विषय- सूची
सामान्य अध्ययन-II
1. प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि)
2. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF)
सामान्य अध्ययन-III
1. कामथ पैनल की रिपोर्ट
2. 2020 नोबेल: तीन वैज्ञानिकों को मिला फिजियोलॉजी अथवा चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार
3. अमेज़न वर्षा वनों का 40% भाग सवाना बनने के कगार पर है
4. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
1. युद्ध प्रदूषण के विरूद्ध
2. राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संस्था (NADA)
3. महामारी संबंधी तैयारियों के नवाचारों के गठबंधन (CEPI)
4. स्मार्ट (SMART) मिसाइल
5. वायनाड-कोझिकोड टनल परियोजना प्रारम्भ की गयी
6. विश्व पर्यावास दिवस
7. Adjuvant क्या है?
8. डेयरिंग सिटीज सम्मेलन‘ 2020
सामान्य अध्ययन- II
विषय: सरकार की नीतियां एवं विभिन्न क्षेत्रों में विकास और उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दों के लिए हस्तक्षेप।
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि):
सन्दर्भ:
फूडटेक प्रमुख स्विगी (Swiggy) ने भारत के स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
- प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि अथवा पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत की गयी इस पहल से इन विक्रेताओं को अपने व्यवसाय को बढ़ाने में सहायता मिलेगी, जो कोविड- 19 महामारी के कारण अत्यधिक प्रभावित हुए थे एवं अभी भी संघर्ष कर रहे हैं।
योजना का अवलोकन:
- यह 50 लाख से अधिक ऐसे सड़क विक्रेताओं को 10,000 रूपये तक का सस्ता ऋण प्रदान करने से सम्बंधित एक विशेष सूक्ष्म-ऋण सुविधा योजना है, जो 24 मार्च 2020 को अथवा उससे पहले अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे थे।
- यह योजना मार्च 2022 तक वैध है।
- भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक तकनीकी साझेदार है।
- यह सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के माध्यम से ऋण संस्थानों को क्रेडिट गारंटी का प्रबंधन करेगा।
योजना के अंतर्गत ऋण:
इस योजना के अंतर्गत, विक्रेता 10,000 रूपये तक के कार्यशील पूंजी ऋण का लाभ उठा सकते हैं, जो एक वर्ष के भीतर मासिक किस्तों में चुकाने योग्य होगा।
ऋण का समय पर / जल्दी भुगतान करने पर, छह माह के आधार पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में 7% प्रति वर्ष की दर से ब्याज सब्सिडी जमा की जाएगी।
ऋण के समय से पूर्व पुनर्भुगतान पर कोई जुर्माना नहीं होगा।
पात्रता:
यह योजना विभिन्न क्षेत्रों / संदर्भों में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करने वाले वेंडर्स, हॉकर्स, फेरीवालों, ठेलावालों, रेहड़ीवालों आदि पर लागू होती है। आसपास के उप-शहरी / ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित स्ट्रीट वंडर्स को भी इसमें शामिल किया गया है।
प्रीलिम्स लिंक:
- योजना की वैधता का समय?
- कौन लागू करता है?
- योजना के तहत पात्रता?
- ब्याज की दर?
- SIDBI क्या है?
मेंस लिंक:
पीएम स्वनिधि योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्त्रोत: पीआईबी
विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियां और मंच, उनकी संरचना, जनादेश।
वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF):
सन्दर्भ:
FATF इस माह के अंत में होने वाली एक वर्चुअल बैठक में पाकिस्तान की ग्रे सूची स्थिति पर निर्णय लेने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।
- इसने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे सूची में शामिल किया था।
आधारभूत ज्ञान:
FATF के बारे में:
वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) G7 की पहल पर 1989 में स्थापित एक अंतर-सरकारी निकाय है।
- यह एक “नीति-निर्माण निकाय” है, जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय विधायी और नियामक सुधार लाने के उद्देश्य से आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति उत्पन्न करने के लिए कार्य करता है।
- FATF का सचिवालय पेरिस में आर्थित सहयोग एवं विकास संगठन के मुख्यालय में स्थित है।
भूमिकाएँ एवं कार्य:
- प्रारंभ में इसे मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के उपायों की जांच करने एवं उनका विकास के लिए स्थापित किया गया था।
- अक्टूबर 2001 में FATF ने मनी लांड्रिंग के अलावा आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने के प्रयासों को शामिल करने के लिए अपने जनादेश का विस्तार किया।
- अप्रैल 2012 में इसने सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के वित्तपोषण का मुकाबला करने के प्रयासों को अपने जनादेश में जोड़ा।
संरचना:
वर्तमान में FATF में 37 सदस्य राष्ट्र एवं 2 क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं, जो विश्व के सभी भागों में सबसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें पर्यवेक्षक और सहयोगी सदस्य भी हैं।
उद्देश्य:
मानकों का निर्धारण करना एवं अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के समक्ष मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण एवं अन्य संबंधित खतरों से निपटने के लिए कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देना।
ब्लैक सूची और ग्रे सूची क्या है?
ब्लैक सूची: गैर-सहयोगी देश अथवा क्षेत्र (NCCT) के रूप में पहजाने जाने वाले देशों को ब्लैक सूची में शामिल किया जाता है। ये देश आतंकवादी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का समर्थन करते हैं। प्रविष्टियों को जोड़ने अथवा हटाने के लिए FATF नियमित रूप से ब्लैक सूची को संशोधित करता है।
ग्रे सूची: जिन देशों को आतंकवादी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग का समर्थन करने के लिए सुरक्षित माना जाता है, उन्हें FATF की ग्रे सूची में शामिल किया जाता है। यह समावेशन सम्बंधित देश के लिए एक चेतावनी के रूप में कार्य करता है कि उसे ब्लैक सूची में शामिल किया जा सकता है।
ग्रे सूची में शामिल देश निम्नलिखित समस्याओं का सामना कर सकते हैं:
- IMF, विश्व बैंक, ADB से आर्थिक प्रतिबंध
- IMF, विश्व बैंक, ADB एवं अन्य देशों से ऋण प्राप्त करने में समस्या
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी
- अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार
प्रीलिम्स लिंक:
- G7 बनाम G8 बनाम G20
- ब्लैक बनाम ग्रे सूची
- क्या FATF के निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं?
- FATF का प्रमुख कौन है?
- इसका सचिवालय कहाँ है?
मेंस लिंक:
वित्तीय कार्रवाई कार्य बल का जनादेश और उद्देश्य क्या हैं? भारत – पाकिस्तान संबंधों के लिए इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू
सामान्य अध्ययन- III
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।
कामथ पैनल की रिपोर्ट:
सन्दर्भ:
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक से कोविड-19 महामारी से प्रभावित क्षेत्रों को बेल आउट प्रदान करने से सम्बंधित अनुशसाओं पर के. वी. कामथ समिति की रिपोर्ट को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछा।
पृष्ठभूमि:
न्यायालय में विभिन्न रिट याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें उन छोटे एवं बड़े उधारकर्ताओं की दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया है, जिनसे महामारी मोरेटरियम की अवधि (जो 31 अगस्त को समाप्त हो चुकी है) के पश्चात चक्रवृद्धि ब्याज वसूला जा रहा था।
समिति का गठन कब हुआ था?
इस वर्ष अगस्त माह में RBI द्वारा के. वी. कामथ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी से प्रभावित ऋणों का पुनर्गठन करना था।
- इस समिति को कॉर्पोरेट ऋणों के एक-बार पुनर्गठन के लिए मापदंडों की अनुशंसा करने का कार्य सौंपा गया था।
समिति द्वारा की गई प्रमुख अनुशंसाएं:
- उधारकर्ताओं पर प्रभाव की गंभीरता के आधार पर तनावग्रस्त खातों के पुनर्गठन के लिए श्रेणीकृत दृष्टिकोण– समिति द्वारा प्रदान की गयी अनुशंसाओं के आधार पर बैंक खातों को अल्प, मध्यम एवं गंभीर तनावग्रस्त खातों में वर्गीकृत कर सकते हैं।
- मुश्किलों का सामना कर रहे क्षेत्रों के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए पाँच वित्तीय मापदंड- कुल बाहरी देनदारियों एवं समायोजित वास्तविक नेटवर्थ का अनुपात, ब्याज से पहले कुल कर्ज एवं आय का अनुपात, कर, मूल्यह्रास, एवं परिशोधन (Ebitda), ऋण सेवा कवरेज अनुपात (DSCR), वर्तमान अनुपात एवं औसत ऋण सेवा कवरेज अनुपात (ADSCR)।
- ऑटो, विमानन, निर्माण, आतिथ्य, विद्युत्, रियल एस्टेट और पर्यटन सहित 26 क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है।
इन सिफारिशों की प्रयोज्यता:
- समिति को 1500 करोड़ रूपये से अधिक के ऋणों के पुनर्गठन की जांच करनी थी।
- इस ढांचे के अंतर्गत समाधान केवल उन उधारकर्ताओं के लिए लागू होता है, जिन पर कोविड महामारी का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
- इन ढांचे के अंतर्गत केवल वे ही उधारकर्ता पात्र होंगे, जिन्हें मानक के रूप में वर्गीकृत किया गया था और जिन पर 1 मार्च, 2020 तक 30 दिनों से कम का बकाया था।
ये उपाय क्यों आवश्यक थे? ऋण समस्या कितनी गंभीर क्यों है?
भारत के कोविड-19 से प्रभावित होने के पश्चात 15.52 लाख करोड़ रुपये का कॉरपोरेट क्षेत्र का ऋण तनावग्रस्त हो गया है, जबकि महामारी से पहले ही 22.20 लाख करोड़ रुपये का ऋण तनावग्रस्त था।
- इसका तात्पर्य है कि 37.72 करोड़ रुपये (उद्योग के लिए बैंकिंग क्षेत्र के ऋण का 72%) तनावग्रस्त है।
- यह कुल गैर-खाद्य बैंक ऋण का लगभग 37% है।
- इसके अतिरिक्त, खुदरा व्यापार, थोक व्यापार, सड़क और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में कंपनियों को तनाव का सामना करना पड़ रहा है। कोविड से पूर्व के तनावग्रस्त क्षेत्रों में एनबीएफसी, विद्युत्, इस्पात, रियल एस्टेट और निर्माण शामिल हैं।
प्रीलिम्स लिंक:
- एनबीएफसी क्या हैं?
- भुगतान बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के मध्य अंतर
- के.वी. कामथ समिति किससे संबंधित है?
- इसकी प्रमुख अनुशंसाएं
स्रोत: द हिन्दू
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं दैनिक जीवन में उनके अनुप्रयोग और प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण एवं नवीन तकनीक का विकास।
2020 नोबेल: तीन वैज्ञानिकों को मिला फिजियोलॉजी अथवा चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार:
सन्दर्भ:
हेपेटाइटिस- सी वायरस की खोज के लिए इस वर्ष का चिकित्सा अथवा फिजियोलॉजी का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी वैज्ञानिक हार्वे जे. ऑल्टर, चार्ल्स एम. राइस तथा ब्रिटिश वैज्ञानिक माइकल हॉटन को संयुक्त रूप से दिया गया है।
उनका योगदान:
- इन तीनों वैज्ञानिकों के कार्य से रक्त-जनित हेपेटाइटिस के एक प्रमुख स्रोत को समझने में सहायता मिली, जिसे हेपेटाइटिस-ए और बी वायरस द्वारा समझाया नहीं जा सकता था।
- उनकी खोज के कारण ही वायरस का अत्यधिक संवेदनशील रक्त परीक्षण अब उपलब्ध हो पाया है, जिससे विश्व के अनेक भागों में पोस्ट-ट्रांसफ्यूजन हेपेटाइटिस को समाप्त किया जाना एवं वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार संभव हुआ है।
- उनकी खोज ने हेपेटाइटिस- सी पर निर्देशित एंटीवायरल दवाओं के तेजी से उत्पादन की भी अनुमति दी।
आधारभूत ज्ञान:
हेपेटाइटिस- सी क्या है?
यह यकृत (लिवर) से सम्बंधित एक रोग है, जो हेपेटाइटिस- सी वायरस (HCV) के कारण उत्पन्न होता है। यह वायरस एक्यूट (तीक्ष्ण) एवं क्रोनिक (चिरकालिक) हेपेटाइटिस दोनों के लिए उत्तरदायी होता है। हेपेटाइटिस- सी, लिवर कैंसर का एक प्रमुख कारण होता है।
यह कैसे उत्पन्न होता है? प्रसार?
हेपेटाइटिस- सी वायरस एक रक्तजनित वायरस है। संक्रमण का सबसे सामान्य माध्यम रक्त की अल्प मात्रा के संपर्क में आना होता है।
उपचार:
एंटीवायरल दवाएं हेपेटाइटिस- सी से संक्रमित 95% से अधिक लोगों को ठीक कर सकती हैं, जिससे सिरोसिस और यकृत कैंसर से होने वाली मृत्यु का खतरा कम हो जाता है, लेकिन अभी भी निदान और उपचार तक पहुंच अत्यधिक कम है।
वर्तमान में हेपेटाइटिस- सी के लिए कोई भी प्रभावी टीका (वैक्सीन) उपलब्ध नहीं है; हालाँकि, इस क्षेत्र में अनुसंधान जारी है।
हेपेटाइटिस वायरस के प्रकार:
हेपेटाइटिस वायरस के 5 मुख्य ज्ञात प्रकार हैं, जिन्हें ए, बी, सी, डी और ई के रूप में संदर्भित किया जाता है।
- हेपेटाइटिस ए और ई सामान्यतः दूषित भोजन अथवा जल के अंतर्ग्रहण के कारण होते हैं।
- हेपेटाइटिस बी, सी और डी सामान्यतः संक्रमित शरीर से स्रावित तरल पदार्थों के संपर्क में आने के परिणामस्वरूप होते हैं।
चिकित्सा के नोबेल पुरस्कार के बारे में:
स्वीडन के स्टॉकहोम में स्थित कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
सर्वप्रथम 1901 में प्रदान किया गया था।
- पुरस्कार के निर्माता स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल द्वारा 124 वर्ष पूर्व छोड़ी गयी एक वसीयत के सौजन्य से 10 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (USD 1,118,000 से अधिक) की पुरस्कार राशि के साथ ही एक स्वर्ण पदक भी प्रदान किया जाता है।
कृपया ध्यान दीजिए:
हम आने वाले दिनों में नोबेल पुरस्कारों के बारे में और जानकारी प्रदान करेंगे।
क्योंकि, नोबेल पुरस्कारों में चिकित्सा के पुरस्कार की घोषणा सबसे पहले की जाती है। अन्य पुरस्कार भौतिकी, रसायन, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदान किये जाते हैं।
प्रीलिम्स लिंक:
- हेपेटाइटिस क्या है?
- हेपेटाइटिस ए, बी और सी के बीच अंतर।
- नोबेल पुरस्कारों के बारे में।
मेंस लिंक:
हेपेटाइटिस सी को वैश्विक स्वास्थ्य चिंता क्यों माना जाता है? चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिन्दू
विषय: संरक्षण से संबंधित मुद्दे
अमेज़न वर्षा वनों का 40% भाग सवाना बनने के कगार पर है:
सन्दर्भ:
नासा द्वारा चलाए जा रहे ग्लोबल फायर इमीशन डेटाबेस प्रोजेक्ट के अंतर्गत अमेजन वनों की स्थिति पर किये गए एक अध्ययन पर रिपोर्ट जारी की गई है।
प्रमुख निष्कर्ष:
- 2019 में अमेज़न क्षेत्र में लगी आग उनके विनाश में अभूतपूर्व थी। उस वर्ष अक्टूबर तक दावानल के कारण 7,600 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र जल चुका था। लेकिन, 2020 में अमेज़न में लगी आग, 2019 से भी भीषण थी।
- आग में वृद्धि के बावजूद, संभवतः COVID-19 महामारी के कारण 2020 में इस ओर अंतर्राष्ट्रीय ध्यान नहीं गया।
- 1970 के बाद से 2019 तक अमेज़न वन क्षेत्र का अनुमानित 17 प्रतिशत भाग स्पष्ट रूप से समाप्त अथवा जल गया है।
अब चिंताएं क्या हैं?
- वनों की कटाई के माध्यम से वर्षावन की भांति ही बायोमास का भी प्रवाह होता है। अतः वातावरण से कार्बन ग्रहण करने एवं दहन के परिणामस्वरूप कार्बन उत्सर्जित करने की इसकी क्षमता में कमी आती है।
- यदि अमेज़न को जलाने वाली वार्षिक आग पर काबू नहीं पाया जाता है, तो विश्व का सबसे बड़ा कार्बन सिंक उत्तरोत्तर रूप से एक कार्बन नलिका में परिवर्तित हो जायेगा, जिसके परिणाम स्वरुप अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होगी।
वन से अर्ध–शुष्क सवाना की ओर:
कई शोधकर्ताओं का यह अनुमान है कि वनों की कटाई के कारण अमेज़न वन उस कगार पर पहुँच गया है, जिसके आगे वह धीरे–धीरे एक अर्ध–शुष्क सवाना क्षेत्र में परिवर्तित हो जाएगा।
- यदि वर्षा वनों की कटाई कुल वनों की कटाई के 20-25 प्रतिशत तक जारी रहती है, तो इसके परिणामस्वरूप अमेज़न बेसिन, रेगिस्तान में परिवर्तित हो जायेगा।
अमेज़न महत्वपूर्ण क्यों है?
अमेज़ॅन वर्षावन लगभग आठ मिलियन वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कवर करता है– ऑस्ट्रेलिया की तुलना में बड़ा क्षेत्र – और जैव विविधता की एक विशाल राशि का आश्रय स्थल है।
- यह वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके वैश्विक कार्बन बजट को संतुलित करने में सहायता करता है, एवं वैश्विक जल चक्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो वैश्विक जलवायु और वर्षा को स्थिर करता है।
अमेज़न का विस्तार:
- ये विशाल उष्णकटिबंधीय वर्षावन हैं, जिनमें दक्षिण अमेरिका के उत्तर में अमेज़न नदी एवं इसकी सहायक नदियों के जल प्रवाह बेसिन स्थित हैं और 6,000,000 वर्ग किमी के क्षेत्र में विस्तृत हैं।
- ब्राज़ील के कुल क्षेत्रफल के लगभग 40% भाग में स्थित इन वनों के उत्तर में गुयाना उच्चभूमि, पश्चिम में एंडीज़ पर्वतमाला, दक्षिण में ब्राज़ीलियाई केंद्रीय पठार और पूर्व में अटलांटिक महासागर स्थित है।
यह बेसिन आठ देशों (ब्राजील, बोलीविया, पेरू, इक्वाडोर, कोलम्बिया, वेनेजुएला, गुआना और सूरीनाम) के साथ– साथ फ्रेंच गुआना के विदेशी क्षेत्र द्वारा साझा किया जाता है।
प्रीलिम्स लिंक:
- अमेजन वन कितने देशों में विस्तृत है?
- सवाना वन के बारे में।
- सदाबहार वर्षा वन क्या हैं?
मेंस लिंक:
अमेज़न वनों को क्यों संरक्षित किया जाना चाहिए? इसके पारिस्थितिक महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू
विषय: संरक्षण से संबंधित मुद्दे
पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं:
सन्दर्भ:
ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (TERI) के एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली चिड़ियाघर द्वारा प्रदान की गई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का वार्षिक आर्थिक मूल्य 426 करोड़ रूपये है।
- इस अध्ययन को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा साधिकार प्रदान किया गया था।
प्रमुख निष्कर्ष:
- इन ‘पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं‘ में जैव विविधता संरक्षण, रोजगार सृजन, शिक्षा एवं अनुसंधान, कार्बन अनुक्रम और मनोरंजक एवं सांस्कृतिक योगदान आदि शामिल हैं।
अध्ययन का महत्व:
भारत में यह ‘अपनी तरह का प्रथम‘ अध्ययन, चिड़ियाघर द्वारा प्रदान की गई महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का “सशक्त आधारभूत मूल्यांकन” उपलब्ध करवाता है।
इन अनुमानों का उपयोग सम्पूर्ण भारत के चिड़ियाघरों द्वारा प्रदान किए गए मूल्य की गणना करने के लिए किया जा सकता है।
पारिस्थितिक तंत्र सेवाएँ क्या हैं?
ये ऐसे लाभ हैं, जिन्हें लोग पारिस्थितिकी तंत्र से प्राप्त करते हैं। भोजन, लकड़ी और अन्य कच्चे माल जैसी सेवाओं अथवा वस्तु प्रदान करने के अतिरक्त पौधे, जीव–जंतु, कवक एवं सूक्ष्म जीव आवश्यक नियामक सेवाएं भी प्रदान करते हैं, जैसे– फसलों का परागण, मृदा क्षरण और जल शोधन की रोकथाम, एवं सांस्कृतिक सेवाओं की एक विशाल सरणी जैसे मनोरंजन एवं सांस्कृतिक योगदान आदि।
इन सेवाओं को आगे वर्गीकृत किया जा सकता है:
- प्रावधानन सेवाएं।
- विनियमन सेवाएं।
- सहायता सेवाएं।
- सांस्कृतिक सेवाएं।
स्रोत: द हिंदू
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
युद्ध प्रदूषण के विरूद्ध:
दिल्ली सरकार द्वारा प्रारम्भ किया गया अभियान।
- यह एक प्रदूषण विरोधी अभियान है।
- इसका उद्देश्य शीत काल में दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है।
- इस अभियान में शामिल हैं- एक ग्रीन दिल्ली ऐप जारी करना, प्रगति पर निगरानी के लिए एक वॉर रूम का निर्माण करना, स्टबल बर्निंग पर अंकुश लगाने के लिए खेतों के लिए तरल घोल का प्रसंस्करण करना और हॉटस्पॉट-विशिष्ट कार्य योजनाओं का निर्माण करना।
राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संस्था (NADA):
इसे भारत में नशा मुक्त खेलों के लिए एक जनादेश के साथ 24 नवंबर, 2005 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1890 के तहत पंजीकृत एक संस्था के रूप में स्थापित किया गया था।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य WADA कोड के अनुसार नशा रोधी नियमों को लागू करना, नशा नियंत्रण कार्यक्रम को विनियमित करना, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना और नशा एवं इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता प्रदान करना है।
महामारी संबंधी तैयारियों के नवाचारों के गठबंधन (CEPI):
- CEPI एक अंतर्राष्ट्रीय गैर- सरकारी संगठन है, जिसे वेलकम ट्रस्ट, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, यूरोपीय आयोग एवं आठ देशों (ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, इथियोपिया, जर्मनी, जापान, नॉर्वे और यूके) द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।
- इसे 2017 में प्रारम्भ किया गया था, जिसका उद्देश्य उभरते संक्रामक रोगों के खिलाफ टीकों के विकास को प्रोत्साहित और तेज करना और महामारी के प्रसार के दौरान इन टीकों तक लोगों की पहुंच को सक्षम बनाना है।
समाचारों में क्यों?
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के एक स्वायत्तशासी संस्थान, ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) को CEPI द्वारा कोविड-19 टीके के केंद्रीकृत मूल्यांकन के लिए प्रयोगशालाओं के वैश्विक नेटवर्क में से एक के रूप में चुना गया है।
स्मार्ट (SMART) मिसाइल:
भारत ने अपनी स्वदेशी रूप से विकसित सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (SMART) का ओडिशा तट के परीक्षण रेंज से सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया है।
- SMART टारपीडो रेंज से परे एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) ऑपरेशन के लिए हल्के एंटी-सबमरीन टारपीडो सिस्टम की एक मिसाइल असिस्टेड रिलीज़ है।
वायनाड–कोझिकोड टनल परियोजना प्रारम्भ की गयी:
- सात किमी लंबी टनल वायनाड और कोझीकोड जिलों को जोड़ेगी।
- इस 900 करोड़ रूपये की परियोजना का निर्माण कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।
(गृह कार्य: कृपया इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और पर्वत श्रृंखलाओं का अवलोकन करें) ।
विश्व पर्यावास दिवस:
- संयुक्त राष्ट्र ने हमारे शहरों और कस्बों की स्थिति एवं सभी के लिए पर्याप्त आश्रय के मूल अधिकार को दर्शाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष अक्टूबर के प्रथम सोमवार को विश्व पर्यावास दिवस के रूप में नामित किया है।
- यह दिन विश्व को यह याद दिलाने के लिए भी है कि हम सभी के पास अपने शहरों और कस्बों के भविष्य को संवारने की शक्ति और जिम्मेदारी है।
- विश्व पर्यावास दिवस को 1985 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्प 40/202 के माध्यम से स्थापित किया गया था, और पहली बार 1986 में मनाया गया था।
2020 का विषय: सभी के लिए आवास – एक बेहतर शहरी भविष्य।
Adjuvant क्या है?
Adjuvant एक औषधीय अथवा प्रतिरक्षाविज्ञानी एजेंट है, जो एक वैक्सीन की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में सुधार करता है। अधिक एंटीबॉडी और लंबे समय तक चलने वाली प्रतिरक्षा का उत्पादन करने के उद्देश्य से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने के लिए एक वैक्सीन में Adjuvant को मिलाया जा सकता है एवं इस प्रकार आवश्यक प्रतिजन की मात्रा को कम किया जा सकता है।
समाचारों में क्यों?
भारत बायोटेक ने अपने COVID-19 वैक्सीन कोवैक्सीन में Adjuvant Alhydroxiquim-II के उपयोग के लिए कंसास में स्थित वायरोवैक्स (ViroVax) के साथ एक समझौता किया है।
डेयरिंग सिटीज सम्मेलन‘ 2020
सन्दर्भ:
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘डेयरिंग सिटीज 2020’ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया।
प्रमुख बिंदु:
- यह सम्मेलन राष्ट्रीय राजधानी में धारणीयता एवं जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर उठाए गए कदमों पर केंद्रित है।
- इस सम्मलेन की मेजबानी ICLEI- जर्मन सरकार के समर्थन से धारणीयता के लिए स्थानीय सरकार और बॉन शहर द्वारा की गयी।
“डेयरिंग सिटीज” जलवायु आपातकाल से निपटने वाले, विशेषकर COVID-19 महामारी के संदर्भ में, शहरी नेताओं के लिए एक वैश्विक मंच है।











