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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. क्रमिक अंतराल और कोविड-19

2. भारत द्वारा सीमा समझौतों का उल्लंघन: चीन

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020

2. 25वां सौर चक्र

3. भू-क्षरण कम करने तथा प्रवाल भित्ति संरक्षण कार्यक्रम हेतु वैश्विक पहल

4. मसौदा, विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम 2020

5. गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कोसी रेल महासेतु

2. आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक 2020

3. भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन

4. परमाणु ऊर्जा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

5. पश्चिमी घाट में कलिंगा मेढक

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

क्रमिक अंतराल और कोविड-19


(What is serial interval, and how can it be managed to control Covid-19?)

चर्चा का कारण

चीन में एक महीने के अधिक समय से स्थानीय रूप से कोविड-19 संक्रमण मामला दर्ज नहीं किया गया है। चीन द्वारा कोविड-19 पर नियंत्रण का इसकी क्रमिक अंतराल (Serial Interval) प्रबंधन क्षमता को बताया जा रहा है।

‘क्रमिक अंतराल’ क्या होता है?

क्रमिक अंतराल (Serial Interval), किसी प्राथमिक मामले में लक्षणों की शुरुआत से तथा प्राथमिक मामले द्वारा उत्पन्न द्वतीयक मामलों (संपर्क में आने आने वाले व्यक्ति) में लक्षणों की शुरुआत के बीच की अवधि होती है।

सरल शब्दों में, क्रमिक अंतराल किसी व्यक्ति A और इसके द्वारा संक्रमित व्यक्ति B में कोविड-19 के लक्षणों की शुरुआत के बीच का अंतर होता है।

सर्वप्रथम प्रयोग

‘क्रमिक अंतराल’ शब्द का प्रयोग पहली बार ब्रिटिश चिकित्सक विलियम पिक्क्ल्स (William Pickles) द्वारा किया गया था। इन्होने शुरूआत में, ‘क्रमिक अंतराल’ शब्द को यूनाइटेड किंगडम में वर्ष 1942-45 के दौरान हेपेटाइटिस महामारी के संदर्भ में ‘संचरण अंतराल’ (Transmission Interval) के रूप में प्रयुक्त किया था।

 ‘क्रमिक अंतराल’ हेतु प्रमुख कारक

रोगोद्भवन अवधि (Incubation period): किसी व्यक्ति के वायरस के संपर्क में आने तथा लक्षणों की शुरुआत के बीच की अवधि।

पुनरुत्‍पादन दर (Reproduction rate): किसी संक्रमित व्यक्ति के माध्यम से होने वाले संक्रमित लोगों की संख्या।

‘क्रमिक अंतराल’ का महत्व

क्रमिक अंतराल, संक्रमण नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता का अनुमान लगाने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त, यह आबादी में बढ़ती प्रतिरक्षा और भविष्य में संक्रमण मामलों की कमी होने का संकेत प्रदान करता है।

इस प्रकार, कोविड-19 से संक्रमित होने वाले व्यक्ति की जितनी जल्दी पहचान की जाएगी तथा उसे पृथक (isolated) किया जायेगा, क्रमिक अंतराल (Serial Interval) की अवधि उतनी ही कम होगी। जिससे वायरस संचरण के अवसरों में कमी होती है।

भारत के लिए आवश्यकता

भारत में, क्रमिक अंतराल का प्रबंधन करने हेतु,  संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की पहचान हेतु एक मजबूत तंत्र,  संगरोध करने (Quarantine) तथा पृथककरण प्रोटोकॉल को लागू किया जाना चाहिए।

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केस स्टडी

चीन:

जनवरी की शुरुआत और फरवरी की शुरुआत के बीच वुहान में क्रमिक अंतराल 7.8 दिनों से घटकर 2.6 दिन रह गया था।

  • संक्रमित व्यक्तियों को लक्षणों की शुरुआत से 1 दिन के भीतर ‘संगरोधित’ करने से कोविड-19 संचरण को 60 प्रतिशत तक कम करने में मदद मिली।
  • यह, युद्धस्तर पर संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की पहचान करने, संगरोध करने (Quarantine) तथा उन्हें पृथक करने के कारण संभव हुआ था। इस तरह से यह सुनिश्चित किया गया कि, संक्रमित रोगी, जो कि पृथक कर दिए गए थे, बाद में अन्य लोगों को संक्रमित नहीं कर सकें।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्रमिक अंतराल क्या होता है?
  2. RNA और DNA में अंतर
  3. RT- PCR तथा एंटीबॉडी परीक्षणों में अंतर
  4. RNA वायरस क्या है?
  5. एंटीबॉडी क्या होती हैं?

मेंस लिंक:

क्रमिक अंतराल क्या होता है और इसे कोविड-19 को नियंत्रित करने हेतु इसे किस प्रकार प्रबंधित किया जा सकता है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

भारत द्वारा सीमा समझौतों का उल्लंघन: चीन


(China says India violated border agreements)

संदर्भ:

चीन ने भारत को सीमा समझौतों का उल्लंघन करने के लिए दोषी बताते हुए कहा है, कि हाल के तनावों के लिए भारत जिम्मेदार है।

चीन का यह वक्तव्य, संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दिए गए एक बयान के बाद आया है। रक्षा मंत्री ने संसद में कहा था, कि चीन ने इस वर्ष गर्मियों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों को एकत्रित करके, वर्ष 1993 और 1996 के सीमा समझौते का उल्लंघन किया है। यह समझौते वर्षों से सीमा पर शांति बहाल रखने में सहायक रहे है।

वर्ष 1993 और 1996 के समझौते

भारत और चीन द्वारा सीमा प्रबंधन पर सितंबर 1993, नवंबर 1996, अप्रैल 2005 और अक्टूबर 2013 में विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

दुर्भाग्य से, इन समझौतों में कई गंभीर त्रुटियाँ हैं और यह सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयासों को,  ज़्यादा से ज़्यादा एक रणनीतिक भ्रम और ख़राब होने पर द्वेषपूर्ण बैठकों की चालबाजी बना देते है।

  1. वर्ष 1993 में हुआ चीन-भारतीय सीमा में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता के रखरखाव पर समझौता:
  • समझौते के अनुसार, भारत और चीन दोनों ही, दोनों देशों के मध्य मित्रतापूर्ण एव अच्छे संबधों के अनुरूप ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य बलों को एक न्यूनतम स्तर तक’ तैनात करने और ‘सैन्यदलों को कम करने’ पर सहमत हुए थे।
    1. विश्वास-बहाली उपायों पर समझौता, 1996:
  • इस समझौते में, दोनों पक्षों दवारा ‘सीमा पर अभ्यास करने तथा सीमा क्षेत्रों में सैन्य दलों को कम करने संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहमति हुई थी।
  • इस समझौते में, निमंत्रण देने पर दोनों पक्षों के लिए, एक-दूसरे के क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को देखने और निरीक्षण करने की अनुमति दी गयी थी।
  • इसी समझौते में, दोनों पक्ष LAC पर पारस्परिक रूप से सहमत भौगोलिक क्षेत्रों के भीतर अपने सैन्य बलों को कम अथवा सीमित करने पर सहमत हुए।
  • इसमें, हथियारों की प्रमुख श्रेणियों, लड़ाकू टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, बंदूकें आदि को कम या सीमित करने के लिए भी निर्दिष्ट किया गया है।
  • इसमें यह तय किया गया है कि, कोई भी पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा से दो किलोमीटर के भीतर, गोलीबारी, जैव-निम्नीकरण, खतरनाक रसायनों का प्रयोग, विस्फोटक कार्यवाही अथवा बंदूकों और विस्फोटकों से शिकार नहीं करेगा।

समझौतों की वर्तमान स्थिति

  • ये समझौते सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गए हैं। जमीनी हकीकत पर इनका कोई प्रभाव नहीं है।
  • इन समझौतों पर हस्ताक्षर करते समय, दूसरे पक्ष की सैन्यदल तैनाती सीमा को मान्यता देने संबंधी कोई प्रयास नहीं दिखाई देता है।
  • इसके अलावा, LAC की परिभाषा न होने से यथार्थ में ज़मीन पर कभी भी नए और गोपनीय रूप से हमले होते रहते है।

पृष्ठभूमि:

भारत और चीन ने हाल ही में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव को कम करने के लिए कार्यवाही करने हेतु पाँच बिंदुओं पर सहमति व्यक्त की है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. एलओसी क्या है और इसकी स्थापना, भौगोलिक सीमा और महत्व कैसे है?
  2. LAC क्या है?
  3. नाथू ला कहाँ है?
  4. पैंगोंग त्सो कहाँ है?
  5. अक्साई चिन का प्रशासन कौन करता है?
  6. नाकु ला कहाँ अवस्थित है?
  7. पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में नियंत्रण

मेंस लिंक:

भारत और चीन के लिए पैंगोंग त्सो के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020


(Banking Regulation (Amendment) Bill, 2020)

संदर्भ:

हाल ही में, बैंकिंग विनियमन संशोधन विधेयक, 2020 लोकसभा में पारित किया गया है। यह विधेयक 26 जून को लागू किए गए समान प्रभाव वाले अध्यादेश को प्रतिस्थापित करेगा।

  • इस विधेयक में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • इस विधेयक के द्वारा, केंद्र सरकार का लक्ष्य सहकारी बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की देखरेख में लाना है।

प्रमुख परिवर्तन:

  • अब, बैंकिंग कंपनियों पर लागू होने वाले प्रावधान सहकारी बैंकों पर भी लागू होंगे। इस विधेयक में यह सुनिश्चित किया गया है, कि सहकारी बैंक, समान रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के माध्यम से बेहतर प्रशासन और मजबूत बैंकिंग नियमों के अधीन होंगे।
  • इन संशोधनों के बाद, RBI किसी बैंक को विलम्बकाल (Moratorium) दिए बिना, उसके पुनर्गठन और एकीकरण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
  • यह केंद्रीय बैंक को किसी भी बैंकिंग कार्य को बाधित किए बिना, बैंक और बैंकिंग कंपनी के उचित प्रबंधन में जनता, बैंकिंग प्रणाली, खाता धारकों के हित को सुनिश्चित करने हेतु योजना बनाने में सहायक होगा।
  • यह संशोधन सहकारी बैंकों को, केंद्रीय बैंक की सहमति से, सरकारी निर्गमों (Public Issues) और इक्विटी के निजी प्लेसमेंट या वरीयता शेयरों के साथ-साथ असुरक्षित डिबेंचर के माध्यम से धन जुटाने की अनुमति देते हैं।

संशोधन से अप्रभावित

  • राज्य कानूनों के तहत सहकारी समितियों के राज्य रजिस्ट्रार की मौजूदा शक्तियां इन परिवर्तनों से प्रभावित नहीं होंगी।
  • ये परिवर्तन उन प्राथमिक कृषि साख समितियों (Primary Agricultural Credit Societies -PACS) या सहकारी समितियों पर लागू नहीं होंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य और प्रमुख व्यवसाय कृषि विकास हेतु दीर्घकालिक वित्त प्रदान करना है, तथा जो ‘बैंक’, ‘बैंकर या ‘बैंकिंग’ शब्दों का प्रयोग नहीं करते हैं।

आवश्यकता

सरकार द्वारा यह निर्णय, धोखाधड़ी और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की कई घटनाओं के घटित होने के पश्चात लिया गया है, जिसमें पिछले वर्ष, पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (Punjab and Maharashtra Co-operative- PMC) बैंक में हुए बड़े घोटाले शामिल हैं।

  • सितंबर में, RBI को PMC बैंक के बोर्ड को विघटित करने और सख्त प्रतिबंध लगाने के लिए कहा गया था।
  • सहकारी बैंकों में6 लाख खाताधारक हैं, जिनकी कुल जमा राशि लगभग 5 लाख करोड़ है।
  • इसके अलावा, शहरी सहकारी बैंकों ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में 220 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के लगभग 1,000 मामलों की सूचना दी है।

सहकारी बैंकों को किस प्रकार विनियमित किया जाता है?

सहकारी बैंक, वर्तमान में RBI तथा सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार के दोहरे विनियमन के अधीन आते हैं। सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, इन बैंकों के निगमन, पंजीकरण, प्रबंधन, लेखा परीक्षा, बोर्ड का निवर्तन और विघटन के लिए उत्तरदायी होते हैं।

RBI इन बैंकों के विनियामक की भूमिका निभाती है, तथा आरक्षित नकदी और पूंजी पर्याप्तता, जैसे नियमों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सहकारी बैंक क्या होते हैं?
  2. उन्हें कैसे विनियमित किया जाता है?
  3. दोहरा विनियमन क्या है?
  4. किन प्रावधानों के तहत इन बैंकों का गठन और विनियमन किया जाता है?

मेंस लिंक:

सहकारी बैंकों के दोहरे विनियमन से संबंधित विषयों पर चर्चा कीजिए।

विधेयक के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां जाएं:

https://www.prsindia.org

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

25वां सौर चक्र


(What is Solar Cycle 25?)

संदर्भ:

हाल ही में, नासा और ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमास्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) के वैज्ञानिकों द्वारा  एक नए सौर चक्र के शुरू होने के अनुमानों की घोषणा की गयी है। इसे 25वां सौर चक्र (Solar Cycle 25) कहा जा रहा है।

मुख्य निष्कर्ष:

  • सौर चक्र 25 के लिए ’सौर न्यूनतम’ (Solar Minimum) दिसंबर 2019 में घटित हुआ था।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार ‘सौर अधिकतम’ (Solar maximum), [सौर चक्र के मध्य की स्थिति], जुलाई 2025 में घटित होगी।
  • यह सौर चक्र पिछले सौर चक्र की भांति मजबूत होगा। पिछला सौर चक्र ‘औसत से कम’ सक्रिय चक्र था।

सौर चक्र क्या होता है?

सूर्य एक विद्युत आवेशित गर्म गैस की एक विशाल गेंद है। यह आवेशित गैस गति करती हुई एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह चुंबकीय क्षेत्र एक चक्र से गुजरता है, जिसे सौर-चक्र (Solar Cycle) कहा जाता है।

  • प्रत्येक 11 साल बाद, सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र पूरी तरह से उलट जाता है। इसका अर्थ है कि सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव परस्पर स्थान परिवर्तित कर लेते हैं। इसके पश्चात सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को फिर से अपनी पूर्व स्थिति में आने के लिए लगभग 11 वर्ष का समय लगता है।
  • अब तक खगोलविदों ने ऐसे 24 सौर चक्रों के लिखित प्रमाण तैयार किये है। इनमे से आखिरी सौर चक्र 2019 में पूरा हुआ था।

वैज्ञानिक सौर गतिविधियों पर किस प्रकार निगाह रखते हैं?

  • वैज्ञानिक, सौर-कलंकों (Sunspots) के माध्यम से सौर चक्र का पता लगाते हैं।
  • किसी सौर चक्र की शुरुआत में आमतौर पर केवल कुछ सौर-कलंक (Sunspots) होते है और इसलिए इसे ’सौर न्यूनतम’ (Solar Minimum) कहा जाता है।

‘सौर न्यूनतम’ तथा ‘सौर अधिकतम’ क्या होते है?

सौर चक्र पर निगाह रखने की एक विधि सौर-कलंकों (Sunspots) की संख्या की गणना होती है।

  • सौर चक्र की शुरुआत में ’सौर न्यूनतम’ (Solar Minimum) की स्थिति होती है, अर्थात सूर्य में सबसे कम सौर-कलंक होते हैं। समय के साथ, सौर गतिविधि – और सौर-कलंकों की संख्या ने वृद्धि होती जाती है।
  • सौर चक्र की मध्य स्थिति में ‘सौर अधिकतम’ (Solar maximum) होता है, अर्थात सूर्य में सौर-कलंकों की संख्या सर्वाधिक होती है। जैसे ही चक्र समाप्त होता है, यह वापस सौर न्यूनतम पर आ जाता है और फिर से एक नया चक्र शुरू होता है।

पृथ्वी पर सौर चक्र के प्रभाव:

  • सौर विस्फोटों से आकाश में बिजली उत्पन्न हो सकती है, जिसे औरोरा (Aurora) कहा जाता है, तथा ये रेडियो संचार को प्रभावित करते है। चरम विस्फोट होने पर ये पृथ्वी पर स्थित बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं।
  • सौर गतिविधियां, इलेक्ट्रॉनिक्स उपग्रहों को प्रभावित कर सकती है तथा उनके जीवनकाल को प्रभावित कर सकती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सौर विकिरण हानिकारक हो सकता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. सौर लपटें (solar flares) क्या होती हैं?
  2. सौर-कलंक क्या होते हैं?
  3. सौर लपटें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
  4. सौर चक्र क्या होता है?
  5. ‘सौर न्यूनतम’ क्या होता है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भू-क्षरण कम करने तथा प्रवाल भित्ति संरक्षण कार्यक्रम हेतु वैश्विक पहल


(Global Initiative to reduce Land Degradation and Coral Reef program)

संदर्भ:

हाल ही में, सऊदी अरब के सुल्तान की अध्यक्षता में जी-20 देशों की पर्यावरण मंत्रिस्तरीय बैठक (Environment Ministerial MeetingEMM) आयोजित की गयी।

पहल के बारे में:

भू-क्षरण कम करने के लिए वैश्विक पहल का उद्देश्य जी 20 सदस्य देशों में भू-क्षरण को रोकने की मौजूदा कार्य योजना पर काम करना है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर संवहनीय विकास के लक्ष्य– SDG की उपलब्धियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए और किसी को नुकसान न पहुंचाने के सिद्धांत का पालन करने के लिए मौजूदा ढांचे के कार्यान्वयन को मजबूत करना है।

भूमि निम्नीकरण क्या है?

यह भूमि उपयोग अथवा मानव गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन सहित अन्य प्रक्रियाओं के कारण भूमि की जैविक या आर्थिक उत्पादकता में कमी या हानि होती है।

मरुस्थलीकरण (Desertification) क्या होता है?

यह शुष्क, अर्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों में भूमि का क्षरण होता है। मरुस्थलीकरण, मौजूदा रेगिस्तानों के विस्तार को संदर्भित नहीं करता है। यह इसलिए होता है क्योंकि शुष्क भूमि पारितंत्र, जो विश्व के एक तिहाई भू-क्षेत्र पर विस्तृत हैं, अति-दोहन और अनुचित भूमि उपयोग के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं।

भू-क्षरण के प्रमुख कारण:

  1. भूमि की सफाई, जैसे वनों की कटाई
  2. खराब कृषि पद्धतियों के कारण मिट्टी के पोषक तत्वों की कृषि में कमी
  3. पशुओं द्वारा अति चराई और अत्याधिक दोहन
  4. अनुपयुक्त सिंचाई
  5. शहरी विस्तार और वाणिज्यिक विकास
  6. बिना रास्ते वाले क्षेत्रों में वाहनों का आवगमन
  7. पत्थर, रेत, अयस्क और खनिजों का उत्खनन

भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • मरुस्थल विकास कार्यक्रम।
  • एकीकृत जलविभाजक प्रबंधन कार्यक्रम, जिसे अब प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना के तहत शुरू किया गया है।
  • राष्ट्रीय कृषि नीति 2000।
  • हरित भारत राष्ट्रीय मिशन, जो जलवायु परिवर्तन राष्ट्रीय कार्य योजना का एक भाग है
  • राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम।
  • नदी घाटी परियोजनाओं और बाढ़ प्रवण नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में मृदा संरक्षण।
  • वर्षा आधारित क्षेत्रों हेतु राष्ट्रीय जलग्रहण विकास परियोजना।
  • चारा और चारा विकास योजना।
  • कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट प्रोग्राम।
  • राष्ट्रीय जल नीति 2012।
  • राष्ट्रीय वन नीति 1988।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. G20 पर्यावरण मंत्रियों की बैठक 2020 के परिणाम।
  2. UNCCD के बारे में।
  3. REDD क्या है?
  4. REDD + क्या है?
  5. राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम क्या है?

मेंस लिंक:

भू-क्षरण कम करने तथा प्रवाल भित्ति संरक्षण कार्यक्रम हेतु वैश्विक पहल पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

मसौदा, विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम 2020


(Draft Electricity (Rights of Consumers) Rules, 2020)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा पहली बार विद्युत उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए नियमों का मसौदा तैयार किया गया है।

मसौदे की प्रमुख विशेषताएं

  1. सेवा की विश्वसनीयता (Reliability of service): DISCOM के लिए प्रति वर्ष प्रति उपभोक्ता औसत बिजली कटौती की संख्या तथा अवधि तय करने हेतु राज्य विद्युत नियामक आयोग।
  2. कनेक्शन के लिए समय पर और सरलीकृत प्रक्रिया: 10 किलोवाट भार तक के विद्युत कनेक्शन के लिए केवल दो दस्तावेज तथा 150 किलोवाट तक भार के लिए कनेक्शन देने में तेजी लाने हेतु कोई अनुमानित मांग शुल्क नहीं।
  3. नया कनेक्शन प्रदान करने हेतु समयावधि: नया कनेक्शन प्रदान करने और मौजूदा कनेक्शन को संशोधित करने के लिए मेट्रो शहरों में अधिकतम 7 दिन, नगरपालिका क्षेत्रों में 15 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 दिन ।
  4. साठ दिनों या अधिक की देरी के साथ बिल देने पर 2 से 5% की छूट।
  5. ऑनलाइन भुगतान पर जोर: नकद, चेक, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि में बिलों का भुगतान करने का विकल्प लेकिन 1000 या अधिक रु. के बिल हेतु ऑनलाइन भुगतान करने पर जोर।
  6. प्रॉज्यूमर/पेशेवर (Prosumers): उपभोक्ताओं की उभरती हुई श्रेणी को “प्रॉज्यूमर/पेशेवर” के रूप में मान्यता देना। इन्हें स्व-उपयोग के लिए बिजली का उत्पादन करने का अधिकार होगा तथा SERC द्वारा निर्धारित सीमा के अंतर्गत कनेक्शन के एक ही पॉइंट का उपयोग करके ग्रिड में अधिशेष बिजली को प्रवाहित कर सकते हैं।
  7. उपभोक्ता शिकायत निवारण में सुगमता हेतु सब-डिवीजन से लेकर विभिन्न स्तरों पर उपभोक्ताओं के 2-3 प्रतिनिधियों के साथ उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम।
  8. बिजली वितरण कंपनियों- डिस्कॉम द्वारा सेवा में देरी के लिए मुआवजा या दंड का प्रावधान; जहां तक संभव हो, मुआवजे का भुगतान कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले बिल में ही किया जाए।

प्रॉज्यूमर/पेशेवर (Prosumers) कौन होते हैं?

ये ऐसे व्यक्ति हैं जो बिजली उपभोक्ता तो हैं और साथ ही उन्होंने अपनी छतों पर सौर ऊर्जा इकाइयां स्थापित की हैं या फिर अपने सिंचाई पंपों को सोलराइज़ किया है।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।

गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम


(Unlawful Activities (Prevention) Act)

संदर्भ:

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau– NCRB) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016, 2017 और 2018 के दौरान देश में आतंकवाद विरोधी कानून, ‘गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम’ (Unlawful Activities (Prevention) Act UAPA) के तहत कुल 3,005 मामले दर्ज किए गए तथा 3,974 लोग अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गए हैं।

गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के बारे में:

  • 1967 में पारित, गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम [Unlawful Activities (Prevention) Act-UAPA] का उद्देश्य भारत में गैरकानूनी गतिविधि समूहों की प्रभावी रोकथाम करना है।
  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, जिसके द्वारा यदि केंद्र किसी गतिविधि को गैरकानूनी घोषित कर सकता है।
  • इसके अंतर्गत अधिकतम दंड के रूप में मृत्युदंड तथा आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • UAPA के तहत, भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों को आरोपित किया जा सकता है। यह अधिनियम भारतीय और विदेशी अपराधियों पर सामान रूप से लागू होता है, भले ही अपराध भारत के बाहर विदेशी भूमि पर किया गया हो।
  • UAPA के तहत, जांच एजेंसी गिरफ्तारी के बाद अधिकतम 180 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर सकती है और अदालत को सूचित करने के बाद इस अवधि को और आगे बढ़ाया जा सकता है।

संशोधन तथा परिवर्तन

  • 2004 के संशोधन के द्वारा आतंकवादी गतिविधियों के लिए संगठनों पर प्रतिबंध लगाने हेतु अपराधों की सूची में “आतंकवादी अधिनियम” जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत 34 संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • वर्ष 2004 तक, ‘गैरकानूनी’ गतिविधियों को किसी क्षेत्र के अलगाव तथा उस पर गैर-कानूनी अधिकार से संबंधित अपराधों के लिए संदर्भित किया जाता था।

2019 के संशोधनों के अनुसार:

  • यह अधिनियम राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक को ऐसी संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार देता है जो उसके द्वारा की जा रही जाँच में आतंकवाद से होने वाली आय से बनी हो।
  • यह अधिनियम राज्य में डीएसपी अथवा एसीपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के अतिरिक्त आतंकवाद के मामलों की जांच करने हेतु NIA के इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार देता है।

UAPA की आलोचना

  • इस कानून का अक्सर दुरुपयोग होता है।
  • राजनीतिक विरोधियों तथा सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने बाले नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • 2019 के संशोधन से जांच एजेंसियों को अनियंत्रित अधिकार दिए गए है।
  • यह कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है, क्योंकि ‘पुलिस’ भारतीय संविधान की 7 वीं अनुसूची के तहत एक राज्य का विषय है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गैरकानूनी गतिविधि की परिभाषा।
  2. अधिनियम के तहत केंद्र की शक्तियां।
  3. क्या ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा लागू है?
  4. 2004 और 2019 में संशोधन द्वारा बदलाव लाया गया।
  5. क्या विदेशी नागरिकों को अधिनियम के तहत आरोपित किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

क्या आप सहमत हैं कि गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन अधिनियम मौलिक अधिकारों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वतंत्रता का बलिदान करना न्यायसंगत है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कोसी रेल महासेतु

हाल ही में बिहार में कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन किया गया।

  • कोसी महा सेतु परियोजना के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने 2003-04 में मंजूरी दे दी थी। कोसी महासेतु की लंबाई 9 किलोमीटर है।
  • यह बिहार के निर्मली और सरायगढ़ जिलों को जोड़ता है।
  • यह पूर्वोत्तर भारत के लिए एक छोटा मार्ग प्रदान करता है।
  • भारत-नेपाल सीमा के करीब होने के चलते इस पुल का रणनीतिक महत्व भी है।

आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक 2020

आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक 2020 को संसद द्वारा पारित कर दिया गया है। इससे पूर्व यह विधेयक 19 मार्च को लोक सभा में पारित कर दिया गया था।

  • जामनगर, गुजरात में स्‍थापित होने वाले इस संस्‍थान का नाम आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्‍थान (Institute of Teaching and Research in AyurvedaITRA) होगा। इसे राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थान (Institution of National ImportanceINI) का दर्जा दिया जाएगा।
  • ITRA आयुष क्षेत्र में INI के दर्जे वाला पहला संस्‍थान होगा।
  • इस ITRA की स्‍थापना गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर, जामनगर में वर्तमान में विद्यमान आयुर्वेद संस्थानों को मिलाकर की जाएगी।

भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन

वर्तमान में, परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियां, भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI)  परमाणु ऊर्जा उत्पादन में संलग्न हैं।

  • परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र में गैर-सरकारी क्षेत्र को अनुमति देने के लिए वर्तमान में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
  • वर्तमान में देश में 6780 मेगावाट की क्षमता वाले बाईस 22 रिएक्टर कार्यरत हैं।

परमाणु ऊर्जा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

वर्तमान नीति (सरकार की समेकित एफडीआई नीति) के तहत परमाणु ऊर्जा को निषिद्ध क्षेत्रों की सूची में रखा गया है।

  • हालांकि, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से संबंधित उपकरणों के विनिर्माण और संबंधित अन्य सुविधाओं के लिए आपूर्ति प्रदान करने हेतु परमाणु उद्योग में FDI पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए NPCIL के संयुक्त उपक्रमों को लाइसेंस देने हेतु वर्ष 2015 में परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 में संशोधन किया गया था।

पश्चिमी घाट में कलिंगा मेढक

(Kalinga frog in Western Ghats)

चर्चा का कारण

हाल ही में, वैज्ञानिकों ने कलिंगा क्रिकेट फ्रॉग (Kalinga Cricket Frog) में ‘मॉर्फोलॉज़िकल फेनोटाइपिक प्लास्टिसिटी’ (Morphological Phenotypic Plasticity- MPP) की अपनी तरह की पहली खोज संबंधी सूचना दी है।

MPP क्या है?

‘मॉर्फोलॉज़िकल फेनोटाइपिक प्लास्टिसिटी’ (MPP), किसी जीव द्वारा, प्राकृतिक पर्यावरणीय परिवर्तन होने पर प्रबल रूपात्मक (शारीरिक विशेषताएँ) तबदीली को प्रदर्शित करने की क्षमता होती है।

कलिंगा फ्रॉग के बारे में:

  • इस मेंढक प्रजाति से संबंधित जानकारियों को वर्ष 2018 में रिकॉर्ड किया गया था, तथा इसे प्रायद्वीपीय भारत के पूर्वी घाट में खोजा गया था।
  • इसे पूर्वी घाट की पहाड़ी श्रृंखलाओं के लिए स्थानिक माना जाता था। लेकिन, शोधकर्ताओं ने अब मध्य पश्चिमी घाट में ‘मॉर्फोलॉज़िकल फेनोटाइपिक प्लास्टिसिटी’ (MPP) के प्रमाण सहित कलिंगा क्रिकेट फ्रॉग की खोज की है।


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