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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 22 September

 

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. सांसदों का सदन से निलंबन

2. प्रवर समितियों की भूमिकाएँ और सीमाएँ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बेसल III अनुपालन बांड

2. CAROTAR 2020 नियम

3. भारत द्वारा अनुमोदित कोविड-19 हेतु ‘फेलूदा’ परीक्षण

4. NHAI द्वारा राजमार्गों के मुद्रीकरण की योजना

5. सरकारी गोपनीयता अधिनियम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बोंडा जनजाति एवं दिदाई जनजाति

2. ब्रूसेलोसिस (Brucellosis)

3. तस्मानिया में पायलट व्हेल

4. बोत्सवाना में 330 हाथियों की मौत का कारण ‘साइनोबैक्टीरिया’

5. वज्र (विजिटिंग एडवांस जॉइंट रिसर्च) फैकल्टी स्कीम

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

सांसदों का सदन से निलंबन


चर्चा का कारण

21 सितंबर को सदन में अनियंत्रित व्यवहार करने के कारण आठ राज्यसभा सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। सरकार द्वारा इन सांसदों के निलंबन की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया गया तथा इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

राज्यसभा सांसदों को निलंबित करने की शक्ति:

  • राज्यसभा अध्यक्ष, नियम संख्या 255 के तहत ‘अपनी राय में किसी भी सदस्य के आचरण को अत्यंत नियम-विरुद्ध पाए जाने पर, उसे तत्काल सदन से बाहर जाने के लिए निर्देशित कर सकते हैं।‘
  • हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष के विपरीत, राज्यसभा के सभापति को किसी सदस्य को निलंबित करने की शक्ति प्राप्त नहीं है। सदन, एक अन्य प्रस्ताव के द्वारा, सदस्य का निलंबन समाप्त कर सकता है।
  • सदन, किसी सदस्य के लिए, अधितकम, चालू सत्र की शेष अवधि तक ही निलंबित करने संबंधी प्रस्ताव पारित कर सकता है।

पृष्ठभूमि

सदन में सुचारू रूप से कार्यवाही जारी रखने हेतु व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व व भूमिका, सदन के पीठासीन अधिकारी – लोकसभा अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति– की होती है।

सांसदों के निलंबन को किस प्रकार न्यायोचित ठहराया जा सकता है?

सांसदों के अनियंत्रित व्यवहार का समाधान दीर्घकालिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।

  • इस पर कोई प्रश्न नहीं है, कि सदन में कार्यवाही के सुचारू ढंग से संचालन के लिए पीठासीन अधिकारी के सर्वोच्च अधिकार का प्रवर्तन आवश्यक है। हालाँकि, इसमें एक संतुलन बनाना होगा। यह याद रखना चाहिए कि पीठासीन अधिकारी का कार्य सदन का संचालन करना है, न कि उस पर प्रभुता स्थापित करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सांसदों को निलंबित करने व निलंबन रद्द करने संबंधी शक्तियां।
  2. इस संबंध में लोकसभा और राज्यसभा की प्रक्रियाओं में अंतर।
  3. सांसदों के निर्वाचन के संबंध में अपील।
  4. इस संबंध में नियम।

मेंस लिंक:

सांसदों के अनियंत्रित व्यवहार का समाधान दीर्घकालिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

प्रवर समितियों की भूमिकाएँ और सीमाएँ


(Roles and limitations of Select Committees)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा विपक्ष की मांगों को खारिज करते हुए राज्यसभा में दो महत्वपूर्ण कृषि विधेयकों को पारित करा दिया गया। विपक्ष कृषि विधेयकों को राज्यसभा की एक प्रवर समिति (Select Committee) को भेजने की मांग कर रहा था।

विपक्ष द्वारा, विधेयक की संसदीय समिति द्वारा जांच नहीं कराये जाने का विरोध किया जा रहा था, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

प्रवर समिति क्या होती है?

प्रवर समिति (Select Committee) का गठन किसी विधेयक विशेष की जांच के लिए किया जाता है और संबंधित सदन के सांसद ही प्रवर समिति के सदस्य हो सकते है।

  • प्रवर समिति की अध्यक्षता सत्ताधारी दल के सांसद द्वारा की जाती है।
  • चूंकि प्रवर समितियों का गठन एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जाता है, अतः इन्हें, इनकी रिपोर्ट आने के पश्चात भंग कर दिया जाता है।

पृष्ठभूमि

संसद, दो तरीकों से विधायी प्रस्तावों (विधेयकों) की जांच करती है:

  1. दोनों सदनों में विधेयकों पर चर्चा करके: यह एक विधायी अनिवार्यता होती है; सभी विधेयकों को बहस के लिए दोनों सदनों में लाया जाता है।
  2. विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजकर:
  • चूंकि, संसद, वर्ष में 70 से 80 दिनों तक बैठक करती है, इसलिए सदन के पटल पर प्रत्येक विधेयक पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है। ऐसे स्थिति में, विधेयक को एक संसदीय समिति के पास भेजा जाता है।
  • विधेयकों को संसदीय समितियों के पास भेजना अनिवार्य नहीं होता है।

समिति द्वारा विधेयक की जांच कब की जाती है?

विधेयकों को परीक्षण हेतु स्वचालित रूप से समितियों के पास नहीं भेजा जाता है।

इसे तीन विधियों से एक समिति के लिए संदर्भित किया जाता है। ये विधियां निम्नलिखित हैं:

  1. जब विधेयक को पेश करने वाले मंत्री के द्वारा सदन को सलाह दी जाती है, कि इसकी जांच सदन की प्रवर समिति या दोनों सदनों की संयुक्त समिति द्वारा की जानी चाहिए।
  2. यदि मंत्री इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं करता है, तो यह सदन के पीठासीन अधिकारी पर निर्भर करता है कि विधेयक को विभाग से संबंधित स्थायी समिति के लिए भेजे अथवा नहीं।
  3. इसके अतिरिक्त, एक सदन द्वारा पारित किसी विधेयक को दूसरे सदन द्वारा अपनी प्रवर समिति को भेजा जा सकता है।

विधेयक को एक समिति के पास भेजने के बाद की प्रक्रिया

  1. समिति, विधेयक का विस्तृत परीक्षण करती है।
  2. यह विशेषज्ञों, हितधारकों और नागरिकों से टिप्पणियों और सुझावों को आमंत्रित करती है।
  3. सरकार भी अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित होती है।
  4. इस सब को सम्मिलित करते हुए एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) में विधेयक को मजबूत बनाने संबंधी सुझाव दिए जाते है।
  5. समिति की रिपोर्ट एक अनुशंसात्मक प्रकृति की होती है।

प्रतिवेदन  हेतु समय सीमा

समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट पेश करने के बाद ही विधेयक पर संसद में प्रगति हो सकती है। आमतौर पर, संसदीय समितियों को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होती है, लेकिन कभी-कभी इसमें अधिक समय लग सकता है।

इंस्टा फैक्ट्स:

वर्तमान लोकसभा में, 17 विधेयकों को समितियों के लिए भेजा गया है।

16 वीं लोकसभा (2014-19) में, 25% विधेयकों को समितियों को संदर्भित किया गया था, जो कि क्रमशः 15 वीं और 14 वीं लोकसभा के 71% और 60% विधेयकों से काफी कम थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसदीय तथा मंत्रिमंडल समितियों के बीच अंतर।
  2. तदर्थ बनाम प्रवर बनाम वित्त समितियां।
  3. इन समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?
  4. केवल लोकसभा के लिए विशिष्ट समितियां
  5. लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली समितियाँ

 मेंस लिंक:

संसदीय स्थायी समितियाँ क्या हैं? वे क्यों आवश्यक हैं? उनकी भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

बेसल III अनुपालन बांड


(Basel III compliant bonds)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा बेसल III अनुपालन बांड (Basel III compliant bonds) जारी करके  7,000 करोड़ रु. की राशि जुटाई गयी है।

प्रमुख बिंदु:

  • जारी किए गए बांड्स के लिए बैंक की टियर II पूंजी के रूप में अर्हता प्राप्त है, और प्रत्येक बांड की कीमत 10 लाख रुपये है।
  • इन बांड पर 10 वर्ष की अवधि के लिए प्रतिवर्ष 24 प्रतिशत की ब्याज दर (Coupon Rate) अदा की जायेगी।
  • इन बांड पर 5 वर्ष बाद और उसके बाद वर्षगांठ पर ‘क्रय विकल्प’ (call option) दिया गया है। कॉल ऑप्शन का मतलब है कि बॉन्ड जारीकर्ता निवेशकों को मूल राशि वापस करके परिपक्वता तिथि से पहले बॉन्ड वापस क्रय कर सकता है।

बेसल दिशानिर्देश क्या हैं?

बेसल दिशानिर्देश (Basel guidelines), बैंकिंग निगरानी पर बेसल समिति (Basel Committee on Banking Supervision BCBS) नामक केंद्रीय बैंकों के एक समूह द्वारा तैयार किए गए व्यापक पर्यवेक्षी मानक हैं। BCBS द्वारा तैयार किए गए मानक मुख्य रूप से बैंकों के लिए ‘जोखिम’ पर केंद्रित है और इस मानक वित्तीय प्रणाली को बेसल समझौता (Basel accord) कहा जाता है।

  • बेसल, स्विट्जरलैंड का एक शहर है, यहाँ पर ब्यूरो ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट (Bureau of International Settlement– BIS) का मुख्यालय अवस्थित है।
  • बेसल समझौते का उद्देश्य, वित्तीय संस्थानों के पास अप्रत्याशित नुकसान को सहन करने तथा दायित्वों को पूरा करने हेतु पर्याप्त पूंजी सुनिश्चित करना है।

बेसल– I

  • 1988 में लागू किये गए।
  • ये लगभग पूरी तरह से ऋण जोखिम पर केंद्रित थे, और इसमें बैंकों के लिए पूंजी तथा जोखिम भार संरचना को परिभाषित किया गया था।
  • इसमें, ‘न्यूनतम पूंजी आवश्यकता’ को जोखिम-भारित संपत्ति (Risk-Weighted Assets- RWA) का 8% निर्धारित किया गया था।
  • भारत ने वर्ष 1999 में बेसल-I दिशानिर्देशों को लागू किया था।

बेसलII:

वर्ष 2004 में प्रकाशित किये गए।

बेसल-II दिशानिर्देश तीन मानदंडो पर आधारित थे:

  • बैंकों को जोखिम परिसंपत्तियों की 8% की न्यूनतम पूंजी पर्याप्तता आवश्यकता को बनाए रखना चाहिए।
  • बैंकों के लिए ऋण और बढ़ी हुई प्रकटीकरण आवश्यकताओं के सभी तीन प्रकार के जोखिमों की निगरानी और प्रबंधन में बेहतर जोखिम प्रबंधन तकनीकों को विकसित करने और उपयोग करने की आवश्यकता थी। तीन प्रकार के जोखिम हैं- ऑपरेशनल रिस्क, मार्केट रिस्क, कैपिटल रिस्क।
  • बैंकों को केंद्रीय बैंक के समक्ष अपने जोखिम का खुलासा करना अनिवार्य है।

बेसल-III:

बेसल III दिशानिर्देश वर्ष  2010 में जारी किए गए थे। ये दिशानिर्देश 2008 के वित्तीय संकट के प्रत्युत्तर में पेश किए गए थे।

  • बेसल III मानदंड का उद्देश्य अधिकांश बैंकिंग गतिविधियों जैसे उनकी ट्रेडिंग बुक गतिविधियों को अधिक पूंजी-गहन बनाना है।
  • दिशानिर्देशों का उद्देश्य र महत्वपूर्ण बैंकिंग मापदंडों अर्थात पूंजी (capital), उत्तोलन (leverage), वित्त पोषण (funding) और तरलता (liquidity) पर ध्यान केंद्रित करके अधिक प्रत्यास्थ बैंकिंग प्रणाली को बढ़ावा देना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बेसल मानदंड क्या हैं?
  2. बेसल कहाँ अवस्थित है?
  3. बैंकिंग निगरानी पर बेसल समिति (BCBS): संरचना और कार्य
  4. ब्यूरो ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट (BIS) के बारे में
  5. बेसल 1,2 और 3 मानदंडों का अवलोकन

मेंस लिंक:

बेसल मानकों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

CAROTAR 2020 नियम


संदर्भ:

21 सितंबर से ‘सीमा शुल्क (व्यापार समझौतों के अंतर्गत ‘उत्पत्ति नियमों’ का प्रशासन) नियम’, 2020 [Customs (Administration of Rules of Origin under Trade Agreements) RulesCAROTAR 2020] लागू किया गया है।

ये नियम क्या हैं?

  • ये नियम, मुक्त व्यापार समझौतों के तहत आयात पर अधिमानी शुल्क-दर की अनुमति देने हेतु ‘उत्पत्ति नियमों’ (Rules of Origin) के प्रवर्तन के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करते हैं।
  • ये विभिन्न व्यापार समझौतों (FTA/ PTA/ CECA/ CEPA) के अंतर्गत पहले से क्रियान्वित परिचालन प्रमाणन प्रक्रिया के पूरक नियम हैं।

पृष्ठभूमि

CAROTAR 2020 नियमों को राजस्व विभाग द्वारा 21 अगस्त, 2020 को अधिसूचित किया गया था। इसके लिए आयातकों और अन्य हितधारकों को नए प्रावधानों के साथ अभ्यस्त होने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था।

CAROTAR नियम:

  • अब आयातक को किसी भी वस्तु का आयात करने से पहले अपेक्षित सतर्कता दिखते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस स्थान से आयात किया जा रहा है वह निर्धारित मापदंड को पूरा कर रहा है या नहीं।
  • सामान्य दिशा निर्देशों के साथ-साथ आयातकों के उपयोग हेतु संक्षिप्त जनकारियों की सूची, जिसे आयातक के पास होना आवश्यक है, को भी इन नियमों में शामिल किया गया है।
  • आयातक को अब उत्पत्ति प्रमाण पत्र में उपलब्ध बिल ऑफ एंट्री में वस्तु उत्पादन स्थल के संबंध में भी सूचनाएँ देनी होंगी।

निहितार्थ:

  • नए मानदंडों को कम गुणवत्ता वाले उत्पादों के आने वाले शिपमेंट और एक FTA भागीदार देश के माध्यम से तीसरे देश द्वारा माल की डंपिंग की जांच करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
  • इन नियमों के तहत, भारत के साथ FTA पर हस्ताक्षर करने वाला देश,  किसी उत्पाद पर एक लेबल लगाकर भारतीय बाजार में किसी तीसरे देश से माल नहीं डंप कर सकता है।

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इन नियमों का महत्व:

  • नए नियमों से उत्पादक देश के बारे में पता लगाने में आसानी होगी साथ ही सीमा शुल्क में छूट के दावों में आसानी होगी और एफ़टीए के अंतर्गत सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा सहज अनुमति में सहूलियत होगी।
  • नए नियमों की मदद से सीमा शुल्क विभाग के हाथ मजबूत होंगे और विभिन्न व्यापार समझौतों के तहत सीमा शुल्क में छूट का गलत लाभ लेने की कोशिशों पर लगाम लगेगी।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

भारत द्वारा अनुमोदित कोविड-19 हेतु फेलूदापरीक्षण


(What is the ‘Feluda’ test for Covid-19 approved by India?)

फेलूदा, FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay (Feluda) का संक्षिप्त रूप है।

  • यह 30 मिनट से भी कम समय में कोविड-19 का सटीकता से पता लगाने हेतु एक कम लागत वाला पेपर स्ट्रिप टेस्ट’ (Paper Strip Test) है।
  • हाल ही में, इसे भारतीय औषधि महानियंत्रक (Drug Controller General of India– DCGI) द्वारा वाणिज्यिक रूप से शुरू करने के लिए अनुमोदित किया गया है।
  • फेलुदा टेस्ट को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और टाटा समूह द्वारा विकसित किया गया है।

क्रियाविधि

यह कोविड-19 के मूल वायरस SARS-CoV2 की आनुवंशिक पदार्थों को पहचानने और से लक्षित करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित CRISPR जीन-एडिटिंग तकनीक का उपयोग करता है।

महत्व

  • CSIR के अनुसार, इस परीक्षण के परिणाम सटीकता में RT-PCR परीक्षणों के समान है।
  • इस परीक्षण का प्रतिवर्तन काल (Turnaround Time) काफी तीव्र है और इसके लिए कम खर्चीले उपकरण की आवश्यकता होती है।
  • फेलूदापरीक्षण को TATA CRISPER परीक्षण भी कहा जाता है, और यह कोविड-19 के जनक वायरस का सफलतापूर्वक पता लगाने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित Ca9 प्रोटीन को तैनात करने वाला विश्व का पहला नैदानिक ​​परीक्षण परीक्षण भी है।

CRISPR तकनीक क्या है?

‘क्लस्टर्ड रेगुलेटरी इंटरसेप्टर शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट’ (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats CRISPR) एक जीन एडिटिंग तकनीक है, इसका उपयोग आनुवांशिक दोषों को ठीक करने और रोगों के प्रसार को रोकने और उपचार करने में किया जाता है।

  • इस तकनीक से किसी जीन के भीतर DNA के विशिष्ट अनुक्रमों का पता लगाया जा सकता है और इन्हें अलग करने के लिए, इस तकनीक में, आणविक कैंची के रूप में कार्य करने वाले एंजाइम का उपयोग किया जाता है।
  • यह तकनीक शोधकर्ताओं को DNA अनुक्रमों को आसानी से बदलने और जीन फ़ंक्शन को संशोधित करने में सक्षम बनाती है।
  • इस प्रौद्योगिकी को भविष्य में कई अन्य रोगजनकों का पता लगाने के लिए भी समनुरूप बनाया (Configured) जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. फेलुदा परीक्षण क्या है?
  2. CRISPR तकनीक क्या है?
  3. RT-PCR टेस्ट क्या है?
  4. कोविड -19 से संबंधित अन्य परीक्षण।

मेंस लिंक:

COVID-19 के लिए फेलुदा टेस्ट क्या है? यह किस प्रकार किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: निवेश मॉडल।

NHAI द्वारा राजमार्गों के मुद्रीकरण की योजना


संदर्भ:

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of IndiaNHAI) अपने अवसरंचना निवेश न्यास (Infrastructure Investment Trust- InvIT) निर्गम जारी करने की योजना हेतु तैयारी कर रहा है।

इस संबंध में NHAI को दिसंबर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल गई थी।

अवसरंचना निवेश न्यास (InvITs) क्या है?

  • यह एक म्यूचुअल फंड की भांति एक सामूहिक निवेश योजना है, जो अवसंरचना परियोजनाओं में निजी और संस्थागत निवेशकों से प्राप्त होने वाले धन का प्रत्यक्ष निवेश करके लाभ अर्जित करने में सक्षम बनाती है।
  • सेबी (अवसरंचना निवेश न्यास) विनियम, 2014 और भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 द्वारा InvITs को विनियमित किया जाता है।

InvITs की संरचना

  • अवसरंचना निवेश न्यास (InvITs) में एक ट्रस्टी, प्रायोजक, निवेश प्रबंधक और परियोजना प्रबंधक होते हैं।
  • ट्रस्टी (सेबी द्वारा प्रमाणित) के पास इनविट (InvIT) के प्रदर्शन के निरीक्षण करने की जिम्मेदारी होती है।
  • प्रायोजक, InvIT की स्थापना करने वाली कंपनी के प्रमोटर होते हैं।
  • निवेश प्रबंधक (Investment manager) को इनविट (InvIT) परिसंपत्तियों और निवेशों की देखरेख का काम सौंपा जाता है।
  • परियोजना के निष्पादन के लिए प्रोजेक्ट मैनेजर जिम्मेदार होता है।

निवेशक के लिए लाभ

  • अवसरंचना निवेश न्यास (InvITs), निवेशकों को उनकी जोखिम क्षमता के आधार पर फंड द्वारा बेची जा रही इकाइयों के छोटे हिस्से को खरीदने में सक्षम बनाता है।
  • चूंकि, इस तरह के न्यासों अधिकांशतः सकारात्मक नकदी आगम सहित, पूरी हो चुकी व परिचालित परियोजनाएं सम्मिलित होती है, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
  • इकाई धारकों को लाभांश आय पर छूट सहित अनुकूलित कर मानकों का लाभ प्राप्त होता है, और यदि इकाई-धारक, इसे तीन साल से अधिक समय तक रखता है, तो पूंजीगत लाभ कर से छूट प्रदान की जाती है।

NHAI के लिए किस प्रकार सहायक होगा?

  • यह ‘निर्गम’, न्यूनतम एक वर्ष तक टोल संग्रह का ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले राजमार्गों को मुद्रीकरण करने में NHAI को सक्षम बनायेगा।
  • इससे कंपनी को देश भर में अधिक सड़क विकास के लिए धन जुटाने में मदद मिलेगी।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

सरकारी गोपनीयता अधिनियम


(Official Secrets Act)

संदर्भ:

हाल ही में, चीनी खुफिया अधिकारियों के लिए सीमा पर भारतीय सैनिकों की तैनाती जैसी सूचनाओं को देने के आरोप में, दिल्ली के एक पत्रकार को ‘सरकारी गोपनीयता अधिनियम’ (Official Secrets Act) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट/ सरकारी गोपनीयता अधिनियम के बारे में:

इस क़ानून को मूल रूप से भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन (1899 से 1905 तक) के शासन काल के दौरान लागू किया गया था।

  • इस अधिनियम का एक मुख्य उद्देश्य राष्ट्रवादी प्रकाशनों की आवाज़ को दबाना था।
  • भारतीय सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923 (Indian Official Secrets Act,1923) द्वारा पूर्व में लागू अधिनियम को प्रतिस्थापित किया गया, और देश के प्रशासन में गोपनीयता संबधी सभी मामलों तक इसका विस्तार कर दिया गया।

अधिनियम का दायरा:

यह मुख्यतः दो पहलुओं से संबंधित है:

  1. जासूसी अथवा गुप्तचरी, इसे अधिनियम की धारा 3 के तहत कवर किया गया है।
  2. अधिनियम की धारा 5 के तहत सरकार की अन्य गोपनीय सूचनाओं का खुलासा।

‘गोपनीय जानकारी’ की परिभाषा

अधिनियम में ‘गोपनीय’ दस्तावेज को परिभाषित नहीं किया गया है। इसके अनुसार- किन दस्तावेजों अथवा जानकारी को ‘गोपनीय’ की श्रेणी में रखा जा सकता है, इसके निर्णय सरकार द्वारा किया जायेगा।

  • बहुधा यह कहा जाता है, कि यह अधिनियम, ‘सूचना के अधिकार अधिनियम’, 2005 के विपरीत है।
  • हालांकि, यदि किसी जानकारी देने के संबंध में ‘ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट’ के तहत कोई असंगतता होने पर ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ (RTI Act) प्रभावी होगा।
  • लेकिन, RTI Act की धारा 8 और 9 के तहत, सरकार किसी जानकारी को प्रदान करने से इनकार कर सकती है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. सरकारी गोपनीयता अधिनियम का अवलोकन
  2. प्रमुख प्रावधान
  3. अधिनियम का दायरा
  4. सरकारी गोपनीयता अधिनियम बनाम सूचना का अधिकार अधिनियम’

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बोंडा जनजाति एवं दिदाई जनजाति

(Bonda tribe and Didayi tribe)

  1. बोंडा तथा दिदाई जनजातीय समूह, ओडिशा में निवास करते हैं। इन समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal GroupsPVTGs) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  2. ओडिशा के 62 जनजातीय समूहों में से 13 को PVTG के रूप में मान्यता प्राप्त है, जोकि देश में सर्वाधिक है।

चर्चा का कारण

हाल ही में इन जनजातियों के सदस्यों को नोवेल कोरोनावायरस से संक्रमित पाया गया है।

ब्रूसेलोसिस (Brucellosis)

  • ब्रूसेलोसिस एक जीवाणु संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से मवेशियों, सूअर, बकरियों, भेड़ों और कुत्तों को संक्रमित करता है।
  • यह जानवरों के साथ-साथ इंसानों को भी प्रभावित करता है। मनुष्यों में ब्रूसेलोसिस प्रायः दूषित भोजन जैसे- कच्चा मांस और अस्वास्थ्यकर दूध का उपभोग करने से फैलता है।

चर्चा का कारण

हाल ही में, चीन के लॉन्झोउ शहर (Lanzhou City) के स्वास्थ्य आयोग के अनुसार, पिछले साल एक बायोफार्मास्युटिकल कंपनी में रिसाव के कारण ब्रुसेलोसिस बीमारी का प्रकोप हुआ है। तब से 3,000 से अधिक लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए है और अब तक किसी की भी मौत नहीं हुई है।

तस्मानिया में पायलट व्हेल

तस्मानिया (Tasmania) में व्हलेस का समुद्री तटों पर रेत में फसना (strandings) असामान्य घटना नहीं हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में व्हलेस के  फंसे होने संबंधी सटीक कारण अभी तक अज्ञात हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • इन्हें पायलट व्हेल नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इन व्हेल के समूह को एक पायलट या नेता द्वारा नेविगेट किया जाता है।
  • इनका लैटिन नाम, ग्लोबिसफला (Globicephala) है, जिसका अर्थ है ‘गोल सिर’, जो इस प्रजाति की मुख्य पहचान में से एक है।
  • पायलट व्हेल की दो प्रजातियां हैं: लघु पंख वाले पायलट व्हेल, जो मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और गर्म-समशीतोष्ण क्षेत्रों में पाई जाती हैं, तथा लंबे पंख वाले पायलट व्हेल, जो ठंडे पानी में रहते हैं।
  • दोनों प्रजातियां IUCN की रेड लिस्ट में अपर्याप्त डेटा वाली संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में दर्ज हैं।

australia

बोत्सवाना में 330 हाथियों की मौत का कारण ‘साइनोबैक्टीरिया’

जांच से पता चला है कि पानी में साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) द्वारा उत्पन्न विषाक्त पदार्थों से इस साल बोत्सवाना में 300 से अधिक हाथियों को म्रत्यु हुई थी। अफ्रीका में हाथियों की घटती आबादी का एक तिहाई बोत्सवाना में पायी जाता है।

प्रमुख बिंदु:

  • साइनोबैक्टीरिया, सूक्ष्मजीवाणु होते हैं जो सामन्यतः जल में पाए जाते हैं तथा ये कभी-कभी मिट्टी में भी पाए जाते हैं।
  • इसे नीले-हरे शैवाल के रूप में भी जाना जाता है, वे दुनिया भर में विशेष रूप से शांत, पोषक तत्वों से भरपूर जल में पाए जाते हैं
  • साइनोबैक्टीरिया की कुछ प्रजातियाँ, जानवरों और मनुष्यों को प्रभावित करने वाले विषाक्त पदार्थों का उत्पादन करती हैं
  • दूषित जल पीने अथवा स्नान करने से लोग साइनोबैक्टीरिया जनित विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आ सकते हैं
  • इससे पीड़ित होने पर लक्षणों में त्वचा में जलन, पेट में ऐंठन, उल्टी, मतली, दस्त, बुखार, गले में खराश, सिरदर्द आदि सम्मिलित होते हैं।

वज्र (विजिटिंग एडवांस जॉइंट रिसर्च) फैकल्टी स्कीम

(Visiting Advanced Joint Research (VAJRA) Faculty Scheme)

  • वज्र योजना को विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB), द्वारा लॉन्च किया गया है, यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एक सांविधिक निकाय (Statutory body) है।
  • इस योजना का उद्देश्य, गैर-निवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) सहित विदेशी वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को एक निश्चित अवधि के लिए सार्वजनिक वित्त पोषित संस्थानों और विश्वविद्यालयों में काम करने के लिए भारत में लाना है।
  • यह योजना भारतीय वैज्ञानिकों सहित विदेशी वैज्ञानिकों को एक या अधिक भारतीय सहयोगियों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अत्याधुनिक क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता युक्त अनुसंधान करने के लिए सहायक / विजिटिंग फैकल्टी असाइनमेंट प्रदान करती है।

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