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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 September

 

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC)

2. लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडरों की नई मूल्य सीमा

3. मिठाई विक्रेताओं को 1 अक्टूबर से अपने उत्पादों पर ‘बेस्ट बिफोर डेट’ दिखाना अनिवार्य: FSSAI

4. समान औषध विपणन पद्धति सहिंता (UCPMP)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. तीन कृषि विधेयक एवं संबंधित विवाद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. विश्व पर्यटन दिवस

2. ‘साथी’ (SAATHI) एप्लीकेशन

3. शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार:

4. चर्चित स्थान: नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र

5. सैंडलवुड स्पाइक डिसीज़ (SSD)

6. रेडियो पाठशाला

7. पंजाब सरकार द्वारा पराली जलाने पर अंकुश लगाने हेतु नोडल अधिकारियों की नियुक्ति

8. हाईयांग-2C (Haiyang- HY2C)

9. ‘भारत में स्वास्थ्य’ सर्वेक्षण

10. सरसों के तेल में खाद्य तेलों के मिश्रण पर प्रतिबंध

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC)


(National Cooperative Development Corporation)

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Cooperative Development Corporation NCDC) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कार्यक्रम के तहत खरीफ फसलों में धान की खरीद के लिए छत्तीसगढ़, हरियाणा और तेलंगाना राज्यों को 19444 करोड़ रुपये की राशि को पहली किस्त के रूप में मंजूरी दे दी गयी है।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के बारे में:

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत स्थापित एक सांविधिक निगम है।

  • NCDC का उद्देश्य कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, औद्योगिक वस्तुओं, पशुधन और कुछ अन्य अधिसूचित वस्तुओं और सेवाओं के सहकारी सिद्धांतों पर उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, निर्यात और आयात के कार्यक्रमों की योजना बनाना तथा इनको प्रोत्साहित करना है।
  • NCDC सहकारी समितियों के लिए एक प्रमुख वित्तीय संस्थान है।
  • इसके द्वारा एक मिशन सहकार 22 का आरम्भ किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCDC के बारे में।
  2. MSP क्या है?
  3. MSP की घोषणा कौन करता है?
  4. MSP तय करने में कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की भूमिका
  5. MSP के अंतर्गत आने वाले उत्पाद
  6. MSP की घोषणा करने संबंधी वैधानिक आधार?
  7. गन्ने के लिए MSP

मेंस लिंक:

NCDC की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा करें।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडरों की नई मूल्य सीमा


संदर्भ:

COVID-19 महामारी के दौरान, देश में उचित मूल्य पर मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing AuthorityNPPA) द्वारा छह महीने के लिए मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर और लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की कीमतों को कम कर दिया गया है।

संबंधित प्रावधान:

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 10 (2) (L) के तहत प्राप्त शक्तियों को, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को हस्तांतरित करते हुए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) तथा मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता तथा कीमतों को नियंत्रित करने हेतु सभी अधिकार दे दिए गए हैं।
  • ऑक्सीजन अन्तःश्वसन (Oxygen Inhalation), चिकित्सीय गैस, आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (National List of Essential Medicines NLEM) के अंतर्गत अधिसूचित संरूपण है।

आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) के बारे में:

औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत, ‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा केवल आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में दर्ज दवाओं की कीमतों पर निगरानी और नियंत्रण द्वारा किया जाता है।

  • आवश्यक दवाएं (Essential medicines) वे होती हैं, जो आबादी के अधिकांश लोगों की स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकता वाली आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।
  • NLEM का मुख्य उद्देश्य तीन महत्वपूर्ण पहलुओं, अर्थात लागत, सुरक्षा और प्रभावकारिता पर विचार करते हुए दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना है।

DPCO, 2013 का अनुच्छेद 19, असाधारण परिस्थितियों में दवा की कीमतों में वृद्धि अथवा कमी से संबंधित है। हालांकि, कीमतों की सीमा में सुधार हेतु कोई निश्चित पूर्व उदाहरण अथवा फॉर्मूला निर्धारित नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NPPA – कार्य
  2. NLEM क्या है? इस सूची का रखरखाव कौन करता है?
  3. औषधि मूल्य निर्धारण आदेश क्या है?
  4. आपदा प्रबंधन अधिनियम’, 2005 की धारा 10 (2) (L)

मेंस लिंक:

आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) क्या है? इसका महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

मिठाई विक्रेताओं को 1 अक्टूबर से अपने उत्पादों पर ‘बेस्ट बिफोर डेट’ दिखाना अनिवार्य: FSSAI


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India FSSAI) द्वारा खुली मिठाइयों की बिक्री के संदर्भ में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

नए दिशानिर्देशों के अनुसार:

  • खुली मिठाइयों के मामले में बिक्री के लिए आउटलेट पर मिठाई रखने वाली ट्रे के साथ एक अक्टूबर 2020 से अनिवार्य रूप से उत्पाद की ‘बेस्ट बिफोर डेट’ प्रदर्शित की जानी चाहिए।
  • खाद्य व्यवसाय संचालक (Food Business OperatorsFBOs), स्वेच्छा से निर्माण की तारीख प्रदर्शित कर सकते हैं। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है।
  • FBOs, उत्पादों की प्रकृति और स्थानीय स्थितियों के आधार पर मिठाइयों के लिए ‘बेस्ट बिफोर डेट’ का निर्णय करेगा तथा इसे उचित तरह से प्रदर्शित करेगा।
  • खाद्य सुरक्षा आयुक्त, इन दिशानिर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करेंगे।

महत्व:

  • यह दिशानिर्देश, मिठाई की गुणवत्ता और मिलावट के संदर्भ में की जाने वाली, विशेषकर त्योहारों के मौसम के दौरान, विभिन्न शिकायतों के आधार पर जारी किये गए हैं।
  • यह दिशानिर्देश, उपभोक्ताओं के लिए ताजा उत्पाद खरीदने में सहायक होंगे।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बारे में:

यह ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम’, 2006 (FSS Act) के तहत स्थापित एक स्वायत्त सांविधिक निकाय है।

  • FSSAI, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करता है।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006, विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा लागू किये गए खाद्य संबंधी निम्नलिखित अधिनियमों और आदेशों को समेकित करता है:

  • खाद्य मिलावट निवारण अधिनियम, 1954
  • फल उत्पाद आदेश, 1955
  • मांस खाद्य उत्पाद आदेश, 1973
  • वनस्पति तेल उत्पाद (नियंत्रण) आदेश, 1947
  • खाद्य तेल पैकेजिंग (विनियमन) आदेश 1988
  • दूध और दुग्ध उत्पाद आदेश, 1992

प्रीलिम्स लिंक:

  1. FSSAI के बारे में।
  1. FSSAI का प्रशासनिक मंत्रालय।
  2. FSSAI के कार्य।
  3. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSS अधिनियम) का अवलोकन।

fssai

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

समान औषध विपणन पद्धति सहिंता (UCPMP)


(Uniform Code of Pharmaceutical Marketing Practices)

संदर्भ:

हाल ही में, एक प्रश्न के उत्तर में संसद में रसायन और उर्वरक मंत्री सदानदा गौड़ा द्वारा कहा गया कि, समान औषध विपणन पद्धति सहिंता (Uniform Code of Pharmaceutical Marketing PracticesUCPMP) को अनिवार्य बनाने हेतु कोई निर्णय नहीं लिए गया है। इस पर ‘एलायंस ऑफ डॉक्टर्स फॉर एथिकल हेल्थ केयर’ ने निराशा व्यक्त की है।

संबंधित मांग:

एलायंस ऑफ डॉक्टर्स फॉर एथिकल हेल्थ केयर’ का कहना है कि, चूंकि फ़ार्मा उद्योग, स्वैच्छिक रूप से संहिता का पालन करने में विफल रहा है, अतः दवाओं के विपणन में निष्पक्षता लाने हेतु UCPMP को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

UCPMP कोड क्या है?

यह फार्मास्यूटिकल्स विभाग द्वारा जारी एक स्वैच्छिक संहिता / कोड है। यह संहिता भारत की औषधि कम्पनियों के साथ-साथ चिकित्सा उपकरणों को बनाने वाले उद्योग के द्वारा अपनाई गईं विपणन प्रणालियों से सम्बंधित है।

प्रयोज्यता: यह संहिता वर्तमान में दवा कम्पनियाँ, चिकित्सा प्रतिनिधि, वितरक, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता आदि औषधि कम्पनियों के एजेंट तथा औषधि निर्माता संघ पर लागू है।

प्रमुख विशेषताएं और प्रावधान:

  • संहिता के अनुसार, किसी भी ऐसे व्यक्ति को दवाओं के नि: शुल्क नमूने नहीं दिए जाएंगे जो इस तरह के उत्पाद को लिखने के लिए योग्य नहीं है।
  • कोई दवा कम्पनी अथवा उसका एजेंट दवा लिखने या आपूर्ति करने के लिए योग्यता प्राप्त व्यक्तियों के लिए किसी भी प्रकार का उपहार, पैसे का लाभ अथवा अन्य प्रकार के लाभ प्रदान नहीं करेगा।
  • यात्रा सुविधाओं के संबंध में, UCPMP कोड, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और उनके परिवार के सदस्यों को छुट्टी के लिए या सम्मेलन में भाग लेने के लिए रेल, हवाई, जहाज, क्रूज टिकट, पेड छुट्टियों आदि सहित देश के बाहर या बाहर यात्रा सुविधा प्रदान करने पर रोक लगाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UCPMP के बारे में
  2. क्या यह अनिवार्य है?
  3. UCPMP किसके द्वारा जारी किया गया है?
  4. UCPMP का अवलोकन

मेंस लिंक:

समान औषध विपणन पद्धति सहिंता (UCPMP) को क्यों अनिवार्य किया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

तीन कृषि विधेयक एवं संबंधित विवाद


संदर्भ: हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गए तीन कृषि विधेयकों का कई राज्यों में किसानों द्वारा विरोध किया जा रहा है।

चर्चा का विषय:

जून 2020 में, केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार करने हेतु तीन अध्यादेश जारी किये गए थे। ये अध्यादेश निम्नलिखित है:

  1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश 2020
  2. कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020
  3. मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020

परंतु, किसान कार्यकर्ताओं को इन अध्यादेशों से निराशा हुई है, इनका कहना है, कि यह सुधार पैकेज किसानों की समस्याओं को हल करने के बजाय इनकी समस्याओं में और वृद्धि करेंगे।

संबंधित चिंताएँ:

  1. ये अध्यादेश किसान विरोधी हैं, तथा इसके परिणामस्वरूप किसानों के लिए फसलों की कीमतें घटेंगी तथा बीज सुरक्षा समाप्त हो जायेगी।
  2. सरकार का हस्तक्षेप समाप्त होने से खाद्य सुरक्षा भी ख़त्म हो जायेगी।
  3. ये अध्यादेश, भारतीय खाद्य और कृषि प्रणालियों पर कॉर्पोरेट नियंत्रण को बढ़ावा देते हैं।
  4. ये किसानों के शोषण तथा जमाखोरी और कालाबाजारी को भी बढ़ावा देंगे।

अब हम क्रमशः अध्यादेशों पर चर्चा करते हैं;

  1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020:

मुख्य प्रावधान: इस संशोधन के अंतर्गत अकाल, युद्ध, आदि जैसी असामान्य परिस्थितियों के कारण कीमतों में अत्याधिक वृद्धि तथा प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में कुछ निर्दिष्ट कृषि उपजों की आपूर्ति, भंडारण तथा कीमतों को नियंत्रित किये जाने का प्रावधान किया गया है।

संबंधित चिताएं:

  1. इस अध्यादेश के अंतर्गत कृषि उपजों की मूल्य सीमा में उतार-चढ़ाव काफी विषम है (बागवानी उपजों की खुदरा कीमतों में 100% की वृद्धि तथा शीघ्र ख़राब नहीं होने वाले कृषि खाद्य पदार्थों की  खुदरा कीमतों में 50% की वृद्धि)।
  2. इसके तहत किसी कृषि उपज के मूल्‍य श्रृंखला (वैल्‍यू चेन) प्रतिभागी की स्‍थापित क्षमता स्‍टॉक सीमा लगाए जाने से मुक्‍त रहेगी।
  3. निर्यातक, वस्तुओं की मांग दिखाने पर, स्‍टॉक सीमा लगाए जाने से मुक्‍त रहेंगे।
  1. कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020:

मुख्य प्रावधान: इसके तहत, कृषि उपज बाज़ार समिति (Agricultural Produce Market Committees-APMC) बाजारों की उपेक्षा करते हुए निजी स्थल पर अथवा APMC द्वारा निर्धारित बाजार-स्थलों के बाहर व्यापार करने की स्वतंत्रता प्रदान की गयी है।

संबंधित चिताएं:

  1. इस अध्यादेश से इस प्रकार की स्थिति निर्मित हो जाती है, जिसमे किसानों को स्थानीय बाजार में अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने से कोई खरीददार नहीं मिलता है।
  2. चूंकि, अधिकांश किसान छोटे अथवा सीमांत कृषि-भूमि के मालिक होते हैं, और इनके पास अपनी उपज को दूर की बाजारों में बेचने हेतु परिवहन के लिए साधन नहीं होते है।
  3. अतः, इन किसानों को अपनी उपज स्थानीय बाजार में ही न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमतों पर कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
  1. मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020:

मुख्य प्रावधान: इसके अंतर्गत भारत में अनुबंध कृषि (Contract Farming) के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार किये जाने का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ दो वृहत् चिंताएं जुड़ी हैं:

  1. पहली चिंता का कारण अनुबंध कृषि में किसानों तथा कार्पोरेट्स के मध्य समझौता करने की शक्ति से संबंधित है। इसमें एक किसान अपनी पैदावार के लिय उचित मूल्य तय करने में कॉर्पोरेट अथवा बड़े व्यवसायिक प्रायोजकों के साथ समझौता करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं होता है।
  2. दूसरे, अध्यादेश में कहा गया है, कि गुणवत्ता मानकों को समझौते में दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक रूप से तय किया जा सकता है। लेकिन, कॉरपोरेट्स के द्वारा उपज की गुणवत्ता के संदर्भ में एकरूपता मामलों को शामिल करने पर, गुणवत्ता पहलू काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा, क्योंकि, देश में कृषि-पारिस्थितिक विविधता में असमानता होने कारण गुणवत्ता में एकरूपता संभव नहीं होगी।

निष्कर्ष:

यह तीनों अध्यादेश, संबंधित राज्यों पर सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों के आधार पर दूरगामी और अलग-अलग प्रभाव डालेंगे।

  • केंद्र के द्वारा इस प्रकार के साहसिक और एकतरफा कदम, विभिन्न राज्यों के अन्दर भूमि विविधता, फसलों के पैटर्न, कृषि बाजारों के ऐतिहासिक कामकाज आदि, तथा देश की विशाल विविधता को समाहित करने में विफल रहे हैं।
  • इसलिए, आशंका यह है कि यह तीनों अध्यादेश किसानों की मदद करने के बजाय देश में लाखों छोटे और सीमांत किसानों के लिए संकट का कारण बन सकते हैं। इस प्रकार के उदाहरण, पिछले विमुद्रीकरण (demonetization) तथा COVID-19 के कारण अनियोजित लॉकडाउन संबंधित मामलों में देखे जा सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. APMC क्या हैं? उनका नियमन कैसे किया जाता है?
  2. मॉडल अनुबंध कृषि अधिनियम का अवलोकन
  3. सरकार द्वारा जारी किये गए अध्यादेश कौन से है?
  4. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 में मूल्य सीमा में उतार-चढ़ाव की अनुमति।
  5. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के तहत स्टॉक सीमा विनियमन किसके लिए लागू नहीं होगा?

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित सुधार किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


विश्व पर्यटन दिवस

विश्व पर्यटन दिवस, प्रतिवर्ष 27 सितंबर को मनाया जाता है।

  • इसकी शुरुआत ‘संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन’ (UNWTO) द्वारा वर्ष 1980 में की गयी थी।
  • 27 सितंबर 1970 को UNWTO के क़ानूनों को अपनाया गया था, इसी उपलक्ष्य में 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के रूप में चुना गया।
  • विश्व पर्यटन दिवस 2020 की थीम: “पर्यटन और ग्रामीण विकास” है।

साथी’ (SAATHI) एप्लीकेशन

‘साथी’ (SAATHI) पर्यटन मंत्रालय की एक पहल है। इसका उद्देश्य आतिथ्य उद्योग को सुरक्षित रूप से संचालित करने हेतु और होटल /यूनिट की सुरक्षा के बारे में कर्मचारियों और मेहमानों के बीच विश्वास पैदा करने में आतिथ्य उद्योग की सहायता करना है।

शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार:

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रति वर्ष दिए जाने वाले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का नाम ‘वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ (Council of Scientific & Industrial Research CSIR) के संस्थापक निदेशक, दिवंगत डॉ (सर) शांति स्वरूप भटनागर के नाम पर रखा गया है और इसे ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर (SSB) पुरस्कार’ के नाम से जाना जाता है।

पुरस्कार हेतु पात्रता:

  • यह पुरस्कार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के किसी भी क्षेत्र में अनुसंधान में संलग्न, 45 वर्ष की आयु तक, भारत के किसी भी नागरिक को दिया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त, भारत में काम करने वाले ओवरसीज सिटीजन ऑफ़ इंडिया (OCI) तथा भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) भी इस पुरस्कार के लिए पात्र हैं।
  • पुरस्कार को पिछले पांच वर्षों के दौरान, मुख्य रूप से भारत में किए गए उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्य के आधार पर प्रदान किया जाता है।

संदर्भ:

डॉ. अभिजीत मुखर्जी, एसोसिएट प्रोफेसर, विभाग भूविज्ञान और भूभौतिकी, आईआईटी खड़गपुर को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के लिए चुना गया है।

चर्चित स्थान: नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र

(Nagorno-Karabakh region)

चर्चा का कारण

हाल ही में, अजरबैजान द्वारा नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र पर हवाई तथा तोपों द्वारा हमला किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र को आर्त्शाख़ (Artsakh) नाम से भी जाना जाता है। यह काराबाख़ पर्वत श्रेणी में स्थित दक्षिण काकेशस का स्थलरुद्ध क्षेत्र है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अज़रबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • यह स्थलरुद्ध नागोर्नो-काराबाख़ का यह पर्वतीय क्षेत्र, अज़रबैजान तथा इसकी आर्मीनियाई मूल की आबादी के बीच अनसुलझे विवाद का विषय बना हुआ है। अलगाववादियों को पड़ोसी देश आर्मेनिया का समर्थन मिला हुआ है।
  • वर्ष 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद एक संघर्ष में यह अज़रबैजान से अलग हो गया।
  • हालांकि वर्ष 1994 में एक संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, किंतु अजरबैजान और अर्मेनिया, अक्सर एक-दूसरे पर नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र के आसपास हमले का आरोप लगाते रहते हैं।

Nagorno_Karabakh

 सैंडलवुड स्पाइक डिसीज़ (SSD)

(Sandalwood Spike Disease)

चंदन के वृक्षों में ‘सैंडलवुड स्पाइक डिसीज़’ नामक रोग, फाइटोप्लाज़्मा (Phytoplasma) ‘पौधे के ऊतकों के जीवाणु परजीवी’- के कारण होता है, जो कीट वैक्टर (Insect Vectors) द्वारा प्रेषित होते हैं।

  • यह रोग सर्वप्रथम वर्ष 1899 में कर्नाटक के कोडागु (Kodagu) ज़िले में देखा गया था।
  • इस रोग के लक्षणों में, वृक्ष की पत्तियां आकार में काफी छोटी व कड़ी हो जाती है, साथ ही इनके पोरों (Internode) की लंबाई भी घट जाती है।
  • रोग की विकसित अवस्था में, पूरी शाखा एक नोकीले पुष्पक्रम के आकार में दिखने लगती है।

संदर्भ:

भारत में चंदन के वृक्ष अर्थात् सैंडलवुड विनाशकारी सैंडलवुड स्पाइक डिसीज़ (SSD) के कारण एक गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं।

  • कर्नाटक एवं केरल के चंदन वृक्षों में इस रोग का संक्रमण फिर से फैल गया है।
  • वर्तमान में इस संक्रमण का तेजी से फैलाव काफी हद तक जंगलों में हरित वनस्पति की कटाई पर लगे प्रतिबंध के कारण हुआ है। जबकि, वर्तमान में इस रोग को फैलने से रोकने हेतु संक्रमित पेड़ को काटने अथवा हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

रेडियो पाठशाला

  • इसे ओडिशा सरकार द्वारा शुरू किया गया है।
  • इसके द्वारा राज्य में कक्षा 1 से 8 के छात्रों के लिए कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
  • इस ऑडियो कार्यक्रम को छात्र, केंद्र सरकार के दीक्षा (DIKSHA) ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी प्राप्त कर सकते हैं।

पंजाब सरकार द्वारा पराली जलाने पर अंकुश लगाने हेतु नोडल अधिकारियों की नियुक्ति

  • पंजाब सरकार द्वारा पराली जलाने पर अंकुश लगाने हेतु गांवों में 8,000 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
  • ये अधिकारी, राजस्व, ग्रामीण विकास और पंचायतों, कृषि, बागवानी और मृदा संरक्षण विभागों, साथ ही पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारियों के साथ सहयोग व समन्वय से काम करेंगे।
  • सेक्टर अधिकारी खेत में पराली को आग लगाए जाने की सूचना के तुरंत बाद मौके पर पहुंच कर रिपोर्ट करेगा। इसके लिए नोडल अधिकारियों और सेक्टर अधिकारियों को हिदायतें जारी कर दी गई हैं ताकि किसानों को पराली जलाने से रोका जा सके।

हाईयांग-2C (Haiyang- HY2C)

यह हाल ही में, चीन द्वारा प्रक्षेपित किया गया एक नया महासागर-निगरानी उपग्रह है।

  • यह चीन का तीसरा महासागरीय गतिकी पर्यावरण उपग्रह है।
  • यह सभी मौसमों तथा चौबीसों घंटों के दौरान समुद्रीय तापमान, लहरों की ऊंचाई, समुद्रीय सतह की ऊंचाई, हवा की गति और दिशा का विवरण प्रदान कर सकता है।
  • HY-2C, पूर्ववर्ती HY-2B तथा अगले वर्ष प्रक्षेपित किये जाने वाले HY-2D के साथ एक नेटवर्क स्थापित करेगा, इससे यह नेटवर्क समुद्री पर्यावरण निगरानी में उच्च-परिशुद्धता युक्त आंकड़े देने में सक्षम हो जायेगा।
  • प्रतावित उपग्रह नेटवर्क छह घंटे के भीतर विश्व की 80 प्रतिशत समुद्री सतह की निगरानी करने में सक्षम होगा।

भारत में स्वास्थ्य’ सर्वेक्षण

(‘Health in India’ survey)

‘हेल्थ इन इंडिया’ सर्वे रिपोर्ट, हाल ही में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी की गयी है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • रिपोर्ट के अनुसार, पारसी समुदाय बीमारियों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील है।
  • सर्वेक्षण में, बीमारी को, किसी व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में किसी भी विचलन के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • जुलाई में जारी की गयी ‘राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण’ (National Sample Survey- NSS) के अनुसार, तत्कालीन सर्वेक्षण के दौरान 1 फीसदी पारसी समुदाय के व्यक्ति बीमारी से ग्रस्त थे।

सरसों के तेल में खाद्य तेलों के मिश्रण पर प्रतिबंध

  • FSSAI द्वारा 1 अक्टूबर 2020 से सरसों के तेल के साथ अन्य वनस्पति तेलों को मिश्रित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • यह निर्णय सरसों के तेल की शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
  • FSSAI द्वारा यह निर्णय, घरेलू खपत हेतु सरसों के तेल में मिलावट को खत्म करने के लिए, लिया गया है।

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