HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
पुरापाषाण स्थलों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- ये स्थल आमतौर पर जल स्रोतों के पास स्थित होते थे।
- पैलियोलिथिक युग के कुछ प्रसिद्ध स्थल उत्तर पश्चिम भारत में स्थित सोन घाटी और पोटवार पठार हैं।
- इस अवधि के दौरान बागवानी शुरू हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
पैलियोलिथिक या पुरापाषाणयुगीन के स्थल आमतौर पर जल स्रोतों के पास स्थित होते थे।
भारत में पुरापाषाणयुगीन के कुछ प्रसिद्ध स्थल हैं:
- उत्तर पश्चिम भारत में स्थित सोन घाटी और पोटवार पठार।
- उत्तर भारत की शिवालिक पहाड़ियाँ।
- मध्य प्रदेश में भीमपेटका।
- नर्मदा घाटी में आदमगढ़ पहाड़ी।
- आंध्र प्रदेश में कुरनूल और
- चेन्नई के पास अत्तिराम्पक्कम।
मेसोलिथिक या मध्य पाषाण युग के दौरान जानवरों को पालतू बनाना, बागवानी और आदिम खेती शुरू हुई थी।
Incorrect
उत्तर: b)
पैलियोलिथिक या पुरापाषाणयुगीन के स्थल आमतौर पर जल स्रोतों के पास स्थित होते थे।
भारत में पुरापाषाणयुगीन के कुछ प्रसिद्ध स्थल हैं:
- उत्तर पश्चिम भारत में स्थित सोन घाटी और पोटवार पठार।
- उत्तर भारत की शिवालिक पहाड़ियाँ।
- मध्य प्रदेश में भीमपेटका।
- नर्मदा घाटी में आदमगढ़ पहाड़ी।
- आंध्र प्रदेश में कुरनूल और
- चेन्नई के पास अत्तिराम्पक्कम।
मेसोलिथिक या मध्य पाषाण युग के दौरान जानवरों को पालतू बनाना, बागवानी और आदिम खेती शुरू हुई थी।
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Question 2 of 5
2. Question
आर्यावर्त, मध्यदेश और दक्षिणापथ संदर्भित करते हैं
Correct
उत्तर: c)
उत्तर वैदिक ग्रंथों में भारत के तीन हिस्सों – आर्यावर्त (उत्तरी भारत), मध्यदेश (मध्य भारत) और दक्षिणापथ (दक्षिणी भारत) का उल्लेख मिलता है।
Incorrect
उत्तर: c)
उत्तर वैदिक ग्रंथों में भारत के तीन हिस्सों – आर्यावर्त (उत्तरी भारत), मध्यदेश (मध्य भारत) और दक्षिणापथ (दक्षिणी भारत) का उल्लेख मिलता है।
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Question 3 of 5
3. Question
स्थायी बंदोबस्त के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- स्थायी बंदोबस्त एक समझौता था, जिसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा राजस्व निर्धारित किया गया था जिसे प्रत्येक जमींदार को चुकाना पड़ता था।
- स्थायी बंदोबस्त शुरू करने के पीछे राजस्व संग्रह एकमात्र उद्देश्य था और ब्रिटिश अधिकारियों का किसानों की समस्याओं को हल करने का कोई मंतव्य नहीं था।
- जब स्थायी बंदोबस्त शुरू की गयी थी तब बंगाल के गवर्नर जनरल चार्ल्स कॉर्नवॉलिस था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
स्थायी बंदोबस्त 1793 में लागू हुई थी। इसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा राजस्व निर्धारित किया गया था जिसे प्रत्येक जमींदार को चुकाना पड़ता था।
स्थायी बंदोबस्त की शुरुआत करने में, ब्रिटिश अधिकारियों ने बंगाल की विजय के बाद की समस्याओं को हल करने का प्रयास किया था। 1770 के दशक तक, बारम्बार अकाल और कृषि उत्पादन में गिरावट के कारण बंगाल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था संकट में थी। अधिकारियों को महसूस हुआ कि कृषि में निवेश को प्रोत्साहित करके कृषि, व्यापार और राज्य के राजस्व संसाधनों को विकसित किया जा सकता है।
Incorrect
उत्तर: b)
स्थायी बंदोबस्त 1793 में लागू हुई थी। इसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा राजस्व निर्धारित किया गया था जिसे प्रत्येक जमींदार को चुकाना पड़ता था।
स्थायी बंदोबस्त की शुरुआत करने में, ब्रिटिश अधिकारियों ने बंगाल की विजय के बाद की समस्याओं को हल करने का प्रयास किया था। 1770 के दशक तक, बारम्बार अकाल और कृषि उत्पादन में गिरावट के कारण बंगाल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था संकट में थी। अधिकारियों को महसूस हुआ कि कृषि में निवेश को प्रोत्साहित करके कृषि, व्यापार और राज्य के राजस्व संसाधनों को विकसित किया जा सकता है।
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Question 4 of 5
4. Question
स्थायी बंदोबस्त के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- स्थायी बंदोबस्त आरंभ में बंगाल में ही शुरू की गई थी और यह उत्तरी भारत तक ही सीमित थी।
- चार्टर एक्ट 1833 ने स्थायी बंदोबस्त को वैधानिक मान्यता प्रदान की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
स्थायी बंदोबस्त आरंभ में बंगाल और बिहार में तथा बाद में उत्तरी मद्रास और वाराणसी में शुरू की गई थी। यह प्रणाली अंततः 1 मई 1793 को जारी विनियमों की एक श्रृंखला द्वारा उत्तर भारत में लागू हो गई। ये नियम 1833 के चार्टर अधिनियम तक लागू रहे।
Incorrect
उत्तर: d)
स्थायी बंदोबस्त आरंभ में बंगाल और बिहार में तथा बाद में उत्तरी मद्रास और वाराणसी में शुरू की गई थी। यह प्रणाली अंततः 1 मई 1793 को जारी विनियमों की एक श्रृंखला द्वारा उत्तर भारत में लागू हो गई। ये नियम 1833 के चार्टर अधिनियम तक लागू रहे।
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Question 5 of 5
5. Question
रैयतवारी प्रणाली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- रैयतवारी प्रणाली ब्रिटिश भारत की एक भू-राजस्व प्रणाली थी, जिसे थॉमस मुनरो ने शुरू किया था।
- इस प्रणाली में, किसानों को भूमि का स्वामी माना जाता था और सरकार द्वारा किसानों से सीधे कर वसूला जाता था।
- रैयतवारी प्रणाली शुरू करने से, साहूकारों की भूमिका काफी हद तक कम हो गई जिससे किसानों को लाभ हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: a)
रैयतवारी प्रणाली ब्रिटिश भारत की एक भू राजस्व प्रणाली थी, जिसे 1820 में थॉमस मुनरो द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसने सरकार को राजस्व संग्रह के लिए कृषक (‘रैयत’) से सीधे संबंध स्थापित करने की अनुमति दी और किसान को खेती के लिए भूमि को अधिगृहीत करने या अधिग्रहण करने की स्वतंत्रता प्रदान की। किसानों को भूमि का स्वामी माना जाता था।
इस प्रणाली में जमींदारी व्यवस्था के समान कोई बिचौलिए मौजूद नहीं थे। लेकिन, चूंकि उच्च करों का भुगतान नकद में किया जाना था, इसलिए साहूकारों की समस्या उत्पन्न हुई। इनके द्वारा उच्च ब्याज वसूलने के कारण किसानों अत्यधिक भार उत्पन्न हो गया।
Incorrect
उत्तर: a)
रैयतवारी प्रणाली ब्रिटिश भारत की एक भू राजस्व प्रणाली थी, जिसे 1820 में थॉमस मुनरो द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसने सरकार को राजस्व संग्रह के लिए कृषक (‘रैयत’) से सीधे संबंध स्थापित करने की अनुमति दी और किसान को खेती के लिए भूमि को अधिगृहीत करने या अधिग्रहण करने की स्वतंत्रता प्रदान की। किसानों को भूमि का स्वामी माना जाता था।
इस प्रणाली में जमींदारी व्यवस्था के समान कोई बिचौलिए मौजूद नहीं थे। लेकिन, चूंकि उच्च करों का भुगतान नकद में किया जाना था, इसलिए साहूकारों की समस्या उत्पन्न हुई। इनके द्वारा उच्च ब्याज वसूलने के कारण किसानों अत्यधिक भार उत्पन्न हो गया।








