HINDI - INSIGHTS CURRENT EVENTS QUIZ 2020
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Welcome to Current Affairs Quiz in HINDI Medium. Hope you are happy with our Hindi Current Affairs. The following Quiz is based on the Hindu, PIB and other news sources. It is a current events based quiz. Solving these questions will help retain both concepts and facts relevant to UPSC IAS civil services exam – 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
1 pointsहाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड –19 संकट के दौरान ऑनलाइन शिक्षा
प्रदान करने में सहायता करने हेतु स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह (DG) वर्गों को गैजेट और इंटरनेट एक्सेस प्रदान करने हेतु आदेश दिया। इस संदर्भ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल आरटीई अधिनियम के तहत सरकार से गैजेट और इंटरनेट पैकेज की खरीद के लिए कुछ प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं।
- आरटीई अधिनियम समाज के वंचित वर्गों के लिए 35% आरक्षण को अनिवार्य बनाता है।
- आरटीई अधिनियम गैर-प्रवेश दिए गए बच्चे के लिए उचित आयु कक्षा में प्रवेश किए जाने का प्रावधान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: b)
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड -19 संकट के दौरान ऑनलाइन शिक्षा में सहायता के लिए स्कूलों (निजी और सरकारी दोनों) को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह (DG) वर्गों के छात्रों को गैजेट और इंटरनेट एक्सेस प्रदान करने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल आरटीई अधिनियम की धारा 12 (2) के तहत सरकार से गैजेट और इंटरनेट पैकेज की खरीद के लिए उचित लागत की प्रतिपूर्ति के दावे के हकदार होंगे।
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 समाज के वंचित वर्गों के लिए 25% आरक्षण को अनिवार्य बनाता है।
यह गैर-प्रवेश दिए गए बच्चे के लिए उचित आयु कक्षा में प्रवेश किए जाने का प्रावधान करता है।
Incorrect
उत्तर: b)
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड -19 संकट के दौरान ऑनलाइन शिक्षा में सहायता के लिए स्कूलों (निजी और सरकारी दोनों) को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह (DG) वर्गों के छात्रों को गैजेट और इंटरनेट एक्सेस प्रदान करने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल आरटीई अधिनियम की धारा 12 (2) के तहत सरकार से गैजेट और इंटरनेट पैकेज की खरीद के लिए उचित लागत की प्रतिपूर्ति के दावे के हकदार होंगे।
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 समाज के वंचित वर्गों के लिए 25% आरक्षण को अनिवार्य बनाता है।
यह गैर-प्रवेश दिए गए बच्चे के लिए उचित आयु कक्षा में प्रवेश किए जाने का प्रावधान करता है।
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Question 2 of 5
2. Question
1 pointsसिंधु जल संधि के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल-वितरण संधि है, जिसके लिए विश्व बैंक द्वारा मध्यस्थता की गई थी और इस पर भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद हस्ताक्षर किए गए थे।
- इस संधि के तहत, भारत के पास पश्चिमी नदियों नामतः सिंधु, चिनाब और झेलम के जल का उपयोग करने का कोई नियंत्रण और अधिकार नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
सिंधु जल संधि एक जल-वितरण संधि है, जिस पर 1960 में कराची में भारत (प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू) और पाकिस्तान (राष्ट्रपति अयूब खान) के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थतासे हस्ताक्षर किए गए थे।
इस संधि के तहत, भारत का पूर्वी नदियों नामत: ब्यास, रावी और सतलज नदियों के जल पर नियंत्रण है।
पाकिस्तान का पश्चिमी नदियों-सिंधु, चिनाब और झेलम पर नियंत्रण है।
भारत को सिंचाई, विद्युत उत्पादन और परिवहन उद्देश्यों के लिए पश्चिमी नदियों के 20% जल का उपयोग करने की अनुमति है।
इसने भारत को पश्चिमी नदियों पर 3.6 मिलियन एकड़ फीट (MAF) की “अनुमेय भंडारण क्षमता“ प्रदान की।
यह संधि दोनों देशों के बीच नदियों के उपयोग के संबंध में सहयोग और सूचना विनिमय के लिए एक तंत्र स्थापित करती है।
Incorrect
उत्तर: c)
सिंधु जल संधि एक जल-वितरण संधि है, जिस पर 1960 में कराची में भारत (प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू) और पाकिस्तान (राष्ट्रपति अयूब खान) के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थतासे हस्ताक्षर किए गए थे।
इस संधि के तहत, भारत का पूर्वी नदियों नामत: ब्यास, रावी और सतलज नदियों के जल पर नियंत्रण है।
पाकिस्तान का पश्चिमी नदियों-सिंधु, चिनाब और झेलम पर नियंत्रण है।
भारत को सिंचाई, विद्युत उत्पादन और परिवहन उद्देश्यों के लिए पश्चिमी नदियों के 20% जल का उपयोग करने की अनुमति है।
इसने भारत को पश्चिमी नदियों पर 3.6 मिलियन एकड़ फीट (MAF) की “अनुमेय भंडारण क्षमता“ प्रदान की।
यह संधि दोनों देशों के बीच नदियों के उपयोग के संबंध में सहयोग और सूचना विनिमय के लिए एक तंत्र स्थापित करती है।
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Question 3 of 5
3. Question
1 pointsसिंधु नदी बेसिन निम्नलिखित में से किन देशों में विस्तृत है?
- भारत
- पाकिस्तान
- चीन
- अफगानिस्तान
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
सिंधु नदी बेसिन का कुल क्षेत्रफल 1.12 मिलियन किमी है जो पाकिस्तान (47 प्रतिशत), भारत (39 प्रतिशत), चीन (8 प्रतिशत) और अफगानिस्तान (6 प्रतिशत) के बीच विस्तृत है।
Incorrect
उत्तर: d)
सिंधु नदी बेसिन का कुल क्षेत्रफल 1.12 मिलियन किमी है जो पाकिस्तान (47 प्रतिशत), भारत (39 प्रतिशत), चीन (8 प्रतिशत) और अफगानिस्तान (6 प्रतिशत) के बीच विस्तृत है।
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Question 4 of 5
4. Question
1 pointsनिम्नलिखित टाइगर रिज़र्व और उनके स्थान को सुमेल्लित कीजिए
टाइगर रिजर्व स्थान
- कॉर्बेट टाइगर रिजर्व A. मिजोरम
- बक्सा टाइगर रिजर्व B. तेलंगाना
- अमराबाद टाइगर रिजर्व C. उत्तराखंड
- डम्पा टाइगर रिजर्व D. पश्चिम बंगाल
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: c)
Incorrect
उत्तर: c)
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Question 5 of 5
5. Question
1 pointsखाद्य और कृषि के लिए वनस्पति आनुवंशिक संसाधनों की अंतर्राष्ट्रीय संधि (International Treaty of Plant Genetic Resources for Food and Agriculture: ITPGRFA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह खाद्य और कृषि के लिए विश्व के पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, विनिमय और संधारणीय उपयोग के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राप्तकर्ता उन लाभों को साझा करें, जिन्हें वे उन देशों के पादप आनुवंशिक सामग्री के उपयोग से प्राप्त करते हैं जहां वे उत्पन्न हुए हैं।
- पादप आनुवंशिक सामग्रियों का उपयोग करने हेतु संधि की पुष्टि करना अनिवार्य नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: a)
3 नवंबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के सम्मेलन के 31वें सत्र द्वारा खाद्य और कृषि के लिए वनस्पति आनुवंशिक संसाधनों की अंतर्राष्ट्रीय संधि (International Treaty of Plant Genetic Resources for Food and Agriculture: ITPGRFA) को अपनाया गया था।
इसे बीज संधि के रूप में भी जाना जाता है, खाद्य और कृषि के लिए दुनिया के पादप आनुवंशिक संसाधनों (PGRFA) के संरक्षण, विनिमय और स्थायी उपयोग के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है।
संधि का उद्देश्य है:
किसानों, पादप प्रजनकों और वैज्ञानिकों को आनुवंशिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए एक वैश्विक प्रणाली स्थापित करना;
इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राप्तकर्ता उन लाभों को साझा करें, जिन्हें वे उन देशों के पादप आनुवंशिक सामग्री के उपयोग से प्राप्त करते हैं जहां वे उत्पन्न हुए हैं।
पहुंच और लाभ साझाकरण: संधि भोजन और कृषि के लिए अनुसंधान, उत्पादन और प्रशिक्षण के लिए बहुपक्षीय प्रणाली में 64 फसलों की आनुवंशिक सामग्री तक पहुंच की सुविधा प्रदान करती है। सामग्री का उपयोग करने वालों को संधि के अनुसमर्थक देश होना चाहिए और उसे खाद्य और कृषि के लिए अनुसंधान, उत्पादक और प्रशिक्षण के लिए पूरी तरह से सामग्री का उपयोग करने के लिए सहमत होना चाहिए। संधि आनुवंशिक संसाधनों के प्राप्तकर्ताओं को उन संसाधनों पर बौद्धिक संपदा अधिकारों का दावा प्राप्त करने से रोकती है, जहाँ से वे इन्हें प्राप्त करते हैं।
Incorrect
उत्तर: a)
3 नवंबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के सम्मेलन के 31वें सत्र द्वारा खाद्य और कृषि के लिए वनस्पति आनुवंशिक संसाधनों की अंतर्राष्ट्रीय संधि (International Treaty of Plant Genetic Resources for Food and Agriculture: ITPGRFA) को अपनाया गया था।
इसे बीज संधि के रूप में भी जाना जाता है, खाद्य और कृषि के लिए दुनिया के पादप आनुवंशिक संसाधनों (PGRFA) के संरक्षण, विनिमय और स्थायी उपयोग के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है।
संधि का उद्देश्य है:
किसानों, पादप प्रजनकों और वैज्ञानिकों को आनुवंशिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए एक वैश्विक प्रणाली स्थापित करना;
इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राप्तकर्ता उन लाभों को साझा करें, जिन्हें वे उन देशों के पादप आनुवंशिक सामग्री के उपयोग से प्राप्त करते हैं जहां वे उत्पन्न हुए हैं।
पहुंच और लाभ साझाकरण: संधि भोजन और कृषि के लिए अनुसंधान, उत्पादन और प्रशिक्षण के लिए बहुपक्षीय प्रणाली में 64 फसलों की आनुवंशिक सामग्री तक पहुंच की सुविधा प्रदान करती है। सामग्री का उपयोग करने वालों को संधि के अनुसमर्थक देश होना चाहिए और उसे खाद्य और कृषि के लिए अनुसंधान, उत्पादक और प्रशिक्षण के लिए पूरी तरह से सामग्री का उपयोग करने के लिए सहमत होना चाहिए। संधि आनुवंशिक संसाधनों के प्राप्तकर्ताओं को उन संसाधनों पर बौद्धिक संपदा अधिकारों का दावा प्राप्त करने से रोकती है, जहाँ से वे इन्हें प्राप्त करते हैं।









