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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 18 सितम्बर 2020

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

INSIGHTS NEW SECURE – 2020: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ।

1. समुद्र जल के तापमान के ऊर्ध्वाधर और अक्षांशीय वितरण का वर्णन करते हुए इस प्रकार के वितरण के लिए उत्तरदायी कारकों पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: भूगोल: जी. सी. लियोंग

 निर्देशक शब्द:

 वर्णन कीजिये ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

विश्व के महासागरों को संक्षेप में समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ किया जा सकता है।

 विषय वस्तु:

समुद्र में तापमान के ऊर्ध्वाधर और अक्षांशीय (क्षैतिज) वितरण पर चर्चा कीजिए।

उपर्युक्त वितरण के लिए उत्तरदायी कारकों पर प्रकाश डालिए।

जहां भी आवश्यक हो, उपयुक्त उदाहरणों का उपयोग कीजिए।

 निष्कर्ष:

इसके महत्त्व को स्पष्ट करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

2. “महापाषाणकालीन अर्थव्यवस्था एक निर्वाह अर्थव्यवस्था थी”। कथन के आलोक में, महापाषाणकालीन अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: NCERT कक्षा XI प्राचीन भारतीय इतिहास: R S शर्मा

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिये ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रश्न के संदर्भ को संक्षेप में समझाइये।

 विषय वस्तु:

समझाइए कि महापाषाणकालीन अर्थव्यवस्था किस प्रकार से एक निर्वाह अर्थव्यवस्था थी।

उनकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधारों जैसे- कृषि, पशुचारण, शिकार और मत्स्यपालन आदि पर विस्तार से चर्चा कीजिए। 

उपयुक्त उदाहरणों के साथ उपर्युक्त को समझाइये।

 निष्कर्ष:

इसके महत्त्व को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

3. भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के विकास पर चर्चा कीजिए? क्या आपको लगता है कि सातवीं अनुसूची का पुनर्विलोकन करने एवं संशोधित करने की आवश्यकता है? समझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारतीय राजव्यवस्था: एम. लक्ष्मीकांत

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची को समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

इसके विकास के चरणों को स्पष्ट कीजिए।

केंद्र और राज्यों के मध्य शक्तियों के विभाजन के एक उपकरण के रूप में इसके महत्व को स्पष्ट कीजिए।

समझाइए कि इसमें किस प्रकार के पुनर्विलोकन एवं संशोधन की आवश्यकता है।

 निष्कर्ष:

केंद्र और राज्यों के मध्य शक्तियों और उत्तरदायित्व के विभाजन का प्रश्न अनेक विधायी प्रस्तावों में उभर कर सामने आया है, इस प्रकार इस प्रक्रिया के पुनर्विलोकन एवं संशोधन की आवश्यकता है।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

4. भारतीय क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं पर परिवर्तनशील जलवायु के क्या निहितार्थ हैं? जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन के लिए भारत द्वारा उठाए गए प्रमुख क़दमों का विस्तार से वर्णन कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Hindustan Times 

 निर्देशक शब्द:

 वर्णन कीजिये ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रश्न की पृष्ठभूमि को समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

भारतीय क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं जैसे – खाद्य सुरक्षा, कृषि प्रणाली, जल सुरक्षा, ऊर्जा अवसंरचना और आपूर्ति, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र आदि पर परिवर्तनशील जलवायु के निहितार्थों के सन्दर्भ में विस्तार से चर्चा कीजिए।

मानव स्वास्थ्य, सामाजिक मुद्दों, जलवायु खतरों आदि पर इसके प्रभावों की भी व्याख्या कीजिए।

भारत द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन के लिए किये गए प्रमुख प्रयासों पर चर्चा कीजिए।

 निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि यदि भारत को जलवायु परिवर्तन की समस्या का सफलतापूर्वक समाधान करना है (अल्पीकरण और अनुकूलन दोनों के संदर्भ में) तो इसके लिए अनेक जटिल एवं परस्पर सम्बंधित स्थानीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी स्वदेशीकरण एवं नई प्रौद्योगिकी का विकास।

5. भविष्य की सर्वव्यापी तकनीकों में से एक, 5G तकनीक भारत को अग्रणी बनने का अवसर प्रदान करती है, फिर भी इसके समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं, जिन्हें सम्बोधित करने की आवश्यकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Times of India  

 निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

यह अनुमान लगाया जाता है कि 5G तकनीक एक नवीन प्रकार के नेटवर्क का निर्माण करके हमारे चारों ओर के विश्व में आमूलचूल परिवर्तन कर देगी, जिसे मशीनों, वस्तुओं और उपकरणों सहित लगभग प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक व्यक्ति को आभासी रूप से एक साथ जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 

विषय वस्तु:

कुछ महत्वपूर्ण आंकड़ों/ तथ्यों के माध्यम से इसके महत्व को स्पष्ट कीजिए।

इसकी संभावनाओं पर संक्षेप में चर्चा कीजिए।

समझाइये कि कैसे 5 जी तकनीक को अपनाने से साइबर सुरक्षा चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

 निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि भारत को शीघ्र, कुशलतापूर्वक और व्यापक रूप से 5G नेटवर्क का विकास करके इस अवसर को भुनाना चाहिए।

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

6. भारत में आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu .

 निर्देशक शब्द: 

चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

आपदा एवं आपदा प्रबंधन को समझाते हुए उत्तर प्ररम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

आपदा प्रबंधन के दौरान मीडिया क्या भूमिका निभा सकती है, विस्तार से समझाइये।

प्रासंगिक उदाहरणों का उपयोग करके उपर्युक्त को समझाएँ।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि मीडिया द्वारा अपनी भूमिका को सही भावना से और वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सावधानी के साथ निभाना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में मीडिया की रचनात्मक भूमिका सुनिश्चित करने के लिए उचित दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रक्रियाएं स्थापित की जा सकती हैं।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

7. कांट के ‘साध्य के सिद्धांत’ की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए। क्या आपको लगता है कि यह दैनिक जीवन में आपके लिए एक उपयोगी मॉडल सिद्धांत हो सकता है? समझाइये। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 व्याख्या कीजिये- प्रश्न में पूछी गई जानकारी को सरल भाषा में व्यक्त कीजिये।

 समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

कांट द्वारा प्रतिपादित साध्य के सिद्धांत को परिभाषित कीजिए।

 विषय वस्तु:

समझाइये कि इस वाक्यांश में “साध्य” शब्द का वही अर्थ है, जो “साध्य के लिए साधन” वाक्यांश में निहित है।

“साध्य” पर कांट के विचारों के आलोक में उपयुक्त उदाहरणों का उपयोग करके समझाइये कि यह दैनिक जीवन में आपके लिए एक उपयोगी मॉडल सिद्धांत कैसे सिद्ध हो सकता है।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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