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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020

2. ट्रांस फैट (Trans Fats)

3. iRAD ऐप

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में मीथेन

2. लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2020

3. असम के तेल कुओं में लगी आग तथा गैस रिसाव पर नियंत्रण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हिंदी दिवस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020


(Pesticides Management Bill)

चर्चा का कारण

विशेषज्ञों द्वारा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020 के संदर्भ में चेतावनी दी गयी है कि इसके कुछ प्रावधानों से किसानों की आजीविका को नुकसान पहुंचेगा। और इसलिए, उन्होंने इस विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श करने का आह्वान किया है तथा इसे एक चयन समिति के समक्ष रखने को कहा है।

विशेषज्ञों द्वारा रेखांकित किये गए प्रमुख प्रावधान:

  • इसमें, जो कीटनाशक भारत में उपयोग के लिए पंजीकृत नहीं हैं, उनके उत्पादन तथा निर्यात की अनुमति नहीं दी गयी है, भले ही ये कीटनाशक अन्य देशों में अनुमोदित हों।
  • यह विधेयक कीटनाशकों के सूत्रीकरण (formulations) के आयात को बढ़ाएगा और कृषि-रसायनों के निर्यात को नुकसान पहुंचाएगा। यह वर्ष 2018 में, भारत से घरेलू और स्वदेशी उद्योगों और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गठित अशोक दलवई समिति द्वारा पेश की गयी मांगों के खिलाफ है। समिति ने आयात में कमी और आयातित सूत्रीकरण पर निर्भरता की अनुशंसा की थी।
  • विधेयक में ‘पंजीकरण समिति’ (Registration CommitteeRC) को व्यक्तिपरक ढंग से किसी कीटनाशक के पंजीकरण की समीक्षा करने तथा इसके उपयोग को निलंबित करने, रद्द करने अथवा प्रतिबंध लगाने की शक्तियां दी गयी हैं। इसके लिए किसी वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं होगी।
  • इस विधेयक में, 1968 के पूर्ववर्ती अधिनियम के तहत पहले से पंजीकृत कीटनाशकों के पुन: पंजीकरण का भी प्रावधान किया गया है। इससे कीटनाशक उद्योग में अस्थिरता आएगी।

पृष्ठभूमि:

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020 (Pesticides Management Bill, 2020) को इसी वर्ष फरवरी माह में मंज़ूरी प्रदान की गयी थी। यह विधेयक, कीटनाशक अधिनियम, 1968 को प्रतिस्थापित करेगा

विधेयक के प्रमुख प्रावधान:

  1. विधेयक कीटनाशक व्यवसाय को नियंत्रित करेगा और किसानों को कृषि रसायनों के उपयोग से होने वाले नुकसान की भरपाई करेगा।
  2. कीटनाशक डेटा: इसके तहत किसानों के लिए कीटनाशकों की ताकत और कमजोरी, जोखिम और विकल्पों के बारे में सभी जानकारी प्रदान कराये जाने का प्रावधान किया गया है। सभी जानकारी डिजिटल प्रारूप में और सभी भाषाओं में खुले तौर पर उपलब्ध होगी।
  3. क्षतिपूर्ति: विधेयक में कीटनाशकों के घटिया या निम्न गुणवत्ता के कारण कोई नुकसान होने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। आवश्यकता होने पर, क्षतिपूर्ति के लिए एक केंद्रीय कोष बनाया जाएगा।
  4. जैविक कीटनाशक: विधेयक का उद्देश्य जैविक कीटनाशकों को बढ़ावा देना है।
  5. कीटनाशक निर्माताओं का पंजीकरण: विधेयक पारित होने के पश्चात सभी कीटनाशक निर्माताओं को नए अधिनियम के अंतर्गत अनिवार्य रूप से पंजीकरण होना होगा। निर्माताओं द्वारा कोई भ्रम या कोई धोखा न हो, इसके लिए कीटनाशकों के विज्ञापनों को विनियमित किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व में कीटनाशकों के शीर्ष 3 उत्पादक।
  2. इस वर्ग में भारत का निर्यात और आयात।
  3. भारत में कीटनाशकों की सार्वाधिक खपत करने वाली फसल।
  4. केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड के बारे में।

मेंस लिंक:

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

pesticide

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

ट्रांस फैट


(Trans Fats)

चर्चा का कारण

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान तथा कुछ अन्य देशों को ट्रांस-फैट के जोखिम संबंधी चेतवानी दी गयी है, तथा इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई गयी है।

WHO के अनुसार-

  • औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट जमाए गए वनस्पतिक वसा, जैसे मार्जरीन (कृत्रिम मक्खन) तथा घी (प्रशोधित मक्खन) में पाए जाते हैं, और इसके अलावा, स्नैक फूड, विभिन्न बेकरी उत्पादों, तले हुए या पके हुए खाद्य पदार्थों में भी में मौजूद होते हैं।
  • ट्रांस फैट, पूरे विश्व में हर साल हृदय रोगों के कारण होने वाली लगभग 500,000 मौतों के लिए जिम्मेदार है। इस यौगिक के कारण होने वाली कुल मौतों में से दो-तिहाई मौते 15 देशों में होती हैं।
  • ट्रांस फैट, दीर्घकाल तक खराब नहीं होते है तथा अन्य स्वस्थ विकल्पों की तुलना में सस्ते होतें है, इसके अतिरिक्त स्वाद तथा लागत को प्रबावित भी नहीं करते हैं। इस सब कारणों से उत्पादकों द्वारा इनका अधिक उपयोग किया जाता है।
  • अब तक, 58 देशों द्वारा वर्ष 2021 के अंत तक 2 बिलियन लोगों को इस हानिकारक यौगिक से बचाने के लिए कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की है। हालांकि, 100 से अधिक देशों में खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं से ट्रांस-फैट को हटाने हेतु कार्रवाई किये जाने की आवश्यकता है।
  • निम्न-आय या निम्न-मध्य-आय वाले देशों में से किसी भी देश के द्वारा अभी तक सर्वोत्तम अभ्यास नीतियों को लागू नहीं किया गया है। जबकि, मात्र सात उच्च-मध्यम-आय वाले देशों तथा 33 उच्च-आय वाले देशों द्वारा सर्वोत्तम अभ्यास नीतियों को लागू किया गया है।

ट्रांस फैट क्या होते हैं?

ट्रांस फैटी एसिड (Trans fatty acids TFAs) या ट्रांस-वसा सबसे हानिकारक प्रकार के वसा होते हैं जो हमारे शरीर पर किसी भी अन्य आहार की तुलना में अधिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

इस वसा को अधिकांशतः कृत्रिम रूप से निर्मित किया जाता है, हालंकि, कुछ मात्रा में यह प्राकृतिक रूप से भी निर्मित होती है। इस प्रकार, ये हमारे आहार में कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड / अथवा प्राकृतिक ट्रांस फैटी एसिड के रूप में उपस्थित हो सकती है।

  • शुद्ध घी/मक्खन की तरह दिखने वाले, कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड (TFAs) को हाइड्रोजन तथा तेल की अभिक्रिया कराने पर उत्पादित किया जाता है।
  • हमारे आहार में, कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड का प्रमुख स्रोत, आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल (partially hydrogenated vegetable oils- PHVO)/ वनस्पति / मार्जरीन होते हैं, जबकि, मांस तथा डेयरी उत्पादों में, कुछ मात्रा में यह प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।

हानिकारक प्रभाव

  • कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड (TFAs), संतृप्त वसा की तुलना में हृदय रोग का अधिक खतरा पैदा करते हैं। संतृप्त वसा (Saturated Fats) शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं, जबकि, TFA न केवल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं, बल्कि हमें हृदय रोग से बचाने में मदद करने वाले अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम करते हैं।
  • ट्रांस फैट का सेवन हृदय रोग और हृदयाघात के खतरों में वृद्धि करता है।
  • इसके प्रयोग से मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग, उपापचयी सिंड्रोम, इंसुलिन प्रतिरोध, बांझपन, कुछ प्रकार के कैंसर आदि का खतरा होता है, तथा यह गर्भ में भ्रूण के विकास के लिए भी नुकसान पहुंचा सकता है।

fats

इनके उपयोग में वृद्धि का कारण

कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड (TFAs) युक्त तेलों को लंबे समय तक संरक्षित किया जा सकता है तथा इनसे खाद्य पादर्थों को वांछित मिलावट और आकार का बनाया जा सकता है। ये आसानी से ‘शुद्ध घी’ का विकल्प दे सकते हैं। तुलनात्मक रूप से लागत में बहुत कम होने के कारण ये पदार्थ अधिक लाभ दिलाने में सहायक होते हैं।

स्वीकार्य सीमा:

  • WHO ने प्रति व्यक्ति द्वारा ग्रहण किये जाने वाली कुल कैलोरी मात्रा में 1% से कम कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड लिए जाने की अनुशंसा की है। साथ ही, वर्ष 2023 तक वैश्विक खाद्य आपूर्ति से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को खत्म करने का आह्वान किया है।
  • FSSAI ने खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट एसिड की सीमा को 2% तक सीमित करने तथा वर्ष 2022 तक खाद्य पदार्थों से ट्रांस वसा को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ट्रांस फैट क्या होते हैं?
  2. वे हानिकारक क्यों हैं?
  3. उनका उत्पादन कैसे और कहाँ किया जाता है?
  4. WHO और FSSAI द्वारा निर्धारित स्वीकार्य सीमा क्या है?
  5. REPLACE अभियान किससे संबंधित है?
  6. FSSAI के बारे में।

मेंस लिंक:

ट्रांस फैट क्या हैं? वे हानिकारक क्यों हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

iRAD ऐप


क्या यह है?

iRAD का पूरा नाम ‘एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस परियोजना’ (Integrated Road Accident Database Project- IRAD) है।

  • इसका मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
  • इस ऐप को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (IIT-M) द्वारा विकसित किया गया है तथा इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (National Informatics Centre) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।

क्रियाविधि

  1. IRAD मोबाइल एप्लिकेशन के द्वारा पुलिस कर्मी फ़ोटो और वीडियो के साथ किसी सड़क दुर्घटना का विवरण दर्ज करने में सक्षम होंगे, जिससे बाद में उस दुर्घटना की एक यूनिक आईडी निर्मित की जाएगी।
  2. इसके बाद, लोक निर्माण विभाग या स्थानीय निकाय के एक इंजीनियर को उसके मोबाइल डिवाइस पर अलर्ट प्राप्त होगा।
  3. इसके पश्चात वह दुर्घटना स्थल पर जाकर उसकी जांच करेगा, तथा सड़क की डिज़ाइन आदि आवश्यक विवरण दर्ज करेगा।
  4. इस प्रकार एकत्र किए गए डेटा का IIT-M में एक टीम द्वारा विश्लेषण किया जाएगा, जो सड़क डिजाइन में सुधारात्मक उपाय किए जाने के लिए आवश्यक सुझाव देगा।
  5. सड़क उपयोगकर्ता एक अलग मोबाइल एप्लिकेशन पर सड़क दुर्घटनाओं संबंधी डेटा अपलोड करने में भी सक्षम होंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऐप किसके द्वारा विकसित और लॉन्च की गयी है?
  2. राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के बारे में।
  3. यह किस प्रकार कार्य करती है?

मेंस लिंक:

IRAD App की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में मीथेन


संदर्भ:

हाल ही में, अगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ARI) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में अवस्थित मीथेन हाइड्रेट भण्डार जीव-जनित (बायोजेनिक) उत्पत्ति के हैं।

कृष्णा-गोदावरी बेसिन का महत्व:

  • KG बेसिन में पायी जाने वाले मीथेन हाइड्रेट्स में मौजूद मीथेन, सबसे कम अनुमान करने पर भी, दुनिया भर में उपलब्ध समूचे जीवाश्म ईंधन भंडार का दोगुना है।
  • शोधकर्ताओं ने KG बेसिन के हाइड्रेट्स में बायोजेनिक मीथेन उत्पादन की दर 031 मिलीमोल्स मीथेन/ gTOC प्रति दिन होने का अनुमान लगाया है, जिसके अनुसार, बेसिन में मीथेन का कुल भण्डार लगभग 0.56 से 7.68 ट्रिलियन क्यूबिक फीट (TCF) हो सकता है।

मीथेन क्या है?

मीथेन एक स्वच्छ एवं किफायती ईंधन है।

पृथ्वी पर, मीथेन (CH4) प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली गैस है। पृथ्वी पर मीथेन का अधिकांश उत्पादन जैविक प्रक्रियाओं द्वारा होता है – इसमें से मीथेन की कुछ मात्रा सूक्ष्मजीवों द्वारा तथा कुछ मात्रा सूक्ष्मजीवी जीवन की पूर्व पीढ़ियों द्वारा निर्मित, भूमिगत प्राकृतिक गैस के रूप में उत्पन्न होती है।

  • मीथेन-उत्पादक सूक्ष्मजीवों में से कई प्रजातियाँ, जानवरों, विशेष रूप से गायों के उपापचयी तंत्र में पायी जाती हैं। हालांकि, मीथेन का उत्पादन अजैविक प्रक्रियाओं (जिसमे जीवित जीवों को शामिल नहीं किया जाता है) द्वारा भी किया जा सकता है।
  • मीथेन, चट्टानों, जल स्रोतों तथा भूमिगत जलभर (aquifers) जैसी संरचनाओं में पायी जाती है, तथा विभिन्न अध्ययनों के निष्कर्ष के अनुसार, यह निम्न ताप पर कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच हुई रासायनिक प्रतिक्रियाओं के परिणाम स्वरूप निर्मित होती है।
  • पृथ्वी या मंगल के वायुमंडल में निर्मुक्त होने पर मीथेन अपेक्षाकृत अल्पजीवी होती है।
  • पृथ्वी पर मीथेन की सांद्रता 1,800 भाग प्रति मिलियन (ppm) से अधिक है।

मीथेन हाइड्रेट क्या है?

  • महासागरों में उच्च दाब तथा निम्न तापमान पर हाइड्रोजन-युक्त जल तथा मीथेन गैस के परस्पर संपर्क में आने पर मीथेन हाइड्रेट (Methane Hydrate) का निर्माण होता है।
  • अनुमानतः, एक घन मीटर मीथेन हाइड्रेट में 160-180 घन मीटर मीथेन उपस्थित होती है।

hydrocarbons

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मीथेन क्या है? इसका उत्पादन कैसे किया जाता है?
  2. मीथेन हाइड्रेट क्या है?
  3. कोल मीथेन बनाम शेल गैस।
  4. कोयलाकरण (coalification) क्या है?
  5. CBM निष्कर्षण के दौरान उत्सर्जित होने वाली ग्रीनहाउस गैसें?

मेंस लिंक:

कोल मीथेन क्या है? इसे कैसे निकाला जाता है और इसका क्या महत्व है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2020


(Living Planet Report)

संदर्भ:

हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन, ‘वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर’ (World Wide Fund for Nature) द्वारा लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2020 जारी की गयी है।

लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट, वर्ल्ड वाइड फंड (WWF) फॉर नेचर और जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन, द्वारा वन्यजीव आबादी पर प्रेक्षणों के आधार पर तैयार की जाती है तथा इस बर्ष, यह रिपोर्ट के द्विवार्षिकीय प्रकाशन का 13 वां संस्करण है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  1. वर्ष 1970 तथा 2016 के मध्य कशेरुकी प्रजातियों (Vertebrate Species) की आबादी में लगभग 68 प्रतिशत की गिरावट आई है। ’लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट’ में इस गिरावट की गणना हेतु ‘’लिविंग प्लेनेट इंडेक्स’ का उपयोग किया गया था।
  2. ताजे पानी के आवासों में, विशेष रूप से लैटिन अमेरिका और कैरिबियन सागर में, वन्यजीवों की आबादी में 84 प्रतिशत की गिरावट आई है।
  3. स्तनधारियों, पक्षियों, उभयचरों, सरीसृपों और मछलियों की वैश्विक आबादी में, पर्यावरणीय विनाश की वजह से, 50 सालों से भी कम समय में, औसतन दो-तिहाई आबादी की गिरावट परिलक्षित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप कोविड-19 जैसे पशुजन्य (जूनोटिक) रोग उभरकर फ़ैल रहे हैं।
  4. पृथ्वी की 75 प्रतिशत बर्फ-रहित भूमि में काफी बदलाव किया गया है, अधिकांश महासागर प्रदूषित हैं और 85 प्रतिशत से अधिक आर्द्रभूमि नष्ट हो गई हैं। इन सभी का कारण मानव गतिविधियां हैं।
  5. प्रति पांच वृक्षों में से एक वृक्ष विलुप्त होने की कगार पर है।

इस गिरावट के लिए उत्तरदायी कारक:

  1. भूमि-उपयोग परिवर्तन।
  2. वन्यजीवों का उपयोग और व्यापार।
  3. प्राकृतिक आवास क्षति।
  4. खाद्य उत्पादन प्रक्रियाओं के प्रयोजन से वनों की कटाई तथा निम्नीकरण।

रिपोर्ट में भारतीय परिदृश्य:

  • वैश्विक स्थलीय क्षेत्र का 2.4 प्रतिशत, वैश्विक जैव विविधता का लगभग आठ प्रतिशत और वैश्विक आबादी का लगभग 16 प्रतिशत भारत में है।
  • हालांकि, पिछले पांच दशकों के दौरान भारत में 12 प्रतिशत जंगली स्तनधारी, 19 प्रतिशत उभयचर और 3 प्रतिशत पक्षी लुप्त हो चुकी है।
  • भारत में प्रति व्यक्ति पारिस्थितिक पदचिह्न (Ecological Footprint), 1.6 वैश्विक हेक्टेयर / व्यक्ति (6 global hectares (gha) / person) से कम है। यह कई बड़े देशों की तुलना में काफी कम है, किंतु उच्च जनसंख्या आकार के कारण ‘सकल पदचिह्न’ काफी उच्च स्तर का बन गया है।

सुधार हेतु सुझाव:

  • खाद्य उत्पादन तथा व्यापार प्रक्रियाओं को अधिक दक्ष और पारिस्थितिक रूप से संवहनीय बनाना।
  • अपशिष्ट को कम करना और स्वस्थ तथा अधिक पर्यावरण अनुकूलित आहार को प्रोत्साहित करना।

निष्कर्ष:

रिपोर्ट बताती है, कि मानव द्वारा प्रकृति के विनाश का न केवल वन्यजीव आबादी पर, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। इसलिए, वर्तमान वैश्विक महामारी के दौरान,  दुनिया भर में जैव विविधता और वन्यजीव आबादी के नुकसान को रोकने और दशक के अंत तक इसकी भरपाई करने के लिए अभूतपूर्व और समन्वित वैश्विक कार्रवाई करने का महत्वपूर्ण समय है।

लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट क्या है?

  • लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट (Living Planet Report), वर्ल्ड वाइड फंड (WWF) द्वारा प्रति दो वर्ष में प्रकाशित की जाती है।
  • यह वैश्विक जैव विविधता तथा पृथ्वी ग्रह के स्वास्थ्य संबंधी प्रवृत्तियों का एक व्यापक अध्ययन है।
  • रिपोर्ट, लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (Living Planet Index LPI) के माध्यम से प्राकृतिक जगत की स्थिति का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करती है।

लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (LPI) क्या है?

यह समूचे विश्व के स्थलीय, मीठे पानी और समुद्री आवासों में कशेरुकी प्रजातियों (Vertebrate Species)  की आबादी में आने वाले रुझानों के आधार पर वैश्विक जैविक विविधता की स्थिति का संकेतक है।

पारिस्थितिकी पदचिह्न क्या होता है?

पारिस्थितिक पदचिह्न (Ecological Footprint), जैविक रूप से उत्पादक क्षेत्र होते है, जो लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली प्रत्येक वस्तु, ‘फल और सब्जियां, मछली, लकड़ी, फाइबर, जीवाश्म ईंधन के उपयोग से CO2 का अवशोषण, और इमारतों और सड़कों आदि के लिए स्थान उपलब्ध कराते है।

  • इसे वर्तमान में ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क (एक स्वतंत्र थिंक-टैंक) द्वारा विकसित किया जाता है। ग्रीनहाउस गैस (GHG) पदचिह्न और कार्बन पदचिह्न, पारिस्थितिक पदचिह्न के घटक होते है।
  • वर्ष 2014 के लिए मानव पारिस्थितिक पदचिह्न पृथ्वी ग्रह का 1.7 था। इसका तात्पर्य यह है कि पृथ्वी की पारिस्थितिकी प्रणालियों के नवीनीकरण की तुलना में मानव जनित मांग 1.7 गुना तीव्र थी।

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 इंस्टा फैक्ट्स:

नेशनल फुटप्रिंट्स अकाउंट्स (2014) के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति लगभग 0.45 gha की जैव-क्षमता है, जिसका अर्थ है कि यह ‘जैव-क्षमता ऋणी’ है अथवा ‘पारिस्थितिक रूप से घाटे वाला देश’ है, जिसमे, इसके प्राकृतिक संसाधनों पर 148 प्रतिशत अधिक आपूर्ति मांग भारित है।

https://www.insightsonindia.com/2018/11/04/rajya-sabha-tv-in-depth-biodiversity-report/.

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट किसके द्वारा जारी की जाती है?
  2. WWF इंटरनेशनल के बारे में।
  3. 2020 की रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं।
  4. पारिस्थितिकी पदचिह्न क्या होते है?
  5. ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क के बारे में।
  6. वर्ष 2014 के लिए मानव पारिस्थितिकी पदचिह्न।

मेंस लिंक:

लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट 2020 के प्रमुख निष्कर्षों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

असम के तेल कुओं में लगी आग तथा गैस रिसाव पर नियंत्रण


संदर्भ:

असम के तेल कुओं में पिछले तीन महीने से अधिक समय से लगी हुई आग पर मुख्य रूप से नियंत्रण कर लिया गया है, तथा गैस रिसाव और आग को पूरी तरह से नियंत्रित करने में अभी कुछ और सप्ताह का समय लगेगा।

पृष्ठभूमि:

कुछ माह पूर्व,  पूर्वी असम के तिनसुकिया जिले के बागजान में सरकारी तेल क्षेत्र के एक तेल के कुएं से प्राकृतिक गैस और तेल संघनित रिसाव होने लगा था। इसके पश्चात 9 जून को तेल एवं गैस रिसाव ने आग पकड़ ली थी।

इसे किस प्रकार नियंत्रित किया गया?

  • बागजान के कुएं नंबर पांच की प्राकृतिक गैस को आंशिक रूप से उत्पादन हेतु घुमा दिया गया और आंशिक रूप से जलते हुए दो कुण्डों की ओर मोड़ दी गयी।
  • इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विस्फोट (Blowouts) वाले कुओं के ऊपर दबाव को कम करना था, जिससे कुएं में लगी आग को बुझाने के लिए अगली कार्रवाई में सहायता मिलेगी।

विस्फोट (Blowouts) क्यों होते हैं?

  • कुएँ में दाब संतुलन के गडबडाने से ‘किक’ अथवा दाब में परिवर्तन होता है। यदि इन्हें तत्काल नियंत्रित नहीं किया जाता, तो ‘किक’ अचानक विस्फोट में बदल सकता है।
  • ब्लोआउट्स के पीछे कई संभावित कारण होते हैं, यथा; ध्यान की कमी, खराब कारीगरी, खराब रखरखाव, जीर्णता, विवर्तनिक कारक आदि।

नियंत्रित करना में कठिनाइयाँ

  • ब्लोआउट्स का नियंत्रण दो चीजों पर निर्भर करता है: जलाशय का आकार तथा दाब जिस पर गैस / तेल का प्रवाह होता है।
  • जलाशय को विशेष रूप से नियंत्रित करना मुश्किल होता है क्योंकि यह एक गैस कुआँ होता है जिसमे किसी भी समय आग पकड़ने का खतरा रहता है।

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान पर प्रभाव

  • यह स्थान डिब्रू-साइखोवा नेशनल पार्क से 900 मीटर की हवाई दूरी पर स्थित है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में लगभग वनस्पतियों की 36 प्रजातियाँ और जीवों की 400 प्रजातियाँ दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियाँ पायी जाती हैं।
  • डिब्रू सैखोवा नेशनल पार्क समेत संवेदनशील वेटलैंड है जहां लुप्तप्राय प्रजातियों के पक्षी प्रवास के लिए आते हैं।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान प्रवासी पक्षियों और जंगली घोड़ों [Feral Horse] के लिए जाना जाता है।
  • यह इको-सेंसिटिव ज़ोन है, जहां. गांव वालों का कहना है कि उन्हें गैस की महक आ रही है और इस उद्यान में कई जगहों पर तेल फैल चुका है.

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स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हिंदी दिवस

राष्ट्रीय हिंदी दिवस या हिंदी दिवस प्रति वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है।

उद्देश्य: यह दिन हिंदी भाषा और इसकी सांस्कृतिक विरासत और देश और विदेश के लोगों के बीच मूल्यों का उत्सव है।

राजभाषा पुरस्कार: हिंदी दिवस समारोह के भाग के रूप में, प्रति वर्ष  भारत के राष्ट्रपति भाषा के प्रति महत्वपूर्ण योगदान करने वाले लोगों के लिए राजभाषा पुरस्कार प्रदान करते हैं।

राष्ट्रीय हिंदी दिवस क्यों मनाते हैं?

भारत की संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर 1949 को अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था ।


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