To Value) 80% से अधिक लेकिन 90% से कम या बराबर होने की दशा में जोखिम भार का अनुपात 50% होगा।

 चर्चित स्थलकिर्गिस्तान:

समाचारों में क्यों?

हाल ही में संपन्न संसदीय चुनावों के पश्चात् इस सप्ताह की शुरूआत में किर्गिस्तान में सडकों पर विरोध प्रदर्शन प्रारम्भ हो गए। विपक्ष का आरोप है कि मतदान में धांधली की  गयी थी।

प्रमुख बिंदु:

  • इसे प्रायः ‘मध्य एशिया के एकमात्र लोकतंत्र’ के रूप में भी जाना जाता है।
  • राजधानी- बिश्केक।
  • यह एक भूआबद्ध मध्य एशियाई देश है।
  • यह चीन के साथ एक लंबी सीमा साझा करता है।
  • चीन ने किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ सड़क एवं रेल नेटवर्क का निर्माण किया है।
  • यह रूस के नेतृत्व वाली “सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन” का एक सदस्य है और यहाँ एक रूसी एयर बेस स्थित है।

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 राष्ट्रीय तितली:

 राष्ट्रीय तितली की पहचान करने सम्बन्धी एक नागरिक सर्वेक्षण में तितली की तीन प्रजातियों को सर्वाधिक मत प्राप्त हुए। वे हैं:

  1. कृष्णा पीकॉक (पैपिलिओ कृष्णा)
  2. इंडियन जेज़ेबल (डेलिअस यूचेरिस)
  3. ऑरेंज ओकलीफ़ (कलीमा इनक्यूस)

 इन सभी में अनूठी विशेषताएं भी पायी जाती हैं, जैसे कि एक मृत पत्ती के रूप में छलावरण करने की क्षमता, शिकारियों से बचने के लिए सप्तवर्णीय प्रदर्शन एवं कीटों से छुटकारा पाने में किसानों की सहायता करना।

 पृष्ठभूमि: 50 तितली विशेषज्ञों और उत्साही लोगों के एक समूह “राष्ट्रीय तितली अभियान कंसोर्टियम” द्वारा राष्ट्रव्यापी मतदान का आयोजन किया गया था।

 आगे क्या?

आयोजक इन शीर्ष तीन तितलियों के नाम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंप देंगे। यह केंद्र सरकार का दायित्व है कि वह उन तीनों में से किसी एक को चुनकर उसे बंगाल टाइगर, भारतीय मोर, भारतीय कमल, बरगद और आम के समान ही एक और राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में शामिल करे।

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 2+2 वार्ता:

  • यह संवाद का एक प्रारूप है, जिसमें एक देश के रक्षा और विदेश मंत्री अथवा सचिव दूसरे देश के अपने समकक्षों के साथ परस्पर मिलते हैं। 2 + 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता दोनों देशों के मध्य उच्चतम स्तर का संस्थागत तंत्र है।
  • भारत, ऑस्ट्रेलिया के साथ विदेश सचिव एवं रक्षा सचिव स्तर पर लेकिन जापान और अमेरिका के साथ मंत्री स्तर पर इस प्रकार की वार्ता करता है।

मारु मणि:

  • यह एक अनूठा और अभिनव सोशल मीडिया अभियान है।
  • “मारू मणि” का अर्थ है- मरुभूमि का गहना।
  • इसे एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्‍यूनिकेशन, नई दिल्ली के सहयोग से जयपुर स्थित एक मीडिया कम्युनिकेशन संस्था-लोक संवाद संस्थान द्वारा प्रारम्भ किया गया है।
  • यह अभियान राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों के प्रसिद्ध संगीतकारों (विशेषरूप से पश्चिमी राजस्थान के लंगा-मांगणियार लोक कलाकारों) के लिए वित्तीय सहायता जुटाने का प्रयास करता है, जो लंबे समय तक कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

गरबा:

समाचारों में क्यों?

गुजरात सरकार ने नवरात्रि के दौरान गरबा पर प्रतिबन्ध लगा दिया है।

गरबा के बारे में:

  • यह गुजरात का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। गरबा का अर्थ है “गरबा दीप” जो एक मिट्टी का छिद्रयुक्त बर्तन होता है।
  • यह एक वृत्ताकार रूप में किया जाने वाला नृत्य है, जिसे लयबद्ध ताली बजाते हुए ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • इसे नवरात्रि, शरद पूर्णिमा, वसंत पंचमी, होली और अन्य त्योहार के अवसरों पर किया जाता है।

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पशु एवं पादप खोज 2019:

2007 से ही भारतीय प्राणी सर्वेक्षण एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण दोनों ही क्रमशः “पशु खोज” एवं “पादप खोज” जारी कर रहे हैं।

  • पशु खोज 2019 में 368 नवीन पशु प्रजातियों एवं भारत में पहली बार देखी जाने वाली 116 प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है।
  • पादप खोज 2019 में 180 नवीन पादप प्रजातियों एवं देश में पहली बार देखी जाने वाली 73 प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है।

नवीनतम संस्करणों में महत्वपूर्ण प्रजातियां:

  1. चट्टानों में रहने वाली घरेलू छिपकली (Cnemaspis anandani)- पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजाति।
  2. झारखंड के खेतों में खोजे गए बुरोइंग मेंढक (Sphaerotheca magadha)
  3. तवांग से एक गोबर में पाया जाने वाला एक झींगुर (Enoplotrupes tawangensis) खोजा गया ।
  4. नागालैंड में कोहिना चिड़ियाघर के पीछे स्थित जंगल से एक जंगली अदरक की किस्म (Amomum nagamiense) की खोज की गयी।
  5. एक जंगली फर्न (Pteris subiriana) न केवल केरल में बल्कि तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी पाया गया।

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