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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2020

2. संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2020 लोक सभा में पारित

3. आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी

4. प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. रूपया ब्याज दर डेरिवेटिव्स पर आरबीआई का मसौदा

2. सिटी कम्पोस्ट को बढ़ावा देने की नीति

3. एंटी सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) पर डाक टिकट

4. विद्युत अधिनियम संशोधन

5. विमान (संशोधन) विधेयक, 2020 संसद में पारित

6. केरल में प्रमाणित सर्प प्रबंधकर्ता

7. उत्तर प्रदेश का नया विशेष सुरक्षा बल

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना

2. खराई ऊंट (Kharai Camel)

3. अभियंता दिवस (Engineer’s Day)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2020


(The National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill)

संदर्भ:

इस विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जाना प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल की शक्तियों एवं कृत्यों से संबंधित संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 में संशोधन करना है।

प्रस्तावित विधेयक की प्रमुख विशेषताएं:

  • विधेयक में उपराज्यपाल (Lieutenant-GovernorLG) को अधिक विवेकाधीन शक्तियां प्रदान करते हुए, मंत्रिपरिषद और उपराज्यपाल (L-G) के कार्यों को स्पष्ट करने का प्रावधान किया गया है।
  • प्रावधान के अनुसार, उपराज्यपाल, दिल्ली की विधान सभा की शक्तियों के दायरे से बाहर, अखिल भारतीय (नागरिक) सेवा और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा से संबंधित किसी भी मामले में अपने विवेक से कार्य कर सकता है।
  • विधेयक में उपराज्यपाल को अधिक शक्ति दी गयी है, इसके तहत विवेकानुसार लिए गए किसी भी निर्णय की वैधता पर सवाल नहीं उठाया जा सकेगा।

दिल्ली की वर्तमान प्रशासन पद्धति

वर्ष 1991 में संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 के द्वारा संविधान में अनुच्छेद 239AA को जोड़ा गया था, इसके तहत एक विधानसभा सहित केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली का गठन किया गया था।

  • इसके अनुसार- केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाएगा तथा अनुच्छेद 239 के तहत नियुक्त प्रशासक को उपराज्यपाल के रूप में अभिहित किया जाएगा।
  • मौजूदा अधिनियम के अनुसार, दिल्ली विधान सभा को लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को छोड़कर सभी मामलों में कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।

संबंधित विवाद

अनुच्छेद 239 और 239AA के सह-अस्तित्व के कारण, NCT सरकार और केंद्र सरकार एवं इसके प्रतिनिधि, उपराज्यपाल के मध्य क्षेत्राधिकार संबधी विवाद उत्पन्न हो जाता है।

  • केंद्र सरकार के अनुसार, दिल्ली के एक केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते, अनुच्छेद 239 उपराज्यपाल को अपनी मंत्रिपरिषद से स्वतंत्र होकर कार्य करने का अधिकार देता है।
  • हालांकि, दिल्ली राज्य सरकार का कहना है, कि संविधान का अनुच्छेद 239AA दिल्ली को अपनी विधायी निर्वाचित सरकार होने के लिए विशेष दर्जा प्रदान करता है।
  • यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल तथा राज्य सरकार की प्रशासनिक शक्तियों को लेकर विवाद उत्पन्न करता है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:

वर्ष 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से निर्णय दिया, कि उपराज्यपाल, दिल्ली सरकार की “सहायता और सलाह” से बाध्य हैं और दोनों को एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्वक काम करना चाहिए।

उच्चत्तम न्यायलय के निर्णय में अनिर्णीत क्षेत्र

अतिव्यापी क्षेत्र (Overlapping Areas): यद्यपि अदालत ने निर्धारित किया है कि उपराज्यपाल ‘भूमि’,  ‘लोक व्यवस्था’, और ’पुलिस’ को छोड़कर, अन्य विषयों पर मंत्रि मंडल की सहायता और सलाह पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। किंतु, लोक व्यवस्था का एक बहुत व्यापक अर्थ है, जो कार्यकारी शक्तियों को अतिव्यापी बनाता है।

अनुच्छेद 239AA (4) पर स्पष्टता का अभाव: अदालत ने अपने निर्णय में, राज्य सरकार तथा उपराज्यपाल में किसी निर्णय को लेकर मतभेद होने की स्थिति में मामले को राष्ट्रपति के लिए संदर्भित करने संबंधी विषय को स्पष्ट रूप से वर्णित नहीं किया है।

खुली शब्दावली (Open-Ended Terminologies): किसी मामले को राष्ट्रपति के लिए संदर्भित करने की स्थिति में, न्यायालय ने स्पष्ट कहा है, कि उपराज्यपाल को सहकारी संघवाद, संवैधानिक संतुलन और संवैधानिक शासन की अवधारणा के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। हालाँकि, ये शब्द बहुत व्यापक और खुले हुए हैं। तथा इनकी अलग-अलग व्याख्यायें की जा सकती हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 239A बनाम 239AA
  2. दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल की शक्तियाँ
  3. दिल्ली का प्रशासन, विधायिका वाले अन्य राज्यों के प्रशासन से किस प्रकार भिन्न है?
  4. दिल्ली को विधायिका कब प्रदान की गयी?
  5. दिल्ली उपराज्यपाल की नियुक्ति किस प्रकार की जाती है?

मेंस लिंक:

संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 पर एक टिप्पणी लिखिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2020 लोक सभा में पारित


(Salary, Allowances and Pension of Members of Parliament (Amendment) Bill, 2020)

विधेयक में निम्नलिखित संशोधन प्रस्तावित किये गए हैं:

  • संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 में सशोधन करके संसद सदस्यों के निर्धारित वेतन में 30% तक की कटौती।
  • ‘मंत्रियों के वेतन और भत्तों से संबंधित अधिनियम’ (The Salaries and Allowances of Ministers Act), 1952 में संशोधन करके मंत्रियों के पूरक भत्तों में 30% तक की कटौती।
  • 1954 में अधिनियम के तहत अधिसूचित नियमों में संशोधन करके सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय व्यय भत्ता सहित कुछ भत्तों में कटौती।

ये परिवर्तन एक वर्ष की अवधि के लिए किए गए हैं, तथा यह 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी होंगे।

पृष्ठभूमि:

COVID-19 महामारी से निपटने हेतु केंद्र सरकार के वित्तीय संसाधनों की परिपूर्ति के लिए ये कटौती की जा रही है।

संविधान के अंतर्गत वेतन निर्धारित करने हेतु प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 106 में संसद सदस्यों के लिए विधि बनाकर अपना वेतन निर्धारित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

  • वर्ष 1985 में, संसद द्वारा एक कानून बनाया गया, जिसके माध्यम से सांसदों के कुछ भत्ते, जैसे निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, कार्यालय भत्ता और आवास भत्ता को निर्धारित करने और संशोधित करने की शक्ति केंद्र सरकार को दी गयी थी।
  • वर्ष 2018 तक, संसद सदस्यों द्वारा समय-समय पर अपने वेतन को संशोधित करने के लिए कानून पारित किए गए हैं।
  • वित्त अधिनियम, 2018 के अनुसार- आयकर अधिनियम, 1961 के तहत तैयार किये गए महंगाई सूचकांक के आधार पर सांसदों के वेतन, दैनिक भत्ता और पेंशन में प्रति पांच वर्ष में वृद्धि की जाएगी।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी


(Essential Commodities Bill Passed)

संदर्भ:

हाल ही में लोकसभा द्वारा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया है।

यह विधेयक COVID-19 लॉकडाउन के मद्देनजर जून माह में प्रख्यापित किये गए अध्यादेश को प्रतिस्थापित करेगा।

प्रमुख प्रावधान:

  • विधेयक में, अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दलहन, प्याज, आलू सहित कृषि खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, संचरण और बिक्री के लिए, असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर, नियंत्रण से मुक्त किये जाने का प्रस्ताव किया गया है।
  • विधेयक में किन असाधारण परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है? (i) युद्ध, (ii) अकाल, (iii) कीमतों में अत्यधिक वृद्धि, और (iv) गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा।
  • भंडारण सीमा: अध्यादेश के अनुसार, कृषि उपज के लिए भंडारण सीमा, उपज की मूल्य वृद्धि पर आधारित होनी चाहिए।
  • भंडारण सीमा केवल (i) बागवानी उपज के खुदरा मूल्य में 100% की वृद्धि; होने पर और (ii) गैर-खाद्य कृषि खाद्य पदार्थों के खुदरा मूल्य में 50% की वृद्धि होने पर लगाई जा सकती है:  ।
  • इसकी गणना किस प्रकार की जाती है? कीमतों में वृद्धि की गणना, पिछले बारह महीने की कीमतों अथवा पिछले पांच वर्षों के औसत खुदरा कीमतों, जो भी कम हो, के आधार पर की जाएगी।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत केंद्र सरकार की शक्तियाँ:

  • केंद्र सरकार कुछ ख़ास वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं (Essential Commodities) के रूप में घोषित कर सकती है।
  • केंद्र सरकार इन आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को विनियमित या प्रतिबंधित कर सकती है।

लाभ:

  • इस विधेयक के पारित हो जाने पर निजी निवेशकों के अपने व्यावसायिक कार्यों में अत्यधिक विनियामक हस्तक्षेप की आशंका दूर होगी।
  • उत्‍पाद, उत्‍पाद सीमा, आवाजाही, वितरण और आपूर्ति की स्‍वतंत्रता से अर्थव्‍यवस्‍था में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र/विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश आकर्षित होगा।
  • यह कोल्ड स्टोरेज में निवेश और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण में मदद करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित वस्तुएं।
  2. सूची से वस्तुओं को शामिल करने और हटाने की शक्तियाँ।
  3. क्या राज्यों को केंद्र के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है?
  4. आर्थिक सर्वेक्षण कब और किसने जारी किया?
  5. क्या सरकार इस अधिनियम के तहत किसी उत्पाद का MRP तय कर सकती है?
  6. नवीनतम संशोधन।

मेंस लिंक

आवश्यक वस्तु अधिनियम के महत्व पर चर्चा कीजिए। हाल के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि यह अधिनियम पुराना हो चूका है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए, क्यों? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY)


(Pradhan Mantri Swasthya Suraksha Yojana)

चर्चा का कारण

हाल ही में, केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बिहार के दरभंगा में एक नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (All India Institute of Medical SciencesAIIMS) की स्थापना को मंजूरी प्रदान की गयी है। इसकी स्‍थापना प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत की जाएगी।

PMSSY के बारे में:

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) की घोषणा वर्ष 2003 में, देश के विभिन्न भागों में सस्ती / विश्‍वसनीय तृतीयक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा सुविधाओं की उपलब्धता में असंतुलन विसंगतियों को दूर करने तथा देश में गुणवत्तापूर्ण और बेहतर चिकित्सीय शिक्षा के लिये सुविधाओं का विस्तार करने करने के उद्देश्य से की गई थी।

PMSSY का कार्यान्वयन ‘स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय’ द्वारा किया जाता है।

इस योजना के दो घटक हैं:

  1. नए एम्स (AIIMS) संस्थानों की स्थापना (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान)।
  2. विभिन्न राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन (Upgradation)

प्रत्येक मेडिकल कॉलेज संस्थान के उन्नयन हेतु परियोजना लागत को, केंद्र और राज्य द्वारा साझा किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PMSSY के तहत घटक।
  2. परियोजना लागत साझाकरण।
  3. योजना का कार्यान्वयन।
  4. योजना के तहत अब तक स्थापित संस्थान।

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

रूपया ब्याज दर डेरिवेटिव्स पर आरबीआई का मसौदा


(RBI issues draft on rupee IR derivatives)

संदर्भ:

हाल ही में RBI द्वारा रूपया ब्याज दर डेरिवेटिव्स (रिज़र्व बैंक) दिशा-निर्देश, 2020 का मसौदा संस्करण जारी किया गया है।

इनका उद्देश्य, अनिवासी भारतीयों की उच्च भागीदारी को प्रोत्साहित करना, विदेशी बाजार में घरेलू बाजार निर्माताओं की भूमिका को बढ़ाना, पारदर्शिता में सुधार करना, तथा बेहतर नियामक निगरानी करना हैं।

मुख्य दिशा-निर्देश:

  1. इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को एक्सचेंज-ट्रेडेड रुपया ब्याज दर डेरिवेटिव्स (IRD) में लेन-देन की अनुमति देने का प्रस्ताव किया गया है। इस कारोबार के लिये 5,000 करोड़ रुपये की सीमा रखी गयी है।
  2. FPI का एक्सचेंज-ट्रेडेड IRD में शुद्ध रूप से ‘शार्ट पोजिशन’ सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य रुपया बांड प्रतिभूतियों में ‘लांग पोजिशन’ से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  3. उपयोगकर्ता, बाज़ार-निर्माता (बाज़ार को तरलता प्रदान करने के लिए उपयोगकर्ताओं को बोली लगाने और कीमतों की पेशकश करने वाली इकाइयाँ) को रुपए IRD कॉन्ट्रैक्ट देने का उद्देश्य उपयोगकर्ता को खुदरा उपयोगकर्ता के रूप में या गैर-खुदरा के रूप में वर्गीकृत करना है।
  4. ड्राफ्ट के अनुसार, गैर-खुदरा उपयोगकर्ता के अंतर्गत, RBI, SEBI, IRDAI या PFRDA द्वारा विनियमित संस्थाएँ हैं; 500 करोड़ रुपये की न्यूनतम निवल संपत्ति के साथ निवासी कंपनियां; और अनिवासी आते हैं ।

ब्याज दर डेरिवेटिव्स (IRD) क्या होते हैं?

  • ब्याज दर डेरिवेटिव्स (IRD) ऐसे अनुबंध होते हैं जिनका मूल्य एक या अधिक ब्याज दरों, ब्याज दरों के साधनों की कीमतों या ब्याज दर सूचकांकों से प्राप्त होता है।
  • इनमें वायदा ब्याज दर, विकल्प, स्वैप तथा FRA सम्मिलित हो सकते हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

सिटी कम्पोस्ट को बढ़ावा देने की नीति


(Policy on Promotion of City Compost)

 प्रमुख बिंदु:

  • वर्ष 2016 में शहरी अपशिष्ट को संसाधित और उपयोग करने हेतु सिटी कम्पोस्ट को बढ़ावा देने की नीति को मंजूरी दी गई थी।
  • इस नीति के तहत, उर्वरक कंपनियों को सिटी कम्पोस्ट (शहरी अपशिष्ट से बनने वाली खाद) को बढ़ावा देने तथा विपणन करने के लिए प्रति टन सिटी कम्पोस्ट पर 1,500 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इस नीति का कार्यान्वयन रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।

चर्चा का विषय

  • उपयुक्त बाजार के अभाव तथा अप्रभावी कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप इस बहुप्रचारित योजना को वांछित लोकप्रियता नहीं मिल सकी है।
  • इसके अलावा, खाद की उच्च उत्पादन और बिक्री लागत, आपत्तिजनक उत्पाद गुणवत्ता, किसानों के लिए किसी प्रत्यक्ष प्रोत्साहन / सब्सिडी की कमी तथा ज्ञान की कमी आदि अन्य कारणों से सिटी कम्पोस्ट किसानों के मध्य एक लोकप्रिय विकल्प नहीं बन पाया है।

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 सिटी कम्पोस्ट हेतु संभावनाएं

वर्तमान में, भारत में प्रतिदिन करीब 1.5 लाख टन ठोस अपशिष्ट का उत्पादन होता है, तथा भारत के विभिन्न शहरों में इसका 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत भाग जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) होता है। इसका मतलब यह है, कि गीले कचरे को संसाधित करके प्राकृतिक रूप से खाद बनाने की काफी क्षमता मौजूद है।

यह गंभीर विषय क्यों है?

कचरे की जगहों पर जैविक अपशिष्ट के अनियंत्रित विघटन से हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। अतः, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयुक्त निपटान तंत्र को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कार्रवाई करना अनिवार्य है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यह योजना कब और किसके द्वारा शुरू की गयी?
  2. योजना के तहत वित्तीय सहायता।
  3. कम्पोस्ट क्या होता है?

मेंस लिंक:

इस योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

एंटी सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) पर डाक टिकट


(Postage Stamp released on A-SAT)

संदर्भ:

इंजीनियर्स डे के अवसर पर डाक विभाग द्वारा भारत के पहले एंटी सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) के नाम पर एक विशिष्ट रूप से निर्मित ‘मेरा डाक टिकट’ (Customized My Stamp) जारी किया गया।     

पृष्ठभूमि:

27 मार्च 2019 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एंटी-सैटेलाइट (A-SAT) मिसाइल परीक्षण ‘मिशन शक्ति’ का सफल परीक्षण किया गया था।

  • DRDO द्वारा निर्मित A-SAT मिसाइल ने सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit-LEO) में परिक्रमा कर रहे भारतीय सैटेलाइट को ‘हिट टू किल’ मोड में निशाना बनाया।
  • यह इंटरसेप्टर मिसाइल तीन चरणों वाली मिसाइल थी जिसमें दो ठोस रॉकेट बूस्टर प्रयोग किये गए थे।

महत्व:

  • भारत, इस विशिष्ट और आधुनिक क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश है, और इसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकों से प्राप्त किया गया है।
  • अब तक, केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास अंतरिक्ष में किसी सक्रिय लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता थी।

A-SAT परीक्षण और अंतरिक्ष मलबा  

इस परीक्षण को निचले वातावरण में किया गया था ताकि परीक्षण के परिणामस्वरूप अंतरिक्ष में कोई मलबा निर्मित न हो। परीक्षण से जो भी मलबा निर्मित होगा, वह कुछ ही हफ़्तों में पृथ्वी पर वापस गिर जाएगा।

बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती संबंधी अंतर्राष्ट्रीय कानून

  • अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती संबंधी विषयों पर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधि ‘बाहरी अंतरिक्ष संधि’, 1967 (Outer Space Treaty,1967) है।
  • बाहरी अंतरिक्ष संधि के तहत बाह्य अंतरिक्ष में केवल सामूहिक विनाश के हथियारों को प्रतिबंधित किया गया है, न कि सामान्य हथियारों को।
  • भारत इस संधि पर एक हस्ताक्षरकर्ता है, और इसने वर्ष 1982 में इस संधि की अभिपुष्टि की थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बाहरी अंतरिक्ष संधि, 1967 की प्रमुख विशेषताएं।
  2. DRDO के बारे में।
  3. A-SAT मिसाइल क्या है?
  4. मिशन शक्ति क्या है?

मेंस लिंक:

मिशन शक्ति क्या है? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020


(Electricity Act amendment)

चर्चा का कारण

हाल ही में, तेलंगाना सरकार द्वारा ने केंद्र सरकार द्वारा विद्युत अधिनियम, 2003 में प्रस्तावित संशोधन को केंद्र सरकार का ‘एकतरफा निर्णय तथा राज्यों की शक्तियों को हड़पने के उद्देश्य से संघीय भावना के खिलाफ एक स्पष्ट प्रयास’ बतात्ते हुए इसका कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • तमिलनाडु राज्य विधान सभा ने प्रस्तावित संशोधन के विरोध में जोरदार आवाज उठाते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कहा गया है, कि इसका उद्देश्य शक्तियों का केंद्रीकरण करना है तथा यह राज्यों पर बहुत बड़ा बोझ लाद देगा।
  • प्रस्ताव में मांग की गई, कि केंद्र सरकार आम लोगों, किसानों और वंचित वर्गों के हितों के लिए हानिकारक, इस कदम को तत्काल वापस ले।

विधेयक के विवादास्पद उपबंध

विधेयक में सब्सिडी को समाप्त किये जाने का प्रावधान किया गया है। किसानों सहित सभी उपभोक्ताओं को टैरिफ का भुगतान करना होगा। सब्सिडी को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से उपभोक्ताओं के खाते में भेजा जायेगा।

इस उपबंध के संबंध में राज्यों की चिंताएं:

  • इसका अर्थ होगा कि उपभोक्ताओं के विद्युत् शुल्क के के रूप में एक बड़ी राशि का भुगतान करना होगा, जबकि सब्सिडी की प्राप्ति बाद में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से होगी।
  • इससे शुल्क भुगतान में देरी होगी तथा परिणामस्वरूप जुर्माना आरोपित किये जायेंगे तथा कनेक्शनों में कटौती होगी।

इस मसौदे में राज्यों को शुल्क निर्धारित करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है, तथा इसका दायित्व केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकरण को सौपा गया है।

  • यह भेदभावपूर्ण है, क्योंकि इसके द्वारा केंद्र सरकार मनमाने ढंग से टैरिफ को बढ़ा सकती है।
  • मसौदे के एक अन्य प्रावधान के अंतर्गत राज्य की बिजली कंपनियों के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित अक्षय ऊर्जा का न्यूनतम प्रतिशत क्रय करना अनिवार्य किया गया है।
  • यह प्रावधान कम-नकद पूंजी वाली पॉवर फर्मों के लिए हानिकारक होगा।

विधेयक के अन्य प्रमुख प्रावधान:

नवीकरणीय ऊर्जा: यह केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के परामर्श से “अक्षय स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए” एक राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा नीति तैयार करने और अधिसूचित करने की शक्ति प्रदान करता है।

सीमा पार व्यापार: केंद्र सरकार को विद्युत् के सीमा पार व्यापार की अनुमति देने तथा सुविधा देने हेतु नियमों और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (Electricity Contract Enforcement Authority) का गठन: मसौदे में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक ‘केंद्रीय प्रवर्तन प्राधिकरण’ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।

इस प्राधिकरण के पास विद्युत उत्पादन और वितरण से जुड़ी हुई कंपनियों के बीच बिजली की खरीद, बिक्री या हस्तांतरण से संबंधित अनुबंधों की लागू करने के लिये दीवानी अदालत के बराबर अधिकार होंगे।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रस्तावित विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ECEA) की संरचना
  2. ECEA के प्रमुख कार्य
  3. DISCOMS किस प्रकार कार्य करती हैं?
  4. नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर क्या है?
  5. अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) की संरचना और कार्य
  6. मसौदे के प्रमुख प्रावधान

मेंस लिंक:

मसौदा विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020 की प्रमुख विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

वायुयान (संशोधन) विधेयक, 2020 संसद में पारित


(Aircraft (Amendment) Bill, 2020 passed in Parliament)

यह अधिनियम, नागरिक विमानों के निर्माण, स्वामित्व, उपयोग, संचालन, बिक्री, आयात और निर्यात और हवाईअड्डों के लाइसेंस को विनियमित करता है।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएं:

  1. विधेयक में, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation- DGCA), नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (Bureau of Civil Aviation Security – BCAS) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (Aircraft Accident Investigation Bureau- AAIB) जैसे नियामक संस्थानों को वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है।
  2. DGCA की शक्तियां: DGCA, विधेयक के अंतर्गत आने वाले मामलों के संबंध में निगरानी और विनियामक दायित्वों को पूरा करेगा।
  3. BCAS की शक्तियां: यह नागरिक उड्डयन सुरक्षा से संबंधित विनियामक निगरानी दायित्वों को पूरा करेगा।
  4. AAIB, विमान दुर्घटनाओं और वैमानिकी घटनाओं से संबंधित जांच करेगा।
  5. जुर्माना: विधेयक में नए नियमों के उल्लंघन के लिए कठोर दंड के तौर पर जुर्माना राशि 10 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने का भी प्रावधान है।
  6. केंद्र सरकार की शक्तियां: किसी व्यक्ति द्वारा अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन किये जाने पर, केंद्र सरकार, इस अधिनियम के तहत व्यक्ति को दिए गए लाइसेंस, प्रमाण पत्र या अनुमोदन को रद्द कर सकती है।
  7. अपवाद: वायुयान अधिनियम, 1934 में नौसेना, सेना, तथा वायुसेना से संबंधित विमानों को अधिनियम के दायरे से बाहर रखने का भी प्रावधान किया गया है।
  8. इस विधेयक में, इस छूट को सेना के तीनों अंगों के अतिरिक्त अन्य सशस्त्र बलों के लिए विस्तारित किया गया है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

केरल में प्रमाणित सर्प प्रबंधकर्ता


(Kerala to have certified snake handlers)

संदर्भ:

सांपों से निपटने हेतु संस्थागत प्रणाली तैयार करने वाला केरल वन विभाग देश में पहली राज्य इकाई बन गया है। केरल वन विभाग ने सांपों को मानव प्रभुत्व वाले स्थानों से बचाने और निर्जन क्षेत्रों में छोड़ने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं।

दिशानिर्देश:

  • अनिवार्य प्रमाणन: सर्प प्रबंधकर्ताओं को, प्रमाण प्राप्त करने के लिए 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग का होना अनिवार्य है।
  • चयन प्रक्रिया: प्रत्येक जिले में सर्प प्रबंधकर्ताओं की सूची तैयार करने के लिए सहायक वन संरक्षक (ACF, सामाजिक वानिकी) द्वारा आवेदनों की जांच की जाएगी। चयन प्रक्रिया के दौरान अनुभव, उम्र, स्वास्थ्य के साथ-साथ ट्रैक रिकॉर्ड सहित विभिन्न मापदंडों पर विचार किया जाएगा।
  • चयनित सर्प प्रबंधकर्ताओं को सांपों के सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु अनिवार्य प्रशिक्षण लेना आवश्यक होगा।
  • प्रमाण पत्र की वैधता: हालांकि, प्रमाणपत्र पांच साल के लिए वैध होगा, परन्तु सर्प प्रबंधकर्ता को किसी अवैध या अनैतिक कृत्यों में शामिल पाए जाने पर संबंधित ACF प्रमाणपत्र को वापस ले सकते हैं या रद्द कर सकते हैं।
  • सावधानियां: कार्य के दौरान सर्प प्रबंधकर्ताओं को सुरक्षात्मक कपड़े पहनने और सुरक्षा उपकरणों से लैस होना आवश्यक होगा।
  • बचाए गए सांपों को भी जल्द से जल्द वन अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षित क्षेत्रों में छोड़ना होगा। घायल होने पर सांप को उसकी फिटनेस की जाँच के बाद ही छोड़ा जा सकता है।

आवश्यकता:

सांप पकड़ने वालों द्वारा अवैज्ञानिक तरीके अपनाए जाने के आरोप लगाए जाते हैं, जिनसे जीव तनावग्रस्त होकर अपने और दूसरों के जीवन के लिए जोखिम पैदा करते हैं।

  • केरल में पिछले तीन वर्षों के दौरान साँप काटने से 334 मौतें तथा सांपो से संबंधित 1,860 अन्य मामले दर्ज किए गए हैं
  • सांपों को आपराधिक उद्देश्यों के लिए व्यापार किए जाने के मामले भी दर्ज किये गए हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

उत्तर प्रदेश का नया विशेष सुरक्षा बल


(UP’s new Special Security Force)

संदर्भ:

हाल ही में, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा, ‘उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल’ (Uttar Pradesh Special Security ForceUPSSF) के गठन के लिए अधिसूचना जारी की गयी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 26 जून को इस बल के गठन की घोषणा की गयी थी।

UPSSF क्या है?

इसकी कल्पना ‘उच्च-स्तरीय पेशेवर निपुणता रखने वाले बल’ के रूप में की गई है, जो प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी’ (Provincial Armed Constabulary- PAC) पर बोझ को कम करेगा। जिससे PAC कानून और व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।

इस सुरक्षा बल को प्रदेश में, प्रशासनिक कार्यालय एवं परिसर व तीर्थ स्थल, मेट्रो रेल, हवाई अड्डा, बैंक अन्य वित्तीय, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक संस्थानों आदि की सुरक्षा का काम सौंपा जाएगा।

UPSSF की संरचना

UPSSF का प्रमुख एक ‘अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक’ (Additional Director General of Police) स्तर का अधिकारी होगा। उसके बाद बल में एक महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक, कमांडेंट और डिप्टी कमांडेंट सम्मिलित होंगे।

शक्तियां:

  • इस विशेष सुरक्षा बल के पास किसी मजिस्ट्रेट के किसी आदेश के या किसी वारंट के बिना भी किसी व्यक्ति, जिसके द्वारा किसी संज्ञेय अपराध को किये जाने का ‘उचित संदेह’ हो, की तलाशी लेने या उसे गिरफ्तार करने का अधिकार होगा।
  • इस बल के लिए, अपनी सुरक्षा के तहत किसी परिसर में अतिक्रमण करने वाले किसी भी व्यक्ति को हटाने का अधिकार होगा।
  • इस बल के किसी सदस्य अथवा बल के किसी अधिकारी के निर्देश पर कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ, अच्छे उद्देश्य के साथ कोई भी कार्य करने पर, कोई भी मुकदमा या अभियोग नहीं चलाया जायेगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना

हाल ही में, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पलवल से सोहना-मानेसर-खरखौदा होते हुए सोनीपत तक हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना को अपनी मंजूरी दी है।

इस परियोजना की कुल लंबाई ~ 121.7 किमी है।

यह परियोजना हरियाणा रेल बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (HRIDC) द्वारा लागू की जाएगी, जो रेल मंत्रालय द्वारा हरियाणा सरकार के साथ मिलकर स्‍थापित की गई संयुक्‍त उद्यम कंपनी है।

महत्त्व: यह परियोजना दिल्‍ली न जाने वाले यातायात का पथांतरण (डायवर्जन) करने में मदद करेगी और एनसीआर के हरियाणा राज्‍य उप-क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स केन्‍द्रों के विकास में सहायता प्रदान करेगी।

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 खराई ऊंट (Kharai Camel)

  • इन ऊँटों को ‘तैरने वाले ऊंट’ (Swimming Camels) के नाम से भी जाना जाता है।
  • ये केवल गुजरात के भुज क्षेत्र में पाए जाते है।
  • बेहतर संरक्षण के लिए खराई ऊंट को एक पृथक नस्ल (भारत में पाई जाने वाली नौ नस्लों में से एक) के रूप में मान्यता दी गई है।
  • यह ऊँट कच्छ के रण की अत्यधिक कड़ी जलवायु के अनुकूल है, इस क्षेत्र में उथले समुद्र और उच्च लवणता पायी जाती है।
  • यह तटीय और शुष्क पारिस्थितिक तंत्र दोनों में रह सकते है। यह लवणीय / मैंग्रोव वृक्षों की चराई करते है तथा उच्च खारे पानी के प्रति सहनशील होते है।
  • यह अपने मुख्य भोजन, मैंग्रोव की तलाश में तीन किलोमीटर तक समुद्र में तैर सकते है।

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अभियंता दिवस (Engineer’s Day)

  • भारत हर साल 15 सितंबर को अभियंता दिवस मनाता है।
  • ‘इंजीनियर डे’ को महान भारतीय इंजीनियर, ‘भारत रत्न’ सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को उनके जन्मदिन पर श्रद्धांजलि के रूप में मनाया जाता है।
  • सर एम. विश्वेश्वरैया मैसूर में कृष्णाराज सागर बाँध के निर्माण के मुख्य अभियंता थे।
  • 1915 में जनता की भलाई में उनके योगदान के लिए किंग जॉर्ज पंचम द्वारा ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के नाइट कमांडर की उपाधि दी गयी थी।

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