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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 18 September

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. ध्रुपद संगीत

 

सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)

2. गिलगित-बाल्टिस्तान

3. पाकिस्तान से क्वींस काउंसल की नियुक्ति हेतु अपील

4. भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता एवं BECA

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ज्वारीय विदारण घटनाएँ (TDE)

2. एयर बबल (Air Bubble) क्या होते हैं?

3. विश्व रोगी सुरक्षा दिवस- 17 सितंबर

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

चर्चा में- ध्रुपद संगीत


ध्रुपद, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन शैली है जो आज तक अपने मूल रूप में जीवित है।

  • ध्रुपद संगीत की प्रकृति आध्यात्मिक होती है। इसका उद्देश्य मनोरंजन करना नहीं होता है, बल्कि यह श्रोता में शांति और आध्यात्मिक भावनाओं को जगाता है।
  • यह मुख्य रूप से पूजा का एक प्रकार होता है, जिसमें ध्वनि अथवा नाद के माध्यम से परमात्मा को प्रसाद चढ़ाया जाता है।
  • आरंभ में, ध्रुपद का गायन केवल मंदिरों में ईश्वर की प्रतिमा के समक्ष किया जाता था। ध्रुपद, अपने इस प्रारंभिक गायन से, संगीत के परिष्कृत शास्त्रीय रूप में विकसित हुआ है।

विशेषताएँ:

  • यह राग की शुद्धता बनाए रखने पर जोर देता है।
  • 12वीं और 16वीं शताब्दी के मध्य किसी काल में ध्रुपद की भाषा संस्कृत से ब्रजभाषा में परिवर्तित हो गई।

ध्रुपद की उत्पत्ति

यह भक्ति संगीत का एक रूप है, तथा इसकी उत्पत्ति का स्रोत प्राचीन ग्रन्थ सामवेद में मिलता है। सामवेद के श्लोकों का गायन राग और ताल से किया जाता था, जिसे ‘सामगान’ कहा जाता था।

धीरे-धीरे, इसमें प्रबंध’ तथा ‘छंद’ का प्रयोग होना आरंभ हुआ, जिससे अन्य गायन शैलियों का विकास हुआ। इन दोनों तत्वों के मिलन से ध्रुपद शैली का उदय हुआ।

मध्यकाल के दौरान ध्रुपद:

मध्यकालीन भारत में, ध्रुपद मुख्य रूप से मुगल और राजपूत राजाओं के संरक्षण में फल-फूला। बाद में, संगीत श्रोताओं की प्रवृत्ति ‘ख्याल’ शैली की ओर परिवर्तित हो जाने से ध्रुपद के प्रचलन में गिरावट आई।

ध्रुपद का प्रदर्शन

ध्रुपद का प्रदर्शन दो भागों में किया जाता है: अलाप और बंदिश। अलाप में, गायक संस्कृत मंत्र से शब्दांशों का उपयोग करता है, जिसे वह ध्वनि के साथ मिश्रित करता है। राग, धीरे-धीरे और व्यवस्थित रूप से एक ध्यानावस्था में विकसित होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय शास्त्रीय संगीत का वर्गीकरण।
  2. ध्रुपद क्या है?
  3. इसका विकास।
  4. प्रमुख विशेषताएं।
  5. ध्रुपद और ख्याल के बीच अंतर।

मेंस लिंक:

भारतीय शास्त्रीय संगीत और इसके विकास पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)


चर्चा का कारण

हाल ही में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने असम सरकार को बिश्वनाथ जिले में 48 वर्षीय व्यक्ति को 1 लाख रु. का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस व्यक्ति को एक साप्ताहिक बाजार में अपनी चाय की दुकान में पका हुआ गोमांस बेचने के आरोप में भीड़ ने पीटा था।

UPSC परीक्षा के लिए इस लेख की प्रासंगिकता:

इस लेख से, हम NHRC के पास मुआवजे के भुगतान की सिफारिश करने की शक्तियों के बारे में समझ सकते हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बारे में:

  • यह, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (Protection of Human Rights ActPHRA), 1993 के अंतर्गत स्थापित एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय (Statutory Body) है। इसकी स्थापना 12 अक्टूबर, 1993 को की गयी थी।
  • इस अधिनियम में ‘राज्य मानवाधिकार आयोग’ के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप किया गया है।
  • पेरिस सिद्धांतों को अक्तूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसम्बर, 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा समर्थित किया गया था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की संरचना

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन एक अध्यक्ष, चार पूर्ण कालिक सदस्यों तथा चार मानद सदस्यों से होता है।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, के अध्यक्ष पद पर उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश भी नियुक्त किये जा सकते हैं।

इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति एक छह सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इस समिति के सदस्यों में निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है:

  1. प्रधान मंत्री (प्रमुख)
  2. लोकसभा के अध्यक्ष
  3. राज्य सभा के उपाध्यक्ष
  4. संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता
  5. केंद्रीय गृह मंत्री।

कार्यकाल तथा पदत्याग

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष अथवा 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित है।

विशेष परिस्थितियों में, इन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है।

NHRC

आयोग के कार्य:

  1. आयोग स्वतः संज्ञान लेकर अथवा किसी पीड़ित या उनकी ओर से अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई याचिका पर, मानव अधिकारों का हनन करने अथवा लोक सेवक द्वारा इस प्रकार के हनन की रोकथाम में लापरवाही की जांच करेगा।
  2. न्यायालय के समक्ष लंबित मानव अधिकारों के हनन के किसी आरोप से संबंधित किसी कार्यवाही में उस न्यायालय की मंजूरी के साथ हस्तक्षेप करना।
  3. राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन किसी जेल अथवा किसी अन्य संस्थान, वहां के संवासियों के जीवनयापन की दशाओं का अध्ययन करने तथा उनके संबंध में संस्तुतियाँ करने के लिए राज्य सरकार को सूचित करते हुए, दौरा करना।
  4. मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए इसके द्वारा अथवा संविधान के अंतर्गत अथवा कुछ समय के लिए लागू किसी कानून के सुरक्षोपायों की समीक्षा करना।
  5. उन तथ्यों की समीक्षा करना, जिसमें आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं जो मानव अधिकारों के उपयोग को रोकती हैं तथा उचित उपचारी उपायों की संस्तुति करना।
  6. मानव अधिकारों से संबंधित संधियां एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों का अध्ययन करना तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संस्तुतियां करना।
  7. मानव अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करना तथा उनको बढ़ावा देना।
  8. समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मानव अधिकार शिक्षा का प्रसार करना तथा प्रकाशनों, मीडिया, सेमिनार तथा अन्य उपलब्ध साधनों से इन अधिकारों के संरक्षण हेतु उपलब्ध सुरक्षोपायों की जागरूकता को बढ़ाना।
  9. गैर सरकारी संगठनों एवं मानव अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों के प्रयास को बढ़ावा देना।
  10. मानव अधिकारों के संवर्ध्दन हेतु आवश्यक समझे जाने वाले इसी प्रकार के अन्य कार्य।

आयोग की शक्तियां:

आयोग के लिए अधिनियम के अंतर्गत शिकायतों पर जांच करते समय नागरिक दंड संहिता प्रक्रिया 1908 के अंतर्गत वे सभी शक्तियां प्राप्त हैं जो सिविल कोर्ट किसी वाद के विचारण के समय प्राप्त होती है।

प्रमुख शक्तियां निम्नलिखित है:

  1. गवाहों की उपस्थिति हेतु समन करना तथा हाजिर करना तथा शपथ पर उनकी जांच करना।
  2. किसी दस्तावेज को ढूंढना एवं प्रस्तुत करना।
  3. हलफनामे पर साक्ष्य प्राप्त करना।
  4. किसी पब्लिक रिकॉर्ड को मांगना अथवा किसी न्यायालय अथवा कार्यालय से उनकी प्रति मांगना।
  5. गवाहों अथवा दस्तावेजों की जांच के लिए शासन पत्र जारी करना।
  6. निर्धारित किया गया कोई अन्य मामला।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NHRC – संरचना।
  2. कार्य
  3. अध्यक्ष और सदस्यों का चयन
  4. कार्यकाल तथा पदत्याग
  5. मानव अधिकारों के संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 द्वारा लागू किए गए प्रमुख परिवर्तन।

स्रोत: द हिंदू

  

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

गिलगित-बाल्टिस्तान


संदर्भ:

पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान के दर्जे को बढ़ाकर इसे एक पूर्ण प्रांत बनाने का फैसला किया है।

जबकि, भारत पहले ही पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में यह बता चुका है कि संपूर्ण केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा गिलगित-बाल्टिस्तान के क्षेत्र, राज्य-विलय के वैधानिक और अखण्डनीय प्रावधानों के अनुसार, भारत के अभिन्न अंग हैं।

विवाद का कारण

वर्ष 2009 से गिलगित-बाल्टिस्तान एक ‘प्रांतीय स्वायत्त क्षेत्र’ (Provincial Autonomous Region) के रूप में प्रशासित हो रहा है।

  • वर्तमान में यह क्षेत्र पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित है।
  • साथ ही, हाल के एक आदेश में, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस क्षेत्र में आम चुनाव कराने हेतु गिलगित-बाल्टिस्तान सरकार, आदेश 2018 में संशोधन करने की अनुमति दी गयी है।

गिलगित-बाल्टिस्तान की अवस्थिति

गिलगित-बाल्टिस्तान, उत्तर में चीन, पश्चिम में अफगानिस्तान, और दक्षिण पूर्व में कश्मीर के साथ सीमा बनाता है।

  • यह पाक-अधिकृत कश्मीर के साथ एक भौगोलिक सीमा साझा करता है, तथा भारत इसे अविभाजित जम्मू और कश्मीर का हिस्सा मानता है, जबकि पाकिस्तान इस क्षेत्र को पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) से अलग मानता है।
  • गिलगित-बाल्टिस्तान की एक क्षेत्रीय विधानसभा और एक निर्वाचित मुख्यमंत्री होता है।

प्रमुख बिंदु:

  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China-Pakistan Economic Corridor -CPEC) गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से होकर गुजरता है।
  • इस क्षेत्र मे पांच पर्वत-शिखरों की ऊंचाई ‘आठ-हजार’ मीटर से अधिक है, तथा पचास से अधिक पर्वत-शिखर 7,000 मीटर (23,000 फीट) से अधिक ऊंचाई के है।
  • ध्रुवीय क्षेत्रों के अलावा, दुनिया के तीन सबसे बड़े ग्लेशियर गिलगित-बाल्टिस्तान में पाए जाते हैं।

गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का नियंत्रण

वर्ष 1846 में सिख सेना को हराने के बाद, अंग्रेजों ने गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को जम्मू और कश्मीर के अन्य भागों सहित जम्मू के डोगरा शासक गुलाब सिंह को बेच दिया था।

  • किंतु अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने के लिए महाराजा से इसे पट्टे (Lease) पर ले लिया था। इस पट्टे को अंतिम बार वर्ष 1935 में नवीनीकृत किया गया था।
  • 1947 में, कर्नल की रैंक के एक ब्रिटिश सेना अधिकारी ने गिलगित-बाल्टिस्तान में महाराजा हरि सिंह के गवर्नर को कैद कर लिया तथा इस क्षेत्र को पाकिस्तान में विलय के लिए सौंप दिया।

आगे की अड़चने:

  • गिलगित- बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है और इस तरह के किसी भी कदम से पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी मामले को गंभीर नुकसान होगा। 13 अगस्त, 1948 और 5 जनवरी, 1949 में पारित किए गए संयुक्त राष्ट्र के दो प्रस्तावों द्वारा स्पष्ट रूप से गिलगित- बाल्टिस्तान (GB) और कश्मीर मुद्दे के मध्य एक कड़ी स्थापित की गई है।
  • इस क्षेत्र को पाँचवाँ प्रांत बनाने से कराची समझौते तथा साथ ही संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन होगा, जिससे कश्मीर मुद्दे पर उसकी स्थिति को नुकसान होगा। कराची समझौता, संभवतः एकमात्र उपकरण जो पाकिस्तान के गिलगित- बाल्टिस्तान प्रशासन को अस्पष्ट कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
  • ऐसा कोई भी कदम, वर्ष 1963 के पाक-चीन सीमा समझौते का भी उल्लंघन होगा। जिसके अनुसार, संप्रभु प्राधिकरण के साथ चीन की वार्ता, ‘पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर विवाद के निपटारे के बाद’ तथा 1972 के शिमला समझौते, (जिसमे कहा गया है, कि ‘दोनों पक्ष, स्थिति में एकतरफा परिवर्तन नहीं करेंगे’) को हल करने के बाद ही पुनः शुरू की जायेगी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. गिलगिट- बाल्टिस्तान- स्थान, पड़ोसी और महत्वपूर्ण नदियाँ।
  2. कराची समझौता किससे संबंधित है?
  3. 1963 पाक- चीन सीमा समझौता।
  4. 1972 शिमला समझौता।
  5. PoK और CPEC के बारे में।

मेंस लिंक:

गिलगित- बाल्टिस्तान कहां है? यह पाकिस्तान के नियंत्रण में किस प्रकार आया? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

पाकिस्तान से क्वींस काउंसल की नियुक्ति हेतु अपील


(Pak. told to allow Queen’s Counsel)

संदर्भ:

पाकिस्तान की नागरिक अदालत में कुलभूषण जाधव का प्रतिनिधित्व करने संबंधी मुद्दे के अटक जाने पर, भारत ने अपने वकील की नियुक्ति पर विवाद को समाप्त करने के लिए राष्ट्रमंडल के आधार का उपयोग किया है।

भारत ने पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की सजा पर पुनर्विचार के लिये स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने को लेकर एक भारतीय वकील या ‘क्वींस काउंसल’ (Queen’s Counsel) को नियुक्त करने की बृहस्पतिवार को अपील की है।

पृष्ठभूमि:

  • भारत ने स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की पृष्ठभूमि में अपना सुझाव दिया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of justice-ICJ) द्वारा पाकिस्तान को मौत की सजा की निष्पक्ष समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था, किंतु भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने उसे अब तक ‘बाधारहित’ पहुंच प्रदान नहीं की है।

‘क्वींस काउंसल’ कौन होता है?

‘क्वींस काउंसल’ (Queen’s Counsel) एक ऐसा बैरिस्टर या अधिवक्ता होता है, जिसे लॉर्ड चांसलर की सिफारिश पर ब्रिटिश महारानी के लिये नियुक्त किया जाता है।

  • ‘क्वींस काउंसल’ को विश्व के लगभग सभी न्यायालयों में मान्यता दी जाती है।
  • ‘क्वींस काउंसल’ की नियुक्ति, अनुभव स्तर के बजाय योग्यता के आधार पर कानूनी पेशे में कार्यरत व्यक्तियों में से की जाती है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के बारे में।
  2. अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के बीच अंतर।
  3. ‘क्वींस काउंसल’ कौन होता है?
  4. प्रमुख कार्य
  5. राष्ट्रमंडल देश क्या हैं?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता एवं BECA


(U.S. keen on finalising BECA at 2+2 dialogue)

संदर्भ:

अमेरिका, अक्टूबर माह के अंत में होने वाली आगामी भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता में भारत से एक बुनियादी समझौता, भू-स्थानिक सहयोग के लिये बुनियादी विनिमय तथा सहयोग समझौता (Basic Exchange and Cooperation Agreement for Geo-spatial Cooperation-BECA) पर हस्ताक्षर अपेक्षा कर रहा है।

भारत और अमेरिका के बीच बुनियादी समझौते:

अब तक, भारत ने अमेरिका के साथ तीन बुनियादी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं:

  1. लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट (Logistics Exchange Memorandum of Agreement- LEMOA)
  2. संगतता और सुरक्षा समझौता (Communications Compatibility and Security Agreement -COMCASA)
  3. सैन्य सूचना समझौते की सामान्य सुरक्षा (General Security of Military Information Agreement- GSOMIA) पर काफी समय पूर्व हस्ताक्षर किये गए थे। अंतिम 2+2 वार्ता में GSOMIA का विस्तार करते हुए औद्योगिक सुरक्षा अनुलग्नक (Industrial Security Annex-ISA) के लिए एक विस्तार पर हस्ताक्षर किए गए थे।

BECA क्या है?

यह समझौता भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सैन्य और नागरिक उपयोग दोनों के लिए भू-स्थानिक सूचना के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करेगा।

BECA से भारत के लिए महत्व और लाभ:

BECA, भारत को भू-स्थानिक खुफिया पर अमेरिकी विशेषज्ञता का उपयोग करने और स्वचालित हार्डवेयर सिस्टम और क्रूज, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन जैसे हथियारों की सैन्य परिशुद्धता में वृद्धि करने में सक्षम बनाएगा।

2+2 वार्ता क्या होती है?

जून, 2017 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन डी.सी. की यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच इस नए वार्ता प्रारूप पर सहमति हुई थी।

  • इस वार्ता प्रणाली में दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्री भाग लेते हैं।
  • 2+2 वार्ता ने भारत-अमेरिका व्यापार और वाणिज्यिक मुद्दों हेतु रणनीतिक और वाणिज्यिक संवाद को प्रतिस्थापित किया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बुनियादी समझौते क्या होते हैं?
  2. BECA के बारे में।
  3. भारत और अमेरिका द्वारा हस्ताक्षरित समझौते।
  4. 2+2 वार्ता क्या है?
  5. भारत के साथ 2+2 वार्ता प्रणाली वाले देश।

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स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ज्वारीय विदारण घटनाएँ (TDE)

(Tidal disruption events)

खगोलविद, ब्लैकहोल का अध्ययन, निकटवर्ती तारों और गैस पर उसके पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए करते है। जब ब्लैक होल का ज्वारीय गुरुत्व, तारे के गुरुत्वाकर्षण से अधिक हो जाता है, तो तारे विदरित (Disrupted) हो जाते हैं। इस घटना को ज्वारीय विदारण घटना (Tidal Disruption EventsTDE) कहा जाता है।

ज्वारीय विदारण घटनाएँ, सुप्त और अज्ञात आकाशगंगाओं में स्थित अतिविशाल ब्लैकहोल के द्रव्यमान का पाता लगाने और उनके बारे में भविष्यवाणी करने के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी घटनाएं होती हैं।

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एयर बबल (Air Bubble) क्या होते हैं?

एक एयर बबल, COVID-19 के कारण नियमित रूप से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें निलंबित होने के पश्चात अनिवार्य रूप से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए दो देशों के बीच एक अस्थायी व्यवस्था है।

इस व्यवस्था के तहत, दोनों देशों की एयरलाइनों को उड़ाने शुरू करने की अनुमति दी गयी है। यह व्यवस्था वंदे भारत मिशन के भिन्न है, जिसमे केवल भारतीय वायु वाहकों को ही उड़ानें संचालित करने की अनुमति थी।

चर्चा का कारण

भारत ने 13 सितम्बर 2020 तक कुल 10 देशों, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, मालदीव, यूएई, कतर, अफगानिस्तान और बहरीन, के साथ एयर बबल समझौता किया है।

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विश्व रोगी सुरक्षा दिवस- 17 सितंबर

(World Patient Safety Day)

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा शुरू किया गया।
  • पहली बार 2019 में मनाया गया।
  • यह सभी देशों और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों द्वारा रोगी सुरक्षा में सुधार हेतु वैश्विक एकजुटता और ठोस कार्रवाई करने हेतु आह्वान करता है।
  • विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2020 विषय:स्वास्थ्य कर्मी सुरक्षा: रोगी सुरक्षा के लिए प्राथमिकता’ (Health Worker Safety: A Priority for Patient Safety)।

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