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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 September

 

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. अरब लीग

 

सामान्य अध्ययन-III

1. अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC)

2. सरकार प्रतिभूतियाँ

3. ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-सूक्ष्म वित्त संस्थानों’ (NBFC-MFIs)

4. नेट न्यूट्रैलिटी

5. पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम व नियंत्रण) प्राधिकरण

6. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘अभ्‍यास’ का सफल उड़ान परीक्षण

2. जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक

3. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कानून (संशोधन) विधेयक, 2020

4. पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX)

5. विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अरब लीग (Arab League)


अरब लीग, उत्तरी अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका तथा सऊदी अरब के आसपास अरब देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।

  • इसकी स्थापना 22 मार्च 1945 को काहिरा में छह सदस्य देशों, मिस्र, इराक़, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब और सीरिया के द्वारा की गयी थी।
  • वर्तमान में, अरब लीग में 22 सदस्य हैं, किंतु सीरिया के गृह-युद्ध के दौरान सरकारी दमन के परिणामस्वरूप, सीरिया की सदस्यता नवंबर 2011 से निलंबित कर दी गई है।
  • अरब लीग का मुख्य उद्देश्य ‘सदस्य देशों के बीच संबंधों को गहन करना और उनके मध्य सहयोग-समन्वय करना, उनकी स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा करना, और अरब देशों के मामलों और हितों के संबंध में एक सामान्य तरीके से विचार करना है’।

चर्चा का कारण

हाल ही में, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन द्वारा इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य किये जाने की प्रतिक्रिया में, फिलिस्तीनी प्राधिकारी, औपचारिक रूप से अरब लीग में एक महत्वपूर्ण भूमिका से पीछे हट गए हैं।

विवाद का विषय

संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन द्वारा 15 सितंबर को वाशिंगटन में इजराइल के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को अब्राहम एकॉर्ड’ (Abraham Accord) का नाम दिया गया है, तथा इसे ट्रम्प प्रशासन द्वारा ‘नए मध्य पूर्व की सुबह’ कहा गया है। फिलिस्तीनियों ने इस समझौते की आलोचना की है, और इसे इजराइल के अवैध कब्जे को समाप्त करने, तथा स्वतंत्र राज्य का दर्जा पाने के प्रयासों के लिए झटके के रूप में देखा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अरब लीग- गठन
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. इज़राइल- फिलिस्तीन मुद्दा
  5. दो- राष्ट्र सिद्धांत

मेंस लिंक:

इजरायल की राजधानी के रूप में जेरूसलम को अमेरिका द्वारा मान्यता दिए जाना विभिन्न हितधारकों के लिए क्या मायने रखती है? चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC)


(International Financial Services Centres)

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) घरेलू अर्थव्यवस्था के अधिकार क्षेत्र से बाहर के ग्राहकों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

  • IFSC, सीमा-पारीय वित्त प्रवाह, वित्तीय उत्पादों और सेवाओं से संबंधित होते हैं।
  • लंदन, न्यूयॉर्क और सिंगापुर को वैश्विक वित्तीय केंद्रों के रूप में गिना जा सकता है।

IFSC द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं:

  • व्यक्तियों, निगमों और सरकारों के लिए फंड जुटाने हेतु सेवाएं।
  • पेंशन फंड्स, इंश्योरेंस कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स द्वारा परिसंपत्ति प्रबंधन (Asset management) और ग्लोबल पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन (Global Portfolio Diversification)।
  • धन प्रबंधन (Wealth management)।
  • वैश्विक कर प्रबंधन और सीमा-पार कर देयता अनुकूलन (Cross-Border Tax Liability Optimization), जो वित्तीय बिचौलियों, लेखाकारों और कानूनी फर्मों के लिए एक व्यावसायिक अवसर प्रदान करते है।
  • वैश्विक और क्षेत्रीय कॉरपोरेट ट्रेजरी प्रबंधन संचालन, जिसमें, फंड जुटाना, तरलता निवेश और प्रबंधन और परिसंपत्ति-देयता मिलान करना सम्मिलित होता है।
  • बीमा और पुनर्बीमा जैसे जोखिम प्रबंधन कार्य।
  • अंतर-राष्ट्रीय निगमों के मध्य विलय और अधिग्रहण संबंधी गतिविधियाँ।

क्या IFSC को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थापित किया जा सकता है?

SEZ एक्ट, 2005 में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदन के पश्चात बाद किसी ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone- SEZ) में अथवा SEZ के रूप में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) स्थापित करने की अनुमति दी गयी है।

भारत में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र:

भारत में पहला अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC)  गांधीनगर में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (Gujarat International Finance Tec-City)- GIFT सिटी में स्थापित किया गया है।

चर्चा का कारण

  • हाल ही में, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और सिंगापुर एक्सचेंज (SGX) ने ‘NSE IFSC-SGX कनेक्ट’ के परिचालन हेतु महत्वपूर्ण शर्तों को मजबूती देते हुए एक औपचारिक समझौता किया है।
  • यह समझौता, GIFT सिटी में निफ्टी (NIFTY) उत्पादों हेतु एक बड़ा तरलता निकाय (liquidity pool) बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय और गुजरात अंतर्राष्ट्रीय वित्त टेक-सिटी (GIFT) प्रतिभागियों को एक साथ लायेगा।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. IFSCs क्या होते हैं?
  1. क्या IFSC को SEZ में स्थापित किया जा सकता है?
  2. भारत का पहला IFSC
  3. IFSC द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं?
  4. IFSC की सीमाएं

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSC)  के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

सरकारी प्रतिभूतियाँ’ क्या होती हैं?


(What are govt securities?)

सरकारी प्रति‍भूति‍ (Government Security: G-Sec), केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों द्वारा जारी किये गए ‘व्यापार किये जा सकने वाले उपकरण’ (Tradeable Instrument) होती हैं।

प्रमुख विशेषताऐं:

  • यह सरकार के ऋण दायित्वों को स्वीकार करती है।
  • ऐसी प्रतिभूतियां, अल्पकालिक (ट्रेजरी बिल – एक वर्ष से कम अवधि की मूल परिपक्वता सहित) अथवा दीर्घकालिक (सरकारी बांड या दिनांकित प्रतिभूतियां – एक वर्ष या अधिक अवधि की मूल परिपक्वता सहित) दोनों प्रकार की हो सकती हैं।
  • केंद्र सरकार, ट्रेजरी बिल और सरकारी बॉन्ड या दिनांकित प्रतिभूतियां, दोनों को जारी करती है।
  • राज्य सरकारें केवल बांड अथवा दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करती हैं, जिन्हें राज्य विकास ऋण कहा जाता है।
  • चूंकि इन्हें सरकार द्वारा जारी किया जाता है, अतः इनके डिफ़ॉल्ट होने का कोई जोखिम नहीं होता है, और इसलिए, उन्हें जोखिम-मुक्त सुरक्षित उपकरण (Gilt-Edged Instruments) कहा जाता है।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को समय-समय पर निर्धारित सीमा के भीतर G-Secs बाजार में भागीदारी हेतु अनुमति दी गयी है।

सरकारी प्रति‍भूति‍यां (G-Secs) अस्थिर क्यों मानी जाती हैं?

द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रति‍भूति‍यों (G-Secs) की कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। इनकी कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित होते हैं:

  • प्रतिभूतियों की मांग और आपूर्ति।
  • अर्थव्यवस्था के भीतर ब्याज दरों में होने वाले परिवर्तन तथा अन्य वृहत-आर्थिक कारक, जैसे तरलता और मुद्रास्फीति।
  • अन्य बाजारों, जैसे वित्त, विदेशी मुद्रा, ऋण और पूंजी बाजार में होने वाला विकास।
  • अंतर्राष्ट्रीय बॉन्ड बाजारों, विशेष रूप से यूएस ट्रेजरीज़ में होने वाला विकास।
  • RBI द्वारा किये जाने वाले नीतिगत परिवर्तन, जैसे रेपो दरों में बदलाव, नकदी-आरक्षित अनुपात और खुले बाजार के परिचालन।

चर्चा का कारण

इस वित्तीय वर्ष में, 7 अप्रैल से 22 सितंबर तक, 27 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा राज्य सरकार प्रतिभूतियों (State government securities) या राज्य विकास ऋण (SDL) के माध्यम से संचयी रूप से 3.26  लाख करोड़ रुपये की राशि जुटायी गयी है।

  • यह, वर्ष 2019-20 में समान अवधि के दौरान ऋण द्वारा जुटाई गयी राशि से 45% अधिक है।
  • तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान शीर्ष 5 ऋण लेने वाले राज्य रहे हैं। राज्यों को अब तक दिए गए कुल ऋण का 54% इन पांच राज्यों को दिया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सरकारी प्रति‍भूति‍यां (G-Secs) क्या होती हैं?
  2. अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रतिभूतियां
  3. G-Secs जारी करने के लिए केंद्र और राज्यों की शक्तियां
  4. RBI की भूमिका।
  5. इन प्रतिभूतियों की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक

मेंस लिंक:

सरकारी प्रति‍भूति‍यां (G-Secs) क्या होती हैं? इनके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-सूक्ष्म वित्त संस्थानों’ (NBFC-MFIs)


(What are non-banking financial companies-microfinance institutions (NBFC-MFIs)?)

NBFC-MFIs एक प्रकार की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (भारतीय कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत लाइसेंस प्राप्त कंपनियों के अतिरिक्त) होती है, जिसमें धन जमा करने की सुविधा नहीं होती हैNBFC-MFIs निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है:

  1. न्यूनतम निवल स्वामित्व राशि (Net Owned Funds- NOF) 5 करोड़ रु. होना अनिवार्य है। (देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में पंजीकृत NBFC-MFIs के लिए, न्यूनतम NOF के रूप में 2 करोड़ रुपये की राशि अनिवार्य)।
  2. NBFC-MFIs की निवल परिसंपत्ति में से 85% अर्हक परिसंपत्ति (Qualifying Assets) के रूप में होनी चाहिये।

‘अर्हक परिसंपत्तियां’ क्या होती हैं?

‘निवल संपत्तियां (Net assets), नकदी, बैंक में जमा राशि और मुद्रा बाजार के उपकरणों को छोड़कर कुल संपत्ति होती है।

अर्हक परिसंपत्तियां’ (Qualifying Assets), वे संपत्तियां होती हैं, जिन्हें इच्छित उपयोग अथवा बिक्री हेतु तैयार होने के लिए पर्याप्त समय लगता है। RBI द्वारा ‘अर्हक परिसंपत्तियों’ को किसी व्यक्ति या समूह को दिए गए ऋण के रूप में परिभाषित किया है।

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चर्चा का कारण

माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (MFIN) की एक रिपोर्ट के अनुसार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों- सूक्ष्म वित्त संस्थानों’ (NBFC-MFIs) द्वारा ऋण संवितरण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 96%  घटकर 570 करोड़ रु. रह गया है।

यह राशि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में ₹ 15,865 करोड़ थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NBFCs – अर्थ।
  2. प्रकार
  3. RBI के तहत NBFCs
  4. NBFC-MFI- पात्रता, कार्य।
  5. निवल स्वामित्व राशि (NOF) क्या है?
  6. अर्हक संपत्ति क्या होती हैं?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नेट न्यूट्रैलिटी


(Net Neutrality)

नेट न्यूट्रिलिटी (Net Neutrality) का अर्थ है, कि इसमें सरकारें और इंटरनेट सेवा प्रदाता, इंटरनेट पर सभी डेटा के लिए एक समान व्यवहार करते हैं तथा उपभोक्ताओं से उच्च-गुणवत्ता युक्त सेवा के लिए अथवा कुछ वेबसाइटों को प्राथमिकता देने के लिए भिन्न शुल्क नहीं देना पड़ता है।

नेटवर्क न्यूट्रैलिटी के तहत, सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) को पूरे ट्रैफ़िक के लिए समान स्तर की डेटा पहुँच तथा गति प्रदान करना आवश्यक होता है, तथा इसके अलावा, किसी सेवा अथवा वेबसाइट के लिए ट्रैफ़िक को ब्लॉक या कम नहीं किया जा सकता है।

भारत में नेट न्यूट्रैलिटी का विनियमन

  • भारतीय दूरसंचार और नियामक प्राधिकरण (Telecom and Regulatory Authority of India- TRAI) द्वारा ‘डेटा सेवाओं के लिए भेदभाव पूर्ण शुल्कों का निषेध नियम (Prohibition of Discriminatory Tariffs for Data Services Regulations)-2016 किये गए है।
  • इन नियमों के तहत, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने के लिए उपभोक्ताओं से अलग-अलग शुल्क लेने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

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चर्चा का कारण

हाल ही में, TRAI द्वारा एक बहु-हितधारक निकाय (Multi-Stakeholder Body- MSB) के गठन का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य देश में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं द्वारा नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांतों के पालन को सुनिश्चित करना है।

प्रस्तावित निकाय

संरचना:

MSB, एक ऐसा फोरम होना चाहिए, जिसमें सभी दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, सामग्री प्रदाताओं, शैक्षणिक और तकनीकी समुदाय के शोधकर्ताओं और साथ ही सरकार के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक सम्मिलित होंगे।

कार्य:

  • डेटा ट्रैफिक प्रबंधन प्रणालियों के लिए अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम विधियों हेतु तकनीकी मानकों और कार्यप्रणाली की निगरानी में दूरसंचार विभाग (DoT) की सहायता करना।
  • नेट न्यूट्रैलिटी पर सर्वोत्तम विधियों के प्रवर्तन तथा शिकायतों से निपटने में DoT की सहायता करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नेट न्यूट्रैलिटी क्या है?
  2. उदाहरण
  3. नेट न्यूट्रैलिटी पर ट्राई के दिशानिर्देश।

मेंस लिंक:

नेट न्यूट्रैलिटी से आप क्या समझते हैं? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम व नियंत्रण) प्राधिकरण


(Environment Pollution (Prevention and Control) Authority)

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (Environment Pollution Control Authority- EPCA) उच्चत्तम न्यायालय के आदेश द्वारा अधिसूचित एक निकाय है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण समस्या समाधान हेतु उपाय सुझाने का कार्य करता है।

EPCA को वर्ष 1998 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया था।

EPCA की संरचना:

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) में अध्यक्ष के अतिरिक्त 14 सदस्य होते हैं, जिनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (NCT) के पर्यावरण सचिव, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष, NCT के परिवहन आयुक्त, दिल्ली के विभिन्न नगर निगमों के आयुक्त और IIT दिल्ली और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सम्मिलित होते हैं।

शक्तियां:

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लेकर, अथवा पर्यावरण क्षेत्र में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति, प्रतिनिधि निकाय या संगठन द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर कार्यवाही कर सकता है।

कार्य:

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार और पर्यावरण प्रदूषण को रोकना और नियंत्रित करना।
  • प्रदूषण के स्तर के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP) लागू करना।

चर्चा का कारण

  • हाल ही में, EPCA द्वारा पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों को पत्र द्वारा सूचित किया गया है, कि संबंधित राज्यों में फसल अवशिष्टों को समयपूर्व जलाए जाने का कार्य किया का रहा है, तथा EPCA ने इस विषय को ‘तत्काल’ हल किये जाने का आग्रह किया है।
  • पत्र में कहा गया है, कि हवा की दिशा के कारण अगले तीन दिनों तक दिल्ली में फसल अवशिष्ट दहन (Stubble Burning) का कम प्रभाव पड़ेगा।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्या EPCA एक वैधानिक निकाय है?
  1. इसकी स्थापना कब और क्यों की गई?
  2. शक्तियाँ और कार्य
  3. संरचना
  4. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) क्या है?

मेंस लिंक:

फसल अवशिष्ट दहन (Stubble Burning) क्या है? यह चिंता का कारण क्यों है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)


(National Investigation Agency)

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (National Investigation AgencyNIA) को आमतौर पर ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी’ (NIA) के नाम से जाना जाता है।

यह निम्नलिखित मामलों में अपराधों की जाँच करने तथा अभियोग चलाने हेतु एक केंद्रीय एजेंसी है:

  1. भारत की संप्रभुता, सुरक्षा एवं अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध को प्रभावित करने वाले अपराध।
  2. परमाणु और परमाणु प्रतिष्ठानों के विरुद्ध अपराध।
  3. उच्च गुणवत्तायुक्त नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी।

इसके अतिरिक्त NIA ‘केंद्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी’ (Central Counter Terrorism Law Enforcement Agency) के रूप में भी कार्य करती है।

  • इसे राज्यों की विशेष अनुमति के बगैर, राज्यों में आतंकवाद संबंधित अपराधों से निपटने हेतु शक्ति प्राप्त है।
  • NIA की स्थापना राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम 2008 के तहत की गयी है।
  • यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।

अधिकार-क्षेत्र

  • राज्य सरकार, किसी मामले की जांच को NIA के लिए सौंपने हेतु केंद्र सरकार से आग्रह कर सकती है, बशर्ते ‘मामला’ NIA अधिनियम की अनुसूची में निहित अपराधों के अंर्तगत आता हो।
  • केंद्र सरकार, NIA के लिए भारत में कहीं भी और किसी भी अधिसूचित अपराध की जांच करने का आदेश भी दे सकती है।

संरचना:

‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी’ (NIA) के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय राजस्व सेवा से लिया जाता है।

NIA विशेष न्यायालय (Special Courts)

केंद्र सरकार NIA अधिनियम के तहत कई विशेष न्यायालयों को अधिसूचित किया गया है।

  • किसी विशेष न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर किसी भी प्रश्न की स्थिति में इसे केंद्र सरकार द्वारा निर्णय किया जाता है।
  • विशेष न्यायालय की अध्यक्षता एक न्यायाधीश द्वारा की जाती है जिसकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा संबंधित क्षेत्र के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पर की जाती है।
  • भारत के उच्चत्तम न्यायालय को किसी विशेष न्यायालय के समक्ष लंबित किसी मामले को, उस राज्य के अथवा किसी अन्य राज्य के, विशेष न्यायालय को स्थांतरित करने की शक्ति प्राप्त है।

NIA विशेष न्यायालयों की शक्तियां

NIA के विशेष न्यायालयों को किसी भी अपराध की सुनवाई के लिए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत सत्र न्यायालयों की शक्तियां व अधिकार प्राप्त हैं।

अपील:

विशेष न्यायालय के, किसी भी निर्णय, सजा या आदेश, के विरुद्ध तथ्यों और कानून पर आधारित अपील उच्च न्यायालय में की जा सकती है। राज्य सरकारों को भी अपने राज्यों में एक या एक से अधिक विशेष अदालतों को नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।

चर्चा का कारण

हाल ही में, सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ (NIA) को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत अपराधों की जांच करने का अधिकार दिया गया है।

  • इसका उद्देश्य, आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान सामने आने वाले ड्रग व्यापार संबंधों को उजागर करने के लिए स्थानीय पुलिस पर एजेंसी की निर्भरता समाप्त करना है।
  • इंस्पेक्टर रैंक और उससे ऊपर के NIA अधिकारियों को NDPS कानून 1985 के तहत एक थाने के प्रभारी अधिकारी के सामान शक्तियों दी गयी है।

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स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अभ्‍यास’ का सफल उड़ान परीक्षण

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा अभ्यास (ABHYAS)- हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (High-speed Expendable Aerial TargetHEAT) का सफल उड़ान परीक्षण ओडिशा के अंतरिम परीक्षण रेंज, बालासोर से किया गया।

प्रमुख विशेषताऐं:

अभ्यास को वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (Aeronautical Development Establishment- ADE), DRDO द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।

  • हवाई वाहन को ट्विन अंडरस्लैंग बूस्टर (underslung booster) का उपयोग करके लॉन्च किया गया है। यह एक छोटे गैस टरबाइन इंजन द्वारा संचालित है और इसमें मार्गदर्शन और नियंत्रण के लिए उड़ान नियंत्रण कंप्यूटर (FCC) के साथ नेविगेशन के लिए MEMS आधारित इनरट्रियल नेविगेशन सिस्टम (INS) लगा हुआ है।
  • वाहन को पूरी तरह से स्वायत्त उड़ान के लिए क्रमादेशित किया गया है।
  • वाहन का उपयोग विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के मूल्यांकन के लिए लक्ष्य के रूप में किया जा सकता है।

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जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक

लोकसभा में मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से संबंधित आधिकारिक भाषा विधेयक पारित हो गया। इसमें आधिकारिक भाषा के रूप में कश्मीरी, डोगरी और हिंदी के अलावा मौजूदा उर्दू और अंग्रेजी को भी सम्मिलित किया गया है।

इससे पहले, पूर्व राज्य में केवल अंग्रेजी और उर्दू आधिकारिक भाषाएं थीं।

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कानून (संशोधन) विधेयक, 2020

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह विधेयक सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला तथा रायचूर स्थित 5 IIITs को IIITs (PPP) अधिनियम, 2017 के तहत पहले से मौजूद 15 IIITs के साथ वैधानिक दर्जा देते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मोड में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में घोषित करेगा।
  • आईआईआईटी कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 इन संस्थानों को किसी विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की भांति बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (Tech) या मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (M.Tech) या पीएचडी डिग्री जारी करने का अधिकार देगा।

पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX)

  • भारतीय नौसेना द्वारा 23 से 24 सितंबर 20 के मध्य पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना (RAN) के साथ एक मार्ग अभ्यास (PASSEX) किया जायेगा।
  • भारतीय नौसेना द्वारा PASSEX का संचालन नियमित रूप से मित्र विदेशी नौसेनाओं के साथ किया जाता है।

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विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day)

प्रतिवर्ष 22 सितंबर को गैंडों की सुरक्षा और संरक्षण हेतु जागरूकता फैलाने के लिये विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है।

  • यह दिवस विशेष रूप से गैंडे की पाँच प्रजातियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। यह पाँच प्रजातियाँ हैं काला , सफेद, एक-श्रंगी (greater one-horned) एवं सुमात्रा और जावा राइनो।
  • विश्व गैंडा दिवस की सर्वप्रथम घोषणा वर्ष 2010 में वन्यजीव कोष (WWF) द्वारा की गई थी।

IUCN स्थिति:

  • घोर-संकटग्रस्त (Critically Endangered) प्रजातियां: जावा गैंडा, सुमात्रा गैंडा और काले गैंडा।
  • सफ़ेद गैंडों को संकट-निकट (Near Threatened)– घोषित किया गया है, जबकि एक सींग वाले गैंडों को विलुप्त होने की कगार पर असुरक्षित (Vulnerable) बताया गया है।

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