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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 5 October

विषय- सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. चारधाम परियोजना

 

सामान्य अध्ययन-II

1. डाक मतपत्र (Postal Ballot) के लिए नए नियम

2. नार्को टेस्ट (Narco Test) क्या है?

3. बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चर्चित स्थल- नागोर्नो- काराबाख़

2. चर्चित स्थल- मक्का

3. चर्चित स्थल- न्यू कैलेडोनिया

4. अटल टनल

5. पश्चिमी घाट में पौधों की दो नवीन प्रजातियों की खोज की गयी।

6. Xoo संक्रमण

7. POCSO अधिनियम की धारा 29

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति, जिसमें प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

चारधाम परियोजना:


सन्दर्भ:

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति ने चारधाम सड़क परियोजना के निष्पादन में न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

(क्या उल्लंघन किया है? इतना महत्वपूर्ण नहीं है)

न्यायालय का क्या निर्णय था?

विवाद का कारण परिकल्पित टू-लेन राजमार्गों की प्रस्तावित चौड़ाई थी।

  • शीर्ष अदालत ने पिछले माह फैसला सुनाया था कि 5.5 मीटर की चौड़ाई लागू की जाए क्योंकि यह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा की गयी 2018 की सिफारिशों के अनुरूप है।

चारधाम परियोजना क्या है?

  • इस परियोजना में 889 किलोमीटर लम्बे राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के साथ-साथ उनका सुधार भी शामिल है।
  • यह परियोजना बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, गंगोत्री, यमुनोत्री और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले मार्ग को जोड़ेगी।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. चारधाम परियोजना का अवलोकन
  2. इस क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य
  3. इन स्थानों से होकर बहने वाली महत्वपूर्ण नदियाँ
  4. राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के मध्य अंतर

 मेंस लिंक:

चारधाम परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं।

डाक मतपत्र (Postal Ballot) के लिए नए नियम:


सन्दर्भ:

चुनाव आयोग ने डाक मतपत्र के लिए नए नियमों की घोषणा की है।

  • नियमों का लक्ष्य 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और विकलांग लोगों के लिए मतदान प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

नए नियमों की घोषणा:

  • रिटर्निंग ऑफिसर पोलिंग टीमों को तैनात करेगा, जो पूर्व-सूचित तिथियों पर पोस्टल बैलेट को वितरित करेंगे एवं उन्हें एकत्रित करेंगे और फिर रिटर्निंग ऑफिसर के पास जमा करेंगे।
  • डाक मतपत्र के विकल्प का चयन करने के लिए आवश्यक प्रपत्र का वितरण 80 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों एवं विकलांग लोगों के निवास स्थान पर उनके मतदान केंद्र के अंतर्गत बूथ स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा।

डाक द्वारा मतदान (पोस्टल वोटिंग) क्या है?

मतदाताओं का एक सीमित समूह ही डाक मतदान का उपयोग कर सकता है। इस सुविधा के माध्यम से मतपत्र पर अपनी तरजीह दर्ज करके और मतगणना से पहले निर्वाचन अधिकारी के पास इसे वापस भेजकर एक मतदाता सुदूर स्थित होते हुए भी मतदान कर सकता है।

इस सुविधा का लाभ कौनकौन उठा सकता है?

सशस्त्र बलों जैसे- थलसेना, नौसेना और वायु सेना के सदस्य, एक राज्य के सशस्त्र पुलिस बल के सदस्य (राज्य के बाहर सेवा करने वाले), भारत के बाहर तैनात सरकारी कर्मचारी और उनके जीवन साथी ही डाक द्वारा मतदान करने के हकदार हैं।

  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60 के तहत मतदाताओं की उपरोक्त श्रेणी के अपवाद प्रदान किये गए हैं।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951:

यह अधिनियम भारत में चुनावों के वास्तविक संचालन का प्रावधान करता है। यह निम्नलिखित मामलों से संबंधित है:

  1. संसद और राज्य विधानमंडलों के दोनों सदनों के सदस्यों की योग्यता और अयोग्यता जैसे विवरण
  2. चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक मशीनरी,
  3. राजनीतिक दलों का पंजीकरण,
  4. चुनावों का संचालन,
  5. निर्वाचन सम्बन्धी विवाद,
  6. भ्रष्ट आचरण और चुनावी अपराध, एवं
  7. उपचुनाव।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. डाक द्वारा मतदान क्या है?
  2. डाक द्वारा मतदान के लिए योग्य समूह
  3. डाक द्वारा मतदान से संबंधित मामले कौन निर्धारित कर सकता है?
  4. भारतीय निर्वाचन आयोग की भूमिका
  5. क्या मतदान का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है?

मेंस लिंक:

डाक द्वारा मतदान की विशेषताओं एवं लाभों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र / सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

नार्को टेस्ट (Narco Test) क्या है?


समाचारों में क्यों?

उत्तर प्रदेश सरकार हाथरस बलात्कार और हत्या पीड़िता के परिवार के सदस्यों का नार्को टेस्ट करने की योजना बना रही है।

इससे सम्बंधित चिंताएँ:

“समाज के कमजोर वर्गों के व्यक्ति, जो अपने मौलिक अधिकारों से अनभिज्ञ हैं और कानूनी सलाह लेने में असमर्थ हैं” पर ऐसे परीक्षणों के परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

  • इसमें भविष्य में दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और निगरानी जैसे मामले शामिल हो सकते है, यहां तक ​​कि मीडिया द्वारा परीक्षण के लिए वीडियो सामग्री का दुरूपयोग भी किया जा सकता है।
  • इस प्रकार के परीक्षण मानवीय गरिमा और स्वतंत्रता का अपमान हैं, एवं इनके दूरगामी प्रभाव होते हैं।

नार्को टेस्ट क्या है?

नार्को टेस्ट में सोडियम पेंटोथल नामक दवा का इंजेक्शन दिया जाता है, जो एक कृत्रिम निद्रावस्था या बेहोशी की अवस्था को प्रेरित करता है। इससे सम्बंधित व्यक्ति की कल्पना-शक्ति बेअसर हो जाती है, और यह आशा की जाती है की वह सत्य जानकारी उपलब्ध कराएगा/ कराएगी।

  • इस संदर्भ में “सच का प्याला” (ट्रुथ सीरम) के रूप में संदर्भित दवा का उपयोग सर्जरी के दौरान निश्चेतना के लिए बड़ी खुराक में किया जाता था एवं ऐसा कहा जाता है कि इसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खुफिया अभियानों के लिए भी किया जाता था।

यह पॉलीग्राफ परीक्षण से भिन्न कैसे है?

एक पॉलीग्राफ परीक्षण इस धारणा पर आधारित है कि किसी व्यक्ति द्वारा झूठ बोलने के दौरान उत्पन्न शारीरिक प्रतिक्रियाएं, सामान्य परिस्थितियों में उत्पन्न शारीरिक प्रतिक्रियाओं से भिन्न होती हैं।

  • कार्डियो-कफ (cardio-cuffs) अथवा संवेदनशील इलेक्ट्रोड जैसे उपकरणों को व्यक्ति के शरीर से जोड़ा जाता है और उनसे प्रश्न पूछे जाते समय कुछ विशेष परिवर्तनशील तथ्यों जैसे कि रक्तचाप, नाड़ी-स्फुरण, श्वसन, पसीने की ग्रंथि की गतिविधि में परिवर्तन, रक्त प्रवाह, आदि को मापा जाता है।
  • प्रत्येक प्रतिक्रिया के लिए एक संख्यात्मक मान निर्धारित किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्या व्यक्ति सच बोल रहा है, झूठ बोल रहा है अथवा अनिश्चित है।

क्या भारतीय जांचकर्ताओं को यह अनुमति है कि वे संदिग्धों पर इन परीक्षणों को कर सकें?

सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य (2010) मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था कि “अभियुक्त की सहमति के आधार पर किये गए परीक्षणों के अतिरिक्त” किसी भी प्रकार के लाई डिटेक्टर परीक्षण नहीं किये जाने चाहिए।

  • यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा 2000 में प्रकाशित “एक अभियुक्त पर किये जाने वाले पॉलिग्राफ परीक्षण से सम्बंधित दिशानिर्देशों” का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।

न्यायालय ने मानवाधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय मानदंडों, निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 20 (3) के अंतर्गत आत्म-अभिसंशन के विरुद्ध अधिकार को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय दिया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नार्को टेस्ट क्या है?
  2. पॉलीग्राफ टेस्ट क्या है?
  3. संविधान का अनुच्छेद 20 (3) किससे संबंधित है?
  4. सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य (2010) मामला किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट क्या हैं? इनसे सम्बंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों, भारतीय प्रवासियों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI):


सन्दर्भ:

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन, बांग्लादेश के साथ अपनी रणनीतियों को जोड़ना चाहता है और ढाका के साथ महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को बढ़ावा देना चाहता है।

BRI क्या है?

प्राचीन रेशम मार्ग (सिल्क रोड) से सम्बद्ध, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव एक विशाल अवसंरचना निर्माण परियोजना है, जो पूर्वी एशिया से यूरोप तक विस्तृत होगी। इस परियोजना को 2013 में प्रारम्भ किया गया था।

  • इस परियोजना के दो भाग हैं: भूमि आधारित सिल्क रोड आर्थिक बेल्ट और समुद्री सिल्क बेल्ट। दोनों योजनाओं को पहले सामूहिक रूप से “वन बेल्ट, वन रोड पहल” के रूप में संदर्भित किया गया था, जिसे कालांतर में “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” के रूप में जाना गया।
  • इस परियोजना में रेलवे, ऊर्जा पाइपलाइनों, राजमार्गों और सुव्यवस्थित सीमा पार के विशाल नेटवर्क का निर्माण करना शामिल है।

पाकिस्तान और BRI:

आज तक, विश्व की दो-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाले 60 से अधिक देशों ने इस परियोजना पर या तो हस्ताक्षर कर दिए हैं या ऐसा करने में अपनी रुचि दर्शायी है।

  • विश्लेषकों का अनुमान है कि इस परियोजना का अब तक का सबसे बड़ा भाग चीनपाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) है, जिसकी अनुमानित लागत 60 बिलियन डॉलर है। यह गलियारा चीन को अरब सागर में स्थित पाकिस्तान के ग्वादर बन्दरगाह से जोड़ने वाली परियोजनाओं का एक संग्रह है।

मूल रेशम मार्ग (सिल्क रोड) क्या था?

मूल सिल्क रोड का विकास चीन के हान राजवंश (206 ई.पू. – 220 ई.पू.) के पश्चिम की ओर विस्तार के दौरान हुआ था, जो आज के मध्य एशियाई देशों अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ-साथ दक्षिण में स्थित आधुनिक भारत और पाकिस्तान में व्यापार नेटवर्क का निर्माण करता था। ये मार्ग यूरोप तक चार हजार मील से अधिक दूरी तक विस्तृत थे।

अन्य देशों ने BRI के प्रति क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की है?

कुछ देश इस परियोजना को चीन की शक्ति के चिंतातुर विस्तार के रूप में देखते हैं जबकि कुछ देश इस परियोजना को चीन की बढ़ती शक्ति के अस्थिर विस्तार के रूप में देखते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने चिंताएं व्यक्त की हैं कि BRI, एशिया में चीन के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय विकास और सैन्य विस्तार के लिए एक ट्रॉजन हॉर्स हो सकता है।

इस परियोजना के माध्यम से चीन क्या प्राप्त करने की आशा करता है?

चीन की इस पहल के पीछे भूराजनीतिक और आर्थिक दोनों प्रेरणाएं शामिल हैं।

  • देश ने अधिक मुखर चीन के दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया है, जबकि विकास की धीमी गति एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कठोर व्यापारिक संबंधों ने देश के नेतृत्व पर दबाव बनाया है कि वे अपनी वस्तु एवं सेवाओं के लिए नवीन बाजारों की तलाश करें।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि BRI, चीन की मेड इन चाइना 2025 आर्थिक विकास रणनीति के साथ- साथ शी जिनपिंग के नेतृत्व में एक साहसिक चीनी राज्य कौशल की प्रमुख रणनीतियों में से एक है।
  • BRI, अमेरिका कीएशिया में धुरीकरण” (Pivot to Asia) की नीति के विरोधस्वरूप एक रणनीति के साथ- साथ चीन के लिए नवीन निवेश के अवसरों को विकसित करने, निर्यात बाजारों का निर्माण करने एवं चीनी आय और घरेलू खपत को बढ़ावा देने के एक माध्यम के रूप में भी कार्य करता है।

भारत के विचार:

भारत ने विभिन्न देशों को यह समझाने का प्रयत्न किया कि BRI, एशिया पर प्रभुत्व स्थापित करने की एक योजना है एवं कुछ विश्लेषकों द्वारा सुझाई गयी मोतियों की माला भू-आर्थिक रणनीति के सन्दर्भ में भारत ने चेतावनी दी है कि इसके माध्यम से चीन, हिंद महासागर में स्थित अपने पड़ोसी देशों के क्षेत्रीय चोक बिंदुओं पर नियंत्रण स्थापित के लिए अनिश्चित ऋण भार का निर्माण करता है।

  • विशेष रूप से, नई दिल्ली लंबे समय से अशांत है क्योंकि इसके पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ चीन के अत्यंत मधुर सम्बन्ध रहे हैं।

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स्रोत: द हिन्दू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चर्चित स्थलनागोर्नो काराबाख़:

 समाचारों में क्यों?

मध्य एशिया में स्थित आर्मेनिया और अजरबैजान के मध्य उत्पन्न क्षेत्रीय विवाद एवं जातीय संघर्ष ने दक्षिण काकेशस में नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र को प्रभावित किया है।

अवस्थिति

नागोर्नो-काराबाख़, जिसे आर्त्शाख़ के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण काकेशस में स्थित एक भू-आबद्ध क्षेत्र है, जो काराबाख़ पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत आता है।

यह एक विवादित क्षेत्र है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अजरबैजान के एक भाग के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसका प्रशासन एक स्वतंत्र राज्य, आर्त्शाख़ गणतंत्र द्वारा किया जाता है।

1988 के काराबाख़ आंदोलन के बाद से अजरबैजान ने इस क्षेत्र पर अपने राजनीतिक अधिकार का प्रयोग नहीं किया है। 1994 में नागोर्नो-काराबाख़ युद्ध की समाप्ति के बाद से ही आर्मेनिया और अजरबैजान की सरकारों के प्रतिनिधि इस क्षेत्र की विवादित स्थिति पर शांति वार्ता कर रहे हैं।

चर्चित स्थलमक्का:

समाचारों में क्यों?

मक्का तीर्थयात्रा के लिए पुनः खुल गया है।

यह कहाँ स्थित है?

यह इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और सऊदी अरब के मक्काह प्रांत की राजधानी है।

यह हेजाज़ क्षेत्र में स्थित है, जो 200 किमी (124 मील) की एक विस्तृत पर्वतीय पट्टी है एवं अननफ़ूद रेगिस्तान को लाल सागर से पृथक करती है।

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चर्चित स्थलन्यू कैलेडोनिया:

समाचारों में क्यों?

न्यू कैलेडोनिया के दक्षिण प्रशांत क्षेत्र ने एक जनमत संग्रह के माध्यम से अपनी स्वतंत्रता को अस्वीकार करते हुए फ्रांसीसी बने रहने का निर्णय लिया है। अंतिम परिणामों के अनुसार, लगभग 170 वर्षों के पश्चात फ्रांस से पृथक्करण को अस्वीकार करने के पक्ष में 53.26% मतदान हुआ, जो कि दो वर्ष पूर्व हुए जनमत संग्रह के मतदान प्रतिशत (56.7%) से कम था।

अवस्थिति:

  • यह दक्षिण-पश्चिम प्रशांत महासागर में स्थित है, जो ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में लगभग 1,210 किमी दूरी पर वानुअतु के दक्षिण में स्थित है।
  • यह द्वीपसमूह, मेलनेशिया उप-भाग का एक भाग है, जिसमें ग्रांड टेर्रे द्वीप समूह, लॉयल्टी द्वीप समूह, चेस्टरफील्ड द्वीप समूह, बेलेप द्वीपसमूह, पाइंस द्वीप और कुछ दूरस्थ द्वीप समूह शामिल हैं।
  • यह जीलैंड का एक भाग है।

न्यू कैलेडोनिया को 1946 में एक विदेशी क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन 1998 के नौमेया समझौते के परिणामस्वरूप, इसे 1999 में एक विशेष दर्जा (वैधानिक विशेष अथवा वैधानिक मूल) प्राप्त हुआ।

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अटल टनल:

समाचारों में क्यों?

हाल ही में उद्घाटन किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • हिमांचल प्रदेश के रोहतांग में निर्मित यह सुरंग 3,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है।
  • सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित 9.02 किलोमीटर लंबी यह सुरंग विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है एवं यह मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ती है।
  • इस सुरंग ने मनाली और लेह के बीच की दूरी में 46 किमी की और यात्रा समय में लगभग 4 से 5 घंटे की कमी की है।

 पश्चिमी घाट में पौधों की दो नवीन प्रजातियों की खोज की गयी:

  1. एरिओकॉलोन परविसेफालम (इसके सूक्ष्म पुष्पक्रम आकार के कारण)
  2. एरिओकॉलोन करावलेंस (तटीय कर्नाटक क्षेत्र- करावली के नाम पर)

पाइपवर्ट (एरिओकॉलोन) एक पौधा समूह है, जो मानसून के दौरान एक छोटी अवधि में ही अपना जीवन चक्र पूरा कर लेता है। भारत में पाइपवर्ट की लगभग 111 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

  • इनमें से अधिकांश प्रजातियां पश्चिमी घाट और पूर्वी हिमालय में पायी जाती हैं और उनमें से लगभग 70% स्थानिक प्रजातियां हैं।
  • वे अपनी कैंसररोधी, पीड़ाहारी, सूजनरोधी एवं स्तम्मक (astringent) विशेषताओं के लिए जानी जाती हैं।

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 Xoo संक्रमण 

  • Xoo (Xanthomonas oryzaepv Oryzae) नामक जीवाणु से उत्पन्न होता है।
  • यह चावल में एक गंभीर बैक्टीरियल पत्ता पाला (Leaf Blight) रोग का कारण बनता है।
  • यह विश्व भर में चावल की खेती के लिए भारी उपज नुकसान का कारण बनता है।

 POCSO अधिनियम की धारा 29

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 29 में कहा गया है कि जब किसी व्यक्ति पर नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के अपराध का मुकदमा चलाया जाता है, तब मामले की सुनवाई करने वाला विशेष न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि वह अभियुक्त दोषी है।

समाचार में क्यों?

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया है कि POCSO अधिनियम की धारा 29 में उल्लिखित अपराध की उपधारणा केवल मुकदमा प्रारम्भ होने के पश्चात अर्थात् आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हो जाने के पश्चात् ही लागू होती है।


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