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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 October

विषय- सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. विधायिका के विशेषाधिकारों का उल्लंघन

 

सामान्य अध्ययन-III

 1. एडिशनल टियर-1 बॉन्ड क्या हैं?

2. बासमती चावल को विशिष्ट भौगोलिक संकेतक टैग देने के भारत के आवेदन को यूरोपीय संघ में चुनौती देगा पाकिस्तान

3. भौतिकी में नोबेल पुरस्कार 2020

4. दिल्ली सरकार खेतों में पराली दहन को रोकने के लिए दिल्ली सरकार बायो-डिकंपोजर का छिड़काव करेगी

  

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

 1. उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट (HSRP) क्या है?

2. क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) क्या है?

3. “गुप्कर घोषणाक्या है?

4. राष्ट्रीय स्टार्ट-अप पुरस्कार 2020 की घोषणा

5. वन्यजीव सप्ताह

6. कवच (CAWACH)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संसद एवं राज्य विधानमंडल- संरचना, कार्यप्रणाली, कार्यों का संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले मुद्दे

विधायिका के विशेषाधिकारों का उल्लंघन:


सन्दर्भ:

फेसबुक इंडिया के VP और MD अजीत मोहन एवं फेसबुक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के अनुसरण में प्रस्तुत किये गए एक हलफनामे में दिल्ली विधानसभा ने कहा कि मोहन को विशेषाधिकार उलंघन के सन्दर्भ में कोई समन जारी नहीं किया गया है।

  • दिल्ली विधानसभा ने कहा, उसे केवल शांति और सद्भाव समिति द्वारा उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के संबंध में एक गवाह के रूप में बुलाया गया था।

क्या न्यायालय ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है?

न्यायालयों में विधानमंडल की कार्यवाही की जांच नहीं की जा सकती है और सदस्य अथवा पीठासीन अधिकारी, जिसमें सदन की कार्यवाही की प्रक्रिया अथवा आचरण को विनियमित करने की शक्ति निहित है, को अपनी शक्तियों का उपयोग करने के सम्बन्ध में न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।

आधारभूत ज्ञान:

संविधान के कौन से प्रावधान विधायिका के विशेषाधिकारों की रक्षा करते हैं?

भारतीय संसद के दोनों सदन और उसके सदस्यों और समितियों की शक्तियों, विशेषाधिकार और उन्मुक्तता का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 105 में किया गया है।

  • इसी प्रकार, अनुच्छेद 194 राज्य विधानमंडलों, उनके सदस्यों और उनकी समितियों की शक्तियों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तताओं से संबंधित है।

विशेषाधिकारों का उल्लंघन क्या है?

विशेषाधिकारों का उल्लंघन एवं इसके लिए सजा निर्धारित करने के लिए कोई स्पष्ट, अधिसूचित नियम नहीं हैं।

  • सामान्यतः कोई भी कार्य जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन को उसके कार्यों के निष्पादन में बाधा डालता है, अथवा जो ऐसे सदन के किसी भी सदस्य या अधिकारी के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा पहुँचाता है या उन्हें रोकता है, विशेषाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
  • सदन के चरित्र अथवा उसकी कार्यप्रणाली अथवा उसकी समिति अथवा उसके सदस्यों के चरित्र या विधायक के रूप में उसके आचरण को दर्शाने वाला भाषण देना या परिवाद छापना या प्रकाशित करना भी सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन एवं सदन की अवमानना ​माना जायेगा।

विधायिका के विशेषाधिकारों के कथित उल्लंघन के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है?

  • विधान सभा अध्यक्ष या विधान परिषद सभापति एक विशेषाधिकार समिति का गठन करता है।
  • समिति के सदस्यों को सदनों में उपस्थित राजनीतिक दलों के सदस्यों की संख्या के आधार पर नामित किया जाता है।
  • सर्वप्रथम अध्यक्ष या सभापति प्रस्तावों पर निर्णय लेते हैं।
  • यदि विशेषाधिकार और अवमानना ​​को प्रथम दृष्टया पाया जाता है, तो अध्यक्ष या सभापति नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे विशेषाधिकार समिति को भेज देंगे।
  • समिति इस बात की जांच करेगी कि उसके द्वारा दिए गए बयानों से राज्य विधायिका और उसके सदस्यों का अपमान हुआ था या नहीं, और क्या जनता के सामने उनकी छवि खराब हुई थी।
  • अर्ध-न्यायिक शक्तियां प्राप्त यह समिति सभी संबंधितों से स्पष्टीकरण की मांग करेगी, उनकी जांच करेगी और निष्कर्षों के आधार पर राज्य विधायिका को उसके विचारार्थ एक सिफारिश करेगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संविधान के कौन से प्रावधान विधायिका के विशेषाधिकारों की रक्षा करते हैं?
  2. विधायिका के विशेषाधिकार के उल्लंघन के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है?
  3. संसद और राज्य विधानमंडलों में विशेषाधिकार समितियों की रचना और कार्य।
  4. विधायिका के विशेषाधिकार का हनन करने वाले दोषी व्यक्ति के लिए क्या सजा है?
  5. क्या राज्य विधानमंडलों के विशेषाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकते हैं?

मेंस लिंक:

विधायी विशेषाधिकारों से आपका क्या तात्पर्य है? भारत में समय-समय पर देखे जाने वाली विधायी विशेषाधिकारों की समस्या पर चर्चा कीजिए

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधनों को जुटाने, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

 एडिशनल टियर-1 बॉन्ड क्या हैं?


सन्दर्भ:

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एडिशनल टियर -1 बॉन्ड अथवा AT-1 बॉन्ड से सम्बंधित अपने नियमों को कठोर बनाया है और यह सुनिश्चित किया है कि ये जोखिमपूर्ण उपकरण खुदरा निवेशकों के लिए कम अभिगम्य हों।

क्या परिवर्तन किए गए हैं?

  • बैंक केवल इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर ही ये बॉन्ड जारी कर सकते हैं।
  • केवल संस्थागत निवेशक ही उनकी सदस्यता ग्रहण कर सकते थे।
  • न्यूनतम आवंटन आकार और ट्रेडिंग लॉट आकार 1 करोड़ रुपये होगा।

(एक संस्थागत निवेशक एक कंपनी अथवा संगठन होता है, जो अन्य लोगों की ओर से धन का निवेश करता है। म्यूचुअल फंड, पेंशन और इंश्योरेंस कंपनियां इसके उदाहरण हैं।)

आधारभूत ज्ञान:

एडिशनल टियर-1 बॉन्ड क्या हैं?

बेसल III मानदंडों के अंतर्गत, बैंकों की नियामक पूंजी को टियर 1 और टियर 2 पूंजी में विभाजित किया गया है।

  • टियर 1 पूंजी को आगे कॉमन इक्विटी (CET) एवं अतिरिक्त पूंजी (AT1) में विभाजित किया गया है।

AT1 बॉन्ड एक प्रकार के असुरक्षित एवं स्थायी बांड हैं, जिन्हें बेसल- III मानदंडों को पूरा करने के लिए बैंक द्वारा अपने मुख्य पूंजी आधार को सशक्त बनाने के लिए जारी किया जाता है।

प्रमुख विशेषताऐं:

  • इनकी दर टियर II बॉन्ड की तुलना में अधिक होती है।
  • इनकी कोई परिपक्वता तिथि नहीं होती है।
  • जारीकर्ता बैंक के पास यह विकल्प होता है कि वे निर्दिष्ट अवधि के पश्चात बॉन्ड को वापस ले सकते हैं अथवा मूलधन का भुगतान कर सकते हैं।
  • निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण यह है कि सुरक्षित बॉन्ड की तुलना में AT1 बॉन्ड पर अधिक प्रतिफल प्राप्त होता है।
  • व्यक्तिगत निवेशक भी इन बॉन्ड को प्राप्त कर सकते हैं लेकिन अधिकांशतः उच्च निवल मूल्य (नेटवर्थ) वाले व्यक्ति ही ऐसे उच्च जोखिम, उच्च प्रतिफल वाले निवेश का चुनाव करते हैं।
  • उच्च जोखिम को देखते हुए, इन बॉन्ड की रेटिंग एक ही बैंक द्वारा जारी किये गए सुरक्षित बॉन्ड श्रृंखला की तुलना में एक से चार अंक कम होती है।

हालांकि, इसप्रकार के बॉन्ड से सम्बंधित दो प्रमुख जोखिम हैं:

  • प्रथम, जारीकर्ता बैंक को कूपन भुगतान न करने का विवेकाधिकार प्राप्त है। सामान्य परिस्थितियों में जब ब्याज का भुगतान करना आवश्यक हो, तो यह उस अवधि के लिए हानि की स्थिति में भी लाभ अथवा राजस्व भंडार से भुगतान कर सकता है।
  • द्वितीय, बैंक के लिए यह आवश्यक होता है कि वह 5.5% का एक कॉमन इक्विटी टियर- 1 अनुपात बनाए रखे, जिसमें विफल होने की दशा में बॉन्ड को अवलेखित किया जा सकता है। कुछ मामलों में इक्विटी में परिवर्तित करने का एक क्लॉज़ हो सकता है।

इन विशेषताओं के कारण, AT 1 बॉन्ड को क्वासी-इक्विटी के रूप में भी संदर्भित किया जाता है।

कॉमन इक्विटी (CET) एवं अतिरिक्त पूंजी (AT1) के मध्य अंतर:

इक्विटी और वरीयता पूंजी को कॉमन इक्विटी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है एवं स्थायी बॉन्ड को AT1 के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

  • कॉमन इक्विटी बैंक की इक्विटी पूंजी होती है, जिसमें रिटर्न, बैंकों के निष्पादन से और इसप्रकार शेयर की कीमत के निष्पादन से सम्बद्ध होता है।
  • हालांकि, AT1 बॉन्ड प्रकृति में ऋण उपकरण होते हैं, जो बैंक के विगत अथवा वर्तमान लाभ से प्रतिवर्ष देय एक निश्चित कूपन प्राप्त करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बेसल मानदंड 1 बनाम 2 बनाम 3
  2. कॉमन इक्विटी बनाम AT1
  3. टियर 1 बनाम टियर 2 पूंजी
  4. प्वाइंट ऑफ नॉन-विजिबिलिटी ट्रिगर ‘(PONV)
  5. बैंकों के संकट के समय RBI की भूमिका

मेंस लिंक:

बेसल मानदंडों पर एक लेख लिखिए।

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित मुद्दे।

बासमती चावल को विशिष्ट भौगोलिक संकेतक टैग देने के भारत के आवेदन को यूरोपीय संघ में चुनौती देगा पाकिस्तान:

 सन्दर्भ:

पाकिस्तान ने बासमती चावल को विशिष्ट भौगोलिक संकेतक (GI) टैग देने के लिए भारत द्वारा किये गए आवेदन के प्रतिउत्तर में यूरोपीय संघ में अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय किया है।

पाकिस्तान, यूरोपीय संघ की ओर रुख क्यों कर रहा है? इस संबंध में क्या प्रावधान हैं?

पाकिस्तान ने इस वर्ष मार्च में भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम का निर्माण किया है, जो इसे अधिकार प्रदान करता है कि वह बासमती चावल के विशिष्ट अधिकार के पंजीकरण के लिए भारतीय आवेदन का विरोध कर सके।

जबकि भारत ने 11 सितंबर को यूरोपीय संघ की आधिकारिक पत्रिका में प्रकाशित अपने आवेदन में कहा है कि यह एक भारतीय मूल का उत्पाद है।

  • यूरोपीय संघ की आधिकारिक पत्रिका के अनुसार, यूरोपीय संसद एवं कृषि उत्पादों और खाद्य पदार्थों के लिए गुणवत्ता योजनाओं पर परिषद के विनियम (EU) के अनुच्छेद 50 के अनुसरण में कोई भी देश प्रकाशन की तिथि से 3 माह के अंदर- अंदर किसी नाम के पंजीकरण से सम्बंधित आवेदन का विरोध कर सकता है।

पाकिस्तान के दावे:

पाकिस्तान ने कहा कि वह बासमती चावल का एक बड़ा उत्पादक देश है और विशिष्टता के लिए भारत का आवेदन अनुचित है।

पृष्ठभूमि:

मई 2010 में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू- कश्मीर के कुछ भागों में उगाए जाने वाली बासमती चावल को भौगोलिक संकेतक का दर्जा दिया गया था।

आधारभूत ज्ञान:

भौगोलिक संकेतक टैग के बारे में:

भौगोलिक संकेतक मुख्य रूप से एक कृषि, प्राकृतिक या एक विनिर्मित उत्पाद (हस्तशिल्प एवं औद्योगिक वस्तु) है, जिसे एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित किया जाता है।

  • आदर्श रूप में, ऐसा नाम गुणवत्ता और विशिष्टता का आश्वासन देता है, जो की आवश्यक रूप से इसके मूल स्थान की विशिष्टता के लिए उत्तरदायी होता है।

भौगोलिक संकेतक टैग के क्या लाभ हैं?

एक बार भौगोलिक संकेतक सुरक्षा प्राप्त हो जाने के बाद कोई अन्य निर्माता इसी प्रकार के उत्पादों को बाजार में लाने के लिए इसके नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकता है। यह ग्राहकों को उस उत्पाद की प्रामाणिकता के सन्दर्भ में भी आश्वासन प्रदान करता है।

भौगोलिक संकेतक का एक पंजीकृत स्वत्वधारी कौन होता है?

  • व्यक्तियों अथवा निर्माताओं का कोई समूह, संगठन अथवा कानून के द्वारा या कानून के तहत स्थापित कोई भी संस्था एक पंजीकृत स्वत्वधारी हो सकती है।
  • उनका नाम सम्बंधित भौगोलिक संकेतक के स्वत्वधारी के रूप में भौगोलिक संकेतक रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए।

भौगोलिक संकेतक का पंजीकरण कब तक वैध होता है?

  • एक भौगोलिक संकेतक का पंजीकरण 10 वर्ष की अवधि के लिए वैध होता है।
  • इसे प्रत्येक 10 वर्षों की अवधि के लिए समय-समय पर नवीनीकृत किया जा सकता है।

भौगोलिक संकेतक प्रदान करना एवं उन्हें विनियमित करने का कार्य कौन करता है?

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर: औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण के लिए पेरिस अभिसमय के अंतर्गत भौगोलिक संकेतक को बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के एक घटक के रूप में परिभाषित किया गया है। भौगोलिक संकेतक को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के “बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधी पहलुओं पर समझौता” (TRIPS) द्वारा भी अधिशासित किया जाता है।

भारत में, भौगोलिक संकेतक पंजीकरण को वस्‍तुओं के भौगोलिक चिन्ह (पंजीकरण और सुरक्षा) अधिनियम, 1999” द्वारा अधिशासित किया जाता है, जो सितंबर 2003 से प्रभाव में आया। भारत में भौगोलिक संकेतक टैग प्राप्त करने वाला प्रथम उत्पाद दार्जिलिंग चाय था, जिसे यह दर्जा 2004-05 में दिया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भौगोलिक संकेतक टैग क्या है?
  2. इसे कौन प्रदान करता है?
  3. भारत में भौगोलिक संकेतक का दर्जा प्राप्त उत्पाद और उनके भौगोलिक स्थान।
  4. अन्य बौद्धिक संपदा अधिकार
  5. यूरोपीय संघ क्या है? इसके अंतर्गत विभिन्न संस्थान।

मेंस लिंक:

भौगोलिक संकेतक (GI) टैग क्या है? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: सूचना एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित मुद्दे।

 भौतिकी में नोबेल पुरस्कार 2020:


सन्दर्भ:

भौतिकी के क्षेत्र में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक रोजर पेनरोज़, रेनहर्ड गेनजेल एवं एंड्रिया गेज़ को संयुक्त रूप से दिया जायेगा। उन्हें यह पुरस्कार ब्लैक होल से सम्बंधित ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए दिया जायेगा।

 आधारभूत ज्ञान:

ब्लैक होल क्या हैं?

तारों के टूटने के फलस्वरूप एक ब्लैक होल का निर्माण होता है और इसे ब्रह्मांड में एक ऐसे स्थान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जहाँ पलायन वेग इतना अधिक सशक्त होता है कि प्रकाश भी इससे पलायन नहीं सकता है।

  • पलायन वेग किसी पिंड की गति की वह अधिकतम मात्रा है, जिस पर वह पिंड किसी ग्रह अथवा किसी पिंड के गुरुत्वाकर्षण बल को पार करने में सक्षम होता है।

 ब्लैकहोल की मुख्य विशेषताएं:

  • चूंकि इससे प्रकाश बाहर नहीं निकल सकता है, इसलिए ब्लैक होल अदृश्य होते हैं और उन्हें केवल अंतरिक्ष दूरदर्शी अथवा अन्य विशेष उपकरणों की सहायता से ही ट्रैक किया जा सकता है।
  • प्रकाश ब्लैकहोल से पलायन नहीं कर सकता है क्योंकि ब्लैक होल के अंदर का गुरुत्वाकर्षण बहुत शक्तिशाली होता है, जिसके परिणामस्वरूप बहुत सारे पदार्थ एक छोटे से स्थान में ही एकत्रित हो जाते हैं।

 पुरस्कार विजेताओं के कार्य हमें ब्लैक होल के बारे में क्या बताते हैं?

  • पेनरोज़: उन्होंने खोज की कि “ब्लैक होल का निर्माण सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का सीधा परिमाण है।”
  • गेनजेल और गेज़: उन्होंने आकाशगंगा के केंद्र में एक “विशाल- अदृश्य ऑब्जेक्ट” की खोज की, जिसे अब सैगिटैरिस- ए, एक विशाल ब्लैक होल के रूप में जाना जाता है। इसका भार सूर्य के भार से चार मिलियन गुना अधिक है और इसका क्षेत्र हमारे सौर मंडल के आकार के लगभग एक क्षेत्र तक सीमित है।

 प्रारंभिक परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु:

  • सैगिटैरिस-ए: दो ब्लैक होल में से एक है, जिसकी तस्वीरों को इवेंट होराइज़न दूरदर्शी परियोजना द्वारा खींचा गया है।
  • ब्लैक होल कुछ भी उत्सर्जित या विकीर्ण नहीं करते हैं, यहाँ तक कि प्रकाश भी। इसलिए, उनकी तस्वीर खींचने का कोई माध्यम नहीं है। लेकिन इसकी सीमा के ठीक बाहर का क्षेत्र, जिसे इवेंट होराइज़न कहा जाता है, में भारी मात्रा में गैस, बादल और प्लाज़्मा उपस्थित होते हैं। यह सभी प्रकार के विकिरणों, यहाँ तक कि दृश्य प्रकाश का भी उत्सर्जन करता है।

 भौतिकी में नोबेल पुरस्कार के बारे में:

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

यह 1895 में अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के माध्यम से स्थापित पांच नोबेल पुरस्कारों में से एक है और यह पुरस्कार 1901 से प्रदान किया जा रहा है।

  • भौतिकी में पहला नोबेल पुरस्कार भौतिक विज्ञानी विलहम कॉनरैड रॉटजन को एक्स-रे की खोज के माध्यम से प्रदान की गई असाधारण सेवाओं के लिए प्रदान किया गया था।

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 प्रीलिम्स लिंक: 

  1. ब्लैक होल क्या हैं?
  2. अक्सर समाचारों में रहने वाला सैगिटैरिस- ए क्या है?
  3. पलायन वेग क्या है?
  4. इवेंट होराइज़न क्या है?
  5. भौतिकी में नोबेल पुरस्कार किसके द्वारा दिया जाता है?

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।

दिल्ली सरकार खेतों में पराली दहन को रोकने के लिए दिल्ली सरकार बायोडिकंपोजर का छिड़काव करेगी

सन्दर्भ:

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि दिल्ली सरकार पराली दहन को रोकने के लिए 11 अक्टूबर से पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार किए गए बायो-डिकंपोजर घोल का छिड़काव प्रारम्भ करेगी।

योजना क्या है?

  • पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने बायो-डिकंपोजर युक्त कैप्सूल विकसित किए हैं।
  • इन कैप्सूल को एक घोल में मिलाया जाता है।
  • जब इसका छिड़काव खेतों पर किया जाता है, तो यह पराली के तने को गला देता है एवं इसे खाद में परिवर्तित कर देता है। इससे भूमि की उर्वरता में वृद्धि होती है एवं उर्वरक के उपयोग में कमी आती है।
  • दिल्ली सरकार किसानों को यह घोल मुफ्त में प्रदान करेगी और खेतों में इसका छिड़काव करेगी।
  • यह घोल पराली को जलाये बिना उसके निपटान में सहायक सिद्ध होगा।

इन बायो-डिकंपोजर का निर्माण कैसे किया गया?

पूसा डिकंपोजर सात कवकों का मिश्रण है, जो धान के पुआल में उपस्थित सेल्युलोज, लिग्निन और पेक्टिन के पाचन के लिए एंजाइम का उत्पादन करता है।

  • कवक का विकास 30-32 डिग्री सेल्सियस तापमान पर होता है, जो धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के समय प्रचलित तापमान होता है।

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् ने इस प्रौद्योगिकी का व्यवसायीकरण कर दिया है। इसने छह कंपनियों को लाइसेंस प्रदान किया है।

स्रोत: द हिन्दू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट (HSRP) क्या है? 

  • वे एल्यूमीनियम से निर्मित होती हैं, जिन्हें कम से कम दो गैर-पुन: प्रयोज्य स्नैप-ऑन लॉक का उपयोग करके चिपकाया जाता है।
  • प्लेट में शीर्ष बाएं कोने पर नीले रंग में गर्म मुहरबंद क्रोमियम आधारित 20 X 20 मिमी होलोग्राम का अशोक चक्र चिन्हित होता है।
  • निचले बाएँ कोने में एक 10-अंकीय स्थायी पहचान संख्या (पिन) होती है, जो कि परावर्तक शीट पर लेजर. द्वारा निर्मित की जाती है।
  • HSRP में 45 डिग्री के कोण पर उत्कीर्ण “INDIA” पर अंकित अंकों और अक्षरों की एक फिल्म भी शामिल होती है।
  • एक बार चिपका दिए जाने के बाद, अद्वितीय उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट को इलेक्ट्रॉनिक रूप से वाहन से जोड़ दिया जाता है।

 लाभ:

  • HSRP में गैर-पुन: प्रयोज्य स्नैप-ऑन लॉक का उपयोग किया जाता है। इसकारण इसे परिवर्तित करना मुश्किल होता है।
  • HSRP को ऑटोमोबाइल डीलर और राज्य प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित निजी विक्रेताओं द्वारा चिपकाया जाता है।
  • ये प्लेट वाहन के मालिक द्वारा इंजन नंबर, चेसिस नंबर जैसी जानकारी प्रदान करने के बाद ही जारी की जाती हैं। यह उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेटों के जालसाजी को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • एक कार का विवरण जैसे इंजन नंबर, चेसिस नंबर आदि को एक केंद्रीकृत डेटाबेस में संग्रहीत किया जाता है। यह सूचना 10 अंकों के पिन के साथ, अधिकारियों को एक चोरी हुए वाहन की पहचान करने में सहायता करती है।
  • HSRP में मोटर वाहन पंजीकरण संख्या प्रदर्शित करने का एक समान पैटर्न होता है, इसलिए यह ‘अबोध्य’ वाहन पंजीकरण प्लेटों के मुद्दे को संबोधित करता है।

 क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) क्या है?

क्रय प्रबंधक सूचकांक, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधि का एक संकेतक है।

यह एक सर्वेक्षण-आधारित प्रणाली है, जो उत्तरदाताओं से गत माह की तुलना में प्रमुख व्यावसायिक चर के सन्दर्भ में उनकी धारणा में बदलाव के बारे में पूछती है।

PMI को 0 से 100 तक के सूचकांक पर मापा जाता है:

  • PMI का मान 50 से अधिक होने पर यह गत माह की तुलना में व्यावसायिक गतिविधि में विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है।
  • PMI का मान 50 से कम होने पर यह व्यावसायिक गतिविधि में संकुचन अथवा गिरावट को दर्शाता है, और
  • PMI का मान 50 होने पर यह कोई परिवर्तन नहीं दर्शाता है।

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गुप्कर घोषणाक्या है?

अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से पूर्व 4 अगस्त, 2019 को प्रथम गुप्कर घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए थे।

22 अगस्त, 2020 को जम्मू और कश्मीर के छह राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के विरुद्ध सामूहिक रूप से लड़ने के लिए गुप्कर घोषणा II’ नामक एक वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए।

  • इन छह दलों ने संयुक्त रूप से जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को परिवर्तित करने के केंद्र के निर्णय को ‘असंवैधानिक’ बताया।

राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कार 2020 की घोषणा:

उद्योग और आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग (DPIIT) द्वारा प्रारम्भ किया गया था।

  • प्रथम संस्करण में 12 क्षेत्रों में आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिन्हें 35 श्रेणियों में उप-वर्गीकृत किया गया था।
  • 12 क्षेत्रों में कृषि, शिक्षा, उद्यम प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, वित्त, खाद्य, स्वास्थ्य, उद्योग 4.0, अंतरिक्ष, सुरक्षा, पर्यटन एवं शहरी सेवाएं शामिल हैं।

पुरस्कार:

  • विजेता स्टार्ट-अप को संभावित पाइलेट परियोजनाओं और कार्य आदेशों के लिए प्रासंगिक सार्वजनिक प्राधिकरणों और कॉरपोरेट्स के समक्ष अपने समाधान प्रस्तुत करने के अवसरों के साथ-साथ 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा।
  • एक असाधारण इनक्यूबेटर और एक एक्सीलरेटर, प्रत्येक को 15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा।

वन्यजीव सप्ताह:

भारत के जीवों के संरक्षण की दृष्टि से प्रत्येक वर्ष 2 से 8 अक्टूबर तक सम्पूर्ण देश में आयोजित किया जाता है।

  • सर्वप्रथम 1952 में अवधारित किया गया था। वन्यजीव सप्ताह को मनाने के पीछे की विचारधारा भारत की पशु प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाना है।
  • 1955 में वन्यजीव दिवस मनाया गया था और 1957 में इसे वन्यजीव सप्ताह में परिवर्तित कर दिया गया।

2020 के लिए थीम: RoaR (Roar and Revive)- मानव-पशु संबंधों का अन्वेषण।

कवच (CAWACH):

द सेंटर फॉर ऑग्मेंटिंग वॉर विद कोविड-19 हेल्थ क्राइसिस (CAWACH) राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास बोर्ड (NSTEDB), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की एक पहल है।

  • CAWACH जैव सूचना विज्ञान और सूचना प्रबंधन प्रणाली सहित निदान, उपकरणों, सूचना विज्ञान के क्षेत्रों में नवाचार, COVID-19 के नियंत्रण के लिए कोई हस्तक्षेप और / या COVID-19 के गंभीर प्रभाव के कारण देश / समाज द्वारा सामना की जाने वाली विभिन्न चुनौतियों को समाप्त करने / उनका समाधान करने के लिए स्टार्ट- अप आइडिया का समर्थन करता है।
  • यह चयनित स्टार्ट-अप को 50 लाख रुपये से लेकर 200 लाख रूपये तक वित्त प्रदान करता है।


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