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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 17 सितम्बर 2020

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

INSIGHTS NEW SECURE – 2020: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: सामाजिक सशक्तीकरण, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्मनिरपेक्षता।

1. क्षेत्रवाद की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। भारत में ग्रहण किये गए क्षेत्रवाद के विभिन्न स्वरूपों का विस्तार से वर्णन कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Insights on India

 निर्देशक शब्द: 

स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 वर्णन कीजिये ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

क्षेत्रवाद की अवधारणा को संक्षेप में समझाइये।

 विषय वस्तु:

समझाइये कि भारत में क्षेत्रवाद भारत की भाषाओं, संस्कृतियों, जनजातियों, आर्थिक हितों, भौगोलिक संकेन्द्रण इत्यादि की विविधता में निहित है।

भारत में विद्यमान क्षेत्रवाद के विभिन्न स्वरूपों पर चर्चा कीजिए।

स्पष्ट कीजिए कि क्षेत्रवाद को प्रायः राष्ट्रीय एकीकरण के विरोध के रूप में क्यों देखा जाता है।

 निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि क्षेत्रवाद सदैव राष्ट्रीय एकीकरण का विरोध नहीं करता है। यह कुछ वास्तविक मांगों, विशेष रूप से विकासात्मक मांगों पर उच्च अंतरग्रही एकजुटता और बेहतरी के लिए प्रेरित करने की प्रतिस्पर्धा को जन्म दे सकता है।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

2. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रमुख प्रावधानों का विस्तार से वर्णन कीजिए एवं उनके सशक्तिकरण के लिए बेहतर उपाय सुझाइये। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: The Hindu 

 निर्देशक शब्द: 

वर्णन कीजिये ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 को भारतीय संसद द्वारा दिव्यांगजन के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCRPD) के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पारित किया गया था, जिसे भारत ने 2007 में अनुमोदित किया था।

विषय वस्तु:

इसके मुख्य प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

दिव्यांगजन के सशक्तिकरण के लिए कुछ अभिनव उपाय सुझाइये।

 निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: स.अ.1 सामाजिक सशक्तीकरण।

स.अ.2– सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

3. किसी उद्योग को अपनी स्थिति का उपयोग समर्थन करने एवं “50% से अधिक सशक्तिकरण करने” में सभी हितधारकों के साथ काम करने के लिए करना चाहिए। क्योंकि जहां महिलाएं काम करती हैं, वहां अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ती हैं और देश समृद्ध होते हैं। क्या आप सहमत हैं? टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Hindustan Times 

 निर्देशक शब्द: 

टिप्पणी कीजिये ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

हाल के वर्षों में नेतृत्व के पदों पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व वृद्धि हुई है, लेकिन आर्थिक अवसर के विभेद को समाप्त करने के लिए यह पर्याप्त नहीं है।

 विषय वस्तु:

भारत के सदर्भ में स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली असमानताओं पर चर्चा कीजिए।

समझाइये कि आपदा को अवसर में बदलने और कार्यबल में महिलाओं की अधिकाधिक भागीदारी एवं महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों की दिशा में बदलाव को तेज करने की आवश्यकता क्यों है। उपयुक्त उदाहरण भी दीजिए।

इस दिशा में सरकार द्वारा किये गए प्रयासों पर भी प्रकाश डालिये।

 निष्कर्ष:

आगे की राह के साथ निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: स.अ.2- स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

स.अ.3– भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

4. भारत के लिए कौशल विकास के महत्व को समझाते हुए इससे संबंधित चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। इस दिशा में सरकार ने क्या प्रयास किये हैं? (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Hindustan Times 

 निर्देशक शब्द:

प्रकाश डालिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर लेखन में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह प्रश्न से सम्बंधित प्रासंगिक जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

भारत में कौशल विकास की वर्तमान स्थिति को दर्शाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

भारत के लिए कौशल विकास के महत्व को स्पष्ट कीजिए।

कौशल विकास से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डालिये।

 निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि जैसा कि भारत एक अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनना चाहता है, उसे भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए अपने कार्यबल को रोजगारपरक कौशल और ज्ञान से मेल खाते अंतर्राष्ट्रीय मानकों से लैस करने की आवश्यकता है।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

5. “कृषि भूमि स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार के लिए धारणीय कृषि प्रथाओं के माध्यम से मृदा की जैव विविधता, मृदा जैविक कार्बन का संरक्षण आवश्यक समझा जाना चाहिए।” चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Down to Earth  

 निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

प्रकाश डालिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर लेखन में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह प्रश्न से सम्बंधित प्रासंगिक जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

प्रश्न के कथन को समझाते हुए देश की वर्तमान कृषि प्रणाली से सम्बंधित तथ्यों पर प्रकाश डालिए।

 विषय वस्तु:

समझाइये कि मृदा को एक पारिस्थितिक प्रणाली और एक परिमित संसाधन के रूप में माना जाना चाहिए। कृषि भूमि स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार के लिए धारणीय कृषि प्रथाओं के माध्यम से मृदा की जैव विविधता और मृदा जैविक कार्बन का संरक्षण आवश्यक समझा जाना चाहिए।

खाद्य सुरक्षा एवं मृदा संरक्षण के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए।

इस दिशा में सरकार के प्रयासों पर भी चर्चा कीजिए।

 निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि यह आशा की जाती है कि भविष्य की नीति विश्व के भोजन के प्रबंध के लिए कृषि और संरक्षण समुदाय को एक साथ काम करने के लिए प्रेरित करेगी, जो धारणीय और व्यवहार्य कृषि पारिस्थितिक प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए कार्बन का पुनर्गठन करेगी और ग्रह पर जीवन की समृद्ध विविधता का संरक्षण करेगी।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

6. मूल्य एवं सद्गुण के मध्य विभेद एवं समानताओं पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

मूल्य एवं सद्गुण को परिभाषित करते हुए उत्तर प्ररम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

दोनों के मध्य के अंतर पर प्रकाश डालिए।

दोनों में क्या समानताएं हैं, समझाइए।

उनमें से प्रत्येक को प्रभावित करने वाले कारकों पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

दोनों के महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: केस स्टडी (मामला अध्ययन) ।

7. आप एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं। आपकी एक महिला मित्र ने बहुत अमीर और प्रभावशाली परिवार में शादी की। हालांकि, समय बीतने के साथ आपको पता चला कि वह परिवार बहुत रूढ़िवादी है क्योंकि वह महिला मित्र भ्रूण अवस्था में बच्चे के लिंग का निर्धारण करने में आपकी सहायता के लिए आपसे मिलने आयी थी। क्योंकि उसके ससुराल वाले एक लड़का चाहते हैं, जो परिवार के उत्तराधिकारी के रूप में कार्य करे। उन्होंने लड़की होने पर बच्चे का गर्भपात कराने का भी आदेश दिया है। बाद में उसके ससुराल वालों ने अत्यधिक जोर दिया और मोबाइल फोन के माध्यम से डॉक्टर की स्वास्थ्य मंत्री से बात करवाई। मंत्री ने कहा कि सम्बंधित मुद्दे पर कुछ भी कहे बिना वह सभी संभव माध्यमों से उनकी सहायता करे। इस प्रकार पुलिस को सम्बंधित मामले की शिकायत करना व्यर्थ है।

 निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए:

 (a) उपरोक्त मामले में कौन-कौन सी नैतिक दुविधाएँ हैं?

 (b) क्या आपको लगता है कि आपका नैतिक दायित्व भी आपके मित्र की सहायता करना चाहता है? (250 शब्द)

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रश्न के संदर्भ को समझाते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।

  विषय वस्तु:

प्रश्न से संबंधित नैतिक दुविधाओं पर प्रकाश डालिए।

इसमें शामिल मामलों पर चर्चा कीजिए- नैतिक दुविधा और एक नैतिक चिकित्सक के रूप में आप अपना कर्तव्य कैसे निभाएंगे।

निष्कर्ष:

अपने पक्ष का औचित्य सिद्ध करते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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